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संगठन चुनाव प्रभारियों के अलावा बीजेपी ने तीन जिलों में संगठन चुनाव के लिए एक-एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए

भोपाल इन दिनों बीजेपी के संगठन चुनाव चल रहे हैं। 15 दिसंबर तक मध्यप्रदेश के 1300 मंडलों में मंडल अध्यक्ष और 15 से 31 दिसंबर तक जिला अध्यक्षों के चुनाव होने हैं। संगठन चुनाव को लेकर बीजेपी ने जिला निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किए हैं। संगठन चुनाव प्रभारियों के अलावा बीजेपी ने तीन जिलों में संगठन चुनाव के लिए एक-एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। ये पर्यवेक्षक अपने प्रभार के जिलों में कार्यकर्ताओं और सक्रिय सदस्यों की बैठकें लेकर मंडल अध्यक्ष और जिला अध्यक्षों के लिए नाम निकालेंगे। इन नामों को संगठन तक पहुंचाएंगे। बुधवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में इन पर्यवेक्षकों की बैठक बुलाई गई है। इन नेताओं को इन जिलों का बनाया गया पर्यवेक्षक     ग्वालियर नगर, ग्वालियर ग्रामीण, श्योपुर: सुरेश आर्य (पूर्व संगठन मंत्री )     सागर, दमोह, पन्ना: नरेंद्र बिरथरे (पूर्व विधायक)     शिवपुरी, गुना, अशोनगर: अरुण भीमावद (विधायक)     छतरपुर, टीकमगढ, निवाड़ी: सदानंद गोडबोले (पूर्व मेयर)     सतना, मैहर, रीवा: उमेश शुक्ला (पूर्व विधायक)     मऊगंज, सीधी, सिंगरौली: रामलाल रौतेल (पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री)     शहडोल, अनूपपुर, उमरिया: एससी मोर्चे के महामंत्री नेताम     कटनी, मंडला, डिंडौरी: लता ऐलकर (पूर्व प्रदेशाध्यक्ष महिला मोर्चा)     छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट: अलकेश आर्य (जिलाध्यक्ष बैतूल)     पांढुर्णा, बैतूल, हरदा: जयप्रकाश चतुर्वेदी (पूर्व जिलाध्यक्ष)     भोपाल, रायेसन, नर्मदापुरम: राजेंद्र पांडे (विधायक)     विदेशा, राजगढ, भोपाल ग्रामीण: अभिलाष पांडे (विधायक)     विदिशा, राजगढ़, शाजापुर: लता वानखेडे (सांसद)     उज्जेन नगर, उज्जैन ग्रामीण, आगर: भगवानदास सबनानी (विधायक)     रतलाम मंदसौर, नीमच: सीताराम यादव (सदस्य ओबीसी आयोग)     झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी: सतेंद्र भूषण (पूर्व संगठन मंत्री)     खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर: महेंद्र भटनागर  

विधानसभा चुनाव के नतीजों के 10 दिन बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर महायुति के दलों के बीच सहमति नहीं बनी

मुंबई महाराष्ट्र में सरकार के गठन में हो रही देरी में एकनाथ शिंदे की भूमिका होने से शिवसेना ने इनकार कर दिया है। साथ ही पार्टी ने यह भी कहा है कि शिंदे के सम्मान का ध्यान भारतीय जनता पार्टी को रखना होगा। विधानसभा चुनाव के नतीजों के 10 दिन बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर महायुति के दलों के बीच सहमति नहीं बनती दिख रही है। पूर्व राज्य मंत्री दीपक केसरकर ने कहा ‘हमारे नेता ने पहले ही साबित कर दिया है कि शिवसेना का असली प्रतिनिधित्व कौन करता है। अब यह दिल्ली पर निर्भर करता है कि वह कैसे उनका कद बरकरार रखते हैं। हम उस निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।’ राज्य में सरकार गठन में हो रही देरी पर किए गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘पांच दिसंबर को शपथ ग्रहण समारोह होना है, लेकिन कई बेबुनियाद अफवाहें फैलाई जा रही हैं। कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर एकनाथ शिंदे की सरकार गठन में हो रही देरी में कोई भूमिका नहीं है। भाजपा की आंतरिक चयन प्रक्रिया उनका मामला है। शिंदे पहले ही बता चुके हैं कि वे उनके द्वारा लिए गए किसी भी फैसले को स्वीकार करेंगे।’ केसरकार ने महायुति के भीतर असंतोष या मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए इन्हें विपक्ष द्वारा फैलाई गई गलत सूचना बताया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केसरकर यह भी साफ कर चुके हैं कि मुंबई के आजाद मैदान में होने वाला शपथ ग्रहण कार्यक्रम टाला नहीं जाएगा। इससे पहले भाजपा के महाराष्ट्र प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने 5 दिसंबर को कार्यक्रम होने की बात कही थी। एनसीपी नेता अजित पवार भी जानकारी दे चुके हैं कि सीएम भाजपा से होगा और डिप्टी सीएम एनसीपी और शिवसेना को मिलेंगे। भाजपा ने बढ़ाई रफ्तार महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति का नेतृत्व करने वाली भाजपा ने मुंबई में अपनी विधायक दल की बैठक के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और रूपाणी को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नामित किया, जहां विधायक अपने नेता का चुनाव करेंगे। रूपाणी ने राजकोट में अपने आवास पर कहा, ‘महाराष्ट्र भाजपा विधायक दल की बैठक मंगलवार या बुधवार को होगी। भाजपा विधायकों की उस बैठक में आम राय से एक नेता चुनने का प्रयास किया जाएगा। मैं और सीतारमण जी पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में भाग लेंगे और आलाकमान को एक नेता की घोषणा के लिए एक रिपोर्ट सौंपेंगे, जो मुख्यमंत्री बन सकता है बशर्ते इस तरह के फॉर्मूले को अंतिम रूप दिया जाए।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि महाराष्ट्र को इस बार भाजपा का मुख्यमंत्री मिलेगा क्योंकि (निवर्तमान मुख्यमंत्री) एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पार्टी के उम्मीदवार (शीर्ष पद के लिए) का समर्थन करेंगे।’ आर्थिक राजधानी में पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि नवनिर्वाचित भाजपा विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार सुबह दक्षिण मुंबई के विधान भवन में होगी।

महाराष्ट्र में किसे मिलेगा कौन सा पद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे तय

मुंबई महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर रस्साकसी के बीच दिल्ली में महायुति की बैठक हुई. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई इस बैठक में उन्होंने मंत्रिमंडल में शामिल होने की इच्छा रखने वाले विधायकों का रिपोर्ट मांगा है. इस बड़ी बैठक की इनसाइड स्टोरी सामने आई है, जिसमें पता चला है कि अमित शाह ने विधायकों का रिपोर्ट कार्ड किस आधार पर मांगा. रिपोर्ट कार्ड में देखा जाएगा कि लोकसभा चुनाव के दौरान संबंधित विधायक का प्रदर्शन कैसा रहा, क्या संबंधित व्यक्ति ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ईमानदारी से काम किया? अगर कैबिनेट में कोई महत्वाकांक्षी पूर्व मंत्री है तो संबंधित मंत्री ने महायुति सरकार के दौरान मंत्रालय में कैसे काम किया? संबंधित व्यक्ति मंत्रालय में काम करने के लिए कितना समय दे रहा था. रिपोर्ट कार्ड के साथ महायुति के नेताओं को बुलाया जाएगा दिल्ली महायुति में अपने घटक दल के विधायकों के साथ मंत्री का व्यवहार कैसा था? मंत्री ने केंद्रीय और राज्य निधि का आवंटन कैसे किया? क्या ऐसी स्थिति थी कि संबंधित मंत्री महायुति को परेशानी में डाल देंगे? क्या उस नेता कोई विवादास्पद बयान दिया? इन मुद्दों का रिपोर्ट कार्ड लेकर अमित शाह महायुति नेताओं को दिल्ली बुलाएंगे. महायुति के नेताओं के आज दिल्ली जाने की संभावना है. बीजेपी ने बनाई विधायक दल की बैठक की योजना बीजेपी संसदीय बोर्ड दो पर्यवेक्षकों को मुंबई भेज रहा है, जिसमें गुजरात के पूर्व सीएम और पंजाब के पार्टी प्रभारी विवेक रूपानी और वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण शामिल हैं. संबंधित घटनाक्रम में, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने बीजेपी एमएलसी प्रवीण दारेकेर के साथ आजाद मैदान में व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया, जहां गुरुवार को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा.

एमपी गजब: पिटा भाजपाईयों ने पिटें भाजपाई और एफआईआर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर क्यों?

MP Amazing: Why did BJP workers beat up BJP workers and FIR against Congress workers? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज उज्जैन के महिदपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर झूठे एवं द्वेषपूर्ण प्रकरणों के विरोध में प्रदर्शन का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार और प्रशासन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर झूठे प्रकरण लादने की हठधर्मिता बंद नहीं हुई, तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी। भाजपा की आपसी गुटबाजी का बोझ कांग्रेस पर क्यों? पटवारी ने सवाल उठाया, “जब लड़ाई भाजपाइयों की है, मारपीट पूर्व विधायक के साथ होती है, और हमलावर भाजपा कार्यकर्ता हैं, तो फिर FIR कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर क्यों?” यह भाजपा सरकार की हठधर्मिता और प्रशासन की पक्षपाती कार्रवाई का स्पष्ट प्रमाण है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का स्वाभिमान सर्वोपरि उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ी है। अगर मुख्यमंत्री के गृह जिले की पुलिस पारदर्शिता से काम नहीं करती है, तो कांग्रेस गांधीवादी तरीके से लोकतंत्र का पाठ पढ़ाना जानती है। 24 घंटे का अल्टीमेटम प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि 24 घंटे के भीतर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे प्रकरण वापस नहीं लिए गए, तो उज्जैन की सड़कों पर कांग्रेस का सैलाब दिखाई देगा। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार और उनका पिट्ठू प्रशासन यह सुन ले कि कांग्रेस अन्याय सहने वाली नहीं है।” कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कार्यकर्ताओं पर झूठे आरोप मढ़ने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर स्तर पर इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी।

‘CM मोहन आप विदेश क्या गए यहां…’, उज्जैन में पूर्व विधायक की पिटाई मामले पर उमंग सिंघार का तंज

‘CM Mohan, why did you go abroad here…’, Umang Singhar’s taunt on the case of beating of former MLA in Ujjain मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन के महिदपुर विधानसभा में प्रभारी मंत्री और सांसद के सामने दो गुटों की भिड़ंत हो गई. इस दौरान पूर्व विधायक बहादुर सिंह चौहान के साथ जमकर मारपीट हुई. प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल और स्थानीय सांसद अनिल फिरोजिया ने मैदान में उतर कर बीच बचाव किया. बीजेपी के दो गुटों की भिड़ंत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. अब इस मामले को लेकर अब कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने बीजेपी पर तंज कसा है. उंमग सिंघार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ट्वीट कर कहा, “ये है संस्कारित और अनुशासित पार्टी बीजेपी की असलियत. उज्जैन जिले की महिदपुर विधानसभा में पूर्व विधायक बहादुर सिंह चौहान की प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल और सांसद अनिल फिरोजिया की मौजूदगी में पिटाई हुई.” बिना बुलाए मंच पर जाने वालों के साथ यही होगा- सिंघार उन्होंने कहा, “खास बात ये कि पिटाई करने वाले बीजेपी के ही कार्यकर्ता थे. अब बिना बुलाए मंच पर जाने वालों के साथ तो यही होगा. सीएम साहेब, आप विदेश क्या गए, यहां आपके गृह जिले में ही पार्टी वाले मारपीट करने लगे. ये न तो राजनीतिक संस्कार और सामाजिक व्यवहार हैं.” क्या है पूरा मामला? खेड़ा खजुरिया गांव में बिजली विभाग के ग्रिड और स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया था. इस बीच कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों से कहासुनी हो गई. विवाद बढ़ने के बाद पूर्व विधायक बहादुर सिंह चौहान पर हमला हो गया. बीजेपी नेता प्रताप सिंह आर्य ने बताया कि बहादुर सिंह चौहान के मंच से उतरते ही विवाद की स्थिति बनने लगी. देखते-देखते अचानक मारपीट शुरू हो गई.

रायपुर में भाजपा ने निकाय चुनाव की तैयारियां तेज की, जातीय संतुलन पर दिया जोर

रायपुर रायपुर दक्षिण विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद भाजपा ने अपनी पूरी ताकत अब निकाय और पंचायत चुनावों में झोंकने की तैयारी कर ली है। प्रदेश भाजपा संगठन में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने वाली है, जिसके तहत पहले चरण में बूथ कमेटियों का गठन किया जाएगा। इसके बाद मंडल और जिला अध्यक्षों का चुनाव होगा, जिसमें जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई जाएगी। 405 मंडलों में होंगे चुनाव, नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की कवायद एक से 15 दिसंबर के बीच प्रदेश के 405 मंडलों में मंडल अध्यक्षों का चुनाव होगा, जबकि 15 से 30 दिसंबर के बीच जिला अध्यक्षों का चयन किया जाएगा। संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि इस प्रक्रिया में न केवल अध्यक्ष बल्कि प्रतिनिधियों का भी चुनाव किया जाएगा। खासतौर पर नाराज कार्यकर्ताओं को फिर से पार्टी के साथ जोड़ने और उनकी समस्याओं का समाधान करने पर जोर दिया जाएगा। जातीय समीकरणों पर फोकस रहेगा ताकि विभिन्न समुदायों के बीच संतुलन कायम किया जा सके और निकाय चुनावों में किसी भी प्रकार की असंतोष की स्थिति से बचा जा सके। भाजपा की रणनीति स्पष्ट है: निकाय और पंचायत चुनावों में भी जीत का परचम लहराना है। सदस्यता अभियान में रिकॉर्ड वृद्धि भाजपा ने अपने हालिया सदस्यता अभियान में 53 लाख नए सदस्य जोड़ने का दावा किया है। अब 30 नवंबर तक बूथ कमेटियों का चुनाव पूरा करने की तैयारी है। पार्टी नेताओं ने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातें तेज कर दी हैं, ताकि चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा सके। कांग्रेस भी बदलाव की तैयारी में रायपुर दक्षिण उपचुनाव में हार के बाद कांग्रेस में भी हलचल तेज हो गई है। पार्टी अब समीक्षा से आगे बढ़कर बड़े बदलावों की तैयारी कर रही है। दिल्ली से आने वाली सूची का इंतजार है, जिसमें संगठनात्मक फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। उपचुनाव में हार ने कांग्रेस को मजबूर कर दिया है कि वह जमीनी स्तर पर रणनीति को नए सिरे से तैयार करे। भाजपा-कांग्रेस में सीधा मुकाबला निकाय और पंचायत चुनावों में दोनों दलों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। जहां भाजपा जीत के लिए जातीय संतुलन और संगठनात्मक मजबूती पर फोकस कर रही है, वहीं कांग्रेस अपनी हार से सबक लेकर रणनीति में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है। आने वाले चुनावी नतीजे यह तय करेंगे कि जनता का भरोसा किस दल पर कायम रहता है।

बुधनी उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने जीत तो हासिल की, लेकिन कांग्रेस के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ने बीजेपी की चिंता बढ़ाई

सीहोर  बुधनी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी रामाकांत भार्गव ने जीत तो हासिल की, लेकिन कांग्रेस के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। 23 नवंबर 2024 को हुए इस चुनाव में भाजपा को मात्र नौ प्रतिशत वोटों से जीत मिली, जबकि कुछ महीने पहले ही हुए विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान को लगभग 70% वोट मिले थे। इस बार भाजपा को 52% और कांग्रेस को 43% वोट मिले। कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी और भाजपा के वोट शेयर में गिरावट ने भाजपा के लिए चिंता का विषय पैदा कर दिया है। खासकर 136 पोलिंग बूथ पर मिली हार और 98 बूथ पर बेहद कम अंतर से जीत ने भाजपा के लिए आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी है। 20 साल बाद ऐसी टक्कर बुधनी विधानसभा में लगभग 20 साल बाद इतना रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। रामाकांत भार्गव ने जीत तो हासिल की, लेकिन दोनों दलों के लिए यह चुनाव सीख देने वाला रहा। पिछले दो विधानसभा चुनावों के नतीजों पर गौर करें तो कांग्रेस ने भले ही चुनाव हारा हो, लेकिन उसके वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। बीजेपी का प्रदर्शन गिरा भाजपा के प्रदर्शन में गिरावट साफ दिखी। 2018 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 43 पोलिंग बूथ पर हार का सामना करना पड़ा था। 2023 के विधानसभा चुनाव में यह संख्या घटकर 16 रह गई थी। लेकिन हाल ही में हुए उपचुनाव में भाजपा को 136 पोलिंग बूथ पर हार मिली। 16 से 136 तक पहुंचने वाली हार के आंकड़ों ने भाजपा के लिए आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी है। 98 बूथों पर कांटे की टक्कर इस उपचुनाव में 98 पोलिंग बूथ ऐसे रहे, जहां दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर रही। इन बूथों पर जीत और हार का अंतर 50 वोटों से भी कम रहा। भाजपा 50 ऐसे बूथों पर जीती, जहां जीत का अंतर 50 से कम था। कांग्रेस 48 ऐसे बूथों पर जीती, जहां जीत का अंतर 50 से कम था। इन बूथों पर जीत-हार का अंतर 2 से लेकर 49 वोटों तक रहा। कई बूथ ऐसे रहे, जहां जीत का अंतर सिर्फ 2, 7, 9 और 10 वोटों का रहा। डोबा और महागांव बूथ पर भाजपा सिर्फ 2 वोटों से जीती। नारायणपुर में 13 वोट, ग्वाडिया में 6 वोट, जोशीपुरा में 10 वोट, बुधनी के पांच बूथों पर 30, 49, 6, 18, 35 वोटों से जीत मिली। किरार समाज पर भारी बारेला वोट इस चुनाव में बारेला समाज के वोट किरार समाज के वोटों पर भारी पड़े। कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल किरार समाज से आते हैं। विधानसभा क्षेत्र में किरार समाज के लगभग 23,000 वोट हैं। ऐसा माना जा रहा था कि किरार वोट बैंक कांग्रेस के पक्ष में जाएगा। लेकिन राजकुमार पटेल को अपने समाज का पूरा समर्थन नहीं मिला। बारेला समाज के वोट भाजपा की तरफ चले गए। भाजपा प्रत्याशी को 38 पोलिंग बूथ पर बारेला समाज के 12,000 से ज्यादा वोट मिले। 16 अन्य बूथों पर बारेला समाज के 4,000 से ज्यादा वोट भाजपा को मिले। कुल मिलाकर भाजपा को बारेला समाज के 16,000 से ज्यादा वोट मिले, जो उसकी जीत की बड़ी वजह बने। किरार समाज में भी भाजपा ने सेंध लगाई। इस वजह से राजकुमार पटेल अपने गृह क्षेत्र से बड़ी बढ़त नहीं बना पाए। कांग्रेस का भी यही हाल कांग्रेस को 48 पोलिंग बूथ पर 50 से भी कम वोटों से जीत मिली। कई बूथ ऐसे थे जहां जीत का अंतर सिर्फ 1, 2, 5, 7 और 11 वोटों का रहा। तीन बूथों पर 1 वोट और एक बूथ पर 2 वोटों से कांग्रेस जीती। सलकनपुर में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से देवीलोक का निर्माण हो रहा है। लेकिन सलकनपुर पंचायत के मतदाताओं ने भाजपा को 1 वोट से हरा दिया। यह भाजपा के लिए चिंता का विषय है। रमाकांत भार्गव ने जिस गांव को गोद लिया, उसमें जीत बसंतपुर गांव में बारेला, बंजारा, गोंड और अन्य समाज के लोग रहते हैं। रमाकांत भार्गव ने सांसद रहते हुए इस गांव को गोद लिया था, लेकिन अपने कार्यकाल में एक बार भी गांव नहीं गए। पिछले साल ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया था। लेकिन फिर भी बसंतपुर के मतदाताओं ने रमाकांत भार्गव को 540 वोट देकर 349 वोटों से जीत दिलाई। राजकुमार पटेल को यहां सिर्फ 191 वोट मिले। गांव में कुल 796 वोट पड़े थे।

बीजेपी के सामने अगली बड़ी चुनौती पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष तय करना , संभावित नामों में शिवराज और देवेंद्र फडणवीस, डॉ सरोज पांडेय का नाम भी

नई दिल्ली  हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में शानदार जीत के बाद बीजेपी के सामने अगली बड़ी चुनौती पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष तय करना होगा। हालांकि बीजेपी की ओर से नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर कवायद तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली मुख्यालय में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों पर पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ समेत कई दिग्गज नेता नजर रखे हुए हैं। इस बीच कुछ नाम सामने आए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इन नामों में से ही एक नाम बीजेपी के नए अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल सकता है। ये नाम हैं- शिवराज सिंह चौहान, डॉ सरोज पांडेय और देवेंद्र फडणवीस। सूत्रों ने बताया कि बीजेपी अध्यक्ष का नाम तय करने के लिए पीएम मोदी, अमित शाह और आरएसएस के नेताओं के बीच बैठक के बाद ये तीन नाम सामने आए हैं। शिवराज सिंह चौहान, देवेंद्र फडणवीस और डॉ सरोज पाण्डेय में से ही कोई अध्यक्ष बनाया जाएगा। चर्चा में क्यों हैं ये नाम? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान बीजेपी के दिग्गज नेता हैं। पार्टी के अंदर उनकी अच्छी साख है। ऐसे में वह प्रबल दावेदार हैं। उधर देवेंद्र फडणवीस बीजेपी के युवा चेहरे हैं। महाराष्ट्र जीत के बाद बीजेपी फडणवीस को भी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने को लेकर पार्टी मंथन कर रही है। फडणवीस को पीएम मोदी और अमित शाह का भी करीबी माना जाता है। वहीं बीजेपी इस बार चौंकाने वाला फैसला करते हुए बीजेपी की कद्दावर महिला नेता डॉ सरोज पाण्डेय को भी अध्यक्ष पद पर बैठा सकती है। उधर राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा भी है कि बीजेपी का नया अध्यक्ष दक्षिण भारत से हो सकता है, क्योंकि इस समय बीजेपी के अहम पदों में से किसी भी पद पर दक्षिण भारत का नेता नहीं है। लोकसभा चुनाव के लिए बढ़ाया गया था नड्डा का कार्यकाल बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जून तक बढ़ा दिया गया था। उनका कार्यकाल इस साल जनवरी में खत्म हो रहा था। बीजेपी में नए अध्यक्ष के चयन से पहले संगठन का चुनाव जरूरी होता है, जिसमें आमतौर पर 6 महीने का समय लगता है। इसलिए वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 6 महीने तक बढ़ा दिया गया था।

आज से जर्मनी यात्रा पर CM मोहन यादव, मध्य प्रदेश में निवेश पर उद्योगपतियों से करेंगे बातचीत

CM Mohan Yadav on Germany trip from today, will talk to industrialists on investment in Madhya Pradesh मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यूके यात्रा समाप्त हो गई. अब मुख्यमंत्री जर्मनी के उद्योगपतियों के साथ राज्य में निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव 30 नवंबर तक जर्मनी में रहेंगे और म्यूनिख के साथ-साथ स्टटगार्ट में कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यूके यात्रा के बाद अब जर्मनी जा रहे हैं. मुख्यमंत्री यादव 28 से 30 नवंबर को जर्मनी यात्रा पर रहेंगे. इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव म्यूनिख और स्टटगार्ट में कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे और प्रदेश में निवेश और उद्योगों की संभावनाओं को लेकर यहां के उद्योगपतियों से विचार-विमर्श करेंगे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव 28 नवंबर को म्यूनिख में भारत के कौंसुलेट जर्नल की ओर से होटल फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में ब्रीफिंग दी जाएगी. इसके बाद मुख्यमंत्री बवेरिया राज्य सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे. आर्थिक विकास-संभावित सहयोग पर चर्चामुख्यमंत्री डॉ. यादव जर्मन के बवेरिया राज्य के अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास और संभावित सहयोग पर चर्चा करेंगे. एसएफसी एनर्जी के प्रमुख संस्थान का दौरा करेंगे. साथ ही बैरलोचर ग्रुप के डॉ. टोबियास रोसेंथल द्वारा अर्बन टर्बन रेस्टोरेंट में आयोजित लंच में जर्मनी के उद्योग प्रतिनिधियों से अनौपचारिक संवाद करेंगे. उद्योगपतियों के साथ इंटरैक्टिव सेशनलंच ब्रेक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में म्यूनिख सीआईआई, इन्वेस्ट इंडिया और भारत के कौंसुलेट जनरल, इंडो-जर्मन चेम्बर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से आयोजित इंटरैक्टिव सेशन में उद्योग प्रतिनिधियों के साथ निवेश पर वन-ऑन-वन मीटिंग करेंगे. इसमें प्रमुख जर्मन कंपनियों के साथ निवेश और उद्योग संबंधों को बढ़ावा देने पर फोकस किया जाएगा. वहीं शाम को मुख्यमंत्री डॉ. यादव होटल फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में प्रवासी भारतीय प्रतिनिधियों और फ्रेंडस ऑफ एमपी के साथ संवाद करेंगे. इसमें करीब 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव होटल फिएर यारत्साइतेन केम्पिंस्की में भारत के कौंसुलेट जनरल की ओर से आयोजित डिनर में शामिल होंगे.

बीना विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ कोर्ट जाएगी कांग्रेस: पटवारी ने भाजपा पर कसा तंज कहा- इधर-उधर क्यों घुमा रहे

Congress will go to court against Bina MLA Nirmala Sapre: Patwari took a dig at BJP and said- why are you beating around the bush भोपाल । प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने विधायक निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने को लेकर सवालों के जवाब दिए। सागर जिले से कांग्रेस की एकमात्र विधायक निर्मला सप्रे ने लोकसभा चुनाव के दौरान 5 मई को राहतगढ़ में सीएम के सामने बीजेपी की सदस्यता ली थी। इस कार्यक्रम में सीएम ने बीजेपी का गमछा उनके गले में डालकर पार्टी में स्वागत किया था। निर्मला को दल-बदल किए आज 84 दिन हो चुके हैं। उन्होंने अब तक विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया। अब कांग्रेस निर्मला की सदस्यता खत्म कराने को लेकर हाईकोर्ट में अगले चार-पांच दिनों में याचिका दायर करने जा रही है। 5 मई को विधायक निर्मला सप्रे को सीएम डॉ. मोहन यादव ने पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। वीडी बोले- निर्मला ने विधानसभा को जवाब दिया है बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा- मुझे जो जानकारी है उन्होंने शायद विधानसभा को लिखकर दिया कि मेरा कांग्रेस से मोह भंग हुआ है। मैं विधायक हूं। जनता की सेवा के लिए चुनकर आई हूं। जनता के लिए मेरा अधिकार है कि मुख्यमंत्री से मिलूं। जीतू बोले- निर्मला को इस्तीफा देकर चुनाव लड़वाएं निर्मला सप्रे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा- मैं मोहन यादव को चुनौती दे रहा हूं कि आप इतने लोकप्रिय मुख्यमंत्री हो तो निर्मला सप्रे को इधर से उधर क्यों घुमा रहे हो। आप में दम होगा तो आप जीतोगे, हम जनता के बीच में जाएंगे हममें दम होगा तो हम जीतेंगे। जनता के ऊपर छोड़ो, वह क्या करना चाहती है। आप पहले लोकसभा चुनाव में उन्हें ले गए और हाथ ऊंचा करा दिया कि ये हमारी पार्टी में आईं। अब डर क्यों? क्या कारण है कि आप इस्तीफा नहीं दिलवा रहे हो। अगर आपकी बहादुरी है तो इस्तीफा दिलवाओ। इस्तीफा दिलवाओ और जनता के बीच में जाओ शीतकालीन सत्र में विधानसभा में बैठने को लेकर जीतू पटवारी ने कहा- हम चाहते हैं वह सदन में बैठें। अगर बीजेपी में गई हैं, तो इस्तीफा दें। हम तो उन्हें कोर्ट जाकर हटवाएंगे ही और फिर जनता पर छोड़ेंगे कि वह क्या चाहती है। लेकिन मोहन यादव और जो विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है, उनका इस्तीफा क्यों नहीं करवा रहे हैं? निर्मला सप्रे तो डरेंगी, क्योंकि उनको हारना है। बीजेपी तो बहादुर है। इस्तीफा दिलवाओ और जनता के बीच में जाओ। सप्रे के खिलाफ इसी हफ्ते कोर्ट जाएगी कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को शिकायत भी की थी। लेकिन, अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में अब कांग्रेस हाईकोर्ट जाने वाली है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार याचिका पर लीगल एक्सपर्ट के साथ काम करवा रहे हैं। संभव है कि हफ्ते भर के अंदर कांग्रेस सप्रे की विधानसभा सदस्यता खत्म करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी। विजयपुर के रिजल्ट से बढ़ी निर्मला सप्रे की टेंशन उपचुनाव में कांग्रेस ने मंत्री राम निवास रावत को हराकर विजयपुर सीट जीती है। वहीं, बुधनी सीट पर 2023 विधानसभा चुनाव के मुकाबले उप चुनाव में बीजेपी की लीड 91000 तक घटाने में कामयाबी मिली है। कांग्रेस इसे बड़ी सफलता मानकर चल रही है। पार्टी उत्साहित है। ऐसे में कांग्रेस निर्मला सप्रे को इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दे रही है। वहीं, विजयपुर के रिजल्ट के बाद अब निर्मला सप्रे टेंशन में हैं। राम निवास रावत छह बार के विधायक थे। अपनी ही सीट पर सत्ताधारी दल के टिकट पर उपचुनाव लड़े और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। निर्मला तो पहली बार विधायक बनी हैं। ऐसे में उन्हें डर है कि उपचुनाव में अगर स्थानीय भाजपाइयों ने साथ ना दिया तो उनकी मुश्किल बढ़ सकती है।

प्रियंका गांधी ने शपथ ली: राहुल की तरह हाथ में संविधान की कॉपी पकड़ी

Priyanka Gandhi took oath: held a copy of the Constitution in her hand like Rahul. नई दिल्ली । संसद के शीतकालीन सत्र का गुरुवार को तीसरा दिन है। प्रियंका गांधी पहली बार संसद पहुंचीं। उन्होंने लोकसभा में सांसद पद की शपथ ली। इस दौरान हाथ में संविधान की कॉपी ली। प्रियंका के साथ उनकी मां सोनिया और राहुल गांधी भी संसद पहुंचे। प्रियंका वायनाड सीट से उपचुनाव जीती हैं। प्रियंका के साथ नांदेड़ से उपचुनाव जीतने वाले रविंद्र चव्हाण ने भी शपथ ली। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही अडाणी मुद्दे पर हंगामा होने लगा। राज्यसभा में भी हंगामा हुआ। इसके बाद दोनों सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। राहुल ने बुधवार को संसद के बाहर कहा था कि अडाणी पर अमेरिका में 2 हजार करोड़ की रिश्वत देने का आरोप है। उन्हें जेल में होना चाहिए। मोदी सरकार उन्हें बचा रही है। पहली बार संसद में गांधी परिवार के तीन सदस्य केरल के वायनाड लोकसभा उपचुनाव में प्रियंका गांधी की जीत के बाद लोकसभा में दोबारा कांग्रेस के 99 सांसद हो गए हैं। वायनाड सीट राहुल गांधी ने छोड़ी थी, जबकि नांदेड़ सीट कांग्रेस सांसद बसंतराव चव्हाण के निधन के चलते खाली हुई थी। इन पर हाल ही में उपचुनाव हुए हैं और दोनों ही सीटें कांग्रेस के पास वापस आ गई हैं। यह पहली बार हुआ है कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े गांधी परिवार के 3 सदस्य एक साथ संसद के सदस्य होंगे। राहुल गांधी रायबरेली से और प्रियंका गांधी वाड्रा वायनाड से लोकसभा सांसद हैं। जबकि सोनिया गांधी राजस्थान से राज्य सभा सांसद हैं।

पदाधिकारियों के लिए संगठन ने तय कर दी है गाइड लाइन, 40 वर्ष तक उम्र के कार्यकर्ता ही मंडल अध्यक्ष बनेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश में संगठन चुनाव के तहत दिसंबर में भाजपा के मंडल और जिला अध्यक्ष बना दिए जाएंगे। चुनाव दो चरणों में होंगे। इसकी तैयारी के लिए बुधवार शाम प्रदेश कार्यालय में कार्यशाला आयोजित की जाएगी। पार्टी संगठन ने केंद्रीय नेतृत्व की तय गाइडलाइन के तहत कार्ययोजना बनाई है। जिन पर आर्थिक और आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, ऐसे नेताओं को जिला और मंडल अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। ऐसे नेता संगठन चुनाव में ही हिस्सा नहीं ले सकेंगे। आयुसीमा तय वहीं, मंडल और जिला अध्यक्ष के लिए क्रमश: 40 और 60 वर्ष की आयु सीमा भी निर्धारित की गई है, यानी पार्टी युवा और वरिष्ठता दोनों ही श्रेणी के नेताओं को अवसर देगी। इसी तरह, अपने चहेतों को मंडल और जिला अध्यक्ष बनाने के लिए सांसद, विधायक या मंत्री की अनुशंसा भी नहीं चलेगी। इसको लेकर पार्टी संगठन ने पहले ही गाइड लाइन तय कर दी है। कार्यशाला में ये रहेंगे उपस्थित भाजपा के प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने बताया कि बुधवार को होने वाली कार्यशाला को पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, पार्टी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी डा. महेंद्र सिंह एवं प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद संबोधित करेंगे। कार्यशाला में प्रदेश कोर कमेटी, पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, संभाग प्रभारी, लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद, विधायक, जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी, महापौर, नेता प्रतिपक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष व महामंत्री, प्रदेश निर्वाचन टोली, प्रदेश सक्रिय सदस्यता टोली, जिला निर्वाचन टोली, बूथ प्रबंधन जिला प्रभारी उपस्थित रहेंगे। बूथ समितियों के गठन की सराहना वहीं, मप्र के भाजपा संगठन की बूथ समितियों के गठन की शीर्ष नेतृत्व ने सराहना की है। अब पार्टी का फोकस मंडल और जिला अध्यक्ष के संगठन चुनाव पर है। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई बैठक में मिली गाइडलाइन के बाद प्रदेश संगठन ने यह कार्यशाला आयोजित की है। कार्यशाला के बाद पार्टी संगठन बुधनी और विजयपुर उपचुनाव को लेकर भी चर्चा करेगा।

भाजपा नेतृत्व कुछ अन्य नामों पर भी विचार कर रही, ओबीसी और मराठा समुदाय से किसी नेता को CM बनाने के विकल्प भी शामिल

मुंबई महाराष्ट्र में भाजपा नेतृत्व वाली महायुति की सरकार के गठन में अभी कुछ समय लग सकता है। भाजपा नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम को लेकर मंथन जारी है। जैसे ही नाम तय होगा, भाजपा विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी। इसके बाद नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। इस बीच, शिवसेना और एनसीपी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री के नाम का निर्णय भाजपा नेतृत्व पर छोड़ दिया है। दोनों दलों ने कहा है कि जो भी निर्णय लिया जाएगा वह दोनों घटक दलों के लिए मान्य होगा। महायुति की भारी जीत के बाद भाजपा के पास मुख्यमंत्री पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री और महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे देवेंद्र फडणवीस का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व अभी तक इस पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है और अटकलें हैं कि भाजपा नेतृत्व कुछ अन्य नामों पर भी विचार कर रहा है। इनमें ओबीसी और मराठा समुदाय से किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने के विकल्प भी शामिल हैं। यह लगभग स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री भाजपा का ही होगा, जबकि एनसीपी और शिवसेना से उपमुख्यमंत्री पद पर नेता होंगे। भाजपा के मुख्यमंत्री रहे देवेंद्र फडणवीस पिछली सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे थे। अब यह संभावना जताई जा रही है कि नई सरकार में एकनाथ शिंदे को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि, इस बारे में अभी तक केंद्रीय स्तर पर औपचारिक विचार-विमर्श नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार, शिवसेना अपने विधायकों को साधने के लिए एकनाथ शिंदे को राज्य के नेतृत्व में बनाए रखना चाहती है। शिंदे को केंद्र में भेजने से शिवसेना को नुकसान हो सकता है। इसलिए संभावना है कि शिंदे राज्य सरकार में भी शामिल रहें। इसके अलावा, एक फॉर्मूला यह भी चर्चा में है कि शिंदे को केंद्र में भेजा जाए और राज्य में उनके बेटे को उपमुख्यमंत्री बना दिया जाए। अब देखना यह है कि भाजपा और महायुति के अन्य घटक दलों के बीच इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय कब और कैसे लिया जाएगा।

महाराष्ट्र चुनाव में विजयी निर्दलीय उम्मीदवार ने भाजपा को बिना शर्त समर्थन दिया

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में विजयी निर्दलीय विधायक शिवाजी पाटिल ने निवर्तमान उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की। पार्टी के एक पदाधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। महाराष्ट्र में 20 नवंबर को हुए राज्य विधानसभा चुनाव से पहले पाटिल कोल्हापुर जिले की चांदगढ़ सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक थे। हालांकि, महायुति सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे के तहत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने इस सीट से अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया। शिवाजी पाटिल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और राकांपा के राजेश पाटिल को हराया। पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि उन्होंने रविवार रात फडणवीस से मुलाकात कर भाजपा को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की और इस आशय का एक पत्र सौंपा। फडणवीस ने आभार स्वरूप उन्हें शॉल भेंट की। शनिवार को घोषित राज्य चुनाव परिणामों में महायुति गठबंधन ने 288 विधानसभा में से 230 सीट हासिल कीं। महायुति गठबंधन में भाजपा, निवर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा शामिल है। सहयोगी दलों में भाजपा ने 149 सीट पर चुनाव लड़कर 132 सीट जीतीं, जबकि शिवसेना और राकांपा को क्रमशः 57 और 41 सीट मिलीं। राज्य में सरकार बनाने को लेकर किसी पार्टी या गठबंधन के लिए बहुमत का आंकड़ा 145 है। सबका ध्यान फडणवीस पर है, जिन्हें तीसरी बार राज्य के शीर्ष पद पर आसीन होने के लिए एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।  

निर्मला सप्रे की सदस्यता पर फैसला अगले हफ्ते

Decision on Nirmala Sapre’s membership next week भोपाल। रामनिवास रावत के साथ लोकसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन करने वाली बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर निर्णय अगले सप्ताह होगा। विधानसभा सचिवालय ने उन्हें अपनी बात रखने का अंतिम अवसर दिया है। वहीं, सप्रे ने कहा है कि वे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रखेंगी। उधर, कांग्रेस विधायक दल ने विधानसभा अध्यक्ष तोमर से मांग की है कि 16 दिसंबर से विधानसभा का शीतकालीन सत्र है। इसलिए आवेदन का निराकरण शीघ्र करें। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लोकसभा चुनाव के समय भाजपा में शामिल होने की घोषणा करके पार्टी प्रत्याशी के विरुद्ध काम करने वाली बीना से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने का आवेदन दिया है। सदस्यता त्यागने का निर्णय नहीं कर पा रहीं सप्रे आवेदन में सप्रे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच साझा करने के साथ भाजपा का हाथ थामने की घोषणा करते हुए वीडियो, विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर आदि दस्तावेज लगाए हैं। साथ ही भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित बैठक में उनके शामिल होने के फोटो भी फिर से दिए आवेदन के साथ लगाए हैं। उधर, सप्रे सदस्यता त्यागने को लेकर निर्णय नहीं कर पा रही हैं। यही कारण है कि उन्होंने पहले दो बार के नोटिस पर विभिन्न कारण बताते हुए समय मांगा और फिर कहा कि वे अध्यक्ष के समक्ष प्रत्यक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रखेंगी। अनाश्यक खींचा जा रहा मामला- उपनेता प्रतिपक्ष सूत्रों का कहना है कि इस मामले में निर्णय अध्यक्ष को ही करना है, इसलिए अगले सप्ताह सप्रे की बात सुनकर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वहीं, विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे का कहना है कि इस मामले को अनाश्यक खींचा जा रहा है। दस्तावेज गुम होने की बात कहते हुए दोबारा आवेदन मांगा गया, जबकि स्थितियां बिलकुल स्पष्ट हैं। सभी प्रमाण विधानसभा सचिवालय को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। यदि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले सप्रे की सदस्यता पर निर्णय नहीं लिया गया, तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उधर, विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह का कहना है कि सप्रे ने अध्यक्ष से भेंट करके अपनी बात रखने का कहा है। जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा। टल सकता है निर्मला का मामला सूत्रों का कहना है कि रामनिवास रावत के उपचुनाव हारने के बाद अब निर्मला सप्रे का मामला टल भी सकता है। दरअसल, सप्रे बीना को जिला बनाने की मांग कर रही थीं। सरकार के स्तर पर इसकी तैयारी भी हो गई थी, पर खुरई में विरोध होने के कारण मामला टल गया। खुरई से विधायक पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह कह चुके हैं कि भले ही पार्टी कांग्रेस से आए लोगों को स्वीकार कर ले, पर वे नहीं करेंगे। सागर जिले में पार्टी के अधिकतर नेता व कार्यकर्ताओं के बीच सप्रे को लेने पर एकराय नहीं है।

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