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Mahakumbh 2025: सबसे बड़ा अखाड़ा कौन सा है, कुंभ मेला का होते हैं मुख्य आकर्षण

mahakumbh 2025 biggest juna akhara in india kumbh mela akhadas history Mahakumbh 2025: महाकुंभ सनातन धर्म का सबसे बड़ा मेला है. इस मेले में देश-दुनिया से लाखों-करोड़ों लोग आते हैं. महाकुंभ में अखाड़े आकर्षण का प्रमुख केंद्र होते हैं. इस दौरान अखाड़ों का पेशवाई और नगरप्रवेश होता है. सभी अखाड़ों की अपनी भूमिका होती है. महाकुंभ 2025 प्रयागराज में साधु-संतों के अखाड़े प्रवेश कर रहे हैं. आइए जानते हैं महाकुंभ का सबसे बड़ा अखाड़ा कौन सा है. महाकुंभ शुरू – 13 जनवरी 2025महाकुंभ समाप्त – 26 फरवरी 2025अखाड़ा क्या है ? (What is Akhara) अखाड़ा नाम सुनते ही मन में कुश्ती की तस्वीर आती है लेकिन साधु-संतों के संदर्भ में अखाड़े एक तरह से हिंदू धर्म के मठ कहे जा सकते हैं. अखाड़ा साधुओं का वह दल होता है जो शस्त्र विद्या में निपुण होता है. किसने की अखाड़े की शुरुआत अखाड़ों की शुरुआत आदि शंकराचार्य ने की थी। कहा जाता है कि उन्होंने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र विद्या में निपुण साधुओं के संगठन बनाए थे. अभी कुल 13 अखाड़े हैं, जिन्हें 3 कैटेगरी शैव, वैष्णव और उदासीन में बांटा गया है. कितने अखाड़े हैं शैव अखाड़े- शैव संप्रदाय के कुल सात अखाड़े हैं। इनके अनुयायी भगवान शिव की पूजा करते हैं.वैष्णव अखाड़े – वैष्णव संप्रदाय के तीन अखाड़े हैं, जो भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा करते हैं.उदासीन अखाड़े – उदासीन संप्रदाय के भी तीन अखाड़े हैं, इस अखाड़े की अनुयायी ‘ॐ’ की पूजा करते हैं.महाकुंभ में सबसे बड़ा अखाड़ा कौन सा है ? श्री पंचदशनाम जूना आखाड़ा को शैव संप्रदाय का सबसे बड़ा अखाड़ा माना गया है. महा इसकी स्थापना उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में 1145 में हुई.इस अखाड़े के इष्ट देव शिव और रुद्रावतार दत्तात्रेय हैं. इसका मुख्यालय वाराणसी में हैं.यह अखाड़ा नागा साधुओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है.नागा साधुओं की सर्वाधिक संख्या इसी अखाड़े में पाई जाती है. इसमें लगभग 5 लाख नागा साधु और महामंडलेश्वर संन्यासी हैं.इस अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज हैं और अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरी हैं.जूना अखाड़े की पेशवाई महाराजाओं की शान-ओ-शौकत जैसी होती है. इसमें स्वर्ण रथ समेत कई तरह के वैभव नजर आते हैं. इस अखाड़े की पेशवाई में हाथी भी शामिल होता है.

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की एक और गारंटी, RWA के तहत होगी सिक्योरिटी गार्ड की नियुक्ति

arvind kejriwal one more guarantee to delhite security guards appointed through rwa Delhi Vidhan sabha Chunav 2025: दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आमदी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चुनाव प्रचार को लेकर मचे घमासान के बीच दिल्ली वालों को एक और गारंटी देने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अब सिक्योरिटी गार्ड की भर्ती आरडब्लूए के जरिए होगी. उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली में लोग डरे हुए हैं. बीजेपी दिल्ली वालों से नफरत करती है. ‘दिल्ली को बना दिया क्राइम कैपिटल’ आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली को बीजेपी खासकर अमित शाह ने क्राइम कैपिटल बना दिया है. बीजेपी को दिल्लीवालों से कुछ लेना देना नहीं है, लेकिन हम दिल्लीवासियों के लिए काम कर रहे हैं.

World Hindi Day 2025 : वैश्विक पटल पर हिन्दी की बढ़ती प्रतिष्ठा

हर साल 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य हिन्दी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करना और इसकी महत्ता को उजागर करना है। World Hindi Day 2025 की थीम “हिन्दी: वैश्विक संवाद का सेतु” है, जो हिन्दी को एक अंतरराष्ट्रीय संवाद की भाषा के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में एक और कदम है। इतिहास और महत्व: World Hindi Day 2025 की शुरुआत 10 जनवरी 2006 में हुई थी। यह दिन 1975 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन, दुनिया भर में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और इसके महत्व को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हिन्दी दुनिया की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। 50 से अधिक देशों में इसे पढ़ाया जाता है और लगभग 60 करोड़ लोग इसे अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को आधिकारिक भाषा बनाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 2025 में हिन्दी की भूमिका: इस वर्ष विश्व हिन्दी दिवस पर तकनीक, शिक्षा, और सांस्कृतिक संवाद के क्षेत्र में हिन्दी की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डिजिटल युग में हिन्दी की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया, ब्लॉगिंग, और कंटेंट क्रिएशन में हिन्दी की प्रमुखता ने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वैश्विक मंच पर हिन्दी:-संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी:** संयुक्त राष्ट्र के कई मंचों पर हिन्दी में वक्तव्य दिए जा रहे हैं, जिससे इसकी प्रतिष्ठा बढ़ी है।-शिक्षा और तकनीक:** दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषा को प्रमुख विषय के रूप में अपनाया जा रहा है।-सिनेमा और साहित्य:** हिन्दी सिनेमा और साहित्य ने वैश्विक दर्शकों को प्रभावित किया है। हिन्दी में अनुवादित साहित्य अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो रहा है। भारत सरकार और हिन्दी का प्रचार-प्रसार: भारत सरकार ने हिन्दी के प्रचार के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें ई-हिन्दी पोर्टल, विश्व हिन्दी सम्मेलन, और विदेशी विश्वविद्यालयों में हिन्दी के शिक्षण को बढ़ावा देना शामिल है। विश्व हिन्दी दिवस के कार्यक्रम: 2025 में इस दिन को विशेष बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं: विश्व हिन्दी दिवस हमें हमारी मातृभाषा की शक्ति और महत्ता का एहसास कराता है। यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पहचान और विश्व से जुड़ने का माध्यम है। 2025 में, हमें हिन्दी को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। आइए, इस दिन संकल्प लें कि हिन्दी को हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे। “हिन्दी है हमारी पहचान, इसे बनाएं विश्व की शान!”

‘बिग बॉस 18’ का आखिरी टाइम गॉड बनने के लिए टास्क में भिड़े चुम और विवियन

मुंबई बिग बॉस 18 के प्रोमो में दिखाया गया है कि बिग बॉस कहते हैं, ‘आखिरी टाइम गॉड बनकर फिनाले वीक में जाएगा कौन? विवियन या चुम?’। इस वीडियो में दिखाया गया है कि विवियन और चुम के हाथ में एक स्ट्रेचर है, उसमें दो अलग-अलग रंगों की ईंट भरी है, जिसकी ईंट ज्यादा होगी, वो टाइम गॉड बनेगा और फिनाले वीक में चला जाएगा। इसके लिए विवियन और चुम अपना पूरा जोर लगा रहे हैं, लेकिन चुम के आगे विवियन भारी पड़ते हैं। वो अपना जोर लगाते हैं, तो चुम गिर पड़ती हैं। कुछ फैंस वीडियो देखने के बाद ये भी दावा कर रहे हैं कि चुम जानबूझकर गिरी हैं। चुम के गिरने से करण वीर मेहरा बहुत भड़क जाते हैं। वो कहते हैं, ‘आ जा ना, मेरे साथ आ ना तू।’ फिर वो कहते हैं, ‘लोगों को देखने दो कि विवियन डीसेना क्या है।’ इसके बाद विवियन पूरा स्ट्रेचर घसीट लेते हैं, जिससे चुम फिर से गिर पड़ती हैं और काफी दूर तक घिसटती हैं। वुमेन कार्ड खेल रही हैं चुम? इस प्रोमो पर फैंस के भी रिएक्शन आ रहे हैं। कुछ विवियन को सपोर्ट कर रहे हैं तो कई उनकी आलोचना कर रहे हैं। एक ने लिखा, ‘कुछ भी बोलो विवियन यहां सही है।’ दूसरे ने लिखा, ‘चुम ऐसा दिखावा कर रही है कि उसे चोट लगी है।’ एक और यूजर ने चुम के खिलाफ कॉमेंट किया, ‘वुमेन कार्ड खेलने की कोशिश करवा रहा है रजत और चुम। यही लास्ट टाइम ईडन को पानी फेंकना, बाल्टी के साथ मारना, रजत को ढकेलना वो सब सही नहीं दिखा।’ एक और यूजर ने लिखा, ‘चुम खुद लेट गई वो पकड़कर अब वुमेन कार्ड खेल रही है करण के साथ।’

प्रीतिश नंदी के निधन से बॉलीवुड में शोक की लहर, करीना – अनिल कपूर ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर प्रीतिश नंदी ने 73 साल की उम्र में 8 जनवरी 2025 को अंतिम सांस ली। उन्होंने हजारों ख्व्वाहिशें, प्यार के साइड इफेक्ट्स, कांटे, शादी के साइड इफेक्ट्स जैसी अनेक हिट फिल्में बनाई थीं। कार्डियक अरेस्ट के कारण अब वह दुनिया को अलविदा कह चले गए हैं। बॉलीवुड स्टार्स उन्हें नम आंखों से सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। पत्रकारिता से करियर की शुरुआत करने वाले प्रीतिश नंदी एक बेहतरीन कवि और दिग्गज फिल्म निर्माता थे। करियर की बात हो या समाज के प्रति योगदान देने की उन्होंने हर जिम्मेदारी को सराहनीय तरीके से निभाया। यही वजह है कि उनके जाने से बॉलीवुड को बड़ी क्षति हुई है। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता संजय दत्त ने प्रीतिश नंदी के निधन का दुख जताते हुए एक पोस्ट एक्स पर किया। बता दें कि संजय ने उनकी बनाई फिल्म साल 2002 की ‘कांटे’ और 2005 में आई ‘शब्द’ फिल्म में अभिनय किया है। दिग्गज फिल्म निर्माता के बारे में उन्होंने लिखा, ‘वह एक सच्चे रचनात्मक प्रतिभाशाली और दयालु व्यक्ति थे। उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।’

महामहिम राष्ट्रपति के नामे सौपा ज्ञापन “पी.सी.डब्ल्यू.जे.” आमला ने, ।

Memorandum submitted to His Excellency the President “P.C.W.J.” Amla, हरिप्रसाद गोहेआमला। “तू गलती से भी पत्रकार सुरक्षा कानून लागू मत कर देना, मेरे कलम के लिए ऐ दोस्त, कही देश भर में क्रांति की मशाल न जल जाए, क्योंकि तेरी फितरत शांति की नही, आग लगाने की है” चुकी चौथी पालिका के साथ खेल खेलना तेरी फितरत बंन गई, जिसका नतीजा किसी भ्रष्टचार सड़क ठेकेदार की ठेकेदारी को उजागर करता चौथी पालिका का शिपासलर या पत्रकार को आजीवन काल के गाल में समा दिया गया। फिर भी छत्तीसगढ़ सरकार मौन दिखाईं देने लगी। चुकी छत्तीसगढ़ के युवा पत्रकार मुकेश चंद्रकार की निर्मम हत्या के मामले में अखिल भारतीय संघटन प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के आमला अध्यक्ष एवम साथी पदधिकारियों ने‌ महामहिम राष्ट्रपति के नामे अनुविभागीय अधिकारी महोदय को ज्ञापन सौपा है। प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है, कि छत्तीसगढ़ के युवा पत्रकार मुकेश चंद्रकार के हत्यारों को फांसी की सजा दी जाए, और पत्रकार के पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान कर पीड़ित परिवार के साथ उचित न्याय किया जाए। चुके प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट ने ज्ञापन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को अवगत कराया है, कि पत्रकार मुकेश चंद्रकार ने सड़क निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार को उजागर किया था। ठेकेदार द्वारा किए गए इस भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने के बाद मुकेश चंद्रकार की निर्मम हत्या कर शव को सेफ्टी टैंक में फेंक दिया गया। प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट ने मांग की है, कि इस जघन्य हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर फांसी की सजा सुनिश्चित की जाए, साथ ही देशभर में आए दिन पत्रकारों पर बढ़ती हिंसक घटनाओं को देखते हुए पत्रकार सुरक्षा कानून शीघ्र लागू करे, ताकि भविष्य में इस तरह की अप्रिय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। चुकी एक पत्रकार देशहित में समाज के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना सत्य को उजागर करता है, जिसकी सुध लेने वाला शायद भारत वर्ष में कोई दिखाईं नहीं दे रहा, जिसका पुरा लाभ असामाजिक तत्व उठते हुए दिखाईं दे रहें हैं। भारत सरकार को ज्ञात होना चाहिए की प्रभावी रूप से पत्रकार दुनिया की छवि को वास्तविकता पर सुचारू रूप से पेश करते हैं। पत्रकारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने मौलिक अधिकार का प्रयोग करने के लिए हिंसा और धमकी का सामना आए दिन करना पड़ता है या पड रहा है। पत्रकारों को जिन खतरों का सामना करना पड़ता है, उनमें हत्या, अपहरण , बंधक बनाना, उत्पीड़न, धमकी, जबरन गायब कर दिया जाना, तक शामिल हैं, फिर भी पत्रकार वास्तविक समझ के साथ अपना दायत्व पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करते हैं। जिस तरह से पत्रकारों के पास शक्ति होती है, और पत्रकार जिम्मेदारी से उपयोग करने की सामाजिक जिम्मेदारी के साथ कदम उठाते है। पत्रकारों के पास जनता की धारणाओं को प्रभावित करने की शक्ति है, और साथ ही पत्रकार सच बताने और लोगों की आवाज़ सुनने और सरकार तक पहुंचाने का कार्य भी ज़िम्मेदारी के साथ करते हैं। प्रेस के प्रसार के अधिकार में प्रसार की मात्रा तय करने की स्वतंत्रता भी शामिल है।चुके भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1) (ए) के तहत, पत्रकारों को भाषण और अभिव्यक्ति की आज़ादी मिली हुई है, जैसे प्रकाशित करने का अधिकार, सूचना प्रसारित करने का अधिकार, सूचना प्राप्त करने का अधिकार, इसी तरह भ्रष्टचार उजागर करने का अधिकार जिसका भयावह परिणाम छत्तीसगढ़ के युवा पत्रकार मुकेश चंद्रकार की निर्मम हत्या कर दी गई, और छत्तीसगढ़ सरकार की शायद मुंह से जुबान गायब हो गई। जिसे भारी आक्रोश के साथ प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट के पदधिकारियों ने ज्ञापन सौंपकर महामहिम राष्ट्रपति से पत्रकार सुरक्षा कानून लागु करने की मांग करते हुएछत्तीसगढ़ के यूवा पत्रकार मुकेश चंद्रकार के हत्यारों को फांसी देते हुए पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट के आमला अध्यक्ष मोहम्मद आसीफ लंघा, आमला नगर उपाध्यक्ष नरेंद्र असोले, भूपेन्द्र पांडेय, रूपेश सोनी, संतोष राठौर, गोलू सोनी, दिलीप चौकीकर, नितिन खातरकर, मंगेश, पंकज अग्रवाल, राजू खातरकर, आकाश सोनी, अनिल साहू, दुर्गा प्रसाद जुंजारे, मदन साहू, ओर सभी पत्रकार साथी उपास्थित रहे। सरकार के प्रति भारी आक्रोश के साथ पत्रकारों ने कहा कि एक पत्रकार समाज के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना सत्य उजागर करता है। ऐसे में सरकार का दायित्व है, कि वह पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करते हुए दोषियों पर कठोर से कठोर दंडात्मक कार्यवाही करे

जुआ फड़ पर छापा, 5 आरोपी गिरफ्तार आमला पुलिस ने की कार्यवाही ।

Gambling raid raided, 5 accused arrested, Amla police took action. हरिप्रसाद गोहेआमला । पुलिस अधीक्षक बैतूल श्री निश्चल एन. झारिया के निर्देशानुसार जिले में जुआरियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में आमला पुलिस ने एसडीओपी बैतूल श्री मयंक तिवारी और अति. पुलिस अधीक्षक श्रीमति कमला जोशी के मार्गदर्शन में बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम हसलपुर में जुआ खेलते हुए 5 आरोपियों को पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया। थाना आमला से प्राप्त जानकारी अनुसार दिनांक 09.01.2025 को करीबन 11:30 बजे मुखबिर की सूचना पर आमला पुलिस ने हसलपुर डेम के पास छापा मारा। छापे के दौरान जुआ फड़ से कुल 5 आरोपी ताश के पत्तों से हार-जीत का जुआ खेलते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया । जिनसे नकदी: ₹9,600/-,ताश की गड्डियाँ: 1 जप्त किया गया पकड़े गए आरोपियों पर पुलिस ने जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। उक्त कार्यवाही में निरीक्षक सत्यप्रकाश सक्सेना, उनि नितिन पटेल, प्रआर 210 विकास वर्मा, आरक्षक 452 विवेक , 641 पलक सोलकी,576 कन्हैया रघुवंशी की विशेष भूमिका रही। सामाजिक बुराई के इस खेल पर पुलिस अधीक्षक का संदेशपुलिस अधीक्षक श्री निश्चल एन. झारिया ने नागरिकों से अपील की है:“जुआ एक सामाजिक बुराई है, जो अपराध और पारिवारिक विवादों को बढ़ावा देती है। बैतूल पुलिस जिले को अपराधमुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।”

Pushpa 2 Day 35: हिंदी में बुलेट ट्रेन बनी पुष्पा 2, रिकॉर्ड तोड़ कर रहा कमाई

नई दिल्ली पुष्पा 2 को बॉक्स ऑफिस पर रोकना अब असंभव सा हो गया है। अल्लू अर्जुन की पैन इंडिया रिलीज को सिनेमाघरों में आए 35 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन फिल्म के लिए लोगों में दीवानगी कम होने की जगह बढ़ती जा रही है। दुनियाभर में सफलता का परचम लहराने वाली इस फिल्म का ओरिजिनल भाषा तेलुगु में कलेक्शन लाखों में आ चुका है, लेकिन डोमेस्टिक बॉक्स ऑफिस ये मूवी हिंदी में रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। वरुण धवन की बेबी जॉन (Baby John) और नाना पाटेकर की वनवास भी इस फिल्म को हिंदी में टस से मस नहीं कर सके, उल्टा पुष्पा 2 ही इन दो फिल्मों का खाता क्लोज करने के बेहद करीब पहुंच चुकी है। 2024 की फिल्मों के लिए ही नहीं, अब अल्लू अर्जुन की पुष्पा 2, 2025 की फिल्मों पर भी ग्रहण लगाने की तैयारी में जुट चुकी है, क्योंकि रिलीज के 35वें दिन बुधवार को फिल्म ने हिंदी भाषा में एक बेहतरीन कमाई कर ली है। अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना की पुष्पा 2 की ओपनिंग हिंदी बॉक्स ऑफिस पर 70 करोड़ से हुई थी। 11 दिनों तक फिल्म की कमाई सिंगल डे पर 50 करोड़ से ऊपर रही। धीरे-धीरे बीतते वक्त के साथ मूवी की कमाई कम जरूर हुई, लेकिन अन्य फिल्मों के मुकाबले पुष्पा 2 ने हर दिन 32 दिनों तक 3 करोड़ से ज्यादा का हर रोज कलेक्शन किया।

‘जीतू और जय’ की जोड़ी के पीछे है दिग्विजय सिंह का माइंडगेम! कमलनाथ होते जा रहे हैं साइड

digvijay singh mind game behind new pairing of jeetu patwari and jai vardhan singh in mp congress भोपाल ! किसी बड़े टास्क या मिशन को पूरा करने के लिए पार्टनरशिप या कहे तो जोड़ी जरूरी होती है। खासकर कांग्रेस के अंदर की जोड़ी हमेशा चर्चा में रहती है। विधानसभा चुनाव के दौरान इस बार कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी थी। सियासी गलियारों में इसे जय-वीरू की जोड़ी कहा जाता था लेकिन यह खास कमाल नहीं कर पाई है। इन दिनों एमपी कांग्रेस में नई जोड़ी की चर्चा है, यह जोड़ी जीतू और जय की है। यानी जीतू पटवारी और जयवर्धन सिंह की। साथ आने के बाद इस जोड़ी ने कमाल भी शुरू कर दिया है। एमपी उपचुनाव में जीतू और जय की जोड़ी ने मिलकर श्योपुर में कमाल किया। कहा जा रहा है कि इस जोड़ी को आगे बढ़ाने में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का माइंडगेम है। इसकी वजह से कमलनाथ जैसे दिग्गज नेता असहज होने लगे हैं। पार्टी के दिग्गज नेता भी इशारों इशारों में कह चुके हैं कि इन सबके पीछे दिग्विजय सिंह ही हैं। दिग्गी राजा तैयार कर रहे मैदान दिग्गी राजा राजनीति से रिटायर्ड होने से पहले अपने बेटे के लिए मैदान तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसके लिए समय समय पर जयवर्धन सिंह को जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। जिसे लेकर दूसरे नेता और कार्यकर्ताओं में असंतोष भी दिखा है। वहीं जयवर्धन सिंह और जीतू पटवारी ने खुद को साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसके सबसे अच्छा एग्जांपल श्योपुर विधानसभा उपचुनाव हैं। इस चुनाव में जयवर्धन सिंह को प्रभारी बनाया गया था। इस दौरान जीतू और जयवर्धन ने जनमत साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। और उसका परिणाम जीत को तौर पर कांग्रेस पार्टी को मिला भी है। सीनियर नेता ने खड़े किए सवाल कांग्रेस में चल रहे इस माइंडगेम पर उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता सवाल खड़े कर चुके हैं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष रह चुके कांग्रेस के दिग्गज नेता अजय सिंह जीतू पटवारी की अध्यक्षता वाली एमपी कांग्रेस की नई कार्यकारिणी पर भी निशाना साधा था। इसे दौरान उन्होंने बयान देते हुए यह भी कहा था कि कांग्रेस का भगवान ही मालिक है। पर्दें के पीछे वालों पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को बर्बाद करने वाले लोग आज भी पार्टी को पीछे से चला रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट दोनों की एक मुलाकात से जुड़ा हुई वीडियो भी सामने आया है। जिसमें जीतू पटवारी और जयवर्धन सिंह हंसी खुशी एक दूसरे से बात करते नजर आ रहे हैं। इसे दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी चलते चलते उनका हाथ थामते भी नजर आ रहे हैं। ये वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है। जिस पर लोग अपनी अपनी प्रतिक्रिया भी देते नजर आ रहे हैं। ऐसे ही एक लाला यादव नामक यूजर से लिखा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में ये जोड़ी बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। अब देखना होगी कि आने वाले समय में क्या होता हैं।

6 जनवरी एफआईआर दर्ज, 7 को एपीसीसीएफ मीना एक और शाखा का प्रभार

FIR registered on 6th January, charge of another branch of APCCF Meena on 7th भोपाल। जंगल महकमे के इतिहास में यह पहला प्रकरण है कि महिला प्रताड़ना को लेकर जिस एपीसीसीएफ मोहन मीणा के विरुद्ध उसी अफसर को अगले दिन 7 जनवरी को अनुसंधान विस्तार एवं लोकवानिकी शाखा का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया। मौजूदा तौर पर मीणा नीति विश्लेषण मूल्यांकन शाखा में पदस्थ है। पीसीसीएफ प्रशासन एक विवेक जैन के आदेश पर महकमे के अधिकारी हतप्रभ हैं।विभाग में एपीसीसीएफ स्तर के अधिकारियों के कमी के चलते प्रभार दिया जा रहा है। ऐसे में एपीसीसीएफ मीणा को भी नीति विश्लेषण मूल्यांकन शाखा के अलावा अनुसंधान विस्तार एवं लोकवानिकी शाखा का अतिरिक्त प्रभार देने का आदेश पीसीसीएफ विवेक जैन ने जारी कर दिया है। पीसीसीएफ जैन के आदेश जारी करने की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं। आखिरकार फिर दर्ज होने के पहले तक मीणा को प्रभार क्यों नहीं दिया गया? तब भी कैंपा सहित अन्य शाखाओं के प्रभार अन्य एपीसीसीएफ को प्रभार दिए गए थे। पीसीसीएफ जैन के आदेश पर विभाग के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की। बातचीत के दौरान नाम न छापने की शर्त पर अपने – अपने कमैंट्स दिए। किसी ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने पर उनके हौसले को बरकरार रखने के लिए अतिरिक्त प्रभार दिया गया। अन्यथा लंबे समय से विभाग में मीणा की उपेक्षा की जा रही थी। उन्हें पहले भी दिया जा सकता था। एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि समझ से परे है। एक अधिकारी ने कहा कि पुलिस प्रशासन को चुनौती है और महिलाओं के प्रति उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकती है। इस कहावत के पीछे उनकी धारणा है कि पीसीसीएफ पी धीमान और एपीसीसीएफ मोहन मीणा के बीच 36 का आंकड़ा है। काम करने में उनमें टकराहट की खबरें सुनाई देने लगेंगे। एक अफसर ने व्यंग्य कसते हुए कहा कि योग्यता के आधार पर प्रभार दिया गया है। उल्लेखनीय है कि 6 जनवरी को बैतूल के गंज पुलिस स्टेशन में कार्यस्थल पर महिला प्रताड़ना को लेकर एपीसीसीएफ मीणा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। एफआईआर दर्ज करने से पहले जिला न्यायालय के प्रथम व्यवहार न्यायधीश के समक्ष पीड़ता ने 164 में बयान दर्ज कराए। यह मामला 2021 का है। तब एपीसीसीएफ मोहन मीणा बैतूल वन वृत में पदेन सीसीएफ के रूप में पदस्थ थे।

दिल्ली के किसान, इस बार किसकी खड़ी करेंगे खाट, शिवराज-आतिशी में जमकर वाकयुद्ध!

delhi farmers whose cot will they destroy time fierce war of words between shivraj and atishi Delhi’s Farmers: दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार किसान भी मुद्दा बन रहे हैं। दिल्ली विधानसभा क्षेत्रों में करीब 300 से ज्यादा गांव हैं। ये गांव करीब आधा दर्जन सीटों को प्रभावित करते हैं। इस बार किसान महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। भाजपा ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पूरी तरह से इस काम में लगा रखा है। चौहान दिल्ली के किसानों से लगातार मिल रहे हैं। वह आप सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप भी लगा रहे हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी और शिवराज सिंह में किसानों को लेकर बयानबाजी हो चुकी है। शिवराज के पत्र पर आतिशी ने किया पलटवार शिवराज ने पिछले दिनों आतिशी को पत्र लिखकर दिल्ली के किसानों की व्यथा बताई थी। पलटवार करते हुए आतिशी ने जवाब दिया था कि भाजपा का किसानों के बारे में बात करना वैसे ही है, जैसे दाऊद अहिंसा पर प्रवचन दे रहा हो। उन्होंने कहा कि जितना बुरा हाल किसानों का भाजपा के समय हुआ, उतना कभी नहीं हुआ। पंजाब में किसान आमरण अनशन पर बैठे हैं। भाजपा के राज में किसानों पर गोलियां और लाठियां चलाई गई थीं। ‘शीशमहल’ पर सियासत…धरने पर बैठे आप नेता दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद ‘शीशमहल’ मामले को लेकर सियासत गर्मा गई है। आप सांसद संजय सिंह ने भाजपा को चुनौती दी कि वह 2700 करोड़ रुपए में बने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलीशान राजमहल को दिखाए। संजय सिंह ने कहा था कि वह पहले मुख्यमंत्री आवास जाएंगे। उसके बाद प्रधानमंत्री का आवास देखने जाएंगे। वह सौरभ भारद्वाज के साथ दिल्ली सीएम आवास पहुंचे। आप नेताओं को सीएम आवास में जाने से पुलिस ने रोक दिया। इस पर आप नेता धरने पर बैठ गए। बाद में दोनों नेता पीएम आवास के लिए निकले। रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पुलिस और आप नेताओं के बीच नोकझोंक हुई। दोनों आप नेता प्रधानमंत्री आवास के पास धरने पर बैठ गए।

भोपाल के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश: मंत्री करण सिंह वर्मा

Instructions to Tehsildars and Naib Tehsildars of Bhopal for timely action: Minister Karan Singh Verma भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्व प्रकरणों के शीघ्र और समयबद्ध निराकरण पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है। राजस्व मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की चेतावनी देते हुए राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को अपने कार्यों में तत्परता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कहा है। समयबद्धता पर जोर मंत्री करण सिंह वर्मा ने स्पष्ट किया कि लंबित राजस्व प्रकरणों के समाधान में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रकरणों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटाने की प्रक्रिया अपनाएं।उन्होंने कहा, “राजस्व प्रकरणों का समयबद्ध समाधान जनता के प्रति हमारी जवाबदेही को दर्शाता है। किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।” अनावश्यक विलंब नहीं होगा स्वीकार वर्मा ने सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि किसी भी मामले को अनावश्यक रूप से न रोका जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग में पारदर्शिता और कुशलता सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। कठोर कार्यवाही की चेतावनी कार्य में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मंत्री ने कठोर कार्यवाही की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारी जो अपने कर्तव्यों में चूक करेंगे या जानबूझकर प्रकरणों को लंबित रखेंगे, उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। जनता का विश्वास बढ़ाने की पहल इस निर्देश का उद्देश्य राजस्व विभाग में जनता का विश्वास बढ़ाना और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है। मंत्री वर्मा ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जनता को उनके प्रकरणों का शीघ्र समाधान मिले और उन्हें कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। समर्पित अधिकारी बने मिसाल मंत्री ने अच्छे प्रदर्शन वाले अधिकारियों की सराहना की और सभी अधिकारियों को उनके उदाहरण का अनुसरण करने की सलाह दी। यह पहल प्रदेश में राजस्व मामलों में पारदर्शिता और दक्षता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उम्मीद है कि इन निर्देशों से भोपाल के राजस्व विभाग में सुधार और जनता के लिए सुविधाजनक सेवाएं सुनिश्चित होंगी।

Delhi: ‘दिल्ली के जाटों को OBC सूची में करें शामिल’, जाट समाज को लेकर अरविंद केजरीवाल ने PM मोदी को लिखा पत्र

arvind kejriwal writes to pm modi to include the jat community of delhi in the center s obc list आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के जाट समुदाय को केंद्र की ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए पीएम मोदी को पत्र लिखा। केजरीवाल ने लिखा कि केंद्र सरकार पिछले 10 सालों से लगातार जाट समाज के साथ धोखा कर रही है। केंद्र सरकार की वादाखिलाफी की वजह से दिल्ली के ओबीसी समाज के हजारों युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। केजरीवाल ने पत्र में लिखा, ‘एक महत्वपूर्ण विषय पर 10 साल पहले आपका किया वादा आपको याद दिलाने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। दिल्ली के जाट समाज के कई प्रतिनिधियों से पिछले कुछ दिनों में मुलाकात हुई। इन सभी ने केंद्र की ओबीसी लिस्ट में दिल्ली के जाट समाज की अनदेखी किये जाने पर चिंता जाहिर की। जाट समाज के प्रतिनिधियों ने मुझे बताया कि आपने 26 मार्च 2015 को दिल्ली के जाट समाज के प्रतिनिधियों को अपने घर बुलाकर ये वादा किया था कि जाट समाज, जो दिल्ली की ओबीसी लिस्ट में है, उसे केंद्र की ओबीसी लिस्ट में भी जोड़ा जाएगा ताकि उन्हें दिल्ली में मौजूद केंद्र सरकार के कॉलेजों और नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सके।’ केजरीवाल ने आगे लिखा, ‘फिर 8 फरवरी 2017 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यूपी चुनाव से पहले चौधरी बीरेंद्र सिंह के घर पर दिल्ली और देश के जाट नेताओं की मीटिंग बुलाई और उनसे वादा किया कि स्टेट लिस्ट में जो ओबीसी जातियां हैं उनको केंद्र की लिस्ट में जोड़ा जाएगा। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में फिर भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा के आवास पर अमित शाह जाट नेताओं से मिले और उन्होंने फिर वादा किया कि दिल्ली के जाट समाज को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल किया जाएगा लेकिन चुनाव के बाद इस पर कोई काम नहीं हुआ।’केजरीवाल ने लिखा, ‘ओबीसी आरक्षण को लेकर केंद्र की नीतियों में कई विसंगतियां हैं जिनकी तरफ मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। जैसे कि मुझे पता चला कि केंद्र की ओबीसी लिस्ट में होने की वजह से राजस्थान से आने वाले जाट समाज के युवाओं को दिल्ली यूनिवर्सिटी में ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलता है, लेकिन दूसरी तरफ दिल्ली के ही जाट समाज को दिल्ली यूनिवर्सिटी में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि आपकी सरकार ने दिल्ली में जाट समाज को ओबीसी आरक्षण होने के बावजूद उन्हें केंद्रीय ओबीसी लिस्ट में शामिल नहीं किया है। ये तो दिल्ली के जाट समाज के साथ धोखा है। और भाजपा की केंद्र सरकार पिछले 10 सालों से लगातार ये धोखा कर रही है। सिर्फ जाट समाज ही नहीं रावत, रौनियार, राय तंवर, चारण व ओड, इन सभी जातियों को दिल्ली सरकार ने ओबीसी दर्जा दिया हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार इन जातियों को दिल्ली में मौजूद अपने संस्थानों में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं दे रही है।’उन्होंने आगे लिखा, ‘दिल्ली में केंद्र सरकार की सात यूनिवर्सिटी हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के दर्जनों कॉलेज हैं। दिल्ली पुलिस, एनडीएमसी, डीडीए, एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया जैसे केंद्र सरकार के कई संस्थानों में नौकरियां हैं जिनमें केंद्र सरकार के नियम लागू होते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की इस वादाखिलाफी की वजह से दिल्ली के ओबीसी समाज के हजारों युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। दिल्ली में जाट समाज व ओबीसी की 5 अन्य जातियों के साथ केंद्र सरकार का ये पक्षपातपूर्ण रवैया इन जातियों के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के उचित अवसर हासिल नहीं होने दे रहा है। इसलिए केंद्र सरकार को तुरंत केंद्रीय ओबीसी सूची की विसंगतियों में सुधार कर दिल्ली में ओबीसी दर्जा प्राप्त सभी जातियों को केंद्र सरकार के संस्थानों में भी आरक्षण का लाभ देना चाहिये।

स्मार्ट मीटर से की छेड़छाड़ तो अफसर के पास पहुंचा मैसेज, टीम ने 27 हजार का ठोका जुर्माना

damoh when smart meter was tampered with message reached the officer team caught electricity theft imposed fine of 27 thousand शहर में स्मार्ट मीटर लगाने के बाद भी बिजली चोरी पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। बुधवार शाम टंडन बगीचा क्षेत्र में एक स्मार्ट मीटर से छेड़छाड़ का संदेश बिजली अधिकारियों को मिला। तुरंत कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग की टीम उपभोक्ता के घर पहुंची और मामला दर्ज कर 27,242 रुपये का जुर्माना लगाया। बिजली कंपनी के अधीक्षण अभियंता एमएल साहू ने बताया कि टंडन बगीचा क्षेत्र में प्रदीप कुमार जैन के परिसर में लगे स्मार्ट मीटर में छेड़छाड़ कर बिजली चोरी की सूचना प्राप्त हुई। कनिष्ठ अभियंता प्रदीप परिहार और लाइनमैन ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया, जहां पाया गया कि स्मार्ट मीटर में अलग से लूप लगाकर बिजली चोरी की जा रही थी। मौके पर विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया और बिजली आपूर्ति काट दी गई। साथ ही उपभोक्ता पर जुर्माना लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाना दमोह में आवेदन दिया गया।अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर की तकनीक से छेड़छाड़ की घटनाओं का तुरंत पता चलता है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव होती है। हालांकि, यह घटनाएं अभी भी बिजली चोरी की समस्या को पूरी तरह खत्म करने में विफल रही हैं।

उमरिया में फिर हुई बाघ की मौत, जिम्मेदारों का हर बार की तरह जवाब- आपसी संघर्ष में गई होगी जान

Tiger died again in Umaria उमरिया जिले में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ उनकी मौत के मामले भी बढ़ रहे हैं। हाल ही में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर के खितौली बीट (कक्ष क्रमांक RF 501) में एक मादा बाघ का शव मिला। मृत बाघिन की उम्र लगभग 1 वर्ष बताई गई है। यह घटना 8 जनवरी की है, जब वन विभाग की गश्ती टीम को एक सावक की मौत की सूचना मिली। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण दो बाघों के बीच आपसी संघर्ष बताया गया। हालांकि, इस दावे की पुष्टि अभी नहीं हुई है, जिससे प्रशासन की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाघों की मौत के मामलों में प्रशासन लापरवाही बरतते हुए इन्हें आपसी द्वंद्व बताकर मामले को खत्म कर देता है। सूचना मिलने पर वन परिक्षेत्र अधिकारी ने मौके पर टीम भेजकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। वन विभाग, राजस्व विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में बाघिन का पोस्टमार्टम किया गया। घटना स्थल से नमूने एकत्र कर 8 जनवरी को प्रयोगशाला भेजे गए। पोस्टमार्टम के बाद बाघ के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण और बाघों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमित गश्ती और प्रभावी जांच के अभाव में बाघों की मौत के असली कारणों का पता लगाना मुश्किल हो रहा है। बाघों की संख्या घटने के पीछे के वास्तविक कारणों की गहन जांच और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

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