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गोपाल और भूपेन्द्र जैसे सीनियर लीडर भुलाने को माना गलती, सुधार के साथ बदलाव का मास्टर प्लान हुआ तैयार

Forgetting senior leaders like Gopal and Bhupendra was considered a mistake, master plan for change along with reform was ready. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिली प्रचंड जीत के प्रमुख चेहरों को किनारे करके पीछे की कतार को आगे ले जाकर के दुष्परिणाम मंत्रीमंडल विस्तार के बाद दिखाई देना शुरू हो गए । इन बदलावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी की अनुभव और ग़ैरनुभव की चूक इस एक वर्ष के दौरान कई बार निकलकर सामने आ चुकी है। सागर ! राजनीति में खेमेबाजी न हो यह संभव नही । बात मध्यप्रदेश की करें तो शिवराज सिंह के मुखिया रहते इसका असर कभी खुलकर सामने नही आने पाया। अब जो हालात बने हैं वो स्प्ष्ट तौर पर प्रदेश में बीजेपी को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। शिवराज सरकार में खेमेबाजी देखने को मिली पर उसका प्रभाव इतना नही हो पाया जिससे पार्टी को उसका नुकसान उठाना पड़ा हो। 2023 मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत से सबके सामने यह सिद्ध हो चुका है। बुंदेलखंड में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है। इसमें लड़की पक्ष्य की शर्त में दूल्हे के साथ बुजुर्गों को आने की मनाही रहती है। जिसके उद्देश्य मे शादी रश्म के दौरान कठिन प्रश्नों को पूँछकर दूल्हा पक्ष्य को निरुत्तर करना होता है। इसके तोड़ के लिए वो होशियारी करके बारात में एक बुजुर्ग को साथ ले जाते हैं। जब वधु पक्ष्य सवाल करना शुरू करता है। बाराती गुप-चुप उस बुजुर्ग से सवालों के जबाब पूंछने लगते हैं। सही जबाब मिलने पर वधु पक्ष्य बगैर तजुर्बेकार के इनका जबाब देना कठिन है समझ जाता है। खोज करने पर बारात में बुजुर्ग के साथ आने की सच्चाई सामने आ जाती है। मोहन सरकार चलाने में दिख रही कमियों मे अनुभव की कमी बताने के लिए यह कहावत सटीक बैठ रही है। कहते हैं सही ज्ञान वहीं है जो जमीन से सीखकर मिला हो। किताबी ज्ञान का इससे कोई मुकाबला नही हो सकता। मध्यप्रदेश में नये को आगे लाकर सरकार चलाने के फार्मूले में हो रही निरंतर ख़ामियों में अनुभव और कुशल राजनेता को दरकिनार कर लिए निर्णय को उसका परिणाम माना जा रहा है। बात सागर जिले की राजनीति की करें तो आपको पूर्व मंत्री वर्तमान रहली विधायक पंडित गोपाल भार्गव और पूर्व गृहमंत्री वर्तमान खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह की कमी दिख रही है। पार्टी के अंदर पनपी खेमेबाजी और प्रशासनिक लचरता से स्प्ष्ट है कि मोहन सरकार शिव के राज के करीब तक से होकर भी नही चल पा रही है। पार्टी के सीनियर विधायक की यह नाराजगी एक प्रकार से बीजेपी की भलाई होना माना जा सकता है। इन्होंने भारतीय जनता पार्टी में 1985 से सक्रिय राजनीति, उस दौरान के संघर्ष और अवसरवादी राजनीति से दूर रहकर आखिरी समय तक पार्टी से जुड़े रहने का कई बार संकल्प दोहराया है। आज जो हालात हैं उस पर चिंता जताना जिसमे मध्यप्रदेश में मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर एक- एक नाम दिल्ली से फ़ाइनल हुआ मानकर चलें तो बेशक यह निर्णय गलत साबित हुआ है। आलाकमान को लीडरशिप में उन विशेष के बारे में अच्छी जानकारी होनी चाहिए जिनमे सबको साथ लेकर चलने की क्षमता दिखाई देती है। जहाँ वो दूसरों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा करना खुद का कर्तव्य मानकर वैसे निर्णय लेते हैं। राजनीति सिद्धान्त के अन्तर्गत इसमें भिन्न- भिन्न पक्षों का अध्ययन किया जाता हैं। शिवराज और उनके मंत्रिमंडल में विभेदों को दूर करने के तरीके होते थे। वो क्रांति की भी वकालत करना जानते थे। राजनीतिक सिद्धांत में, स्वतंत्रता, समानता, न्याय, लोकतंत्र, और धर्मनिरपेक्षता जैसी अवधारणाओं का अर्थ स्पष्ट किया जाता है। साथ ही राजनीतिक सिद्धांत, विचारों और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी अवधारणाओं का विश्लेषण किया जाता है। खुद को ताकतवर बनाने के लिए गुटबाजी एक विकल्प हो सकता है। मोहन मंत्रीमंडल में अनुभव की कमी को साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है। मुखिया के ताकतवर बनने में जो कमियां पनपी हैं वो विपक्षियों को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। भारतीय जनता पार्टी आलाकमान मध्यप्रदेश और राजस्थान में किए इन प्रयोग के दुष्प्रभाव का बारीकी से अध्ययन कर रही है। जो सीनियर और अनुभवी को अभी कमजोर समझकर चल रहे हैं आने वाले कुछ समय बाद उनके सामने आलाकमान द्वारा चौकाने वाला निर्णय देखने को मिल सकता है।

दुष्कर्म मामले में बीजेपी नेता पर FIR: जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, कहा- 5 से 10 भाजपा नेता लग गए होंगे उसे बचाने में…

FIR against BJP leader in rape case: Jitu Patwari cornered the government, said- 5 to 10 BJP leaders must have been involved in saving her… भोपाल। मध्य प्रदेश के विदिशा में भाजपा जिला उपाध्यक्ष योगेंद्र सोलंकी पर रेप का मामला दर्ज होने पर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधा है। राजधानी भोपाल में प्रेस कांफ्रेंस कर पटवारी ने कहा कि बीजेपी नेता का अपनी ही भतीजी के साथ बलात्कार करने का मामला आज सुर्खियां बनी हुई है। ये अराजकता और अद्भुत सरकार का फेलियर है। पटवारी ने कहा कि सरकार का आज तक कोई प्रयास इन घटनाओं को रोकने के लिए नहीं हुआ।10 दिन पहले एक शिक्षिका के साथ बालाघाट में बीजेपी के नेता ने दुष्कर्म किया, अक्टूबर में इंदौर के महू में सेना के जवानों के साथ जो महिलाएं थी, उनके साथ जो बीजेपी के नेताओं ने किया बहुत ही चर्चित मामला था। दतिया में भी भाजपा नेता ने कुछ लोगों के साथ मिलकर दो महिलाओं के साथ बलात्कार किया, तब नरोत्तम मिश्रा के मुंह में दही जम गया था। जबलपुर में नौकरी दिलाने के नाम पर 28 साल की युवती के साथ बीजेपी के नेता शशिकांत सोनी ने बलात्कार किया। पीसीसी चीफ ने कहा कि आखिर ऐसी सैकड़ों घटनाओं में बीजेपी के नेता ही सामने क्यों आते हैं यह सवाल तो है? उन्होंने कहा कि राजनीतिक दबाव में हजारों मामले दब जाते हैं। भोपाल विदिशा समेत पूरे प्रदेश के जिलों में 17 मिनट में एक बलात्कार हो रहे हैं, जनता सरकार का चाल चरित्र चेहरा पहचानें। भाजपा नेताओं पर इस तरीके के मामले सामने आते हैं, तो उन्हें बचाया जाता है ना की कार्रवाई की जाती है। जीतू पटवारी ने कहा कि अभी जो सोलंकी पर रेप का मामला दर्ज हुआ, उसमें 5 से 10 बीजेपी नेता लग गए होंगे उसे बचाने के लिए।

बीना विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ लगाई याचिका में सुनवाई आज

Hearing in the petition against Bina MLA Nirmala Sapre today भोपाल। बीना विधायक निर्मला सप्रे की विधायकी निरस्त करने की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा प्रस्तुत याचिका पर हाई कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई होगी। याचिका में सिंघार ने कहा है कि बीना से विधायक सप्रे ने कांग्रेस की सदस्यता त्याग कर भाजपा का दामन थाम लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। विधानसभा अध्यक्ष ने नहीं किया निराकरण इस संबंध में सिंघार ने मप्र विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर के समक्ष एक याचिका सप्रे की विधायकी निरस्त करने की गुहार लगाते हुए दायर की थी, लेकिन अध्यक्ष ने अब तक इसका निराकरण नहीं किया। इससे व्यथित होकर हाई कोर्ट की शरण लेना पड़ी है। शीतकालीन सत्र से पहले निरस्त की जाए विधायकी याचिका में मांग की गई है कि सप्रे की विधानसभा सदस्यता शीतकालीन सत्र से पहले निरस्त की जाए। याचिका में यह भी कहा है कि संविधान की अनुसूची 10 के अनुसार अगर कोई विधायक दल बदलता है, उसकी विधानसभा से सदस्यता निरस्त की जानी चाहिए। अगर दल-बदल के बाद भी ऐसे व्यक्ति को विधायक बने रहना है तो उसे फिर से चुनाव लड़ना पड़ता है।

किसान खाद के लिए परेशान, लंदन में डायनासोर के अंडे देख रहे मोहन यादव, उमंग सिंगार

Farmers worried about fertilizer, Mohan Yadav, Umang Singar looking at dinosaur eggs in London रीवा ! मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार 2 दिवसीय प्रवास पर रीवा आए. उमंग सिंघार ने राज निवास भवन में अयोजित पत्रकार वार्ता में केंद्र और प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा. नेता प्रतिपक्ष ने सिंगरौली जिले में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता व्यक्त की. इसके साथ ही उन्होंने खाद की समस्या पर भी प्रदेश सरकार को घेरा. प्रदेश के प्रशानिक अधिकारियों पर सवाल खड़े करते हुऐ उमंग सिंघार ने बड़ा बयान दे दिया. उन्होंने कहा कि यहां पर अधिकारी जिस प्रकार से भाजपा नेताओं की गुलामी कर रहे उन्हें तेल ले लेना चाहिए और भाजपा नेताओं के लगाना चाहिए. देश के नक्शे में सिंगरौली सबसे ज्यादा प्रदूषण वाला जिला पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला. नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “सिंगरौली जिला देश के नक्शे में सबसे ज्यादा प्रदूषण वाला जिला बनता जा रहा है. सिंगरौली मध्य प्रदेश की ऊर्जाधानी कहलाता है. प्रदूषण के मामले में दिल्ली के बाद सिंगरौली दूसरे नंबर पर है. भविष्य में यह जगह वहां पर निवासरत लोगों के लिए बड़ी मुश्किल वाली जगह होगी. लगता है वहां पर सिर्फ खदाने ही रह जाएगी और लोगों को वहां से विस्थापित होना पड़ेगा. निजी कंपनियों की कोल माइंस ने वहां पर अपनी अपनी नीतियां बनाई है. उमंग सिंघार ने प्रदेश और केंद्र सरकार को घेरा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, “वहां पर पुलिस और एसएएफ की बटालियन लगाकर लोगों के घर तोड़ दिए गए. ऐसा लगता है की मोहन यादव की सरकार दबाव में काम कर रही है. मुझे लगता है कि देश के अंदर मोदी के साथ अडानी सेफ है और प्रदेश के अंदर मोहन यादव के साथ अडानी सेफ है. झारखंड से कोल डस्ट सिंगरौली आती है. इसके बाद उसे कोयले में मिलाकर अन्य जगहों पर भेजा जाता है. इस तरह से कई प्रकार के घोटाले हैं, जो देखने को मिले हैं. इन सभी मुद्दों को विधानसभा में उठाने के साथ ही अगर पार्टी को जरुरत पड़ी, तो आने वाले समय में आंदोलन भी करेंगे.” किसान खाद को लेकर परेशान नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “रीवा जिले में 50% भी बोवनी नहीं हो पाई. किसानों को खाद नहीं मिली. इनके तो कृषि मंत्री को पता ही नहीं है कि खाद कौन देता है. सरकार पिछले 4 सालों से बहाना बना रही है कि रसिया यूक्रेन में युद्ध चल रहा है, लेकिन मैं सरकार से जानना चाहता हूं. भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार ने कई बार चाइना, अमेरिका और मोरक्को सहित कई ऐसे देश है, जहां से खाद को इंपोर्ट किया, तो अब क्या दिक्कत है. क्या सरकार के पास पैसे नहीं है, किसानों के लिए, मुख्यमंत्री लंदन में घूम रहे थे, उसके पहले शिवराज गए थे, तब वह अमेरिका की सड़कों को चिकने गालों की तरह बता रहे थे. मोहन यादव लंदन में डायनासोर के अंडे देख रहे थे.” उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल पर साधा निशाना उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला पर निशाना साधते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि उप मुख्यमंत्री अस्पतालों के बातें करते हैं, लेकिन अस्पतालों की स्थिति ऐसी है की मरीजों को दवाईयां नहीं मिल पा रही है. प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन अपने ही जिले में मरीजों को दवाई उपलब्ध नहीं कर पा रही है. उमंग सिंघार ने कहा कि अगर उपमुख्यमंत्री से प्रदेश नहीं संभल रहा तो वह अपना जिला ही संभाल ले. स्वास्थ्य विभाग में जो घोटाले चल रहे हैं, जांचों के नाम पर पूरे प्रदेश के अंदर 200 – 300 करोड़ रुपए ब्लड टेस्ट के नाम से जिन कंपनियों को कम दिया जा रहा है, क्या वह कंपनियां सही जांच कर रही है या फिर फर्जी तरीके से सेंपल के नाम पर उनसे पैसे निकाले जा रहे हैं. अधिकारी हो गए भाजपा नेताओं के गुलाम कई आधिकारी तो ऐसे हो गए है, जो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की गुलाम हो गए है. ऐसे अधिकारी जो भारतीय जनता पार्टी के नाम से माला जप रहे हैं. इनके लिए कांग्रेस को एक अभियान शुरू करना पड़ेगा कि इन्हें एक तेल की सीसी दें. यह भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को तेल लगाएं. क्योंकि ये तो जानता के काम नहीं कर रहे. 16 दिसंबर को हम जन हितैसी मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास करेंगे. बीजेपी जिलाध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष पर किया पलटवार नेता प्रतिपक्ष के तीखे प्रहार पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा, “कांग्रेस के नेताओं को किसी भी मुद्दे में सरकार के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है. 2003 के पहले की स्थिति मध्य प्रदेश की जनता अब तक नहीं भूली है. मैंने भी देखा है, सब ने देखा है कि कैसे खाद के लिए किसानों को तीन से चार दिन तक लाईन में लगना पड़ता था और डंडे भी खाने पड़ते थे. अभी तो खबर बनती है, लाइट जाने की तब खबर बनती थी. सिगरौली के सड़क बन रही है. दुनिया की सर्वाधिक कृषि प्रगति दर अगर कहीं है, तो वह मध्य प्रदेश में है. कांग्रेस मुद्दा विहीन है कांग्रेस को जनता समझ भी चुकी है और जवाब भी दे चुकी है. बहुत जल्द हमारा प्रदेश और देश कांग्रेस मुक्त राष्ट्र होगा.

चुनावी प्रक्रिया पर शिवराज सिंह ने उठाए सवाल, बोले- चुनावों से देश हो रहा बर्बाद

Shivraj Singh raised questions on the electoral process, said – the country is being ruined by elections. विदिशा ! केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को विदिशा पहुंचे. जहां उन्होंने विदिशा को कृषि और बागवानी का मॉडल बनाने की बात कही. वहीं देश में बार-बार होने वाले चुनावों को लेकर शिवराज सिंह ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि देश में लगातार चुनाव होने के कारण समय, ऊर्जा और धन की बर्बादी होती है. देश में एक चुनाव खत्म होता है, तो दूसरा शुरू हो जाता है. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री सभी चुनाव प्रचार में व्यस्त हो जाते हैं, जिससे विकास कार्य प्रभावित होता है. विदिशा की जनता ने दिया समर्थन शिवराज सिंह ने “एक देश एक चुनाव” अभियान की शुरुआत करते हुए विदिशा की जनता से इस विचार का समर्थन करने की अपील. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनके साथ हाथ उठाकर इस अभियान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई. चौहान ने संविधान में संशोधन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि एक बार में चुनाव हो ताकि बाकी समय देश के विकास पर ध्यान दिया जा सके. प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में प्राकृतिक खेती को अपनाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “केमिकल फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड्स के अत्यधिक उपयोग ने जमीन की उपजाऊ क्षमता को खत्म कर दिया है. इससे न केवल इंसान बल्कि पशु-पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं. कई उपयोगी कीट-पतंगे जैसे केंचुए, जो धरती के डॉक्टर कहे जाते थे आज विलुप्त होने की कगार पर हैं.” शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वे विदिशा जिले से प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्राकृतिक खेती नहीं अपनाई गई, तो आने वाली पीढ़ियां धरती पर रहने लायक परिस्थितियां नहीं पाएंगी.”

संगठन चुनाव प्रभारियों के अलावा बीजेपी ने तीन जिलों में संगठन चुनाव के लिए एक-एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए

भोपाल इन दिनों बीजेपी के संगठन चुनाव चल रहे हैं। 15 दिसंबर तक मध्यप्रदेश के 1300 मंडलों में मंडल अध्यक्ष और 15 से 31 दिसंबर तक जिला अध्यक्षों के चुनाव होने हैं। संगठन चुनाव को लेकर बीजेपी ने जिला निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किए हैं। संगठन चुनाव प्रभारियों के अलावा बीजेपी ने तीन जिलों में संगठन चुनाव के लिए एक-एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। ये पर्यवेक्षक अपने प्रभार के जिलों में कार्यकर्ताओं और सक्रिय सदस्यों की बैठकें लेकर मंडल अध्यक्ष और जिला अध्यक्षों के लिए नाम निकालेंगे। इन नामों को संगठन तक पहुंचाएंगे। बुधवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में इन पर्यवेक्षकों की बैठक बुलाई गई है। इन नेताओं को इन जिलों का बनाया गया पर्यवेक्षक     ग्वालियर नगर, ग्वालियर ग्रामीण, श्योपुर: सुरेश आर्य (पूर्व संगठन मंत्री )     सागर, दमोह, पन्ना: नरेंद्र बिरथरे (पूर्व विधायक)     शिवपुरी, गुना, अशोनगर: अरुण भीमावद (विधायक)     छतरपुर, टीकमगढ, निवाड़ी: सदानंद गोडबोले (पूर्व मेयर)     सतना, मैहर, रीवा: उमेश शुक्ला (पूर्व विधायक)     मऊगंज, सीधी, सिंगरौली: रामलाल रौतेल (पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री)     शहडोल, अनूपपुर, उमरिया: एससी मोर्चे के महामंत्री नेताम     कटनी, मंडला, डिंडौरी: लता ऐलकर (पूर्व प्रदेशाध्यक्ष महिला मोर्चा)     छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट: अलकेश आर्य (जिलाध्यक्ष बैतूल)     पांढुर्णा, बैतूल, हरदा: जयप्रकाश चतुर्वेदी (पूर्व जिलाध्यक्ष)     भोपाल, रायेसन, नर्मदापुरम: राजेंद्र पांडे (विधायक)     विदेशा, राजगढ, भोपाल ग्रामीण: अभिलाष पांडे (विधायक)     विदिशा, राजगढ़, शाजापुर: लता वानखेडे (सांसद)     उज्जेन नगर, उज्जैन ग्रामीण, आगर: भगवानदास सबनानी (विधायक)     रतलाम मंदसौर, नीमच: सीताराम यादव (सदस्य ओबीसी आयोग)     झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी: सतेंद्र भूषण (पूर्व संगठन मंत्री)     खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर: महेंद्र भटनागर  

विधानसभा चुनाव के नतीजों के 10 दिन बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर महायुति के दलों के बीच सहमति नहीं बनी

मुंबई महाराष्ट्र में सरकार के गठन में हो रही देरी में एकनाथ शिंदे की भूमिका होने से शिवसेना ने इनकार कर दिया है। साथ ही पार्टी ने यह भी कहा है कि शिंदे के सम्मान का ध्यान भारतीय जनता पार्टी को रखना होगा। विधानसभा चुनाव के नतीजों के 10 दिन बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर महायुति के दलों के बीच सहमति नहीं बनती दिख रही है। पूर्व राज्य मंत्री दीपक केसरकर ने कहा ‘हमारे नेता ने पहले ही साबित कर दिया है कि शिवसेना का असली प्रतिनिधित्व कौन करता है। अब यह दिल्ली पर निर्भर करता है कि वह कैसे उनका कद बरकरार रखते हैं। हम उस निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।’ राज्य में सरकार गठन में हो रही देरी पर किए गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘पांच दिसंबर को शपथ ग्रहण समारोह होना है, लेकिन कई बेबुनियाद अफवाहें फैलाई जा रही हैं। कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर एकनाथ शिंदे की सरकार गठन में हो रही देरी में कोई भूमिका नहीं है। भाजपा की आंतरिक चयन प्रक्रिया उनका मामला है। शिंदे पहले ही बता चुके हैं कि वे उनके द्वारा लिए गए किसी भी फैसले को स्वीकार करेंगे।’ केसरकार ने महायुति के भीतर असंतोष या मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए इन्हें विपक्ष द्वारा फैलाई गई गलत सूचना बताया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केसरकर यह भी साफ कर चुके हैं कि मुंबई के आजाद मैदान में होने वाला शपथ ग्रहण कार्यक्रम टाला नहीं जाएगा। इससे पहले भाजपा के महाराष्ट्र प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने 5 दिसंबर को कार्यक्रम होने की बात कही थी। एनसीपी नेता अजित पवार भी जानकारी दे चुके हैं कि सीएम भाजपा से होगा और डिप्टी सीएम एनसीपी और शिवसेना को मिलेंगे। भाजपा ने बढ़ाई रफ्तार महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति का नेतृत्व करने वाली भाजपा ने मुंबई में अपनी विधायक दल की बैठक के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और रूपाणी को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नामित किया, जहां विधायक अपने नेता का चुनाव करेंगे। रूपाणी ने राजकोट में अपने आवास पर कहा, ‘महाराष्ट्र भाजपा विधायक दल की बैठक मंगलवार या बुधवार को होगी। भाजपा विधायकों की उस बैठक में आम राय से एक नेता चुनने का प्रयास किया जाएगा। मैं और सीतारमण जी पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में भाग लेंगे और आलाकमान को एक नेता की घोषणा के लिए एक रिपोर्ट सौंपेंगे, जो मुख्यमंत्री बन सकता है बशर्ते इस तरह के फॉर्मूले को अंतिम रूप दिया जाए।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि महाराष्ट्र को इस बार भाजपा का मुख्यमंत्री मिलेगा क्योंकि (निवर्तमान मुख्यमंत्री) एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पार्टी के उम्मीदवार (शीर्ष पद के लिए) का समर्थन करेंगे।’ आर्थिक राजधानी में पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि नवनिर्वाचित भाजपा विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार सुबह दक्षिण मुंबई के विधान भवन में होगी।

महाराष्ट्र में किसे मिलेगा कौन सा पद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे तय

मुंबई महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर रस्साकसी के बीच दिल्ली में महायुति की बैठक हुई. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई इस बैठक में उन्होंने मंत्रिमंडल में शामिल होने की इच्छा रखने वाले विधायकों का रिपोर्ट मांगा है. इस बड़ी बैठक की इनसाइड स्टोरी सामने आई है, जिसमें पता चला है कि अमित शाह ने विधायकों का रिपोर्ट कार्ड किस आधार पर मांगा. रिपोर्ट कार्ड में देखा जाएगा कि लोकसभा चुनाव के दौरान संबंधित विधायक का प्रदर्शन कैसा रहा, क्या संबंधित व्यक्ति ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ईमानदारी से काम किया? अगर कैबिनेट में कोई महत्वाकांक्षी पूर्व मंत्री है तो संबंधित मंत्री ने महायुति सरकार के दौरान मंत्रालय में कैसे काम किया? संबंधित व्यक्ति मंत्रालय में काम करने के लिए कितना समय दे रहा था. रिपोर्ट कार्ड के साथ महायुति के नेताओं को बुलाया जाएगा दिल्ली महायुति में अपने घटक दल के विधायकों के साथ मंत्री का व्यवहार कैसा था? मंत्री ने केंद्रीय और राज्य निधि का आवंटन कैसे किया? क्या ऐसी स्थिति थी कि संबंधित मंत्री महायुति को परेशानी में डाल देंगे? क्या उस नेता कोई विवादास्पद बयान दिया? इन मुद्दों का रिपोर्ट कार्ड लेकर अमित शाह महायुति नेताओं को दिल्ली बुलाएंगे. महायुति के नेताओं के आज दिल्ली जाने की संभावना है. बीजेपी ने बनाई विधायक दल की बैठक की योजना बीजेपी संसदीय बोर्ड दो पर्यवेक्षकों को मुंबई भेज रहा है, जिसमें गुजरात के पूर्व सीएम और पंजाब के पार्टी प्रभारी विवेक रूपानी और वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण शामिल हैं. संबंधित घटनाक्रम में, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने बीजेपी एमएलसी प्रवीण दारेकेर के साथ आजाद मैदान में व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया, जहां गुरुवार को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा.

एमपी गजब: पिटा भाजपाईयों ने पिटें भाजपाई और एफआईआर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर क्यों?

MP Amazing: Why did BJP workers beat up BJP workers and FIR against Congress workers? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज उज्जैन के महिदपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर झूठे एवं द्वेषपूर्ण प्रकरणों के विरोध में प्रदर्शन का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार और प्रशासन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर झूठे प्रकरण लादने की हठधर्मिता बंद नहीं हुई, तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी। भाजपा की आपसी गुटबाजी का बोझ कांग्रेस पर क्यों? पटवारी ने सवाल उठाया, “जब लड़ाई भाजपाइयों की है, मारपीट पूर्व विधायक के साथ होती है, और हमलावर भाजपा कार्यकर्ता हैं, तो फिर FIR कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर क्यों?” यह भाजपा सरकार की हठधर्मिता और प्रशासन की पक्षपाती कार्रवाई का स्पष्ट प्रमाण है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का स्वाभिमान सर्वोपरि उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ी है। अगर मुख्यमंत्री के गृह जिले की पुलिस पारदर्शिता से काम नहीं करती है, तो कांग्रेस गांधीवादी तरीके से लोकतंत्र का पाठ पढ़ाना जानती है। 24 घंटे का अल्टीमेटम प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि 24 घंटे के भीतर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे प्रकरण वापस नहीं लिए गए, तो उज्जैन की सड़कों पर कांग्रेस का सैलाब दिखाई देगा। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार और उनका पिट्ठू प्रशासन यह सुन ले कि कांग्रेस अन्याय सहने वाली नहीं है।” कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कार्यकर्ताओं पर झूठे आरोप मढ़ने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर स्तर पर इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी।

‘CM मोहन आप विदेश क्या गए यहां…’, उज्जैन में पूर्व विधायक की पिटाई मामले पर उमंग सिंघार का तंज

‘CM Mohan, why did you go abroad here…’, Umang Singhar’s taunt on the case of beating of former MLA in Ujjain मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन के महिदपुर विधानसभा में प्रभारी मंत्री और सांसद के सामने दो गुटों की भिड़ंत हो गई. इस दौरान पूर्व विधायक बहादुर सिंह चौहान के साथ जमकर मारपीट हुई. प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल और स्थानीय सांसद अनिल फिरोजिया ने मैदान में उतर कर बीच बचाव किया. बीजेपी के दो गुटों की भिड़ंत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. अब इस मामले को लेकर अब कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने बीजेपी पर तंज कसा है. उंमग सिंघार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ट्वीट कर कहा, “ये है संस्कारित और अनुशासित पार्टी बीजेपी की असलियत. उज्जैन जिले की महिदपुर विधानसभा में पूर्व विधायक बहादुर सिंह चौहान की प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल और सांसद अनिल फिरोजिया की मौजूदगी में पिटाई हुई.” बिना बुलाए मंच पर जाने वालों के साथ यही होगा- सिंघार उन्होंने कहा, “खास बात ये कि पिटाई करने वाले बीजेपी के ही कार्यकर्ता थे. अब बिना बुलाए मंच पर जाने वालों के साथ तो यही होगा. सीएम साहेब, आप विदेश क्या गए, यहां आपके गृह जिले में ही पार्टी वाले मारपीट करने लगे. ये न तो राजनीतिक संस्कार और सामाजिक व्यवहार हैं.” क्या है पूरा मामला? खेड़ा खजुरिया गांव में बिजली विभाग के ग्रिड और स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया था. इस बीच कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों से कहासुनी हो गई. विवाद बढ़ने के बाद पूर्व विधायक बहादुर सिंह चौहान पर हमला हो गया. बीजेपी नेता प्रताप सिंह आर्य ने बताया कि बहादुर सिंह चौहान के मंच से उतरते ही विवाद की स्थिति बनने लगी. देखते-देखते अचानक मारपीट शुरू हो गई.

रायपुर में भाजपा ने निकाय चुनाव की तैयारियां तेज की, जातीय संतुलन पर दिया जोर

रायपुर रायपुर दक्षिण विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद भाजपा ने अपनी पूरी ताकत अब निकाय और पंचायत चुनावों में झोंकने की तैयारी कर ली है। प्रदेश भाजपा संगठन में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने वाली है, जिसके तहत पहले चरण में बूथ कमेटियों का गठन किया जाएगा। इसके बाद मंडल और जिला अध्यक्षों का चुनाव होगा, जिसमें जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई जाएगी। 405 मंडलों में होंगे चुनाव, नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की कवायद एक से 15 दिसंबर के बीच प्रदेश के 405 मंडलों में मंडल अध्यक्षों का चुनाव होगा, जबकि 15 से 30 दिसंबर के बीच जिला अध्यक्षों का चयन किया जाएगा। संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि इस प्रक्रिया में न केवल अध्यक्ष बल्कि प्रतिनिधियों का भी चुनाव किया जाएगा। खासतौर पर नाराज कार्यकर्ताओं को फिर से पार्टी के साथ जोड़ने और उनकी समस्याओं का समाधान करने पर जोर दिया जाएगा। जातीय समीकरणों पर फोकस रहेगा ताकि विभिन्न समुदायों के बीच संतुलन कायम किया जा सके और निकाय चुनावों में किसी भी प्रकार की असंतोष की स्थिति से बचा जा सके। भाजपा की रणनीति स्पष्ट है: निकाय और पंचायत चुनावों में भी जीत का परचम लहराना है। सदस्यता अभियान में रिकॉर्ड वृद्धि भाजपा ने अपने हालिया सदस्यता अभियान में 53 लाख नए सदस्य जोड़ने का दावा किया है। अब 30 नवंबर तक बूथ कमेटियों का चुनाव पूरा करने की तैयारी है। पार्टी नेताओं ने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातें तेज कर दी हैं, ताकि चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा सके। कांग्रेस भी बदलाव की तैयारी में रायपुर दक्षिण उपचुनाव में हार के बाद कांग्रेस में भी हलचल तेज हो गई है। पार्टी अब समीक्षा से आगे बढ़कर बड़े बदलावों की तैयारी कर रही है। दिल्ली से आने वाली सूची का इंतजार है, जिसमें संगठनात्मक फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। उपचुनाव में हार ने कांग्रेस को मजबूर कर दिया है कि वह जमीनी स्तर पर रणनीति को नए सिरे से तैयार करे। भाजपा-कांग्रेस में सीधा मुकाबला निकाय और पंचायत चुनावों में दोनों दलों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। जहां भाजपा जीत के लिए जातीय संतुलन और संगठनात्मक मजबूती पर फोकस कर रही है, वहीं कांग्रेस अपनी हार से सबक लेकर रणनीति में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है। आने वाले चुनावी नतीजे यह तय करेंगे कि जनता का भरोसा किस दल पर कायम रहता है।

बुधनी उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने जीत तो हासिल की, लेकिन कांग्रेस के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ने बीजेपी की चिंता बढ़ाई

सीहोर  बुधनी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी रामाकांत भार्गव ने जीत तो हासिल की, लेकिन कांग्रेस के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। 23 नवंबर 2024 को हुए इस चुनाव में भाजपा को मात्र नौ प्रतिशत वोटों से जीत मिली, जबकि कुछ महीने पहले ही हुए विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान को लगभग 70% वोट मिले थे। इस बार भाजपा को 52% और कांग्रेस को 43% वोट मिले। कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी और भाजपा के वोट शेयर में गिरावट ने भाजपा के लिए चिंता का विषय पैदा कर दिया है। खासकर 136 पोलिंग बूथ पर मिली हार और 98 बूथ पर बेहद कम अंतर से जीत ने भाजपा के लिए आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी है। 20 साल बाद ऐसी टक्कर बुधनी विधानसभा में लगभग 20 साल बाद इतना रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। रामाकांत भार्गव ने जीत तो हासिल की, लेकिन दोनों दलों के लिए यह चुनाव सीख देने वाला रहा। पिछले दो विधानसभा चुनावों के नतीजों पर गौर करें तो कांग्रेस ने भले ही चुनाव हारा हो, लेकिन उसके वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। बीजेपी का प्रदर्शन गिरा भाजपा के प्रदर्शन में गिरावट साफ दिखी। 2018 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 43 पोलिंग बूथ पर हार का सामना करना पड़ा था। 2023 के विधानसभा चुनाव में यह संख्या घटकर 16 रह गई थी। लेकिन हाल ही में हुए उपचुनाव में भाजपा को 136 पोलिंग बूथ पर हार मिली। 16 से 136 तक पहुंचने वाली हार के आंकड़ों ने भाजपा के लिए आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी है। 98 बूथों पर कांटे की टक्कर इस उपचुनाव में 98 पोलिंग बूथ ऐसे रहे, जहां दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर रही। इन बूथों पर जीत और हार का अंतर 50 वोटों से भी कम रहा। भाजपा 50 ऐसे बूथों पर जीती, जहां जीत का अंतर 50 से कम था। कांग्रेस 48 ऐसे बूथों पर जीती, जहां जीत का अंतर 50 से कम था। इन बूथों पर जीत-हार का अंतर 2 से लेकर 49 वोटों तक रहा। कई बूथ ऐसे रहे, जहां जीत का अंतर सिर्फ 2, 7, 9 और 10 वोटों का रहा। डोबा और महागांव बूथ पर भाजपा सिर्फ 2 वोटों से जीती। नारायणपुर में 13 वोट, ग्वाडिया में 6 वोट, जोशीपुरा में 10 वोट, बुधनी के पांच बूथों पर 30, 49, 6, 18, 35 वोटों से जीत मिली। किरार समाज पर भारी बारेला वोट इस चुनाव में बारेला समाज के वोट किरार समाज के वोटों पर भारी पड़े। कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल किरार समाज से आते हैं। विधानसभा क्षेत्र में किरार समाज के लगभग 23,000 वोट हैं। ऐसा माना जा रहा था कि किरार वोट बैंक कांग्रेस के पक्ष में जाएगा। लेकिन राजकुमार पटेल को अपने समाज का पूरा समर्थन नहीं मिला। बारेला समाज के वोट भाजपा की तरफ चले गए। भाजपा प्रत्याशी को 38 पोलिंग बूथ पर बारेला समाज के 12,000 से ज्यादा वोट मिले। 16 अन्य बूथों पर बारेला समाज के 4,000 से ज्यादा वोट भाजपा को मिले। कुल मिलाकर भाजपा को बारेला समाज के 16,000 से ज्यादा वोट मिले, जो उसकी जीत की बड़ी वजह बने। किरार समाज में भी भाजपा ने सेंध लगाई। इस वजह से राजकुमार पटेल अपने गृह क्षेत्र से बड़ी बढ़त नहीं बना पाए। कांग्रेस का भी यही हाल कांग्रेस को 48 पोलिंग बूथ पर 50 से भी कम वोटों से जीत मिली। कई बूथ ऐसे थे जहां जीत का अंतर सिर्फ 1, 2, 5, 7 और 11 वोटों का रहा। तीन बूथों पर 1 वोट और एक बूथ पर 2 वोटों से कांग्रेस जीती। सलकनपुर में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से देवीलोक का निर्माण हो रहा है। लेकिन सलकनपुर पंचायत के मतदाताओं ने भाजपा को 1 वोट से हरा दिया। यह भाजपा के लिए चिंता का विषय है। रमाकांत भार्गव ने जिस गांव को गोद लिया, उसमें जीत बसंतपुर गांव में बारेला, बंजारा, गोंड और अन्य समाज के लोग रहते हैं। रमाकांत भार्गव ने सांसद रहते हुए इस गांव को गोद लिया था, लेकिन अपने कार्यकाल में एक बार भी गांव नहीं गए। पिछले साल ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया था। लेकिन फिर भी बसंतपुर के मतदाताओं ने रमाकांत भार्गव को 540 वोट देकर 349 वोटों से जीत दिलाई। राजकुमार पटेल को यहां सिर्फ 191 वोट मिले। गांव में कुल 796 वोट पड़े थे।

बीजेपी के सामने अगली बड़ी चुनौती पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष तय करना , संभावित नामों में शिवराज और देवेंद्र फडणवीस, डॉ सरोज पांडेय का नाम भी

नई दिल्ली  हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में शानदार जीत के बाद बीजेपी के सामने अगली बड़ी चुनौती पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष तय करना होगा। हालांकि बीजेपी की ओर से नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर कवायद तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली मुख्यालय में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों पर पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ समेत कई दिग्गज नेता नजर रखे हुए हैं। इस बीच कुछ नाम सामने आए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इन नामों में से ही एक नाम बीजेपी के नए अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल सकता है। ये नाम हैं- शिवराज सिंह चौहान, डॉ सरोज पांडेय और देवेंद्र फडणवीस। सूत्रों ने बताया कि बीजेपी अध्यक्ष का नाम तय करने के लिए पीएम मोदी, अमित शाह और आरएसएस के नेताओं के बीच बैठक के बाद ये तीन नाम सामने आए हैं। शिवराज सिंह चौहान, देवेंद्र फडणवीस और डॉ सरोज पाण्डेय में से ही कोई अध्यक्ष बनाया जाएगा। चर्चा में क्यों हैं ये नाम? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान बीजेपी के दिग्गज नेता हैं। पार्टी के अंदर उनकी अच्छी साख है। ऐसे में वह प्रबल दावेदार हैं। उधर देवेंद्र फडणवीस बीजेपी के युवा चेहरे हैं। महाराष्ट्र जीत के बाद बीजेपी फडणवीस को भी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने को लेकर पार्टी मंथन कर रही है। फडणवीस को पीएम मोदी और अमित शाह का भी करीबी माना जाता है। वहीं बीजेपी इस बार चौंकाने वाला फैसला करते हुए बीजेपी की कद्दावर महिला नेता डॉ सरोज पाण्डेय को भी अध्यक्ष पद पर बैठा सकती है। उधर राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा भी है कि बीजेपी का नया अध्यक्ष दक्षिण भारत से हो सकता है, क्योंकि इस समय बीजेपी के अहम पदों में से किसी भी पद पर दक्षिण भारत का नेता नहीं है। लोकसभा चुनाव के लिए बढ़ाया गया था नड्डा का कार्यकाल बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जून तक बढ़ा दिया गया था। उनका कार्यकाल इस साल जनवरी में खत्म हो रहा था। बीजेपी में नए अध्यक्ष के चयन से पहले संगठन का चुनाव जरूरी होता है, जिसमें आमतौर पर 6 महीने का समय लगता है। इसलिए वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 6 महीने तक बढ़ा दिया गया था।

आज से जर्मनी यात्रा पर CM मोहन यादव, मध्य प्रदेश में निवेश पर उद्योगपतियों से करेंगे बातचीत

CM Mohan Yadav on Germany trip from today, will talk to industrialists on investment in Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यूके यात्रा समाप्त हो गई. अब मुख्यमंत्री जर्मनी के उद्योगपतियों के साथ राज्य में निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 नवंबर तक जर्मनी में रहेंगे और म्यूनिख के साथ-साथ स्टटगार्ट में कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यूके यात्रा के बाद अब जर्मनी जा रहे हैं. मुख्यमंत्री यादव 28 से 30 नवंबर को जर्मनी यात्रा पर रहेंगे. इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव म्यूनिख और स्टटगार्ट में कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे और प्रदेश में निवेश और उद्योगों की संभावनाओं को लेकर यहां के उद्योगपतियों से विचार-विमर्श करेंगे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव 28 नवंबर को म्यूनिख में भारत के कौंसुलेट जर्नल की ओर से होटल फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में ब्रीफिंग दी जाएगी. इसके बाद मुख्यमंत्री बवेरिया राज्य सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे. आर्थिक विकास-संभावित सहयोग पर चर्चामुख्यमंत्री डॉ. यादव जर्मन के बवेरिया राज्य के अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास और संभावित सहयोग पर चर्चा करेंगे. एसएफसी एनर्जी के प्रमुख संस्थान का दौरा करेंगे. साथ ही बैरलोचर ग्रुप के डॉ. टोबियास रोसेंथल द्वारा अर्बन टर्बन रेस्टोरेंट में आयोजित लंच में जर्मनी के उद्योग प्रतिनिधियों से अनौपचारिक संवाद करेंगे. उद्योगपतियों के साथ इंटरैक्टिव सेशनलंच ब्रेक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में म्यूनिख सीआईआई, इन्वेस्ट इंडिया और भारत के कौंसुलेट जनरल, इंडो-जर्मन चेम्बर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से आयोजित इंटरैक्टिव सेशन में उद्योग प्रतिनिधियों के साथ निवेश पर वन-ऑन-वन मीटिंग करेंगे. इसमें प्रमुख जर्मन कंपनियों के साथ निवेश और उद्योग संबंधों को बढ़ावा देने पर फोकस किया जाएगा. वहीं शाम को मुख्यमंत्री डॉ. यादव होटल फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में प्रवासी भारतीय प्रतिनिधियों और फ्रेंडस ऑफ एमपी के साथ संवाद करेंगे. इसमें करीब 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव होटल फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में भारत के कौंसुलेट जनरल की ओर से आयोजित डिनर में शामिल होंगे.

बीना विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ कोर्ट जाएगी कांग्रेस: पटवारी ने भाजपा पर कसा तंज कहा- इधर-उधर क्यों घुमा रहे

Congress will go to court against Bina MLA Nirmala Sapre: Patwari took a dig at BJP and said- why are you beating around the bush भोपाल । प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने विधायक निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने को लेकर सवालों के जवाब दिए। सागर जिले से कांग्रेस की एकमात्र विधायक निर्मला सप्रे ने लोकसभा चुनाव के दौरान 5 मई को राहतगढ़ में सीएम के सामने बीजेपी की सदस्यता ली थी। इस कार्यक्रम में सीएम ने बीजेपी का गमछा उनके गले में डालकर पार्टी में स्वागत किया था। निर्मला को दल-बदल किए आज 84 दिन हो चुके हैं। उन्होंने अब तक विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया। अब कांग्रेस निर्मला की सदस्यता खत्म कराने को लेकर हाईकोर्ट में अगले चार-पांच दिनों में याचिका दायर करने जा रही है। 5 मई को विधायक निर्मला सप्रे को सीएम डॉ. मोहन यादव ने पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। वीडी बोले- निर्मला ने विधानसभा को जवाब दिया है बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा- मुझे जो जानकारी है उन्होंने शायद विधानसभा को लिखकर दिया कि मेरा कांग्रेस से मोह भंग हुआ है। मैं विधायक हूं। जनता की सेवा के लिए चुनकर आई हूं। जनता के लिए मेरा अधिकार है कि मुख्यमंत्री से मिलूं। जीतू बोले- निर्मला को इस्तीफा देकर चुनाव लड़वाएं निर्मला सप्रे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा- मैं मोहन यादव को चुनौती दे रहा हूं कि आप इतने लोकप्रिय मुख्यमंत्री हो तो निर्मला सप्रे को इधर से उधर क्यों घुमा रहे हो। आप में दम होगा तो आप जीतोगे, हम जनता के बीच में जाएंगे हममें दम होगा तो हम जीतेंगे। जनता के ऊपर छोड़ो, वह क्या करना चाहती है। आप पहले लोकसभा चुनाव में उन्हें ले गए और हाथ ऊंचा करा दिया कि ये हमारी पार्टी में आईं। अब डर क्यों? क्या कारण है कि आप इस्तीफा नहीं दिलवा रहे हो। अगर आपकी बहादुरी है तो इस्तीफा दिलवाओ। इस्तीफा दिलवाओ और जनता के बीच में जाओ शीतकालीन सत्र में विधानसभा में बैठने को लेकर जीतू पटवारी ने कहा- हम चाहते हैं वह सदन में बैठें। अगर बीजेपी में गई हैं, तो इस्तीफा दें। हम तो उन्हें कोर्ट जाकर हटवाएंगे ही और फिर जनता पर छोड़ेंगे कि वह क्या चाहती है। लेकिन मोहन यादव और जो विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है, उनका इस्तीफा क्यों नहीं करवा रहे हैं? निर्मला सप्रे तो डरेंगी, क्योंकि उनको हारना है। बीजेपी तो बहादुर है। इस्तीफा दिलवाओ और जनता के बीच में जाओ। सप्रे के खिलाफ इसी हफ्ते कोर्ट जाएगी कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत भी की थी। लेकिन, अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में अब कांग्रेस हाईकोर्ट जाने वाली है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार याचिका पर लीगल एक्सपर्ट के साथ काम करवा रहे हैं। संभव है कि हफ्ते भर के अंदर कांग्रेस सप्रे की विधानसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी। विजयपुर के रिजल्ट से बढ़ी निर्मला सप्रे की टेंशन उपचुनाव में कांग्रेस ने मंत्री राम निवास रावत को हराकर विजयपुर सीट जीती है। वहीं, बुधनी सीट पर 2023 विधानसभा चुनाव के मुकाबले उप चुनाव में बीजेपी की लीड 91000 तक घटाने में कामयाबी मिली है। कांग्रेस इसे बड़ी सफलता मानकर चल रही है। पार्टी उत्साहित है। ऐसे में कांग्रेस निर्मला सप्रे को इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दे रही है। वहीं, विजयपुर के रिजल्ट के बाद अब निर्मला सप्रे टेंशन में हैं। राम निवास रावत छह बार के विधायक थे। अपनी ही सीट पर सत्ताधारी दल के टिकट पर उपचुनाव लड़े और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। निर्मला तो पहली बार विधायक बनी हैं। ऐसे में उन्हें डर है कि उपचुनाव में अगर स्थानीय भाजपाइयों ने साथ ना दिया तो उनकी मुश्किल बढ़ सकती है।

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