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UP : योगी के विज्ञापन में लगी कोलकाता के मां फ्लाईओवर की फोटो

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार का विज्ञापन एक बार फिर से विवादों के घेरे में है। इस बार अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित विज्ञापन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ कोलकाता के मां फ्लाईओवर के विकास की तस्वीरें लगा दी गई हैं। पास ही जेडब्ल्यू मेरियट होटल भी दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लोग ट्रोल कर रहे हैं। इस विज्ञापन को लेकर तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस समेत कई विपक्ष के नेताओं ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी तस्वीर शेयर करते हुए कहा, ‘ऐसा विकास न सुना होगा न देखा होगा। कलकत्ता का फ्लाईओवर खींचकर लखनऊ ले आए हमारे CM आदित्यनाथ जी। भले ही विज्ञापन में ले आए लेकिन लाए तो।’ तृणमूल का तंज- पार्टी बचाने के लिए लाचार हैं मोदी टीएमसी के नेता मुकुल रॉय ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘श्री नरेंद्र मोदी अपनी पार्टी को बचाने के लिए इतने लाचार हैं कि सीएम बदलने के अलावा उन्हें विकास और बुनियादी ढांचे की तस्वीरों का भी सहारा लेना पड़ा है।’ समाजवादी पार्टी ने भी कसा तंज समाजवादी पार्टी ने भी उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। लिखा, ‘मुख्यमंत्री के झूठ की फिर खुल गई पोल! विज्ञापनों में जनता का पैसा पानी की तरह बहाने वालों के पास दिखाने के लिए अपना किया कोई काम नहीं, तो कोलकाता में हुए निर्माण की तस्वीर छाप कर जनता को कर रहे गुमराह, शर्मनाक! यह है झूठ बोलने में नंबर 1 भाजपा सरकार। जिसके “दिन है बचे चार”!’ इंडियन एक्सप्रेस ने मानी गलती, हटाई तस्वीर इंडियन एक्सप्रेस में रविवार को प्रकाशित उत्तर प्रदेश सरकार के इस विज्ञापन में योगी आदित्यनाथ की बड़ी सी फोटो है। उनके साथ अलग-अलग इंडस्ट्री, ऊंची इमारतें और फ्लाईओवर की तस्वीर भी लगाई गई है। ये फ्लाईओवर की तस्वीर कोलकाता की है। इसी को लेकर हंगामा शुरू हो गया। विवाद बढ़ा तो इंडियन एक्सप्रेस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके खुद की गलती स्वीकार की। ये भी बताया कि विज्ञापन विभाग की गलती के चलते ऐसा हुआ है.

MP में सामान्य वर्ग को साधने का दांव, सीएम शिवराज ने की सामान्य वर्ग आयोग बनेगा

सतना। मध्यप्रदेश में एससी, एसटी आयोग की तर्ज पर सामान्य वर्ग आयोग बनेगा। यह आयोग सामान्य वर्ग के कल्याण का काम करेगा। गरीबी रेखा का राशन हर वर्ग के आदमी को मिलेगा, चाहे वो सामान्य हो या अन्य। यह बात सतना के शिवराजपुर में मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि बिजली की समस्या इस बार जरूर है। पानी गिरा नहीं तो नर्मदा जी का बांध खाली है, पानी वाली बिजली बनी नहीं। बिजली की कमी आ गई, लेकिन खरीदकर पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि 20-25 गांव के बीच में एक स्कूल ऐसा हो जो प्राइवेट स्कूल से बढ़कर हो। स्कूल में ही सब सुविधा हो, उसमें बस भी हो। ऐसा एक स्कूल 18 करोड़ में शिवराजपुर में बनाया जाएगा। शिवराज ने मंच से कहा कि जिले में 7 लाख आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। इलाज और अच्छे अस्पताल की जरूरत कोरोना काल के समय समझ आई। उन्होंने ऐलान किया कि प्रदेश में हर महीने की 7 तारीख को राशन बांटा जाएगा। अगर उस दिन पूरा न हो पाए तो दूसरे दिन बंटवाएंगे। कमलनाथ पर कसा तंज कमलनाथ पर तंज करते हुए बोले – हम कमलनाथ जैसे पैसों के लिए रोते नहीं हैं। दो बार कोरोना के कारण प्रदेश में कर आना बंद हुआ। सबकुछ बंद रहा, जिससे खजाने की हालत खराब हुई, लेकिन हमने कर्जा लेकर जनता की सेवा की। जनता की सेवा में कोई कमी नही आने देंगे। उन्होंने यहां हाट बाजार बनाए जाने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दोपहर करीब 1 बजे सतना पहुंचे। हवाई पट्टी पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर वे शिवराजपुर के लिए रवाना हुए। यहां सभा संबोधित करने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनदर्शन यात्रा में शामिल हुए। यात्रा के दौरान वह लोगों की समस्याएं हल करते नजर आए। उनके साथ रथ में वनमंत्री एवं सतना जिले के प्रभारी कुंवर विजय शाह, राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल, भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी, रामपुर बघेलान विधायक सहित सतना सांसद गणेश सिंह मौजूद रहे। यात्रा शिवराजपुर से सिंहपुर करीब 23 किमी की है। सीएम का यह दौरा रैगांव विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर अहम माना जा रहा है। भाजपा विधायक जुगल किशोर बागरी के निधन के बाद यह सीट रिक्त हुई है।

MP : मुरलीधर की फटकार का असर, BJP नेता प्रदेश के दौरे पर निकल पड़े

भोपाल. बीजेपी (BJP) के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव की फटकार का ऐसा असर हुआ है कि बीजेपी के प्रदेश नेता प्रदेश के दौरे पर निकल पड़े हैं. बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 20 साल पूरे होने पर कई कार्यक्रम तय किये हैं. इसी के तहत भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के सभी संभाग प्रभारी और जिला प्रभारियों को दौरे करना ज़रूरी कर दिया गया है. पदाधिकारी अपने-अपने प्रभार के संभाग जिले और मण्डल के कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे. पार्टी के प्रदेश महामंत्री और इंदौर संभाग के प्रभारी भगवानदास सबनानी इंदौर संभाग के 4 दिन के दौरे पर रहेंगे. वो इंदौर नगर, इंदौर ग्रामीण, बड़वानी और धार जिले के धामनौद मंडल में प्रवास के दौरान कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे. इसी तरह बाकी पदाधिकारियों के दौरे भी तय किए गए हैं. क्या है मामला ? राजगढ़ में हुई बीजेपी पदाधिकारियों की बैठक में प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने सबको हिदायत दे दी थी. बैठक के दौरान उन्होंने पदाधिकारियों से कहा था कि उन्हें पद घर बैठने के लिए नहीं मिला है. सभी पदाधिकारियों को अपने प्रभार वाले इलाकों में दौरे करने ही होंगे. बैठक के दौरान ही पदाधिकारियों के लिए दौरों की समय सीमा भी तय कर दी गई थी. महामंत्री स्तर के पदाधिकारियों को कम से कम 15 दिन का दौरा करना ज़रूरी है. इसके अलावा प्रदेश पदाधिकारियों के लिए भी समय सीमा तय की गई थी. प्रदेश पदाधिकारियों को कम से कम 10 दिन तक प्रभार के इलाकों में रहना होगा. 2023-24 की रणनीति पर फोकस बीजेपी की कोशिश पदाधिकारियों के दौरे तय कर ज़मीन स्तर पर संगठन को और मजबूत करना है. राजगढ़ में हुई बैठक में बीजेपी ने 2023 और 2024 में होने वाले चुनाव के लिए एजेंडा तय कर लिया है. प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव और प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा की मौजूदगी में हुई बैठक में संगठन के कामकाज से लेकर आने वाले चुनावों को लेकर रणनीति तय की गई. बीजेपी ने पदाधिकारियों की बैठक में 2023-24 के लिए संगठन ही शक्ति है का मंत्र पदाधिकारियों को दिया है. ये तय किया गया है कि संगठन के कामकाज में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी. इसके साथ ही बैठक में विपक्ष को घेरने की रणनीति पर भी मंथन हुआ था. बीजेपी ने उन सीटों पर अभी से फोकस करने की रणनीति बनाई है जिन पर बहुत कम अंतर से पिछले चुनाव में हार जीत हुई थी.

सीएम शिवराज बोले- अभी थोड़ा कड़की है …जुगाड़ में लगा हूं

सतना। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री बना तो प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन घोषित कर दिया। कोरोना आ गया तो बाजार बंद, कारखाने बंद, व्यापार बंद तो सरकार के खजाने पर पैसा आना भी बंद। अब मामा परेशान, पैसा है नहीं, कोरोना का इलाज भी करवाना है। अभी थोड़ी कड़की में हूं, जुगाड़ में लगा हूं, विकास में कमी नहीं आने दी जाएगी। कोरोना में जनता से नहीं मिल पाए थे। अब फिर जनता के बीच जाएंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सतना पहुंचे। हवाई पट्टी पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर वे शिवराजपुर के लिए रवाना हुए। यहां सभा संबोधित करने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनदर्शन यात्रा में शामिल हुए। यात्रा के दौरान वह लोगों की समस्याएं हल करते नजर आए। सीएम का यह दौरा रैगांव विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर अहम माना जा रहा है। भाजपा विधायक जुगल किशोर बागरी के निधन के बाद यह सीट रिक्त हुई है। युवक कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ता हिरासत में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सतना दौरे का NSUI और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता विरोध किया है। युवक कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राजदीप सिंह मोनू के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेसी प्रदर्शन की तैयारी में थे। कार्यकर्ता हेलिपैड पर प्रदर्शन के लिए जा रहे थे। पुलिस को इसकी भनक लगी तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

यूपी में ब्राह्मण वोट के लिए मचा सियासी घमासान

ब्राह्मण वोट पर यूपी में मचा सियासी घमासान सपा और बसपा में मची है ब्राह्मण वोट की होड़ साल 2007 का फॉर्म्यूला अपनाना चाहती है बसपा लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा के चुनाव को लेकर ब्राम्हण वोटों के लिए सियासी संग्राम छिड़ गया है. भाजपा ने कांग्रेस के नेता जितिन प्रसाद को पार्टी में शामिल कर ब्राम्हणों को संदेश देने का प्रयास किया है. तो वहीं बहुजन समाज पार्टी ने ब्राह्मणों को ध्यान में रखकर अयोध्या से प्रबुद्ध सम्मेलन की शुरुआत की है. सपा भी अब पीछे नहीं रहना चाहती है. विधानसभा चुनाव से पहले सभी दलों ने ब्राम्हणों को अपने पाले में लाने के लिए सियासी संग्राम छेड़ दिया है. बसपा के सम्मेलन देख सपा ने भी इस वोट बैंक को अपने पाले में लाने की तेजी दिखानी शुरू कर दी है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पिछड़ा, दलित, मुस्लिम के बाद सबसे ज्यादा राजनीतिक दलों का फोकस ब्राम्हण वोटों पर है. वह इसे किसी भी कीमत पर अपने पाले में लाने का प्रयास कर रही है. बसपा के रणनीतिकारों ने महसूस किया है कि ब्राह्मणों को अपने पाले में खींचना है तो राम व परशुराम की अग्रपूजा जरूरी है. बसपा ने 2007 में पहली बार सोशल इंजीनियरिंग का ताना-बाना बुना था. ब्राह्मणों को जोड़ने का यह पूरा फारम्यूला सतीश चंद्र मिश्रा ने तैयार किया था. उसके परिणाम भी अच्छे आए सरकार भी बनी. लेकिन वर्ष 2012 में बसपा का यह फार्मूला ना सिर्फ फेल हुआ बल्कि उसको सत्ता से भी बाहर कर दिया. बीएसपी चाहती है 2007 वाला फॉर्म्यूला बहुजन समाज पार्टी को लगता है कि 2007 वाला फॉर्मूला अगर सफल हुआ तो चुनावी वैतारिणी पार करने में कोई परेशानी नहीं होगी. इसी बात ख्याल रखते हुए उसने धार्मिक स्थलों से प्रबुद्ध सम्मेलन की शुरुआत की है. हालांकि उसने इस सम्मेलन को ब्राम्हण बाहुल क्षेत्रों में न जाकर धार्मिक स्थान को चुना है. उसे लगता है, इससे बड़ा संदेष जाएगा. बसपा रणनीतिकार मानते हैं कि दलित, मुस्लिम और ब्राम्हण वोट बैंक अगर मिला तो बड़ा गेमचेंज हो जाएगा. ब्रह्मण समाज ने बसपा को बहुत कुछ दिया बसपा नेता व पूर्व मंत्री नकुल दुबे कहते हैं कि ब्राम्हण समाज ने बसपा को बहुत कुछ दिया है. पार्टी ने ब्राम्हणों को बहुत कुछ दिया है. समाज को अंदोलित किया जा रहा है. सपा में 2012 और 2017 के बीच के कार्यकाल को देख लें तो किसी से कुछ छिपा नहीं है. इनकी कथनी करनी में सामनता नहीं है. ब्राम्हणों को इस्तेमाल तो खूब किया जाता है लेकिन हिस्सेदारी की बात आती है तो लोग पीछे हटने लगते हैं. पूरब से लेकर लेकर पश्चिम तक ब्राम्हण जगा हुआ है. इस समय इस वर्ग के साथ अत्याचार भी बहुत हो रहा है. बस वह समय का इंतजार कर रहा है. सपा ने भी दिखाया ब्राह्मण प्रेम उधर, ब्राम्हणों के प्रति प्रेम तो सपा कुछ माह पहले भी जता चुकी, लेकिन बसपा के कार्यक्रम शुरू होते ही अखिलेश यादव ने इस ओर तेज गति करते हुए रणनीति बनाने के लिए पार्टी के पांच ब्राह्मण नेताओं की टीम बना दी है. लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ पार्टी के पांच बड़े ब्राह्मण नेताओं ने करीब ढाई घंटे तक मंथन किया. अब सपा 23 अगस्त से मंगल पाण्डेय की धरती माने जाने वाले बलिया से ब्राह्मण सम्मेलन करेगी. सूबे में जातीय सम्मेलन पर रोक के कारण सपा भी इसको कोई नया नाम दे सकती है. समाजवादी प्रबुद्ध सभा के अध्यक्ष और विधायक मनोज पांडेय कहते हैं कि 23 अगस्त से हम लोग बलिया से प्रबुद्ध सम्मेलन का आयोजन करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इससे पहले हमारा प्रबुद्ध सम्मेंलन 57 जिले में हो चुका और अब दूसरा चरण शुरू करने जा रहे हैं. सपा ने 22 जिलों में परशुराम की मूर्तियां स्थापित कीं 2019-20 में सम्मेलन 57 जिलों में कार्यक्रम किए. महामारी के कारण यह बंद हो गया था. करीब 22 जिलों में परशुराम की मूर्तियां भी स्थापित की जा चुकी हैं. ब्राम्हण समाज के लिए सपा ने बहुत कुछ किया है. वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक पीएन द्विवेदी कहते हैं कि यूपी में सत्ता तक पहुंचाने में ब्राम्हणों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है. 2007 ब्राम्हणों का साथ मायावती को मिला तो सरकार बनी. इन्हीं के कारण 2012 में सपा की सरकार बनी. 2014 केन्द्र में मोदी और 2017 में योगी की सरकार बनवाने में ब्राम्हणों का काफी अहम रोल है. चूंकि ब्राम्हणों की भूमिका सत्ता के नजदीक ले जाने की होती है. इसीलिए सभी दल इनके नजदीक जाने में जुटे हैं.

MP : CM शिवराज ने की बारिश में पौधे की सिंचाई, तस्वीर वायरल

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की एक तस्वीर आई है, जिसमें वह संगमरमर के दो बड़े-बड़े पत्थरों पर खड़े होकर एक पौधा लगाने के बाद उसमें पानी डालते हुए नजर आ रहे हैं और इस दौरान एक व्यक्ति उनके ऊपर छाता खोलकर पकड़े हुए है, ताकि बारिश के पानी से उनको बचाया जा सके. इस पर शुक्रवार को एक व्यक्ति ने ट्विटर पर लिखा कि ‘अंदाज अपना अपना’. मुख्यमंत्री के सूचना प्रसार से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि चौहानजी रोजाना एक पौधा लगाते हैं और उसमें पानी डालते हैं. खराब मौसम के बावजूद वह पेड़ लगाते हैं और उसमें पानी डालते हैं. विपक्षी दल कांग्रेस ने चौहान पर तंज कसने के लिए उनकी यह तस्वीर ट्विटर पर डाली है, जिसमें वह भोपाल स्थित स्मार्ट सिटी पार्क में संगमरमर के दो बड़े-बड़े पत्थरों पर खड़े होकर एक पौधा लगाने के बाद उसमें पानी डालते हुए नजर आ रहे हैं और इस दौरान एक व्यक्ति उनके ऊपर छाता खोलकर पकड़े हुए है, ताकि बारिश के पानी से उनको बचाया जा सके. कांग्रेस ने चौहान पर तंज कसते हुए लिखा है कि ये हैं माटी के लाल, किसान पुत्र. मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने चौहान की इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए ट्वीट किया, ‘‘माटी के लाल, किसान पुत्र शिवराज जी का गीली मिट्टी पर महँगा पत्थर बिछवाकर बरसात में छाता लगाकर पौधों को पानी डालते हुए विहंगम दृश्य……” सलूजा द्वारा डाले गये इस पोस्ट पर एक व्यक्ति लिखा, ‘‘क्या गजब की नौटंकी है – छाता, बारिश, कैमरा और एक्शन.” इस पर ट्विटर पर कमेंट लिखते हुए एक व्यक्ति ने कहा, ‘‘अंदाज अपना अपना”. वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, ‘‘नेताओं का अहंकार. प्रचार की इच्छा उनसे ऐसी मूर्खतापूर्ण हरकतें करवाती हैं. इन्हें लगा होगा कि इनके पानी के आगे आसमान के पानी में दम नहीं.” इस बारे में एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘‘हम ऐसी घटिया बातों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते. सम्मान में अगर कोई उनके लिए संगमरमर के पत्थर बिछाता है और बारिश से भींगने के लिए उनके ऊपर छाता खोलकर पकड़ता है तो चौहानजी क्या कर सकते हैं.” उन्होंने कहा कि चौहानजी रोजाना एक पौधा लगाते हैं और उसमें पानी डालते हैं. खराब मौसम के बावजूद वह पेड़ लगाते हैं और उसमें पानी डालते हैं. क्या यह प्रशंसनीय कार्य नहीं है? हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि चौहान की यह तस्वीर भोपाल में खींचीं गई है. मालूम हो कि मुख्यमंत्री चौहान ने प्रतिदिन पौधारोपण के संकल्प के क्रम में बृहस्पतिवार को भोपाल स्थित स्मार्ट सिटी पार्क में अशोक का पौधा लगाया था और इसकी एक तस्वीर मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग की वेवसाइट पर भी डाली है, जिसमें वह संगमरमर के दो पत्थरों पर खड़े होकर इस पेड़ को लगा रहे हैं.

UP : प्रबुद्ध सम्मेलन के रास्ते ब्राह्मणों को मनाने में जुटी बीजपी

कानपुर। भाजपा प्रबुद्ध सम्मेलन के बहाने ब्राह्मणों को मनाने का में लगी हुई है। इसी क्रम में कानपुर देहात के रानियां अकबरपुर से विधायक प्रतिभा शुक्ल ने शहर में कार्यक्रम आयोजित कर ब्राह्मणों को एकजुट करने का संदेश देने का कार्य किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थिति गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र ने कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों के नाम पर प्रमुख मार्गों और शहरों के नाम बदलने का कार्य चलता रहेगा। यह कलंक है, इनको तो मिटना ही होगा। इस दौरान जय श्री राम जय परशुराम के नारे भी लागये गये। हिंदुत्व के बहाने ब्राह्मणों को एक जुट दिखाने की कोशिश भी की गयी। भाजपा राष्ट्रवादी सोच रखती हैं जातिवादी नही मंत्री अजय मिश्र ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक स्थिति में हमारी सोच कैसी हो इस पर चर्चा करनी होगी। उन्होंने कहा कि यह केवल ब्राह्मणों का सम्मेलन नहीं है। राष्ट्र के सम्मान को बढ़ाने के लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा। हिंदुस्तान एक आध्यात्मिक देश है। हमारी पहचान धर्म और शिक्षा रही है। आज प्रबुद्ध सम्मेलन के नाम पर जातिगत सम्मेलन हो रहे है। जबकि भाजपा प्रबुद्ध सम्मेलन में यहां देश की चिंता कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के शशक्तिकरण, रोज़गार, सड़क, बिजली, ट्रैन, अच्छी कानून व्यवस्था पर काम करने के लिये भाजपा सरकार चुना गया है। अपमान से जुड़े नाम बदल जाते रहेंगे अजय मिश्र ने कहा कि बाबर, लोधी, गजनी, गोरी जैसे आक्रांताओं ने लूट के साथ, धर्म पर हमला किया। मंदिर मठों को तहस नहस किया गया। हमारी व्यवस्था को नष्ट किया गया। इसके पुनर्निर्माण की ज़रूरत है। देशबके प्रधानमंत्री ने अपने देश की संस्कृति को विश्व पटल पर रखा। शहरों और सड़कों का नाम बदलने का काम भाजपा करती रहेगी। क्योंकि जो चिन्ह देश के अपमान से जुड़े हुए हैं, उन्हें हबदलना होगा। अबकी बार कश्मीर में लोगों ने अपने घरों में तिरंगा फहराया, कृष्ण की झांकी लाल चौक में निकाली गई। भाजपा सत्ता के माध्यम से देशवाशियों को सुविधा संपन्न बनाने का काम कर रही है। ऐसे में राष्ट्र, देश समाज के लिए प्रबुद्ध वर्ग की बडी भूमिका। 25 करोड़ की मूर्ति के बहाने ब्राह्मण नेता बनने की फिराक़ में अनिल शुक्ल विधायक प्रतिभा शुक्ल के पति और पूर्व सांसद अनिल शुक्ल वारसी ने प्रबुद्ध सम्मेलन आयोजित कर खुद का कद बढ़ाने की कोशिश की। पिछले कुछ समय से कई ब्राह्मण नेताओ के प्रयास है कि वह खुद को ब्राह्मणों का नेता साबित कर सके। आज के प्रबुद्ध सम्मेलन के माध्मय से कुछ ऐसा ही करते नज़र आये अनिल शुक्ल वारसी भी। उनका दावा है कि एक मंदिर बनाया जायेगा जिसमें 25 करोड़ की मूर्ति भगवान परशुराम की लगाई जायेगी। गृहराज्य मंत्री का है कानपुर से गहरा नाता केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र कानपुर के चौबेपुर ब्लॉक के एक गांव के ही रहने वाले हैं। BNSD इंटर कॉलेज से इन्होंने शिक्षा ली है। क्राइस्ट चर्च कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। DAV लॉ से वकालत की पढ़ाई की हुयी है। कानपुर से ही पढ़े अजय मिश्र को मोदी सरकार में गृह मंत्री अमित शाह के साथ काम करने का मौका मिला है।

गुजरात के CM विजय रुपाणी ने चुनाव से एक साल पहले छोड़ा पद

अहमदाबाद। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने चुनाव से एक साल पहले अचानक इस्तीफा दे दिया है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी में समय के साथ दायित्व बदलते रहते हैं। भाजपा में यह स्वभाविक प्रक्रिया है। मुझे 5 साल के लिए मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली, जो मैंने पूरी की है। रुपाणी ने कहा कि जेपी नड्डा जी का भी मार्गदर्शन मेरे लिए अभूतपूर्व रहा है। अब मुझे जो भी जिम्मेदारी मिलेगी मैं उसका निर्वहन करूंगा। हम पद नहीं जिम्मेदारी कहते हैं। मुझे जो जिम्मेदारी मिली थी वह मैंने पूरी की है। हम प्रदेश के चुनाव नरेंद्र मोदी जी की अगुवाई में लड़ते हैं और 2022 का चुनाव भी उन्हीं की अगुवाई में लड़ा जाएगा। बता दें रुपाणी ने 26 दिसंबर 2017 को दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। भाजपा ने गुजरात में 182 सीटों में से 99 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। विधानमंडल दल की बैठक में रुपाणी को विधायक दल का नेता और नितिन पटेल को उपनेता चुना गया था। नए मुख्यमंत्री की रेस में 4 नाम शामिल रुपाणी के इस्तीफे के बाद ये अटकलें भी शुरू हो गई हैं कि अब अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इनमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया, केंद्रीय मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री पुरषोत्तम रुपाला, गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल और गुजरात भाजपा के अध्यक्ष सीआर पाटिल के नाम आगे हैं। बीते कुछ दिनों से चल रही थीं नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें बीते कुछ दिनों से गुजरात सरकार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें लग रही थीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार रात करीब 8 बजे अचानक अहमदाबाद पहुंचे थे। उनके गुजरात आने का कोई तय शेड्यूल नहीं था। एयरपोर्ट पर अमित शाह का स्वागत करने राज्य गृहमंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा, मेयर किरीट परमार और स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन हितेश बारोट पहुंचे थे। हालांकि गुरुवात रात को अमित शाह अपनी बहन के घर पहुंचे थे तो लगा कि पारिवारिक काम से आए होंगे, लेकिन अब लग रहा है कि शायद सत्ता में बदलाव के सिलसिले में ही वे गुजरात पहुंचे होंगे। हार्दिक पटेल बोले- जनता को गुमराह कर रही भाजपा रूपाणी के इस्तीफे पर पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने कहा है कि भाजपा जनता को गुमराह कर रही है। कोरोना में अव्यवस्था और नाकामी की वजह से लोगों में नाराजगी थी। ऐसे में भाजपा सीएम बदलकर लोगों को गुमराह कर रही है। उसने उत्तराखंड में भी यही किया है।

BBC खुलासा : मोदी सरकार ने विज्ञापनों में कुल 5,749 करोड़ रुपए ख़र्च किए

– BBC की रिपोर्ट – साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से सरकार ने जनवरी 2021 तक विज्ञापनों में कुल 5,749 करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं  – इससे पहले की यूपीए सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में विज्ञापनों पर 3,582 करोड़ रुपए ख़र्च किए थे  नई दिल्ली। कोरोना महामारी के दौर में मोदी सरकार ने महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना (पीएमजेएवाई) के प्रचार पर जितना ख़र्च किया उससे कहीं अधिक ख़र्च नागरिकता संशोधन क़ानून, नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर और कृषि क़ानूनों जैसे विवादित क़ानूनों से जुड़े विज्ञापनों पर किया। भारत में बेहतर इलाज के लिए ग़रीबों को आर्थिक मदद देने के लिए आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत हुई थी। साल 2020 में कोविड-19 महामारी का असर झेल रहे लोगों के लिए इसके दायरे को बढ़ाया गया था। बीबीसी ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) का इस्तेमाल करते हुए कोरोना महामारी के दौर में विज्ञापन के ख़र्च में मोदी सरकार की प्राथमिकताओं को समझने की कोशिश की। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक़ अप्रैल 2020 से लेकर जनवरी 2021 के बीच मोदी सरकार ने विज्ञापनों पर कुल 212 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसमें से केवल 0.01 फ़ीसदी यानी 2 लाख 49 हज़ार रुपए सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य बीमा योजना के विज्ञापन पर खर्च किए गए हैं। इस डेटा में आउटडोर मीडिया विज्ञापनों (सड़कों और बाहर लगने वाले पोस्टर वगैरह) पर ख़र्च का हिसाब शामिल नहीं है। भारत सरकार के ताज़ा आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार देश में केवल 3.76 फ़ीसदी लोग की स्वास्थ्य बीमा लेते हैं जबकि वैश्विक स्तर पर क़रीब 7.23 फ़ीसदी लोग स्वास्थ्य बीमा का लाभ उठाते हैं। तो सरकार ने खर्च कहां किया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर अक्सर विज्ञापनों में ज़रूरत से अधिक ख़र्च करने के आरोप लगते रहे हैं। साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से सरकार ने जनवरी 2021 तक विज्ञापनों में कुल 5,749 करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं। इससे पहले की यूपीए सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में विज्ञापनों पर 3,582 करोड़ रुपए ख़र्च किए थे। बीबीसी यह पड़ताल करना चाहती थी कि मौजूदा सरकार किस मद में अधिक ख़र्च कर रही है।  इसके लिए सूचना के अधिकार के तहत भारत सरकार के ‘ब्यूरो ऑफ़ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ को सूचना के अधिकार के तहत अर्ज़ी भेजी गई। यह विभाग सरकार के दिए जाने वाले विज्ञापनों का लेखा-जोखा रखता है। आरटीआई के जवाब में ब्यूरो ने 2,000 पन्नों के दस्तावेज़ भेजे जिनमें मई 2004 से लेकर जनवरी 2021 के बीच प्रिंट मीडिया, टेलीविज़न, डिजिटल और आउटडोर प्लेटफ़ॉर्म पर सरकारी विज्ञापनों पर किए ख़र्च का हिसाब था। इन आंकड़ों को समझने पर सामने आया कि जिस वक्त कोरोना महामारी देश में क़हर बरपा रही थी, उस वक्त सरकार अपने कार्यकाल में लाए कुछ विवादित क़ानूनों के बचाव और उनके बारे में अधिक जागरूकता फैलाने के लिए विज्ञापन दे रही थी। इन क़ानूनों में नागरिकता संशोधन क़ानून, नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर और कृषि क़ानूनों जैसे क़ानून शामिल थे जिन्हें लेकर हाल के महीनों में काफ़ी विवाद हुआ है। योजना के फ़ायदे के बारे में किसे कितनी जानकारी? साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 हज़ार रुपए से कम प्रति माह की आय वाले भारतीय परिवारों के लिए ये स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की थी। मोदी समर्थकों ने इस योजना को ‘मोदीकेयर’ कहा था और दावा किया कि ये योजना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा लांच की गई जानी मानी ‘ओबामाकेयर’ की तर्ज पर है। कोविड महामारी की पहली लहर के दौरान संक्रमण के मामले बढ़े तो इसका दवाब देश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ा जो मरीज़ों की बढ़ती संख्या के कारण चरमराने की अवस्था तक पहुंच गई। इस दौरान हज़ारों लोगों ने इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख़ किया और कई परिवारों के लिए ज़रूरी पैसों की व्यवस्था करना बड़ी समस्या बन गया। ऐसे में सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाया और कइयों के लिए ये सरकारी बीमा योजना बेहद अहम साबित हुई। अप्रैल 2020 में सरकार ने कहा कि निजी और सरकार के साथ जुड़े सार्वजनिक अस्पतालों में कोरोना वायरस की टेस्टिंग और कोविड-19 के इलाज का ख़र्च इस बीमा योजना के तहत कवर होगा। इसी साल 18 अगस्त को घोषणा की गई थी कि आयुष्मान योजना के तहत 2 करोड़ लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गई हैं . इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने की सूरत में लाभार्थियों को कैशलेस इलाज मिलता है और साल में एक परिवार के सदस्यों के इलाज पर 5 लाख तक के ख़र्च को कवर किया जाता है। आरटीआई के ज़रिए हमें पता चला कि 2018 के आख़िर से लेकर 2020 की शुरुआत तक सरकार ने आयुष्मान योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 25 करोड़ रुपयों से अधिक के विज्ञापन दिए हैं। मगर कोरोना महामारी के दौरान ये ख़र्च काफ़ी हद तक कम कर दिया गया और सरकार की सकारात्मक छवि दिखाने वाले अभियानों पर अधिक ख़र्च किया गया। इनमें सरकार का ‘मुमकिन है’ अभियान शामिल है जिसके केंद्र में पीएम मोदी की छवि थी। बीबीसी ने स्वास्थ्य योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने वाले विज्ञापनों पर ख़र्च बनाम विवादित क़ानूनों के बारे में विज्ञापन के संबंध में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नलिन कोहली से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। केंद्र सरकार के आयुष्मान योजना में पंजीकरण कराने के बावजूद राजस्थान के सीकर में रहने वाले राजेंद्र प्रसाद को अस्पताल का बिल देना पड़ा। राजेंद्र के भाई सुभाष चंद के पास प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड है। इस साल मई में कोरोना संक्रमण के बाद उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। राजेंद्र ने बीबीसी संवाददाता सरोज सिंह को बताया था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि इस सरकारी योजना के तहत कौन से अस्पताल सूचीबद्ध हैं। उन्होंने कहा, ‘अस्पताल के डॉक्टर ने आयुष्मान भारत येजना कार्ड को स्वीकार करने से मना कर दिया और मेरे भाई का इलाज करने से इनकार कर दिया। अब मुझे लगता है कि इस कार्ड के होने का हमारे लिए कोई फ़ायदा नहीं है।’ हालांकि राजस्थान राज्य स्वास्थ्य योजना की कार्यकारी अधिकारी अरुणा राजोरिया का कहना है कि आयुष्मान योजना के सभी लाभार्थियों को एसएमएस के ज़रिए एक … Read more

BJP नेता आत्माराम तोमर की संदिग्‍ध मौत, घर में मिला शव; हत्या की आशंका

बड़ौत . पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री और बीजेपी नेता (BJP Leader) डॉ आत्माराम तोमर (Atmaram Tomar Died) अपने आवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए है. जानकारी के अनुसार वो अपने घर में अकेले रहते थे. डॉ आत्माराम तोमर की गला घोंट कर हत्या (Murder) किए जाने की आशंका जताई जा रही है. डॉ आत्माराम तोमर छपरौली से बीजेपी की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. तोमर जनता वैदिक इंटर कालिज बड़ौत के प्रधानाचार्य भी रह चुके थे. घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर घटना की छानबीन शुरू कर दी है. घटना के अंजाम देने के बाद बदमाश तोमर की स्कोर्पियो गाड़ी भी ले गए. डॉ आत्माराम तोमर के बिजरोल रोड स्थित आवास पर बीजेपी नेताओं का जमावड़ा हुआ है. देर रात वारदात को दिया गया अंजाम जानकारी के अनुसार देर रात घटना को अंजाम दिया गया. परिजनों का आरोप है कि गला दबाकर तोमर की हत्या की गई है. 1997 में डॉ आत्माराम तोमर गन्ना संस्थान के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री स्तर) पर रहे थे. वारदात को बड़ौत थाना क्षेत्र के बिजरौल रोड़ इलाके में अंजाम दिया गया है. गले में लिपटा मिला तौलिया पुलिस को उनके गले में तौलिया भी लिपटा मिला. इससे उनकी हत्या की भी आंशका जताई जा रही है. देर रात एसपी नीरज जादौन, एएसपी मनीष मिश्र, सीओ आलोक कुमार भी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली. इसके बाद डॉग स्क्वायड की टीम को घटनास्थल पर बुलाया गया. आसपास रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की गई. साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले गए. परिवार में मचा कोहराम उधर सूचना पर मृतक डॉ. आत्मराम तोमर के बेटा डॉ. प्रताप भी मौके पर पहुंचे. फिलहाल मौत या फिर हत्या का कारण पता नहीं चल सका है. घटना के बाद परिजनों में भी कोहराम मच हुआ है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी मामले की जांच हो रही है, उसके बाद ही स्तिथि स्पष्ट होगी.

MP : कोरोना पर CM शिवराज अलर्ट, आपात बैठक बुलाई

नागपुर, मुंबई में केस बढ़े हैं, मप्र में  दो हफ्ते से फिर केस मिलने लगे जबलपुर कलेक्टर का आदेश- कोई भी बिना मास्क न दिखे राजगढ़/जबलपुर.  कोरोना एक बार फिर से चिंता बढ़ा रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेशवासियों को कोरोना से अलर्ट किया है। सीएम ने कहा- ‘केरल की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। हमारे पड़ोसी राज्यों में भी लगातार केस बढ़ रहे हैं। मप्र में भी पिछले दो सप्ताह में केस में उछाल देखा गया है। हमें सतर्क रहने की जरूरत है।’ मुख्यमंत्री ने गुरुवार को कोरोना के बढ़ते केस को लेकर आपात बैठक बुलाई है। यह बैठक एक घंटे चलेगी। इसमें कुछ पाबंदियों पर विचार किया जा सकता है। इधर, जबलपुर में लगातार मिले नए संक्रमितों ने चिंता बढ़ा दी है। कलेक्टर ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी व्यक्ति बगैर मास्क के घूमता नजर नहीं आना चाहिए। इसका सख्ती से पालन किया जाए। राजगढ़ में सीएम शिवराज ने कहा- सरकार का टारगेट है कि सितंबर अंत तक वैक्सीन का पहला डोज सभी पात्रों को लग जाए। केंद्र सरकार हमें नि:शुल्क वैक्सीन उपलब्ध करवा रही है। पहले डोज के साथ हमें दूसरे डोज की भी चिंता करना पड़ेगी। इसलिए पहला डोज लगवा चुके, पात्र दूसरा डोज भी लगवा लें। प्रदेश के कई जिलों में कोविड केस की संख्या फिर से बढ़ने लगी है। हमारे पड़ोसी राज्यों में, खासकर दक्षिण के राज्यों में लगातार केसों की संख्या बढ़ रही हैै। केरल की स्थिति सब जानते हैं। महाराष्ट्र में नागपुर, मुंबई, पुणे में फिर से केस बढ़ने लगे हैं। हमारी कोशिश तीसरी लहर नहीं आए सीएम ने कहा- सरकार अभियान चला ही रही है। जनता के सहयोग से जिले, ब्लॉक और पंचायत की क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी को सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। पहली प्राथमिकता सबको वैक्सीन का डोज लगाना, जिन्हें पहला लगा, उन्हें दूसरा लगाना। दूसरा, कोविड नियम का पालन करना। संक्रमण फैले ऐसा कोई भी काम नहीं करें। तीसरा -तीसरी लहर आई तो उससे निपटने के लिए हमने सारी व्यवस्थाएं बना ली हैं। ऑक्सीजन बेड, आईसीयू बेड, बच्चा वार्ड, ऑक्सीजन प्लांट लगाना। हमारी कोशिश यह है कि तीसरी लहर प्रदेश में नहीं आए। मप्र में 7 सितंबर की स्थिति पिछले 24 घंटे में जबलपुर में 12, भोपाल में 2, इंदौर में 1, राजगढ़ में 1 केस सामने आए है। मप्र में अभी 137 एक्टिव केस हैं। बुधवार को इनमें से 6 लोग ठीक होकर घर लौट गए। अभी पॉजिटिविटी रेट 0.02 है। वहीं, मृत्युदर 00 फीसदी है।

MP में बेरोजगारी बनी जान की दुश्मन

खरगोन में चयनित शिक्षक की कीटनाशक पीने से मौत  – बेटा अस्पताल में भर्ती, कांग्रेस बोली – सरकार जिम्मेदार खरगोन.  खरगोन में लंबे समय से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे चयनित शिक्षक ने खुदकुशी कर ली है। उसने पहले बेटे को कीटनाशक दिया। इसके बाद खुद भी गटक लिया। कीटनाशक पीने से जहां पिता की मौत हो गई। वहीं, उसके 8 साल के बेटे को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। जहां से उसे इंदौर रैफर कर दिया गया। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने शिक्षक की मौत का जिम्मेदार शिवराज सरकार को बताया है। खरगोन के जिला अस्पताल पुलिस चौकी के अनुसार अकावल्या का रहने वाले 36 साल के राकेश पाटीदार की मौत हो गई है। वहीं, उसके 8 साल के बेटे आरव को गंभीर हालत में इंदौर रैफर किया गया है। मंगलवार रात 8.50 बजे वह बेटे के साथ बिस्टान रोड पर भोंगनाला के पास पड़ा था। लोगों ने देख पुलिस को सूचना दी। इसके बाद उसे जिला अस्पताल लाया गया। यहां इलाज के दौरान रात 9.30 बजे राकेश की मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

37 करोड़ रुपए का इनामी अफगानिस्तान का गृहमंत्री; 13 साल पहले भारत को जख्म दिया था

काबुल. 20 साल बाद अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ा। 20 साल बाद ही एक बार फिर तालिबान ने हुकूमत का औपचारिक ऐलान कर दिया। तालिबान घोषित आतंकी संगठन है और जाहिर सी बात है कि उसकी सरकार में दहशतर्दों को ही जगह मिलनी थी, और मिली भी। एक नाम और उसका ओहदा या कहें पोर्टफोलियो, अमेरिका और दुनिया को चौंका रहा है। ये नाम है सिराजुद्दीन हक्कानी। वो कितना खूंखार आतंकी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका ने उस पर 50 लाख डॉलर (इंडियन करेंसी के मुताबिक करीब 37 करोड़ रुपए) का इनाम घोषित कर रखा है। सिराजुद्दीन और उसके पिता ने 2008 में काबुल के भारतीय दूतावास पर भी हमला कराया था। इसमें 58 लोग मारे गए थे। 2011 में अमेरिका के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ रहे जनरल माइक मुलेन ने हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का दायां हाथ और एजेंट बताया था। फिदायीन हमले इसके दिमाग की उपज फिदायीन हमलों का इतिहास कई दशक पुराना है। माना जाता है कि श्रीलंका में सिविल वॉर के वक्त इनकी शुरुआत हुई थी, लेकिन अफगानिस्तान में फिदायीन या आत्मघाती हमले शुरू करने वाला हक्कानी नेटवर्क और खास तौर पर यही सिराजुद्दीन हक्कानी माना जाता है। अफगानिस्तान में इन हमलों में अब तक हजारों बेकसूर मारे जा चुके हैं। सिराजुद्दीन ने अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई की हत्या की साजिश भी इन्हीं हमलों के तहत रची थी। ये नाकाम रही। कहा जाता है कि सिराजुद्दीन का बाप और हक्कानी नेटवर्क की स्थापना करने वाला जलालुद्दीन हक्कानी 2013 या 2015 के बीच मारा गया, लेकिन सिराजुद्दीन 2001 के बाद से ही हक्कानी नेटवर्क का सरगना बना हुआ है। सिराजुद्दीन पाकिस्तान के वजीरिस्तान में ही रहता है। हक्कानी नेटवर्क को जानना जरूरी इसको संक्षिप्त में समझ लेते हैं। 1980 के आसपास सोवियत सेना ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। अमेरिका ने इसे अपनी तौहीन समझा। पाकिस्तान के साथ मिलकर स्थानीय कबीलों को हथियार और पैसा दिया। इनमें हक्कानी नेटवर्क भी शामिल था। इसके बाद तालिबान बना और अमेरिका ने इन गुटों से दूरी बनानी शुरू कर दी, लेकिन पाकिस्तान इन्हें पालता-पोसता रहा। ISI ने हक्कानी नेटवर्क का इस्तेमाल अफगानिस्तान और अमेरिका दोनों के खिलाफ किया। ये एजेंसी पैसे भी लेती और हमले भी कराती। अमेरिका की ये नाकामी ही कही जाएगी कि वो पाकिस्तान पर दबाव डालकर हक्कानी नेटवर्क को खत्म नहीं करा सका। तालिबान और हक्कानी नेटवर्क: कितने पास, कितने दूर शायद कम लोगों को पता होगा कि तालिबान किसी एक संगठन का नाम नहीं है। इसमें कई गुट, कई कबीले और कई धड़े हैं। हक्कानी नेटवर्क को आप इनमें से एक मान सकते हैं। अफगान तालिबान अलग है और पाकिस्तान तालिबान अलग। बस एक चीज कॉमन है। ये सभी कट्टरपंथी और आतंकी संगठन हैं जो शरीयत के हिसाब से हुकूमत चलाना चाहते हैं। तालिबान और हक्कानी नेटवर्क अपनी सुविधा के हिसाब से एक-दूसरे का इस्तेमाल करते हैं। अफगान तालिबान को सत्ता में आने के लिए हक्कानी नेटवर्क ने दिल-ओ-जान से मदद की। नतीजा सामने है। उसका सरगना अब अफगानिस्तान का होम मिनिस्टर होगा। दूसरे शब्दों में कहें तो तालिबान और हक्कानी नेटवर्क एक होकर भी अलग हैं, और अलग होकर भी एक हैं। हक्कानी नेटवर्क का खूनी खेल 2001: सिराजुद्दीन हक्कानी नेटवर्क का चीफ बना 2008 : में भारतीय दूतावास पर हमला, 58 की मौत 2012 : में अमेरिका ने हक्कानी नेटवर्क को बैन किया 2014 : में पेशावर स्कूल पर हमला, 200 बच्चे मारे गए 2017 : काबुल में हमला, 150 से ज्यादा लोगों की मौत

खरगोन में आदिवासी युवक की मौत पर सियासत तेज

कमलनाथ ने बीजेपी सरकार पर आदिवासियों के उत्पीड़न का आरोप लगाया  भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नीमच में आदिवासी युवक को गाड़ी से बांधकर खींचने पर हुई मौत का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ था. इसी बीच खरगोन (Khargone) में एक आदिवासी (Tribal) की मौत के मामले को लेकर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है. आदिवासी की मौत पर कांग्रेस राज्य की बीजेपी सरकार पर हमलावर हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आदिवासी उत्पीड़न का आरोप लगाया है. कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा है कि नेमावर नीमच के बाद अब खरगोन के विस्तार थाने में एक आदिवासी की मौत का मामला सामने आया है. बालाघाट में स्कूल जाते समय का आदिवासी छात्रा की हत्या की खबर है. कमलनाथ ने सरकार से दोनों घटनाओं पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. कमलनाथ ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और न्याय दिलाने को कहा है. वहीं कांग्रेस नेता अरुण यादव ने भी बयान जारी कर कहा है कि खरगोन के विस्तार थाने में तालिबानी रिमांड में एक आदिवासी की मौत हो गई है. यह घटना दु:खद और निंदनीय है. गृह मंत्री ने दिए जांच के आदेश खरगोन की घटना पर एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जांच के आदेश दिए हैं. गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने घटना को निंदनीय बताया है. गृह मंत्री ने कहा कि इस तरीके के मामलों पर सियासत नहीं होनी चाहिए. पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं. जांच में जहां लापरवाही मिलेगी वहां कार्रवाई होगी. अस्पताल थाने में कहां पर लापरवाही हुई है, इस बात की जांच होगी. प्रदेश में एक के बाद एक पूरी घटनाओं पर भी गृह मंत्री ने चिंता जताई है. कांग्रेस के खरगोन मामले पर जांच दल बनाने पर गृहमंत्री ने कहा है कि कांग्रेस हर मामले पर सियासत करती है. कांग्रेस पर साधा निशाना नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दतिया वाले मामले में अल्पसंख्यक की हुई पिटाई पर कांग्रेस ने जांच दल क्यों नहीं बनाया. इसका जवाब देना चाहिए. बहरहाल प्रदेश प्रदेश में आदिवासियों के साथ घट रही घटनाओं को लेकर सियासत घर में पहले नीमच उसके बाद अब खरगोन का मामला सामने आने पर अब सियासत जोर पकड़ती हुई नजर आ रही है. बता दें कि खरगोन की घटना की जांच के लिए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने पूर्व मंत्री विजयलक्ष्मी साधो की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई है. इस कमेटी में ग्यारसी लाल रावत, मुकेश पटेल, प्राची लाल मेड़ा, लाल सिंह मेड़ा को शामिल किया गया है.

CM योगी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान करने वाले पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर हाउस अरेस्ट

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में 2022 में विधानसभा चुनाव (2022 uttar pradesh assembly election) होने हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Aadityanath) के खिलाफ इस बार विधानसभा चुनाव, चर्चित रिटायर आईपीएस अमिताभ ठाकुर (ips amitabh thakur)ने लड़ने का एलान किया है. सीएम के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान करने के बाद से अमिताभ ठाकुर की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं. अमिताभ ठाकुर को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया है. इस बात की जानकारी उन्होंने खुद ट्वीट के जारिए दी है. वहीं पुलिस का कहना है कि उन्हें केवल गोरखपुर जाने से रोका गया है. अमिताभ ठाकुर ने शनिवार को ट्वीट कर कहा कि उन्हें गोरखपुर जाने से रोका गया है. पुलिस घेरे में रखा गया है. उनकी पुलिस से बातचीत चल रही है. अमिताभ पर है रेप आरोपी का साथ देना का आरोप पुलिस का कहना है कि उन पर रेप आरोपी का साथ देने का आरोप है. अभी उन पर लगे आरोपों की जांच चल रही है. कमेटी ने इन आरोप की जांच के लिए इन्हें तलब किया है. कमेटी के सामने इन्हें पेश होना है. इसलिए ही उन्हे लखनऊ से बाहर जाने से रोका गया है. बावजूद इसके इन्होंने प्रतिबंध का उलंघन किया है. एक हफ्ते पहले ही चुनाव लड़ने की घोषणा की बता दें कि अमिताभ ने एक हफ्ते पहले सीएम योगी के खिलाफ यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने का घोषणा की थी. वो सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनावी जनसंपर्क के लिए गोरखपुर जा रहे थे. इस बीच उन्हें एसीपी गोमतीनगर ने घर के बाहर ही रोक दिया. अमिताभ ठाकुर फिलहाल आईजी रूल्स एंड मैनुअल के पद पर थे. उन्हे जबरन रिटायर किया गया था. अमिताभ ठाकुर 1992 बैच के आईपीएस हैं.

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