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मोहन कैबिनेट बैठक सम्पन्न, इन प्रस्तावों पर लगी मुहर

Mohan Cabinet meeting concluded, these proposals approved भोपाल ! सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्रीराम वन पथ गमन के विकास की कार्य योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। प्रथम चरण में पथ के अयोध्या से चित्रकूट तक के विकास के लिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में गतिविधियां संचालित की जायेंगी।मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई , बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। बैठक में आज इसमें पीएम जनमन योजना को लेकर प्रस्तुतीकरण दिया गया। वही तय किया गया कि सभी मंत्री अपने गृह जिले में 26 जनवरी को झंडा वंदन करेंगे। कैबिनेट में इन प्रस्तावों को मिली मंजूरी

बांधवगढ़ में लगातार बाघों की मौत फिर भी सरकार मौन क्यों?

Continuous death of tigers in Bandhavgarh, yet why is the government silent? उमरिया । विश्व प्रसिद्ध और बाघ दर्शन के लिए मशहूर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बार फिर वन्य प्राणी प्रेमियों के लिए बुरी खबर सामने आई है। जिसमें एक नर बाघ शावक की मौत हो जाने की जानकारी मिली है। प्रबंधन के द्वारा मृत बाघ शावक का पीएम आदि कराकर टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों की मौजूदगी में एनटीसीए की गाइडलाइन के तहत उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। दरअसल बांधवगढ़ में लगातार बाघों की मौत से जहां प्रबंधन कटघरे में है।वहीं बीते दिसंबर माह में दर्जन भर बाघों की असमय मौत हो जाना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। इस बार भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर परिक्षेत्र अंतर्गत बरबसपुर बीट के कक्ष क्रमांक 125 में एक नर बाघ शावक मृत अवस्था में गश्ती दल को मिला है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्रबंधन की ओर से जानकारी दी गई है कि अमृत न भाग सावन के आसपास एक दूसरे बैग की पगमार्क मिले हैं इसके अलावा मृत शावक को घसीटने के भी निशान दिखाई दे रहे हैं। मृत शावक के शरीर के सभी अंग मौजूद हैं। इसके बाद मृत शावक का डॉक्टर नितिन गुप्ता और बी बी एस मार्को के द्वारा पोस्टमार्टम कर जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजने सैंपल एकत्रित किए गए हैं। मृत शावक का पीएम उपरांत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ अधिकारियों एनटीसीए के मेम्बर की मौजूदगी और एनटीसीए गाइडलाइन के तहत अंतिम संस्कार किया गया है। बताया गया कि नर बाघ शावक की मौत प्रथम दृष्ट्या किसी दूसरे बाघ से आपसी संघर्ष के कारण होना प्रतीत होता है।

कूनो में चीते की मौत नामीबिया से लाए एक और चीते ने तोड़ा दम

भोपाल। मॉनीटरिंग टीम को चीता शौर्य अचेत अवस्था में मिला था। कूनो में अब तक दस चीतों की मौत हो चुकी है, इनमें सात चीते और तीन शावक शामिल हैं। लॉयन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर ने बताया कि आज करीब सवा तीन बजे चीता शौर्य की मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत का खुलासा होगा। अब तक 7 चीते और 3 शावक की मौत कूनो में अब तक चीते और शावक को मिलाकर यह 10वीं मौत है। इनमें 7 चीते और 3 शावक हैं। प्रोजेक्ट चीता में सितंबर 2022 में आठ चीतों को नामीबिया से लाया गया था। इसके बाद फरवरी 2023 में 12 और चीतों को दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था। नामीबिया से लाया गया चीता शौर्य अपने सगे भाई गौरव के साथ आया था। दोनों हमेशा एकसाथ रहते थे, साथ शिकार करते थे। कुछ समय पहने दोनों की अग्नि और वायु चीते से भिड़ंत हुई थी। वे दोनों भी सगे भाई थे। इसमें अग्नि चीता गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके बार चीतों को बाड़े में बंद कर दिया था। + कब-कैसे हुई चीतों की मौत… 26 मार्च 2023: साशा की किडनी इंफेक्शन से मौत  नामीबिया से लाई गई 4 साल की मादा चीता साशा की किडनी इंफेक्शन से मौत हो गई। वन विभाग ने बताया कि 15 अगस्त 2022 को नामीबिया में साशा का ब्लड टेस्ट किया गया था, जिसमें क्रियेटिनिन का स्तर 400 से ज्यादा था। इससे ये पुष्टि होती है कि साशा को किडनी की बीमारी भारत में लाने से पहले ही थी। साशा की मौत के बाद चीतों की संख्या घटकर 19 रह गई। 27 मार्च : ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया साशा की मौत के अगले ही दिन मादा चीता ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया। ज्वाला को नामीबिया से यहां लाया गया था। कूनो नेशनल पार्क में इन शावकों को मिलाकर चीतों की कुल संख्या 23 हो  गई। 23 अप्रैल : उदय की दिल के दौरे से मौत साउथ अफ्रीका से लाए गए चीते उदय की मौत हो गई। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में बताया गया कि उदय की मौत कार्डियक आर्टरी फेल होने से हुई। मध्यप्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस चौहान ने बताया कि हृदय धमनी में रक्त संचार रुकने के कारण चीते क्की मौत हुई। यह भी एक प्रकार का हार्ट अटैक है। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 22 रह गई।  9 मई : दक्षा की मेटिंग के दौरान मौत दक्षा को दक्षिण अफ्रीका से कूनो लाया गया था। जेएस चौहान ने बताया कि मेल चीते को दक्षा के बाड़े में मेटिंग के लिए भेजा गया था। मेटिंग के दौरान ही दोनों में हिंसक इंटरेक्शन हो गया। मेल चीते ने पंजा मारकर दक्षा को घायल कर दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 21 रह गई। 23 मई : ज्वाला के एक शावक की मौत मादा चीते ज्वाला के एक शावक की मौत हो गई। जिएस चौहान ने बताया कि ये शावक जंगली 31 परिस्थितियों में रह रहे थे। 23 मई को श्योपुर में भीषण गर्मी थी। तापमान 46-47 डिग्री सेल्सियस था। दिनभर गर्म हवा और लू चलती रही। ऐसे में ज्यादा गर्मी, डिहाइड्रेशन और कमजोरी इनकी मौत की वजह हो सकती है। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 20 रह गई। 25 मई : ज्वाला के दो और शावकों की मौत पहले शावक की मौत के बाद तीन अन्य को चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया था। इनमें से दो और शावकों की मौत हो गई। अधिक तापमान होने और लू के चलते इनकी तबीयत खराब होने की बात आमने सामने आई थी। इसके बाद कूनो में एक शावक सहित 18 चीते बचे। 11 : मेल चीता तेजस की मौत चीते तेजस की गर्दन पर घाव था, जिसे देखकर अनुमान लगाया गया कि चीतों के आपसी संघर्ष में उसकी जान गई है। इस मौत के बाद कूनो में 17 चीते बचे थे। 14 जुलाई : मेल चीता सूरज की मौत चीते सूरज की गर्दन पर भी घाव मिला। कूनो प्रबंधन का अनुमान है कि चीतों के आपसी संघर्ष में ही सूरज की जान गई है। इससे नेशनल पार्क में चीतों की संख्या घटकर 16 रह गई थी। 2 अगस्त : मादा चीता धात्री की मौत कूनो परिसर में ही मादा चीता धात्री का शव मिला था। पोस्टमॉर्टम में इंफेक्शन से मौत की वजह सामने आई थी। धात्री की मौत होने के बाद चीतों की संख्या 15 रह गई थी। 03 जनवरी : आशा ने तीन शावक जन्मे इसी साल 03 जनवरी को श्योपुर जिले के कूनो बेशनल पार्क से बड़ी खुशखबरी आई। मादा चीता आशा ने तीन शावकों को जन्म दिया। कूनो में अब 4 शावक समेत कुल 18 चीते हो गए थे। नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाई गई मादा चीता आशा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह नाम दिया था।  16 जनवरी 2024: नर चीते शौर्य की मौत नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क लाए गए नर चीते शौर्य ने दम तोड़ा। अब यहां 4 शावक समेत 17 चीते बचे हैं।

45 एनकाउंटर करने वाले पुलिस अधिकारी जिनके नाम से थर्राते थे चंबल के डकैत, लेकिन अब खुद थाने में लगा रहे गुहार

Chambal’s dacoits used to tremble with the name of 45 encounter police officers, but now they themselves are appealing to the police station. भिण्ड ! मध्य प्रदेश के चंबल इलाके में केडी सोनकिया उर्फ केशवदास सोनकिया ऐसा नाम है जिसे सुनते ही एक वक्त खूंखार डकैत कांप जाया करते थे, जिसकी धमक से ही डकैत अपना रास्ता बदल लिया करते थे ! और जिसके आगे बड़े-बड़े बदमाश टिक नहीं पाते थे,मध्य प्रदेश के चंबल इलाके में एक समय सुपर कॉप रहे केडी सोनकिया अब खुद ही ठगी का शिकार हो गए. बात थोड़ी हैरान कर देने वाली है,जिसने भी यह बात सुनी वह भी दंग रह गया कि आखिर यह कैसे संभव है. जिंदगी भर जिस सुपर कॉप का बदमाशों से पाला पड़ा, वह कैसे खुद ही बदमाशों के चंगुल में फंस गया,दरअसल, इस ठगी की पूरी कहानी साल 2017 में सितंबर के महीने से शुरू हुई थी. पुलिस विभाग से रिटायर्ड केडी सोनकिया इन दिनों ग्वालियर में थाटीपुर थाना इलाके के गुलाबचंद की बगीची में रहते हैं. सितंबर 2017 में केडी सोनकिया की मुलाकात भिंड जिले के अमायन इलाके में रहने वाले राजकुमार शर्मा से हुई थी. राजकुमार शर्मा भिंड का निवासी है, लेकिन वह वर्तमान में अहमदाबाद में निवास करता है.राजकुमार शर्मा ने केडी सोनकिया को बताया कि उनका एक सहयोगी जिसका नाम धर्मेंद्र भाई कांति भाई पटेल है, वह अहमदाबाद में 200 फ्लैट बनाने के एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, अगर मुनाफा कमाना है तो इस प्रोजेक्ट में पैसा इन्वेस्ट कर दें जिससे मोटा मुनाफा होगा.राजकुमार ने केडी सोनकिया से 50 लाख रुपए इन्वेस्ट करने के लिए कहा, लेकिन सोनकिया ने राजकुमार को बताया कि इतनी बड़ी रकम फिलहाल उनके पास उपलब्ध नहीं है. जब राजकुमार ने केडी सोनकिया को बार-बार इन्वेस्ट करने के लिए कहा तो केडी सोनकिया ने ₹500000 राजकुमार को दे दिए. यह रकम चेक के माध्यम से दी गई थी, लिहाजा धर्मेंद्र भाई कांति भाई पटेल की तरफ से एक एग्रीमेंट भी केडी सोनकिया को दिया गया. समय बीतता गया और केडी सोनकिया प्रॉफिट का इंतजार करते रहे, लेकिन जब कुछ समय पहले केडी सोनकिया ने अपने 5 लाख रुपए और उस पर मिले प्रॉफिट को वापस मांगा तो राजकुमार समेत उसका सहयोगी पैसे देने में आनाकानी करने लगा.

बाल भवन में जिला स्तरीय आर्म रेसलिंग 21 जनवरी को,

District level arm wrestling at Bal Bhawan on 21st January. संतोष सिंह तोमर ग्वालियर। ग्वालियर आर्म रेसलिंग वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वधान में जिला स्तरीय आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप होने जा रही है, उक्त प्रतियोगिता बाल भवन सिटी सेंटर ग्वालियर में दिनांक 21 जनवरी 2024 को होगी प्रतियोगिता सुबह 8 बजे से प्रारंभ होगी। यह जानकारी ग्वालियर आर्म रेसलिंग वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ केशव पांडे ने एक मीटिंग में दी ग्वालियर आर्म रेसलिंग वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव एवं ग्रीनवुड स्कूल के डायरेक्टर डॉ आदित्य भदौरिया ने बताया कि इस प्रतियोगिता में खिलाड़ी भार वर्ग एवं आयु वर्ग में विभाजित होकर मुकाबला करेंगे कुछ मुख्य वर्ग इस प्रकार हैं, सब जूनियर, जूनियर, सीनियर, महिला वर्ग, दिव्यांग वर्ग आदि। प्रतियोगिता में विजेता खिलाड़ी को पदक एवं प्रमाण पत्र दिया जाएगा और विजेता खिलाड़ियों को 28 जनवरी को भोपाल में संपन्न होने जा रही राज्य स्तरीय आर्म रेसलिंग प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिलेगा। संस्था के सचिव डॉक्टर आदित्य भदौरिया ने आगे बताया कि ग्वालियर आर्म रेसलिंग का हब बन चुका है ! तथा ग्वालियर में नेशनल एवं इंटरनेशनल खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं। मीटिंग में वर्ल्ड चैंपियनशिप एवं ग्वालियर आर्म रेसलिंग कोच मनीष कुमार एवं भूपेंद्रकांत भी उपस्थित थे, वर्ल्ड चैंपियन मनीष कुमार जी ने बताया कि यह प्रतियोगिता प्रो पंजा लीग सीजन 1 के बाद पहली जिला आर्म रेसलिंग प्रतियोगिता है। इस प्रतियोगिता में खिलाड़ियों का ध्यान इसी बात पर होगा कि किसी भी तरह इस प्रतियोगिता में भाग लेकर राज्य स्तरीय आर्म रैसलिंग प्रतियोगिता में भाग ले और वहां से जीत कर नेशनल प्रतियोगिता में लेंगे। भूपेंद्रकांत जी ने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन 15 एवं 16 जनवरी 2024 को ग्वालियर आर्म रेसलिंग अकादमी जेसी मिल बिरला नगर में होंगे।

21 करोड़ से जगमगाएगा कोलार, बनेगा नया डिवीज़न कार्यालय

Kolar will shine with Rs 21 crore, new division office will be built भोपाल। कोलार के वार्ड 80 से 85 तक के क्षेत्र में 21 करोड़ की लागत राशि से विद्युतीकरण कार्य किए जाएंगे। जिसके अंतर्गत 33/11 केवी सब स्टेशन का निर्माण, अतिरिक्त ट्रांसफार्मर क्षमता वृद्धि, पावर क्षमता वृद्धि सहित पुराने तारों एवं पोलो को बदला जाएगा। रविवार को सात करोड़ की लागत से होने वाले कार्य शुभारंभ विधायक रामेश्वर शर्मा ने किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि पहले कोलार में हमने नया डिवीज़न क्षेत्र घोषित कराया। पहले इसका चांदबड डिवीज़न में था। जिसके लिए ओल्ड सिटी जाना पड़ता था। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कोलार में निर्वाद विद्युत सप्लाई के क्षेत्र में बहुत काम किया गया। पहले भी 25 करोड़ की राशि से आईपीडीएस योजना के अंतर्गत खर्च किए गए। थुआखेड़ा में अशोक सिंहल पॉवर हाउस का निर्माण कराया गया। बनेगा मिनी सचिवालयविधायक शर्मा ने कहा की एसडीएम कोलार कार्यालय परिसर में गेहूंखेड़ा में ही सभी कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। जिसे मिनी सचिवालय भी कहा जा सकता है। एक ही जगह सभी कार्यालय होने से नागरिकों को अलग अलग जगह आना-जाना न पड़े। शर्मा ने कहा कि यहां एसडीएम तहसील, नगर निगम जोन कार्यालय तो पहले से ही लग रहा है यहीं विद्युत डिवीज़न कार्यालय बनाया जाएगा साथ ही यहीं एडिशनल डीसीपी का कार्यालय भी बनाया जाएगा।

150 साल का हुआ आईएमडी, भोपाल मौसम केंद्र सालभर करेगा समारोह

IMD turns 150, Bhopal weather center will celebrate throughout the year भोपाल। सोमवार को भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), मौसम विज्ञान में 150 वर्ष पूरे कर रहा है। 15 जनवरी 1875 में स्थापना के साथ भारत मौसम विज्ञान विभाग लगातार देश को सटीक मौसम पूर्वानुमान, चेतावनियां और जलवायु की जानकारी दे रहा है। इस दिशा में देश के सभी मौसम केंद्रों के साथ ही भोपाल मौसम केंद्र भी लगातार अपडेट हो रहा है। इस 150वीं वर्षगांठ को मनाने के लिए मौसम केंद्र भोपाल इस साल भर में समारोह का आयोजन करेगा। इसके तहत सम्मेलन, कार्यशाला और जनहितैषी, कार्यक्रम शामिल होंगे, जो मौसम विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और तैयारी के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए होंगे। इसी आयोजन के तहत 15 जनवरी 2024 को मौसम केंद्र भोपाल द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया जा रहा है, जिसका उदघाटन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा मौसम मुख्यालय नई दिल्ली में एवं प्रादेशिक स्तर पर डॉ. देवेंद्र प्रधान, पूर्व वैज्ञावनक जी, आईएमडी एवं विशेष अतिथि डॉ. डी. पी. दुबे, पूर्व प्रमुख, मौसम केंद्र भोपाल द्वारा किया जाएगा। मौसम केंद्र भोपाल में नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी। प्रदर्शनी, अलोकन के लिए स्कूल कॉलेज के विद्यार्थीआम जन लिए दोपहर 2 से 6 बजे तक खुली रहेगी। हम 150 वर्षों की सेवा का समारोह मना रहे हैंभारत मौसम विज्ञान विभाग के अंतर्गत मौसम केंद्र भोपाल के प्रमुख आर. बालसुब्रमवर्यन ने वर्षों से मिल रहे समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। उनका कहना है कि संगठन लगातार सुधार में जुटा है। हम 150 वर्षों की सेवा का समारोह मना रहे हैं, और हम देश को सटीक और समय पर मौसम जानकारी प्रदान करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। हम भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीक के सहयोग से आगे बढऩे की उम्मीद कर रहे हैं।

नगर निगम भोपाल के नीमच में बन रहे दो संयंत्र इस वर्ष काम करने लगेंगे, महापौर व अधिकारी पहुंचे

Two plants being built in Neemuch of Municipal Corporation Bhopal will start functioning this year. भोपाल। नगर निगम भोपाल के नीमच में बन रहे दो संयंत्र इस वर्ष काम करने लगेंगे, जिसकी प्रगति देखने भोपाल से नगर निगम महापौर मालती राय व विद्ययुत शाखा के अधिकारी रविवार को नीमच पहुंचे। नीमच पहुंचने के बाद महापौर ने बताया कि रास्ते में कई पवन ऊर्जा संयत्र का भी निरीक्षण कर सभी प्रकार की जानकारी लीं। जिससे यह जानकारी मिल सके कि भोपाल नगर निगम सही दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह दोनों संयत्र इस साल काम करने लगेंगेए जिससे इन परियोजनाओं से 55 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। यह बिजली निगम को 25 वर्षों तक रियायती दर पर उपलब्ध होगी। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार नीमच में 180 करोड़ रुपये से 20-20 मेगावाट के दो सौर ऊर्जा और 90 करोड़ रुपये से 15 मेगावाट का एक पवन ऊर्जा संयत्र लग रहा है। नगर निगम बिजली के बढ़ते खर्च से बचने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ा रहा है। इसके लिए नीमच में 180 करोड़ रुपये से 20ण्20 मेगावाट के दो सौर ऊर्जा संयंत्र और 90 करोड़ रुपये से 15 मेगावाट का एक पवन ऊर्जा संयत्र लगाने जा रहा है। तीनों परियोजनाओं से 55 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। यह बिजली निगम को 25 वर्षों तक रियायती दर पर मिलेगी। महापौर मालती राय के अनुसार प्रथम चरण में 20 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का काम शुरु हो गया है। इसमें 90 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 28 करोड़ रुपये नगर निगम को देना होगाए जबकि बाकी रकम ठेकेदार लगाएगा। इसके बदले निगम को ठेकेदार आगामी 25 वर्षों तक 3.14 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देगा। वहीं दूसरे चरण में 15 मेगावाट के पवन ऊर्जा संयंत्र प्लांट के लिए नीमच में भूमि आवंटित होने के बाद काम चालू हो गया है। इसकी लागत भी 90 करोड़ रुपये होगी। इसमें 30 करोड़ रुपये नगर निगमए जबकि बची हुई राशि ठेकेदार मिलाएगा। इसमें भी निगम को 25 वर्षों तक 4.24 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलेगी। तीसरे चरण में नीमच में 20 मेगावाट का एक अन्य सोलर संयंत्र लगना शुरू हो गया है। इसकी लागत भी 90 करोड़ रुपये होगी। इसमें भी निगम को केवल 28 करोड़ रुपये देने होंगे।

84 इंस्पेक्टर बनेंगे डीएसपी, सीएम के निर्देश के बाद पीएचक्यू ने तैयार किया प्रस्ताव, गृह विभाग को भेजा

84 inspectors will become DSP, after instructions from CM, PHQ prepared proposal, sent it to Home Department भोपाल। प्रदेश के 84 इंस्पेक्टर जल्द ही कार्यवाहक डीएसपी बनाए जाने वाले हैं। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय की प्रशासन शाखा में प्रस्ताव तैयार कर लिया है। प्रस्ताव गृह विभाग को भेज भी दिया है। इसके लिए इंस्पेक्टरों की सीनियर्टी की स्क्रूटनी भी की गई है। प्रदेश में पुलिस अफसरों की पदोन्नति किए को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस अफसरों को निर्देश दिए थे।इस निर्देश के पालन में पिछले महीने पुलिस मुख्यालय ने करीब 13 सौ पुलिस कर्मियों और जवानों को पदोन्नति दी। अब इसमें उपनिरीक्षक से कार्यवाहक निरीक्षक और निरीक्षक से कार्यवाहक ऊरढ की पदोन्नति की जाना है। इस क्रम में डीएसपी की पदोन्नति का काम तेजी से चल रहा है। पुलिस मुख्यालय की कार्मिक शाखा के अफसर इस काम में तेजी से लगे हुए हैं। इसमें वे 250 सीनियर निरीक्षकों के रिकॉर्ड को खंगाल रहे हैं। जिसमें इनकी डीई सहित अन्य जांचों को देखा जा रहा है। उनके रिकॉर्ड को खंगालने के बाद जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजा जाएगा। वन टर्म प्रमोशन होगा पुलिस अफसरों को वन टर्म प्रमोशन देने की प्रक्रिया पिछले कुछ सालों से चल रही है। दरअसल प्रदेश में पदोन्नति पर कोर्ट की रोक होने के चलते पुलिस अफसरों को कार्यवाहक पद देकर पदोन्नति दी जा रही है। इसी क्रम में सभी के प्रमोशन किए जा रहे हैं। जिसमें उन्हें उच्च पद का प्रभार दिया जाता है। प्रदेश में निरीक्षकों से डीएसपी बनने लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पिछले साल भी बड़ी संख्या में निरीक्षकों को कार्यवाहक डीएसपी बनाकर उन्हें डीएसपी का प्रभार दिया था। इससे बाद भी यह पदोन्नति पाने वालों की संख्या में कमी नहीं आई। इस साल होने वाली 84 पदोन्नति के बाद प्रमोशन की स्थिति कुछ हद तक बेहतर हो सकती है।

आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए केन्द्रवार 10-10 सीएचओ की तैनाती की जाएगी।

Center wise 10-10 CHOs will be deployed for making Ayushman cards. विशेष पिछड़ी जाति के सभी पात्र किसानों के केसीसी बनाने में मिली सफलता स्‍वीकृत वनाधिकार पट्टों के किसानों के भी केसीसी बनाये जायेंगे बालाघाट । विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों के समग्र विकास के लिये भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्‍याय महाअभियान (पीएम जन-मन) चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत जिले की बैगा जनजाति के समग्र विकास के लिये जिला प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास करते हुये कुल 260 बसाहटों में जन कल्‍याणकारी योजनाओं के साथ-साथ आधारभूत व्‍यवस्‍थाएं सुनिश्चित की जा रही है। गुरुवार को कलेक्‍टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने पीएम जन-मन योजनांतर्गत किये जा रहे कार्यो की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान आयुष्‍मान कार्ड बनाने मे आ रही समस्‍या को देखते हुये निर्देश दिये कि जनपद सीईओ अब केंद्रवार 10-10 सीएचओ की ड्यूटी आयुष्‍मान कार्ड बनाने लगायेंगे। सहकारी केंद्रीय बैंक के सीईओ श्री आरसी पटले ने बैठक में बताया कि बैगा जनजाति के 97 पात्र किसानों के केसीसी बनाने का लक्ष्‍य था वो पूर्ण कर लिया गया है। इस संबंध में कलेक्‍टर डॉ. मिश्रा ने सीईओ श्री पटले सहित सभी एसडीएम को निर्देशित किया कि पीएम जन-मन योजना में जितने भी बैगा जनजाति के पात्र नागरिकों को वनाधिकार पट्टे प्रदान किये जायेंगे उन्‍हें विशेष रूप से केसीसी भी प्रदाय किया जाना है। एसडीएम इस संबंध में उपखंड स्‍तरीय समिति में वनाधिकार पट्टों का निर्धारण कर जिला स्‍तरीय समिति के पास शीघ्रता से भेजे। बैठक में जिपं सीईओ श्री डीएस रणदा, एडीएम श्री ओपी सनोडिया, एसी ट्राइबल श्री पीएन चतुर्वेदी, डीएसओ ज्‍योति बघेल सहित अन्‍य विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे। पलायन कर गये नागरिकों के मोबाईल नम्‍बरों पर सम्‍पर्क करे राशन कार्ड सहित आधार कार्ड बनाने की समीक्षा के दौरान विभिन्‍न विभागों व जनपद सीईओ द्वारा जानकारी दी गई कि कई नागरिक पलायन कर जाने से उनके आधार जाति और संबंधित व्‍यक्ति का राशन कार्ड या पात्रता पर्ची बनाने में समस्‍या आ रही है। कलेक्‍टर डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिये कि ऐसे व्‍यक्तियों के मोबाईल न. तलाश करे और उनसे सम्‍पर्क कर आधार, जाति प्रमाण पत्र, आयुष्‍मान कार्ड तथा राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूर्ण कराये। जिले में बैगा जनजाति की 260 बसाहटों में 31033 नागरिकों में से 1747 के आधार कार्ड बनने है जिसमें से अब तक 959 आधार कार्ड बनाये जा चुके है। इसी तरह 1478 के जाति प्रमाण पत्र में से पीएम जन-मन अभियान के दौरान 878 के जातिप्रमाण पत्र बनाये गये है। आयुष्‍मान कार्ड की बात की जाये तो कुल 3683 के आयुष्‍मान कार्ड बनाये जाने थे जिसमें गुरुवार तक अभियान के दौरान 1348 के कार्ड बनाये गये है। इसके अलावा 381 नागरिकों के राशन कार्ड बनाने के मामले में गुरुवार तक 179 के कार्ड बनाये जा चुके है।

अतिथि शिक्षक सुसाइड मामला: गिरफ्तारी के 24 दिन बाद प्राचार्य को किया निलंबित

Guest teacher suicide case: Principal suspended 24 days after arrest 8 दिसंबर को भेजा था पत्र भोपाल। भोपाल जिले के ग्राम हर्राखेड़ा स्थित शासकीय अरविंद भार्गव हायर सेकंडरी स्कूल के अतिथि शिक्षक सुसाइड मामले में लोक शिक्षण संचालनालय ने करीब 24 दिन बाद अब प्राचार्य श्रीप्रकाश विजयवर्गीय को निलंबित किया है। बताया जा रहा है कि डीईओ अंजनी कुमार त्रिपाठी ने आयुक्त लोक शिक्षण अनुभा श्रीवास्तव को निलंबित करने के लिए 8 दिसंबर को पत्र भेजा था। जिस पर 24 दिन बाद कार्रवाई की गई है। आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि में विजवर्गीय का मुख्यालय कार्यालय कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक भोपाल संभाग, भोपाल मप्र रहेगा एवं निलंबन काल में उन्हे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। गलतियों भरे आदेश पर हस्ताक्षर भी हो गएमामले में 24 दिन की देरी के बाद जारी किए गए आदेश में कुछ गलतियां भी की गई हैं। जारी आदेश में बताया गया है कि प्रकरण में अभियुक्त श्रीप्रकाश विजयवर्गीय को पुलिस ने 19 दिसंबर को अरेस्ट कर न्यायालय में पेश किया था और जेल भेज दिया था। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 8 दिसंबर 2024 को इसकी सूची दे दी गई थी। इस आदेश पर बकायदा लोक शिक्षण आयुक्त द्वारा हस्ताक्षर भी किए गए हैं, लेकिन इस गलती पर ध्यान नहीं दिया गया। यह है पूरा मामला: जानकारी के मुताबिक मूलतःअशोक नगर निवासी आकाश यादव पिता गोपाल यादव (23) यहां ग्राम हर्राखेड़ा स्थित शासकीय अरविंद भार्गव हायर सेकेंडरी स्कूल में बतौर अतिथि शिक्षक नौकरी कर रहे थे। पिछले साल 13-14 अक्टूबर को आकाश ने फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया था। आकाश के पास मिले सुसाइड नोट में लिखा था कि प्रिंसिपल श्रीप्रकाश विजयवर्गीय उसके स्थान पर अपने साले को रखना चाहते हैं। अतिथि शिक्षक छगनलाल शाह और नरेंद्र दुबे, प्रिंसिपल के साथ मिलकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। सुसाइड नोट में आगे लिखा है कि आज मैं जो कदम उठाने को मजबूर हूं। मामले में गुनना थाना पुलिस ने प्राचार्य समेत तीन लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था। घटना वाले दिन से ही प्राचार्य बिना बताए स्कूल से गायब:घटना वाले दिन से ही प्राचार्य बिना बताए स्कूल से गायब हो गए थे। उसके गायब होने के बाद भी विभाग की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं की गई थी। जिला शिक्षा अधिकारी अंजनी कुमार त्रिपाठी ने आयुक्त लोक शिक्षण अनुभा श्रीवास्तव को प्रस्ताव बनाकर भेज दिया था, लेकिन लोक शिक्षण के अफसर मामले में अनजान बने हुए थे। वहीं, प्राचार्य विजयवर्गीय की हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद गुनगा थाने में सरेंडर कर दिया।

निजी अस्पताल में निवेश के नाम पर 130 लोगों से 5 करोड़ की ठगी

130 people cheated of Rs 5 crore in the name of investment in private hospital जालसाज दुकान, मकान में ताले लगाकर फरार भोपाल। कोलार थाना क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में निवेश के नाम पर जालसाज ने 130 लोगों से रुपए ऐंठ लिए। सभी से अलग अलग धनराशि लेने वाले जालसाज ने करीब पांच करोड़ का चूना लगाया है। ठगी का पता उस समय लगा जब निवेश की समयावधि खत्म हो गई और लाभ लेने पहुंचे। इस दौरान पता चला कि जालसाज अपनी दुकान और मकान में ताला लगाकर फरार हो चुका है। पीड़ित ने क्राइम ब्रांच में शिकायत की है। पुलिस ने शिकायती आवेदन लेकर जांच शुरू कर दी है। आरोपी का नाम श्यामदास बताया जा रहा है। श्यामदास औरंगाबाद का है। पूर्व में वह भोपाल में रह रहा था। उसने लोगों को बताया था कि यदि अस्पताल में निवेश करते हैं तो अस्पताल के लाभ के साथ उनकी राशि बढ़ाकर दी जाएगी। शुरुआत में आरोपी ने कम पैसा निवेश कराया था और बदले में लाभ भी दिया। बाद में जब लोगों को उस पर विश्वास हो गया तो उसने बड़ी रकम निवेश कराई और फरार हो गया।

डिलेवरी में देरी से एक लाख उपभोक्ता गोदाम से ले रहे सिलेंडर, नहीं मिल रही 29.26 रुपए की रिबेट

डिलेवरी में देरी से एक लाख उपभोक्ता गोदाम से ले रहे सिलेंडर, नहीं मिल रही 29.26 रुपए की रिबेट गैस एजेंसी संचालकों की मनमानी नहीं हो रही दूर भोपाल। घरेलू गैस सिलेंडर की होम डिलेवरी में देरी करने की वजह से प्रत्येक माह एक लाख से अधिक उपभोक्ता गैस एजेंसियों के गोदामों से सिलेंडर ले रहे हैं। जबकि गैस एजेंसी संचालक उन्हें 29.26 पैसे की रिबेट नहीं दे रहे हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को गोदाम से सिलेंडर लेना महंगा पड़ रहा है। बताया जाता है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग करने के तीन दिन तक सिलेंडर की डिलेवरी नहीं की जाती है, जिसकी वजह से उपभोक्ताओं को गोदाम पर जाकर सिलेंडर लेना पड़ता है। राजधानी में करीब आठ लाख घरेलू गैस कनेक्शन हैं। गैस सिलेंडर की होम डिलेवरी पर एक सिलेंडर पर 29.26 रुपए और पांच किलो सीएनजी पर 14.63 रुपए रीबेट मिलती है। गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार राजधानी में रोजाना 10 हजार घरेलू और एक हजार कामर्शियल सिलेंडर की सप्लाई होती है। रोजाना साठ से सत्तर फीसदी सिलेंडर की ही होम डिलेवरी हो पाती है। बाकी सिलेंडर खुले में गाड़ी से दिए जाते हैं या डायरेक्ट गोदाम से सिलेंडर लिए जा रहे है। जिला आपूर्ति नियंत्रक मीना मालाकार का कहना है कि गैस सिलेंडर की होम डिलेवरी नहीं हो रही और उपभोक्ता को गैस गोदाम से सिलेंडर लेने जाना पड़ रहा है तो वह रीबेट के 29.26 रुपए देना उनका अधिकार है।

ई- रिक्शा,आपे बेलगाम राजधानी के विभिन्न इलाकों में रोजाना लग रहा जाम

E-Rickshaw Aape Belgaum is causing daily traffic jam in various areas of the capital. बस स्टैंड व स्टेशन पर प्रीपेड बूध बंद होने से आटो व ई-रिक्शा चालक यात्रियों से कर रहे मनमानी भोपाल। राजधानी की सड़कों पर चलने वाले ई- रिक्शा, आटो, आपे आटो, कैब भी मोटर व्हीकल एक्ट का पालन नहीं कर रहे हैं। नियमों का ठेंगा दिखाकर बेलगाम सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों से लोगों की जान संकट में बनी रहती है। इन वाहनों पर कार्यवाई करने के लिए चौराहों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस को जांच करने की फुर्सत तक नहीं हैं। वहीं आरटीओ उड़नदस्ता भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है।मंगलवार को हरिभूमि ने राजधानी के रंगमहल न्यू मार्केट, कोलार, भेल पिपलानी सहित अन्य मार्गों पर ई- रिक्शा, आटो, आपे आटो, कैब की पड़ताल की। जो सूरत-ए-हाल दिखे वे बेहद चिंताजनक हैं। ओवर स्पीड, ओवर लोडिंग वाहन बेधड़क नियम रौंदकर भागते दिखे, इतना नहीं यात्रियों से मनमाना किराया लेना, अभद्रता की शिकायतें सुनने वाला कोई नहीं दिखा। आलम ये है कि रात नौ बजे के बाद तो किराया दोगुना से अधिक हो जाता है। यात्रियों को गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंचाने की रोजना शिकायतें सामने आ रही हैं। सबसे अधिक परेशानी भोपाल व रानीकमलापति स्टेशन के बाहर से आने वाले यात्रियों को सामना करना पड़ रहा है। यात्री परेशान हो रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी बेफिक्र है। तेजी से बढ़ रहे हैं ई-रिक्शा राजधानी में तेजी से ई-रिक्शा बढ़ रहे हैं। कोलार, करोद, भेल, अवधपुरी, अयोध्या बायपास, मिसरोद, बुधवारा, सोमवारा, मंगलवारा, गांधी नगर सहित शहर का एक भी ऐस क्षेत्र नहीं है, जहां पर मनमर्जी से ई-रिक्शा चलते हुए नहीं मिले। क्षमता से अधिक यात्री बैठाना, ओवर टैकिंग करना, अचानाक बीच सड़क पर कहीं भी चालक ई-रिक्शा को मोड़ देते हैं। अभी तक तय नहीं किए मार्गइससे आए दिन वाहनों के भिड़ने की घटनाएं हो रही हैं। अब तक आरटीओ की ओर से भीतरी कालोनियों में आने-जाने के लिए मार्ग तय नहीं किए हैं। मुख्यमार्गों पर ही ई-रिक्शा नियमों का ठेंगा दिखाकर दौड़ रहे हैं।बस स्टैंड व स्टेशन पर प्रीपेड बूध बंद, मनमानी जारी जिला प्रशासन स्तर पर शहर में आटो के संचालन पर नजर रखने के लिए बस स्टैंडों व रेलवे स्टेशनों पर प्रीपेड बूथ शुरू किए गए थे। इसमें जाकर लोग तय गंतव्य के पहले से निर्धारित किराए की सूची देते थे। उसकी प्रीपेड में बैठे कर्मचारी रसीद देता था। वह रसीद संबंधित यात्री गंतव्य पर पहुंचने के बाद आटो चालक को देता था। फिर आटो चालक वापस प्रीपेड बूथ पर आकर रसीद देकर पैसे लेते थे। इससे आटो चालक यात्रियों से अधिक किराया नहीं ले पाते थे। अब प्रीपेड बूध बंद हैं और आटो चालकों को मनमानी जारी है। कैब पालिसी का असर नहींमोबाइल एप के जरिए संचालित कैय व रैपिडो की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए परिवहन विभाग की कैब पालिसी है। इसके तहत इन वाहनों को सिटी का परमिट लेना होता है, कैब में पैनिक बटन लगना जरूरी है, यात्रियों पर अधिक किराया न लेना संहित अन्य नियम बने है। इसके बाद भी जमीन पर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। आलम ये है कि जिम्मेदार भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। शहर में वाहन 13000 आटो 5000 आपे आटो, 4000 कैब, 6000 ई-रिक्शा हैं। 50 हजार से अधिक यात्री हर दिन करते हैं सफरअपर परिवहन आयुक्त अरविंद सक्सेना ने बताया कि मोटर व्हीकल एक्ट का पालन नहीं करने वाले सभी वाहने को जब्त किया जाता है। समन शुल्क भी लिया जाता है। बसों का चेकिंग अभियान भोपाल सहित प्रदेश भर में निरंतर चल रहा है। जल्द ही कैब, आटो पर की भी जांच कराई जाएगी।

प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी , “नल जल योजना” पर भ्रष्टाचारियों ने लगाया ग्रहण , अफसरो,विधायको से लेकर मंत्री तक बंटता है कमीशन

Prime Minister’s ambitious “Tap Water Scheme” has been eclipsed by the corrupt, commission is distributed from officers, MLAs to ministers. विशेष संवादाता देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ,” नल जल योजना ” जिसके माध्यम से प्रत्येक गरीब परिवार के घर में नल से जल पहुंचने का कार्य किया जा रहा है । मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री की इस , नल जल योजना को , पब्लिक इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सब इंजीनियर एसडीओ से लेकर विभाग के प्रमुख सचिव इसमे कमिशन के रूप मे भारी कमाई कर रहे हैं । सरकार के नेता तक इस योजना में भ्रष्टाचार कर के पलीता लगाने में लगे हुए हैं। मध्य प्रदेश के 52 अब 55 जिलों में इस योजना को पूरा किया जाना है । प्रत्येक जिले में 200 करोड़ से 350 करोड रुपए तक का बजट है ।इस बजट को बंदर बांट की तरह बांटने में अधिकारी और कर्मचारी अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं ।वर्तमान समय में विभाग के‌ प्रमुख सचिव संजय शुक्ला है, जो पिछले लगभग डेढ़ 2 सालों से पदस्थ हैं । इससे पहले भी संजय शुक्ला इस पद पर रह चुके हैं । जिसके कारण उन्हें इस विभाग के एसडीओ से लेकर चीफ इंजीनियर व ईएनसी की समस्त जानकारी है । “नल जल योजना ” में बड़ी मात्रा में सामान की सप्लाई का काम किया जाता है । बड़ी-बड़ी कंपनियां यहां सप्लाई का काम विभाग में करती हैं, सूत्रों की माने तो पी एस ऐसे बड़े ठेकेदारों को डायरेक्ट बुलाकर उनसे बात करते हैं । जाति विशेष अधिकारी पर प्रमुख सचिव संजय शुक्ला का संरक्षण,12 वर्षो से जमे है राजधानी में शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में संजय शुक्ला ने अपने सजातीय अधिकारियों को खुला संरक्षण दे रखा था। मध्य प्रदेश के इस विभाग के एक अधिकारी, जो भोपाल राजधानी में पिछले 12 सालों से एक ही विभाग में पदस्थ हैं उन्हें हटाने के लिए विभागीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखे लेकिन संजय शुक्ला ने अपने सजातिय अधिकारी को वहां से नहीं हटाया और मुख्यमंत्री और मंत्री की नोट सीटों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया ।मध्य प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हो गया है ,शिवराज सिंह चौहान की जगह डॉक्टर मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं ।जाहिर संजय शुक्ला डॉक्टर मोहन यादव को भी अपने जाल में फंसने का पूरा प्रयास करेंगे और इस मलाईदार पद पर बने रहने की कोशिश करेंगे अपने हथकंडे अपना कर‌ पी एस शुक्ला विभागीय मंत्री को भी दरकिनार कर देते हैं और मन माने तरीके से खुद तो काम करते ही हैं और अपने अधीनस्थ अधिकारियों से भी करवाते हैं मध्य प्रदेश में , “जल जीवन योजना “को पूरी तरह से पलीता लगाने का काम विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा निरंतर जारी है। यदि इसी तरह इस विभाग में “नल जल योजना ” को ठिकाने लगाने में यह अधिकारी और कर्मचारी लग रहे हैं ,तो निश्चित ही इस नल जल योजना का लाभ मध्यप्रदेश के गरीब जनता को नहीं मिल पाएगा और इसका ठीकरा मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सिर पर फोड़ दिया जाएगा । मलाई अधिकारी~कर्मचारी खा जाएंगे ।यदि अधिकारियों और कर्मचारी द्वारा इस तरह से योजना के पैसे का बंदरबाट किया जाएगा तो, इस योजना का कार्य गुणवत्ता के आधार पर नहीं किया जा सकता जहां तक इस योजना का सवाल है ,देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव चाहेंगे कि इस योजना का लाभ अधिक से अधिक आम गरीब जनता तक पहुंचे । जिस उद्देश्य से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना को लागू किया है उसे योजना का क्रियान्वयन गुणवत्ता के साथ उसका लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे यदि यह लाभ आम नागरिक तक नहीं पहुंचता है तो इसके लिए दोषी अधिकारी और कर्मचारियों को निष्पक्ष जांच कर कर उन्हें दंडित भी किया जाना चाहिए उनके खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जाने चाहिए । विधायक व सांसदो तक जाता था कमिशन एक तरफ अधिकारी कर्मचारी इस काम में सप्लाई से लेकर काम करने वाले हर मामले में मोटी रकम कमीशन के रूप में ले रहे हैं,तो वहीं दूसरी तरफ सूत्रों पर भरोसा करें तो बड़े-बड़े ठेकेदार जो इस योजना में कार्य कर रहे हैं , उनसे स्थानीय विधायक से लेकर संसद तक चंदे के रूप में मोटी रकम वसूल रहे हैं । विभाग का कमीशन सांसदों और विधायकों को दिए जाने वाला पैसा अगर इसी तरह बटता रहेगा तो इस योजना में संबंधित ठेकेदार योजना को पूरा गुणवत्ता के साथ कैसे कर पाएगा यह सोचने वाली बात है। मामले की जाचं हो मध्य प्रदेश सरकार के नए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को इस पूरे मामले को संज्ञान में लेना चाहिए और नल जल योजना की निष्पक्ष अधिकारियों से जांच करानी चाहिए। इसकी मॉनिटरिंग करनी चाहिए और जो लोग भी इसमें दोषी पाए जाते हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए । अन्यथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस नल जल योजना को यह अधिकारी और कर्मचारी पलीता लगाए बिना नहीं रहेंगे और ठीक रहा मध्य प्रदेश के योग्य शिक्षित योग्य मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सर पर फोड़ दिया जाएगा। मंत्री और मुख्यमंत्री के आदेशों को नहीं मानते प्रमुख सचिव शुक्ला विभाग में पदस्थ पी.एस . संजय शुक्ला की अपने विभाग में कितनी पकड़ है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि वह अपने विभाग में सजातिय अधीनस्थ अधिकारियों की कितनी मदद करते हैं उनकी मदद करने के लिए यह अधिकारी अपने विभाग के मंत्री और मुख्यमंत्री तक की नोटशीट को रद्दी की टोकरी में डालकर उनके आदेशों की सरेआम अवेलना करते हैं । मुख्यमंत्री व मंत्री से जनता की आस अब मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री बदल गए हैं शिवराज सिंह चौहान की जगह डॉक्टर मोहन यादव मुख्यमंत्री बन गए हैं और मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव की जगह अब सम्पतिया उईके बन गई हैं ।अब देखना यह होगा कि यह अधिकारी मुख्यमंत्री और अपने विभागीय मंत्री को ,अपनी गिरफ्त में लेने में सफल हो जाते हैं या मुख्यमंत्री और मंत्री ऐसे मनमाने तरीके से और जातिवाद के आधार पर भ्रष्टाचार के आधार पर कार्य करने वाले अधिकारी की विभाग से विदाई करते हैं ।

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