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राष्ट्रगान के दौरान खड़े ना होने पर NC विधायक के खिलाफ जांच के आदेश

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायक हिलाल अकबर लोन (Hilal Akbar Lone) पर राष्ट्रगान के दौरान खड़े नहीं होने का आरोप लगा है। इस मामले की वीडियो सामने आने के बाद कश्मीर प्रशासन ने उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। लोन पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रगान के दौरान खड़े ना होने का आरोप लगा है। शीर्ष खुफिया सूत्रों ने न्यूज 18को बताया कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सोनावारी से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक हिलाल अकबर लोन के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। लोन बुधवार (16 अक्टूबर) को राष्ट्रगान के दौरान खड़े नहीं हुए थे। बताया जा रहा है कि श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में उमर अब्दुल्ला के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कुछ लोग राष्ट्रगान बजने के दौरान खड़े नहीं हुए थे। लोन उनमें से एक थे। रिपोर्ट की सत्यता का पता लगाने के लिए घटना के सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला गया। पूछताछ करने पर लोन ने बताया कि वह मेडिकल कंडीशन की वजह से नहीं उठा। हालांकि, न्यूज18 को सूत्रों ने बताया कि घटना से कुछ घंटे पहले ही वह मीडिया को इंटरव्यू देते हुए खड़ा होकर बात कर रहे थे। सूत्रों ने यह भी कहा कि कार्यक्रम की पूरी फुटेज खंगाली जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि राष्ट्रगान के दौरान कौन-कौन लोग खड़े नहीं हुए। CNN-न्यूज18 ने SKICC में औपचारिक सपथ ग्रहण समारोह से ठीक 30 मिनट पहले टेलीविजन इंटरव्यू को एक्सेस किया है। इसमें लोन कह रहे थे कि यह एक शानदार शुरुआत है और उन्हें जम्मू-कश्मीर के विकास, आर्टिकल 370 और पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 2019 में आर्टिकल 370 को निरस्त किए जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में यह पहली चुनी हुई सरकार है। 54 वर्षीय अब्दुल्ला ने पांच अन्य मंत्रियों के साथ शपथ ली जिनमें से तीन मंत्री जम्मू क्षेत्र के और दो कश्मीर घाटी के हैं। उपमुख्यमंत्री के रूप में सुरेंद्र चौधरी का चयन हुआ है। NC के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन के सहयोगी दल कांग्रेस ने फिलहाल नई सरकार में कोई मंत्री पद नहीं लेने का फैसला किया है। छह साल के प्रत्यक्ष केंद्रीय शासन को समाप्त करने वाली नई जम्मू-कश्मीर सरकार में अधिकतम नौ मंत्री हो सकते हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने डल झील के किनारे शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में अब्दुल्ला और उनके मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। दूसरी बार मुख्यमंत्री बने उमर अपने दादा शेख अब्दुल्ला और पिता फारूक अब्दुल्ला के बाद इस पद पर आसीन होने वाले अब्दुल्ला परिवार की तीसरी पीढ़ी के नेता हैं। वह इससे पहले 2009 से 2014 के बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री थे, जब यह पूर्ण राज्य हुआ करता था।

नायब सिंह सैनी ने राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया, सौंपी विधायकों की सूची

चंडीगढ़ विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद नायब सिंह सैनी ने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया है। नायब सिंह सैनी ने राज्यपाल को अपने समर्थन में आए विधायकों की सूची भी सौंपी है। बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई विधायक दल की बैठक में नायब सिंह सैनी को विधायक दल का नेता चुना गया। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद उन्होंने सभी विधायकों का धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री पद के लिए विधायकों ने उनके नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई है। विधायक दल की बैठक में अनिल विज और मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया था। विधायक दल की बैठक में अमित शाह ने कहा, “मुझे यह जानकर अत्याधिक प्रसन्नता हो रही है कि नायब सिंह सैनी को फिर से विधायक दल का नेता चुना गया है और वह मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने जा रहे हैं।” इस बीच, वह विपक्ष पर भी हमलावर दिखे। उन्होंने कहा, “विपक्षी दलों द्वारा यह दुष्प्रचार किया गया कि किसानों के अन्याय हो रहा है। भाजपा के शासनकाल में किसानों के हितों पर कुठाराघात किया जा रहा है। लेकिन, ऐसा नहीं है। हमारी सरकार में समाज के हर वर्ग के हितों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि अगर हिंदुस्तान में कोई ऐसा राज्य है, जो सभी 24 फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदता है, तो हरियाणा है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी किसानों की फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा है। हमारी सरकार ने हमेशा से ही किसानों के हितों का विशेष ख्याल रखा है और आगे भी रखती रहेगी।” नायब सिंह सैनी 17 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण से संबंधित सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में वह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वहीं, उनके साथ कौन-कौन अन्य विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। इस बारे में अभी तक कोई जानकारी प्रकाश में नहीं आ सकी है।

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कसा तंज, कहा- वह थक चुके हैं और अब सरकार उनसे चलने वाली नहीं है

बांका (बिहार) बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि वह थक चुके हैं और अब सरकार उनसे चलने वाली नहीं है। तेजस्वी यादव ने यहां कहा, “मैं व्यक्तिगत तौर पर नीतीश कुमार का सम्मान करता हूं। लेकिन, वह थक चुके हैं, उनसे बिहार चलने वाला नहीं है। उनकी क्या स्थिति है वह हम जानते हैं।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल के संगठन को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ता दिन रात मेहनत करते हैं। चूंकि, साल 2025 में विधानसभा चुनाव हैं। हम लोग बिहार के हर जिले में कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। पहली बार ऐसा कार्यक्रम हो रहा है, जहां हम पंचायतों के अध्यक्षों से सीधे तौर पर बात करेंगे। इस दौरान, उनसे चर्चा की जाएगी कि कैसे संगठन को मजबूती प्रदान की जाए। उन्होंने कहा, “डबल इंजन की सरकार के पास 10 माह में एक भी उपलब्धि नहीं है। सत्ता में रहकर विपक्ष को गाली दी जा रही है। जो काम हमने 17 माह में करके दिखाया था। वह काम 19 साल के एनडीए के शासन में नहीं हुआ। बिहार की डबल इंजन की सरकार को बस सत्ता में रहना है। बिहार में बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, गरीबी है। सरकार इस पर काम नहीं करती है और न ही बताती है कि इन पर क्या योजना है। बिहार में सबसे महंगी बिजली मिलती है। स्मार्ट मीटर इनका ‘स्मार्ट चीटर’ हो चुका है। जनता त्रस्त हो चुकी है।” तेजस्वी ने कहा, “अगर हमारी सरकार बनती है तो लोगों को 200 यूनिट फ्री बिजली दी जाएगी। कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा, बिहार की कानून-व्यवस्था भगवान भरोसे हैं। ऐसा कोई दिन नहीं बीतता जब, हत्या, लूट, अपहरण रेप जैसे संगीन मामले सामने न आएं। लेकिन यहां कोई सुनवाई नहीं होती है। एफआईआर होती है तो कार्रवाई नहीं होती। दोषियों को सजा नहीं मिल रही है।” तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में अफसरशाही चरम पर है। जनता जानती है कि यहां पर अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग कैसे किए जाते हैं। हमें नया बिहार, विकसित बिहार बनाना है। डबल इंजन की सरकार में बिहार को क्या मिला? केंद्र में बिहार के वोटरों के दम पर सरकार बनी है। लेकिन, इसके बदले में बिहार को क्या मिला। चुनाव से पहले कहते हैं कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देंगे, चुनाव के बाद अपनी बात से मुकर जाते हैं।

नायब सिंह सैनी को नेता चुन लिया, अब अनिल विज ने कहा, पार्टी चौकीदार भी बना दे तो निष्ठा से काम करूंगा

चंडीगढ़ हरियाणा में भाजपा विधायक दल का नेता नायब सिंह सैनी को चुन लिया गया है। इसके साथ ही उनका फिर से सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया है। वह गुरुवार को सुबह 10 बजे पंचकूला के दशहरा ग्राउंड में सीएम पद की शपथ लेंगे। उनके नाम का प्रस्ताव पार्टी के सीनियर नेता अनिल विज ने ही किया, जो चुनाव के बीच खुद को सीएम पद का दावेदार बता रहे थे। अब उनसे फिर यह सवाल पूछा गया तो अनिल विज ने कहा कि मेरी तो ऐसी कोई इच्छा ही नहीं थी। अनिल विज ने कहा, ‘कभी मैंने मन में रखा भी नहीं। पार्टी की ओर से कोई जिम्मेदारी मिलने पर अनिल विज ने कहा कि पार्टी मुझे चौकीदार बना देगी तो उस काम को भी मैं पूरी निष्ठा के साथ करूंगा।’ अनिल विज ने ही बुधवार को भाजपा विधायक दल की मीटिंग में नायब सिंह सैनी के नाम का प्रस्ताव रखा। अनिल विज के अलावा कृष्ण बेदी ने भी नायब सैनी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिस पर विधायकों ने ध्वनिमत से मुहर लगा दी। यह दृश्य दिलचस्प था क्योंकि अनिल विज ने चुनाव के बीच कहा था कि यदि भाजपा जीती तो इलेक्शन के बाद मुख्यमंत्री के तौर पर ही मुलाकात होगी। इसके बाद अब भाजपा नेतृत्व ने जब उनसे ही सैनी के नाम का प्रस्ताव रखवाया तो यह रोचक था। अनिल विज लगातार 7वीं बार अंबाला कैंट विधानसभा से चुने गए हैं। वह लंबे समय से खुद को सीएम पद का दावेदार बताते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साढ़े 9 साल के कार्यकाल में वह होम मिनिस्टर थे और ताकतवर थे। इसके बाद भी उनके खट्टर से रिश्ते सहज नहीं थे। वहीं जब सैनी को सीएम बनाया गया तो वह मंत्री पद की शपथ लेने ही नहीं पहुंचे। इसे उनकी नाराजगी के तौर पर देखा गया था, लेकिन बाद में उनके सुर थोड़े नरम पड़े थे। यही वजह थी कि वह पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े। हालांकि इलेक्शन कैंपेन के बीच ही उन्होंने खुद को सीएम का दावेदार बताकर हलचल पैदा कर दी थी।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा- हम सभी नौ सीटों पर लहराएंगे जीत का परचम

लखनऊ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश की नौ सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में भाजपा की जीत का दावा किया। उपमुख्यमंत्री ने कहा, “सभी नौ सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की जीत की घोषणा की गई है। यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरीब कल्याण योजनाओं के कारण संभव हुई है, जिन्होंने जन-जन का विश्वास जीत लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2017 से लेकर अब तक अनेक शानदार कार्य किए हैं, और मुख्यमंत्री जी की योजनाएं मोदी जी की योजनाओं के साथ मिलकर जनता तक पहुंची हैं। इससे लोगों का भरोसा भारतीय जनता पार्टी पर लगातार बढ़ा है।” उन्होंने कहा, “हाल ही में हरियाणा में विभिन्न प्रकार के दुष्प्रचार किए गए, लेकिन वे सफल नहीं हुए। आप देखेंगे कि नौ में से नौ सीटें भारतीय जनता पार्टी जीत रही है। चुनाव आयोग के निर्णय के अनुसार, मिल्कीपुर सीट के संबंध में न्यायालय में कुछ वाद चल रहा है, जिसके कारण कुछ निर्णय लिए गए हैं। संवैधानिक संस्थाओं पर प्रतिदिन सवाल उठाना सही नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “झारखंड और महाराष्ट्र में भी भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करेगी, जैसा कि हरियाणा में हुआ था। पूरे देश में मोदी जी की लहर चल रही है, और एग्जिट पोल भी यही संकेत देते हैं। आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जनता के बीच कोई नाराजगी नहीं है। इस प्रकार, भारतीय जनता पार्टी की जीत का क्रम जारी रहेगा और हम विश्वास से कह सकते हैं कि पार्टी पूरे देश में सफल होगी।” निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के साथ ही देशभर में होने जा रहे उपचुनाव की भी तारीखों का ऐलान कर दिया। 15 राज्यों की 48 विधानसभा सीटों और दो लोकसभा चुनाव सीटों पर उपचुनाव होंगे। इन लोकसभा सीटों में केरल की वायनाड और महाराष्ट्र की नांदेड़ लोकसभा सीट भी शामिल है।  

शपथ से पहले कश्मीर में पलट गई बाजी ! सरकार के साथ नहीं कांग्रेस

श्रीनगर  विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की जीत के बाद उमर अब्दुल्ला के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद के सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सुबह 11:30 बजे पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शपथ समारोह में शामिल होने के लिए I.N.D.I.A. गठबंधन को निमंत्रण भेजा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी श्रीनगर में मुख्यमंत्री पद के लिए नामित उमर अब्दुल्ला के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इधर शपथ ग्रहण समारोह से पहले जम्मू-कश्मीर के मनोनीत मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की मजार-ए-अनवर पर पुष्पांजलि अर्पित की। जिसमें 10 कैबिनेट मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है. इस आयोजन में कांग्रेस सहित INDIA ब्लॉक के कई दिग्गज शामिल होने वाले हैं. लेकिन आयोजन से पहले ही इस समारोह के रंग में भंग पड़ता दिखाई दे रहा है. दरअसल, पहले कहा जा रहा था कि जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के चीफ तारिक हमीद कर्रा भी इस कैबिनेट में शामिल होकर मंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन अब कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि आज उनकी पार्टी का कोई भी विधायक मंत्री पद की शपथ नहीं लेगा और पार्टी बाहर से समर्थन करने पर भी विचार कर रही है. जम्मू-कश्मीर के कांग्रेस प्रभारी भरत सिंह सोलंकी का कहना है कि फिलहाल नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के बीच बातचीत चल रही है. चर्चा पूरी होने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. बात पूरी न हो पाने के कारण आज कोई भी कांग्रेस विधायक शपथ नहीं लेगा. इस बात को लेकर भी चर्चा चल रही है कि कांग्रेस सरकार का हिस्सा रहेगी या फिर उसे बाहर से समर्थन करेगी. कांग्रेस के इस बयान से सियासी गलियारों में हलचल शुरू हो गई है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था और माना जा रहा था कि कांग्रेस भी इस सरकार का हिस्सा रहेगी. लेकिन आज शपथ ग्रहण से पहले कांग्रेस के ऐलान ने सभी को चौंका दिया है, क्योंकि कांग्रेस विधायक के शपथ न लेने का सीधा मतलब है कि फिलहाल कैबिनेट शेयरिंग को लेकर बात फाइनल नहीं हो सकी है और कांग्रेस के पास बाहर से समर्थन देने का विकल्प भी है ताकि किसी तरह का दबाव भी न रहे. NC-कांग्रेस गठबंधन को 48 सीटें बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने जीत हासिल की. 90 सीटों में से नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 और कांग्रेस ने 6 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं, बीजेपी 29 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही. महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी. ये है जम्मू-कश्मीर का नंबर गेम जम्मू कश्मीर विधानसभा की 90 सीटों के लिए चुनाव हुए थे और उपराज्यपाल की ओर से पांच विधायकों के मनोनयन को भी जोड़ लें तो सदन की स्ट्रेंथ 95 पहुंचती है. 10 फीसदी वाली कैप भी है, ऐसे में मंत्रिमंडल में सदस्यों की कुल संख्या 9.5 यानि अधिकतम 10 ही हो सकती है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के 42 विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं और चुनाव पूर्व गठबंधन में शामिल रही कांग्रेस के छह, सीपीएम के एक विधायक हैं. चुनाव पूर्व गठबंधन से ही 49 विधायक हैं और अब पांच निर्दलीय विधायकों ने भी उमर सरकार के समर्थन का ऐलान कर दिया है. आम आदमी पार्टी भी गिव एंड टेक के फॉर्मूले पर समर्थन ऑफर कर चुकी है.

निर्मला सप्रे का स्पष्टीकरण: विधानसभा अध्यक्ष को लिखित जवाब, कहा- ‘न मैंने कांग्रेस छोड़ी, न बीजेपी जॉइन की

भोपाल। मध्य प्रदेश की विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। निर्मला सप्रे ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखित में जवाब दिया है। निर्मला ने कहा कि न मैंने कांग्रेस छोड़ी है और न बीजेपी ज्वाइन की है। उनके इस बयान से प्रदेश की सियासत में हलचल मच गई है। दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान निर्मला सप्रे ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति में बीजेपी में शामिल हुई थी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। इसे लेकर उमंग सिंघार ने विधानसभा में आवेदन दिया था। विधानसभा सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष की याचिका पर निर्मला सप्रे को नोटिस जारी किया था। निर्मला सप्रे ने विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस का दो बार जवाब नहीं दिया था। नोटिस का जवाब नहीं देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने एक सप्ताह का समय दिया था। निर्मला ने 10 अक्टूबर को बंद लिफाफे में उत्तर भेजा। नेता प्रतिपक्ष की याचिका पर निर्मला सप्रे ने जवाब देते हुए कहा था कि मैंने दलबदल नहीं किया है। इस मामले की सुनवाई अब विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर 21 अक्टूबर को कर सकते हैं। स्पीकर कांग्रेस से दलबदल के सबूत पेश करने को कह सकते हैं।

शहजाद पूनावाला ने आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आरक्षण के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। शहजाद पूनावाला ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच में कांग्रेस पार्टी ने षड्यंत्र रच कर रंगनाथ मिश्रा रिपोर्ट में डाला था कि ओबीसी, एससी, एसटी समाज का आरक्षण छीन कर मुस्लिम वोट बैंक को देना है। कांग्रेस ने यह करने की शुरुआत भी की थी। यूपीए के जमाने में बिल भी बनाए जा रहे थे। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सलमान खुर्शीद ने आकर ऐलान भी किया था कि 27 फीसद ओबीसी आरक्षण से हम एक चंक काटकर मुस्लिम को धार्मिक आधार पर दे देने का काम करेंगे। कांग्रेस पार्टी ने जामिया और एएमयू में एससी, एसटी समाज के आरक्षण को भी खत्म करने का काम किया। केवल यही नहीं आज जब उनकी सरकार कर्नाटक में है तो वहां पर भी धार्मिक आधार पर आरक्षण की बातें करके कांग्रेस ओबीसी समाज के आरक्षण में सेंधमारी करके वो मुस्लिमों को देना चाहती है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में जब 77 ओबीसी जातियों में 75 ओबीसी जाति मुस्लिमों की जोड़ी गई तो उस पर भी एक शब्द नहीं बोला। हाईकोर्ट ने इसको स्ट्राइक डाउन किया। सुप्रीम कोर्ट में ये मामला गया, पर कांग्रेस जो ओबीसी-ओबीसी करती है वो एक भी बार ओबीसी समाज के अधिकार मारे जाने पर एक शब्द नहीं बोल पाती है, इसका मतलब साफ है कि कांग्रेस केवल ओबीसी का चोला पहनकर हिंदू समाज को बांटने के लिए आती है। शहजाद पूनावाला ने कहा कि मैं खुद मुस्लिम समाज से हूं और पसमांदा होने के नाते मुझे पता है कि मुस्लिम समाज में किस प्रकार का भेदभाव होता है। अशरफ समाज तो पसमांदा समाज को मस्जिदों में नहीं घुसने देता, साथ में बैठने नहीं देता, कई जगहों पर भारी भेदभाव होता है। राहुल गांधी और उनका इकोसिस्टम इन पिछड़े मुसलमानों के लिए इन पसमांदाओं के लिए कभी एक शब्द नहीं बोलता। उन्होंने पूछा कि यदि आप पिछड़ों के इतने बड़े हमनवा हैं तो कभी क्यों नहीं बोलते। केवल हिंदुओं को बांटो, मुस्लिम समाज में वोट बैंक जिहाद कराओ, यही इनका एक पूरा का पूरा लक्ष्य है।    

कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को बनाया उम्मीदवार, चुनाव आयोग द्वारा वायनाड लोकसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा

नई दिल्ली चुनाव आयोग द्वारा वायनाड लोकसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर प्रियंका गांधी वाड्रा की उम्मीदवारी घोषित कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केरल से लोकसभा और विधानसभा के उपचुनावों के लिए सदस्यों को पार्टी उम्मीदवार के रूप में नामित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इनमें केरल की वायनाड लोकसभा सीट से प्रियंका गांधी वाड्री को उम्मीदवार घोषित किया गया है तो वहीं केरल की पलक्कड़ विधानसभा सीट से राहुल ममकूटाथिल और चेलक्करा (SC) से राम्या हरिदास को उम्मीदवार बनाया है। बता दें कि केरल की वायनाड लोकसभा सीट और विभिन्न राज्यों की 47 विधानसभा सीट के लिए 13 नवंबर को उपचुनाव होगा। वहीं नतीजे 23 नवंबर को आएंगे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में वायनाड और रायबरेली सीट से जीत दर्ज की थी। राहुल गांधी ने वायनाड सीट खाली कर दी थी और रायबरेली सीट को बरकरार रखा था। इस सीट से राहुल गांधी की बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा पार्टी की उम्मीदवार बनाया गया है। अगर प्रियंका गांधी वाड्रा लोकसभा उपचुनाव जीत जाती हैं, तो गांधी परिवार के तीनों सदस्य पहली बार संसद में होंगे। राहुल गांधी द्वारा वायनाड सीट खाली करने के बाद ही कांग्रेस ने घोषणा कर दी थी कि प्रियंका गांधी वाड्रा वहां उपचुनाव लड़ेंगी। राहुल ने रायबरेली सीट इसलिए चुनी क्योंकि इस निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस का मजबूत इतिहास रहा है, जिसने 1977, 1996 और 1998 को छोड़कर सभी लोकसभा चुनाव जीते हैं। राहुल के दादा-दादी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी भी इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। रायबरेली में राहुल अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं। यह सीट पहले 2004 से 2019 तक सोनिया गांधी के पास थी। 2019 में राहुल ने अमेठी और वायनाड दोनों सीटों से चुनाव लड़ा, लेकिन केवल केरल की वायनाड में ही जीत हासिल की। सोनिया गांधी अब राज्यसभा सांसद हैं। प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने की संभावना के साथ, गांधी परिवार संसद में अपना प्रभाव मजबूत करना चाहेगा। इसके अलावा, वायनाड में प्रियंका की मौजूदगी से पार्टी को उम्मीद है कि वह जनता को एक रणनीतिक संदेश भेजकर उत्तरी और दक्षिणी दोनों क्षेत्रों में कांग्रेस की मौजूदगी का संकेत देगी।

मनोज पांडेय ने भाजपा पर लगया आरोप, बीजेपी नेताओं को एक दिन पहले ही चुनाव के इस ऐलान की जानकारी मिल गई थी

नई दिल्ली झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता मनोज पांडेय ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं को एक दिन पहले ही चुनाव के इस ऐलान की जानकारी मिल गई थी। इसके बाद पांडेय ने चुनाव आयोग को भाजपा की कठपुतली भी कहा। इस पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने मनोज पांडेय के बयान का समर्थन किया है। साथ ही उन्होंने ईवीएम से चुनाव पर निशाना साधा और साथ ही केरल विधानसभा द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के वापस लेने के अनुरोध का समर्थन किया। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “सवाल चुनाव की तारीखों का नहीं है। सवाल ईमानदारी का है। क्या महाराष्ट्र के अंदर ईमानदारी से चुनाव हुए? छत्तीसगढ़ चुनावों में तो भाजपा भी कहती थी कि कांग्रेस पार्टी की सरकार बन रही है। इसके बाद हमने मध्य प्रदेश और हरियाणा देखा है। हरियाणा में कांग्रेस सरकार बनने की बात सारे एग्जिट पोल कह रहे थे। कहां गड़बड़ हुई। जब तक ईवीएम से चुनाव होगा तब तक भाजपा को हराना मुश्किल है।” उन्होंने आगे कहा, “अगर इजरायल 600 किलोमीटर की दूरी से लेबनान के अंदर पेजर और वॉकी टॉकी के जरिए लोगों को मार सकता है। तो उसके सामने ईवीएम की क्या औकात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नेतन्याहू के बहुत अच्छे रिश्ते हैं। इजरायल इन सारे तकनीकी मामलों का एक्सपर्ट है। इसलिए विपक्ष को चाहिए दबाव बनाए कि इलेक्शन ईवीएम की बजाए मतपत्र से हों। अगर ईवीएम से चुनाव होगा तो मुझे शक है कि चुनाव ईमानदारी से नहीं होगा।” साथ ही उन्होंने केरल विधानसभा द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के वापस लेने के अनुरोध का समर्थन करते हुए कहा, “मैं केरल सरकार का धन्यवाद करता हूं। वक्फ बोर्ड की नौ लाख एकड़ से ज्यादा प्रॉपर्टी है। जिससे किसी दूसरे का कोई वास्ता नहीं है। ये मुसलमानों की प्रॉपर्टी है। भारत सरकार अपने मुस्लिम विरोधी रुख के चलते वक्फ के नियम को बदलकर इस प्रॉपर्टी को बदलना चाहती है। केरल सरकार ने विधानसभा में जो विधेयक पास किया है, मैं उसका समर्थन करता हूं।” इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के उस बयान पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि इन लोगों ने मुझे भी हल्के में लिया था, दाढ़ी को हल्के में मत लेना, दाढ़ी ने आपकी महाविकास अघाड़ी को गड्ढे में डालने का काम किया है। इस पर उन्होंने कहा कि देश में हर दाढ़ी वाला उनकी सरकार के विरोध में है। तो वह तो दाढ़ी वाले लोगों की बात न करें।

हरियाणा के चुनाव नतीजों के बाद चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक पार्टी में हड़कंप मचा हुआ, BJP ने कर दिया खेला

हरियाणा लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद जबरदस्त उत्साह से लबरेज नजर आ रही कांग्रेस को हरियाणा के चुनाव नतीजों ने सिर के बल खड़ा कर दिया है। पार्टी इस अप्रत्याशित हार को पचा नहीं पा रही। चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक पार्टी में हड़कंप मचा हुआ है। पूरे चुनाव अभियान में ड्राइविंग सीट पर नजर आने वाला हुड्डा खेमा जहां ईवीएम का राग अलापने में जुटा है। वहीं विरोधी सैलजा खेमा हार की हैट्रिक के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र सिंह हुड्डा को जिम्मेवार ठहरा रहा है। हरियाणा में जिस तरह कांग्रेस ने अपना पूरा प्रचार हुड्डा बाप-बेटे के ईद-गिर्द समेटे रखा। नतीजे के बाद अब दोनों की भूमिका सवालों के घेरे में है। पिछले दिनों दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर वरिष्ठ नेताओं की हुई बैठक में राहुल गांधी ने भी इस और संकेत करते हुए कहा था कि हरियाणा में लोगों ने निजी हित को पार्टी हित से ऊपर रखा। साफ है चुनाव से पहले जिन भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा की मीडिया में जमकर वाहवाही हो रही थी और एक नायक के रूप में उन्हें पेश किया जा रहा था, अब उनके किरदार को खलनायक की तरह देखा जाने लगा है। चुनाव नतीजों का गहनता से विश्लेषण करने पर भी पता चलता है कि दोनों कुछ ज्यादा ही अति आत्मविश्वास से लबरेज थे, जो दीपेंद्र हुड्डा बीजेपी के जीटी रोड बेल्ट में सेंध लगाने की रणनीति के तहत राहुल-प्रियंका गांधी के रोड शो कराए। उन्हीं देशवाली बेल्ट में बीजेपी ने खेल कर दिया और ऐसा तगड़ा नुकसान पहुंचाया जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं होगी, तो चलिए आंकड़ों में समझते हैं कि पूरे हरियाणा में कांग्रेस का माहौल बनाने निकले हुड्डा बाप-बेटे के गढ़ में ही बीजेपी ने कैसे खेल कर दिया। हरियाणा में रोहतक, झज्जर और सोनीपत को देशवाली बेल्ट कहा जाता है। इन तीनों जिलों में हुड्डा परिवार का जबरदस्त प्रभाव माना जाता है। इन तीनों जिलों में कुल 14 विधानसभा सीटें आती हैं, जहां इस बार कांग्रेस महज 8 सीटें ही हासिल कर पाई। 2019 में कांग्रेस के पास यहां 12 सीटें हुआ करती थी। देशवाली बेल्ट के तीन जिलों में अगर जाट बाहुल्य जींद, दादरी और भिवानी जिलों को जोड़ दें तो ये पूरा इलाका जाटलैंड के तौर जाना जाता है। जहां कुल 25 सीटें आती हैं। इस बेल्ट में कांग्रेस पारंपरिक रूप से मजबूत रही है और उसे जमकर वोट मिलते रहे हैं। अगर आप 2014 के चुनाव का ही उदाहरण लें तो इस चुनाव में 10 साल से सत्ता में बैठी कांग्रेस महज 15 सीटें पाकर तीसरे नंबर पर खिसक गई थी, यानी कि उसके पास मुख्य विपक्षी दल का दर्जा मिलने लायक सीटें भी नहीं मिल पाई थी। दिलचस्प ये है कि पूरे हरियाणा में 15 सीटें जीतने वाली कांग्रेस को अकेले 11 सीटें इसी जाटलैंड इलाके से मिली थी। 2019 में पार्टी यहां अपने खाते में एक और सीट जोड़ने में कामयाब रही। वहीं 2024 में जब प्रदेश में कांग्रेस की हवा चलने के दावे किए जा रहे थे। पार्टी के नेता यहां तक दावा करने में जुटे थे कि हुड्डा के सीएम फेस होने के कारण इस बार पार्टी यहां क्लीन स्वीप करेगी, लेकिन जब नतीजे आए तो दावे करने वालों की पैरों तले की जमीन खिसक गई। कांग्रेस पिछले दो चुनावों में हासिल की गई सीटें भी बरकरार नहीं रख सकी और उसे तगड़ा नुकसान हुआ। वहीं पारंपरिक रूप से इस इलाके में कमजोर मानी जाने वाली बीजेपी ने अब तक का शानदार प्रदर्शन करते हुए 13 सीटें हासिल कर ली, जबकि दो निर्दलीयों के खाते में गई। इनमें से एक कांग्रेस तो दूसरा बीजेपी के बागी था। दोनों भाजपा को अपना समर्थन दे चुके हैं। बीजेपी ने 2014 में यहां 8 और 2019 में महज सात सीट ही हासिल कर पाई थी। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सबसे मजबूत इलाका माने जाने वाले जाटलैंड में खराब प्रदर्शन ने सबसे तगड़ी ठेस हुड्डा परिवार के सियासी प्रतिष्ठा पर पहुंचाई है। नतीजे के बाद से भारी फजीहत का सामना कर रहे भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ईवीएम पर ठीकरा फोड़ अपना चेहरा बचाने की कोशिश में जुटे हैं। बहरहाल हरियाणा में मिली शर्मनाक हार के बाद क्या हुड्डा पिता-पुत्र का वैसा ही वर्चस्व बरकरार रहता है या फिर हाईकमान लंबे समय से किनारे चल रहे सैलजा-सुरजेवाला के गुट को आगे करता है या फिर शीर्ष नेतृत्व किसी तीसरे चेहरे के हाथों में जिम्मेदारी सौंपता है। इसके अलावा देखना ये भी दिलचस्प होगा कि चुनाव में पार्टी के पोस्टर ब्यॉय रहे भूपेंद्र हुड्डा के खिलाफ हाईकमान कोई कार्रवाई करने की जहमत उठाता है या नहीं।

हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल की बैठक18 अक्टूबर को हो सकती है, इस दौरान नेता प्रतिपक्ष भी बदला जा सकता है

चंडीगढ़ हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल की बैठक18 अक्टूबर को हो सकती है। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष भी बदला जा सकता है। इस रेस मे अशोक अरोड़ा,चंद्र मोहन,गीता भुक्कल में से किसी की भी लॉटरी निकल सकती है। एक दशक के लंबे अंतराल के बाद हरियाणा की सत्ता में वापसी का सपना टूट जाने के बाद कांग्रेस हाई कमान भी पार्टी की प्रदेश इकाई में जल्द ही बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में जुट गया है। जल्द होगा हरियाणा इकाई में फेरबदल ! कांग्रेस का 2005 का रिकॉर्ड तोड़ने का दवा करने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उदयभान और भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में हुए इस चुनाव में कांग्रेस को केवल  37 सीट ही मिलल पाई है। पार्टी हाई कमान की ओर से भी इस बार एक दशक के बाद हरियाणा की सत्ता में वापसी की पूरी उम्मीद जताई जा रही थी। यहीं कारण है कि टिकट वितरण में भी हाई कमान ने भूपेंद्र हुड्डा और उदयभान की पसंद का अधिक ध्यान रखा था। अब हरियाणा की सत्ता हाथ से जाने के बाद कांग्रेस में प्रदेश स्तर पर कईं प्रकार का बड़ा फेरबदल होने की अटकलें हैं। हुड्डा की बजाए किसी और को मिलेगा नेता प्रतिपक्ष का पद ! राजनीतिक जानकारों और कांग्रेस से जुड़े सूत्रों की माने तो इस बार कांग्रेस पार्टी की ओर से नेता प्रतिपक्ष का पद भूपेंद्र हुड्डा की बजाए किसी अन्य नेता को दिया जा सकता है। ऐसे में राहुल और प्रियंका गांधी की ओर से कांग्रेस के चुने गए विधायकों में उस नेता की पड़ताल भी शुरू कर दी गई है। चर्चा है कि थानेसर सीट से विधानसभा चुनाव जीते अशोक अरोड़ा को कांग्रेस आने वाले दिनों में नेता प्रतिपक्ष बना सकती है। अशोक अरोड़ा के नाम पर हुड्डा परिवार को भी आपत्ति नहीं होगी। बता दें कि अशोक अरोड़ा जब इनेलो छोड़कर कांग्रेस में आए तो उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नेतृत्व स्वीकार किया और आज तक वह कांग्रेस की गुटबाजी में हुड्डा के साथ हैं। पंजाबी चेहरा होने के कारण अशोक अरोड़ा को यह अहमियत दी जा सकती है। अशोक अरोड़ा अतीत में इनेलो के भी प्रदेशाध्यक्ष रहे है और पूरे हरियाणा मे इनकी पकड़ है। इसके अलावा हरियाणा में पूर्व मंत्री और विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा- भाजपा प्रदेश में हैट्रिक मारकर सरकार बना रही है तो, नेताओं की कड़ी मेहनत को एक बड़ा श्रेय है

चंडीगढ़ भारतीय जनता पार्टी का वह दौर जब पूरे प्रदेश में चुनिंदा व्यक्ति ही पार्टी का झंडा उठाते थे या यूं कहें कि भाजपा का कार्यकर्ता होना एक हंसी का पात्र होना होता था तो भी गलत नहीं होगा। उस वक्त रामविलास शर्मा, अनिल विज, ओमप्रकाश धनखड़ सरीखे कुछ नेता ही पार्टी के लिए समर्पित रूप से कार्यरत थे। आज अगर भाजपा प्रदेश में हैट्रिक मारकर सरकार बना रही है तो इसके पीछे इन नेताओं की तोड़ मेहनत को एक बड़ा श्रेय है। अब जब प्रदेश में तीसरी बार भाजपा सरकार बनी है तो सबसे अधिक खुशी भी इन्हीं नेताओं को हो रही है। इस महत्वपूर्ण समय पर जब ओमप्रकाश धनखड़ से बात की तो वह भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि हमने पार्टी के बीजरोपण का कार्य किया। हमने बंसीलाल – देवीलाल के साथ भी काम किया ओम प्रकाश चौटाला और चौधरी कुलदीप बिश्नोई के साथ भी मेहनत की। पहले पहले निर्णय लेने में हिस्सेदारी कम मिली लेकिन अब हम पूरी तरह से निर्णय लेने में आत्मनिर्भर हैं। पुराने दौर में हमारी मेहनत को देखकर लोग कहते थे कि आपकी सरकार कैसे बन पाएगी लेकिन हम धीरे-धीरे अपने आकार को विस्तार देते रहे। भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश धनखड़ ने इस तीसरी बार की जीत का श्रेय बूथ लेवल के हर कार्यकर्ता तथा केंद्रीय नेतृत्व को देते हुए कहा कि हमारी मैनेजमेंट की टीम धर्मेंद्र प्रधान, सतीश पूनिया जी समेत सभी साथियों ने बहुत तरीके से ऐसी रूपरेखा तैयार की कि भारतीय जनता पार्टी की तीसरी बार सरकार बन पाई है। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अपनी बेवकूफी से इन लोगों ने अपने मैच को खराब किया है। लोकसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस और हमने बराबर सीटें जीती। हम 10 से खिसक कर 5 पर आए थे। लेकिन उस वक्त भी मैंने कहा था कि हम फिर से सरकार बनाएंगे। हम सावधानी से खेलेंगे और मैच को जीतेंगे। हम सावधानी से खेलते गए और वह बेवकूफी करते रहे। नीरज शर्मा- शमशेर सिंह जोगी के बयान देखिए लोगों में बहुत गलत मैसेज गया। कुमारी शैलजा जैसी इतनी बड़ी नेता को किस प्रकार से नकारा गया, जनता इसे कैसे स्वीकार कर पाती। कांग्रेसी लीडरशिप में घमंड आ गया था। रोहतक झज्जर का क्षेत्र पहले भी कांग्रेस को समर्थन देकर पीछे रह गया था और इस बार भी वह पीछे रह गया है। उन्हें ईवीएम की बजाय अपने व्यवहार पर दोषारोपण करने की जरूरत है। धनखड़ ने कहा कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, माननीय गृहमंत्री अमित शाह व मोहन यादव जी हैट्रिक होने पर इस महत्वपूर्ण पल हिस्सा बनने के लिए आ रहे हैं यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। इसके साथ-साथ हमने हर बूथ से कार्यकर्ता को भी इस कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया है ताकि वह भी इस अनुकरनीय पल का हिस्सा बन पाए। धनखड़ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का मूल मंत्र है गुड गवर्नेंस यानि ओर बेहतरी की ओर। हमें जिस जिस प्रदेश में सरकार बनाने का मौका मिला गुड गवर्नेंस के साथ जनता के भलाई के लिए हमने कार्य किए हैं और नायब सैनी पिछले कुछ समय में जिस प्रकार से जनता की भलाई के लिए बड़े-बड़े फैसले लेकर गए अगले 5 सालों में आप ऐसे फैसले रोज देखेंगे।

शिवसेना के उद्धव गुट की ओर से पिछले दिनों एकनाथ शिंदे की दाढ़ी पर टिप्पणी की गई थी, एकनाथ शिंदे का उद्धव पर तंज

मुंबई महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से कई दिन पहले से ही नेताओं की जुबानी जंग तेज हो गई है। शिवसेना के उद्धव गुट की ओर से पिछले दिनों एकनाथ शिंदे की दाढ़ी पर टिप्पणी की गई थी। अब उस पर सीएम एकनाथ शिंदे ने जवाब दिया है। उन्होंने एक रैली में कहा कि इस दाढ़ी को हल्के में मत लेना। इसने ही महाविकास अघाड़ी की गाड़ी को पलटा दिया है। उन्होंने कहा कि हमने एक चलती हुई सरकार को टांग दिया। यह आसान बात नहीं है। इसके लिए एक साहस चाहिए होता है। इस दाढ़ी में ही वह साहस है और एक बार फिर से आप लोगों को पटकनी खानी होगी। एकनाथ शिंदे ने कहा, ‘इन लोगों को मेरी दाढ़ी से भी परेशानी है। लेकिन मैं आप लोगों को बता दूं कि महाविकास अघाड़ी को इस दाढ़ी ने ही बर्बाद किया है। अब महाराष्ट्र की विकास की गाड़ी आगे बढ़ रही है। इसलिए मुझे हल्के में मत लेना। मेरी दाढ़ी को भी हल्के में मत लेना।’ एकनाथ शिंदे ने कहा कि हमने राज्य में कई अटके हुए प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि अब मुंबई की सड़कों पर गड्ढे नहीं देखेंगे। भ्रष्टाचार खत्म हो चुका है और अब काम हो रहा है। ये लोग तो पैसों को खा जाते थे, लेकिन अब अस्पताल से लेकर सड़कों तक पर काम हो रहा है। इस दौरान एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे गुट को जवाब देते हुए कहा कि मैं पक्का शिवसैनिक हूं। मैं बालासाहेब ठाकरे और आनंद दीघे का सच्चा अनुयायी हूं। मैं भागने वाला आदमी नहीं हूं। मुझे कभी कमजोर मत समझना। एक सच्चा शिवसैनिक कभी मैदान नहीं छोड़ता और न ही कभी अपने विचारों से पीछे हटता है। आप लोग भाग निकले, लेकिन हम अब भी बालासाहेब के विचारों के साथ हैं। यही वजह है कि एकनाथ शिंदे जहां भी जाता है, वहां लोग खुले दिल से स्वागत करते हैं।

हरियाणा विधानसभा चुनावों में 13 महिला विधायक चुनी गई, 4 के सैनी कैबिनेट में शामिल होने के आसार

सोनीपत हरियाणा में बीजेपी ने सियासी हैट्रिक लगाते हुए तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी कर ली है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की नेतृत्व वाली नई सरकार का 17 अक्टूबर को शपथ ग्रहण समारोह होने वाला है. इस नई सरकार में चार महिला मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है. 2024 के विधानसभा चुनावों में 13 महिला विधायक चुनी गई हैं जिसमें से 5 बीजेपी की हैं. इसके अलावा हिसार से निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल ने भी बीजेपी को समर्थन दे दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, सावित्री जिंदल के अलावा अटेली से विधायक आरती राव, तोशाम से विधायक श्रुति चौधरी और राई से विधायक कृष्णा गहलावत कैबिनेट में शामिल होने की दौड़ में सबसे आगे हैं. सवित्री जिंदल ने हिसार सीट से जीता है चुनाव बीजेपी से टिकट न मिलने पर बागी हुई सवित्री जिंदल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर हिसार विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था. उन्होंने इस सीट पर कांग्रेस के रामनिवास रारा 18941 वोटों से मात दी. जिंदल को 49231 वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को 30290 वोट मिले थे. इसके अलावा बीजेपी के डॉ. कमल गुप्ता 17385 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे. प्रभावशाली बनिया समुदाय से आने वाली सावित्री के पति की 2005 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. इसके बाद 2005 में उन्होंने पहली बार उपचुनाव जीता थी. वे हुड्डा सरकार में 2 बार मंत्री भी रही. हिसार सीट पर उनका खासा प्रभाव माना जाता है. केंद्रीय मंत्री की बेटी हैं आरती राव अटेली से विधायक आरती राव केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत की बेटी हैं. उन्होंने अटेली सीट पर बसपा के अत्तर लाल को 3085 वोटों से मात दी थी. राव को 57737 वोट मिले थे. वहीं, बसपा प्रत्याशी को 54652 वोट मिले. इसके अलावा कांग्रेस की अनीता यादव 30037 वोटों के साथ तीसरे नंबर रही थी. आरती राव के पिता राव इंद्रजीत दक्षिण हरियाणा में एक प्रमुख प्रभावशाली ताकत रखते हैं. वे कई मौकों पर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी भी कर चुके हैं. ऐसे में आरती राव के लिए डिप्टी सीएम पद की मांग की जा रही है. हुड्डा के गढ़ में गहलावत ने जीता चुनाव वहीं राई विधानसभा सीट पर कृष्णा गहलावत ने जीत दर्ज की है. ये सीट पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ मानी जाती है. इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के जय भगवान अंतिल को 4673 वोटों से हराया है. गहलावत को 64614 वोटों मिले थे, तो वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को 59941 वोट मिले. जाट समुदाय से आने वाली कृष्णा गहलावत 1996 में बंसीलाल सरकार में मंत्री रह चुकी है. बीजेपी सोनीपत, रोहतक और झज्जर की जाट बेल्ट में अपना आधार बढ़ाने के लिए उन्हें कैबिनेट में जगह दे सकती है. श्रुति चौधरी का भाई से था मुकाबला तोशाम विधानसभा सीट पर बीजेपी से श्रुति चौधरी ने जीत दर्ज की है. इस सीट पर उनका मुकाबला अपने चचेरे भाई अनिरूद्ध चौधरी से था. श्रुति चौधरी से कांग्रेस के अनिरुद्ध चौधरी 14257 वोटों से मात दी. श्रुति चौधरी को 76414 वोट और अनिरूद्ध चौधरी को 62157 वोट मिले थे. भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से सांसद रही श्रुति चौधरी को इस बार कांग्रेस से टिकट नहीं मिला था. इसके बाद वे अपनी मां किरण चौधरी के साथ बीजेपी में शामिल हो गई. तोशाम पर बंसीलाल परिवार का खासा प्रभाव रहा है. इससे पहले किरण चौधरी इस सीट से लगातार जीत हासिल करती रही हैं. उन्हें अब राज्यसभा भेज दिया गया है. ऐसे में श्रुति चौधरी कैबिनेट में मंत्रीपद के मजबूत दावेदारी मानी जा रही है. 16 अक्टूबर को बीजेपी विधायक दल की बैठक हरियाणा में 16 अक्टूबर को बीजेपी विधायक दल की बैठक सुबह 10 बजे होने वाली है. ऑब्जर्वर के तौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह विधायकों के साथ बैठक करेंगे. 16 और 17 अक्टूबर को सभी बीजेपी विधायक चंडीगढ़ में ही मौजूद रहने वाले हैं. प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली की तरफ से इसको लेकर आदेश जारी किए गए है. इस बैठक में नायब सिंह सैनी को विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जिसके बाद राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा.

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