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मप्र में उठी भील प्रदेश बनाने की मांग, आदिवासी नेताओं ने बांसवाड़ा की रैली में भरी हुंकार

Demand for creation of Bhil state raised in Madhya Pradesh, tribal leaders shouted in Banswara rally

Demand for creation of Bhil state raised in Madhya Pradesh, tribal leaders shouted in Banswara rally भील प्रदेश की मांग और समुदाय के जनप्रतिनिधियों की इसे लेकर क्या सोच है? इसका मध्यप्रदेश सहित राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा ‘ SAHARA SAMACHAAR ने इसे लेकर पड़ताल की तो कई हैरान वाले तथ्य सामने आए हैं। भोपाल । राजस्थान के बांसवाड़ा में भील प्रदेश की मांग को लेकर हुए जमावड़े के बाद पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में हलचल बढ़ गई है। अलग प्रदेश की मांग पर जनजातीय समाज के नेताओं में दो फाड़ नजर आ रही है। जहां समाज के कुछ नेता इसके समर्थन में हैं तो कुछ जनप्रतिनिधि इसे विदेशी और विघटनकारी शक्तियों की साजिश बता रहे हैं। जो भी हो, लेकिन बांसवाड़ा के भानगढ़ में हुई रैली के बाद आदिवासी प्रदेश की मांग प्रदेश में फिर जोर पकड़ रही है। भील प्रदेश की मांग के इस आंदोलन में मध्यप्रदेश को धुरी क्यों माना जा रहा है? आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेता मध्यप्रदेश पर सबसे ज्यादा फोकस क्यों कर रहे हैं? एक दशक से भी पहले से चल रही भील प्रदेश की मांग अचानक आंदोलन में कैसे बदली और समुदाय के जनप्रतिनिधियों की इसे लेकर क्या सोच है? इसका मध्यप्रदेश सहित राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा द सूत्र ने इसे लेकर पड़ताल की तो कई हैरान वाले तथ्य सामने आए हैं। सवाल: भील प्रदेश की मांग को लेकर राजस्थान के बांसवाड़ा में हुई आदिवासी समुदाय की रैली के बाद यह मामला क्यों चर्चा में है? पहले बताते हैं भील आदिवासी समाज की प्रदेश और देश में क्या स्थिति है। दरअसल, भील मूल रूप से जंगलों में रहने वाली जनजाति है। यह मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में निवासरत है। मध्यप्रदेश में इस जनजाति की संख्या करीब 60 लाख है। वहीं राजस्थान में 28 लाख, महाराष्ट्र में 18 लाख और गुजरात में 35 लाख भील आदिवासी हैं। यानी जनसंख्या के लिहाज से भील आदिवासी सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में हैं। पश्चिमी मध्यप्रदेश के आलीराजपुर और झाबुआ के अलावा रतलाम, धार, बड़वानी, खंडवा, खरगोन जिले भील आबादी बाहुल्य हैं। वहीं राजस्थान के उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और चित्तौड़गढ़ और महाराष्ट्र में जलगांव, नासिक, ठाणे, नंदूरबाग, धुलिया और पालघर में भील सबसे ज्यादा संख्या में रहते हैं। मध्य प्रदेश में भील जनजाति की आबादी 1.42 करोड़ यानी मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात प्रदेशों में भील समुदाय की आबादी। करोड़ 42 लाख से ज्यादा है। बाकी पूरे देश में भी भील आदिवासी लाखों की संख्या में बिखरे हुए हैं। सबसे ज्यादा आबादी होने की वजह से ही भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा और आदिवासी परिवार के आव्हान पर बांसवाड़ा में समुदाय की रैली निकाली गई थी। समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के भील आबादी बाहुल्य जिलों को जोड़कर अलग राज्य की मांग उठाई है। इस टैली के बाद राजनीतिक दलों से जुड़े भील समुदाय के जनप्रतिनिधियों लोगों में भी मतभेद सामने आ गए हैं। भाजपा नेता और थांदला के पूर्व विधायक कलसिंह भांबर ने इसे विदेशी ताकतों की साजिश बताया है तो सेलाना से निर्दलीय आदिवासी विधायक कमलेश्वर डोडियार भील प्रदेश की मांग का पुरजोर पक्ष ले रहे हैं। वहीं झाबुआ से कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने भील प्रदेश की मांग या विरोध में कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। एक दशक पुरानी है मांग अब बात करते हैं अलग भील प्रदेश की मांग और अचानक उठ खड़े हुए इस आंदोलन की। भील प्रदेश की मांग एक दशक से भी पुरानी है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात से सीमावर्ती जिलों में बसे भील-भिलाला समुदाय के लोग यह मांग उठाते रहे हैं। आदिवासी समुदाय का संगठन जयस भी इस मांग के समर्थन में कई बार आंदोलन-टैलियां कर चुका है। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने फरवरी माह में हुए मध्यप्रदेश विधानसभा के सत्र में भी भील प्रदेश की मांग और सरकार की कार्रवाई का मामला उठाया था। अब इस समुदाय का अचानक एकजुट होना और राजस्थान के बांसवाड़ा से भील प्रदेश की मांग बुलंद करने का राजनीति पर क्या असर होगा यह तो आने वाले दिनों में ही नजर आएगा। फिलहाल आदिवासी समुदाय के सामाजिक संगठन भी इस मांग के समर्थन में उतर आए हैं। क्या कहते हैं समुदाय के जनप्रतिनिधि ? कुछ संगठन जनजाति समाज को गुमराह करने के लिए भील प्रदेश की मांग कर रहे हैं। भील प्रदेश कीमांग आज से नहीं जबसे मिशनरी इस अंचल में आए हैं तबसे शुरु हुई है। ये मांग उन्होंने रखी थी। साऊदी अरब के लोग नारा लगा रहे हैं जय जोहार का नाटा है भारत देश हमारा है। ये किसका षडयंत्र है। आज कहा जा रहा है हमारी बहन बेटियों को की मंगलसूत्र पहनना, मांग भरना हमारा रिवाज नहीं है। ये रिवाज युगों से चले आ रहे हैं। आदिवासी समुदाय युगों से हिंदू पद्धति, परम्पराओं से पूजा पाठ करता आ रहा है। हमारी संस्कृति, रीति-रिवाज उससे जुड़े हैं। भानू भूरिया, बीजेपी नेता झाबुआ मांग तो जायज हैं, लेकिन जातिगत तौर पर देखा जाए तो यह देश को तोड़ने वाला होगा। क्षेत्रीयता और भाषा के आधार पट हो तो ऐसा होना चाहिए। भील प्रदेश की मांग के आंदोलन में कुछ लोग तो ठीक हैं, लेकिन अभी ऐसा नहीं लगता कि भील प्रदेश की आवश्यकता है। विक्रांत भूरिया, कांग्रेस विधायक, झाबुआ मुझे अभी इस आंदोलन की विस्तृत जानकारी नहीं है। अलग भील प्रदेश को लेकर जो मूवमेंट शुरु हुआ है उस पर मैं फिलहाल अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता कमलेश्वर डोडियार, निर्दलीय विधायक, सैलाना बीते 12 साल से पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासी भील प्रदेश की मांग कर रहे हैं। मैंने इस संबंध में फरवरी में विधानसभा सत्र में प्रश्न लगाकर जानकारी चाही कि भील प्रदेश गठन को लेकर क्या कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जानकारी इकट्ठा करने की सफाई दी गई। वहीं मुख्यमंत्री ने नए राज्य गठन की कार्रवाई का अधिकार केंद्र सरकार के पास होने का जबाव देकर पल्ला झाड़ लिया था।

अखिलेश यादव का बड़ा ऑफर… ‘सौ विधायक लाओ, सरकार बनाओ

Akhilesh Yadav's big offer…'Bring 100 MLAs, form government'

Akhilesh Yadav’s big offer…’Bring 100 MLAs, form government’ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा में राजनीतिक चर्चाओं के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक पर कहा है कि मानसून ऑफर है-100 लाओ और सरकार बनाओ। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अगर भाजपा में कोई भी नेता 100 विधायकों का समर्थन जुटा लेता है तो सपा मुख्यमंत्री पद के लिए उसे समर्थन दे सकती है। इसे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके साथ ही तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाओं के बीच दिल्ली से केशव के लखनऊ लौटने पर अखिलेश ने कटाक्ष भी किया है- लौट के बुद्धू घर को आए। यहां बता दें कि केशव प्रसाद मौर्य ने भी बुधवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक्स के जरिये हमला बोलते हुए उन्हें सपा बहादुर की संज्ञा देते हुए कहा था कि यूपी और केंद्र दोनों ही जगह मजबूत सरकार है। 2017 की तरह 2027 में भी हम यूपी में सरकार बनाएंगे। उन्होंने सपा के पीडीए को धोखा करार दिया था।

उत्तर प्रदेश में चौधराहट की जंग : योगी या मौर्य

Battle of Leadership in Uttar Pradesh: Yogi or Maurya

Battle of Leadership in Uttar Pradesh: Yogi or Maurya राजीव रंजन झा लखनऊ ! केशव प्रसाद मौर्य दिल्ली में जो पका रहे हैं , वह आश्चर्यजनक है । यूं तो पिछले एक साल से मौर्य और बृजेश पाठक दोनों ही दिल्ली में अमित शाह के दरबार में पड़े रहे हैं , लेकिन कार्यसमिति की लखनऊ बैठक में प्रकारांतर से योगी पर बरस कर उनके भाव पार्टी में और चढ़ गए हैं । मौर्य अब अमित शाह की मदद से योगी को हटाकर खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं । मौर्य ओबीसी कोटे से आते हैं और याद कीजिए कि यूपी में ओबीसी का वोट इस बार मोदी के बजाय सपा को गया । तो क्या यह केशव प्रसाद मौर्य के इशारे पर हुआ ?मौर्य यूपी भाजपा के अध्यक्ष रहे हैं , संगठन पर उनका प्रभाव है , हालांकि 2022 में वे खुद अपनी विधानसभा सीट हार गए थे । एक सवाल यह भी कि क्या यूपी में बीजेपी को हरवाने के लिए केशव प्रसाद ने अखिलेश से सांठगांठ की और ओबीसी वोट इंडी गठबंधन को डलवा दिया ? क्या योगी को हटाकर खुद सीएम बनने के लिए भूपेंद्र चौधरी के साथ मिलकर यह खेल मौर्य ने खेला ? क्या योगी को मुख्यधारा से हटाने के लिए अमित शाह ने खुद ही मौर्य को मोहरा बनाया ? याद आता है केजरीवाल का एक बयानप्रचार के लिए जमानत पर बाहर आकर उन्होंने भाषण देते हुए कहा था कि चुनाव के बाद यूपी से योगी को हटा दिया जाएगा । तब सभी ने उनका उपहास उड़ाया था । अब लगता है कि बीजेपी में यदि भीतर कुछ पक रहा था तो केजरीवाल को कैसे पता था ? कल शाम मौर्य के साथ नड्डा और अमित शाह ने दो घंटों तक क्या बातचीत की ? क्या अमित शाह में चुनाव के बाद इतनी शक्ति बची है कि वे योगी को हटा सकें ? क्या केशव प्रसाद मौर्य में योगी की नाराजगी के साथ यूपी को संभालने की ताकत है ? लगता तो नहीं था , पर दिखाई कुछ और दे रहा है । यूपी के लिए योगी जरूरी हैंसच कहें तो भाजपा के पास योगी के स्तर का दूसरा नेता नहीं है । उन्हें मोदी के बाद केंद्र में पीएम पद पर लाने की अटकलों में केवल इतना दम है कि योगी युवा संत नेता हैं । अन्यथा राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी अरसे से पीएम मैटीरियल के रूप में भाजपा के पास मौजूद हैं । खैर ! ये बातें अभी दूर की कौड़ी हैं चूंकि मोदी के पास अभी पांच साल सरकार चलाने का जनादेश मौजूद है । केशव प्रसाद को दिल्ली क्यों बुलाया गयापीछे पीछे प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी दिल्ली क्यों आए , इसका खुलासा होने में अभी देर लगेगी । लेकिन एक बात समझ लीजिए । बीजेपी और देश की बहुसंख्यक जनता के लिए जैसे मोदी जरूरी हैं , वैसे ही यूपी के लिए योगी जरूरी हैं । चुनाव में बीजेपी बहुत जल चुकी है । ऐसे में योगी को छेड़ना आग से खेलने के समान है । बीजेपी आलाकमान लोकसभा चुनाव में काफी गंवा चुकी है । केशव प्रसाद मौर्य को ज्यादा हवा देना भाजपा के लिए एक और आत्मघाती कदम साबित हो सकता है ।

भाजपा में कुर्सी की लड़ाई में शासन-प्रशासन ठंडे बस्ते में चला गया ; अखिलेश यादव

In the fight for chair in BJP, the governance and administration were put on the back burner; Akhilesh Yadav

In the fight for chair in BJP, the governance and administration were put on the back burner; Akhilesh Yadav सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा में कुर्सी की लड़ाई चल रही है जिससे कि शासन-प्रशासन ठंडे बस्ते में चला गया है। जनता के लिए सोचने वाला भाजपा में कोई नहीं है। अखिलेश यादव ने सोशल साइट एक्स पर लिखा कि भाजपा की कुर्सी की लड़ाई की गर्मी में, उत्तर प्रदेश में शासन-प्रशासन ठंडे बस्ते में चला गया है। तोड़फोड़ की राजनीति का जो काम भाजपा दूसरे दलों में करती थी, अब वही काम वो अपने दल के अंदर कर रही है, इसीलिए भाजपा अंदरूनी झगड़ों के दलदल में धंसती जा रही है। जनता के बारे में सोचनेवाला भाजपा में कोई नहीं है। बता दें कि भाजपा कार्यसमिति की बैठक में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बयान दिया था कि सरकार से बड़ा संगठन होता है। इसे लेकर पार्टी में सियासी आग भड़क उठी। केशव मौर्य एक महीने में प्रदेश में कैबिनेट व अन्य बैठकों में भी नहीं पहुंचे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को दिल्ली बुलाकर भी बात की। इससे सरकार और संगठन में मनमुटाव होने की बात सामने आई।

शुभेंदु अधिकारी बोले, बंद करो सबका साथ-सबका विकास, अब जो हमारे साथ…

Shubhendu Adhikari said, stop Sabka Saath-Sabka Vikas, now whoever is with us…

Shubhendu Adhikari said, stop Sabka Saath-Sabka Vikas, now whoever is with us… पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने चौंकाने वाला बयान दिया है. इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे को भी बदलने की जरूरत बताई. शुभेंदु अधिकारी ने कहा, हमें सबका साथ, सबके विकास की बात करने की जरूरत नहीं है. हम तय करेंगे कि जो हमारे साथ है, हम उसका साथ दें. इतना ही नहीं शुभेंदु ने कहा, हम जीतेंगे और हिंदुओं को बचाएंगे. खास बात ये है कि शुभेंदु अधिकारी जिस सबका साथ, सबका विकास को बंद करने की बात कह रहे हैं, वह नारा सबसे पहले पीएम मोदी ने ही दिया था. शुभेंदु अधिकारी ने एक कार्यक्रम में जय श्री राम का नारा लगाते हुए कहा, सबका साथ, सबका विकास बंद करो. इतना ही नहीं उन्होंने अल्पसंख्यक मोर्चे को भी बंद करने की बात कही. अधिकारी ने कहा, हम संविधान को बचाएंगे. उपचुनाव में हार की बताई वजह बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने उपचुनाव में बीजेपी की हार की भी वजह बताई. उन्होंने दावा किया कि उपचुनाव में हजारों लोग अपना वोट नहीं डाल सके. उन्होंने कहा, लोकसभा चुनाव में भी लाखों हिंदुओं को वोट डालने नहीं दिया गया. माना जा रहा है कि शुभेंदु अधिकारी ने अपने भाषण से साफ कर दिया कि बीजेपी बंगाल में हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की दिशा में काम करेगी. बंगाल बीजेपी का मानना है कि लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोटरों ने एकजुट होकर टीएमसी को वोट दिया. जबकि हिंदू वोटर अलग अलग पार्टियों में बंट गए. शुभेंदु ने पोर्टल किया लॉन्च इस मौके पर शुभेंदु अधिकारी ने एक पोर्टल भी लॉन्च किया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, जैसा मैंने वादा किया था, मैंने एक पोर्टल लॉन्च किया है, जहां वे मतदाता अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे, जिन्हें वोट नहीं डालने दिया गया. ऐसे लोगों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा.

महाराष्ट्र सरकार लाई ‘लाडला भाई योजना’… 12वीं पास को 6 हजार, ग्रेजुएट को 10 हजार रुपए महीना मिलेंगे

Maharashtra government brought 'Ladla Bhai Yojana

Maharashtra government brought ‘Ladla Bhai Yojana’… 12th pass will get Rs 6 thousand, graduate will get Rs 10 thousand per month मुंबई (Ladla Bhai Yojana)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ‘लाडली बहना योजना’ की तर्ज पर ‘लाडला भाई योजना’ का एलान किया है। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पंढरपुर के विट्ठल मंदिर में महापूजा के बाद शिंदे ने मीडिया को इसकी जानकारी दी।सीएम शिंदे ने बताया कि ‘लाडला भाई योजना’ के तहत महाराष्ट्र सरकार 12वीं पास युवाओं को 6000 रुपए महीना देगी। इसके अलावा डिप्लोमा धारकों को 8000 रुपए और ग्रेजुएट को 10,000 रुपए महीना दिया जाएगा।एकनाथ शिंदे की इस घोषणा को इसी साल होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, विपक्ष युवाओं की बेरोजगारी को बड़ा मुद्दा बता रहा है। अब शिंदे सरकार ने इस योजना के तहत तोड़ निकालने की कोशिश की है।

राजधानी दिल्ली में बड़ा सियासी पालाबदल, AAP के विधायक, पार्षद और पूर्व मंत्री राजकुमार आनंद समेत कई नेता BJP में शामिल

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और मंत्री राजकुमार आनंद ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और बीएसपी में शामिल हुए थे. अब वो भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं. उनके साथ ही AAP सिटिंग एमएलए करतार सिंह तंवर, रत्नेश गुप्ता, सचिन राय, पूर्व विधायक वीना आनंद और AAP पार्षद उमेद सिंह फोगाट भी बीजेपी में शामिल हुए हैं. इन नेताओं ने दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की उपस्थिति में पार्टी ज्वाइन की. पिछले दिनों अप्रैल में राजकुमार आनंद ने भ्रष्टाचार पर पार्टी की नीति पर असंतोष जताते हुए मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. उनका इस्तीफा सीधे तौर पर शराब नीति मामले से जुड़ा था, जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार किया गया था. लोकसभा चुनाव में करारी हार बता दें कि राजकुमार आनंद ने हाल में हुए लोकसभा चुनाव में नई दिल्ली सीट से बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे. चुनावी रण में उन्हें सिर्फ 5629 वोट मिले थे. इस सीट से बीजेपी की बांसुरी स्वराज ने 78370 वोटों से जीत दर्ज की. उन्हें 453185 वोट मिले. दूसरे पायदान पर 374815 वोटों के आम आदमी पार्टी के सोमनाथ भारती रहे. पटेल नगर से पूर्व विधायक राज कुमार आनंद, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली कैबिनेट में समाज कल्याण और एससी/एसटी मंत्री थे. आनंद ने कहा कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह अपना नाम चल रहे ‘भ्रष्टाचार’ से नहीं जोड़ सकते थे. आनंद ने बसपा की टिकट पर लड़ा था लोकसभा चुनाव वह बसपा में शामिल होकर लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन पराजय का सामना करना पड़ा। बुधवार को वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह और दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने उनका पार्टी में स्वागत किया। छतरपुर के विधायक करतार सिंह भी बीजेपी में हुए शामिल छतरपुर के आम आदमी पार्टी विधायक करतार सिंह तंवर ने भी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। पटेल नगर से पूर्व विधायक वीणा आनंद, छतरपुर से पार्षद उमेश सिंह फोगाट हिमाचल प्रदेश के आप प्रभारी रतनेश गुप्ता और सह प्रभारी सचिन राय भी भाजपा में शामिल हुए। यह राजकुमार आनंद वहीं हैं, जो दिल्ली सरकार में सामाजिक कल्याण मंत्री थे। जब केजरीवाल जेल में थे, तब इन्होंने आप पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर पार्टी से बाहर आ गए थे और बीएसपी ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद बीएसपी ने इन्हें नई दिल्ली सीट से लोकसभा का टिकट दिया। हालांकि बीएसपी का दिल्ली में जनाधार नहीं हैं। इस तरह वह मुकाबले से पहले ही बाहर हो गए।  

‘ED को करने दीजिए अपना काम, हम नहीं करेंगे हस्तक्षेप…’; वाल्मीकि कॉरपोरेशन घोटाले पर सीएम सिद्दरमैया का बयान

'Let ED do its work, we will not interfere…'; CM Siddaramaiah's statement on Valmiki Corporation scam

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विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्ध-घुमन्तु वर्ग के विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति की दरों के युक्त-युक्तीकरण की स्वीकृति : डॉ. मोहन यादव

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