बंद कमरे में भाजपाइयों ने चुन लिया यूपी का नया प्रदेश अध्यक्ष, चौधरी भूपेंद्र सिंह देंगे इस्तीफा?
BJP members elected the new state president of UP behind closed doors
BJP members elected the new state president of UP behind closed doors
Why are questions being raised on the role of Minister Sarang in the nursing scam
Tejashwi Yadav said on NEET issue
मुंबई महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के नतीजे भाजपा की उम्मीदों के विपरीत रहे हैं। इसे लेकर मंथन का दौर जारी है और अजित पवार की एनसीपी के साथ तनाव की स्थिति बन गई है। इस बीच विधानसभा चुनाव भी 4 महीने के अंदर ही होने हैं और उसके लिए भी दबाव की राजनीति शुरू हो गई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने विधानसभा चुनवा में अपनी पार्टी के लिए 100 सीटों की मांग रख दी है। पार्टी के सीनियर लीडर रामदास कदम ने कहा कि उनकी पार्टी को राज्य विधानसभा की 288 सीट में से कम से कम 100 पर चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए। शिवसेना एऩडीए गठबंधन का हिस्सा है, जिसमें भाजपा और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) भी शामिल है। राज्य में अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। पूर्व मंत्री रामदास कदम ने बुधवार को शिंदे गुट द्वारा आयोजित अविभाजित शिवसेना के 58वें स्थापना दिवस के मौके पर कहा, ‘हमें लड़ने के लिए 100 सीट मिलनी चाहिए और हम उनमें से 90 पर जीत सुनिश्चित करेंगे।’ वहीं महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता छगन भुजबल ने भी हाल ही में कहा था कि उनकी पार्टी को राज्य विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए 80 से 90 सीट मिलनी चाहिए। एनसीपी ने भी रखी थी डिमांड, जिस पर बोले थे देवेंद्र फडणवीस एनसीपी के दावे पर तो देवेंद्र फडणवीस ने जवाब भी दिया था और कहा था कि राज्य में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और राज्य में होने वाले चुनाव में ज्यादा सीट पर चुनाव लड़ेगी। फडणवीस ने हालांकि यह भी कहा कि तीनों दलों के नेताओं की बैठक और चर्चा के बाद ही सीट बंटवारे पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा को महज 9 सीटें मिलने के बाद उसकी स्थिति गठबंधन में कमजोर होगी। उसे साथी दलों का दबाव झेलना पड़ सकता है। क्यों अजित पवार को छोड़कर भाजपा के चुनाव में उतरने की चर्चा हालांकि एक चर्चा यह भी जोर पकड़ रही है कि भाजपा अजित पवार की एनसीपी का साथ छोड़कर चुनाव में उतर सकती है। एकनाथ शिंदे गुट का प्रदर्शन अच्छा था। ऐसे में वह उसे साथ लेकर चलना चाहेगी। एक वजह यह भी है कि शिंदे सेना के साथ उसकी वैचारिक समानता है, जबकि अजित पवार के साथ स्थिति थोड़ा उलट है। बता दें कि संघ के नेताओं ने भी अजित पवार के साथ गठजोड़ पर सवाल उठाया था और लोकसभा चुनाव के खराब नतीजों के लिए जिम्मेदार बताया था।
Joint press conference of former leader of opposition in Madhya Pradesh Assembly
बलौदा बाजार. बलौदा बाजार जिले में बीते 10 जून को हुई हिंसा के बाद सियासत शुरू हो चुकी है। एक तरफ कांग्रेस अपनी सात सदस्यीय जांच समिति बनाकर घटनास्थल पर पहुंची हुई थी तो वहीं दूसरी तरफ आज भारतीय जनता पार्टी की पांच सदस्य टीम गिरौदपुरी स्थित अमर गुफा पर निरीक्षण करने पहुंची थी। इस जांच समिति में प्रमुख रूप से खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, खेल मंत्री टंकराम वर्मा समेत पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा पूर्व विधायक संजना साहू और अनुसूजित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष नवीन मार्कंडेय शामिल रहे। अब इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को सौंपेगी। संयुक्त जिला कार्यालय के निरीक्षण के दौरान जांच समिति ने घटना के प्रभावित लोगों से मुलाकात की। इस पूरे मामले पर प्रदेश में हलचल सी मची हुई है और सियासी पारा लगातार बढ़ते जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरणदेव सिंह की अध्यक्षता में बीजेपी ने पांच सदस्य जांच टीम गठित की है। जिसमें मंत्री दयाल दास बघेल, मंत्री टंक राम वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा, अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नवीन मार्कंडेय और पूर्व विधायक रंजन साहू शामिल है। बीजेपी की जांच निरीक्षण टीम आज गिरौदपुरी स्थित अमर गुफा में निरीक्षण करने पहुंची थी। इस दौरान जांच टीम के सदस्यों ने जैतखंभ की स्थल का निरीक्षण किया जहां से हिंसा की घटना की शुरुआत हुई थी क्योंकि इसी जगह पर जैतखाम को असामाजिक तत्व के लोगों द्वारा लोहे की आरी से काट दिया गया था इसके बाद बलौदाबाजार में 10 जून को हिंसा भड़की। अमर गुफा के टूटे हुए दरवाजों को देखा और तत्कालीन पुजारी से चर्चा कर मामले की जानकारी ली। वहीं मिडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहां कि ये कांग्रेस की सतनामी समाज को बदनाम करने कि साजिश है। भाजपा जांच दल ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहां कि 15 हजार प्रदर्शन कारियों के लिए भोजन कि व्यवस्था, उन लोगों के धरना प्रदर्शन में आने के लिए बस, गाड़ी कि व्यवस्था, मंच में कौन बैठा है ये भी तो दिख रहा है। क्या देवेंद्र यादव सतनामी हैं ये कांग्रेसी बताए? कलेक्टरेटमें आगजनी एवं तोड़फोड़ पर दयाल दास बघेल ने कहा कि ये घटना शासन प्रशासन को धोखे पे रखकर उपद्रवी तत्वों द्वारा कि गयी है। वहीं जांच टीम के सदस्य मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि जांच टीम के साथ हमने निरीक्षण किया और समाज के लोगों से चर्चा की। सतनामी समाज के लोग सरल इंसान हैं समाज के आंदोलन में उपद्रवी तत्व के लोग शामिल हैं जिसकी वजह से बलौदाबाजार में हुई प्रदर्शन हिंसा में तब्दील हो गई। इस हिंसा में कांग्रेस का ही हाथ हैं इसमें कांग्रेस को लोग भी शामिल हैं कई ऐसे वीडियो, फोटो भी सामने आए हैं जिनके आधार पर जांच हो रही है।
रायपुर छत्तीसगढ़ की एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा? दरअसल, ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि रायपुर दक्षिण से विधायक और विष्णुदेव साय की सरकार में मंत्री बृजमोहन अग्रवाल इस बार लोकसभा का चुनाव जीत गए हैं। बृजमोहन अग्रवाल ने रायपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के विकास उपाध्याय को चुनाव हराया है। बृजमोहन अग्रवाल की जीत के बाद यह माना जा रहा है वह तीन से चार दिनों में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इस्तीफा कब देंगे इसे लेकर कोई फाइनल डेट नहीं आई है। बृजमोहन अग्रवाल के इस्तीफे से पहले ही रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट पर दावेदारों ने अपनी-अपनी दावेदारी पेश की है। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी इस सीट पर बृजमोहन अग्रवाल की राय ले सकती है कि यहां से किस नेता को चुनाव मैदान में उतारा जाए। बता दें कि रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट बीजेपी का गढ़ है और यहां से बृजमोहन अग्रवाल जीतते आ रहे हैं। किन नेताओं का नाम रेस में बृजमोहन अग्रवाल के इस्तीफे के बाद ही यह साफ होगा कि बीजेपी यहां से किस उम्मीदवार को टिकट देगी। हालांकि दावेदारों की बात करें तो टिकट पाने की इच्छा रखने वाले नेताओं ने अपनी-अपनी लॉबी बैठानी शुरू कर दी है। हालांकि अभी जो नाम सामने आ रहे हैं उनमें से सुभाष तिवारी, सुनील सोनी और केदारनाथ गुप्ता के नाम प्रमुख बताए जा रहे हैं। कांग्रेस में भी दावेदार वहीं, संभावित चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कांग्रेस की तरफ से भी कई दावेदार टिकट पाने की होड़ में शामिल हो गए हैं। बता जा रहा है कि प्रमोद दुबे, कन्हैया अग्रवाल और सन्नी अग्रवाल का नाम इस सीट पर जोरों से चल रहा है। नगरीय निकाय के साथ हो सकते हैं उपचुनावराज्य में पांच महीने बाद नगरीय निकाय चुनाव हो सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि नगरीय निकाय चुनाव के साथ ही रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट पर भी चुनाव हो सकते हैं। बृजमोहन अग्रवाल लगातार 8 बार विधायक रहे हैं और पहली बार सांसद बने हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ से बृजमोहन अग्रवाल की जगह तोखन साहू को केन्द्रीय कैबिनेट में जगह मिली है।
नई दिल्ली लोकसभा चुनाव 2024 खत्म होते ही भाजपा ने अब विधानसभा चुनावों के लिए तैयारी शुरू कर दी है। महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए भाजपा ने चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। सोमवार को पार्टी ने भूपेंद्र यादव को महाराष्ट्र का चुनाव प्रभारी घोषित किया। इसके अलावा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सह-प्रभारी बनाया गया है। वहीं हरियाणा की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मिली है और उनके साथ ही त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब कुमार देब सह-प्रभारी बनाए गए हैं। इसी साल अक्टूबर में इन दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी ने झारखंड के लिए शिवराज सिंह चौहान को प्रभारी बनाया है। उनके साथ सह-प्रभारी के तौर पर हिमंत बिस्वा सरमा काम करेंगे। जी. किशन रेड्डी को जम्मू-कश्मीर का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है। हरियाणा और महाराष्ट्र में कुछ महीनों के अंदर ही चुनाव होने हैं तो वहीं झारखंड में भी अगले साल जनवरी तक इलेक्शन प्रस्तावित हैं। अब तक चुनाव आयोग ने स्पष्ट तौर पर जम्मू-कश्मीर के चुनाव पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन पिछले दिनों ही जल्द ही इलेक्शन कराने की बात कही थी। ऐसे में माना जा रहा है कि महाराष्ट्र और हरियाणा के साथ ही यहां भी चुनाव हो सकते हैं। यही वजह है कि भाजपा तैयारियों में जुट गई है। बता दें कि भूपेंद्र यादव पहले भी कई राज्यों में चुनावी रणनीतिकार के तौर पर काम कर चुके हैं। इसलिए उन्हें महाराष्ट्र जैसे राज्य का जिम्मा मिला है। वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के लिए भी यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वह झारखंड में चुनावी कमान संभालेंगे। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के नतीजे भाजपा की उम्मीदों के अनुसार नहीं आए हैं। ऐसे में विधानसभा इलेक्शन के लिए पार्टी पहले से ही तैयारियों में जुट गई है। राज्यसभा की सदस्य संख्या के लिहाज से भी इन बड़े राज्यों में चुनाव जीतना भाजपा के लिए अहम है। भूपेंद्र यादव को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी पार्टी की तरफ से जारी प्रेसनोट में कहा गया कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आगामी विधानसभा चुनाव-महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर के लिए प्रदेश चुनाव प्रभारी एवं सह-प्रभारियों की नियुक्ति की है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। पार्टी ने महाराष्ट्र के प्रभारी के रूप में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को जिम्मेदारी सौंपी हैं। उनके साथ रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सह प्रभारी होंगे। हरियाणा संभालेंगे धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है। वहीं, सांसद और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्र बिप्लव कुमार देव राज्य के सह-प्रभारी होंगे। पार्टी ने झारखंड के प्रभारी का दायित्व केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह को सौंपा है। झारखंड के सह-प्रभारी की जिम्मेदारी असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के पास होगी। जी. किशन रेड्डी को जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर के राज्यप्रभारी के रूप में केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। महाराष्ट्र में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। हरियाणा में पिछली बार विधानसभा चुनाव अक्टूबर 2019 में हुए थे। ऐसे में हरियाणा में इसी साल चुनाव होने हैं। झारखंड विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 5 जनवरी 2025 को खत्म होने वाला है। ऐसे में झारखंड में भी इसी साल चुनाव होंगे।
जयपुर. लोकसभा चुनावों में 11 सीटों पर हुई हार के पीछे खराब टिकट बंटवारा, संगठन और सरकार में तालमेल नहीं होना, अफसरशाही का हावी होना, आपसी फूट और गुटबाजी बड़ा कारण रही है। वरिष्ठ नेताओं के सामने हारे हुए उम्मीदवारों और फील्ड पर काम कर रहे नेताओं ने हार के कारण गिनाए हैं। कई प्रत्याशियों ने कहा- बहुत सी जगहों पर अपनों ने ही हरवाया है। स्थानीय नेताओं के फीडबैक में सामने आया है कि ग्राउंड पर सब कुछ ठीक नहीं था। बीजेपी मुख्यालय में पिछले दो दिनों से चल रही फीडबैक बैठक में शनिवार को टोंक-सवाई माधोपुर, दौसा, झुंझुनू, नागौर, सीकर, चूरू, बाड़मेर सीटों पर हार के कारणों का स्थानीय नेताओं से फीडबैक लिया गया। वहीं रविवार को चार सीटों, बांसवाड़ा, करौली-धौलपुर, भरतपुर और श्रीगंगानगर पर हार की समीक्षा की गई। सीएम भजनलाल शर्मा भी इस मीटिंग में कुछ देर के लिए पहुंचे थे। अब बड़ा सवाल यह है कि चुनाव में 11 सीटें हारने के बाद अब इस फीडबैक बैठक से बीजेपी क्या हासिल करना चाहती है, क्योंकि ये सभी कारण तो चुनावों के दौरान साफ सुनाई और दिखाई दे रहे थे। इससे भी बड़ी बात है कि लोकसभा चुनावों के बाद भी बीजेपी में इन फैक्टर्स को लेकर कोई बदलाव नहीं हुआ है। स्थितियां पहले जैसी थीं, अब भी वैसी ही हैं। बड़े नेताओं पर कोई एक्शन नहीं पार्टी के ग्राउंड वर्कर्स से बात करें तो वे भी यह मानते हैं कि ये फीडबैक बैठकें महज औपचारिकता हैं, क्योंकि इतनी बड़ी हार के बाद भी किसी बड़े नेता की कोई जिम्मेदारी तय नहीं की गई। यहां तक कि जिन मुद्दों को लेकर कार्यकर्ता नाराज थे, उनकी भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। संघ की बैठकों में भी खुलकर सामने आई नाराजगी चुनावी नतीजों के बाद आरएसएस के स्तर पर भी जिलों में ऐसी बैठकें ली गईं, जिनमें संघ कार्यकर्ताओं ने ही पार्टी में टिकट बंटवारे में धांधली के आरोप लगाए। यहां तक कि पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्षों ने कहा कि उन्हें चुनावों के दौरान साइड लाइन कर दिया गया।
Rahul Gandhi will leave Wayanad seat
Union Tribal (State) Affairs Minister and Betul-Harda-Harsud MP
लखनऊ लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश में करारा झटका लगा है। 2019 में उसे जहां 62 सीटें मिली थीं, वहीं 2024 के आम चुनाव में 33 पर संतोष करना पड़ा है। भाजपा उत्तर प्रदेश जैसे राज्य से 29 सीटें कम मिलने की पूरे देश में चर्चा है। अब पार्टी भी इस पर मंथन में जुटी है और पूरा फीडबैक लेने के बाद कुछ ऐक्शन हो सकता है। अब तक पार्टी नेतृत्व को प्रत्याशियों और स्थानीय नेताओं से जो फीडबैक मिला है, उसके मुताबिक सांसदों को राज्य के कर्मचारियों से सहयोग न मिलना। पार्टी कार्यकर्ताओं का ही खिलाफ हो जाना और संविधान बदलने का गलत नैरेटिव जनता के बीच चल जाना नुकसान पहुंचा गया। यही नहीं भाजपा का राज्य नेतृत्व एक विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार कर रहा है। इस रिपोर्ट को इस सप्ताह के अंत तक हाईकमान को सौंपा जाएगा। अब तक मिली जानकारी के अनुसार भाजपा ने यूपी में हार के कारणों की विस्तृत पड़ताल के लिए एक टास्क फोर्स का भी गठन किया है। इस टास्क फोर्स को सूबे की 78 सीटों की समीक्षा का काम सौंपा गया है। सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी की सीट वाराणसी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सीट लखनऊ की यह टास्क फोर्स समीक्षा नहीं करेगी। इसके अलावा सूबे की बाकी सभी 78 सीटों की समीक्षा की जाएगी। भाजपा को सबसे ज्यादा हैरानी अमेठी, फैजाबाद (अयोध्या वाली सीट), बलिया और सुल्तानपुर जैसी सीटों पर हार से है। इन सीटों को भाजपा के लिए मजबूत माना जाता था। अमेठी में स्मृति इरानी की कांग्रेस के एक आम कार्यकर्ता से हार ने पूरे नैरेटिव को चोट पहुंचाई है। इसके अलावा अयोध्या की हार भी कान खड़े करने वाली है। सुल्तनापुर में मेनका गांधी ही चुनाव हार गईं, जो लगातार जीतती रही हैं। फिर अयोध्या की जीत ने तो पूरे नैरेटिव को ही चोट पहुंचाई है। भाजपा को उस सीट पर हारना पड़ गया, जहां ऐतिहासिक राम मंदिर बना है। 500 सालों के इतिहास का चक्र जिस अयोध्या में घूमा, वहां ऐसी हार ने भाजपा को हैरान कर दिया है। आरएसएस से भी मांग रहे फीडबैक, नैरेटिव को ही पहुंची चोट अब पार्टी पूरे नैरेटिव को कैसे सेट करे और अपनी हार को कैसे पचाया जाए। इसकी तैयारी में जुटी है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा को आरएसएस और उसके आनुषांगिक संगठनों से भी फीडबैक मिलेगा। संघ के लोगों से भी कहा गया है कि वे समीक्षा करके बताएं कि हार के क्या कारण रहे। अब तक कई उम्मीदवारों ने भाजपा की स्टेट लीडरशिप को रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें बताया है कि हमारी हार के क्या कारण रहे हैं। इनमें एक बड़ा कारण यह है कि सरकारी कर्मचारियों ने सांसदों का सहयोग नहीं किया है। वहीं पार्टी के ही कार्यकर्ताओं का बड़ा वर्ग खिलाफ चला गया। वहीं जाति के आधार पर ठाकुरों की रैलियों ने भी पश्चिम से पूर्व तक भाजपा को नुकसान पहुंचाया।
Land donor Bhim Nagpure was honored by Dr. Yogesh Pandagare MLA
Social media warriors felicitated Union Minister of State DD Uikey
Grand welcome to Union Minister Shivraj Singh Chauhan in Bhopal