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बार-बार पिंपल्स को न करें नजरअंदाज! ये अंदरूनी दिक्कतों का बड़ा इशारा हो सकते हैं

अक्सर लोग एक्ने को सिर्फ त्वचा से जुड़ी समस्या मानते हैं और गंदगी से जोड़कर देखते हैं। इसलिए इस समस्या को दूर करने के लिए फेस वॉश और क्रीम की मदद लेते हैं, लेकिन अगर सही स्किन केयर के बावजूद एक्ने बार-बार लौट रहा है, तो समस्या शरीर के अंदर छिपी हो सकती है। अगर शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी हो या हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाए, तो भी इसका असर हमारी त्वचा पर एक्ने के रूप में नजर आ सकता है। आइए जानें बार-बार एक्ने होने के पीछे कौन-से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। किन वजहों से हो बार-बार लौट आते हैं एक्ने?     हार्मोनल इंबैलेंस- हार्मोनल इंबैलेंस एक्ने होने का सबसे बड़ा कारण है। शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ने से ऑयल ग्लैंड ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं, जिसके कारण पोर्स बंद हो जाते हैं। इसके कारण एक्ने होने की समस्या बढ़ जाती हैष     पीसीओएस- महिलाओं  में पीसीओएस या पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव अक्सर ठुड्डी और जॉलाइन पर एक्ने का कारण बनते हैं।     डाइट- खाने में ज्यादा मीठे और डेयरी प्रोडक्ट्स भी एक्ने की वजह बन सकते हैं। इन फूड आइटम्स से इंसुलिन स्पाइक होता है, जो एक्ने को बढ़ावा देता है।     तनाव और मानसिक सेहत- जब हम तनाव में होते हैं, तो शरीर कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करता है। इस हार्मोन के कारण त्वचा ज्यादा ऑयल प्रोड्यूस करता है। साथ ही, तनाव के कारण नींद पूरी नहीं होती, जिससे त्वचा को रिपेयर होने का समय नहीं मिलता और एक्ने की समस्या गंभीर हो जाती है। बचाव के लिए क्या करें? एक्ने से छुटकारा पाने के लिए सिर्फ स्किन केयर पर ध्यान देना काफी नहीं है। आपको अपनी लाइफस्टाइल और डाइट में भी कुछ सुधार करने होंगे।     डाइट- अपने खाने में से चीनी, मैदा और ऑयली चीजों की मात्रा कम करें। अगर आपको डेयरी प्रोडक्ट्स से भी एक्ने होता है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात करें। साथ ही, डाइट में ताजे फल और हरी सब्जियों को ज्यादा मात्रा में शामिल करें।     हाइड्रेशन- हर दिन कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं ताकि टॉक्सिन्स बाहर निकलें। स्किन को हाइड्रेटेड रखने के लिए भी भरपूर मात्रा में पानी पीना जरूरी है।       नींद- रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें ताकि हार्मोन बैलेंस बना रहे और तनाव भी कम हो।     सफाई- दिन में दो बार माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें और तकिए का कवर नियमित बदलें।     डॉक्टर से सलाह- अगर आपको बहुत ज्यादा एक्ने की समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लें। वे पीसीओएस या हार्मोनल इंबैलेंस की जांच कर सकते हैं और एक्ने के लिए आपको मेडिकेटेड क्रीम भी दे सकते हैं।  

क्या वजह है कि आज की युवा पीढ़ी रहती है लो फील? नई स्टडी का बड़ा खुलासा

ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि अवसाद के शिकार युवाओं के मस्तिष्क और रक्त कोशिकाएं एक असामान्य पैटर्न में काम करती हैं। शोधकर्ता रोजर वरेला के अनुसार, जब ये युवा आराम की स्थिति में होते हैं, तब उनकी कोशिकाएं बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा पैदा करती हैं। लेकिन, जब तनाव के समय या जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त ऊर्जा की मांग होती है, तो ये कोशिकाएं ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने में बुरी तरह संघर्ष करती हैं। इसी असंतुलन की वजह से अवसाद से ग्रसित युवाओं में लगातार थकान और प्रेरणा की कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कैसे हुआ यह बड़ा शोध? यह दिलचस्प शोध ‘जर्नल ट्रांसलेशनल सायकिएट्री’ में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने 18 से 25 वर्ष की आयु के 18 ऐसे युवाओं के मस्तिष्क स्कैन और रक्त के नमूनों का गहराई से अध्ययन किया जो अवसाद से पीड़ित थे। इसके बाद, उनके डेटा की तुलना उन स्वस्थ व्यक्तियों से की गई जिन्हें अवसाद नहीं था। शोध की मुख्य लेखिका और एसोसिएट प्रोफेसर सुसान्ना टाय ने बताया कि यह इतिहास में पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने अवसादग्रस्त युवाओं के मस्तिष्क और रक्तधारा में सीधे तौर पर थकान से जुड़े अणुओं के पैटर्न को ट्रैक किया है। लंबे समय की समस्याओं का मिलता है संकेत इस शोध से यह भी पता चलता है कि अवसाद की बीमारी के शुरुआती चरण में कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा काम कर रही होती हैं। यही अत्यधिक दबाव आगे लंबे समय तक चलने वाली समस्याओं का मुख्य कारण बन सकता है। लेखिका ने स्पष्ट किया कि ‘थकान’ प्रमुख अवसाद विकार का एक ऐसा आम लक्षण है जिसका इलाज करना सबसे ज्यादा मुश्किल होता है। भविष्य के लिए एक नई उम्मीद इस अध्ययन ने चिकित्सा जगत में एक नई उम्मीद जगाई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन नए निष्कर्षों की मदद से प्रमुख अवसाद विकार का पहले ही पता लगाया जा सकेगा। इसके अलावा, इससे संभावित रूप से अधिक लक्षित और हर मरीज की जरूरत के हिसाब से व्यक्तिगत उपचार तैयार करने के रास्ते खुलेंगे, जिससे लोगों को इस बीमारी से बाहर निकलने में सही मदद मिल सकेगी।  

जीवन की मुश्किलों में राह दिखाएंगी चाणक्य नीति: ऋण, शत्रु और रोग पर 10 जरूरी सूत्र

लाइफ में सक्सेज के साथ जीना बहुत ही मुश्किल होता है। कई बार हमें असफलता, निराशा और लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता है। कुछ मौके ऐसे आते हैं जब लोग बिना अपने विवेक का इस्तेमाल किए बड़ी मुसीबत में फंस जाते हैं। उन सारी समस्याओं से निकलने के लिए बड़ों की बातों पर अमल करना जरूरी है। जैसे चाणक्य नीति में कही गई ये 10 बातें, जो आपको लाइफ में केवल सक्सेज नहीं देंगी बल्कि दुश्मनों से बचने और सही-गलत के पहचान का फर्क भी सिखाएगी। ऋण, शत्रु और रोग को समाप्त कर देना चाहिए चाणक्य नीति की ये बात बहुत ही काम की है। अगर जीवन में सफलता और सुकून चाहिए तो कर्ज नहीं रखना चाहिए। शरीर के रोग को जड़ से खत्म करने का प्रयास करना चाहिए। नहीं तो ये बड़े दुख देते हैं। वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है इसका मतलब है कि अगर आप गलत और नीच प्रवृत्ति का इंसान किसी का भी बुरा कर सकता है। जैसे जंगल की आग चंदन की लकड़ी को भी नहीं छोड़ती। आपातकाल में स्नेह करने वाला ही मित्र होता है मुसीबत के समय जो आपके साथ बना रहे वहीं सच्चा दोस्त होता है। ऐसे इंसान की परख जरूर करनी चाहिए। जो धैर्यवान नहीं है, उसका न वर्तमान है न भविष्य इंसान को धैर्य रखना जरूर आना चाहिए। तभी आप लाइफ में सक्सेजफुल बनेंगे। एक बिगड़ैल गाय सौ कुत्तों से ज्यादा श्रेष्ठ है कहने का मतलब है कि सौ चापलूसी करने वाले लोगों से भला एक विपरीत स्वभाव का हितैषी है। कल के मोर से आज का कबूतर भला चाणक्य की नीति उन लोगों के लिए है जो कल के बेहतर में अपने आज को गंवा देते हैं। मतलब संतोष सबसे बड़ा धन है। आज जो भी है उसमे संतोष करना सीखें। कल क्या होगा इसके चक्कर में आज के पल को खराब ना करें। आग सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है। चाणक्य की ये नीति सिखाती है कि आप दुष्ट इंसान को कितना भी सम्मान देंगे वो आपका अहित ही करेगा। जैसे आग को सिर पर रखने पर भी वो जलाने का काम ही करेगी। भूख के समान कोई दूसरा शत्रु नहीं है चाणक्य नीति की इस लाइन का मतलब है कि भूख से बेबस होकर इंसान बड़े से बड़ा पाप कर सकता है। भूखा इंसान खुद का और दूसरों का सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है। विद्या ही निर्धन का धन है अगर आप गरीब हैं और पैसे कमाना चाहते हैं तो आपकी जानकारी और ज्ञान ही इस काम में सबसे ज्यादा मदद करेगी। इसलिए खुद को काबिल बनाने के लिए पढ़ना जरूरी है। संकट में बुद्धि ही काम आती है चाणक्य नीति में लिखी ये बात सिखाती है कि मुसीबत के समय सबसे पहले अपनी बुद्धि और विवेक पर भरोसा करें। बुद्धि की मदद से ही आप मुसीबत से बाहर निकल सकते हैं।  

WhatsApp में अब ऑटोमेटिक ट्रांसलेशन, iOS पर टेस्टिंग से चैटिंग होगी और भी सरल

मुंबई  WhatsApp पर चैटिंग करना और भी आसान होने जा रहा है, जिसमें यूजर्स आसानी से दूसरी भाषा में बात करने वाले लोगों से चैट कर पाएंगे. इसके लिए ऑटोमेट्रिक ट्रांसलेशन फीचर पर काम हो रहा है. इसकी जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है।  वॉट्सऐप के अपकमिंग फीचर को ट्रैक करने वाले पोर्टल Wabetainfo ने बताया है कि ऐपल के ऑपरेटिंग सिस्टम iOS प्लेटफॉर्म के लिए ऑटोमेटिक ट्रांसलेशन फीचर पर टेस्टिंग हो रही है।  ट्रांसलेशन फीचर के तहत यूजर्स  21 भाषाओं में से किसी एक का चुनाव करना होगा. इसके बाद अपनी लैंग्वेज के साथ उनको ट्रांसलेट कर सकेंगे. इसके लिए सिर्फ एक टॉगल को ऑन करना होगा, जिसकी जानकारी एक स्क्रीनशॉट्स शेयर करके भी दी है।  वॉट्सऐप का यह फीचर उन लोगों से चैट करने में मददगार साबित होगा, जो आपकी भाषा को नहीं जानते हैं और दूसरी लैंग्वेज में बातचीत करते हैं. उदाहरण के तौर पर समझें तो एक शख्स हिंदी बोलता, समझता और लिख सकता है, जबकि दूसरा शख्स हिंदी ना तो बोल सकता है, ना पढ़ सकता है और ना ही लिख सकता है. ऐसे में वॉट्सऐप उन यूजर्स के लिए यूजफुल साबित होगा।  रिपोर्ट में बताया है कि ट्रांसलेशन के बावजूद एंड टू एंड एनक्रिप्शन सुविधा को मेंटेन करके रखा जाएगा. वॉट्सऐप बीटा के iOS 26.11.10.70 वर्जन टेस्टिंग के लिए उपलब्ध है।  टेस्टिंग वर्जन से पता चला है WhatsApp ऑटोमेटिक ट्रांसलेशन फीचर पर काम कर रहा है, जो करीब 21 अलग-अलग लैंग्वेज को सपोर्ट करेगा. इसके लिए एक स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किया है।  WAbetainfo ने बताया है कि ट्रांसलेशन फीचर ऐसे काम करेगा।  स्क्रीनशॉट्स में दिखाया गया है कि यूजर्स को किसी एक शख्स का चैट ओपन करना होगा. फिर उसके अंदर दिए गए ट्रांसलेशन को ऑन करना होगा, जिसमें लैंग्वेज को सिलेक्ट भी करना होगा के कौन सी भाषा को किस भाषा में ट्रांसलेट करना है।  पॉपुलैरिटी को बनाए रखने के लिए देते हैं नए-नए फीचर्स  WhatsApp अपनी पॉपुलैरिटी को बनाए रखने के लिए लगातार ऐप में नए-नए फीचर्स को शामिल कर रहा है. साथ ही जो फीचर्स पहले से उनको बेहतर करने की दिशा में काम कर रहा है. इस मैसेजिंग ऐप पर एक सिंपल से यूजर इंटरफेस पर ढेरों फीचर्स मिलते हैं.  WhatsApp का iOS पर ऑटोमेटिक ट्रांसलेशन फीचर कितना कारगर साबित होगा, उसका पता तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा. हालांकि टेस्टिंग के बाद इसको स्टेबल वर्जन में कब जारी किया जाएगा, उसकी कोई टाइम लाइन नहीं दी है. 

इन फ्री एप्स से अपने एंड्रायड स्मार्टफोन को बनाएं सुरक्षित

एप्लीकेशन वह सॉफ्टवेयर हैं, जो आपके स्मार्टफोन की स्मार्टनेस को और बढ़ा देता हैं। आपके एंड्रायड फोन में आपकी प्राइवेसी से संबंधित बहुत सा डाटा होता है, जो अगर गलत हाथ में चला जाएं, तो बैठे-बिठाएं लेने के देने पड़ सकते हैं, ऐसे में जरूरी हो जाता है कि आप अपने एंड्रायड की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें। इस काम के लिए गूगल प्ले स्टोर पर बहुत से फ्री एप्स दिए गए हैं, इनकी हेल्प से आप अपनी एंड्रायड डिवाइस को प्रोटेक्ट कर सकते हैं, इनमें से तीन बेस्ट फ्री एंड्रायड प्रोटैक्शन ऐप्स के बारे में हम आज आपको बता रहे हैं.. परफेक्ट एप प्रोटैक्टर:- यह एप जैसा कि नाम से ही जाहिर है एप्लीकेशन्स को बहुत परफेक्ट तरीके से प्रोटेक्ट करता है। यह आपके सेलेक्टेड ऐप्स को एक पासवर्ड या पैटर्न के साथ लॉक करता है, स्क्रीन की ब्राइटनेस को कम करता है और जिन एप्स का आप चयन करते हैं उनके स्क्रीन रोटेशन को कंट्रोल करता है। इसका साइज 3.7एमबी है। एप्लीकेशन प्रोटेक्शन:- इस एप की उपयोगिता यह है कि इसकी मदद से आप अपने स्मार्टफोन पर डाटा और एप्लीकेशन्स को आसानी से एक पासकोड के साथ प्रोटेक्ट कर सकते हैं, ताकि अनआॅथराईजड यूजेस से बचाया जा सकें। इसका साइज 328केबी है। एप लाॅक:- इस हैंडी एप से आप अपने स्मार्टफोन में इंस्टॉल्ड एप्स को एक नंबर या फिर पैटर्न लॉक से प्रोटेक्ट कर सकते हैं। यह एक बहुउपयोगी एप है। इसके साथ आप इंस्टॉल और अनइंस्टॉल फंक्शन्स, इनकमिंग कॉल्स, सेटिंग्स, एप लॉक आइकन को छिपाना और दोबारा अनलॉक किए बिना शार्ट एक्जिट कर सकते हैं। इसका साइज 638 केबी है।  

समय के साथ चेकअप जरूरी है सेहत के लिए

अच्छा स्वास्थ्य सबकी चाहत होती है। बहुत से लोग स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए योगा, सैर, जिम, व्यायाम, तैराकी आदि नियमित रूप से करते रहते हैं। बहुत कम लोग ऐसे हैं जो अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक न हों। अच्छी सेहत बहुत बड़ी देन है। भगवान की इस देन को आगे बरकरार रखने के लिए हमें समय-समय पर डाक्टरों से सलाह लेते रहना चाहिए और उनके परामर्शानुसार अपनी जांच आदि करवाते रहना चाहिए ताकि बीमारी को अधिक पनपने से रोका जा सके। यदि जांच के दौरान शुरुआती लक्षण दिखायी दें और उनका समय रहते इलाज किया जाए ताकि आसानी से उस पर काबू पाया जा सके। इसलिए हम सबके लिए जरूरी है कि हम समय-समय पर अपनी जांच करवाते रहें। यह जांच नवजात शिशु के संसार में आते ही प्रारम्भ हो जाती है। बड़े नर्सिंग होम में तो बाल विशेषज्ञ होते हैं। जब भी डिलीवरी होती है तो वे बच्चे के शुरुआती लक्षणों से जांच लेते हैं कि सब ठीक ठाक है। डिलीवरी के समय बाल विशेषज्ञ उपलब्ध न हो तो बच्चे के पैदा होने के 2-3 दिन के भीतर बच्चे को डाक्टर के पास ले जायें। इस प्रकार महीना खत्म होने से पहले, फिर दूसरे, चैथे, छठे, नौवें और बारहवें महीने में बच्चे को बार विशेषज्ञ को दिखाने ले जाते रहें ताकि बच्चे की वृध्दि, टीकाकरण पर पूरा ध्यान रहे। कुछ असामान्य पर पूरा ध्यान रहे। कुछ असामान्य लक्षण होने पर समय रहते ध्यान दिया जा सके। दूसरे, तीसरे, चैथे साल में भी बच्चे को डाक्टर के पास ले जाते रहें। जब बच्चा थोड़ा और बड़ा होना शुरू होता है तब भी बच्चे को कम से कम साल में एक बार फिजिकल एग्जामिनेशन के लिए डाक्टर के पास ले जाएं ताकि बच्चों की लम्बाई व वजन आदि उम्र के हिसाब से ठीक है या नहीं और कुछ जरूरी टीकाकरण यदि आवश्यक हों तो लगवा लें। बच्चों की दांत, आंख, कान, प्लस व हार्ट रेट, ब्लडप्रेशर, मधुमेह और श्वास प्रक्रिया की जांच करवाएं, बच्चों का शारीरिक विकास उम्र के मुताबिक कम हो तो डाक्टर से सलाह लें। उम्र बढ़ाने के साथ-साथ शरीर में कई बदलाव आते रहते हैं जैसे किशोरावस्था में हार्मोनल चेंजेंस आदि। इस अवस्था में बच्चे में कई बदलाव आते हैं। इन मानसिक और शारीरिक बदलावों को डाक्टर बच्चे और माता-पिता को बताकर गलतफहमी को दूर करने में मदद करते हैं। जब शरीर का पूरा विकास हो जाता है तब भी कई समस्याएं आती हैं। छोटी-छोटी मुश्किलें तो शरीर आसानी से सह लेता है पर बिल्कुल नजरअंदाज करने पर छोटी मुश्किलें बड़ी हो जाती हैं। 40 वर्ष पश्चात् तो साल में एक बार कुछ चेकअप करवाते रहना चाहिए जैसे ब्लडप्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्राल, यूरिन अनालिसस, वजन, हीमोग्लोबिन, लीवर प्रोफाइल, लिपिड प्रोफाइल, चेस्ट एक्सरे, ईसीजी आदि करवाते रहना चाहिए। यदि कोई समस्या की शुरुआत हो तो समय पर इलाज परहेज कर उस पर काबू पाना आसान होता है। महिलाओं को 40 वर्ष बाद पेप स्मीअर, बोन डेंसिटी टेस्ट करवाने चाहिए। अल्ट्रासाउंड वगैरह आवश्यकता होने पर करवा लेना चाहिए। 60 वर्ष पश्चात् अपने स्वास्थ्य का पूरी तरह ध्यान रखना चाहिए। कोई भी तकलीफ महसूस होने पर डाक्टर से सलाह लें और लगकर इलाज करवायें। बड़ी आयु में व्यायाम भी डाक्टर की सलाह अनुसार करें। इस आयु में अपना लाइफस्टाइल एक्टिव रखें। आलस्य को दूर रखें। अपने काम स्वयं करें। योगाभ्यास और मेडिटेशन से तनावों पर काबू पायें।  

सावधान! परिवार की ये 4 बातें अगर बाहर गईं, तो हो सकता है भारी नुकसान!

हर फैमिली की कुछ प्राइवेट बातें होती हैं, जो घर की चारदीवारी तक ही रहें तो बेहतर होता है। लेकिन कई बार हम अपने पड़ोसी, रिश्तेदारों या दोस्तों के साथ इन्हें शेयर कर बैठते हैं। उस समय तो सिर्फ यही लगता है कि मन हल्का हो रहा है और शायद बात इतनी सीरियस भी नहीं है। लेकिन फिर बाद में यही बातें जब आपके खिलाफ काम करने लगती हैं, तब पछतावे के सिवा कुछ और बचता ही नहीं है। अगर जीवन में सफलता और सम्मान चाहिए तो एक बात गांठ बांध लें कि परिवार से जुड़ी कुछ बातें खुद तक ही रखें ताकि लोगों को आपके खिलाफ ताकत ना मिले। ऐसी ही कुछ 4 जरूरी बातें हैं जो अपने तक रखना बहुत जरूरी है, भले ही ये आपको नॉर्मल लगें लेकिन जरा सी चूक और लोग आपको जज करने में समय नहीं लगाते। आइए जानते हैं कौन सी वो बातें हैं। अपने परिवार की आर्थिक स्थिति कभी किसी को ना बताएं पहली और सबसे जरूरी बात है कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति किसी और के साथ साझा ना करें। चाहे घर की आर्थिक स्थिति मजबूत चल रही हो या कमजोर, दोनों ही बातें सिर्फ खुद तक रखनी चाहिए। इससे लोग आपके सामर्थ्य का गलत अनुमान लगा सकते हैं, जो आगे चलकर नुकसान का कारण बन सकता है। घर के अंदर होने वाले कलेश या विवाद अपना मन हल्का करने के लिए अगर आप भी बाहर वालों के साथ घर में चल रहे कलेश या विवाद शेयर कर देते हैं, तो ये आदत भारी पड़ सकती है। यही वो बातें हैं जो समय आने पर आपके खिलाफ काम कर सकती हैं और परिवार में फूट डालने का कारण भी बन सकती हैं। लोग आपके कलेश सुन तो लेते हैं और सामने से सहानुभूति भी दिखाते हैं, लेकिन पीठ पीछे अक्सर मजाक बनाते हैं और आपके लड़ाई-झगड़े उनके लिए सिर्फ एंटरटेनमेंट का एक सोर्स होते हैं। अपने परिवार की फ्यूचर प्लानिंग अगले कुछ सालों में घर खरीदना हो, बच्चों के करियर से जुड़ी कोई प्लानिंग हो या नया बिजनेस शुरू करना हो; परिवार से जुड़ी फ्यूचर प्लानिंग लोगों के साथ कभी शेयर नहीं करनी चाहिए। नजर लगने जैसी चीज भले ही अंधविश्वास हो लेकिन ये भी सच है कि हर कोई आपकी सफलता से खुश नहीं होता है। ज्यादा चर्चा से दबाव भी बढ़ता है और फिर असफल होने पर अक्सर लोगों के ताने और मजाक भी झेलने पड़ते हैं। इसलिए बेहतर रहेगा कि जब तक काम पूरा ना हो जाए, योजनाओं को अपने तक ही सीमित रखें। हर परिवार में कुछ ना कुछ कमजोरियां होती हैं, भले ही वह आर्थिक हों, भावनात्मक हों या फिर आपस के मतभेद हों। लेकिन इन कमजोरियों को कभी भी बाहर वालों के साथ शेयर नहीं करना चाहिए, भले भी वो आपके कितनी भी करीबी हों। ये बातें सामने आने से लोगों को आपके खिलाफ पावर मिलती है, जिसका लोग कभी भी फायदा उठा सकते हैं।

BenQ का नया मॉडर्न मीटिंग सॉल्यूशन, बिना सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए करें आसान स्क्रीन शेयरिंग

 नई दिल्ली मीटिंग से पहले अक्सर HDMI केबल लगाना, अलग-अलग सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना और सेटअप करना पड़ता था. इस परेशानी को दूर करने के लिए ताइवान की कंपनी BenQ ने भारतीय मार्केट में अपना नेक्स्ट-जेनरेशन InstaShow लाइनअप  WDC20 और WDC15 स्क्रीन मिररिंग डिवाइस लॉन्च किए हैं. इन डिवाइस की मदद से यूजर्स सिर्फ प्लग-एंड-प्ले के जरिए आसानी से स्क्रीन शेयर कर सकते हैं। WDC20 हाइब्रिड कॉन्फ्रेंसिंग का पावरहाउस इस प्रोडक्ट को खास तौर पर मॉडर्न हाइब्रिड मीटिंग्स के लिए डिजाइन किया गया है. इसका सबसे बड़ा फीचर BYOM (Bring Your Own Meeting) सपोर्ट है. यह एक प्लग-एंड-प्ले डिवाइस है, जिसमें किसी भी अतिरिक्त सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होती। इसके Wireless Media Bridge फीचर की मदद से आप अपने मीटिंग रूम के कैमरा, माइक्रोफोन और स्पीकर्स को मल्टीमीडिया हब से कनेक्ट कर सकते हैं. इसके बाद इन डिवाइस को Microsoft Teams या Zoom मीटिंग में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है, बिना बार-बार अलग-अलग डिवाइस प्लग करने की जरूरत के। परफॉर्मेंस की बात करें तो इसमें Wi-Fi 6 सपोर्ट मिलता है, जिससे 4K 60FPS तक का हाई-क्वालिटी प्लेबैक संभव है. इस डिवाइस की मदद से एक साथ 4 प्रेजेंटर स्क्रीन शेयर कर सकते हैं. साथ ही Talkback फीचर की मदद से लैपटॉप से इंटरैक्टिव डिस्प्ले को कंट्रोल भी किया जा सकता है। कीमत की बात करें तो यह डिवाइस लगभग ₹1,75,000 में उपलब्ध है और इसके साथ 3 साल की वारंटी मिलती है। । यह प्रोडक्ट BenQ के पॉपुलर वायरलेस प्रेजेंटेशन सिस्टम का एक रिफ्रेश्ड वर्जन है. यह खास तौर पर छोटे मीटिंग रूम्स के लिए परफेक्ट माना जाता है। इसमें भी प्लग-एंड-प्ले फीचर मिलता है. यूजर्स को बस डिवाइस को अपने लैपटॉप में प्लग करना है और तुरंत स्क्रीन शेयरिंग शुरू हो जाती है. इसमें किसी भी एक्सटर्नल सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं पड़ती। यह एक सिक्योर और स्टेबल डिवाइस है, जो बजट सेगमेंट में होने के बावजूद एंटरप्राइज-ग्रेड सिक्योरिटी के साथ आता है. इसमें WPA3 और CVSS 4.0 जैसे सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन मिलते हैं। इसके साथ स्विचेबल प्लग्स (HDMI + USB + USB-C) मिलते हैं, जिससे इसे पुराने और नए दोनों तरह के लैपटॉप्स के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी कीमत लगभग ₹75,000 रखी गई है और इसके साथ 1 साल की वारंटी मिलती है । कुल मिलाकर, BenQ के ये नए InstaShow डिवाइस मीटिंग से पहले होने वाली तकनीकी परेशानियों को काफी हद तक खत्म कर सकते हैं. अब यूजर्स सिर्फ प्लग-एंड-प्ले के जरिए आसानी से अपनी मीटिंग शुरू कर सकते हैं।

ट्रेंड नहीं, सेहत चुनें—आंखों पर सोच-समझकर पहनें चश्मा

आंखों की रोशनी धूमिल होने या किसी अन्य प्रकार की समस्या होने पर विशेषज्ञ चश्मा या लेंस लगाने की सलाह देते हैं। कई लोगों को तेज धूप की वजह से भी आंखों से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं, ऐसे में अच्छी गुणवत्ता वाले सनग्लासेस लगाने की जरूरत होती है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि लोग फैशन में भी यह फिर आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए भी तरह-तरह के लेंसेस या फिर कोई भी सनग्लास आंखों पर लगा लेते हैं। इससे फैशनेबल दिखने का उद्देश्य तो पूरा हो जाता है लेकिन आंखों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। डेकोरेटिव लेंसेस होते हैं खतरनाक… आंखों के कलर को बदलने के लिए कॉस्मैटिक उद्देश्य से लगाए जाने वाले लेंसेस आंखों के लिए नुकसादायक होते हैं। इन्हें नियमित रूप से लगाने से आंखें स्थाई रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। इन्फेक्शन: कॉन्टैक्ट लेंस लगाने से सबसे सामान्य प्रकार का इन्फेक्शन कैराटिटिस कहलाता है। लेंसेस को बिना साफ किए लगातार लगाए रहने से भी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। किसी और का कॉन्टैक्ट लेंस लगाने या किसी और को अपना कॉन्टैक्ट लेंस लगाने देने से आई इन्फेक्शन की समस्या को बढ़ावा मिलता है। कॉर्नियल इन्फेक्शन वायरल, बैक्टीरियल या पैरासिटिक हो सकता है। स्वीमिंग करने के दौरान कलर्ड कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से या उसे धोने से भी आंखों का इन्फेक्शन हो सकता है। ये होते हैं लक्षण: आंखों के इन्फेक्शन के प्रमुख लक्षणों में आंखों का लाल होना, लगातार आंसू बहना, धुंधलापन, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता। कैराटिटिस की परेशानी बढ़ने पर इन्फेक्शन की गंभीर समस्या हो सकती है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके लक्षणों के लिए अपने डॉक्टर से मिलें। कॉर्नियल अल्सर: यदि कॉर्नियल इन्फेक्शन को बिना इलाज के छोड़ दिया जाए तो अल्सर की समस्या हो सकती है, जो कि कॉर्निया में अत्यधिक सूजन पैदा कर सकता है। खो जाती है आंखों की रोशनी: कलरफुल कॉन्टैक्ट लेंसेस के कारण आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है या अंधापन भी हो सकता है। कॉर्नियल अल्सर के कारण होने वाली क्षति आंखों को स्थाई रूप से खराब कर सकती है। यदि इन्फेक्शन को बढ़ने के लिए छोड़ दिया जाए तो अल्सर के कारण आंखों के कई हिस्सों में छेद जैसे बन जाते हैं। सस्ते चश्मे आंखों के दुश्मन… गर्मी के दिनों में या फिर धूप की तेज किरणों से बचने के लिए सनग्लासेस लगाते हैं लेकिन उसकी क्वालिटी से समझौता कर लेते हैं। सड़क किनारे मिलने वाले या खराब क्वालिटी वाले सनग्लासेस लगाने से आंखों से जुड़े कई सारे इन्फेक्शन और रिफ्रेक्टिव एरर हो जाती है। इस प्रकार के सनग्लासेस लगाने से आंखों में खुजली, पानी निकलना, धुंधलापन, सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक लेंस वाले विभिन्न रिफ्रेक्टिव इंडेक्स वाले, असमान ग्लास कलर वाले सनग्लासेस जो सस्ते कीमतों पर उपलब्ध होते है, इन्हें लगातार पहने रहने से आंखों से जुड़ी कई सारी परेशानियां और मायोपिया की समस्या हो सकती है। इस प्रकार के चश्मे आमतौर पर ग्लास या फाइबर से बने होते हैं, खराब क्वालिटी के सनग्लासेस से रंगों को ना पहचान पाने की परेशानी पैदा हो सकती है।  

नवरात्र फास्टिंग के दौरान बढ़ सकता है BP-शुगर! जानिए कैसे रखें इसे संतुलित

नवरात्र केवल आस्था और आध्यात्मिक साधना का पर्व नहीं है, बल्कि यह शरीर को हल्का और शुद्ध करने का भी अवसर होता है। बहुत से लोग पूरे नवरात्र व्रत रखते हैं, लेकिन अक्सर व्रत के दौरान तली-भुनी चीजें या मिठाई वाली या फिर अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट ले लेते हैं। इससे हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अगर व्रत के दौरान हमारा आहार संतुलित रहे तो यह बहुत लाभकारी होता है। व्रत में पोषण का महत्व मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली में सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट व चीफ डायबिटीज एजुकेटर में डॉ. शुभदा भनोत बताती हैं कि उपवास के दौरान शरीर को ऊर्जा, प्रोटीन, फाइबर, विटामिंस और खनिजों की आवश्यकता बनी रहती है। व्रत के दौरान अगर आप केवल आलू, साबूदाना या तली हुई चीजों पर निर्भर रहेंगे, तो ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) तेजी से बढ़ और घट सकता है, जिससे कमजोरी, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए व्रत के आहार में संतुलन रखना जरूरी है। व्रत में क्या खाएं प्रोटीन युक्त आहार शामिल करें व्रत के दौरान अक्सर प्रोटीन की कमी हो जाती है। इसकी पूर्ति के लिए पनीर, दही, दूध, मूंगफली, कुट्टू, राजगीरा और मखाने अच्छे विकल्प हैं। ये लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं और ऊर्जा का स्तर भी बनाए रखते हैं। सेहत के लिए आपकी कुंडली क्या कहती है — जानें बिल्कुल मुफ्त फल और सब्जियों का सेवन बढ़ाएं मौसमी फलों और सब्जियों के साथ ही सेब, पपीता, अमरूद, नारियल पानी, खीरा और टमाटर आदि शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और आवश्यक विटामिंस और मिनरल्स प्रदान करते हैं। स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट चुनें साबूदाना या आलू के अलावा कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और राजगीरा बेहतर विकल्प हैं। इनमें फाइबर अधिक होता है। इनसे शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा मिलती रहती है। स्वस्थ वसा का सेवन भीगे हुए बादाम, अखरोट, कद्दू और सूरजमुखी के बीज ऊर्जा और अच्छे फैट प्रदान करते हैं। ये हार्मोन संतुलन और हृदय के लिए भी लाभकारी हैं। पर्याप्त पानी पिएं व्रत के दौरान पानी, छाछ, दही और नींबू पानी का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखता है साथ ही थकान से भी बचाता है। व्रत में किन चीजों से बचें      अत्यधिक तले हुए पकवान जैसे साबूदाना वड़ा, व्रत वाली पकौड़ी आदि     अधिक मिठाई या मीठे पेय     सेंधा नमक का अधिक सेवन     लंबे समय तक भूखे रहना और फिर बहुत अधिक खाना डायबिटीज वाले बरतें सावधानी जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें व्रत रखते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। व्रत रखने से पहले अपने डाक्टर की सलाह से इंसुलिन/टैबलेट के डोज के बारे में बदलाव की जानकारी लें। लंबे समय तक एकदम खाली पेट न रहें। हर दो-तीन घंटे में थोड़ी मात्रा में फल, मखाना, भुने हुए नट्स, दही, छाछ या समा के चावल/राजगिरा जैसी हल्की चीजें लेते रहें। बहुत मीठे फल (अधिक पके केले, चीकू, अंगूर आदि) और अधिक शक्कर, गुड़ या तले हुए साबूदाने से बचें। इनकी जगह पपीता, सेब, अमरूद, नारियल पानी जैसे विकल्प लें। खाने की प्लेट में हमेशा फाइबर और प्रोटीन का संयोजन रखें, जैसे समा के चावल की थोड़ी मात्रा में रायता, सलाद लें, ताकि ब्लड शुगर बढ़े नहीं। दिन में तीन-चार बार ब्लड शुगर मानिटर करें। खासकर चक्कर आना, अधिक पसीना, घबराहट, धड़कन तेज होना या अधिक कमजोरी महसूस हो तो तुरंत कुछ खा लें और शीघ्र ही डाक्टर से संपर्क करें। अगर ब्लड प्रेशर हाइ रहता है अगर आपका ब्लड प्रेशर हाइ रहता है तो सेंधा नमक का सीमित मात्रा में सेवन करें। व्रत में अनजाने में ही शरीर में नमक अधिक मात्रा में पहुंच जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। नमक की मात्रा का ध्यान रखते हुए तले हुए खाद्य पदार्थ भी कम लें। व्रत करने से पहले ब्लड प्रेशर की नियमित दवाएं कैसे लेनी हैं, यह अपने चिकित्सक से स्पष्ट कर लें, दवा बिना पूछे न छोड़ें। बहुत तला हुआ, ज्यादा घी-तेल वाला और पैकेज्ड नमकीन (उपवास चिप्स, फराली मिक्स आदि) कम से कम खाएं, उबली, ग्रिल्ड या हल्की तली हुई चीजें बेहतर हैं। पानी, नारियल पानी, छाछ, नींबू-पानी (कम नमक/शक्कर के साथ) जैसे तरल पर्याप्त मात्रा में लें ताकि डिहाइड्रेशन के कारण बीपी अचानक न गिरे या बढ़े। दिन में कम से कम दो बार बीपी जांचें, सिरदर्द, चक्कर, सांस फूलना, सीने में दर्द, टांगों में सूजन या बहुत थकान हो तो तुरंत आराम करें और मेडिकल मदद लें। देर रात भारी भोजन न करें; रात में हल्का, प्रोटीन और फाइबर युक्त खाना लें ताकि नींद अच्छी रहे और शुगर-बीपी संतुलित रहे। हल्की वाक, प्राणायाम, ध्यान जैसे शारीरिक गतिविधियां बहुत फायदेमंद होती हैं। भारी कसरत या धूप में अधिक देर तक खाली पेट न रहें।  

गर्मियों में कूल नींद का फॉर्मूला! एक्सपर्ट ने बताए सुकून भरी नींद के असरदार उपाय

मौसम में बदलाव का असर नींद पर पड़ता है। ऐसा देखा गया है कि गर्मी में लोग सर्दी के मुकाबले कम सोते हैं और इसका सीधा असर उनकी दिनचर्या पर होता है। आखिर क्यों गर्मी में नींद कम होती है और कैसे पाएं सुकून की नींद, बता रहे हैं एक्सपर्ट… गर्मी में स्लीप साइकल में परिवर्तन और तापमान बढ़ने के कारण नींद कम आती है। लंबे समय तक रोशनी रहने से नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन में बाधा आती है, जिससे सोने और उठने का शरीर का प्राकृतिक चक्र प्रभावित होता है। स्वास्थ्य के लिए सात से आठ घंटे की नींद जरूरी है। ऐसे में नींद पूरी न होने पर कई लोगों को मानसिक तनाव, थकान व चिड़चिड़ेपन की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गर्मी में होती है कम नींद गर्मी में नींद कम होना किसी बीमारी का संकेत नहीं है। दरअसल, गर्मी में दिन लंबे और रात छोटी होती हैं और अंधेरा होने के बाद ही मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन शुरू होता है। चूंकि अंधेरा देर से होता है, इसलिए रात हार्मोन कम बनने से नींद कम हो जाती है। सेहत के लिए आपकी कुंडली क्या कहती है — जानें बिल्कुल मुफ्त क्या कहती है स्टडी? बर्लिन में सेंट हेडविग हास्पिटल में नींद पर हुई स्टडी बताती है कि नींद का पैटर्न सकैंडियन रिदम (जैविक घड़ी) के हिसाब से बदलता है। जो शरीर में 24 घंटे सूरज के हिसाब से चलती है। कैसे पाएं गुणवत्ता वाली नींद?     प्राकृतिक धूप लें और शारीरिक गतिविधियां करें।     सही समय पर सोने-जागने का अभ्यास करें।     सोते समय कमरा ठंडा और शांत हो। कमरे में अंधेरा हो।     सोने जाने से पहले चाय- कॉफी न पिएं।     बिस्तर पर जाने से एक घंटे पहले मोबाइल से दूरी बना लें।     सोने से पहले नहा लें और आराम के लिए सूती कपड़े पहनें।     जब सोने का वक्त हो तभी बिस्तर पर जाएं, उससे पहले नहीं।     रात में ज्यादा भारी खाना खाकर सोने से परहेज करें। बदलता मौसम बिगाड़ रहा है आपकी ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ यह सच है कि मौसम में बदलाव और सूर्योदय सूर्यास्त के समय में परिवर्तन नींद पर असर जरूर डालते हैं, क्योंकि मानव शरीर की जैविक घड़ी सूरज के हिसाब से थोड़ा आगे-पीछे हो सकती है। इसलिए गर्मी में लोग देर से सोने के बावजूद जल्दी उठ जाते हैं और नींद पूरी नहीं हो पाती है। इसलिए बहुत जरूरी है कि रात की अच्छी नींद के लिए दिन मैं अपनी गतिविधियों पर ध्यान रखें। अगर आपकी दिनचर्या सही रहेगी तो रात की नींद भी पर्याप्त होगी। दरअसल, मानसिक स्वास्थ्य के बहुत जरूरी है। लाइफस्टाइल बनी नींद की दुश्मन आजकल लोगों की बदलती लाइफस्टाइल भी नींद की दुश्मन बन गई है। कई लोग ऐसे हैं, जो देर रात तक आफिस का काम करते हैं, लेकिन सुबह उन्हें जल्दी उठना पड़ता है। ऐसे में नींद पूरी नहीं होती और पूरे दिन थकान लगती है। कई लोग ऐसे हैं, जो देर रात तक मोबाइल देखते हैं, लेकिन सुबह काम की वजह से जल्दी उठना होता है। ऐसे लोगों की नींद भी पूरी नहीं होती और फिर मानसिक तनाव बढ़ने लगता है।  

जीवन में धोखा न खाएं! नित्यानंद चरण दास की सलाह—इन 6 लोगों पर कभी भरोसा न करें

जीवन में सही लोगों की संगति आपको आगे बढ़ाती है, जबकि गलत संगति भीतर से कमजोर कर देती है। नित्यानंद चरण दास बताते हैं कि किन 6 तरह के लोगों से दूरी बनाकर रखना ही आत्मरक्षा है। जीवन हो या अध्यात्म- संगति का प्रभाव सबसे गहरा होता है। जिन लोगों के साथ हम रोज उठते-बैठते हैं, उनकी सोच, आदतें और ऊर्जा धीरे-धीरे हमारी अपनी बन जाती हैं। अगर आपकी संगति आपको प्रेरित करने के बजाय थका रही है, आत्मविश्वास कम कर रही है या मानसिक शांति छीन रही है, तो यह एक बड़ी चेतावनी हो सकती है। प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता और इस्कॉन साउथ मुंबई के संयोजक Nityanand Charan Das कहते हैं कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ सही रास्ता नहीं, बल्कि सही लोग भी जरूरी होते हैं। उनके अनुसार, कुछ लोगों से दूरी बनाना नकारात्मकता नहीं, बल्कि स्वयं की रक्षा करना है। उनके अनुसार, इन 6 तरह के लोगों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए- जो दूसरों की चुगली करता है जो व्यक्ति आपकी मौजूदगी में किसी तीसरे की बुराई करता है, वह भरोसे के काबिल नहीं होता। चुगली करने वाला इंसान रिश्तों को सच नहीं, मसाले से चलाता है। ऐसे लोग ना तो सच्चे दोस्त होते हैं और ना ही वफादार साथी। आज आप उनके सामने हैं, इसलिए आप सुरक्षित हैं- लेकिन जैसे ही आप पीछे मुड़ेंगे, वही बातें आपके बारे में कही जाएंगी। यह आदत व्यक्ति की सोच और नैतिकता को दर्शाती है। जो जरूरत से ज्यादा मीठा बोलता है अत्यधिक तारीफ, बनावटी अपनापन और हर बात में “आप ही सबसे अच्छे हैं” कहना अक्सर किसी स्वार्थ का संकेत होता है। सच्चे रिश्तों में ईमानदारी होती है, चापलूसी नहीं। ऐसे लोग तब तक मीठे रहते हैं, जब तक उन्हें आपसे कुछ चाहिए। काम निकलते ही उनका व्यवहार बदल जाता है। जो कभी अपनी गलती नहीं मानता जो इंसान हर परिस्थिति में खुद को सही साबित करता है और दोष हमेशा दूसरों पर डालता है, वह रिश्तों में जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। ऐसे लोगों के साथ विवाद कभी सुलझते नहीं, क्योंकि वे आत्ममंथन करना ही नहीं जानते। जहां गलती मानने की क्षमता नहीं, वहां सुधार और भरोसे की भी कोई जगह नहीं। जो ताकतवर लोगों के सामने व्यवहार बदल ले जो व्यक्ति पद, पैसे या पावर देखकर झुक जाता है और आम लोगों को नजरंदाज करता है, वह स्थिर चरित्र वाला नहीं होता। ऐसे लोग रिश्तों को इंसान से नहीं, फायदे से जोड़कर देखते हैं। आज आप उपयोगी हैं, इसलिए आप महत्वपूर्ण हैं- कल कोई और ज्यादा प्रभावशाली मिला, तो आप पीछे छूट जाएंगे। जो किसी के दर्द पर हंसता है जिस इंसान में करुणा और संवेदना नहीं होती, वह कभी सच्चा सहारा नहीं बन सकता। किसी के दुख में मजाक उड़ाना या उसे कमजोरी समझना दर्शाता है कि उस व्यक्ति में समानुभूति (empathy) की कमी है। नित्यानंद चरण दास के अनुसार, जहां एक बार संवेदना नहीं दिखी, वहां आगे भी उम्मीद रखना व्यर्थ है। जो राज नहीं रख सकता जो व्यक्ति दूसरों की निजी बातें, रहस्य या विश्वास को हल्के में लेता है, वह भरोसे के लायक नहीं होता। अगर कोई किसी तीसरे का राज आपके साथ शेयर कर रहा है, तो याद रखें- आपका नंबर भी आएगा। विश्वास एक बार टूटा तो रिश्ते हमेशा के लिए कमजोर हो जाते हैं।  

गूगल का ‘जीरो डे’ अलर्ट, 3.5 अरब लोग खतरे में, तुरंत करें यह कदम

नई दिल्ली टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी Google का क्रोम ब्राउजर दुनियाभर में पॉपुलर है और भारत समेत दुनियाभर में इसके 3.5 अरब से ज्यादा यूजर हैं. अब अधिकतर यूजर्स पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जो असल में दो कमजोरियों हैं, जिनको गूगल ने जीरो डे कैटेगरी की कमजोरियों में रखा है. हैकर्स इनका फायदा उठाकर क्रोम ब्राउजर यूजर्स को शिकार बना सकते हैं. ये जानकारी फॉर्ब्स ने अपनी रिपोर्ट में दी है। खतरे को भांपते हुए क्रोम की तरफ से इमरजेंसी सिक्योरिटी अपडेट जारी किया है और यूजर्स को तुरंत ब्राउजर को अपडेट करने की जानकारी शेयर की है. ब्राउजर को अपडेट करने के बाद यूजर्स अपने डिवाइस और डेटा को सुरक्षित कर सकते हैं। वल्नरेबिलिटी को लेकर ज्यादा डिटेल्स नहीं दी वल्नरेबिलिटी को लेकर अभी बहुत ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. कंपनी का मानना है कि जब तक अधिकतर यूजर्स लेटेस्ट अपडेट के साथ ब्राउजर की कमजोरियों को फिक्स नहीं कर लेते हैं तब तक इनकी डिटेल्स को सीमित रखा जाएगा, जिससे हैकर्स इनका फायदा ना उठा सकें. इन कमजोरियों को CVE-2026-3909 और CVE-2026-3910 के नाम से ट्रैक किया जा रहा है। क्यों ब्राउजर्स को निशाना बना रहे हैं हैंकर्स ?  इंटरनेट यूजर्स किसी भी इंफॉर्मेशन को सर्च करने के लिए ब्राउजर पर ही सर्चिंग करते हैं. हर एक स्मार्टफोन और पीसी यूजर्स के पास ब्राउजर होता है, जिसमें क्रोम सबसे ज्यादा मार्केट शेयर वाला ब्राउजर है. ऐसे में हैकर्स ब्राउजर को निशाना बनाते हैं ताकि वह यूजर्स कि डिटेल्स को आसानी से हैकर कर सकें। यहां एक पुरानी रिपोर्ट के बारे में बताते हैं, Omdia की 2025 की रिपोर्ट है, जो Palo Alto Networks के लिए तैयार की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में 95 परसेंट ऑर्गनाइजेसन को एक ऐसा साइबर सिक्योरिटी का सामना करना पड़ा, जिसकी शुरुआत कर्मचारियों के कंप्यूटर से हुई थी। ब्राउजर हैकिंग पर साइबर एक्सपर्ट का क्या कहना ब्राउजर हैकिंग को लेकर साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि अब हैकर्स सीधा ब्राउजर को निशाना बनाते हैं. इसमें हैकर्स चोरी हुए टोकन के जरिए सेशन हाइजेकिंग और ऐसे एजवांस्ड एडवांस्ड फिशिंग अटैक शामिल हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन को भी बायपास कर सकते हैं।  

AC खरीदने का सही मौका! Flipkart-Amazon पर 1.5 टन AC पर तगड़ी छूट, Voltas और Godrej की डील्स हिट

नई दिल्ली गर्मी का मौसम शुरू होने ही वाला है और अब एयर कंडीशनर की डिमांड भी तेजी से बढ़ने वाली है। ऐसे में अगर आप भी अपने घर या ऑफिस के लिए नया 1.5 टन AC खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह टाइम आपके लिए सबसे अच्छा हो सकता है। दरअसल, Flipkart और Amazon इस समय कई ब्रांडेड एयर कंडीशनर पर बड़ी छूट दे रहे हैं। इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर Voltas, Godrej और Lloyd जैसे पॉपुलर ब्रांड्स के 1.5 टन AC पर भारी डिस्काउंट, बैंक ऑफर और एक्सचेंज डील मिल रही हैं। कुछ मॉडल्स पर हजारों रुपये तक की कीमत कम हो गई है, जिससे आप काफी ज्यादा कम बजट में बेहतर कूलिंग वाला AC खरीद सकते हैं। आइए जानते हैं 1.5 टन AC पर मिल रही 5 सबसे बड़ी डील्स के बारे में… लिस्ट का पहला AC गोदरेज का है जो अमेजन पर फ्लैट 30% डिस्काउंट के बाद सिर्फ 29,490 रुपये में मिल रहा है जो काफी शानदार डील लग रही है। AC पर खास बैंक डिस्काउंट भी मिल रहा है जहां से आप Axis Bank Credit Card EMI ऑप्शन से 1250 रुपये और HDFC Bank Credit कार्ड EMI ऑप्शन के जरिए 750 रुपये तक का डिस्काउंट ले सकते हैं। AC पर खास 4,800 रुपये तक का एक्सचेंज डिस्काउंट भी मिल रहा है। Voltas 2025 Model 1.5 Ton 3 Star Split Inverter 4-IN-1 लिस्ट का अगला AC Voltas का है जो फ्लिपकार्ट पर फ्लैट 47% डिस्काउंट के बाद सिर्फ 30,990 रुपये में मिल रहा है। इस AC पर भी खास बैंक डिस्काउंट मिल रहा है जहां से आप Axis Bank Credit Card और ICICI Bank Credit कार्ड पर 2000 रुपये तक का डिस्काउंट ले सकते हैं। Lloyd 1.5 Ton 3 Star Inverter Split AC 5 in 1 Convertible इस लिस्ट का अगला AC Lloyd का 1.5 टन 3 Star Inverter Split AC है जो अभी अमेजन पर काफी सस्ते में मिल रहा है। 47% डिस्काउंट के बाद इस AC की कीमत सिर्फ 30,990 रुपये रह गई है। HDFC Bank Credit Card EMI और Non-EMI ऑप्शन पर 1500 रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। AXIS Bank Credit कार्ड EMI ऑप्शन के साथ भी 1500 रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। ONIDA 2025 Model 1.5 Ton 3 Star Split Inverter फ्लिपकार्ट पर ONIDA का ये AC भी इस वक्त काफी ज्यादा कम कीमत पर मिल रहा है। AC पर 36% तक फ्लैट डिस्काउंट के बाद इसकी कीमत सिर्फ 26,990 रुपये रह गई है। इस AC पर भी खास बैंक डिस्काउंट मिल रहा है जहां से आप Axis Bank Credit Card और ICICI Bank Credit कार्ड पर 1500 रुपये तक का डिस्काउंट ले सकते हैं। Daikin 2025 Model 1.5 Ton 3 Star Split Inverter AC लिस्ट का आखिरी AC भी इस वक्त काफी ज्यादा कम कीमत पर मिल रहा है। Daikin के इस AC को आप 36% तक फ्लैट डिस्काउंट के बाद सिर्फ 34,490 रुपये में खरीद सकते हैं। इस AC पर भी खास बैंक डिस्काउंट मिल रहा है जहां से आप Axis Bank Credit Card के साथ 2500 रुपये तक का बैंक डिस्काउंट ले सकते हैं।

गर्मी में त्वचा को ठंडक देगा एलोवेरा जेल, जानें लगाने का सही तरीका और फायदे

गर्मियों का मौसम त्वचा के लिए काफी मुश्किल भरा होता है। चिलचिलाती धूप, गर्म हवाएं और पसीना त्वचा के नेचुरल मॉइश्चर को छीन लेते हैं, जिससे स्किन ड्राई, बेजान और टैन दिखने लगता है। ऐसे में एलोवेरा जेल एक नेचुरल स्किनकेयर के रूप में बेहद फायदेमंद साबित होता है। एलोवेरा में विटामिन-ए, सी, ई, एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो स्किन को ठंडक पहुंचाने, धूप के असर को कम करने और स्किन को डीप नरिशमेंट देने में मदद करता है। आइए जानें गर्मी से त्वचा को राहत दिलाने के लिए एलोवेरा जेल का कैसे इस्तेमाल करें। कैसे करें एलोवेरा जेल का इस्तेमाल?     चेहरे की सफाई करें- सबसे पहले अपने चेहरे को माइल्ड फेसवॉश या क्लींजर से धोकर साफ करें। यह जरूरी है जिससे स्किन के पोर्स में जमी धूल, गंदगी और एक्स्ट्रा ऑयल हट जाए और एलोवेरा जेल अच्छे से काम कर सके।     एलोवेरा जेल तैयार करें- अगर आपके पास ताजा एलोवेरा पत्ती है तो उसे काटकर उसका जेल निकाल लें। नहीं तो मार्केट में मिलने वाला शुद्ध, बिना खुशबू और रंग वाला ऑर्गेनिक एलोवेरा जेल लें।     चेहरे पर लगाएं- अब एलोवेरा जेल को उंगलियों की मदद से पूरे चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं। आप सर्कुलर मोशन में मसाज करें जिससे जेल स्किन में अच्छी तरह समा जाए। यह प्रक्रिया स्किन में ब्लड सर्कुलेशन को भी बेहतर बनाती है।     थोड़ी देर छोड़ दें- एलोवेरा जेल को 15 से 20 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दें। यह स्किन को ठंडक देगा, जलन कम करेगा और पोषण भी देगा। गर्मियों में यह सनबर्न और टैनिंग के इलाज में भी कारगर होता है।     वॉश करें या या छोड़ दें- आप चाहें तो इसे नॉर्मल पानी से वॉश कर सकते हैं या फिर रातभर स्किन जेल की तरह छोड़ सकते हैं। रातभर लगाकर छोड़ना ड्राई और सेंसिटिव स्किन के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। कुछ जरूरी टिप्स     DIY फेस पैक- एलोवेरा में नींबू की कुछ बूंदें मिलाकर टैनिंग के लिए पैक बनाएं।     टोनर के रूप में- एलोवेरा जेल और गुलाब जल मिलाकर नेचुरल टोनर तैयार करें।     एक्ने कंट्रोल- एलोवेरा में टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदें मिलाकर लगाएं। गर्मियों में एलोवेरा जेल स्किन को ठंडक, पोषण और सुरक्षा देने वाला सबसे आसान और नेचुरल उपाय है। नियमित इस्तेमाल से आपकी स्किन साफ, निखरी और हेल्दी बनी रहती है।  

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