LATEST NEWS

राजधानी की बदहाल सड़कों पर भड़के CM शिवराज, CPA तत्काल प्रभाव से खत्म

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को भोपाल की खराब सड़कों पर नाराजगी जताई। CM ने भोपाल के कमिश्नर-कलेक्टर और एजेंसियों के साथ बैठक में अफसरों को फटकार लगा दी। उन्होंने कहा कि मुझे कोई बहाना नहीं चाहिए, किसी भी तरह गड्ढे खत्म करें। भोपाल की सड़कों की जिम्मेदारी 1 या 2 एजेंसी के पास होनी चाहिए। ढेर सारी एजेंसियों की कोई जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि तत्काल प्रभाव से राजधानी परियोजना प्रशासन (CPA) समाप्त होनी चाहिए। इसकी जरूरत नहीं है। MP की राजधानी और झीलों की नगरी भोपाल की 50% सड़कें बारिश के कारण बदहाल हो गई हैं। ऐसी कोई सड़क नहीं है, जो गड्‌ढों से न पटी हो या फिर उन पर धूल के गुबार न उड़ रहे हों। हालत ये है कि बारिश होते ही सड़कों पर कीचड़ फैला जाता है। भोपाल की बदहाल सड़कों पर विपक्ष ने भी सवाल उठाए थे। पूर्व CM दिग्विजय सिंह और पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव सड़कों के मुद‌्दे पर सरकार को घेर चुके हैं। पूर्व प्रोटेम स्पीकर और हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी तीन दिन पहले हुई कार्यशाला में नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह के सामने नाराजगी व्यक्त की थी। वहीं, जिम्मेदारों को कठघरे में खड़ा किया था। अफसरों ने गिनाएं तो CM बोले- मुझे कोई बहाना मत गिनाएं भोपाल की बदहाल सड़कों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समीक्षा बैठक में सड़क निर्माण से जुड़े अफसरों को जम कर फटकार लगाई। दरअसल, वे राजधानी की खराब सड़कों को लेकर नाराज थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आखिर यह नौबत ही क्यों आई। अभी तक आप लोग क्या कर रहे थे? जब अधिकारियों ने सड़कों के सुधार कार्य की स्थिति बतानी चाहिए तो उन्होंने टोकते हुए कहा कि बहाना नहीं चाहिए। पहले काम कराने का क्यों नहीं सोचा? इतनी सारी एजेंसियां आखिर करती क्या हैं? जब यह बताया गया कि राजधानी परियोजना प्रशासन (सीपीए) भी सड़कों का काम देखता है तो उन्होंने कहा कि इसे तत्काल खत्म करो। इसकी कोई जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री यहीं नहीं रूके, उन्होंने कहा- आप लोग कुछ करते हैं या नहीं? कोई तालमेल है कि नहीं है? कौन सी एजेंसी कहां काम कर रही है। यह नौबत क्यों कि रोज गड्ढे गिनो। इस पर डिवीजनल कमिश्नर कवींद्र कियावत ने जवाब दिया-भोपाल में पिछले दिनों सीवेज और वाटर लाइन के साथ-साथ मेट्रो का काम भी चला। वे इसके आगे कुछ बोलते, मुख्यमंत्री टोकते हुए कहा- कोई बहाना मत गिनाएं। यह तो बहुत अच्छा तरीका है कि यह हो गया या वो हो गया और खेल खत्म। हालांकि कियावत ने अफसरों के बचाव में फिर कहा- मेंटनेंस का काम अब हम शुरू कर रहे हैं… इस पर सीएम ने कहा- यह पहले क्यों नहीं सोचा कि उन कामों के साथ-साथ करें। इन सड़कों की हालत सबसे ज्यादा खराब कोलार गेस्ट हाउस से लेकर चिचली बैरागढ़ तक करीब 10 किमी सड़क का PWD ने 3 साल पहले रिन्युवल कराया था। इसके बाद सड़क की सुध नहीं ली। बारिश में जब सड़क जर्जर होती है, तो ठीक करा दिया जाता है। लेकिन, पिछले एक साल में सीवेज और कोलार लाइन बिछाने के लिए पूरी सड़क खोद दी गई। मंदाकिनी चौराहे से ललितानगर, नयापुरा, गेहूंखेड़ा में तो पूरी तरह से उखड़ी हुई है। होशंगाबाद रोड भी उखड़ चुका है। MP नगर से हबीबगंज रेलवे स्टेशन तक सड़क की हालत ठीक नहीं है। वीर सावरकर ब्रिज से मिसरोद तक की सर्विस लेन गैस लाइन बिछाने के लिए खोदी गई थी, जिसकी सही ढंग से मरम्मत नहीं की गई है। इस कारण होशंगाबाद रोड से जुड़ी करीब 200 कॉलोनी के लोग परेशान हो रहे हैं। मिसरोद के पास सड़क पर गड्‌ढे काफी गहरे हो चुके हैं। कई जगह डामर उखड़ चुका है। जिस पर गिट्‌टी डाल दी गई है। पुराने शहर की सड़कें भी ठीक नहीं है। भोपाल टॉकीज के सामने जर्जर सड़क का फोटो कांग्रेस नेताओं ने ट्वीट किया था। इसके बाद निगम ने सड़क के गड्‌ढों पर मिट्‌टी भर दी थी। बावजूद राहगीरों की समस्या दूर नहीं हुई है। थोड़ी बारिश होते ही मिट्‌टी कीचड़ में बदल जाती है। अल्पना टॉकीज के पास भी यही स्थिति है। घोड़ा नक्कास, नवबहार सब्जी मंडी में भी सड़क उखड़ चुकी है। बिट्‌ठन मार्केट, कमला पार्क के पास, एम्स क्षेत्र, बाग सेवनिया, अवधपुरी, गेहूंखेड़ा, रायसेन रोड, करोंद, डीआईजी बंगला क्षेत्र आदि इलाकों में भी सड़कें गड्‌ढों में गायब हो चुकी हैं। कमिश्नर से पहले सीएम ने बुला ली बैठक सड़कों की जर्जर हालत के चलते भोपाल कमिश्नर कवींद्र कियावत ने एक स्पेशल टीम भी बनाई थी, जिसे 20 अगस्त को रिपोर्ट सौंपना था। कमिश्नर आज बैठक लेने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मीटिंग बुला ली। मीटिंग में सीएस, पीएस पीडब्ल्यूडी, सीपीए, भोपाल कलेक्टर, नगर निगम के अधिकारी उपस्थित हैं।

इंदौर में पुलिस पर पथराव, हवाई फायर: आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल

इंदौर। बड़गोंदा में बुधवार को जमीनी विवाद को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गए। सूचना के बाद मौके पर पुलिस पहुंची। एक पक्ष के लोगों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया। यहां डायल-100 पर पथराव भी किया गया, जिसमें कांच फूट गए। इस दौरान SDOP, TI व बल पर भी पत्थर बरसाए गए। इसमें 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए। काबू पाने के लिए पुलिस को हवाई फायर भी करना पड़े। मामला दोपहर महू तहसील मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर मेढ़ के समीप आदिवासी बाहुल्य मार्ग रसानिया माल मोगरा घाटी का है। यहां ग्रामीण जितेंद्र कटारे और छोटेलाल भील के परिवार आमने-सामने हो गए। सूचना के बाद बड़गोंदा थाना क्षेत्र की डायल 100 मौके पर पहुंची। पुलिस वाहन में मौजूद पुलिसकर्मी कुछ समझते, उसके पूर्व ही डायल 100 पर एक पक्ष ने पथराव कर दिया। पायलेट ने समझदारी दिखाते हुए वाहन को रिवर्स मोड़ लिया। बावजूद, पथराव से ना सिर्फ डायल 100 के कांच फूट गए, बल्कि ASI व 3 जवानों को भी चोटें आईं। इसके बाद SDOP विनोद शर्मा, किशनगंज थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया व एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी पहुंचे। इस दौरान 300 से अधिक लोग यहां इकट्‌ठा हो गए। इन लोगों ने पुलिस पर कार्रवाई के दौरान पथराव कर दिया। इसके बाद किशनगंज TI ने हवाई फायर किए, जबकि मौजूद पुलिसकर्मी भागे। बाद में यहां ASP पुनीत गेहलोत, SDOP विनोद शर्मा सहित अन्य थाना प्रभारी व भारी पुलिस बल पहुंचा, तब कहीं स्थिति को काबू किया गया। इन पर हुई कार्रवाई रीना बाई पति जितेंद्र की रिपोर्ट पर करण पिता सुखराम, मेघु पिता सुखराम, विजय पिता सुखराम और राजू बाई सहित अन्य पर केस दर्ज किया गया है, जबकि राजू बाई पति छोटेलाल भील की रिपोर्ट पर जिरावर, ईश्वर, जितेद्र, जादूसिंह आदि पर केस दर्ज किया गया है। ये पुलिसकर्मी घायल हुए घटना में ASI ओमप्रकाश स्वामी, प्रधान आरक्षक सुरेश परमार, प्रधान आरक्षक बाबूलाल पटेल, आरक्षक विजय चौहान व 100 डायल पायलेट विपिन पारवे सहित अन्य पुलिसकर्मी। हालांकि सभी कही स्थिति ठीक बताई जा रही है। विवाद का कारण सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्षों में पिछले कई दिनों से जमीन विवाद को लेकर चला आ रहा है। दोनों ही पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ बड़गोंदा थाना में लिखित शिकायतें की है। बताया जाता है कि उक्त गांव में आदिवासियों ने करीब 75 बीघा वन भूमि पर कब्जा किया है।

चयनित शिक्षकों का आंदोलन, भोपाल में BJP दफ्तर का घेराव, पुलिस ने धमकाया, रोने लगी महिलाएं

भोपाल. भोपाल में 10 घंटे से चल रहा चयनित शिक्षकों का आंदोलन शाम को खत्म हो गया। वे सुबह 9 बजे से BJP दफ्तर का घेराव कर धरने पर डटे थे। शाम को कलेक्टर अविनाश लवानिया और डीआईजी इरशाद वली पहुंचे और चयनित शिक्षकों से हटने को कहा, लेकिन जब वे नहीं माने तो कुछ समय की मोहलत दी और फिर एफआईआर दर्ज करने के लिए नाम-पते लिखे जाने लगे। साथ ही मोबाइल पर वीडियो भी बनाए गए। एफआईजार की चेतावनी के बाद अधिकांश महिला-पुरुष हट गए। कुछ तो पुलिस ने जबरदस्ती हटा दिया। कार्रवाई से चलते कई महिलाएं रोने लगी तो एफआईआर की बात सुनकर कई पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़ने लगी। इस दौरान बारिश भी होने लगी। कई महिलाएं छाता लेकर डटी रहीं, लेकिन जब प्रदर्शनकारियों की भीड़ कम हुई तो उनके हौंसले भी पस्त हो गए। इन्हें चेतावनी दी गई कि यदि नहीं हटे तो एफआईआर दर्ज कर ली जाएगी और फिर कहीं भी नौकरी नहीं मिलेगी। यह सुनकर महिलाएं डर गईं और आखिरकर वे हट गईं। हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाई महिलाएं पुलिस कार्रवाई के डर से कई महिलाएं पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने लगी। वे रोने भी लगी। दूसरी ओर कई महिलाएं कार्रवाई का विरोध कर रही थी। उनका कहना था कि नियुक्ति के लिए धरना देने पर ही कोरोना का खतरा है, लेकिन राजनीतिक कार्यक्रमों से कोरोना नहीं फैलेगा? हालांकि, पुलिस की सख्ती से उनकी एक न चली। कई महिलाओं ने जब वीडयो-फोटो से इनकार किया तो जबरदस्ती की गई। हालांकि, डीआईजी ने जवानों को साफ तौर पर कहा कि मारपीट या अन्य तरीके से न हटाया जाए। बरसते पानी में कार्रवाई पुलिस बरसते पानी में कार्रवाई करती रही। शाम 7.30 बजे से सभी को मौके से हटा दिया गया था। वहीं धरनास्थल पर बेरिकेडिंग की गई। कार्रवाई के दौरान सड़क पर ट्रैफिक रोक दिया गया। इस कारण हबीबगंज रेलवे स्टेशन से एमपी नगर तक दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए। इससे पहले सुबह 9 बजे प्रदेशभर से आए सैकड़ों चयनित शिक्षकों ने BJP ऑफिस का घेराव कर दिया। CM शिवराज सिंह चौहान से उनकी मांग थी कि उन्हें जल्द नियुक्ति दी जाए, ताकि वे परिवार का भरण-पोषण कर सकें। नारेबाजी के दौरान कई महिलाएं रो पड़ीं और कुछ बेहोश भी हो गईं। चयनित महिला शिक्षक ‘हम होंगे कामयाब’ का नारा लगाती रही। महिलाओं ने मुख्यमंत्री से नियुक्ति की मांग को लेकर उठक-बैठक की तो कई महिलाएं सड़क पर नतमस्तक भी हो गईं। इस दौरान कुछ महिलाएं हाथों में राखी की थालियां सजाकर पहुंची। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को राखी बांधकर नियुक्ति पत्र तोहफे में लेकर जाऊंगी। हालांकि, उन्हें शाम को हटा दिया गया। 3 साल पहले चयन, अब तक नियुक्ति नहीं सुबह नारेबाजी के दौरान इंदौर की विनीता शर्मा की तबीयत बिगड़ गई। अन्य महिला साथियों ने विनीता को संभाला। विनीता का कहना है कि 3 साल पहले उसका संविदा शाला शिक्षक वर्ग-1 के पद पर चयन हो गया था, लेकिन स्कूल में अब तक नियुक्ति नहीं मिली है। इंदौर से आई एक अन्य चयनित शिक्षिका का कहना है कि नियुक्ति का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार सोई हुई है, हमारी मांग पूरी नहीं हो रही है। प्रदेशभर से आए चयनित शिक्षक सुबह 9 बजे से ही प्रदेशभर से चयनित शिक्षकों ने BJP दफ्तर के बाहर डेरा डाल दिया। कुल 3 हजार चयनित शिक्षकों में करीब एक हजार महिलाएं हैं। कई महिलाएं ऐसी थीं, जो अपने दुधमुंहे बच्चों को साथ लाई थी। किसी की गोद में बच्चा बैठा था तो किसी को उसके पिता संभाल रहे थे।

PM मोदी की लोकप्रियता तेजी से घटी,अब सिर्फ 24% की पसंद,योगी टॉप-5 में नहीं-सर्वे

Mood of the Nation survey : यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कोई बीजेपी सीएम टॉप 5 में नहीं नई दिल्ली। इंडिया टुडे के हालिया सर्वे देश का मूड (MOOD OF THE NATION) जारी किया गया है. सर्वे में कई सवालों के जवाब देशवासियों ने दिए हैं. इस सर्वे में मोदी की लोकप्रियता, एनडीए की विकफला, गांधी परिवार के बिना कांग्रेस, देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री समेत कई सवाल पूछे गए थे जिनके जवाब आ चुके हैं. आइए जानते हैं क्या कहता है सर्वे…. योगी टॉप-5 में नहीं-सर्वे देश के अगले प्रधानमंत्री के तौर पीएम मोदी की लोकप्रियता में गिरावट देखने को मिली है. पिछले साल 2020 में 66 फीसदी लोग नरेन्द्र मोदी को देश के अगले पीएम के तौर पर देख रहे थे. लेकिन इस बार 24 फीसदी लोगों ने ही मोदी के नाम पर मुहर लगाई है. वहीं योगी आदित्यनाथ पिछले साल 3 फीसदी से इस बार 11 फीसदी पर आ गए उन्हें जनता पीएम के दूसरे विकल्प के तौर पर देखती है. जबकि राहुल गांधी 10 फीसदी लोगों की पसंद के साथ तीसरे स्थान पर हैं. पिछले साल राहुल को 8 फीसदी लोगों ने पीएम के तौर पर पसंद किया था. इस लिस्ट में अरविंद केजरीवाल ,ममता बनर्जी, अमित शाह, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी का नाम भी है.

पीएम मोदी के टोक्यो यानी बनारस शहर की सड़कों पर चल रही हैं नावें

वाराणसी। “बनारस में बाढ़ नहीं आई, बल्कि ये उस कराहती गंगा के आंसू हैं, जिसके प्रवाह, गहराई और दिशा के साथ भाजपा सरकार लगातार मनमानी कर रही है। इसी सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी ने बनारसियों को भरमाने के लिए कहा था, ‘मैं आया नहीं, मां गंगा ने मुझे बुलाया है।’ सच यह है कि गंगा को लेकर पीएम मोदी के पास कोई नजरिया नहीं है। अगर कुछ है तो सिर्फ स्लोगन और जुमले। इनकी नीति और नीयत दोनों गलत है। बनारस की गंगा के साथ मनमाने ढंग से जो छेड़छाड़ किया जा रहा है, उसी का नतीजा है जलप्लावन।” यह बेबाक राय है चंचल की, जो बनारस के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे और जन-सरोकारों के प्रति स्पष्ट नजरिया रखने वाले मुखर समाजवादी चिंतक हैं। चंचल बेबाकी के साथ कहते हैं, ” नमामि गंगे” बेवकूफ बनाने वाली योजना है। हर नदी का अपना एक अलग स्वभाव होता है। सभी नदियों को बचाने का कोई एक तय तरीका नहीं होता। बारिश के दिनों में गंगा समेत दुनिया भर की नदियां बाढ़ लाकर खुद को साफ करती हैं। इनसे छेड़छाड़ करोगे तो डिजास्टर होगा ही। बनारस में इन दिनों बिना बारिश के बाढ़ इसलिए विकराल है कि सरकार ने गंगा का रुख बदलने और वाहवाही लूटने के लिए रेत पर “मोदी नहर” बनवा दी। विश्वनाथ कारिडोर का सारा मलबा गंगा में डालवा दिया। मणिकर्णिका घाट के सामने गंगा में प्लेटफार्म बनाकर उसके वेग को रोकने की गंदली कोशिश की गई। ऐसे में बनारस के लोगों को खतरनाक नतीजे तो भुगतने ही पड़ेंगे।” ‘स्मार्ट सिटी’ में चल रहीं नौकाएं बनारस में गंगा ने सचमुच खतरे का अलार्म बजा दिया है। नदी का जल लाल निशान पार कर चुका है। इसका असर वरुणा और गोमती पर भी है। ‘स्मार्ट सिटी’ की गलियों में नावें चलाई जा रही हैं। सामने घाट इलाके के लोग योगी सरकार का मुंह देख रहे हैं, लेकिन इनके पास जो कुछ पहुंच रहा है वह सरकार नहीं, सामाजिक संस्थाएं दे रही हैं। बनारस में गंगा के साथ वरुणा ने इस कदर तबाही मचाई है कि बनारसी साड़ियों का ताना-बाना डूब गया है। करघों की खटर-पटर बंद है। हजारों बुनकरों के सामने रोजी-रोटी की भीषण समस्या है। बाढ़ से घिरे लोगों की नजरें प्रशासन से मिलने वाली मदद की ओर गड़ी हुई हैं। ऐसे लोगों की संख्या हजारों में है जो अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं। गंगा में उफान के कारण इसके तटवर्ती इलाकों के साथ-साथ वरुणा के मुहाने पर बसे रिहायशी इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। शहर के दर्जनों इलाकों में जन-जीवन अस्त-व्यस्त है। वाराणसी शहर के दशाश्वमेध घाट पर स्थित जल पुलिस थाना भी बाढ़ के पानी से घिर गया है। मणिकर्णिका घाट पर शवदाह स्थल डूब गया है। हरिश्चंद्र घाट की सबसे ऊपरी सीढ़ी पर शवदाह किया जा रहा है। यही स्थिति सामने घाट, रमना, डोमरी, रामनगर आदि शवदाह स्थलों की है। बनारस का सीन यह है कि गंगा घाटों का आपसी संपर्क भी पूरी तरह टूट गया है। बलिया-गाजीपुर मार्ग पर आवागमन ठप है। चंदौली जिले में बलुआ घाट पार कर गंगा का पानी बाजार में पहुंच गया है। कोनिया, सामने घाट, सरैया, डोमरी, नगवा, रमना, बनपुरवा, शूलटंकेश्वर के कुछ गांव, फुलवरिया, सुअरबड़वा, नक्खीघाट, सरैया समेत कई इलाकों में बाढ़ ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। सभी इलाकों में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। आवागमन पूरी तरह से ठप है। बड़ी संख्या में लोग घर छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं। पिछले दो-तीन दिनों से पलायन का सिलसिला तेज हो गया है। कुछ लोग अपने घरों का सामान लेकर रिश्तेदारों और परिचितों के यहां जा रहे हैं। बुनकरों के हिस्से में आई बाढ़ की तबाही गंगा और वरुणा नदी में आई बाढ़ की वजह से शहर के दर्जन भर मोहल्लों में लूम और करघों की धड़कन बंद हो गई हैं। हालत यह है कि बुनकरों को अब दो वक्त की रोटी जुटा पाना मुहाल हो गया है। घरों में पानी घुसने से बिजली की सप्लाई के साथ-साथ करघे और लूम खामोश हो गए हैं। नक्खीघाट की शकीला के घर में करीब एक फीट तक पानी भर गया है। शकीला के घर में जाने के लिए कोई भी रास्ता नहीं बचा है। करीब पांच फीट पानी भर जाने की वजह से आसपास के कुछ लोग यहां से पलायन कर चुके हैं। शकीला बताती हैं, “घर में पानी भर जाने की वजह से रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं। पेट के लिए उधार लेकर काम चला रहे हैं।” वरुणा नदी के किनारे किराये के मकान में रहने वाली सबीना अपने चार बच्चों को लेकर खुले आसमान के नीचे रहने पर विवश है। सबीना का पति बुनकर है। आश्रय की तलाश में भटक रही इस महिला की मदद के लिए न प्रशासन आगे आ रहा है, न सियासी दल। दरअसल वह वोट बैंक नहीं है। वह कहती है, “हम बिहारी हैं। बनारस की वोटरलिस्ट में हमारा नाम नहीं है, इसलिए हमारी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। कोई मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है।” नक्खीघाट पुल पर कई दिनों से मेला लग रहा है। सैकड़ों लोगों का हुजूम बाढ़ से होने वाली तबाही का मंजर देखने के लिए जुट रहा है। एनडीआरएफ की टीम वरुणा नदी में लगातार गश्त कर लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दे रही है। हिदायतनगर के जावेद अख्तर बताते हैं, “हर तीन साल में ऐसी भीषण बाढ़ आती है। इससे पहले साल 2013, 2016 और 2019 में ऐसी ही भयानक बाढ़ आई थी। पिछली मर्तबा बाढ़ की वजह से करीब एक महीने तक कारख़ाना बंद रहा, जिसकी वजह से हमारी बरसों की बनाई गृहस्थी उजड़ गई थी।” सिधवा इलाके के नवाब अंसारी बताते हैं, “गंगा ने रौद्र रूप धारण किया तो अचानक वरुणा भी फुंफकार मारने लगी। कुछ ही घंटों में हमारे साथ-साथ पड़ोसियों की सारी गृहस्थी डूब गई। लूम और करघों पर चढ़ीं साड़ियां काली पड़ गई हैं। यह बात हमारी समझ में नहीं आ रही है कि नुकसान की भरपाई कैसे हो पाएगी?” नक्खीघाट पर प्रशासन ने तीन नावों की व्यवस्था की है। लोग इन्हीं नावों से अपने घर आ-जा रहे हैं, लेकिन … Read more

शिवराज सरकार का दावा- ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई एक भी मौत, HC हैरान

भोपाल. मध्य प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर (Second wave of Corona) में ऑक्सीजन (Oxygen) की कमी से एक भी मरीज की मौत ना होने के सरकारी दावे पर अब हाईकोर्ट ने भी हैरानी जताई है. जबलपुर हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि ये मानना आसान नहीं है कि प्रदेश में एक भी मरीज की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई. हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी उन याचिकाओं की सुनवाई करते हुए की जिनमें ऑक्सीजन की कमी से कोरोना मरीजों की मौत पर सरकार से मुआवजा मांगा गया है. जबलपुर हाईकोर्ट इसी साल अप्रैल महीने में अपने एक आदेश में प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से 77 मरीजों की जिले वार मौतें गिनवा चुका था. लेकिन बाद में राज्य सरकार ने कोर्ट में हलफनामा पेश करते हुए दावा किया था कि प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से कोरोना के किसी मरीज की मौत नहीं हुई. ऐसे में आज जब ऑक्सीजन की कमी से मौतों पर मुआवजा देने का मुद्दा कोर्ट में उठा तो हाईकोर्ट ने सरकारी दावे पर हैरानी जताई है. HC ने पूछा-सरकार अब क्या करेगी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार से मामले पर जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि जब वो ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत ना होने का दावा कर चुकी है तो ऐसी मौतों पर मुआवज़े के आवेदनों पर वो क्या कदम उठाएगी. सुनवाई के दौरान यचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गयी कि ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौतों की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी या कमेटी से करवाई जाए. हाईकोर्ट ने जवाब मांगा बहरहाल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मामले पर जवाब मांगा है. ताकि इन मांगों पर कोर्ट आगे कोई फैसला ले सके. जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 3 हफ्ते का समय दिया है. मामले पर अगली सुनवाई 6 सितंबर को की जाएगी.

BJP के 3 संगठन मंत्रियों को मिलेगी निगम-मंडलों की कमान

भोपाल। मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों में जल्द नियुक्तियों के संकेत मिले हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले भाजपा के 3 संभागीय संगठन मंत्रियों को निगम-मंडलों की कमान देने की तैयारी है। इसमें जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन संभाग), शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर व होशंगाबाद संभाग) और आशुतोष तिवारी (भोपाल व ग्वालियर संभाग) के नाम सामने आए हैं। इन नामों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के बीच सहमति बन गई है। बीजेपी सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से भाजपा में आए इन नेताओं को प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने के कयास कई दिनों से लगाए जा रहे थे, क्योंकि बीजेपी संभाग और जिलों में संगठन को नया स्वरूप देना चाहती है। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब बीजेपी के जिलों में तैनात संगठन मंत्रियों को भी हटाया जा रहा है। इन्हें प्रदेश कार्यकारिणी या अन्य पदों पर एडजस्ट करने की तैयारी है। नई व्यवस्था के तहत संभागीय मुख्यालयों में संगठन मंत्री रहेंगे। सरकार के सूत्रों ने बताया कि निगम-मंडलों के खाली राजनीतिक पदों को भरने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने 1 अगस्त को कोलार डैम रेस्ट हाउस में बैठक की थी। यह बैठक करीब 10 घंटे चली थी। इसमें संगठन मंत्रियों को नई जिम्मेदारी देने पर भी मंथन हुआ था। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष के अलावा प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत और सह संगठन मंत्री हितानंद के बीच प्रदेश के 6 संभागीय संगठन मंत्रियों में से 3 जितेंद्र लिटोरिया, शैलेंद्र बरुआ और आशुतोष तिवारी को निगम-मंडल में पद देने पर सहमति बन गई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मुख्य रूप से निगम-मंडलों, प्राधिकरणों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष व अन्य पदों के लिए नाम तय हो चुके हैं। अगले 5-7 दिनों में विभागवार आदेश जारी कर दिए जाएंगे। कमलनाथ सरकार में हुई थीं नियुक्तियां निगम-मंडलों में 2018 से नियुक्तियां नहीं हुई हैं। कमलनाथ ने अपनी सरकार जाते-जाते कुछ जगहों पर नियुक्तियां कर दी थीं। 23 मार्च 2020 में शिवराज सरकार आने के बाद बाकी की जगहों पर नियुक्तियां अटकी हैं। अब नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव से पहले इन पदों को भरना चाहती है। यह नियुक्तियां नहीं हो पाने के कारण पार्टी नेताओं में असंतोष बढ़ता रहा है। सिंधिया के 4 समर्थकों को जगह देने पक सहमति सूत्रों के मुताबिक ज्योतिरादित्य सिंधिया के 4 समर्थक नेताओं को निगम-मंडल में जगह दिए जाने पर मुख्यमंत्री ने सहमति दे दी है। माना जा रहा है कि इमरती देवी, ऐदल सिंह कंषाना, मुन्नालाल गोयल और गिर्राज दंडोतिया को इसमें शामिल किया जाएगा। इन्हें निगम-मंडल में अध्यक्ष बनाया जा सकता है। पिछले भोपाल प्रवास के दौरान सिंधिया की शिवराज और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ हुई बैठक में इन 4 नामों को लेकर चर्चा हुई थी।

क्रिमिनल केस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त :MP-MLA के क्रिमिनल केस वापस नहीं ले सकेंगी राज्य सरकारें

नई दिल्ली. अब राज्य सरकारें सांसदों और विधायकों पर चल रहे क्रिमिनल केस वापस नहीं ले सकेंगी। इसके लिए संबंधित राज्य के हाईकोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी। आपराधिक मामलों में सजा पाने वाले सांसदों और विधायकों को हमेशा के लिए चुनाव लड़ने से रोकने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही। कोर्ट ने सितंबर 2020 के बाद सांसदों-विधायकों के वापस लिए गए केस दोबारा खोलने को भी कहा है। सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने यह पिटीशन दाखिल की थी। इसमें सांसदों-विधायकों के केस के जल्दी निपटारे के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने की भी मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में 3 जजों की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की। इसमें चीफ जस्टिस एवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विनीत सरन शामिल थे। MP-MLA के बंद मामले फिर खोलने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने के अजीत बनाम केरल सरकार केस में आए फैसले का हवाला देते हुए सभी स्टेट हाईकोर्ट से अपील की है कि वे सितंबर 2020 और उसके बाद सांसदों-विधायकों के खिलाफ वापस लिए गए सभी मामलों की फिर से जांच करें। CJI ने सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पेंडिंग केस और निपटाए गए केस का चार्ट पेश करने का आदेश भी दिया। चीफ जस्टिस ने CBI को फटकार लगाई मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सहयोगी वकील विजय हंसरिया ने कोर्ट को बताया कि उन्हें इस तरह के केसों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से स्टेटस रिपोर्ट मिल चुकी है, लेकिन CBI ने अभी तक स्टेटस रिपोर्ट सब्मिट नहीं की है। इस पर चीफ जस्टिस ने CBI को फटकार लगाते हुए कहा, ‘हम आश्वस्त हैं कि सरकार इस मुद्दे पर बहुत गंभीर है और कुछ करना चाहती है, लेकिन अब तक कोई प्रोग्रेस नहीं हुई है। जब आप (CBI) स्टेटस रिपोर्ट भी फाइल नहीं करना चाहते, तो हमसे क्या उम्मीद कर सकते हैं?’ सरकार की तरफ से मौका देने की अपील इसके जवाब में CBI का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से स्टेटस रिपोर्ट सब्मिट करने के लिए और समय की मांग की। मेहता ने कहा, ‘हमने कल ED की ओर से एक रिपोर्ट दायर की थी। CBI के डायरेक्टर को भी जल्द से जल्द स्टेटस रिपोर्ट सब्मिट करने को कहा है।’ सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से इस केस में एक आखिरी मौका देने की अपील की। कर्नाटक ने 61 MP-MLA के केस वापस लिए इससे पहले, कोर्ट के सहयोगी वकील हंसरिया ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने 61 सांसदों-विधायकों के खिलाफ केस वापस ले लिए हैं। इस पर भी कोर्ट को विचार करना चाहिए। UP-उत्तराखंड में भी क्रिमिनल केस वापस हुए हंसरिया ने कहा कि यूपी और उत्तराखंड समेत कई राज्य सरकारों ने अपने आदेश के जरिए दोषी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ क्रिमिनल केस वापस ले लिए हैं। कोर्ट मित्र ने सुप्रीम कोर्ट से दखल की अपील की हंसरिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में ऑर्डर पास करना चाहिए कि संबंधित राज्य के हाईकोर्ट के आदेश के बिना राज्य सरकारें दोषी सांसदों-विधायकों के क्रिमिनल केस वापस नहीं ले सकें। CBI और स्पेशल कोर्ट सुनवाई जारी रखेंगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBI कोर्ट और स्पेशल कोर्ट में MP-MLA के खिलाफ ऐसे केस की सुनवाई करने वाले जज अगले आदेश तक सुनवाई जारी रखेंगे। केस की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी चीफ जस्टिस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के निवेदन पर मामले की सुनवाई 2 हफ्ते के लिए टाल दी। अब कोर्ट 25 अगस्त को इस मामले में सुनवाई करेगा।

नवजोत सिद्धू का AAP में जाने के संकेत

जालंधर। पंजाब के सीएम पर हमलावर कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ( Navjyot sidhu) ने आम आदमी पार्टी (AAP) की तारीफ करके नए सियासी समीकरणों की ओर इशारा किया है। तीन दिन पहले AAP पर हमलावर सिद्धू ने अब उसकी तारीफ की सियासी गुगली फेंककर सबको चौंका दिया है। सिद्धू ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा कि पंजाब में विपक्षी पार्टी AAP ने हमेशा उनके विजन और काम को पहचाना है। 2017 में बेअदबी, ड्रग्स, किसान और करप्शन के मुद्दे हों या अब राज्य का मौजूदा बिजली संकट हो या फिर अब मैं पंजाब मॉडल पेश कर रहा हूं। वो जानते हैं कि वास्तव में पंजाब के लिए कौन लड़ रहा है। बता दें कि तीन दिन पहले दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के पंजाब में थर्मल प्लांट बंद करने की याचिका को लेकर सिद्धू ने हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि AAP चाहती है कि पंजाब में थर्मल प्लांट बंद हो जाएं। पंजाब में बिजली संकट से पंजाबियों को परेशानी हो और किसानों की फसल बर्बाद हो जाए। ट्वीट किए वीडियो में संजय सिंह व भगवंत मान कर रहे सिद्धू की तारीफ सिद्धू ने ट्वीट के साथ एक पुराना न्यूज वीडियो भी लगाया है। जिसमें उनके राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद पंजाब में AAP की ओर से उनके लिए माहौल बनाने की बात कही गई है। वीडियो में AAP नेता संजय सिंह उनकी तारीफ कर रहे हैं। संजय सिंह कहते हैं कि वो सिद्धू के इस साहसिक कदम और बहादुरी भरे फैसले का स्वागत करते हैं। सिद्धू और उनकी पत्नी अकाली दल के भ्रष्टाचार, ड्रग माफिया, किसानों की बदहाली के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। इसी वीडियो में AAP के पंजाब अध्यक्ष भगवंत मान सिद्धू की तारीफ करते दिखाई दे रहे हैं। वे कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति अपने रोल मॉडल से बड़ा नहीं हो सकता। अगर सिद्धू पार्टी में आते हैं तो मैं सबसे पहला व्यक्ति होऊंगा, जो उनका स्वागत करूंगा। पंजाब कांग्रेस में अभी भी अंदरूनी कलह चल रही है। हाईकमान की कमेटी के बाद CM कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर आए। इसके बाद भी कोई समाधान नहीं निकला। सिद्धू के बारे में लगातार यह बात कही जा रही है कि वे मौजूदा कैप्टन सरकार में कोई भी पद लेने को तैयार नहीं हैं। पंजाब में राजनीतिक गणित को देखते हुए कांग्रेस किसी सिख चेहरे को पंजाब प्रधान का पद नहीं देना चाहती। ऐसे में सिद्धू को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाने की चर्चा चल रही थी। इसके बावजूद पूरे संकट का अभी तक कोई समाधान होता नजर नहीं आ रहा। इस वजह से यह माना जा रहा है कि कहीं सिद्धू इसके जरिए कोई सियासी संकेत तो नहीं दे रहे। पिछले महीने दिल्ली के CM और AAP के मुखिया अरविंद केजरीवाल पंजाब के दौरे पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने ऐलान किया था कि पंजाब में अगर AAP जीती तो सिख ही मुख्यमंत्री होगा। इस दौरान उन्होंने सिद्धू की तारीफ भी की थी। उन्होंने कहा- वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, हम उनका सम्मान करते हैं।

वाजपेयी जिंदा थे तब तक भाजपा थी, अब तो गुजरातियों का कब्जा : राजभर

मुरादाबाद। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने मुरादाबाद में BJP पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने कहा कि भाजपा तब तक थी, जब तक अटल बिहारी वाजपेयी जिंदा थे। अब तो भाजपा पर गुजरातियों का कब्जा है। उन्होंने कहा कि यूपी के गर्वनर से लेकर गृह मंत्री, प्रधानमंत्री, CBI चीफ, ED चीफ, वित्त मंत्री, RBI गर्वनर तक गुजराती हैं। तंज कसा कि देश का पैसा लेकर भागने वाले और देश बेचने वाले गुजराती ही हैं। देश को खरीदने वाले भी गुजराती हैं। राजभर ने कहा, पीएम मोदी और भाजपा कहते थे कि काला धन वापस लाएंगे। लेकिन इनके समय में स्विस बैंक में काला धन और भी बढ़ गया है। भाजपा के शासनकाल में महज पिछले 3 साल में स्विस बैंक में 20,000 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। भाजपा बताए कि यह धन किसका है। देश को लूटकर किसने स्विस बैंकों में रकम भरी है। राजभर ने कहा कि पीएम मोदी कहते थे कि देश नहीं बिकने दूंगा। लेकिन उन्होंने रेलवे, बैंक, LIC, एयरपोर्ट सब कुछ बेच डाला। बड़े कमाल की बात है कि देश बेचने वाला भी गुजराती है और उसे खरीदने वाला भी गुजराती है। बड़े-बड़े कार्पोरेट घराने गुजरात के हैं। देश की रकम लेकर विदेशों में भागने वाले भी गुजरात के ही हैं। जनता दवा को छटपटा रही थी, मोदी-योगी वोट को छटपटा रहे थे राजभर ने कहा कि जब कोरोना चरम पर था। तब जनता दवा, ऑक्सीजन और अस्पताल में बेड के लिए छटपटा रही थी। लेकिन जनता को ये सब मुहैया कराने के बजाए मोदी और योगी उस समय बंगाल में वोट के लिए छटपटा रहे थे। जनता इसे भूलेगी नहीं, हिसाब पूरा करेगी। गुंडे छोड़कर चले गए थे तो ये कहां से आए यूपी में पंचायत चुनाव में हुई हिंसा पर राजभर ने कहा, योगी कहते थे गुंडे प्रदेश छोड़कर चले गए हैं। अब गोली-बम चलाने वाले ये गुंडे फिर कहां से उतर आए। उन्होंने कहा कि वाजपेयी के जाने के साथ ही भाजपा में गुंडे, माफिया, भ्रष्टाचारियों का कब्जा हो गया है। भाजपा लोकतंत्र की हत्या कर रही है।–

पीएम मोदी पर बोले कमलनाथ- दाढ़ी बढ़ा ली तो अच्छे लगते हैं

भोपाल। कैबिनेट मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को सिविल एविएशन मिनिस्ट्री (नागर विमानन मंत्रालय) का पदभार संभाल लिया है। इस पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उन्हें बधाई दी। साथ में तंज भी कसा। कमलनाथ ने मोदी कैबिनेट में जगह मिलने पर कहा- यह बीजेपी और सिंधिया के बीच का मामला है। देखते हैं, अब ये गाड़ी आगे कैसे चलती है? कमलनाथ ने देश में महंगाई और पेट्रोलियम पदार्थों में वृद्धि के सवाल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा- महंगाई की कोई सीमा नहीं है। मोदीजी लंबे-लंबे भाषण देते थे। 2013-2014 के भाषण घोषणाएं, स्लोगन दिए थे स्टैंडअप इंडिया, डिजिटल इंडिया यह कहां है? उन्होंने दाढ़ी बढ़ा ली है, तो अच्छे लग रहे हैं। कमलनाथ ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के नए राज्यपाल मंगू भाई पटेल से मुलाकात कर सरकार की शिकायत की। राजभवन से बाहर आने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा, राज्यपाल से मुलाकात के दौरान SC-ST वर्ग के साथ हो रही घटनाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, SC-ST वर्ग के लोग मध्य प्रदेश में सुरक्षित नहीं हैं। इतनी घटनाएं हुई हैं, जितनी देश के इतिहास में नहीं हुईं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे आदिवासी इलाकों में काम करने का अनुभव है। मैंने राज्यपाल को अवगत कराया है कि प्रदेश में इतनी बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के लोग हैं, जितने देश में कहीं नहीं हैं। यहां वे सुरक्षित नहीं हैं। मैंने राज्यपाल को अवगत कराया कि प्रदेश का हर वर्ग परेशान है। किसान, छोटा व्यापारी परेशान है, नौजवान बेरोजगार है, बेरोजगारी घट नहीं बल्कि बढ़ रही है, हमारी अर्थव्यवस्था चौपट है। कमलनाथ ने कहा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर कांग्रेस सरकार ने नीति बनाई थी, उसे सरकार लागू करे। नेमवार सहित अन्य बड़ी घटनाओं से राज्यपाल को अवगत कराया है। उप चुनाव की तैयारी को लेकर उन्होंने कहा कि मैं 11 दिन अस्पताल में था। मुझे निमोनिया हो गया था। अब पूरी तरह से स्वस्थ हूं। अब मैं पूरे स्टेट का दौरा करूंगा। उप चुनाव में उम्मीदवारों का चयन करने के लिए कार्यकर्ताओं से बात की जा रही है।

जमीन घोटाले को लेकर चंपत राय और अनिल मिश्रा तलब

लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर के लिए कथित जमीन घोटाले को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) एक्शन के मूड में नजर आ रहा है। RSS के सर कार्यवाह भैयाजी जोशी ट्रस्ट को लेकर रणनीति बनाने में जुटे हैं। वे जल्द अयोध्या भी पहुंच सकते हैं। बताया जा रहा है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को चित्रकूट में चल रही संघ की बैठक में भी तलब किया गया है। उन्हें ट्रस्ट के काम से दूर भी किया जा सकता है। चंपत राय के पास विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष का भी दायित्व है। इसलिए वे ट्रस्ट को सहयोग देते रहेंगे। वहीं, ट्रस्ट के सदस्य डॉक्टर अनिल मिश्रा को संघ विचार प्रवाह के किसी संगठन में जिम्मेदारी देकर उनको भी ट्रस्ट के काम से दूर किया जा सकता है। फिलहाल ट्रस्ट ने नई जमीन की खरीद पर रोक लगा दी है। बिजैसी क्षेत्र में जमीन खरीद के दौरान दो करोड़ की जिस भूमि का 18 करोड़ में हुए सौदे को लेकर घोटाले के आरोप लगे थे, उसी के पास कोल डिपो क्षेत्र में कई हेक्टेयर जमीन का सौदा तय था, उसकी रजिस्ट्री होनी थी, उसे रोक दिया गया है। जमीन घोटाले के आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच भले ही संघ ट्रस्ट के पदाधिकारियों का बचाव करता दिखाई दे रहा हो, लेकिन अंदर ही अंदर छटपटाहट साफ नजर आने लगी है। यह मामला सामने आने के साथ ही RSS के वरिष्ठ पदाधिकारी सरकार्यवाह भैयाजी जोशी मामले पर निगाह बनाए हुए हैं। वे जल्द अयोध्या भी आ सकते हैं। ट्रस्ट के जिन पदाधिकारियों का नाम इस प्रकरण में सामने आया है, वे कानूनी तौर पर ट्रस्ट में बने रहेंगे, लेकिन ट्रस्ट में उनका प्रभाव खत्म कर डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया जाना तय है। सूत्र बताते हैं कि भैयाजी जोशी की एंट्री यह बता रही है कि विपक्ष को कुछ कहने-सुनने का मौका न देते हुए ट्रस्ट के कई लोगों को उनके पद पर बनाए रखना है, लेकिन अब वे स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाएंगे। ट्रस्ट पर RSS सीधे निगाह रखेगा।

काशी में मोदी-योगी के खिलाफ लगे पोस्टर, हिंदू सेना अध्यक्ष बोले- देखते हैं कितने FIR होती हैं

वाराणसी। वाराणसी में विश्व हिंदू सेना के अध्यक्ष अरुण पाठक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ फिर कई जगह पोस्टर लगाए हैं। अरुण ने पीएम-सीएम को हिंदू विरोधी और ढोंगी करार दिया है। साथ ही उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी पोस्टर को पोस्ट किया है। पोस्टर खुद लगाने का दावा करने वाले अरुण ने चैलेंज किया है कि अब देखना है कि योगी सरकार कहां-कहां FIR करवाती है। अरुण पाठक ने इससे पहले 1 और 2 जुलाई को गाजीपुर और बलिया जिले के अलावा वाराणसी में कैंट रेलवे स्टेशन के समीप विवादित पोस्टर लगवाए थे। उनके खिलाफ सिगरा थाने में पुलिस की ओर से केस दर्ज किया किया गया था। पुलिस अब एक बार फिर अरुण की तलाश शुरू कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज की तैयारी में है। अरुण पाठक ने इस बार लंका और भेलूपुर थाना क्षेत्र में अलग-अलग जगह सोमवार की देर रात विवादित पोस्टर लगवाए हैं। इसके साथ ही अपनी फेसबुक वॉल पर पोस्टरों के वीडियो के साथ लिखा है कि मेरे लोगों ने कैंट स्टेशन के समीप पोस्टर लगाया तो सिगरा थाने में एफआईआर दर्ज किया गया। अब लोकतंत्र में अपनी बात रखने पर एफआईआर होगा तो लीजिए लंका, बीएचयू गेट, रथयात्रा और अस्सी घाट सहित कई अन्य जगह पर पोस्टर लगवा दिया हूं। अब देखना है कि लोकतंत्र की हत्यारी योगी सरकार कहां-कहां एफआईआर दर्ज कराती है। उधर, लंका और भेलूपुर थाना क्षेत्र में चिपकाए गए विवादित पोस्टर को लेकर डीसीपी काशी जोन अमित कुमार ने बताया कि दोनों थाने के प्रभारियों को जांच करा कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस की एक टीम अरुण पाठक की तलाश करने के लिए लगाई गई है। कभी शिव सेना के कट्‌टर समर्थकों में शुमार रहे अरुण पाठक को बीते एक साल से वाराणसी में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं देखा गया है। दरअसल, जुलाई 2020 में नेपाल के प्रधानमंत्री द्वारा भगवान राम को नेपाली बताया गया था। इससे नाराज होकर अरुण पाठक ने एक नेपाली युवक का सिर मुड़वा कर जय श्रीराम लिखा। इसके बाद नेपाल और चीन विरोधी नारेबाजी करा कर वीडियो सोशल मीडिया में वायरल कर दिया। प्रकरण को लेकर अरुण पाठक के खिलाफ भेलूपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था और 4 लोग जेल भेजे गए थे। हालांकि अरुण पाठक ने हाईकोर्ट से अरेस्ट स्टे ले लिया था। इसके बाद से अरुण पाठक वाराणसी में कहीं नजर नहीं आए।

रो पड़े लालू यादव, बोले – तेजस्वी, राबड़ी नहीं होते तो रांची में ही मर जाता

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सोमवार को अपना 25 वां स्थापना दिवस मना रहा है। पार्टी के सिल्वर जुबली समारोह में पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने 30 मिनट तक राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी और राबड़ी नहीं होते, तो मैं रांची में ही खत्म हो जाता। वहीं, जनता से वादा करते हुए कहा कि जल्द पटना आएंगे और सभी से मुलाकात करेंगे। लालू के भाषण में चुनाव के दौरान जेल में रहने का मलाल भी नजर आया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान वह जेल में तड़पते रहे गए, बाहर नहीं आ सके। हालांकि, तेजस्वी से उनकी बात होती रहती थी। उन्होंने कहा, ‘तेजस्वी को चिंता नहीं करनी चाहिए। राजद का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। भविष्य में हम देश को आगे बढ़ाएंगे।’ RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद ने केंद्र और नीतीश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मेरा राज जंगलराज नहीं, गरीबों का राज था। भाषण में लालू ने दोनों बेटों की तारीफ की तेज प्रताप यादव और तेजस्वी की तारीफ करते हुए कहा कि तेज प्रताप ने बहुत अच्छा भाषण दिया। उसकी बातों में दम है। तेजस्वी को बहुत कम उम्र में बिहार ने अपना नेता मान लिया है। वे बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं। सरकार पर हमला बोलते हुए लालू ने कहा- ‘देश में आर्थिक संकट है। सामाजिक ताने-बाने को खत्म किया जा रहा है। अयोध्या के बाद मथुरा… ये क्या नारा है। देश में क्या चाहते हैं? सत्ता के लिए लोगों को देश में तबाह करना चाहते हैं। संसद भी नहीं चल पाती है। इनको देखना चाहिए। लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि हम मिट जाएंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे।’ बेरोजगारी को लेकर आंदोलन करेंगे तेजस्वी पार्टी के कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि लालू प्रसाद न कभी झुके थे, ना झुकेंगे। उसी तरह तेजस्वी यादव भी कभी नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बेरोजगारी के मुद्दे पर बहुत बड़ा आंदोलन करेंगे। लालू प्रसाद ने सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी, वह आर्थिक न्याय के सवाल पर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के मंत्री और विधायक ही सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने कहा, ‘जिस समय पार्टी की स्थापना हुई थी, हम सभी बच्चे थे। जिस BN कॉलेज में मेरे पिताजी पढ़ते थे, उसी BN कॉलेज में मैंने एडमिशन लिया और उसी बेंच पर बैठना शुरू किया। हम जब बोलते हैं तो बहुत सारे लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं। हमारे पिताजी के भाषण का भी लोग मजाक उड़ाते थे।’ नीतीश की तुलना बहादुर शाह जफर से राज्यसभा सांसद और राजद के प्रवक्ता मनोझ झा ने स्थापना दिवस पर संकल्प पत्र पढ़ा। कहा, ‘हम गैर लोकतांत्रिक शक्तियों को खत्म करने का संकल्प लेते हैं।’ वहीं, ​​​​​​राजद नेता शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार की तुलना बहादुर शाह जफर से की। उन्होंने कहा कि जफर की पूरी मिल्कियत लाल किले के अंदर तक थी। नीतीश कुमार एक अणे मार्ग तक सीमित हो गए हैं। राजद के वरिष्ठ नेता आलोक मेहता ने कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों का जवाब सोशल मीडिया से दिया जाएगा। इसलिए हर कार्यकर्ता सोशल मीडिया के मामले में पूरी जानकारी रखें। पटना में पार्टी कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने रामविलास पासवान की तस्वीर पर माल्यार्पण किया। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी रामविलास को श्रद्धांजलि दी। लालू प्रसाद साल 1997 में जनता दल से अलग हुए थे और अपनी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल बनाई थी। यह पार्टी बिहार की सबसे बड़ी पार्टी है और बड़ा जनाधार भी रखती है, जिसकी वजह इसका ‘MY’ समीकरण है। इसमें 16 फीसदी यादव और 16 फीसदी मुसलमानों का तगड़ा वोट बैंक है। चिराग पर भी दिखेगा राजद का रुख लोजपा में इन दिनों दो गुट हो गए हैं। एक गुट के नेता स्व. रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान हैं और दूसरे गुट के पशुपति कुमार पारस। चिराग पासवान खुद को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हनुमान बताते हैं और दूसरी तरफ लालू प्रसाद सांप्रदायिकता के सवाल पर नरेन्द्र मोदी का विरोध करते रहे हैं। रामविलास पासवान की जयंती मनाने के बड़े राजनीतिक मतलब निकाले जा रहे हैं। चिराग और तेजस्वी दोनों एक दूसरे को भाई भी कहते रहे हैं। सबसे खास बात यह कि चिराग और तेजस्वी के साझा राजनीतिक दुश्मन नीतीश कुमार हैं।

क्या भ्रष्टाचार का विरोध और जी-हुजूरी नहीं करना बगावत है?

— विशेष टिपण्णी : गोपाल स्वरूप वाजपेयी, पत्रकार व लेखक ईमानदारी तेरा किरदार है तो खुदकुशी कर ले, सियासी दौर को तो जी हुजूरी की जरूरत है। भ्रष्टाचार का विरोध करने पर एडीएम पद से हटाए गए मध्यप्रदेश के युवा आईएएस लोकेश कुमार जांगिड़ ने इस शायरी से अपना दर्द बयां किया। 2014 बैच का ये आईएएस अफसर एक सप्ताह तक देशभर में सुर्खियों में रहा और अब यह मुद्दा शांत हो गया है। बिना हल निकले इतने गंभीर मामले की इतनी जल्दी हवा निकलना वर्तमान माहौल में कोई आश्चर्य पैदा नहीं करता। ये मामला इसलिए और गंभीर और संवेदनशील है, क्योंकि मख्यमंत्री शिवराज सिंह के करीब 15 साल के कार्यकाल में पहली बार किसी आईएएस अफसर ने निशाने पर लिया और वह भी भ्रष्टाचार के मामले में। गजब यह है कि भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले अपर कलेक्टर को 24 घंटे के अंदर पद से हटा दिया गया लेकिन जिस पर आरोप लगे, यानी जिले के कलेक्टर का बाल बांका नहीं हुआ। ये मुद्दा भले ही शांत हो गया हो, लेकिन कई सवाल भी खड़े कर गया। क्या भ्रष्टाचार का विरोध करना बगावत है? क्या भ्रष्टाचार का विरोध कर आईएएस लोकेश जांगिड़ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की आचार संहिता का उल्लंघन किया? क्या जिले में तैनात कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक सूबे के मुख्यमंत्री के वसूली एजेंट होते हैं? आईएएस और आईपीएस को जिले में कलेक्टर व एसपी के रूप में तैनात करने के क्या मानक हैं? क्या इन दोनों अफसरों की तैनाती सियासी रसूख के दम पर होती है? क्या कलेक्टर व एसपी बनने के लिए सियासी गलियों में बोली लगती है? क्या कलेक्टर व एसपी का भ्रष्टाचार के नाले में डुबकी लगाना मजबूरी है? कलेक्टर व एसपी को जिले से हटाने का क्या पैमाना है? सरकार को डायरेक्ट आईएएस की तुलना में प्रमोटी आईएएस क्यों प्रिय हैं? और सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या भ्रष्टाचार को लोगों ने रीति-नीति में गुप्त रूप से शिष्टाचार का दर्जा दे दिया है? क्या भ्रष्टाचार व अनैतिकता का विरोध करने वाले का बहिष्कार नहीं किया जा रहा? दरअसल, आईएएस अफसर लोकेश कुमार जांगिड़ को शिवराज सरकार हरियाणा के आईएएस अफसर खेमका की तर्ज पर फुटबाल बना रही है। 2014 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अफसर लोकेश जांगिड़ की फील्ड पोस्टिंग के अभी साढ़े 4 साल हुए हैं, लेकिन उनके 8 बार ट्रांसफर हो चुके हैं। यानी औसतन हर 6 माह में उन्हें हटाया गया। 42 दिन पहले राज्य शिक्षा केंद्र के अपर संचालक से बड़वानी अपर कलेक्टर बनाया गया था, लेकिन अब उन्हें वापस राज्य शिक्षा केंद्र भेज दिया गया है। बड़वानी में पदस्थ होने के बाद उन्हें जिले का कोविड प्रभारी बनाया गया था। इस दौरान जांगिड़ ने पूरे जिले का तूफानी दौरा किया और कोरोना की रफ्तार को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई। बड़वानी कलेक्टोरेट के अधिकारी बताते हैं कि अप्रैल और मई में वह शायद ही अपने दफ्तर में बैठे। वे हमेशा फील्ड में रहते थे। इसी दौरान जांगिड़ ने आॅक्सीजन कंसट्रेटर की खरीदी में हुए भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया। बड़वानी में कोरोना महामारी में उपकरणों की खरीदी में भारी हेरफेर हुआ था। 39 हजार के आॅक्सीजन कंसंट्रेटर 60 हजार रुपए में खरीदे गए। भ्रष्टाचार के इस खेल में जांगिड़ शामिल नहीं हुए और उन्होंने इसका विरोध किया। यह खरीदी कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा के माध्यम से हुई। इसके साथ ही अन्य उपकरणों की खरीदी में करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ था। जांगिड़ ने चार्ज लेते ही भ्रष्टाचारियों पर लगाम लगा दी थी। इसकी कीमत जांगिड़ को देनी पड़ी। जांगिड़ को अपर कलेक्टर के पद से हटा दिया गया। बड़वानी से तबादले के बाद लोकेश जांगिड़ ने बड़वानी कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए आईएएस एसोसिएशन के सोशल मीडिया ग्रुप में लिखा कि कलेक्टर पैसा नहीं खा पा रहे हैं। इसलिए वर्मा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कान भर दिए। वे एक ही किरार समुदाय से हैं और कलेक्टर की पत्नी किरार महासभा की सचिव हैं, मुख्यमंत्री की पत्नी अध्यक्ष हैं। नैतिकता का तकाजा कहता है कि इतना गंभीर आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से इस बारे में स्पष्टीकरण जारी होना चाहिए था। लेकिन एक शब्द नहीं कहा गया। चूंकि, बड़वानी कलेक्टर पर सीधेतौर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे तो उन्हें भी पद से हटाया जाना चाहिए था और जांच होनी चाहिए थी। लेकिन ये सब तो बहुत दूर, कलेक्टर को एक नोटिस तक जारी नहीं किया गया। भ्रष्टाचार का विरोध करने वालों के लिए यह हतप्रभ व हताश करने वाली घटना है। दरअसल, ऐसा माहौल बनता जा रहा है कि भ्रष्टाचार व अनैतिकता पर बहस करना अब समय की बर्बादी है। घोटालों व भ्रष्टाचार के आरोपों को शिवराज सरकार गंभीरता से नहीं लेती। कुछ माह पहले प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि शिवराज सरकार ने सात माह में 17 घोटाले किए। ग्वालियर में आटा घोटाले में गरीब-मजदूरों को 10 किलो आटे के पैकेट में महज छह किलो से लेकर आठ किलो आटा दिया गया। कोरोना काल में बांटे गए त्रिकूट चूर्ण में भी घोटाले का आरोप लगा। शिवराज सरकार ने इन आरोपों पर ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस विपक्षी दल है। इसलिए मान लेते हैं उनका काम ही आरोप लगाना है। लेकिन जब केंद्र की मोदी सरकार की एजेंसियां ही शिवराज सरकार को घोटाले को लेकर एलर्ट करें तो मामला बेहद संगीन हो जाता है। प्रदेश में उपचुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार ने बालाघाट व मंडला में हुए चावल घोटाले पर शिवराज सरकार को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए थे। केंद्रीय एजेंसी ने माना था कि प्रदेश में बालाघाट और मंडला में पोल्ट्री ग्रेड का चावल गरीबों को बांटा गया है। केंद्र सरकार ने यूरिया घोटाले को लेकर भी शिवराज सरकार को पत्र लिखकर आगाह किया था। केंद्र सरकार ने यूरिया घोटाले में बड़े पैमाने पर कालाबाजारी की जानकारी भी शिवराज सरकार को दी। मध्यप्रदेश में सहकारी समितियों ने किसानों को यूरिया देने के नाम पर बड़ा फजीर्वाड़ा किया। इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार ने शिवराज सरकार को दी थी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत शिवपुरी जिले में कटनी और रीवा से दो रैक में 51 हजार क्विंटल चावल पिछले साल जुलाई में आया था। घटिया चावल … Read more

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet