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अमेरिका अब इस प्रक्रिया में हफ्तों और महीनों तक उलझा नहीं रह सकता, रूस-यूक्रेन शांति के बीच अमेरिका का अल्टीमेटम

रूस रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अगर रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते को लेकर जल्द कोई ठोस प्रगति नहीं होती, तो वह इस प्रयास से हाथ खींच लेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शुक्रवार को पेरिस में यूरोपीय और यूक्रेनी नेताओं से मुलाकात के बाद कहा कि अमेरिका अब इस प्रक्रिया में हफ्तों और महीनों तक उलझा नहीं रह सकता। रूबियो ने कहा, “अब यह तय करना जरूरी है कि क्या यह समझौता अगले कुछ हफ्तों में मुमकिन है या नहीं। हम अब कुछ ही दिनों में यह निर्णय करेंगे। अगर आगे बढ़ने की गुंजाइश दिखती है, तो हम साथ हैं। नहीं तो हमारे पास और भी जरूरी प्राथमिकताएं हैं जिन पर ध्यान देना होगा।” नतीजा नहीं आया तो पीछे हटने को तैयार अमेरिका उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी भी इस शांति प्रक्रिया में दिलचस्पी रखते हैं, लेकिन अगर कोई नतीजा नजर नहीं आता तो वह पीछे हटने को तैयार हैं। गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने चुनावी वादों में दावा किया था कि वो राष्ट्रपति पद संभालते ही 24 घंटे के भीतर युद्ध खत्म करवा देंगे। हालांकि, पद ग्रहण करने के बाद उन्होंने इस बात में थोड़ी नरमी दिखाई और संकेत दिया कि अप्रैल या मई तक कोई समझौता हो सकता है। तीसरे साल में रूस-युक्रेन युद्ध लेकिन अब जब कोई हल निकलता नहीं दिख रहा, तो अमेरिका ने यह सख्त रुख अपनाया है। रूबियो की यह टिप्पणी बताती है कि अमेरिका में रूसी आक्रमण और वैश्विक कूटनीतिक संकटों को लेकर निराशा बढ़ती जा रही है। अमेरिका के इस रुख से ये भी साफ हो रहा है कि अगर बात नहीं बनी, तो अब अपना-अपना देखना की नौबत आ सकती है। ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब युद्ध अपने तीसरे साल में पहुंच चुका है और न तो कूटनीतिक पहलें असर दिखा रही हैं, न ही जमीनी हालात सुधर रहे हैं।

मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा में उपद्रवियों ने जानबूझकर हिंदुओं को टारगेट किया था, पश्चिम बंगाल सरकार की रिपोर्ट

कोलकाता देश में इस वक्त दो ही बड़े मुद्दे हैं, पहला है वक्फ कानून के नाम पर पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा और दूसरा है वक्फ पर सुप्रीम कोर्ट में छिड़ी कानूनी लड़ाई. हम सबसे पहले बात करेंगे मुर्शिदाबाद में हुई हिंदू विरोधी हिंसा की. उपद्रवियों ने जानबूझकर हिंदुओं को टारगेट किया था, और ये बात हम नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल सरकार की रिपोर्ट कह रही है. पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता हाईकोर्ट में बताया है कि मुर्शिदाबाद में उन्मादी भीड़ ने हिंदुओं को टारगेट किया था. मुर्शिदाबाद में 8, 11 और 12 अप्रैल को वक्फ कानून के विरोध में जबरदस्त हिंसा हुई थी, और इन तीन दिनों में क्या-क्या हुआ था – रिपोर्ट में बताया गया है. पश्चिम बंगाल सरकार की रिपोर्ट में क्या है? 1. 8 अप्रैल का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि, इस दिन जंगीपुरा में 8 से 10 हजार लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई थी. यहां पर कुछ संगठन वक्फ कानून के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले थे, लेकिन बाद में इन लोगों ने वहां का हाईवे जाम कर दिया. जब पुलिस ने उनसे हटने के लिए कहा तो भीड़ उग्र हो गई और उन्होंने हमला शुरू कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावर भीड़ के हाथों में घातक हथियार थे और ये लोग पुलिसकर्मियों को जान से मारना चाहते थे. 2. 11 अप्रैल को हुई हिंसा को लेकर बताया गया है कि इस दिन जुमे की नमाज के बाद हाईवे जाम करने की कोशिश की गई थी. करीब 2000 की संख्या में मुस्लिम भीड़ ने रोड को जाम कर दिया था और ये लोग भड़काऊ नारेबाजी कर रहे थे. जब पुलिस ने उनको रोकने की कोशिश की, तो भीड़ ने उनपर पथराव शुरू कर दिया. बाद में भीड़ ने आसपास की दुकानों और मकानों में तोड़फोड़ शुरू कर दी. उपद्रवियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए थे. 3. 12 अप्रैल को हुई हिंसा का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि शमशेर गंज में एक मस्जिद के पास भीड़ इकट्ठा हुई. इसके बाद इस भीड़ ने वहां के हिंदू परिवारों के घरों में तोड़फोड़ शुरू कर दी और पुलिस के रोकने पर उनपर भी पथराव किया गया. 4. रिपोर्ट में इस बात पर भी मुहर लगाई गई है कि सोशल मीडिया के जरिए लोगों को इकट्ठा करने और भड़काने की कोशिश की गई थी. बंगाल पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने 1500 से ज्यादा सोशल मीडिया यूजर्स की लिस्ट तैयार की है, जिनपर भीड़ को भड़काने का शक है, और इसमें फेसबुक, एक्स, यूट्यूब, और इंस्टाग्राम यूजर्स शामिल हैं. मुर्शिदाबाद हिंसा अब एक ऐसा मुद्दा बन गया है, जिसके पीड़ित राज्य सरकार को नजर नहीं आ रहे हैं लेकिन विपक्ष के लिए वो घातक हथियार बन गए हैं. ममता सरकार हिंसा पीड़ित हिंदू परिवारों की सुध नहीं ले रही है, और इसी का फायदा बंगाल बीजेपी ने उठाया है. पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष सुकांता मजूमदार कुछ पीड़ितों को लेकर राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मिलने पहुंच गए. इन हिंदू परिवारों ने उपद्रव के दौरान उनके साथ हुए अत्याचार की कहानियां बताईं और उन्होंने मांग की है कि उनके इलाके में बीएसएफ का कैंप लगाया जाना चाहिए, ताकि वो सुरक्षित महसूस कर सकें. बंगाल के राज्यपाल ने भी हिंसा के बाद अब हालात का जायजा लेने के लिए मुर्शिदाबाद जाने की बात कही है. उन्होंने कहा है कि वो खुद देखना चाहते हैं कि उपद्रवियों ने कितने बड़े पैमाने पर हिंसा की है और वहां के पीड़ितों का हाल क्या है. मुर्शिदाबाद में PFI के एक्टिव होने का दावा मुर्शिदाबाद हिंसा पर बीजेपी नेता सुकांता मजूमदार ने एक बड़ा दावा किया है. उनका आरोप है मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा एक सुनियोजित हिंसा थी, जिसमें धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकर से उन्मादी भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया गया था. उन्होने इस हिंसा के लिए प्रतिबंधित संगठन PFI पर भी आरोप लगाया है और उनका कहना है कि पिछले काफी समय से मुर्शिदाबाद में PFI एक्टिव है और उनके ही इशारे पर हिंसा की योजना बनाई गई थी. इस हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल पुलिस ने अभी तक 60 FIR दर्ज की हैं, और करीब 315 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने 11 सदस्यों की एसआईटी का गठन भी कर दिया है, और पुलिस ने अभी तक जो कार्रवाई की है, उसमें उनकी बड़ी उपलब्धि यही है कि, पुलिस ने जाफराबाद में मारे गए गोविंद और चंदन दास के हत्यारों को भी गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के मुताबिक, फिलहाल मुर्शिदाबाद में हालात सामान्य हैं और पलायन करके गए परिवार धीरे-धीरे अपने घर लौट रहे हैं, लेकिन क्या सच में हालात वही हैं जो पुलिस कह रही है? सच ये है कि, उपद्रव के 6 दिन भी हिंदुओं की घर वापसी नहीं हुई है. जिन हिंदू परिवारों ने उपद्रवियों से डर से अपना घर छोड़ दिया था, वो अलग-अलग जगहों पर शरणार्थी की तरह रह रहे हैं.  टीम भी पहुंची जाफराबाद, पीड़ित परिवार से की बात  जाफराबाद के एक शरणार्थी कैंप में पहुंची थी, जहां पर बड़ी संख्या में पीड़ित हिंदू परिवार रह रहे थे. हमने उन पीड़ितों की आपबीती सुनी, जिनके घर उपद्रवियों ने जला दिए थे. यहां मौजूद लोगों ने पूरे जिले में BSF की तैनाती की मांग की है. पीड़ितों ने दावा किया है कि उपद्रवियों में ज्यादातर स्थानीय लोग शामिल थे. ममता सरकार ने पीड़ितों से मुलाकात तो नहीं की, लेकिन मुआवजे का ऐलान जरूर कर दिया है, लेकिन क्या मुआवजे की रकम से पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लग जाता है? इस सवाल का जवाब मुर्शिदाबाद हिंसा में मारे गए गोविंद और चंदन दास के परिवार से पूछना चाहिए, जिन्होंने मुआवाजे की रकम को लेने से इनकार कर दिया है और वो सिर्फ इंसाफ चाहते हैं

श्रीमद्भगवद्गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल, PM मोदी ने दी शुभकामनाये

नई दिल्ली  श्रीमद्भगवद्गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर (Memory of the World Register) में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस खबर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया। यूनेस्को ने गुरुवार को जिन 74 नई प्रविष्टियों को इस रजिस्टर में जोड़ा है, उनमें ये दोनों महत्वपूर्ण ग्रंथ भी शामिल हैं। इसके साथ ही इस रजिस्टर में कुल 570 संग्रह हो गए हैं। पीएम मोदी बोले- हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, श्रीमद्भगवद्गीता और नाट्यशास्त्र का यूनेस्को में शामिल होना हमारी शाश्वत परंपरा, गहन ज्ञान और समृद्ध संस्कृति की वैश्विक मान्यता है। यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने आगे कहा कि गीता और नाट्यशास्त्र ने सदियों से मानव सभ्यता, चेतना और सांस्कृतिक विकास को दिशा दी है। इनकी शिक्षाएं आज भी दुनियाभर के लोगों को प्रेरणा देती हैं। गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, भारत की सांस्कृतिक धरोहर को यह वैश्विक सम्मान मिलना अत्यंत गौरवपूर्ण है। अब यूनेस्को के विश्व स्मृति रजिस्टर में भारत के 14 अभिलेख दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि गीता और नाट्यशास्त्र केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन, कलात्मकता और सभ्यता के स्तंभ हैं।  यूनेस्को की इस सूची में जिन अन्य 74 संग्रहों को स्थान मिला है, उनमें दासता, महत्वपूर्ण ऐतिहासिक महिलाओं से जुड़ी सामग्री, जिनेवा कन्वेंशन (1864–1949), और मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा जैसे ऐतिहासिक दस्तावेज भी शामिल हैं। इनमें से 14 संग्रहों को वैज्ञानिक दस्तावेजी धरोहर के रूप में मान्यता दी गई है। यह फैसला न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा।  

Ex CM जगन मोहन रेड्डी की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही, गिरी ED की गाज, 800 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त

अमरावती  14 साल पुराने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी पर ईडी ने सख्त कार्रवाई की है। वर्तमान में आंध्र प्रदेश विधानसभा की विपक्षी पार्टी- युवजन श्रमिक रायथु कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ जांच के दौरान ईडी ने 800 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। जानकारी मुताबिक जगन के जिन शेयरों को अटैच किया गया है, उसका मूल्य करीब 27.5 करोड़ रुपये है। इसके अलावा डालमिया सीमेंट्स (भारत) लिमिटेड (DCBL) की जमीन को भी अटैच किया है। इस जमीन की कीमत लगभग 377.2 करोड़ रुपये है। डालमिया ने अटैच की गई संपत्ति का कुल मूल्य 793.3 करोड़ रुपये है और ईडी ने 14 साल के बाद यह कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग का यह पूरा मामला लाभ हासिल करने के मकसद से की गई मदद का है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में साल 2011 में केस दर्ज किया था। ईडी ने सीबीआई की तरफ से दर्ज केस पर अब अस्थायी तौर पर संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई की है। 2011 में दर्ज मामले में की कार्रवाई  आपको बता दें कि, ED की ये कार्रवाई CBI ने जो केस 2011 में दर्ज किया गया था उसी से जुड़ी है। आरोप है कि, डेलमिया सीमेंट्स ने भरती सीमेंट कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड में निवेश किया था, जो जगन रेड्डी से संबंधित है। ईडी द्वारा अटैच किए गए शेयर कार्मेल एशिया होल्डिंग्स लिमिटेड, सरस्वती पावर एंड इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और हर्षा फर्म में जगन रेड्डी की हिस्सेदारी से संबंधित हैं। इस मामले को लेकर ED की तरफ से बताया गया कि, DCBL ने रघुराम सीमेंट्स लिमिटेड में 95 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जिसका प्रतिनिधित्व जगन रेड्डी कर रहे थे। इसके बदले में, जगन ने कथित तौर पर अपने पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के प्रभाव का उपयोग कर कडपा जिले में 407 हेक्टेयर भूमि की माइनिंग लीज DCBL को दिलवाई। 31 मार्च को जारी हुआ था अटैचमेंट ऑर्डर ईडी और सीबीआई के अनुसार, वाईएस जगन रेड्डी, पूर्व सांसद वी विजया साई रेड्डी और DCBL के पुनीत डेलमिया के बीच हुए समझौते के तहत रघुराम सीमेंट्स लिमिटेड के शेयर एक फ्रांसीसी कंपनी PARFICIM को 135 करोड़ रुपए में बेचे गए। इनमें से 55 करोड़ रुपए मई 2010 से जून 2011 के बीच हवाला के माध्यम से नकद में जगन को दिए गए। इन भुगतानों का विवरण दिल्ली स्थित आयकर विभाग द्वारा जब्त सामग्री में पाया गया। अटैचमेंट ऑर्डर 31 मार्च को जारी हुआ था, जिसे DCBL ने 15 अप्रैल, 2025 को प्राप्त किया।  

20 अप्रैल के बाद नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है, दिल्ली में मंथन तेज, नया अध्यक्ष कौन?

नई दिल्ली नई दिल्ली की सियासी फिज़ाओं में हलचल तेज है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) एक बार फिर संगठनात्मक बदलाव की दहलीज़ पर खड़ी है। पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही चर्चाओं को अब ठोस दिशा मिलने वाली है, क्योंकि 20 अप्रैल के बाद नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल्ली आवास पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने इन कयासों को और हवा दी है। इस मीटिंग में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महासचिव बी.एल. संतोष जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में पार्टी के भविष्य की रणनीति और नेतृत्व में संभावित बदलाव को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। पांच नाम, एक कुर्सी: किसे मिलेगी कमान? विश्वसनीय पार्टी सूत्रों के अनुसार, नए अध्यक्ष को लेकर पांच नामों पर चर्चा जोरों पर है – और इस बार पार्टी दक्षिण भारत, विशेषकर कर्नाटक से किसी नेता को कमान सौंपने पर गंभीरता से विचार कर रही है। आइए जानते हैं इस रेस में शामिल नेताओं के बारे में:   1. प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे धारवाड़ से सांसद जोशी संगठन और संघ दोनों में गहरी पैठ रखते हैं। उनका अनुशासित नेतृत्व और प्रशासनिक अनुभव उन्हें सबसे मजबूत दावेदार बनाता है। 2. बी.एल. संतोष आरएसएस की पृष्ठभूमि से आए बी.एल. संतोष का नाम संगठन के लिए स्वाभाविक पसंद माना जा रहा है। वह पार्टी और संघ के बीच मजबूत पुल की भूमिका निभाते हैं। 3. सी.टी. रवि तेजतर्रार और आक्रामक तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले रवि, कर्नाटक में संगठन को मज़बूती देने के लिए जाने जाते हैं। संघ से जुड़ाव और ज़मीनी पकड़ उनकी खास ताकत है। 4. धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा से सांसद और चुनावी रणनीति के माहिर खिलाड़ी प्रधान, लंबे समय से शीर्ष नेतृत्व की रेस में हैं। संगठन को विस्तार देने में उनकी भूमिका हमेशा से अहम रही है। 5. भूपेंद्र यादव राजस्थान से आने वाले भूपेंद्र यादव का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। पर्यावरण मंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक कार्यकुशलता दिखाई है, और संगठन में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। एक चौंकाने वाला नाम भी चर्चा में… सबको चौंकाते हुए, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का नाम भी अचानक चर्चा में आया है। यदि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपते हैं, तो यह एक अप्रत्याशित लेकिन बेहद रणनीतिक फैसला हो सकता है। अब सबकी निगाहें 20 अप्रैल के बाद की राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हैं। क्या दक्षिण भारत से नया नेतृत्व उभरेगा? या पीएम मोदी एक बार फिर सबको चौंका देंगे?

गाजा में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के वास्ते सभी बंधकों को छोड़ने के लिए तैयार

गाजा इजरायल की ताबड़तोड़ कार्रवाई से हमास के हौंसले पस्त होते नजर आ रहे हैं। फिलिस्तीन के इस कट्टरपंथी संगठन ने एक महत्वपूर्ण घोषणा में कहा है कि वह गाजा में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के वास्ते सभी बंधकों को छोड़ने के लिए तैयार है। हमास ने कहा है कि वह इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले सभी इजरायली बंधकों को रिहा करने के लिए तैयार है। यह बयान हमास के वरिष्ठ अधिकारी खलील अल-हय्या ने गुरुवार को एक टेलीविजन भाषण में दिया। इस प्रस्ताव को गाजा में डेढ़ साल से अधिक समय से चल रहे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक संभावित कदम के रूप में देखा जा रहा है। हमास का प्रस्ताव हमास के वरिष्ठ अधिकारी खलील अल-हय्या ने कहा, “हम एक व्यापक समझौते के लिए तैयार हैं, जिसमें सभी इजरायली बंधकों की रिहाई, इजरायल में कैद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई, गाजा युद्ध का अंत और क्षेत्र के पुनर्निर्माण की शुरुआत शामिल हो।” हालांकि, हमास ने स्पष्ट किया कि वह इजरायल की उस मांग को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें उसे अपने हथियार डालने होंगे। अल-हय्या ने इजरायल के 45 दिन के अस्थायी युद्धविराम प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया, जिसमें हमास के हथियार डालने की शर्त शामिल थी। हमास ने यह भी कहा कि कोई भी समझौता स्थायी युद्धविराम, इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण की गारंटी पर आधारित होना चाहिए। एक वरिष्ठ फिलिस्तीनी अधिकारी ने कहा, “इजरायल का नवीनतम प्रस्ताव युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा नहीं करता और केवल बंधकों को प्राप्त करना चाहता है।” संघर्षविराम का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे नेतन्याहू- हमास अल-हय्या ने इजराइल द्वारा प्रस्तावित 45 दिन की अस्थायी संघर्षविराम योजना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अब हमास किसी भी “आंशिक समझौते” को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू संघर्षविराम का इस्तेमाल केवल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे हैं। उन्होंने रॉयटर्स के हवाले से कहा, “नेतन्याहू और उनकी सरकार आंशिक समझौतों का इस्तेमाल अपनी उस राजनीतिक नीति को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं, जिसका मकसद नरसंहार और भुखमरी के जरिए युद्ध को जारी रखना है — भले ही इसके लिए अपने ही बंधकों की बलि क्यों न देनी पड़े। हम इस नीति को लागू करने का हिस्सा नहीं बनेंगे।” हमास की इस सख्त स्थिति से मिस्र के मध्यस्थों द्वारा युद्धविराम को बहाल करने की कोशिशों को और झटका लग सकता है। काहिरा में इस हफ्ते हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हमास ने इजरायल की उस मांग को भी खारिज कर दिया है, जिसमें संगठन से अपने हथियार छोड़ने की शर्त रखी गई थी। हमास ने साफ कहा है कि वह तभी बचे हुए 59 इजराइली बंधकों को छोड़ेगा, जब इजराइल युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने पर सहमत होगा। इजरायल ने तेज किए हमले इधर, इजरायली सेना ने गाजा पर अपने हमले तेज कर दिए हैं। गुरुवार को हुए हवाई हमलों में गाजा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कम से कम 32 फिलिस्तीनियों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। जबालिया में संयुक्त राष्ट्र संचालित एक स्कूल पर हमले में छह लोगों की जान गई। इजराइल ने दावा किया कि वहां एक हमास कमांड सेंटर था। वहीं, हमास ने यह जानकारी दी कि इजरायली-अमेरिकी सैनिक एडन अलेक्जेंडर को बंधक बनाकर रखने वाले लड़ाकों से उनका संपर्क टूट गया है। बताया गया कि जिस स्थान पर अलेक्जेंडर को रखा गया था, वहां इजराइली हमले हुए। हमास ने एक वीडियो संदेश में बंधकों के परिवारों को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे हमलों में उनके प्रियजन मारे जा सकते हैं। 2023 से चल रहा संघर्ष यह युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ, जब हमास ने दक्षिणी इजरायल पर एक आश्चर्यजनक हमला किया, जिसमें इजरायली अधिकारियों के अनुसार 1,200 लोग मारे गए और 251 लोग बंधक बनाए गए। इसके जवाब में, इजरायल ने गाजा पर व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें गाजा स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार अब तक 51,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं। हमास का कहना है कि वर्तमान में उसके पास 59 बंधक हैं, जिनमें से 24 के जीवित होने की उम्मीद है। इजरायल में जनता का दबाव इजरायल में, बंधकों की रिहाई को प्राथमिकता देने की मांग बढ़ रही है। सैकड़ों पूर्व मोसाद और वायुसेना कर्मियों ने सरकार से युद्ध को रोककर बंधकों की रिहाई पर ध्यान देने का आह्वान किया है। तेल अवीव में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां लोग बंधकों की सुरक्षित वापसी के लिए समझौते की मांग कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी, योना श्निट्जर ने कहा, “गाजा में बंधकों की स्थिति सामान्य नहीं होनी चाहिए। यह दिल दहलाने वाला है।”

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दिया संकेत, 15 दिनों के भीतर सरकार नई टोल नीति पेश करेगी

नई दिल्ली जल्द ही देश में हाईवे सफर का अनुभव पूरी तरह बदलने वाला है। टोल प्लाजा पर लंबी कतारों, फास्टैग की खामियों और समय की बर्बादी से राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार अब एक सैटेलाइट-बेस्ड टोल सिस्टम लाने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को संकेत दिया कि आने वाले 15 दिनों के भीतर सरकार नई टोल नीति पेश करेगी, जो भारत के टोल कलेक्शन सिस्टम में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। GPS आधारित टोल सिस्टम की शुरुआत गडकरी ने बताया कि इस नई नीति के लागू होने के बाद टोल को लेकर लोगों की सभी शिकायतें दूर हो जाएंगी। उन्होंने फिलहाल नीति की ज्यादा जानकारी साझा नहीं की, लेकिन संकेत साफ हैं—सरकार अब GPS आधारित टोल वसूली की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। फास्टैग से आगे की टेक्नोलॉजी भारत में 2016 में फास्टैग सिस्टम की शुरुआत हुई थी, जो RFID टेक्नोलॉजी पर आधारित है। हालांकि, बीते वर्षों में इसके संचालन में कई समस्याएं सामने आईं—जैसे अत्यधिक ट्रैफिक, टैग स्कैनिंग में तकनीकी गड़बड़ियां, और टैग के दुरुपयोग के मामले। इन्हीं दिक्कतों के चलते अब सरकार स्मार्ट और सटीक टोल कलेक्शन सिस्टम की तरफ बढ़ रही है। कैसे काम करेगा GPS Toll System? इस नए सिस्टम में हर वाहन में एक ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) डिवाइस लगाया जाएगा, जो GNSS (Global Navigation Satellite System) तकनीक के जरिए वाहन की रीयल टाइम लोकेशन और हाईवे पर तय की गई दूरी को ट्रैक करेगा।    जैसे ही वाहन हाईवे पर चलेगा, सिस्टम उस वाहन की यात्रा की दूरी मापेगा, उसी के आधार पर टोल की राशि तय की जाएगी, और वह रकम सीधे ड्राइवर के बैंक खाते या वॉलेट से स्वतः कट जाएगी। बड़ी राहत: रुकना नहीं, सिर्फ चलना है! GPS Toll लागू होने से ड्राइवरों को किसी टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन खर्च भी कम होगा और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी। आम लोगों पर क्या असर होगा? इस नई नीति के लागू होने से आम नागरिकों को टोल की पारदर्शिता मिलेगी, मनमानी वसूली पर लगाम लगेगी, और टोल टैक्स सिर्फ उतनी दूरी का देना होगा जितना हाईवे पर वाहन चला है। यानी, “Pay as you drive” मॉडल पर टोल वसूली होगी।

‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में वित्तीय अनियमितता को लेकर सरदार पटेल ने भी दी थी पंडित नेहरू को चेतावनी, जताई थी कई आशंकाएं

नई दिल्ली 1937 में एसोसिएट जर्नल के गठन के बाद 9 सितंबर 1938 को जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड अखबार शुरू किया, यह बात आजादी मिलने के ठीक 9 साल पहले की है। इस अखबार को शुरू करने में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके तहत तीन अखबार थे, अंग्रेजी में ‘नेशनल हेराल्ड’, हिंदी में ‘नवजीवन’ और उर्दू में ‘कौमी आवाज’। यही नेशनल हेराल्ड आज सुर्खियों में बना हुआ है। दरअसल, नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई लोगों पर ईडी ने 988 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले को लेकर चार्जशीट दायर की है। जिसके बाद से उठा राजनीतिक बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इन तीनों अखबारों का संचालन एसोसिएट जर्नल यानी एजीएल करता था। लेकिन तब भी यह माना जाता था कि यह अखबार पंडित जवाहर लाल नेहरू के इशारों पर चलता है। 1942 से 1945 तक इस अखबार के प्रकाशन पर अंग्रेजों ने रोक भी लगा दी थी। यानी 3 सालों तक इस अखबार का प्रकाशन नहीं हो पाया। देश की आजादी के बाद जब पंडित नेहरू प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इन अखबारों के बोर्ड के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी को इसके बोर्ड का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे इस एसोसिएट जर्नल यानी एजीएल की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी। पंडित नेहरू के निजी सचिव ओ. एम. मथाई ने अपनी किताब में इस बात का जिक्र किया था कि फिरोज गांधी इस कंपनी के संचालन में बहुत अच्छे नहीं थे। इसलिए यह नेशनल हेराल्ड आर्थिक संकट में फंस गया। जिसे आर्थिक संकट से उबारने के लिए जनहित निधि ट्रस्ट के रूप में बदल दिया गया। इस नए ट्रस्ट पर भी नेहरू परिवार का ही कब्जा रहा। इस ट्रस्ट के सभी ट्रस्टी नेहरू और उनके परिवार के बेहद करीबी लोग बनाए गए। ओ. एम. मथाई ने तो अपनी किताब में यहां तक दावा किया कि नेशनल हेराल्ड के लिए बड़ौदा के महाराजा से पूरे दो लाख रुपए की रिश्वत मांग ली गई थी। सरदार वल्लभभाई पटेल को जब इसकी सूचना मिली थी तो उन्होंने इसकी शिकायत नेहरू से की थी। उस समय विज्ञापन के नाम पर कई बड़े औद्योगिक घरानों से लाखों की रकम एक साल में इस अखबार ने हासिल की। पंडित नेहरू के प्रधानमंत्री रहते ही दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग पर नेशनल हेराल्ड को ऑफिस बनाने के लिए जमीन भी आवंटित की गई। यानी नेशनल हेराल्ड में हुआ घोटाला वित्तीय कदाचार की कोई हालिया कहानी नहीं है, इसकी जड़ें स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों से ही उभरी हुई हैं। 1950 में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने नेहरू को पत्र लिखकर नेशनल हेराल्ड का समर्थन करने के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग करने के साथ ही संदिग्ध धन उगाही के बारे में भी चेतावनी दी थी। सरदार पटेल के पत्राचार में दर्ज इन चिंताओं को नेहरू ने खारिज कर दिया था, जबकि वह इसके दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में आशंकित थे। दशकों बाद, पटेल की ये चेतावनी अब लोगों के सामने आ रही है, जब ईडी इस मामले की जांच कर रही है। ईडी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में आरोपपत्र दायर किया है, जिसमें उन पर यंग इंडिया लिमिटेड के जरिए 5,000 करोड़ रुपए की संपत्ति का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है, जो उनके नियंत्रण में है और नेशनल हेराल्ड और उसकी मूल कंपनी एसोसिएट जर्नल लिमिटेड से जुड़ी है। सरदार वल्लभ भाई पटेल की जो चेतावनी पत्र के रूप में तब शुरू हुई थी, वह अब एक बड़े घोटाले में बदल गई है। 5 मई, 1950 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने नेहरू को पत्र लिखकर चिंता जताई कि नेशनल हेराल्ड ने हिमालयन एयरवेज से जुड़े दो व्यक्तियों से 75,000 रुपए से अधिक की रकम स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि एयरलाइन ने भारतीय वायुसेना की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए अवैध रूप से रात्रि हवाई डाक सेवा के लिए सरकारी अनुबंध इसके जरिए हासिल किया है। उसी पत्र में सरदार वल्लभभाई पटेल ने नेहरू को आगाह किया कि नेशनल हेराल्ड ने अखानी नामक एक व्यवसायी से धन स्वीकार किया था, जो उनकी विमानन कंपनी के लिए रात्रि डाक अनुबंध हासिल करने में शामिल था। पटेल ने उल्लेख किया कि अखानी टाटा और एयर सर्विसेज ऑफ इंडिया जैसी फर्मों से भी धन जुटा रहा था। पत्र में आगे पटेल ने नेहरू को लिखा था कि अखानी पर बैंकों से धोखाधड़ी करने के लिए विभिन्न अदालतों में पहले से ही कई आरोप हैं। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अहमद किदवई द्वारा नेशनल हेराल्ड के लिए धन जुटाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने के बारे में भी चेतावनी पत्र के जरिए दी थी, जिसमें जेपी श्रीवास्तव जैसे लखनऊ स्थित व्यापारियों से धन इकट्ठा करना भी शामिल है। उसी दिन, 5 मई 1950 को, नेहरू ने पटेल को ऐसे लहजे में जवाब दिया था, जिससे लगता था कि उन्हें शांत करने की कोशिश की जा रही थी। नेहरू ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि उन्होंने अपने दामाद फिरोज गांधी, जो उस समय नेशनल हेराल्ड के महाप्रबंधक थे, से इस अवैध धन संग्रह के आरोपों की जांच करने के लिए कहा है। इसके ठीक अगले ही दिन, 6 मई को पटेल ने नेहरू के दावों का दृढ़ता से खंडन करते हुए फिर से नेहरू को जवाब दिया। फिर पटेल को शांत करने का प्रयास किया गया। लेकिन सरदार पटेल के द्वारा अवैध फंडिंग के बारे में जो चिंता व्यक्त की गई थी, उसे दरकिनार कर दिया गया। हालांकि, तब नेहरू ने यह स्वीकार किया था कि इसमें कुछ गलतियां हुई होंगी।

वक्फ हिंसा पर HC में ममता सरकार का कबूलनामा, 10,000 की भीड़ हुई जमा, छीन ली पुलिस की पिस्तौल

कोलकाता वक्फ संशोधन ऐक्ट के खिलाफ पिछले हफ्ते पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद में भड़की हिंसा पर राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि हिंसा के दिन करीब 10,000 की भीड़ जमा हो गई थी। इतना ही नहीं उन्मादी भीड़ ने तब मौके पर तैनात पुलिस की पिस्तौल भी छीन ली थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बंगाल सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्मादी भीड़ में से करीब 10 लोगों के पास घातक हथियार थे, जिनसे पुलिस को अपने अधिकारियों को बचाना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपद्रवियों की हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले करीब 8000-10000 लोगों की भीड़ पीडब्ल्यूडी ग्राउंड आउट पर इकट्ठा हुई। इसके बाद भीड़ का एक हिस्सा अलग हो गया और करीब 5000 लोग उमरपुर की ओर बढ़ गए और एनएच को जाम कर दिया। इसके बाद देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और गंदी भाषा का इस्तेमाल करने लगी। इसके बाद उन्होंने पुलिस कर्मियों पर ईंट-पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। तीन सदस्यीय समिति को प्रभावित इलाकों का दौरा करना चाहिए इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद जिले में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखने पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस राजा बसु चौधरी की खंडपीठ ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, पश्चिम बंगाल राज्य मानवाधिकार आयोग और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एक-एक सदस्य वाली तीन सदस्यीय समिति को हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास और शांति बहाली की निगरानी के लिए जिले के प्रभावित इलाकों का दौरा करना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी की याचिका पर सुनवाई हाई कोर्ट राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मुस्लिम बहुल जिले में सांप्रदायिक दंगों के दौरान बम विस्फोट हुए थे। एक अन्य याचिकाकर्ता ने हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों की उनके घरों में वापसी के लिए राज्य सरकार द्वारा कदम उठाए जाने का अनुरोध किया। केंद्र की ओर से पेश वकील ने अदालत के समक्ष अनुरोध किया कि मुर्शिदाबाद में सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) की तैनाती को जिले की जमीनी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए कुछ समय के लिए और बढ़ा दिया जाए। केंद्रीय बलों की लगभग 17 कंपनियां तैनात मुर्शिदाबाद के उपद्रवग्रस्त सुती, शमसेरगंज-धुलियान इलाकों में फिलहाल केंद्रीय बलों की लगभग 17 कंपनियां तैनात हैं। उच्च न्यायालय ने शनिवार को शांति बहाली के लिए जिले में सीएपीएफ की तैनाती का आदेश दिया था। अदालत के समक्ष अपनी दलील रखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने एक रिपोर्ट पेश की और दावा किया कि मुर्शिदाबाद में कानून-व्यवस्था की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि कुछ प्रभावित परिवार पहले ही अपने घर लौट चुके हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों में मुर्शिदाबाद में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में हुई हिंसा से बचकर कई लोगों ने मालदा जिले के एक स्कूल में राहत शिविर में शरण ली है। राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग दूसरी तरफ, शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि राज्य के मुर्शिदाबाद, मालदा और चौबीस परगना जैसे जिलों में भड़की हिंसा और लोगों के पलायन के बाद अब राज्य के हालात ममता बनर्जी सरकार के नियंत्रण से बाहर जा रहा है, इसलिए राज्य में अविलंब राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए। भाजपा के वरिष्ठ नेता अधिकारी ने राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए कहा,“ममता सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल हो चुकी है।” उन्होंने 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव को राष्ट्रपति शासन के तहत कराने की भी मांग की है। अधिकारी का आरोप है कि जिहादी तत्व खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस सत्ताधारी पार्टी के कैडर की तरह काम कर रही है।

‘हम हिन्दू हैं, हिन्दी नहीं, तीन-भाषा नीति की आलोचना कर राज ठाकरे ने कहा-हर जगह हिन्दी थोपने नहीं देंगे

मुंबई त्रि-भाषा फॉर्मूले के तहत हिन्दी थोपने का विवाद अब महाराष्ट्र पहुंच चुका है। महाराष्ट्र की नव निर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्र सरकार की तीन-भाषा नीति की आलोचना की है और कहा है कि वह हर जगह हिन्दी थोपने नहीं देंगे। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “आपका जो भी त्रि-भाषा फॉर्मूला है, उसे सरकारी मामलों तक ही सीमित रखिए, उसे शिक्षा में न लाएं।” उन्होंने आगे कहा कि MNS केंद्र सरकार के हर चीज को ‘हिंदीकृत’ करने के मौजूदा प्रयासों को इस राज्य में सफल नहीं होने देगी। उन्होंने लिखा, “हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदी नहीं! अगर आप महाराष्ट्र को हिंदी के रूप में चित्रित करने की कोशिश करेंगे, तो महाराष्ट्र में संघर्ष होना तय है। अगर आप यह सब देखेंगे, तो आपको एहसास होगा कि सरकार जानबूझकर यह संघर्ष पैदा कर रही है। क्या यह सब आगामी चुनावों में मराठी और गैर-मराठी के बीच संघर्ष पैदा करने और इसका फायदा उठाने की कोशिश है?” हाल ही में महाराष्ट्र में लागू हुआ त्रि-भाषा फॉर्मूला राज ठाकरे का यह बयान तब आया है, जब राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने पिछले दिनों कई राज्‍यों में हिन्‍दी भाषा को लेकर उपजे विरोध के बीच कक्षा 1 से 5 तक हिन्दी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य कर दिया है। त्रिभाषा फॉर्मूले का नया पाठ्यक्रम 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से लागू किया गया है। महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत नया शैक्षणिक ढांचा लागू करने की घोषणा करते हुए हिन्दी को तीसरी भाषा के तौर पर अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत अब राज्य के मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएगी। CM फडणवीस ने किया बचाव इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में हिन्दी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने के सरकार के फैसले का बचाव किया है और केंद्र की इस नीति की प्रशंसा की है। फडणवीस ने कहा, “अगर कोई अंग्रेजी सीखना चाहता है, तो वह अंग्रेजी सीख सकता है। अगर कोई छात्र कोई अन्य भाषा सीखना चाहता है, तो किसी को भी अन्य भाषाएँ सीखने पर कोई रोक नहीं है। हालांकि, सभी को मराठी आनी चाहिए। साथ ही, हमारे देश की अन्य भाषाओं को भी जानना चाहिए। केंद्र सरकार ने इस बारे में सोचा है। केंद्र सरकार को लगता है कि हमारे देश में संचार की एक भाषा होनी चाहिए। यहr प्रयास किया गया है।”

भारतीय रेलवे श्रीनगर तक चलने वाली वंदे भारत ट्रेन के लिए क्या किराया और शेड्यूल होगा, इसकी जानकारी जल्द देगा

जम्मू जम्मू के कटरा से श्रीनगर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को 19 अप्रैल को हरी झंडी दिखाई जानी थी, लेकिन पीएम मोदी का दौरा टलने से अब थोड़ा और समय लगेगा। हालांकि, इस ट्रेन के लिए टिकट बुकिंग इसी हफ्ते से शुरू हो जाएगी। चेन्नई स्थित इंटिग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में वंदे भारत के कोच बनाए गए हैं। इससे पूरे देश से कश्मीर की यात्रा आसान हो जाएगी। हालांकि, यात्रियों को सुरक्षा की दृष्टि से पहले जम्मू के कटरा तक किसी ट्रेन से आना होगा और फिर यहां से श्रीनगर के लिए वंदे भारत ट्रेन मिलेगी। रेलवे की ओर से एक खुशखबरी सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि अन्य ट्रेनों की ही तरह कश्मीर जाने वाली इस वंदे भारत में भी पांच साल से कम उम्र के बच्चों का टिकट नहीं लगेगा। भारतीय रेलवे श्रीनगर तक चलने वाली वंदे भारत ट्रेन के लिए क्या किराया और शेड्यूल होगा, इसकी जानकारी जल्द देगा। माना जा रहा है कि 19 अप्रैल तक इसे जारी किया जा सकता है। इसका रखरखाव उत्तरी रेलवे (एनआर) करेगा। हालांकि, माना जा रह है कि एसी चेयर कार का टिकट 1600 रुपये और एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया 2500 रुपये तक हो सकता है। किराए को लेकर आधिकारिक जानकारी जल्द दी जाएगी। इस ट्रेन में अन्य ट्रेनों की ही तरह पांच साल के बच्चों के लिए यात्रा फ्री होगी। ‘ईटी नाऊ’ से बात करते हुए भारतीय रेलवे के सीनियर अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों के लिए वंदे भारत ट्रेन से यात्रा करना फ्री होगा। हालांकि, अगर उसे सीट की जरूरत होगी तो वह उसे पूरा किराया देना होगा। सिर्फ तीन घंटे में पहुंच सकेंगे कश्मीर जम्मू से कश्मीर पहुंचने में सड़क के जरिए आमतौर पर सात से आठ घंटे का समय लगता है, लेकिन वंदे भारत के जरिए यह समय आधा हो जाएगा। कटरा से श्रीनगर महज तीन घंटे में ही वंदे भारत के जरिए लोग यात्रा कर सकेंगे। इससे न सिर्फ कश्मीर जाने वाले पर्यटकों को फायदा मिलेगा, बल्कि स्थानीय विकास के लिए भी यह ट्रेन फायदेमंद साबित हो सकती है। कश्मीर यात्रा के दौरान यह ट्रेन रियासी सेक्टर में चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज से भी गुजरेगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- कश्मीर का पाक के साथ एकमात्र संबंध अवैध रूप से कब्जाए गए क्षेत्र को खाली करना है

इस्लामाबाद भारत ने गुरुवार को पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर दो-राष्ट्र सिद्धांत और कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए पलटवार किया है। मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कश्मीर का पाकिस्तान के साथ एकमात्र संबंध अवैध रूप से कब्जाए गए क्षेत्र को खाली करना है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने दो-राष्ट्र सिद्धांत के मुद्दे को उठाते हुए इस बात पर जोर दिया था कि भारत और पाकिस्तान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं। इस्लामाबाद में बुधवार को ओवरसीज पाकिस्तानी कन्वेंशन में अपने संबोधन में असीम मुनीर ने पाकिस्तानी नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को बताएं कि राष्ट्र का जन्म कैसे हुआ। मुनीर ने कहा, ”…हमारे पूर्वजों ने सोचा था कि हम जीवन के हर संभव पहलू में हिंदुओं से अलग हैं। हमारा धर्म अलग है, हमारे रीति-रिवाज अलग हैं, हमारी परंपराएं अलग हैं, हमारे विचार अलग हैं, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं। यहीं से दो-राष्ट्र सिद्धांत की नींव रखी गई। हम दो राष्ट्र हैं, हम एक राष्ट्र नहीं हैं।” अपने संबोधन में पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने कश्मीर मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत कश्मीर को पाकिस्तान से अलग नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों ने बहुत त्याग किया है और हमने इस देश के निर्माण के लिए बहुत त्याग किया है और हम जानते हैं कि इसकी रक्षा कैसे करनी है।” उन्होंने आगे कहा, “मेरे प्यारे भाइयों और बहनों और बेटे और बेटियों, कृपया पाकिस्तान की कहानी मत भूलना और अपनी अगली पीढ़ी को पाकिस्तान की कहानी सुनाना मत भूलना, ताकि पाकिस्तान के साथ उनका रिश्ता कभी कमजोर न पड़े। चाहे वह तीसरी पीढ़ी हो, या चौथी पीढ़ी हो या पांचवीं पीढ़ी हो, वे जानते हैं कि पाकिस्तान उनके लिए क्या है।” ‘भारत को पाकिस्तान से घनिष्ठ संबंध बनाने की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए’ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की हालिया टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि अब समय आ गया है कि भारत सच्चाई को स्वीकार करे और पाकिस्तान से घनिष्ठ संबंध बनाने की उम्मीद छोड़ दे। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”अपने हालिया संबोधन में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने साफ कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच गहरी वैचारिक खाई है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह साफ हो चुका है कि हमारे रास्ते अलग हैं। ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि हम अपने राष्ट्र को मजबूत करें, अपने धर्म और सभ्यतागत मूल्यों को बनाए रखें। ऐसा करके ही हम अपने देश को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

पाकिस्तानी आर्मी चीफ को लताड़ लगाते हुए कहा है कि पाकिस्तान भारत के प्रति नफरत के नशे में चूर है और कभी नहीं सुधरने वाला

नई दिल्ली पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के दो-राष्ट्र सिद्धांत पर दिए गए बयान पर विदेश मामलों के एक्सपर्ट रोबिंदर सचदेव ने पलटवार किया है। उन्होंने लताड़ लगाते हुए कहा है कि पाकिस्तान भारत के प्रति नफरत के नशे में चूर है और कभी नहीं सुधरने वाला। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख द्वारा की गई टिप्पणियों से पता चलता है कि वे स्वप्नलोक में जी रहे हैं। वे विदेशों में रह रहे पाकिस्तानियों पर भावनात्मक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे ताकि वे पाकिस्तान में और अधिक योगदान दें। यह सेना प्रमुख की पिछड़ी और कठोर मानसिकता को दर्शाता है, और इस बात की किसी भी उम्मीद को खत्म करता है कि पाकिस्तान अपने तौर-तरीकों में बदलाव लाएगा। ‘पाकिस्तान कभी नहीं सुधरेगा’ सचदेव ने न्यूज एजेंसी ‘एएनआई’ से आगे कहा, ”यह इस बात को भी दर्शाता है कि कश्मीर मुद्दे पर अड़े रहने की भावना उनकी रगों में गहराई तक समा गई है, और पाकिस्तान कभी नहीं सुधरेगा। पिछले कुछ सालों में भारत का रुख बिल्कुल साफ हो गया है कि पाकिस्तान को पाक अधिकृत इलाकों को हमें वापस करना ही होगा… भारत को इस मामले में शायद कोई कदम उठाने की जरूरत ही न पड़े क्योंकि पाकिस्तान में कई ऐसे मुद्दे हैं जो देश को अंदर से तोड़ देंगे, और इन इलाकों के लोग भारत का हिस्सा बनना चाहेंगे। सेना प्रमुख के बयानों से पता चलता है कि पाकिस्तान भारत के प्रति नफरत के नशे में चूर है।” पाक सेना प्रमुख पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? इससे पहले, भारत ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की कश्मीर को पाकिस्तान की गले की नस बताने वाली टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा है कि कश्मीर के साथ पाकिस्तान का एकमात्र संबंध उस क्षेत्र को खाली करने का है, जिस पर उसका अवैध रूप से कब्जा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को नियमित ब्रीफिंग में सवालों के जवाब में यह बात कही। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में पूछा कि किसी देश की गले की नस में ‘कुछ भी विदेशी’ कैसे हो सकता है। उन्होंने दोहराया कि कश्मीर के संबंध में पाकिस्तान की भूमिका उन क्षेत्रों को खाली करने तक सीमित है, जिन पर वह अवैध रूप से कब्जा किये हुए है। तहव्वुर राणा पर एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन वैश्विक आतंकवाद के केंद्र के रूप में इसकी ख्याति कम नहीं होगी।

सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के हाथ परमाणु बम लगने जैसा है, आर्टिकल 142 पर बोले धनखड़

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संविधान के अनुच्छेद 142 में प्रदत्त सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि यह सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के हाथ परमाणु बम लगने जैसा है। गुरुवार को उपराष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में दिए गए फैसले पर सवाल उठाया, जिसमें राज्यों द्वारा भेजे गए विधेयकों पर हस्ताक्षर करने के लिए राष्ट्रपति से समयसीमा तय करने को कहा गया है। उन्होंने अदालतों द्वारा सुपर संसद के रूप में काम करने पर चिंता जताई है। उपराष्ट्रपति ने कहा, “अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ एक परमाणु मिसाइल बन गया है, जो न्यायपालिका के लिए चौबीसों घंटे उपलब्ध है।” राज्यसभा के प्रशिक्षुओं के एक समूह को संबोधित करते हुए धनखड़ ने कहा, ‘‘हाल ही में एक फैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है। हम कहां जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? हमें बेहद संवेदनशील होना होगा। यह कोई समीक्षा दायर करने या न करने का सवाल नहीं है। हमने इसके लिए लोकतंत्र से कभी समझौता नहीं किया। राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से फैसला करने के लिए कहा जा रहा है।’’ राष्ट्रपति का पद बहुत ऊंचा: धनखड़ तमिलनाडु राज्य बनाम राज्यपाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल के फैसले का जिक्र करते हुए धनखड़ ने कहा, “तो..हमारे पास ऐसे जज हैं जो कानून बनाएंगे, जो कार्यकारी कार्य करेंगे, जो सुपर संसद के रूप में कार्य करेंगे फिर भी उनकी जवाबदेही नहीं होगी क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता।” उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि भारत में राष्ट्रपति का पद बहुत ऊंचा है और राष्ट्रपति संविधान की रक्षा, संरक्षण एवं बचाव की शपथ लेते हैं, जबकि मंत्री, उपराष्ट्रपति, सांसदों और न्यायाधीशों सहित अन्य लोग संविधान का पालन करने की शपथ लेते हैं। आप राष्ट्रपति को निर्देश नहीं दे सकते: धनखड़ उन्होंने आगे कहा, “हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते, जहां आप भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें और किस आधार पर? संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है। जिन न्यायाधीशों ने राष्ट्रपति को वस्तुतः आदेश जारी किया और एक परिदृश्य प्रस्तुत किया कि यह देश का कानून है, वे संविधान की शक्ति को भूल गए हैं।”

बंगाल सरकार पर हाई कोर्ट का सख्त रुख, केंद्रीय बल तैनात रहें और भड़काऊ भाषणों पर कसें लगाम

कोलकाता कलकत्ता हाई कोर्ट का कहना है कि हिंसा प्रभावित पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में केंद्रीय बलों की तैनाती अभी बनी रहेगी। अदालत ने गुरुवार को कहा कि अभी फोर्सेज तैनात रहनी चाहिए। इसके अलावा भड़काऊ भाषणों पर भी नियंत्रण की जरूरत है। अदालत ने कहा कि वक्फ संशोधन ऐक्ट के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण न दिए जाएं, जिनसे हिंसा भड़कने की आशंका बनी रहती है। इस तरह उच्च न्यायालय ने हिंसा के मामलों में राज्य सरकार को सख्त नसीहत दी है। इसके अलावा अदालत ने माना है कि अब भी मुर्शिदाबाद जिले में हालात सामान्य नहीं हैं। इसलिए केंद्रीय बलों की तैनाती कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रहनी चाहिए। मुर्शिदाबाद में वक्फ ऐक्ट के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। इस घटना में कई लोग मारे गए तो वहीं सैकड़ों परिवारों को पलायन करना पड़ा है। करीब ढाई सौ परिवार पड़ोस के मालदा जिले में पलायन कर गए हैं और वहां कैंपों में गुजर करने को मजबूर हैं। मुर्शिदाबाद के बवाल को लेकर राजनीति भी तेज है। बंगाल का यह जिला सांप्रदायिक लिहाज से संवेदनशील है। यहां से टीएमसी के युसूफ पठान सांसद हैं, जिन्होंने 2024 के चुनाव में अधीर रंजन चौधरी को मात दी थी, जो कांग्रेस से यहां से लगातार जीतते थे। इस बीच सूबे के राज्यपाल सीवी आनंद बोस का कहना है कि वह जमीनी हालात जानने के लिए मुर्शिदाबाद जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘मैं जमीनी हालात जानने के लिए मुर्शिदाबाद जा रहा हूं। मैं इस मामले में हर पहलू को देखूंगा। फिलहाल स्थिति कंट्रोल में लाई जा रही है। हमें कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न होने पाएं। मैं निश्चित तौर पर मुर्शिदाबाद जाऊंगा। उस इलाके के लोगों ने अपील की है कि फिलहाल बीएसएफ के जवानों को वहां बने रहने दिया जाए।’ बता दें कि ममता बनर्जी का कहना है कि इसमें बीएसएफ और भाजपा के ही लोगों का हाथ है। दरअसल पश्चिम बंगाल में वक्फ ऐक्ट को लेकर भी ममता बनर्जी कह रही हैं कि हम इसे लागू नहीं करेंगे। वहीं भाजपा का कहना है कि ममता बनर्जी के रुख से कट्टरपंथी ताकतों को बढ़ावा मिल रहा है और वे हिंसा कर रही हैं।

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