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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन शहर में पैदल भ्रमण करके नागरिकों को दीपावली की शुभकामनाएं दी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन शहर में पैदल भ्रमण करके नागरिकों को दीपावली की शुभकामनाएं दी मुख्यमंत्री ने स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का संदेश दुकानदारों नागरिकों को दिया उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीपावली पर उज्जैन शहर में पैदल भ्रमण करके नागरिकों को दीपावली की शुभकामनाएं दी। उनके साथ दीपावली की खुशियां मनाई। मुख्यमंत्री ने नागरिकों को दीपावली की मिठाई खिलाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहर के फ्रीगंज शहीद पार्क टॉवर चौक आदि क्षेत्रों में पैदल भ्रमण करते हुए नागरिकों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए उनके कुशल क्षेम पूछी। उनके साथ फोटो खिंचवाये। अपने भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुकानदारों तथा नागरिकों को स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का संदेश भी दिया। उज्जैन शहर के नागरिक भी मुख्यमंत्री से आत्मीयता के साथ मिले मुख्यमंत्री से मिलकर उनकी खुशी देखते ही बनती थी। नागरिक आत्मीयता की उष्मा से सरोबार थे। कई स्थानों पर नागरिकों द्वारा मुख्यमंत्री पर पुष्प वर्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कई दुकानों के अंदर जाकर दुकान संचालकों से मुलाकात की। दुकानदारों के परिजनों से भी चर्चा की। इस दौरान फ्रीगंज में प्रकटेश्वर महादेव मंदिर तथा राम लक्ष्मण मंदिर में दर्शन किए , पूजा अर्चना की सबको दीपावली की शुभकामनाएं दी। उज्जैन के फ्रीगंज में राह में चलते हुए मुख्यमंत्री को देखकर दिव्यांग दंपत्ति परमानंद तथा रेखा प्रजापत ने मुख्यमंत्री से कार्तिक मेला क्षेत्र में अपने स्वरोजगार के लिए एक दुकान उपलब्ध कराने की मांग की। उनकी मांग पर मुख्यमंत्री ने तत्काल कलेक्टर नीरज कुमार सिंह को बुलवाया और दिव्यांग दंपति को उनकी मांग के अनुसार दुकान उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। दिव्यांग दंपति प्रसन्नचित् होकर अपने घर को रवाना हुए। फ्रीगंज क्षेत्र में भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री यादव ने गन्ने की चरखी चलाने वाले ललित पाटिल से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने स्वयं चरखी पर गन्ने का रस निकाल कर उपस्थित जनों को पिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सहजता सरलता देखकर नागरिक अभिभूत थे। इसके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवास पर दीपावली के अवसर पर पूजा अर्चना की। इस दौरान विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा कलेक्टर नीरज कुमार सिंह पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा भी मौजूद रहे  

पूर्वी लद्दाख में शांति की ओर कदम: भारतीय सेना ने डेमचोक में गश्त फिर से शुरू की, दिवाली पर हुआ मिठाईयों का आदान-प्रदान

Step towards peace in Eastern Ladakh: Indian Army resumes patrolling in Demchok, sweets exchanged on Diwali पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले प्रमुख बिंदुओं से भारतीय और चीनी सैनिकों के पूरी तरह पीछे हटने के कुछ ही दिनों बाद भारतीय सेना ने शुक्रवार (1 नवंबर 2024) को डेमचोक में गश्त फिर से शुरू कर दी। सेना के सूत्रों ने इसे भारत-चीन संबंधों में स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बताया है। सूत्रों के अनुसार, डेमचोक में गश्त शुरू हो चुकी है, और जल्द ही भारतीय सेना देपसांग में भी गश्त पर लौटेगी। इससे पहले दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत सैनिकों ने टकराव वाले बिंदुओं से पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी की थी। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति को बहाल करना है, जब लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों में तनाव गहरा गया था। दिवाली पर सीमा पर मिठाईयों का आदान-प्रदान समझौते के ठीक एक दिन बाद, दिवाली के अवसर पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर विभिन्न सीमा बिंदुओं पर भारतीय और चीनी सैनिकों ने मिठाईयों का आदान-प्रदान किया। इसे दोनों देशों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध की एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इस परंपरागत आदान-प्रदान में दोनों पक्षों में सौहार्द और मित्रता का माहौल देखने को मिला। गलवान झड़प के बाद चार साल से जारी गतिरोध में सफलता जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था और पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गतिरोध जारी था। लेकिन विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, हाल ही में हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने गतिरोध समाप्त करने के एक महत्वपूर्ण समझौते पर सहमति जताई है। इस समझौते को 2020 में उत्पन्न हुए मुद्दों को हल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। गश्त की बहाली से अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति की ओर वापसी सेना के सूत्रों का कहना है कि गश्त बहाली के लिए स्थानीय स्तर पर कमांडरों के बीच बातचीत जारी रहेगी। इसके साथ ही भारतीय सेना अप्रैल 2020 से पहले की गश्त वाली स्थिति और स्तर को बहाल करने का प्रयास करेगी। सत्यापन प्रक्रिया चल रही है और गश्त के तरीकों पर चर्चा और निर्णय हो रहे हैं। भारत-चीन के बीच यह प्रगति दोनों देशों के बीच शांति और सामंजस्य बढ़ाने का एक कदम है, जो आने वाले समय में स्थिरता का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

दीपिका पादुकोण के हेयरस्टाइल से प्रभावित थी तृप्ति डिमरी

  मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री तृप्ति डिमरी का कहना है कि वह बचपन के दिनों में दीपिका पादुकोण के हेयरस्टाइल से प्रभावित थी और अपने बाल खुद काटे थे। तृप्ति डिमरी ने अपनी किशोरावस्था से जुड़ी एक मजेदार याद साझा की है। तृप्ति से पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी अपने बालों पर कैंची चलाई है। जवाब में तृप्ति ने कहा, मैंने बचपन में अपने बाल खुद ही काटे हैं। जब ‘चाँदनी चौक टू चाइना’ रिलीज़ हुई, तो मैंने दीपिका पादुकोण का हेयरस्टाइल देखा और अपने बालों को खुद काटने का फैसला किया। तृप्ति डिमरी की फिल्म भूल भुलैया 3, दीवाली के अवसर पर 01 नवंबर को रिलीज होने वाली है। इसके अलावा, उनके पास कई और रोमांचक प्रोजेक्ट हैं, जिनमें बहुप्रतीक्षित फिल्म धड़क 2 और विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित एक और बड़ी फिल्म शामिल है।  

बांधवगढ़ में हाथियों की मौत पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लिया सरकार को लिया आड़े-हाथ

Leader of Opposition Umang Singhar took the government to task over the death of elephants in Bandhavgarh. Umang Singhar News: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में 10 हाथियों की मौत के मामले को लेकर विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार इस घटना पर चुप क्यों है. मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में 10 हाथियों की मौत के मामले को लेकर विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने निशाना साधा है. उन्होंने एमपी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार इस घटना पर चुप क्यों है, जबकि हम हाथियों की भगवान गणेश के रूप में पूजा करते हैं. सरकार को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेना चाहिए. उमंग सिंघार ने कहा कि एक तरफ हम हाथियों की यानी गणेशजी की पूजा कर रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार हाथियों की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं और वहीं वन मंत्री वोट मांग रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि वन्य प्राणियों के साथ में आदिवासियों का गहरा नाता और ताना-बना है. इस घटना में आदिवासियों का कोई दोष नहीं है. जल जंगल जमीन आदिवासियों का अधिकार है और सरकार को आदिवासियों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्य प्राणियों की भी सुरक्षा करनी चाहिए. करीब 4 साल से हाथी झारखंड और कर्नाटक से आते रहे हैं. इस बीच में क्या सरकार ने उन वन समितियां से कोई चर्चा की या उन आदिवासियों से चर्चा की या उनके साथ कोई बैठक की या हाथियों के विस्थापन की बात कही. हाथियों का किस तरह से विस्थापन करना है. उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार ने किसी भी तरह की कोई प्लान नहीं बनाया. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को तत्काल इस मामले में संज्ञान लेते हुए वन्य समितियों के साथ और आदिवासियों के साथ चर्चा करनी चाहिए. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इल्जाम लगाते हुए कहा कि सरकार वन्य प्राणी और आदिवासी विरोधी सरकार है. सरकार को संज्ञान लेते हुए उन लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए फिर चाहे वह अधिकारी हो या उसका कुप्रबंध हो. इस मामले में आदिवासियों की कोई जिम्मेदार नहीं है. सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने भी हाथियों की मौत पर सवाल खड़े किए हैं.उमरिया-बांधवगढ टाइगर रिजर्व के खितौली परिक्षेत्र के सलखनियां के जंगल में 10 हाथियों की मौत हुई है. 10 हाथियों की मौत के बाद बांधवगढ पार्क प्रबंधन अपनी इस गलती को छिपाने में जुटा है. किसानों की कोदो की फसल को मौत का जिम्मेदार मानते हुए फसल को नष्ट कराया. NTCA दिल्ली की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है. हाथियों के पीएम रिपोर्ट आने के बाद खुलासा होगा.

राज्य वन्यजीव विभाग ने बरखेड़ा – बुधनी रेलवे लाइन के निर्माण को पर कई तरह की चिंता जताई

भोपाल मध्य प्रदेश में 2015 से अब तक 14 तेंदुए, सात बाघ और एक भालू की मौत हो चुकी है। अब राज्य वन्यजीव विभाग ने बरखेड़ा और बुधनी के बीच रेलवे लाइन परियोजना के निर्माण को लेकर कई तरह की चिंता जताई है। जिससे पता चलता है कि वन्यजीवों को दुर्घटनाओं से बचाने के लिए किए गए उपायों को ठीक से लागू नहीं किया गया है। 2011-12 में स्वीकृत बरखेड़ा-बुदनी खंड 26.50 किलोमीटर लंबा ट्रैक है जिसे 991.60 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। यह रातापानी वन्यजीव अभयारण्य और टाइगर रिजर्व में आता है। यह रेलवे लाइन तब जांच के घेरे में आई जब 14-15 जुलाई की रात को भोपाल से करीब 70 किलोमीटर दूर मिडघाट के एक फॉरेस्टेड एरिया में ट्रेन की चपेट में आने से तीन बाघ शावक घायल हो गए। चोट लगने की वजह से आखिरकार उनकी मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, रिकॉर्ड से पता चलता है कि वन्यजीव विभाग ने इस साल 6 सितंबर को एक समीक्षा बैठक में रेलवे लाइन के निर्माण के संबंध में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा लगाई गई कुछ शर्तों के अनुपालन में खामियों को उजागर किया था। विभाग ने कहा कि ‘भारत सरकार से प्राप्त सशर्त अनुमति के तहत लगाई गई शर्तों का एजेंसी (भारतीय रेलवे) द्वारा पूरी तरह से पालन नहीं किया गया।’ बैठक के दौरान उठाया गया एक मुख्य मुद्दा अंडरपास का अनुचित निर्माण था, जिसका मकसद वन्यजीवों के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करना था। विभाग ने कहा कि यह ‘अंडरपास लोकल ड्रेनेज सिसटम्स के ऊपर बना हुआ है जो मॉनसून के दौरान पानी से भर जाते हैं, जिससे जानवरों को वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ते हैं, जो अक्सर उन्हें रेलवे पटरियों पर ले जाते हैं।’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ‘खराब जल निकासी के कारण पटरियों के पास जलभराव वाले क्षेत्र पानी की तलाश में जानवरों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं’, जिससे रेल से उनके टकराव का खतरा और बढ़ गया है। बैठक में रेलवे पटरियों से दूर वैकल्पिक जल स्रोतों को विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। बैठक में गति सीमा विवाद भी एक मुद्दा था। विभाग ने कहा कि वन क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रेनों के लिए स्वीकृत गति सीमा ’60 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई थी, वहीं रेलवे अधिकारियों द्वारा लगाए गए बोर्ड 75 और 65 किमी प्रति घंटे की गति सीमा दर्शाते हैं’, जो निर्धारित सुरक्षा उपायों का स्पष्ट उल्लंघन है। ट्रैक के रखरखाव के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। फील्ड स्टाफ, वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों द्वारा संयुक्त निरीक्षण से पता चला कि ‘ट्रैक के बीच की घास विजिबिलिटी में बाधा डालती है, जिससे ट्रेन के पायलटों के लिए वन्यजीवों को देखना और जानवरों के लिए आने वाली ट्रेनों से बचना मुश्किल हो जाता है।’

डॉ आंबेडकर मेधावी छात्र योजना के लिए आवेदन शुरू, स्कूल और कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए सरकारी स्कॉलरशिप स्कीम

आप चाहे स्कूल में पढ़ते हों या कॉलेज में, ग्रेजुएशन कर रहे हों या पोस्ट ग्रेजुएशन… आपके पास मौका है बढ़िया स्कॉलरशिप पाने का। इस सरकारी छात्रवृत्ति योजना के तहत आपको हर साल 12 हजार रुपये तक दिए जाएंगे। हरियाणा सरकार राज्य के विद्यार्थियों को ये सुविधा दे रही है। जिस स्कॉलरशिप स्कीम के तहत आपको ये फायदा मिलेगा, उसका नाम है- डॉ आंबेडकर मेधावी छात्रवृति योजना। सत्र 2024-25 के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। Dr Ambedkar Medhavi Chhatra Yojana: किसे मिलेगा लाभ? हरियाणा गवर्नमेंट द्वारा वंचित वर्ग के मेधावी छात्रों के लिए ये योजना चलाई जा रही है। प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी मेधावी छात्र की आर्थिक कारणों से पढ़ाई प्रभावित न हो। खंड शिक्षा अधिकारी सगीर अहमद ने बताया कि 2024-25 की अवधि के लिए डॉ. आंबेडकर मेधावी छात्र संशोधित योजना के तहत सरल पोर्टल (https://saralharyana.gov.in/) पर ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं। डॉ आंबेडकर मेधावी छात्र योजना के लिए योग्यता की शर्तें इस प्रकार हैं-     अनुसूचित वर्ग (एससी कैटेगरी) के जिन शहरी छात्रों के 10वीं में 70, 12वीं में 75 व स्नातक में 65 प्रतिशत अंक हैं, वे इस छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं।     इसी प्रकार गांवों में अनुसूचित वर्ग (SC) के छात्र के 10वीं में 60, 12वीं में 70 व स्नातक में 60 प्रतिशत अंक होने चाहिए।     इसी प्रकार पिछड़ा वर्ग-ए (बीसी) के शहर में रहने वाले छात्र ने 10वीं में 70 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 60 प्रतिशत अंक मिले हों।     पिछड़ा वर्ग-बी के शहरी छात्र या छात्रा के 10वीं में 80 व ग्रामीण छात्र के 75 प्रतिशत अंक होने चाहिए, तभी वह योजना के पात्र होंगे।     डॉ आंबेडकर मेधावी छात्र संशोधित योजना के लिए छात्र के परिवार की वार्षिक आय चार लाख रुपये से कम होनी चाहिए। डॉ आंबेडकर स्कॉलरशिप में कितने पैसे मिलेंगे? आवेदन करने वाले योग्य उम्मीदवारों को 10वीं पास होने पर आठ हजार रुपये सालाना, एससी आवेदक को 12वीं पास करने पर 8 से 10 हजार रुपये और स्नातक पास होने के बाद 9 से 12 हजार रुपये प्रति वर्ष आगे की पढ़ाई के लिए दिए जाएंगे। ये दस्तावेज जरूरी पारिवारिक आय का प्रमाण-पत्र, रिहायशी प्रमाण पत्र, बैंक पास बुक, वर्तमान अध्ययनरत कक्षा का आईडी कार्ड या प्रमाण, मार्कशीट, फैमिली आईडी आदि दस्तावेज आवेदन के साथ लगाने होंगे।

10 हाथियों की मौत से पार्क प्रबंधन पर उठे कई सवाल खड़े…?

Death of 10 elephants raises many questions on park management…? भोपाल। बांधवगाढ़ टाइगर रिज़र्व में 10 जंगली हथियो की मौत ने देश में हड़कंप मचा दिया पर प्रदेश सरकार गंभीर नहीं दिखाई नहीं देती नजर आ रही है। अपर मुख्य सचिव की अपने-पराए के आधार पर पोस्टिंग से लेकर वन सुरक्षा और इको समितिओं की निष्क्रिता पर सवाल उठने लगे हैं। अगर वन विभाग ने 26 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ में हुई हाथियों की मौत की घटना को गंभीरता से ले लिया होता तो शायद हाथियों को बचाया जा सकता था। हाथियों की मौत को लेकर सेवा निवृत मुख्य वन संरक्षक डॉ एसपीएस तिवारी पार्क प्रबंधन की कार्य शैली पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि बान्धवगढ़ में जंगली हाथी झारखंड के पलामू के जंगलों से कुसमी होते हुए संजय टाइगर रिज़र्व जो सीधी, सिंगरौली और छत्तीश गाढ़ में फैला है, बान्धवगढ़ में आये है और अनुकूल परिस्थियाँ पाकार स्थायी रूप से यहाँ स्थापित हो गए। वास्तव में पलामू से बान्धवगढ़ तक ग्रीन कॉरिडोर भी है। आज के स्थिति में 80 से 90 जंगली हाथी बांधव गढ़ में रह रहे है। बांधव गढ़ के पनपथा बफर जोन अंतर्गत ग्राम बकेली सलखनिया गांव के पास हाथियों की मौत के कारण का पता लगाने में पार्क प्रबंधन और वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट एवं डॉक्टर्स की टीम व्यस्त है। कारण जो भी हो, 10 जंगली हथियो की मौत ने पार्क प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर रहें है। डॉ तिवारी ने लिखा है कि मैं 1990 से 1995 तक उपवनमंडलाधिकारी मानपुर के हैसियत से पदस्थ था। तब पनपथा रेंज क्षेत्रीय रेंज था। तब भी यहां बाघों की अच्छी संख्या थी। पातौर ताला से मात्र 7 किमी की दूरी पर है। सलखनिया पातौर से लगा हुआ आदिवासी बाहुल्य गांव है , जहां मुख्यतया बैगा आदिवासी निवास करते है। पातौर और सलखनिया में वनसुरक्षा समिति गठित थी, जो बहुत ही सक्रिय थी और वन और वन्यप्राणी अपराधों को रोकने में सक्रिय भूमिका अदा करती थी । कोई छोटे-मोटे वन अपराध होने पर, गांव के लोग समिति की मीटिंग बुलाकर मावज़ा और अपराधी को सामाजिक रूप से बहिष्कृत भी करते थे। बैगा आदिवासी बहुत अंतर्मुखी होते है और वो तभी बाहरी व्यक्ति से खुल कर बात करते है जब वो समझ जाते है की ये अपने वाले है और हमारी भलाई के लिए है। अब यह सारा क्षेत्र अब बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में आ गया है अतः अब ये समितिया ईको समिति के रूप में परिवर्तित हो गई है। पातौर वन समिति तो वन सुरक्षा में इतनी सक्रिय थी कि तत्कालीन कलेक्टर शहडोल एसपीएस परिहार स्वयं कई बार समिति की मीटिंग में आये और बहुत सरे ग्राम विकास के कार्य भी करवाये। आख़िर ऐसा क्या हुआ कि 10 जंगली हाथी की मौत हो गई और पार्क प्रबंधन को पूर्व से हथियों के एक्टिविटी के बारे में जानकारी नहीं हो सकी। मौत का कारण तो अभी निश्चित नहीं हो पाया है परंतु यह बात प्रारंभिक रूप से मालूम हो रही है कि ज़हरीला पदार्थ खाने से मृत्यु हुई है। ऐसी भी आशंका जतायी जा रही है कि धान की फसल मी माहुर रोग लग गया था, उसके बचाव हेतु धान फसल में रसायन का छिड़काव किया गाया था, जिसे खाने से मृत्यु हुई होगी। अन्यथा जहर खुरानी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। सवाल यह है कि क्या इकोसमितिया निष्क्रिय हो गई..? क्या अधिकारी और कर्मचारी वहां के स्थानीय लोगों से संपर्क तोड़ चुके है। यदि इको समितियां सक्रिय होती तो गांव के लोग लोकल बीटगार्ड को ज़रूर बतलाते कि हाथी बीमार दिख रहे है। और शायद समय रहते इनका उपचार होता और 10 हाथी नहीं मरते। मुखबिर तंत्र का ह्रास एवं वन समितियों का निष्क्रिय होना ही इस असामयिक मृत्यु का मुख्य कारण समझ में आ रहा है। जनता को प्रबंधन से नहीं जोड़ा गयाप्रदेश में लगभग 15608 वन समितियों का गठन संयुक्त वन प्रबंधन के तहत हुआ है। 1051 इकोसमितियाँ है। इन समितियों की निरंतर बैठक एवं विकास तथा सुरक्षा राशि का इनके खाते में डाल कर स्थानीय जनता को रोज़गार देने का प्रावधान भी है परंतु कालांतर में इस विषय को ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। अज प्रदेश में 8 जंगली हथियो के मरने से वन एवं वन्य प्राणी प्रबंधन पर सवालिया निशान खड़ा होता है। ज़रूरत है, मृत्यु के कारण के तह तक जा कर इसे उजागर करे और भविष्य के लिए सीख ले। ताकि ऐसी घटना दोबारा ना घटे। जंगलों में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त वन प्रबंधन को मज़बूत कर वनसमितियों को सक्रिय करे।डॉ एस पी एस तिवारी आईएफ़एससेवा निवृत मुख्य वन संरक्षक एमपी भोपाल

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10वें हाथी की मौत, दिनभर जांच करती रही टीमें; जांच एजेंसियों ने डेरा जमाया

10 elephants arrived one by one in bandhavgarh Tiger Reserve उमरिया । बांधवगढ़ नेशनल पार्क में गुरुवार को दो और हाथियों ने दम तोड़ दिया। दोपहर में 9वें हाथी और शाम को दसवें हाथी की मौत हुई। मामले में एसटीएफ ने डॉग स्क्वॉड की मदद से 7 खेतों और 7 घरों की तलाशी ली है। उमरिया जिले का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मंगलवार को चार हाथियों की मौत हो गई। बुधवार को सुबह खबर आई कि तीन और हाथियों ने दम तोड़ दिया है, फिर बुधवार रात को एक गुरुवार को सुबह एक और शाम को एक और हाथी ने दम तोड़ दिया। इस तरह से मरने वाले हाथियों की संख्या कुल 10 हो चुकी है। कई स्तर पर जांच जारी, हाथियों के शवों का किया जा रहा परीक्षण हाथियों की मौत के बाद राज्य से लेकर केंद्र तक हड़कंप मचा हुआ है। हर कोई सकते में है कि आखिर अचानक इतने हाथियों की मौत कैसे हो गई। ऐसा क्या हुआ जिससे एक-एक करके दस हाथियों ने दम तोड़ दिया। मौत की जांच के लिए केंद्र और राज्य की वाइल्डलाइफ एजेंसी की टीम भी बुधवार को बांधवगढ़ पहुंची है। मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए हाथियों के शवों का परीक्षण किया जा रहा है।

जनगणना 2025: नई चुनौतियाँ और राजनीतिक रणनीतियाँ

Census 2025: New challenges and political strategies केंद्र सरकार ने देश में जनगणना कराने की पूरी तैयारी कर ली है। यह प्रक्रिया अगले साल से शुरू होकर एक साल में पूरी होगी और 2026 में इसके आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे। इस जनगणना में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि इस बार सर्वे में सम्प्रदाय की जानकारी भी पूछी जाएगी, जिससे देश के विभिन्न सम्प्रदायों की जनसंख्या के आधार पर योजनाएं बनाई जा सकेंगी। जनगणना में कुल 30 सवाल शामिल होंगे, जो पिछली 2011 की जनगणना में पूछे गए 29 सवालों से एक अधिक है। देरी के कारण और नई समय-सीमायह जनगणना 2021 में ही होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसे स्थगित करना पड़ा। इसके बाद लोकसभा चुनावों के चलते इसे और आगे बढ़ाया गया। अब सरकार ने इस पर तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं, क्योंकि जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन किया जाएगा, जो 50 वर्षों से रुका हुआ है। संप्रदाय आधारित सवालों का राजनीतिक महत्वइस बार जनगणना में शामिल किए गए सम्प्रदाय आधारित सवाल विशेष चर्चा का विषय हैं। जनगणना में कबीरपंथी, रविदासी, दलित बौद्ध और अन्य सम्प्रदायों के बारे में पूछा जाएगा। इसके पीछे उद्देश्य केवल आंकड़े इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि इन आंकड़ों के आधार पर सरकारी योजनाओं को बेहतर बनाना और समाज में राजनीतिक समीकरणों को समझना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सम्प्रदाय आधारित आंकड़े राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि यह राजनीतिक दलों को इन सम्प्रदायों के आधार पर नीतियां बनाने और समर्थन प्राप्त करने में सहायता कर सकते हैं। परिसीमन और महिला आरक्षण2029 में लोकसभा सीटों में वृद्धि और महिला आरक्षण की संभावनाओं के चलते यह जनगणना और भी महत्वपूर्ण हो गई है। परिसीमन के आधार पर सीटों के पुनर्गठन से भारत के जनसांख्यिकीय बदलावों का सीधा असर चुनावी सीटों पर पड़ेगा, जो विभिन्न राज्यों के राजनीतिक परिदृश्य को भी प्रभावित करेगा। जाति जनगणना पर चुप्पीहालांकि जाति जनगणना पर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सम्प्रदाय की जानकारी पूछे जाने की तैयारी चल रही है। इससे राजनीतिक लाभ के साथ-साथ योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सहयोग मिलेगा। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर समाज के विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं और उनकी जनसंख्या के अनुपात को समझने में सहायता मिलेगी, जिससे विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी। आगामी जनगणना न केवल देश की जनसांख्यिकी को समझने का एक साधन होगी, बल्कि इसके माध्यम से राजनीतिक दलों को नई योजनाएं और विकास की दिशा तय करने का आधार मिलेगा। इस बार जनगणना के व्यापक परिणाम, भारतीय राजनीति और समाज दोनों पर गहरे असर डाल सकते हैं। इस बार जानकारी में लोगों से उनका संप्रदाय भी पूछा जाएगा। कबीरपंथी, रविदासी, दलित बौद्ध समेत देश के अलग-अलग राज्यों में कई संप्रदाय हैं। ऐसे में संप्रदाय भी राजनीति का एक बड़ा आधार हो सकता है। इस तरह 30 सवाल जनगणना में पूछे जाएंगे। ये हैं वो सवाल जिनका जवाब हर घर से लिया जाएगा व्यक्ति का नाम।परिवार के मुखिया से संबंध?लिंग?जन्मतिथि और आयु?मौजूदा वैवाहिक स्थिति?शादी के वक्त उम्र?धर्म?संप्रदाय?अनुसूचित जाति या जनजाति?दिव्यांगता (यदि हो तो)मातृभाषा कौनसी?कौन-कौन सी भाषाओं का ज्ञान?साक्षरता की स्थिति क्या?मौजूदा शैक्षणिक स्थितिउच्चतम शिक्षा कितनी?बीते साल का रोजगार?आर्थिक गतिविधि की श्रेणी?रोजगार?उद्योग की प्रकृति, रोजगार एवं सेवाएं?वर्कर्स की क्लास?गैर-आर्थिक गतिविधि ?कैसे रोजगार की चाह?काम पर जाने का माध्यम? (i) एक तरफ से दूरी।(ii) यात्रा का माध्यम। जन्म मूल स्थान पर ही हुआ या फिर कहीं और (दूसरे देश में हुआ हो तो उसका नाम)मूल स्थान पर हैं या पलायन किया? (a) क्या भारत में ही पलायन किया?(b) किस समय पलायन किया? मूल स्थान से पलायन का कारण?कितनी संतान? (a) बेटे कितने ?(b) बेटियां कितनी? जन्म लेने वाले कितने बच्चे जीवित? (a) बेटे कितने ?(b) बेटियां कितनी? बीते एक साल में पैदा बच्चों की संख्या?पलायन के बाद कितने साल से नए स्थान पर ?पलायन से पूर्व का मूल स्थान?

पिता की पुण्य तिथि पर बेले परिवार करेगा सामाग्री भेट,जन सेवा कल्याण समिति के सेवाभावी कार्यों को दृष्टिगत रख लिया निर्णय ।

The Belle family will donate material on the death anniversary of their father, the decision was taken keeping in mind the service-oriented work of the Jan Seva Kalyan Samiti. हरिप्रसाद गोहेआमला। जनसेवा कल्याण समिति आमला द्वारा बीते लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में सेवाभावी सराहनीय किए गए उल्लेखनीय कार्यों के चलते बेले परिवार द्वारा समिति को आज सामाग्री भेट की जाएंगी । बेले परिवार प्रमुख रामानंद बेले ने बताया आमला नगर सहित जिले एवं जिले के बाहर भी मानव सेवा,गौ सेवा के क्षेत्र में सतत कार्यशील ‘जनसेवा कल्याण समिति आमला एक बड़ा नाम है।समिति की सेवाभावी कार्यशैली को देखते हुए मैं रामानन्द बेले’राजन”अपने पूज्य पिताजी एवं समाजसेवी स्वर्गीय श्री पंछीलाल जी बेले(बड़गांव) की छटवीं पुण्यतिथि पर दिनाँक 30 ऑक्टोबर दिन बुधबार को एक व्हीलचेयर एवं दो नग ऑक्सीजन किट सप्रेम भेंट कर रहा हूँ।अतः आपसे सादर आग्रह सहित निवेदन करता हूँ कि इस कार्यक्रम मे अपनी गरिमामयी उपस्थिति देकर हमें अनुग्रहित करेंगे ऐसी अपेक्षा करता हूँ। कार्यक्रम स्थलबिरसा मुंडा सांस्कृतिक भवन,शासकीय अस्पताल के सामनेआमला, जिला-बैतूलसमय-शाम 6 बजेनिवेदकरामानन्द बेले”राजनशिक्षक(कवि)एवं बेले परिवार आमला

कांग्रेस का विजयपुर उपचुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ मोर्चा, हटाने की मांग

Congress protests in Vijaypur by-election, demands removal of returning officer भोपाल। मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इससे पहले कांग्रेस ने विजयपुर के रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने रिटर्निंग अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए है। साथ ही उन्होंने अफसर को हटाने की भी मांग की है। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने रिटर्निंग अधिकारी उदय सिंह सिकरवार को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत की है। उन्होंने कहा कि एसडीएम सिकरवार पहले भी बीजेपी के लिए काम करते है। 2017-18 में हुए उपचुनाव में भी सिकरवार ने रिटरिंग ऑफिस रहते हुए भी इनकी शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर इन्हे हटाया गया था। रिटर्निंग ऑफिसर को हटाने की मांगहेमंत काटरे ने कहा कि अब एक बार फिर उदय सिंह सिकरवार को ही विजयपुर उपचुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई। आखिर क्यों हर बार इन्हे ही रिटर्निंग ऑफिसर बनाया जाता है। हम निर्वाचन आयोग से मांग करते है की उदय सिंह को चुनावी प्रक्रिया से हटाया जाए। जब एक बार चुनावी प्रक्रिया से इन्हे हटाया गया था, तो दोबारा क्यों चुनाव अधिकारी बनाया गया। कुल इतने प्रत्याशी मैदान मेंनामांकन संवीक्षा में विजयपुर में 12 और बुधनी में 23 अभ्यर्थियों के नाम निर्देशन-पत्र विधिमान्य पाए गये। वहीं विजयपुर में 3 और बुधनी में 2 अभ्यर्थियों के नाम-निर्देशन पत्र विधिमान्य नहीं पाये गये। जिसके चलते उनके नामांकन खारिज कर दिए गए हैं। 13 नवंबर को होगा उपचुनावमध्य प्रदेश में 18 अक्टूबर से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई। 25 अक्टूबर तक निर्देशन पत्र जमा किए गए। 28 अक्टूबर को स्क्रूटनी की गई। अभ्यर्थी 30 अक्टूबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। 13 नवंबर को चुनाव होगा। वहीं 23 नवंबर को मतगणना होगी।

आज से एकादशी तक छोटे व्यापारियों और ठेले वालों से नहीं ली जाएगी मार्केट फीस’, CM मोहन यादव का निर्देश

‘Market fees will not be taken from small traders and street vendors from today till Ekadashi’, instructions from CM Mohan Yadav CM Mohan Yadav Directed Departments: दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए धनतेरस से देवउठनी एकादशी तक सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था करने के लिए संबंधित विभागों को सीएम साय ने निर्देश दिया। प्रदेश में वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि दीपावली पर्व पर स्थानीय विक्रेताओं से सामग्री की खरीदी को प्रोत्साहित किया जाये। धनतेरस से एकादशी तक सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यापारियों और हाथ ठेला वालों से बाजार शुल्क न लिया जाए। सभी नगरीय निकाय स्थानीय स्तर पर साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने विशेष अभियान चलायें। साथ ही प्रदेश में रोशनी के पर्व दीपावली पर विद्युत की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री यादव मंत्रालय में समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम के पहले प्रदेशवासियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीपावली और मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर सभी को शुभकामनाएं दी।

उज्जैन में बिजली खंभा लगाने के नाम पर रिश्वत: लाइनमैन रंगे हाथ पकड़ा गया

Bribe in the name of installing electric pole in Ujjain: Lineman caught red handed उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में बिजली विभाग के एक कर्मचारी द्वारा खंभा लगाने के लिए आठ हजार रुपये रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। पवन सागित्रा नामक किसान ने खाचरोद तहसील के घिनौदा चौपाटी में खंभा लगाने के लिए लाइनमैन रामचंद्र धाकड़ को चार हजार रुपये रिश्वत देने के बाद लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की, जिसके आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ा। लोकायुक्त डीएसपी बसंत श्रीवास्तव के अनुसार, रामचंद्र धाकड़, जो विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में लाइनमैन के पद पर कार्यरत हैं, को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। किसान ने आरोप लगाया कि उनके खेत में ट्रैक्टर चलाते समय गलती से खंभे से टकराकर खंभा गिर गया था। इसे दोबारा खड़ा करने के लिए लाइनमैन ने पुलिस में शिकायत न करने और खंभा लगाने के नाम पर आठ हजार रुपये की रिश्वत मांगी। पहला मामला, सफाई में बताया बिजली बिल लाइनमैन ने अपनी सफाई में कहा कि उसने पैसे बिजली का बिल भरने के नाम पर लिए थे। हालांकि, लोकायुक्त पुलिस ने इसे रिश्वतखोरी का मामला मानते हुए तुरंत कार्रवाई की। विद्युत पोल लगाने के नाम पर रिश्वत लेने का यह पहला मामला बताया जा रहा है, जिसमें शिकायत के बाद पुलिस ने जांच कर कार्रवाई की।

भोपाल में बजरंग दल का पोस्टर विवाद: दिवाली पर ‘हिन्दू दुकानदारों’ से खरीदारी की अपील, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

Controversy over Bajrang Dal poster in Bhopal: Appeal to do Diwali shopping from ‘Hindu shopkeepers’, Congress expressed displeasure भोपाल। दीपावली के बीच भोपाल में बजरंग दल के एक पोस्टर ने विवाद खड़ा कर दिया है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शहर में पोस्टर लगाए हैं, जिनमें लोगों से दिवाली की खरीदारी केवल हिन्दू दुकानदारों से करने की अपील की गई है और अन्य धर्म के व्यापारियों से सामान न खरीदने का अनुरोध किया गया है। इन पोस्टरों पर लिखा गया है, “अपना त्योहार, अपनों से व्यवहार। दीपावली की खरीदी उनसे करें, जो आपकी खरीदी से दीपावली मना सकें।” विश्व हिंदू परिषद का समर्थन विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रांत प्रचार-प्रसार प्रमुख जितेंद्र सिंह चौहान ने इस अपील का समर्थन करते हुए कहा कि दीपावली सनातनियों का बड़ा त्योहार है और लोगों को अपने ही समुदाय से खरीदारी करनी चाहिए ताकि हर हिन्दू परिवार भी इस पर्व को मना सके। उनका मानना है कि यह त्योहार श्रीराम के अयोध्या आगमन की खुशी में मनाया जाता है और इसे समुदायिक स्तर पर समर्थन मिलना चाहिए। बीजेपी की प्रतिक्रिया इस मामले पर बीजेपी प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि कुछ मामलों में सनातन धर्म की भावनाओं को आहत करने की कोशिश की जाती रही है, और ऐसे में धार्मिक संगठनों द्वारा इस तरह की अपील स्वाभाविक है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह सनातन धर्म का विरोध करने वालों के साथ खड़ी रहती है और कहा कि देश में स्वदेशी को बढ़ावा देना जरूरी है। कांग्रेस की कड़ी आलोचना दूसरी ओर, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश बुंदेला ने बजरंग दल की इस अपील को शर्मनाक बताते हुए इसकी निंदा की है। उन्होंने इसे विभाजनकारी राजनीति करार दिया और कहा कि फूलों और सब्जियों का कारोबार करने वाले अधिकतर लोग दूसरे धर्म के हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस सोच के तहत भगवान को फूल चढ़ाना भी बंद कर देना चाहिए। कांग्रेस ने इसे ‘घटिया सोच’ का परिणाम बताते हुए मुख्यमंत्री से बजरंग दल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। भोपाल में लगे इन पोस्टरों ने फिर से धार्मिक भावनाओं और सामाजिक एकता पर सवाल खड़े किए हैं।

धनतेरस पर प्रधानमंत्री मोदी करेंगे मध्य प्रदेश के तीन नए मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन, किसानों को मिलेगी कल्याण निधि

Prime Minister Modi will inaugurate three new medical colleges of Madhya Pradesh on Dhanteras, farmers will get welfare fund मंदसौर। धनतेरस के अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल माध्यम से शामिल होंगे और प्रदेश के तीन नए मेडिकल कॉलेजों का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई मंत्री भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का मुख्य आयोजन मंदसौर में रखा गया है। इन तीनों नए मेडिकल कॉलेजों में मंदसौर, नीमच और सिवनी का मेडिकल कॉलेज शामिल है। इन कॉलेजों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, और इसी सत्र से छात्रों का प्रवेश भी आरंभ हो गया है। प्रधानमंत्री के वर्चुअल उद्घाटन के साथ ही ये तीनों मेडिकल कॉलेज आधिकारिक रूप से कार्यरत हो जाएंगे, जिससे क्षेत्र के छात्रों को चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे। किसान कल्याण निधि की सौगात इस मौके पर 80 लाख किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 1624 करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके खातों में स्थानांतरित की जाएगी। किसान कल्याण निधि के इस वितरण को लेकर मुख्य कार्यक्रम मंदसौर में आयोजित किया गया है, जिससे किसानों में काफी उत्साह है। आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों को नियुक्ति पत्र कार्यक्रम में 512 आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे, जो राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंदसौर के लिए कुछ अतिरिक्त घोषणाएं भी कर सकते हैं, जिससे क्षेत्र के विकास को और गति मिलेगी। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र के लिए ये योजनाएं प्रदेश के नागरिकों और किसानों के लिए दीपावली पर विशेष उपहार के रूप में हैं, जो राज्य के विकास और कल्याण में अहम भूमिका निभाएंगी।

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