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म्यूजिक कंसर्ट भीषण हादसे में एक नामचीन गायक अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है, 184 मौतें, कई घायल

सैंटो डोमिंगो डोमिनिकन गणराज्य की राजधानी सैंटो डोमिंगो में सोमवार की रात जोश और संगीत से भरी एक शाम देखते ही देखते मातम में बदल गई। शहर के प्रतिष्ठित जेट सेट नाइट क्लब में आयोजित म्यूजिक कंसर्ट के दौरान अचानक छत गिरने से अब तक 184 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस भीषण हादसे में एक नामचीन गायक अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है, जिनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घटना के बाद से पूरे देश में शोक की लहर है और राहत-बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। वर्षों पुरानी यह इमारत कभी थिएटर हुआ करती थी, जिसे बाद में क्लब में तब्दील किया गया था। लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी और पुराने ढांचे के चलते यह हादसा डोमिनिकन गणराज्य के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में दर्ज हो गया है। बचाव कार्य में जुटे सैकड़ों लोग घटनास्थल पर भारी मशीनें, खोजी कुत्ते और ड्रोन की मदद से बचाव अभियान जारी है। आपातकालीन सेवा के प्रमुख जुआन मैनुअल मेंडेज़ ने बताया कि अब भी लोग मलबे में फंसे हैं और उनकी चीखें सुनाई दे रही हैं। कई पीड़ितों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। एम्बुलेंस को इतनी बार चक्कर लगाने पड़े कि एक बार में दो-तीन घायलों को साथ ले जाया गया। गायब हैं मशहूर गायक और मंत्री का बेटा सोमवार की रात शो में मशहूर मेरेंग्यू गायक रूबी पेरेज़ परफॉर्म कर रहे थे। हादसे के बाद से उनका कोई पता नहीं चला है। पहले कहा गया कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया है लेकिन उनके भाई ने बताया कि वह अब भी मलबे में हैं। लोक निर्माण मंत्री के बेटे और उनकी पत्नी का भी कोई अता-पता नहीं है। उम्मीद की जा रही है कि वे सुरक्षित हों। राजनीति और खेल जगत को लगा झटका डोमिनिकन प्रांत की गवर्नर नेल्सी एम. क्रूज़ मार्टिनेज भी हादसे का शिकार हो गईं। राष्ट्रपति लुइस अबिनाडर ने बताया कि उन्होंने हादसे के कुछ मिनट बाद फोन किया था, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई। अमेरिका के मेजर लीग बेसबॉल के दो पूर्व खिलाड़ी ऑक्टेवियो डोटेल और टोनी ब्लैंको भी इस हादसे में मारे गए। बेसबॉल कमिश्नर ने दुख जताते हुए कहा कि खेल और डोमिनिकन समाज के बीच एक गहरा रिश्ता है, और यह एक बहुत बड़ी क्षति है। परिवारवालों की उम्मीदें और आंसू हादसे के बाद क्लब के बाहर चिलचिलाती धूप में दर्जनों लोग अपने प्रियजनों की तलाश में खड़े दिखे। किसी का भाई लापता था, किसी का पति। घटनास्थल पर चीख-पुकार और बेबसी का माहौल था। एक महिला ने अपने भाई की मौत की खबर सुनकर चीखते हुए कहा, “मेरे प्यारे भाई!” वहीं येहेरिस वेंचुरा नाम की महिला अपने पति की तलाश में बेसुध नजर आईं। 50 साल पुरानी इमारत बनी मौत का जाल यह इमारत पहले एक सिनेमा हॉल थी जिसे बाद में नाइट क्लब में बदल दिया गया था। बताया जा रहा है कि इस इमारत में कुछ साल पहले आग भी लगी थी। डोमिनिकन एसोसिएशन ऑफ इंजीनियर्स के प्रमुख कार्लोस मेंडोज़ा डियाज़ ने कहा कि हो सकता है कि इन सभी घटनाओं और खराब रखरखाव की वजह से यह हादसा हुआ हो। अधिकारियों ने कहा है कि फिलहाल वे बचाव कार्य पर ध्यान दे रहे हैं। हादसे के कारणों की जांच बाद में की जाएगी। राष्ट्रपति और अन्य मंत्री लगातार घटनास्थल पर नजर बनाए हुए हैं। राहत और बचाव कार्यों को तेज किया गया है ताकि अधिक से अधिक लोगों को बचाया जा सके।

कौन हैं जस्टिस संजय कुमार, जिन्होंने कहा- पीड़िता खुद रेप की जिम्मेदार, आरोपी को दी बेल

नई दिल्ली इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अभी हाल ही में पीजी की एक छात्रा से बलात्कार करने के आरोपी शख्स को जमानत देते हुए कहा था कि पीड़िता खुद ही उस घटना के लिए जिम्मेदार है, क्योंकि उसी ने मुसीबत को न्योता दिया था। इस मामले की सुनवाई करने वाले और आरोपी को बेल देने वाले जज जस्टिस संजय कुमार सिंह ने कहा कि पीड़िता ने शराब के नशे में धुत्त होकर आरोपी के घर जाने के लिए सहमति देकर खुद ही मुसीबत को बुलाया था। पिछले महीने दिए अपने फैसले में जस्टिस सिंह ने कहा कि महिला एमए की छात्रा है और इसलिए वह अपने हरकत की नैतिकता और महत्व को समझने में सक्षम थी। इसलिए कहा जा सकता है कि उसने खुद मुसीबत को न्योता दिया था। गुरुवार को जब यह खबर आई, तो राजनेताओं समेत कई लोगों ने जस्टिस संजय कुमार सिंह के फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। उनके इस फैसले की हर तरफ आलोचना हो रही है। दरअसल, यह फैसला न्यायिक दृष्टिकोण और लैंगिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है। कौन हैं जस्टिस संजय कुमार सिंह इलाहाबाद हाई कोर्ट की वेबसाइट पर दिए गए विवरण के अनुसार, जस्टिस संजय कुमार सिंह का जन्म 21 जनवरी, 1969 को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में हुआ था। उन्होंने 1988 में इविंग क्रिश्चियन कॉलेज, इलाहाबाद (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) से विज्ञान में स्नातक की उपाधि हासिल की है। इसके बाद उन्होंने कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध दयानंद कॉलेज ऑफ लॉ, कानपुर से 1992 में कानून की डिग्री की। उन्होंने 9 मई, 1993 को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबे समय तक वकालत की। कब बने हाई कोर्ट में जज जस्टिस सिंह ने अपने पिता स्वर्गीय शीतला प्रसाद सिंह के मार्गदर्शन में वकालत की बारीकियां सीखीं। उनके पिता इलाहाबाद हाई कोर्ट में आपराधिक मामलों के नामी वकील थे। वह सरकारी अधिवक्ता भी रह चुके थे। अपने करीब ढाई दशक के वकालत पेशे के दौरान सिंह ने सिविल, सर्विस, शिक्षा और विविध रिट मामलों में अच्छी लॉ प्रैक्टिस की। उन्हें 22 नवंबर, 2018 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। फिर दो साल बाद 20 नवंबर, 2020 को उन्हें वहीं यानी इलाहाबाद हाई कोर्ट में ही स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई। हाई कोर्ट के फैसले पर पहले भी विवाद यह पहला मामला नहीं है, जब इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर विवाद हुआ है। इससे पहले पिछले महीने 26 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें कहा गया था कि महिला के स्तनों को पकड़ना और उसके पायजामे की डोरी खींचना बलात्कार का प्रयास नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह आदेश पूरी तरह से असंवेदनशीलता और अमानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने 17 मार्च को अपने फैसले में ये टिप्पणियां की थीं। उस समय भी जस्टिस मिश्रा की खूब आलोचना हुई थी।

इजरायली सेना लेगी ऐक्शन, उन लोगो पर जिन्होंने एक पत्र लिखा था कि सरकार यह जंग राजनीतिक फायदे के लिए लड़ रही है

तेल अवीव इजरायल की सेना का कहना है कि वह ऐसे वायु सैनिकों को सेवा से बाहर करेगी, जिन्होंने गाजा पर हमले का विरोध किया था। शुक्रवार को इजरायली सेना ने कहा कि यह ऐक्शन उन लोगों पर लिया जाएगा, जिन्होंने एक पत्र लिखा था और कहा था कि सरकार यह जंग राजनीतिक फायदे के लिए लड़ रही है। उसका मकसद बंधकों को घर वापस लाना नहीं है। इस लेटर पर समर्थन के तौर पर बड़ी संख्या में सैनिकों ने साइन भी किए थे। एक सैन्य अधिकारी ने कहा कि यह स्वीकार नहीं किया जाएगा कि कोई सेना के भीतर ही मतभेद की स्थिति पैदा करे। यह ऐसा समय है, जब सभी को मिलकर लड़ना चाहिए। ऐसा न करके उलटे सवाल उठाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसा करने से सैनिकों का मनोबल भी गिरता है। सेना ने कहा कि हमने फैसला लिया है कि ऐसा कोई भी आरक्षित सैनिक अब सर्विस में नहीं रहेगा, जिसने लेटर पर साइन किए हों। हालांकि इजरायल की सेना ने यह नहीं बताया है कि उसके ऐक्शन के कितने लोग शिकार होंगे। लेकिन अब तक मिली जानकारी के अनुसार इजरायली सेना में शामिल 1000 एयरफोर्स रिजर्व सैनिकों और रिटायर जवानों ने ऐसे लेटर पर साइन किए थे। यह लेटर इजरायली मीडिया में गुरुवार को प्रकाशित हुआ था। इस लेटर में मांग की गई थी कि हमास के कैद में जो बंधक हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाए। भले ही इसके एवज में जंग को समाप्त ही क्यों न करना पड़े। यह लेटर ऐसे समय पर लिखा गया, जब इजरायल ने गाजा पर फिर से हमले तेज किए हैं। हमास को दबाव में लाने के लिए इजरायल ने गाजा पट्टी के दो रास्तों को ब्लॉक तक कर दिया है, जिनके जरिए मदद पहुंचती थी। इजरायल को लगता है कि इस दबाव के चलते हमास झुकेगा और बंधकों की रिहाई को लेकर कोई समझौता होगा। ऐसे में इस बीच सेना के भीतर से ही विरोध की आवाज ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं। एक तरफ इससे यह संकेत गया है कि जंग को लेकर इजरायली सेना ही एकजुट नहीं है। इसके अलावा बेंजामिन नेतन्याहू सरकार पर भी सवाल खड़े करने की कोशिश हुई है। इजरायली सेना के अनुसार अब तक 59 लोग हमास के बंधक हैं और इनमें से करीब आधे लोगों की मौत हो चुकी है। बता दें कि इजरायल की नाकेबंदी के चलते बीते कई सप्ताह से गाजा तक राशन, दवा समेत कई जरूरी चीजों की पहुंच तक मुश्किल हो गई है। इजरायल ने फिलहाल गाजा के एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमा रखा है और वहां एक नया सिक्योरिटी कॉरिडोर भी स्थापित किया है। जंग के खिलाफ लेटर लिखने वाले सैनिकों ने युद्ध से हटने की बात नहीं कही है, लेकिन उन्होंने विरोध जरूर किया है। लेटर लिखने वाले लोगों में शामिल एक पूर्व सैनिक गाय पोरन ने कहा, ‘यह एकदम अतार्किक बात है कि हम जंग लड़ते रहें। इससे हम बंधकों की जिंदगी खतरे में डाल रहे हैं। इसके अलावा अपने सैनिकों पर भी खतरा है और गाजा के निर्दोष लोग भी इसमें मारे जा रहे हैं। इस जंग का कोई विकल्प भी हो सकता है, जिस पर हमें विचार करना चाहिए।’ ऐसी ही भाषा उस लेटर की भी थी, जिसे सैनिकों ने लिखा था।

चीन ने अमेरिकी सामानों के आयात पर टैरिफ रेट को 84% से बढ़ाकर 125% कर दिया, दिया करारा जवाब

वाशिंगटन अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर चरम पर पहुंचता दिख रहा है। चीन ने अमेरिकी सामानों के आयात पर टैरिफ रेट को 84% से बढ़ाकर 125% कर दिया है, जो शनिवार से लागू होगा। इसके साथ ही चीन ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका अब और टैरिफ बढ़ाता है तो वह जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा क्योंकि ट्रंप प्रशासन की नीतियां अब मजाक बन चुकी हैं। चीन के वित्त मंत्रालय ने यह फैसला तब लिया है, जब वाइट हाउस ने साफ किया है कि उसने चीनी सामानों पर टैरिफ को बढ़ाकर 145% कर दिया है। चीन ने कहा कि इन परिस्थितियों में अमेरिका के साथ व्यापार करना अब व्यावहारिक नहीं रह गया है। इससे पहले बुधवार को चीन ने अमेरिका के सामान पर 84% टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। चीन-अमेरिका में वार-पलटवार अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ वॉर इस महीने के शुरू से ही जारी है। पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी सामानों पर 34% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो 9 अप्रैल से लागू होने वाला था। इसके लागू होने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने अचानक इसमें और बढ़ोतरी की घोषणा कर दी। इसका जवाब चीन ने तुरंत दिया। बुधवार को बीजिंग ने अमेरिकी सामानों पर टैरिफ को 50% तक बढ़ाकर 84% कर दिया। इसके अगले ही दिन गुरुवार को अमेरिका ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए चीन से आने वाले सामानों पर टैरिफ बढ़ाकर 145% कर दिया। साथ ही अन्य देशों को 90 दिनों की अस्थायी छूट देते हुए उनके लिए टैरिफ को घटाकर समान रूप से 10% कर दिया। चीन अब जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा वित्त मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी बयान में कहा गया, ‘वर्तमान टैरिफ रेट पर अमेरिकी सामान अब चीन में बाजार योग्य नहीं रह गए हैं। यदि अमेरिका चीनी निर्यात पर और टैरिफ बढ़ाता है, तो चीन ऐसे कदमों को नजरअंदाज करेगा।’ चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने एक अलग बयान में कहा कि वॉशिंगटन का बार-बार अत्यधिक टैरिफ का इस्तेमाल अब केवल ‘संख्या का खेल’ बनकर रह गया है, जो आर्थिक रूप से अर्थहीन है और अमेरिका की दबाव और धमकी की नीति को उजागर करता है। मंत्रालय ने कहा कि यह एक मजाक बन चुका है। हालांकि चीन ने यह भी चेतावनी दी कि यदि अमेरिका उसके अधिकारों और हितों का उल्लंघन करता रहा तो वह मजबूती से पलटवार करेगा और अंत तक लड़ेगा। चीन ने यह भी कहा कि टैरिफ से होने वाले नुकसान की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका को लेनी होगी। फिल्मों और स्टडी पर भी तनाव अब यह विवाद केवल सामानों पर ही नहीं रुका है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव सर्विसेज और लोगों के आपसी संबंधों तक पहुंच गया है। गुरुवार को चीन ने अमेरिकी फिल्मों की संख्या में कटौती की घोषणा की, जिससे संकेत मिला कि बदले की कार्रवाई अब आगे बढ़ रही है। बुधवार को चीन ने अपने नागरिकों को अमेरिका की यात्रा को लेकर सतर्क किया और छात्रों को कुछ अमेरिकी राज्योंमें पढ़ाई को लेकर जोखिम की चेतावनी दी। दोनों देशों में 700 अरब डॉलर का व्यापार 2025 से पहले, दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे पर लगाए गए आयात टैरिफ औसतन 20% से कम थे, लेकिन अब हालात काफी बदल चुके हैं। हर साल अमेरिका और चीन के बीच करीब 700 अरब डॉलर का व्यापार होता है। अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो बढ़े हुए टैरिफ का असर दोनों देशों के उपभोक्ताओं और कंपनियों पर सीधे तौर पर पड़ेगा। उन्हें अपनी सप्लाई चेन में बदलाव करना पड़ेगा ताकि टैरिफ से बचा जा सके। पिछले साल चीन से अमेरिका के तीन सबसे बड़े आयात स्मार्टफोन, लैपटॉप और लिथियम-आयन बैटरियां थीं। वहीं, अमेरिका से चीन को सबसे मूल्यवान निर्यात लिक्विड पेट्रोलियम गैस, कच्चा तेल, सोयाबीन, गैस टर्बाइन और सेमीकंडक्टर बनाने की मशीनें थीं।

वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार के लिए नामांकन 31 जुलाई तक करे आवेदन

नई दिल्ली पद्म पुरस्कार 2026 के लिए नामांकन की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हो गई है है। अगले साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी। बता दें कि पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। इस तिथि तक पद्म पुरस्कार के लिए नामांकन किया जा सकता है। पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन और सिफारिशें केवल राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर ऑनलाइन प्राप्त की जाएंगी, जिसका पता- awards.gov.in है। इस वेबसाइट पर जाकर पद्म पुरस्कारों के लिए आवेदन किए जा सकते हैं। आइये जानते हैं पद्म पुरस्कार 2026 के लिए नामांकन से जुड़ी हर जानकारी। कैसे करें नामांकन?     सबसे पहले राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के होम पेज पर, ‘चल रहे पुरस्कारों के लिए नामांकन’ शीर्षक के अंतर्गत, पद्म पुरस्कार 2026 पर क्लिक करें।     इसके बाद ‘नामांकित करें/अभी आवेदन करें’ बटन पर क्लिक करें।     अब पुरस्कार श्रेणी का चयन करें।     फिर उस क्षेत्र (उत्कृष्टता का क्षेत्र) का चयन करें जिसमें व्यक्ति नामांकन करना चाहता है।     उप-क्षेत्र (यदि कोई हो) लिखें।     यदि व्यक्ति स्वयं को नामांकित करना चाहता है, तो ‘क्या आप स्वयं को नामांकित करना चाहते हैं’ विकल्प चुनें।     यदि व्यक्ति किसी और को नामांकित करना चाहता है, तो ‘क्या आप किसी और को नामांकित करना चाहते हैं’ विकल्प चुनें।     जिस व्यक्ति को आप नामांकित कर रहे हैं उसका विवरण दर्ज करें।     यदि नामांकित व्यक्ति की जन्मतिथि उपलब्ध नहीं है तो ‘जन्मतिथि उपलब्ध नहीं है’ विकल्प चुनें और फिर ‘आयु’ बताएं।     यदि नामांकित व्यक्ति जीवित नहीं है, तो ‘यदि नामांकित व्यक्ति मरणोपरांत है (जीवित नहीं है), तो यहां क्लिक करें’ विकल्प चुनें और ‘मृत्यु का वर्ष’ चुनें।     इसके बाद आगे की जानकारी दर्ज करें। नामांकन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ‘सेव एंड नेक्स्ट’ पर क्लिक करें।     जिस व्यक्ति को आप नामांकित कर रहे हैं उसका विवरण दर्ज करें।     यदि व्यक्ति को पहले पद्म पुरस्कार नहीं मिला है तो कृपया ‘नहीं’ विकल्प चुनें।     यदि व्यक्ति को पहले पद्म पुरस्कार मिल चुका है तो कृपया ‘हां’ विकल्प चुनें और विवरण दर्ज करें।     यदि व्यक्ति ने पहले कोई अन्य पुरस्कार प्राप्त किया है, तो ‘हां’ चुनें और विवरण दर्ज करें।     जिस व्यक्ति को आप नामांकित कर रहे हैं उसका फोटोग्राफ तथा अन्य सहायक दस्तावेज संलग्न करें।     यदि आप आवेदन पत्र का पूर्वावलोकन करना चाहते हैं, तो ‘पूर्वावलोकन’ पर क्लिक करें, और यदि आप फॉर्म को संपादित करना चाहते हैं, तो ‘आवेदन संपादित करें’ पर क्लिक करें।     घोषणा बॉक्स पर क्लिक करें और फिर ‘अंतिम सबमिट’ बटन पर क्लिक करें। व्यक्ति विशेष का रजिस्ट्रेशन कैसे करें ?     सबसे पहले आपको ऑफशियल वेबसाइट पर जाना होगा।     इसके बाद होमपेज पर रिस्ट्रेशन या लॉगिन बटन पर क्लिक करें।     इसके बाद ‘व्यक्तिगत’ (Individuals) बटन पर क्लिक करें और नामांकित व्यक्ति का टाइप चुनें (जैसे नागरिक, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, एनआरआई, विदेशी, आदि)।     इसके बाद अपना पहला नाम, अंतिम नाम, आधार संख्या और अन्य मांगी गई डिटेल्स को भर दें।     पहचान का तरीका चुनें, जिसमें आधार वेरिफिकेशन, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि शामिल हैं।     फिर अपना आधार नंबर, पासपोर्ट, पैनकार्ड नंबर और अन्य डिटेल्स दें।     इसके बाद वेरिफिकेशन के प्रोसेस को पूरा करें और मोबाइल पर मिले ओटीपी को सबमिट करें।     अब एक नया पासवर्ड सेट करें और कैप्चा को दर्ज करें।     फिर सेव बटन पर क्लिक करें।     पंजीकरण होने के बाद लॉगिन आईडी मोबाइल नंबर पर मिल जाएगी।     इसके बाद लॉगिन और Nominate यानी नामांकित करें। किसी संगठन या संस्था के लिए रजिस्ट्रेशन     इसके लिए भी पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।     इसके बाद होमपेज पर रजिस्ट्रेशन या लॉगिन के बटन पर जाएं।     फिर संगठन (Organisation) के बटन पर क्लिक करें।     इसके बाद संस्था के प्रकार का सिलेक्शन करें।     अब संगठन का नाम, अधिकृत व्यक्ति का नाम और अन्य डिटेल्स भरें।     इसके बाद पहचान का तरीका चुनें, जिसमें आधार प्रमाणीकरण, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि शामिल है।     फिर मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी भरकर सबमिट करें।     अब आपको मोबाइल पर एक OTP मिलेगा, जिसे दर्ज कर अपने वेरिफिकेशन को पूरा करें।     इसके बाद नया पासवर्ड सेट करें और कैप्चा भरकर सबमिट करें।     अगले स्टेप में सेव पर क्लिक करें।     इसके बाद बाद लॉगिन आईडी लिंक दिए गए मोबाइल नंबर पर भेज दिया जाएगा।     अब लॉगिन करें और Nominate यानी नामांकित करें। यहां बता दें कि पद्म पुरस्कार तीन प्रकार के होते हैं। इनमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री शामिल हैं। ये पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से हैं।

कौन हैं जुगविंदर सिंह बराड़, जिन्होंने अमेरिका को समंदर में खूब दिया चकमा, अब लगा बैन

नई दिल्ली अमेरिका ने भारतीय शख्स जुगविंदर सिंह बराड़ और उनकी 4 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है। यह बैन ईरान के तेल को ट्रांसपोर्ट करने के आरोपों पर लगा है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि जुगविंदर सिंह बराड़ कई जहाजों के मालिक हैं और उनके जरिए उन्होंने ईरान के तेल का एक्सपोर्ट और इंपोर्ट किया है। ईरान के साथ कारोबार पर अमेरिका ने बैन लगा रखा है। जुगविंदर सिंह बराड़ ने इसके बाद भी ईरान के साथ डील और कारोबार में साथ रहे, इसलिए उन पर भी ऐक्शन लिया गया है। अमेरिका की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दो यूएई और भारत स्थित कंपनियों पर बैन लगा है, जो बराड़ के जहाजों का संचालन करती हैं। इन जहाजों से ईरान के तेल को दूसरे देशों में पहुंचाया गया। अमेरिकी बयान में कहा गया है कि बराड़ के जहाज हाई रिस्क शिप टू शिप ट्रांसफर में शामिल थे। इन जहाजों का संचालन ईरान, इराक, यूएई और ओमान की खाड़ी के बीच में हुआ है। अमेरिका का कहना है कि इन जहाजों से तेल उन ठिकानों तक पहुंचाया गया, जहां से इंटरनेशनल मार्केट में भेजा जा सके। इस तरह इन जहाजों ने ईरानी तेल के लिए फैसिलिटी का काम किया है और प्रतिबंध का यह सीधे तौर पर उल्लंघन है। अमेरिकी मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान का काम करने का यही मॉडल है। वह अकसर अवैध जहाजों और बराड़ जैसे ब्रोकरों के माध्यम से डील करता रहा है। जुगविंदर सिंह बराड़ यूएई में रहते हैं। उनकी दो कंपनिया हैं- प्राइम टैंकर्स और ग्लोरी इंटरनेशनल। वह करीब 30 जहाजनुमा पेट्रोलियम टैंकर चलाते हैं। इनमें से ज्यादातर छोटे टैंकर हैं, जो बड़े टैंकरों से आए तेल को पहुंचाते हैं। समुद्र से दूसरे ठिकानों पर तेल इन टैंकरों के जरिए पहुंचाया जाता है। इन छोटे जहाजों के माध्यम से वह ईरान के तेल को लोड करते थे और शैडो फ्लीट की तरह काम करते थे। अमेरिका का कहना है कि यह एक तरह से तेल तस्करी का भी मामला है। यह प्रक्रिया ऐसी थी कि किसी एक बड़े टैंकर को भरने के लिए कई छोटे टैंकरों का इस्तेमाल किया जाता था। अमेरिका का दावा है कि जुगविंदर सिंह बराड़ ने ईरान समर्थित हथियारबंद संगठन हूती के साथ भी मिलकर काम किया है। हूती के साथ भी मिलकर काम करने का है आरोप बराड़ पर आरोप है कि उन्होंने हूती के फाइनेंशियल अधिकारी सैद-अल-जमाल की मदद से काम किया है। जमाल की मदद से ही जुगविंदर सिंह बराड़ ने छोटे-छोटे जहाजों की मदद से माल ढोया। अमेरिका का दावा है कि बराड़ के पास ‘नादिया’ नाम का एक जहाज है। इसकी मदद से तेल की तस्करी की गई और यह पूरा काम ईरान की सेना के आदेश पर होता था। अमेरिका का कहना है कि बराड़ के छोटे जहाजों की खासियत यह है कि उन्हें ट्रैक करना आसान नहीं होता। वे ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के तहत पकड़ में नहीं आते। इनका संचालन बराड़ ने यूएई, ईरान, इराक और ओमान की खाड़ी में किया।

तहव्वुर राणा के पैरों में बेड़ियां, कमर में जंजीर बांधकर भारत कौ सौंपा गया ! सामने आई प्रत्यर्पण की तस्वीर

नई दिल्ली मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा आखिरकार अमेरिका से भारत लाया जा चुका है, लेकिन जिस तरह उसकी तस्वीर सामने आई है, उसने सबका ध्यान खींच लिया है. प्रत्यर्पण की तस्वीर में राणा के पैरों में बेड़ियां, कमर में जंजीर बंधी हुई दिखाई दे रही है. इसके साथ ही अमेरिकी मार्शल प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को पूरा करते हुए नजर आ रहे हैं, वहीं  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधिकारी भी वहां मौजूद हैं. ये तस्वीर केवल एक आतंकी के ट्रांसफर का नहीं, बल्कि भारत की उस लंबी कानूनी और कूटनीतिक लड़ाई का नतीजा है जो सालों से जारी है. अमेरिका ने बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच राणा को भारत को सौंपा. अमेरिकी न्याय विभागकैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में अमेरिकी मार्शलों ने पाकिस्तानी नागरिक और कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा की हिरासत भारत के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों को सौंप दी। तहव्वुर राणा अब 18 दिनों के लिए एनआईए की हिरासत में है, इस दौरान एजेंसी उससे विस्तृत पूछताछ करेगी, ताकि 2008 के हमलों के पीछे की पूरी साजिश का पता लगाया जा सके। इन हमलों में कुल 166 लोग मारे गए थे और 238 से अधिक घायल हुए थे। भारत लाते ही कराया गया मेडिकल चेकअप भारत के गुनाहगार तहव्वुर को विशेष सुरक्षा के बीच अमेरिकी से दिल्ली लाया गया था। उसे भारत लाने के लिए विशेष टीम गई थी, जिसने दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर प्लेन के लैंड होते ही तहव्वुर को NIA के हवाले कर दिया। एनआईए ने सबसे पहले तहव्वुर का मेडिकल चेकअपल कराया। इसके बाद यहां से सीधे उसे NIA कोर्ट ले जाया गया। NIA कोर्ट में रात 2 बजे के बाद तक सुनवाई चली। एनआईए ने राणा की कस्टडी मांगी और अदालत ने 18 दिनों के लिए जांच एजेंसी को उसकी कस्टडी दे दी। भारत न आने के लिए राणा ने दी थी ये दलील हालांकि, तहव्वुर राणा किसी भी कीमत पर अमेरिका से भारत नहीं आना चाहता था। उसने 13 फरवरी को दायर अपनी याचिका के गुण-दोष के आधार पर मुकदमेबाजी (सभी अपीलों की समाप्ति सहित) तक अपने प्रत्यर्पण और भारत के समक्ष आत्मसमर्पण पर रोक लगाने की मांग कर रहा था। उसने तर्क दिया था कि भारत को उसका प्रत्यर्पण अमेरिकी कानून और संयुक्त राष्ट्र के यातना विरोधी कन्वेंशन का उल्लंघन है, क्योंकि उसे भारत में यातना का खतरा है। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया था। भारत ने 7 मार्च को कहा था कि वह राणा के प्रत्यर्पण के लिए आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने वाशिंगटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के बाद राणा के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। भारत को बड़ी सफलता भारत सालों से राणा के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा था. राणा ने इसे रोकने के लिए अमेरिका की हर अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक से उसे राहत नहीं मिली. 9 अप्रैल को अमेरिकी मार्शल्स ने लॉस एंजेलिस एयरपोर्ट पर उसे भारत के हवाले किया

केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2025-26 में 954 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत वहन करेगी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत देश में सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्र-छात्राओं को गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इसमें उपयोग होने वाली सामग्री लागत में 9.50 फीसदी की वृद्धि की है। इस वृद्धि के कारण केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 954 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत वहन करेगी। इससे विद्यार्थियों को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन मिलता रहेगा। शिक्षा मंत्रालय ने इसके बारे में एक बयान जारी बताया। यह नई दरें 1 मई से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होंगी। पीएम पोषण योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसके अंतर्गत 10.36 लाख सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय आते हैं। यहां बाल वाटिका और कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत 11.20 करोड़ विद्यार्थियों को दिन में एक बार गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। इस योजना का उद्देश्य पोषण सहायता प्रदान करना और विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना है। शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि पीएम पोषण योजना के अंतर्गत भोजन बनाने के लिए दाल, सब्जियां, तेल, मसाले और ईंधन आदि की खरीद के लिए ‘सामग्री लागत’ प्रदान की जाती है। सामग्री लागत के अलावा, भारत सरकार भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से लगभग 26 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न भी उपलब्ध कराती है। भारत सरकार खाद्यान्न की 100 प्रतिशत लागत वहन करती है। इसमें प्रति वर्ष लगभग 9,000 करोड़ रुपये का अनुदान और भारतीय खाद्य निगम डिपो से विद्यालयों तक खाद्यान्न की 100 प्रतिशत परिवहन लागत शामिल है। योजना के अंतर्गत खाद्यान्न लागत सहित सभी घटकों को जोड़ने के बाद प्रति भोजन लागत बाल वाटिका और प्राथमिक कक्षाओं के लिए लगभग 12.13 रुपये और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए 17.62 रुपये आती है। केंद्रीय श्रम मंत्रालय का श्रम ब्यूरो, पीएम पोषण के अंतर्गत इन वस्तुओं के लिए मुद्रास्फीति के आंकड़े प्रदान करता है। इन आंकड़ों के अनुसार पीएम पोषण के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) तैयार किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र के लिए यह सूचकांक, देश के 20 राज्यों में फैले 600 गांवों के नमूने से निरंतर मासिक मूल्य एकत्र करने के आधार पर जारी किया जाता है। ये सामग्री लागत दरें न्यूनतम अनिवार्य दरें हैं। वहीं राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसमें अपने निर्धारित हिस्से से अधिक योगदान करने के लिए स्वतंत्र हैं।  

राजनाथ सिंह ने कहा-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती हुई तकनीकें प्रतिरोध और युद्ध में क्रांति ला रही हैं

नई दिल्ली यूक्रेन-रूस संघर्ष में ड्रोन एक नए सैन्य हथियार के रूप में उभरे हैं। सैनिकों और उपकरणों की अधिकांश हानि पारंपरिक तोपखाने या बख्तरबंद वाहनों के कारण नहीं, बल्कि ड्रोन के कारण हुई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यह बात कही। वह वेलिंगटन में डिफेंस सर्विसेस स्टॉफ कॉलेज (डीएसएससी) में भारत और मित्र देशों के सशस्त्र बल अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। राजनाथ सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती हुई तकनीकें प्रतिरोध और युद्ध में क्रांति ला रही हैं। युद्ध के मैदानों में तकनीकी नवाचार की शक्ति विस्मयकारी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य के लिए स्वदेशी रक्षा इकोसिस्टम का निर्माण एक रणनीतिक आवश्यकता है। इसी तरह ‘लो अर्थ ऑर्बिट’ में अंतरिक्ष क्षमताएं सैन्य इंटेलिजेंस को नए स्तर पर ले जा रही हैं। यह निरंतर निगरानी, स्थिति निर्धारण, लक्ष्य निर्धारण और संचार को बदल रही हैं, इस प्रकार युद्ध को एक नए उच्च स्तर पर ले जा रही हैं। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया ग्रे जोन और हाइब्रिड युद्ध के युग में है। जहां साइबर हमले, दुष्प्रचार अभियान और आर्थिक युद्ध ऐसे साधन बन गए हैं, जिनसे एक भी गोली चलाए बिना राजनीतिक-सैन्य लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सीमाओं पर लगातार खतरों का सामना करना पड़ रहा है। पड़ोसी देशों से उत्पन्न छद्म युद्ध और आतंकवाद की चुनौती से ये और भी जटिल हो गए हैं। राजनाथ सिंह ने प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन जैसे गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों के अलावा पश्चिम एशिया में संघर्ष और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनावों के समग्र सुरक्षा परिदृश्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में भी बात की। उन्होंने भविष्य के युद्धों के लिए सक्षम और प्रासंगिक बने रहने के लिए सशस्त्र बलों के परिवर्तन को सख्ती से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दृष्टिकोण दो आधारभूत स्तंभों – सुरक्षित भारत और सशक्त भारत पर मजबूती से टिका हुआ है। रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भरता के माध्यम से सशस्त्र बलों के विकास और आधुनिकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “चल रहे संघर्षों के सबक हमें सिखाते हैं कि एक सुदृढ़, स्वदेशी और भविष्य के लिए तैयार रक्षा प्रौद्योगिकी और विनिर्माण इकोसिस्टम का निर्माण एक विकल्प नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता है। कम लागत वाले उच्च तकनीक समाधान विकसित करने और सशस्त्र बलों की युद्ध क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है। हमारी सेनाओं को न केवल तकनीकी परिवर्तनों के साथ समन्वय रखना चाहिए, बल्कि इसका नेतृत्व भी करना चाहिए।” उन्होंने कहा, “देशों और लोगों के बीच बढ़ती संपर्कता और निर्भरता का अर्थ है कि चुनौतियों का सामना व्यक्तिगत रूप से करने की तुलना में एक साथ मिलकर करना बेहतर है। पारस्परिक हित और तालमेल हमें उप-क्षेत्रीय, क्षेत्रीय और यहां तक कि वैश्विक स्तर पर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेंगे।” देश विदेश के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से राजनाथ सिंह ने कहा, “युद्ध सेनानियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के रक्षकों के रूप में, आपको पर्यावरण और इसके प्रभावों के बारे में जागरूक रहने की आवश्यकता है। आपको भविष्य के लीडर्स होने के लिए आवश्यक क्षमता और कौशल हासिल करना चाहिए। आपको प्रमुख गुणों के रूप में अनुकूलनशीलता और दक्षता को अपनाना चाहिए। कल के युद्ध के मैदान में ऐसे लीडर्स की आवश्यकता होगी जो अप्रत्याशित परिस्थितियों के अनुकूल हो सकें, अपने लाभ के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठा सकें और अभिनव समाधान निकाल सकें। आपको अपने संबंधित सशस्त्र बलों का दूत बनना चाहिए। परिवर्तन के दूत बनें और बड़े पैमाने पर समाज के बीच आदर्श रोल मॉडल बनें।” हाल ही में म्यांमार और थाईलैंड में आए भीषण भूकंप और यहां भारत के समर्थन पर उन्होंने कहा, “भारत संकट के समय हमेशा सबसे पहले अपने मित्रों के साथ खड़ा रहा है। हम म्यांमार के लोगों को समय पर राहत पहुंचाने को अपना कर्तव्य समझते हैं।” 10 अप्रैल को वेलिंगटन में डिफेंस सर्विसेस स्टाफ कॉलेज (डीएसएससी) के 80वें स्टाफ कोर्स का दीक्षांत समारोह था। 80वें स्टाफ कोर्स में 479 अधिकारी शामिल हैं, जिनमें 26 मित्र देशों के 38 अधिकारी भी सम्मिलित हैं। इस कोर्स में तीन महिला अधिकारी भी भाग ले रही हैं। राजनाथ सिंह ने समारोह से पहले, मद्रास रेजिमेंट युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और वीरों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने देश के लिए उनके अमूल्य योगदान को स्वीकार करते हुए दिग्गजों से बातचीत भी की। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

ट्रंप टैरिफ के ऐलान से दुनियाभर के मार्केट में हलचल, डोनाल्ड ट्रंप का नया पोस्ट, निवेशकों को दी यह सलाह

वाशिंगटन ग्लोबल मार्केट में भारी उथल-पुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक नया पोस्ट किया है। सोशल मीडिया पर यह पोस्ट न्यूयॉर्क में सुबह 9:37 बजे किया गया। अपने पोस्ट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा है, ” शेयर बाजार में खरीदारी के लिए यह बहुत बढ़िया समय है।” बता दें कि ट्रंप टैरिफ के ऐलान से दुनियाभर के मार्केट में हलचल है और अमेरिकी मार्केट बीते चार दिनों में 6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक गिर गया था। इससे S&P 500 को तगड़ा नुकसान झेलना पड़ा। इतना हीं नहीं ट्रंप टैरिफ से भारतीय शेयर बाजार भी बीते सोमवार को करीबन 4000 अंक तक गिर गया था। 90 दिनों के लिए स्थगित किया गया है प्लान बता दें कि वैश्विक बाजार में मंदी की आशंका के बीच बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ज्यादातर देशों पर लगाए गए शुल्क को अचानक 90 दिनों के लिए स्थगित करने का फैसला किया, हालांकि उन्होंने चीन से आयात पर शुल्क की दर बढ़ाकर 125 प्रतिशत कर दी है। ट्रंप ने कहा कि ये देश अधिक अनुकूल शर्तों पर बातचीत करने के लिए राजी हैं। इस खबर के बाद मिनटों में शेयर बाजार में उछाल आया। एसएंडपी 500 में 7% से अधिक की बढ़ोतरी हुई, इससे 3 ट्रिलियन डॉलर का मुनाफा हुआ। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा और सेंसेक्स-निफ्टी में कुछ रिकवरी देखी गई। बावजूद भारत समेत दुनियाभर के निवेशकों में शेयर बाजार को लेकर एक डर का माहौल बना हुआ है। जिद्द पर अड़े थे ट्रंप बता दें कि पिछले सप्ताह ट्रंप ने पोस्ट किया था, “मेरी पॉलिसीज कभी नहीं बदलेंगी।” सोमवार और मंगलवार को जब एसएंडपी 500 में गिरावट आई, तो ट्रंप ने दोहराया कि वे बाजार पर नजर नहीं रख रहे हैं, अर्थव्यवस्था को मजबूत होने के लिए “दवा लेने” की जरूरत है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने जोर देकर कहा कि वॉल स्ट्रीट पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब मेन स्ट्रीट की बारी है।

दांत हथियार नहीं यह कहकर महिला द्वारा ससुराल पक्ष पर काटे जाने का आरोप लगाने पर हाईकोर्ट ने की याचिका खारिज

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में एक मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला की अपने ससुराल पक्ष पर दांत से काटे जाने का आरोप लगाया था। बंबई हाईकोर्ट ने महिला द्वारा उसके ससुराल वालों के खिलाफ की गई शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि मानव दांतों को ऐसा खतरनाक हथियार नहीं माना जा सकता है, जिससे गंभीर नुकसान की संभावना हो। हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ की जज विभा कंकनवाड़ी और न्यायमूर्ति संजय देशमुख ने 4 अप्रैल को अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता के चिकित्सा प्रमाणपत्र से पता चलता है कि दांतों के निशान से उसे केवल मामूली चोट लगी। इसी चोट के आधार पर महिला ने अप्रैल 2020 में एफआईआर दर्ज करवाई थी। थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक ससुराल पक्ष के साथ हाथापाई के दौरान एक रिश्तेदार ने महिला को काट लिया, जिससे उसे खतरनाक नुकसान पहुंचा। पुलिस के मुताबिक महिला की शिकायत के आधार पर आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता के अनुसार चोट पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मानवीय दांतों को खतरनाक हथियार नहीं कहा जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपियों द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए केस को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि मामले में शिकायतकर्ता के मेडीकल सर्टिफिकेट से पता चलता है कि दांतों से केवल साधारण चोट लगी थी। इसके कारण यहां पर धारा 324 के तहत अपराध नहीं बनता है। ऐसे में ससुराल पक्ष या अभियुक्त पर केस चलाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करना होगा। कोर्ट की ओर से कहा गया कि दोनों पक्षों के बीच में संपत्ति का विवाद प्रतीत होता है। आपको बता दें भारतीय दंड संहिता की धारा 324 (खतरनाक हथियार का उपयोग करके चोट पहुंचाना) के तहत, चोट किसी ऐसे उपकरण से लगी होनी चाहिए जिससे मृत्यु या गंभीर नुकसान होने की आशंका हो अगर ऐसा नहीं है तो यह मामला नहीं बनता है

‘निसंदेह तहव्वुर राणा का भारत आना सरकार के लिए एक बड़ी सफलता है, विपक्षी नेता ने की मोदी सरकार की तारीफ

नई दिल्ली मुंबई आतंकी हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा का अमेरिका से भारत प्रत्यर्पण हो गया है। इसे भारत सरकार अपनी बड़ी कामयाबी मान रही है तो वहीं विपक्ष ने भी इसकी सराहना की है। शरद पवार की पार्टी एनसीपी-एसपी के नेता माजिद मेनन का कहना है कि निश्चित तौर पर यह मोदी सरकार के लिए एक उपलब्धि है। उन्होंने कहा, ‘निसंदेह तहव्वुर राणा का भारत आना सरकार के लिए एक बड़ी सफलता है। अमेरिका ने इस मामले में बहुत लंबा समय लिया है। उसका प्रत्यर्पण और पहले हो जाना चाहिए था। हमें इस बात की खुशी होनी चाहिए कि हम इस मामले में कुछ न्याय कर सकेंगे। यह मामला पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है।’ माजिद मेनन ने कहा कि हमें बस यह ध्यान देना होगा कि इस केस में इंटनेशनल स्टैंडर्ड्स का पालन किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि नियमानुसार प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी तो जांच टीम बहुत अच्छा काम करेगी। इस मामले का ट्रायल सही तरीके से होना चाहिए। तहव्वुर राणा के खिलाफ दिल्ली में केस चलना है। उसके खिलाफ एनआईए की विशेष अदालत में मामला चलेगा और फिर हाई कोर्ट आदि में भी सुनवाई होनी है। इस मामले में होम मिनिस्ट्री की ओर से विशेष लोक अभियोजन नरेंद्र मान को वकील नियुक्त किया गया है। वह अगले तीन वर्षों तक इस मामले में पैरवी करेंगे। नरेंद्र मान भले ही लीगल वर्ल्ड में बड़ा नाम नहीं हैं, लेकिन उन्हें काम लंबा अनुभव है। वह कई अहम मामलों में वकील रह चुके हैं। उन्होंने 2018 में एसएससी पेपर लीक केस में भी बहस की थी। उनके ट्रैक रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए ही सरकार ने उन्हें लोक अभियोजक नियुक्त किया है। बता दें कि इसी तरह मुंबई हमले के गुनहगार अजमल कसाब का मामला भी जब अदालत पहुंचा था तो उज्ज्वल निकम को वकील बनाया गया था। उन्होंने कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए दलीलें दी थीं। उज्ज्वल निकम को उस केस से बहुत लोकप्रियता मिली थी और 2014 के आम चुनाव में तो इलेक्शन भी लड़े थे। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिल सकी। अब तक मिली जानकारी के अनुसार तिहाड़ जेल में ही तहव्वुर राणा को रखा जाएगा।

ट्रंप को चंदा देने वालों को लगा 1.8 ट्रिलियन डॉलर का घाटा, टैरिफ प्लान ने दुनिया के सभी देशों की टेंशन बढ़ा दी

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ प्लान ने दुनिया के सभी देशों की टेंशन बढ़ा दी है। अब खबरें हैं कि अमेरिका उद्योग जगत के दिग्गज भी चिंताओं से अछूते नहीं हैं। खास बात है कि टेस्ला के सीईओ एलन मस्क समेत ऐसे कई अरबपति हैं जो ट्रंप को अभियान या इनॉग्युरल फंड के नाम पर भारी चंदा दे चुके हैं, लेकिन साल की शुरुआत के साथ ही उन्हें लाखों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। इस लिस्ट में पहला नंबर ही मस्क का है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग, एप्पल के सीईओ टिम कुक, गूगल के सीईओ सुंदर पिचई, टेस्ला के मस्क और अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस की कंपनियों ने मिलकर करीब 1.8 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान उठाया है। यह आंकड़ा साल की शुरुआत से लेकर अब तक का है। जानकारों का कहना है कि लॉन्ग टर्म रेसिप्रोकल टैरिफ और आर्थिक अनिश्चितता टेक जगत की कमाई को 25 फीसदी तक कम कर सकती हैं। सीएनएन ने यूबीएस से संडे रिपोर्ट के हवाले से यह बात कही है। किसे हुआ कितना नुकसान एलन मस्क: रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने कम से कम 290 मिलियन डॉलर ट्रंप के समर्थन में डोनेट किए थे। ब्लूमबर्ग इंडेक्स के अनुसार, साल 2025 की शुरुआत से लेकर अब तक उनकी नेट वर्थ में 143 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है। इसकी बड़ी वजह टेस्ला के शेयर में गिरावट है। खास बात है कि ट्रंप प्रशासन में मस्क का कार्यकाल खासा विवादित रहा है। साल की शुरुआत से ही टेस्ला के शेयर्स में 28 प्रतिशत की गिरावट आई है और बाजार पूंजीकरण 376.6 बिलियन डॉलर तक कम हो गया है। आंकड़े 9 अप्रैल को बाजार बंद होने तक के हैं। मार्क जकरबर्ग: ट्रंप के इनॉग्युरल फंड में मेटा ने 1 मिलियन डॉलर के दान का वादा किया था। इसके अलावा जकरबर्ग और ट्रंप की कई मौकों पर मुलाकात भी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 की शुरुआत से जकरबर्ग की नेटवर्त में 26.5 बिलियन डॉलर की गिरावट हुई है। जबकि, मेटा के शेयर करीब 2.25 फीसदी गिर गए हैं। जेफ बेजोस: बेजोस ने ट्रंप की जीत पर खुशी जाहिर की थी और अमेजन ने इनॉग्युरल फंड में 1 मिलियन डॉलर का अनुदान दिया था। इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक बेजोस की नेट वर्थ 47.2 बिलियन डॉलर गिर गई है। वहीं, अमेजन के शेयर 13 फीसदी नीचे गिर गए हैं। सुंदर पिचई: गूगल ने ट्रंप के इनॉग्युरल फंड में 1 मिलियन डॉलर डोनेट किए थे और कार्यक्रम को यूट्यूब पर लाइव प्रसारित किया था। इसके अलावा पिचई उन CEOs की सूची में शामिल हैं, जो चुनाव के बाद मार-ए-लागो गए थे। गूगल का स्टॉक 16.2 फीसदी गिर गया और मूल्यांकन 386.7 बिलियन डॉलर कम हो गया है। टिम कुक: ट्रंप की इनॉग्युरल कमेटी में एप्पल के सीईओ कुक ने व्यक्तिगत रूप से 1 मिलियन डॉलर जमा किए थे। इसके अलावा अमेरिका में ही अगले 4 सालों में 500 बिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया था। हालांकि, अब टैरिफ वॉर का बड़ा असर एप्पल पर ही पड़ने के आसार हैं। कंपनी का स्टॉक साल की शुरुआत से अब तक 18.5 फीसदी गिर चुका है और मार्केट वैल्यू में 684 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है।

सरकार ने पासपोर्ट में जीवनसाथी का नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को किया अब बेहद आसान, सरकार ने दी राहत

नई दिल्ली पासपोर्ट में जीवनसाथी का नाम जुड़वाने की प्रक्रिया अब बेहद आसान हो गई है। अब तक नाम जुड़वाने के लिए शादी के रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती थी। आमतौर पर भारत में परंपरागत शादियां करने वाले लोग पंजीकरण नहीं कराते हैं। ऐसे में पासपोर्ट में नाम जुड़वाने के लिए उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब सरकार ने इस प्रक्रिया को आसान कर दिया है। अब बिना मैरिज सर्टिफिकेट के ही जीवनसाथी का नाम आप पासपोर्ट में जुड़वा सकेंगे। इसके लिए आपको बस दोनों का एक फोटो शेयर करना होगा और उस पर संयुक्त रूप से हस्ताक्षर करने होंगे। इस तरह शादी की स्वप्रमाणित तस्वीर को ही दस्तावेज माना जाएगा और उसके आधार पर पासपोर्ट में जीवनसाथी का नाम जोड़ दिया जाएगा। इसके लिए विदेश मंत्रालय की तरफ से Annexure J का विकल्प दिया गया है। अब आप एनेक्सर जे पर जाकर शादी की अपनी तस्वीर या फिर कोई अन्य जॉइंट फोटो दोनों के साथ के अपलोड कर देंगे। इसे ही प्रमाण पत्र के तौर पर मान लिया जाएगा। आमतौर पर शादियों का पंजीकरण कराना एक जटिल प्रक्रिया है और लोग इससे बचने के लिए सालों तक इसे लटकाए रहते हैं। फिर कभी किसी नौकरी में ट्रांसफर या फिर पासपोर्ट आदि के लिए जरूरत होती है तो उन्हें परेशानी का सामना करना होता है। अब पासपोर्ट में पति या पत्नी का नाम जुड़वाने में आने वाली परेशानी को तो विदेश मंत्रालय ने पूरी तरह से दूर कर दिया है। दरअसल महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में शादी का रजिस्ट्रेशन आसानी से हो जाता है और लोग विवाह के तुरंत बाद ही यह प्रक्रिया करा लेते हैं। लेकिन यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे कई उत्तर भारत के राज्यों में ऐसी स्थिति नहीं है। यहां आमतौर पर लोग शादियों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराते और जरूरत के वक्त उन पर दस्तावेज नहीं मिल पाते। ऐसे ही मामलों को देखते हुए विकल्प के तौर पर विदेश मंत्रालय ने जॉइंट फोटो डिक्लेरेशन की सुविधा प्रदान की है। इसके तहत पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वालों को अपने नाम बताने होंगे। इसके बाद अपने पति या पत्नी का नाम डालना होगा। फिर एनेक्सर जे पर जाकर जॉइंट फोटो को अपलोड करना होगा और वहां दोनों को साइन भी करने होंगे। यहां बताना होगा कि वे मैरिड कपल के तौर पर साथ हैं। इसके अलावा आवेदक को यह बताना होगा कि उसके पति या पत्नी का नाम शामिल करते हुए ही पासपोर्ट जारी किया जाए। एनेक्सर जे में जो विकल्प दिया गया है, उसके तहत जॉइंट फोटोग्राफ के साथ साइन करने होंगे। इसके अलावा अपना स्थान और साइन करने की तारीख भी लिखनी होगी। इसके अलावा अपने नाम, आधार कांड नंबर, वोट आईडी नंबर और पासपोर्ट नंबर आदि का भी जिक्र करना होगा। सरकार का मानना है कि यदि दोनों के दस्तावेज सही हों और उनके पास फोटो हो तो फिर सेल्ट अटेस्टेड कराने में कोई दिक्कत नहीं है। इससे पूरी वैधता रहेगी और लोगों को जटिलता से भी बचाय़ा जा सकेगा।

स्कूल, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थान बंद, 17 अप्रैल तक आदेश जारी, कहां और कैसे लागू हुआ कर्फ्यू?

मणिपुर पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में तनाव एक बार फिर से सिर चढ़कर बोल रहा है। लंबे समय से हिंसा और विवाद झेल रहे इस राज्य में हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं। अब चुराचांदपुर जिले में फिर से कर्फ्यू लागू कर दिया गया है, जिसके चलते स्कूल, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों को बंद कर दिया गया है।। इलाके में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प और एक व्यक्ति की मौत के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। कहां और कैसे लागू हुआ कर्फ्यू? चुराचांदपुर के जिला मजिस्ट्रेट धरुण कुमार ने कर्फ्यू आदेश जारी किया, जो तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। आदेश के अनुसार, कांगवई, समुलामलान और संगाईकोट उपमंडलों सहित दो गांवों में पूरी तरह से आवाजाही और गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। वहीं बाकी क्षेत्रों में सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक जरूरी सेवाओं के लिए कुछ ढील दी गई है, लेकिन उसके बाद पूर्ण कर्फ्यू लागू रहेगा। यह व्यवस्था 17 अप्रैल तक जारी रहेगी। क्यों भड़की हिंसा? तनाव की जड़ है 18 मार्च को हुआ एक विवाद, जिसमें जोमी और हमार समुदाय के समर्थक आपस में भिड़ गए थे। यह झगड़ा उस समय बढ़ गया जब एक व्यक्ति ने मोबाइल टावर पर चढ़कर जोमी समुदाय का झंडा नीचे उतार कर फेंक दिया। इसके बाद गुस्से में आई भीड़ ने विरोध शुरू कर दिया, जो देखते ही देखते हिंसा में तब्दील हो गया। इस झड़प में एक व्यक्ति की जान चली गई और कई लोग घायल हुए। प्रशासन की सख्ती और अपील शांति बनाए रखने की अपील: लोगों से कहा गया है कि वे अफवाहों से बचें और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें। जमीन विवाद सुलझाने की पहल: दोनों समुदायों के बीच जमीन को लेकर चल रहे विवाद को बातचीत से सुलझाने की सहमति बनी है। समाधान की उम्मीद मणिपुर में पिछले कुछ महीनों से विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बना हुआ है, और यह ताजा मामला फिर से उसी आग को हवा दे सकता है। हालांकि प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और स्थानीय नेताओं की मदद से शांति स्थापना की कोशिश की जा रही है।

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