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जीतू की टीम में भर्ती होंगे नए चेहरे- फ्रंट में खड़े नजर आएंगे गोर्की, गौरव और कुणाल

जीतू की टीम में भर्ती होंगे नए चेहरे- फ्रंट में खड़े नजर आएंगे गोर्की, गौरव और कुणाल – लोकसभा चुनाव के पहले जनवरी में ही टीम बनाने की चुनौती, बुजुर्गों से सिर्फ पटवारी लेंगे मार्गदर्शन भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद प्रदेश नेतृत्व की कमान जीतू पटवारी को मिलने के बाद अब उनकी टीम को लेकर कई तरह की चचार्एं हैं। उनकी टीम में बिलकुल नए चेहरों के सामने आने की संभावना है और इनमें वे चेहरे होने की संभावना जताई जा रही है जो युवा के साथ तकनीकी रूप से समृद्ध होंगे।मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार मिलने के बाद बुजुर्ग नेताओं को मुख्य धारा से अलग करते हुए कांग्रेस हाईकमान ने युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। इसके तहत प्रदेश अध्यक्ष जहां युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके पूर्व मंत्री जीतू पटवारी को कमान सौंपी तो नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपनी बुआ से विधानसभा में सरकार को घेरने के गुर सीखने वाले पूर्व मंत्री उमंग सिंगार को कमान दी है। उनके साथ विधानसभा में उप नेता की जिम्मेदारी भी अपने पिता से सरकार को सदन के भीतर घेरने की बारीकियां सीख चुके दो बार के विधायक हेमंत कटारे को हाईकमान ने आगे बढ़ाया है। अब प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अपनी नई टीम बनाने के लिए कवायद कर रहे हैं और उनका कहना है कि जल्द ही पूरी पीसीसी बदली हुई नजर आएगी। पटवारी की टीम में तकनीक, हुनरमंद युवा नजर आएंगे – बताया जा रहा है कि जीतू पटवारी अपने जैसे ऊजार्वान युवाओं की टीम को लेकर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी करेंगे और इसके बाद प्रदेश में टीम के साथ मिलकर भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। इसके लिए उनकी टीम में तकनीक के जानकारों के साथ संगठन को चलाने वाले हुनरमंद युवाओं की टीम नजर आएगी। कहा जा रहा है कि पूर्व सांसद स्व. बालकवि बैरागी के पुत्र गोर्की बैरागी की पटवारी की टीम में महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई देगी। वे कंप्यूटर की तकनीक में पारंगत हैं और उनके इस अनुभव को पटवारी लोकसभा चुनाव में विशेष तौर पर लाभ लेंगे। उन्हें संगठन प्रभारी जैसे किसी महत्वपूर्ण पद पर पीसीसी में लाया जा सकता है। इसी तरह अरुण यादव की टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके गौरव रघुवंशी को भी पटवारी की टीम में अहम भूमिका में देखा जा सका है। पटवारी के विश्वस्थ साथियों में शामिल पूर्व विधायक और युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुनाल चौधरी भी पीसीसी की नई टीम में प्रमुख भूमिका में दिखाई।

जैविक खेती से किसानों का मोह हो रहा है भंग, फर्टिलाइजर की मांग बढ़ी

Farmers’ fascination with organic farming is waning, demand for fertilizer increased  उदित नारायण  भोपाल। सरकार भले ही पांच साल में खेती से दोगुनी आय करने का दावा कर रही है, लेकिन जागरुकता व संसाधनों की कमी से किसानों का जैविक खेती से मोह भंग हो रहा है। जैविक खाद तैयार करने में मेहनत ज्यादा और मुनाफा कम होने से किसान रासायनिक खाद की ओर रुख कर रहे हैं। सरकारी रिकार्ड के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में जैविक खेती करने वाले किसानों की संख्या शून्य है, जबकि सरकार इसके प्रचार-प्रसार के लिए करोड़ों खर्च कर चुकी है। प्रदेश में जैविक खेती के मामले में आदिवासी बाहुल्य जिले आगे हैं। पिछले दस साल के आंकड़ों पर गौर करें तो डिंडोरी, मंडला, खरगौन, सिंगरौली और अनूपपुर के किसानों ने ज्यादा जैविक खेती को अपनाया है। वहीं बड़े शहरों से लगे जिलों के किसानों ने इसमें कम ही रुचि दिखाई है। जिलों में न तो जैविक उत्पादों के खरीददार हैं और ना ही बड़े शहरों से जोड़ने के लिए पर्याप्त और सुगम परिवहन व्यवस्था। यह है समस्या :  जैविक खेती करने के लिए किसानों के पास पर्याप्त तकनीकी ज्ञान नहीं है। जैविक कम्पोस्ट तैयार करने किसानों को उचित प्रशिक्षण नहीं मिल पाता। जैविक फसलों को बेचने की समस्या ज्यादा रहती है। बाजार (मंडी) व्यवस्था ठीक न होने से जैविक गेहूं को रासायनिक खाद से उत्पन्न गेहूं की तुलना में कम कीमत मिलती है। जैविक उत्पादों के खरीदार शहरों में मिलते हैं। इससे किसान स्थानीय बाजार में कम दामों पर बेच देते हैं। एजेंसियों का दावा– हर साल की तरह रबी सीजन में 5.40 लाख टन यूरिया बांटा जा चुका। रबी के मौसम में कुछ दिनों पहले तक किसानों को खाद के लिए लंबी-लंबी लगना पड़ रहा था। हालांकि सरकारी एजेंसियों का कि अब तक रबी सीजन में 5.40 लाख टन यूरिया जा चुका बीते 5 सालों के आंकड़ें देखें तो फर्टिलाइजर  सप्लाई एमपी में दोगुनी हुई है फिर भी हर साल किल्लत होती है। साल 2017-18 में जहां रबी के फर्टिलाइजर की सप्लाई 10.08 लाख टन थी, वहीं 23 में ये बढ़कर 19.89 एलटी हो गई, यानी लगभग दोगुनी हो गई। साल 2023-24 में ताजे के मुताबिक 5.40 लाख टन यूरिया की सप्लाई । है। जो मौसम के अंत तक 13.5 एलटी होने की स है। फिर भी नवम्बर के महीनों में प्रदेश भर में सोसाइटियों के बाहर किसानों को लंबी लंबी ब लगना पड़ा। हाल के दिनों में भी छतरपुर, मुरैना, शिवपुरी, नरसिंहपुर, सतना, भोपाल के कई हिस्स कई जिलों में यूरिया डीएपी की कमी देखी गई है।

पूर्व सीएम शिवराज ने अपने आवास का नाम,मामा का घर, रखा

Former CM Shivraj named his residence as maternal uncle’s house. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि पता बदल गया है, लेकिन मामा का घर तो मामा का घर है। आपसे भैया और मामा की तरह ही जुड़ा रहूंगा। भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक हफ्ता पूर्व श्यामला हिल्स पर बने मुख्यमंत्री आवास को छोड़कर शहर में लिंक रोड क्रमांक एक पर स्थित B-8, 74 बंगला में परिवार के साथ शिफ्ट हो चुके हैं। अब यही उनका नया पता है।यहां आने के बाद भी शिवराज की सक्रियता लगातार बरकरार है। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदेशवासियों के मन में अपनी ‘मामा’ की जो छवि बनाई है, उसे वह बरकरार रखना चाहते हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपने नए आवास को नाम दिया है- ‘मामा का घर’। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट लिखते हुए खुद इस बात की सूचना दी। मेरे प्यारे बहनों-भाइयों और भांजे-भांजियों, आप सबसे मेरा रिश्ता प्रेम, विश्वास और अपनत्व का है।पता बदल गया है, लेकिन “मामा का घर” तो मामा का घर है। आपसे भैया और मामा की तरह ही जुड़ा रहूँगा। मेरे घर के दरवाजे सदैव आपके लिए खुले रहेंगे। मेरी जिंदगी बेटा-बेटियों, बहनों के लिएगौरतलब है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद शिवराज जनता और खासकर लाड़ली बहनों व भांजी-भांजियों के बीच जाकर कह रहे हैं कि पद तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन आप लोगों ने जो मुझे ‘भैया’ और ‘मामा’ का पद दिया है, उसे कोई नहीं छीन सकता। मैं हमेशा आपके बीच रहूंगा। मेरी जिंदगी आपके लिए है, जनता-जनार्दन के लिए है, बेटा-बेटियों के लिए है, मेरी बहनों के लिए है।

रामलला की वास्तविक मूर्ति कहां है, दिग्विजय सिंह

रामलला की मुख्य मूर्ति कहां है, उन्हें क्यों नहीं स्थापित किया जा रहा है, जबकि अयोध्या जन्मभूमि का पूरा विवाद ही वह था। इंदौर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में बन रहे भव्य श्रीराम मंदिर को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने इंदौर प्रवास के दौरान कहा कि अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए नई मूर्तियां बनवाने की क्या जरूरत आ पड़ी। रामलला की मुख्य मूर्ति कहां है, उन्हें क्यों नहीं स्थापित किया जा रहा है, जबकि अयोध्या जन्मभूमि का पूरा विवाद ही वह था। सरकार को इस पर सवाल खड़ा करना चाहिए था।

हिट एंड रन कानून के विरोध में मध्य प्रदेश में सड़कों पर उतरे चालक

यात्री परेशान, पेट्रोल की किल्लत शुरू पेट्रोल टैंकर चालक भी रविवार से हड़ताल पर हैं कई पंपों पर शुरू हुई किल्लत। रोजना सफर करने वाले लाखों लोगों को बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ा। हिट एंड रन के नए कानून को वापस लेने की मांग। केंद्र सरकार द्रारा लाये जा रहे हिट एंड रन के नए कानून को लेकर ड्राइवरों में रोष व्याप्त है। मध्य प्रदेश में चालक इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। पेट्रोल टैंकर चालकों की हड़ताल के बाद सोमवार को नादरा बस स्टैंड चौराहे पर बस ड्राइवरों ने चक्का जाम कर चौराहा जाम कर दिया। चौराहे पर वाहनों को खड़ा कर दिया गया। इससे चौराहा से आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। ड्राइवर इस कानून को लाने का विरोध कर रहे हैं। इसमें में एक्सीडेंट होने पर ड्राइवर को 10 साल की सजा और 7 लाख के जुर्माने का प्रविधान किया गया है। आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भी 2 जनवरी को बैठक बुलाई। ड्राइवरों की हड़ताल का कर सकते हैं समर्थन। ड्राइवरों की तीन दीनी हड़ताल से ट्रक और बसों के थमे पहिए। जरूरी सामान की भी किल्लत हो सकती है। मध्यप्रदेश के इन जिलों में जारी है हड़तालखंडवा- यहां नए कानून के विरोध में ड्राइवर सड़क पर उतर आए हैं। खंडवा के धर्मकांटा क्षेत्र में कर रहे ड्राइवरों ने चक्काजाम कर दिया है। इस हड़ताल में बस, ऑटो और लोडिंग वाहन चालक भी शामिल हैं। इसके अलावा खंडवा के पुनासा में संत सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना के अफसरों को खुद ही अपनी गाड़ी चलाकर ऑफिस पहुंचना पड़ रहा है। देवास- देवास में भी ड्राइवरो की हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। यहां बायपास चौराहे पर ड्राइवरों ने जाम लगा दिया है। इससे इंदौर-देवास मार्ग जाम हो गया है। भोपाल- राजधानी भोपाल में भी ट्रक हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। करोंद मंडी रोड पर ड्राइवरों ने चक्काजाम कर दिया है। उज्जैन- साल के पहले दिन उज्जैन में भी ट्रक चालकों की हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है। शहर में ट्रक और बस के पहिए थम गए हैं। नरसिंहपुर- नरसिंहपुर जिले में इस हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। हड़ताल के चलते जिले में डीजल-पेट्रोल की किल्लत हो गई है। हिट एंड रन के नए प्रस्तावित कानून को लेकर भारी वाहन चालकों में आक्रोश है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। नए कानून को लेकर ट्रक ड्राइवर हड़ताल कर रहे हैं। रविवार को पेट्रोल डीजल के टैंकरों के ड्राइवर ने विरोध स्वरूप अपना आंदोलन शुरू कर दिया। जिसके चलते पेट्रोल-डीजल की किल्लत शुरू हो गई है

इंतजार की घड़ी खत्म,विभागो का हुआ बटवारा।

मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव मंत्रिमंडल विस्तार के 5 दिन बाद मंत्रियों को विभागों का बंटवारा हो गया है। कैलाश विजयवर्गीय को नगरीय प्रशासन और प्रहलाद पटेल को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मिला है। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा को वित्त, डिप्टी सीए‌म राजेंद्र शुक्ला को लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गृह, जनसंपर्क और सामान्य प्रशासन विभाग अपने पास रखा है। कैबिनेट मंत्रियों को मिले यह विभाग • कुंवर विजय शाह – जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन, भोपाल गैस त्रासदी- राहत एवं पुनर्वास • कैलाश विजयवर्गीय नगरीय विकास एवं आवास, संसदीय कार्य • प्रहलाद सिंह पटेल पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम • राकेश सिंह – लोक निर्माण विभाग • करण सिंह वर्मा – राजस्व • उदय प्रताप सिंह – परिवहन और स्कूल शिक्षा • संपतिया उइके – लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी • तुलसी सिलावट – जल संसाधन • एदल सिंह कंषाना – किसान कल्याण एवं कृषि विकास • निर्मला भूरिया – महिला एवं बाल विकास • गोविंद सिंह राजपूत – खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण • विश्वास सारंग – खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता • नारायण सिंह कुशवाह सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग जन कल्याण, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण • नागर सिंह चौहान – वन, पर्यावरण, अनुसूचित जाति कल्याण • प्रद्युम्न सिंह तोमर – ऊर्जा • राकेश शुक्ला – नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा • चेतन काश्यप – सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम • इंदर सिंह परमार – उच्च शिक्षा, आयुष, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को इन विभागों का जिम्मा • कृष्णा गौर – पिछड़ा वर्ग एंव अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त, घुमंतु और अर्धघुमंतु कल्याण • धर्मेंद्र लोधी – संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास • दिलीप जायसवाल – कुटीर एवं ग्रामोद्योग • गौतम टेटवाल – तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार • लखन पटेल – पशुपालन एवं डेयरी • नारायण सिंह पंवार – मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग राज्य मंत्री को इन विभागों का प्रभार • नरेंद्र शिवाजी पटेल लोक स्वास्थ्य एवं परिवाण कल्याण • प्रतिमा बागरी – नगरीय विकास एवं आवास • दिलीप अहिरवार – वन एवं पर्यावरण • राधा सिंह – पंचायत एवं ग्रामीण विकास

मंत्रियों के विभाग तय, जाने किस को मिली किस विभाग जिम्मेदारी.

Departments of ministers decided, who got the responsibility of which department? छत्तीसगढ़ में मंत्रियों के विभाग तय, ओपी चौधरी वित्त और विजय संभालेंगे गृह मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नई दिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित उप मुख्यमंत्री अरुण साव व विजय शर्मा ने मुलाकात की थी। इसी बैठक में मंत्रियों के नामों पर मुहर लगी है। नवागढ़ विधायक दयालदास बघेल को खाद्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पहली बार के विधायक टंकराम वर्मा खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय संभालेंगे। डिप्टी सीएम अरूण साव पीडब्ल्यूडी, आरईएस और नगरीय प्रशासन की जिम्मेदारी दी गई. रायपुर। विष्णुदेव सरकार में मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद अब मंत्रियों के विभाग तय कर लिया गया है। कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नईदिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित उप मुख्यमंत्री अरुण साव व विजय शर्मा ने मुलाकात की थी। इसी बैठक में मंत्रियों के नामों पर मुहर लगी है। इंटरनेट मीडिया में प्रसारित सूची में मुख्यमंत्री के पास सामान्य प्रशासन, ऊर्जा, जनसंपर्क मंत्रालय रहेगा। वहीं डिप्टी सीएम विजय शर्मा गृह, जेल एवं पंचायत मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे। डिप्टी सीएम अरूण साव पीडब्ल्यूडी, आरईएस और नगरीय प्रशासन की जिम्मेदारी दी गई है।

सीएम मोहन यादव गुना में घायलों से मिले, पीएम नरेन्द्र मोदी ने जताया दुख.

CM Mohan Yadav met with the injured in Guna; PM Narendra Modi expressed Grief. गुना में बुधवार रात को बस और डंपर की भ‍िंड़त के बाद बस में आग गई थीगुना। गुना में बुधवार रात को बस और डंपर की भ‍िड़ंत के बाद बस में आग गई थी, 13 यात्री जिंदा जल गए और 16 बुरी तरह झुलस गए थे। मुख्‍यमंत्री डा. मोहन यादव ने मामले की जांच के आदेश दे द‍िए हैं और सम‍ित‍ि का गठन कर द‍िया है। मृतकों व घायलों के ल‍िए आर्थिक सहायता की घोषणा कर दी गई है। मुख्‍यमंत्री ने गुना में अस्‍पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात भी की। मुख्‍यमंत्री ने पर‍िजनों से भी मुलाकात की है, इस मौके पर भारी संख्‍या में भीड जमा हो गई थी। पीएम मोदी ने लिखा- हादसा हृदयविदारक हैप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स हैंडल पर लिखा मध्य प्रदेश के गुना में हुआ सड़क हादसा हृदयविदारक है। इसमें जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी शोक-संवेदनाएं। इसके साथ ही इस दुर्घटना में घायल सभी लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। राज्य सरकार की देखरेख में स्थानीय प्रशासन पीड़ितों की हरसंभव मदद में जुटा है।भाजपा नेता धर्मेंद्र सिकरवार की बस है और जिस डंपर से टकराई वो कांग्रेस नेता अनिल नायक का है ! इससे पहले गुना रवाना होने से पहले गुना हादसे पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि गुना की घटना बहुत दुखःद है। मैंने रात में DM और SP से बात भी की थी। अभी मैं खुद जा रहा हूं। हम कोशिश करेंगे कि दोबारा ऐसी कोई घटना नहीं हो। मैंने जांच के आदेश दिए हैं। जो भी कोई जिम्मेदार होगा किसी को नहीं छोड़ा जाएगा। सभी मृतकों के परिवार और घायलों के साथ मेरी संवेदना है। सीएम ने कहा कि कल रात गुना जिले में हुई घटना अत्‍यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। इस विषय पर मैंने जिले के कलेक्टर, एसपी व अन्‍य अधिकारियों से बात कर घटना की विस्‍तार से जानकारी ली है।उन्‍होंने कहा कि ऐसी घटना दोबारा ना हो, इस बात की हम पूरी कोशिश करेंगे; इसके लिए सड़कों पर इस तरह के जो भी डेंजर जोन हैं, उनको चिन्हित कर आवश्यक प्रबंध किया जाएगा।

बीजेपी ने रामलला को किया किडनैप, हम बाद में जाएंगे अयोध्या- संजय राउत

BJP has kidnapped Ram Lalla, we will visit Ayodhya later – Sanjay Raut. मुंबई ! संजय राउत ने कहा कि बीजेपी का न तो राम से नाता है और न ही उनके विचार से नाता है. अयोध्या में जो कार्यक्रम हो रहा है वो देश का कार्यक्रम नहीं है बल्कि बीजेपी का कार्यक्रम है. बीजेपी के कार्यक्रम में कौन जाए? बीजेपी के राजनीतिक कार्यक्रम खत्म होने के बाद हम अयोध्या जाएंगे.राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से पहले शिवसेना उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि पूरे देश में विपक्ष के नेताओं से पुछ जा रहा है कि क्या आपको न्योता आया..क्या आपको न्योता आया…ये सब क्या है? वहां बीजेपी की सत्ता है. मुझे लगता है की प्रभू श्री राम को एक तरह से किडनैप कर लिया गया है. हम क्या बीजेपी के न्योते का इंतजार में बैठे हैं. जब बीजेपी का कार्यक्रम में खत्म हो जाएगा उसके बाद हम अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए जाएंगे.राउत ने कहा कि बीजेपी कौन होती है रामलला का निमंत्रण देने वाली? बीजेपी के राजनीतिक कार्यक्रम खत्म होने के बाद हम अयोध्या जाएंगे. राउत ने कहा कि ये देश का राष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं है. बीजेपी के प्रोग्राम में कौन जाए.अयोध्या में जो हो रहा है वो बीजेपी का प्रोग्राम है. ये कोई राम लल्ला के लिए प्रोग्राम नहीं है. राउत ने आगे कहा कि बीजेपी का न तो राम से नाता है और न ही उनके विचार से नाता है. वहीं, अयोध्या स्टेशन का नाम बदलने को लेकर राउत ने कहा कि अच्छी बात है स्टेशन का नाम बदला है. इसका विरोध नहीं करना चाहिए लेकिन आप विकास तो करें. बता दें कि 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम है. इस कार्यक्रम में पीएम मोदी सहित देश की तमाम हस्तियां शामिल होंगी.

धान उपार्जन में लापरवाही एक और अफसर पर पड़ी भारी: जबलपुर के प्रभारी फूड कंट्रोलर के बाद अब प्रबंधक व जिला विपणन अधिकारी भी सस्पेंड

Negligence in paddy procurement fell heavily on another officer: After the food controller in-charge of Jabalpur, now the manager and district marketing officer are also suspended. सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। उदित नारायण भोपाल ! राज्य शासन ने जिला विपणन अधिकारी और मंडल प्रबंधक जबलपुर रोहित सिंह बघेल को भी सस्पेंड कर दिया है। यह कार्यवाही मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक आलोक कुमार सिंह ने की है। प्रबंध संचालक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए जारी नीति के अनुसार धान उपार्जन का कार्य नहीं कराया गया है। अधिकारी की लापरवाही के चलते शासन के समक्ष संघ की छवि धूमिल हुई है। इसलिए बघेल को जिम्मेदार मानते हुए उन्हें सस्पेंड किया गया है। निलंबन अवधि में बघेल का मुख्यालय विपणन संघ भोपाल तय किया गया है। मंगलवार को प्रभारी फूड कंट्रोलर हुए थे सस्पेंड इससे पहले मंगलवार को खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया था। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है। आदेश में कहा था कि जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। राज्य शासन ने जबलपुर के फूड कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया है। मोहन यादव कैबिनेट के गठन के बाद शासकीय काम में लापरवाही के मामले में की गई यह पहली कार्रवाई है। खाद्य, नागरिक और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जबलपुर में पदस्थ प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश टांडेकर को धान उपार्जन केंद्रों के मामले में गंभीर लापरवाही पर सस्पेंड किया है। निलंबन अवधि में टांडेकर का मुख्यालय खाद्य विभाग संचालनालय भोपाल तय किया है।विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने के लिए जारी की गई नीति के मुताबिक ई-उपार्जन पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों से एक दिसंबर 2023 तक उपार्जन कार्य कराया जाना था। इसके लिए सहकारी समितियों के साथ एनआरएलएम में रजिस्टर्ड महिला स्व सहायता समूहों को भी उपार्जन केंद्र के संचालन का काम देने के निर्देश 29 नवंबर को जारी किए गए थे। इसमें जिला उपार्जन समिति के माध्यम से महिला स्व सहायता समूहों को उपार्जन केंद्र की अनुमति का प्रस्ताव खाद्य संचालनालय को भेजा जाना था। जबलपुर जिले में कुल 121 केंद्रों के विरुद्ध 85 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। बाकी 36 उपार्जन केंद्र महिला स्व सहायता समूहों को देने का प्रस्ताव 21 दिसंबर को भेजा गया जो काफी देरी से भेजा गया। इन उपार्जन केंद्रों के तय न होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी हुई है। साथ ही महिला स्व सहायता समूह उपार्जन केंद्र के लिए तय गोदामों का सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बगैर किया गया। इस संबंध में न तो प्रभारी फूड कंट्रोलर द्वारा संचालनालय को जानकारी दी गई और न ही स्थानीय स्तर पर जनहित का काम किया गया। सहकारी सेवा समितियों को दो-दो उपार्जन केंद्रों की जिम्मेदारी दिए जाने के विपरीत उपार्जन नीति का पालन नहीं करते हुए 27 सहकारी समितियों को केवल एक-एक उपार्जन केंद्र का जिम्मा सौंपा है। इसलिए जिले में आवश्यक उपार्जन केंद्र स्थापित नहीं किए जा सके। इसे व्यापक लापरवाही मानते हुए विभाग ने टांडेकर को सस्पेंड कर दिया है। आजीविका समिति की जाँच कराने की माँग कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शित्रकुमार चौबे ने जिले में कुछ आजीविका समितियों का फर्जी तरह से कार्य करने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि पंजीयन के 6 माह के अंदर समितियों के निर्वाचन के प्रस्ताव चले जाने चाहिए मगर पिछले 2 साल से किसी भी एक समिति का चुनाव प्रस्ताव कार्यालय उपायुक्त सहकारिता से नहीं गया है। नियम तो यह भी है कि यदि निर्वाचन नहीं होता है तो तत्काल विभाग को किसी शासकीय कर्मचारी को प्रशासक बना देना चाहिए, मगर कार्यालय के स्तर पर इस तरह की भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इन्हें क्यों छोड़ा गया धान खरीदी की जाँच का जिम्मा तमाम एसडीएम को दिया गया था, खाद्य विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल थे, वहीं वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और मार्कफेड के अधिकारियों का कहीं जिक्र तक नहीं किया जा रहा है। डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत भी खरीदी केन्द्र की जाँच के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन 1 दिसम्बर से अभी तक केवल लोकायुक्त ने ईमानदारी से कार्य किया और रिश्वत लेते कम्प्यूटर ऑपरेटर को पकड़ा, बाकी किसी ने भी किसी केन्द्र में कोई जाँच नहीं की। सहाकारिता उपायुक्त डॉ. अखिलेश निगम पिक्चर से ही गायब हैं जबकि उपार्जन समिति में वे जिम्मेदार पद पर हैं। रातों-रात गायब हुई धान जानकारों का कहना है कि जैसे ही वेयरहाउस संचालकों को यह पता चला कि जाँच दल आ रहा है तत्काल ही बिना अनुमति खरीदी करने वाले वेयरहाउसों से धान को गायब करवाया गया। यहाँ तक की कई वेयरहाउसों में जाँच दल पहुँच भी गया था लेकिन एप्रोच लगाकर जाँच दल को रोका गया और उनकी मौजूदगी में ही धान गायब करवाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकारी बारदानों यानी बोरों में बिना अनुमति खरीदी हुई, यह कैसे हुआ कोई बताने तैयार नहीं। रातभर बाहर किया धान, फिर भी अंदर रखा मिला 30 हजार क्विंटल प्रमुख सचिव … Read more

सामाजिक जनजागरण है, राहुल गांधी की “भारत न्‍याय यात्रा “- जीतू पटवारी

Rahul Gandhi’s “Bharat Nyay Yatra” is social awareness – Jitu Patwari मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया में बातचीत में कहा कि भारत न्‍याय यात्रा का मध्‍य प्रदेश में स्‍वागत है। अब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ‘भारत न्याय यात्रा’ निकालने वाली है।मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भारत न्‍याय यात्रा का मध्‍य प्रदेश में स्‍वागत है।राहुल गांधी ने इससे पहले देश में भारत जोड़ो यात्रा की थी। भोपाल। भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद अब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ‘भारत न्याय यात्रा’ निकालने वाली है।मणिपुर से मुंबई तक क़रीब 6200 किलोमीटर की यह लंबी यात्रा 14 जनवरी से लेकर 20 मार्च तक निकाली जाएगी। यह यात्रा 14 राज्यों से होकर निकलेगी। इनमें मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ़ भी शा‍म‍िल है। भारत न्याय यात्रा का मुद्दा आर्थिक न्याय, सामाजिक न्याय और राजनीतिक न्याय रखा गया है।मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया में बातचीत में कहा कि भारत न्‍याय यात्रा का मध्‍य प्रदेश में स्‍वागत है। उन्‍होंने कहा कि राहुल जी ने इससे पहले देश में भारत जोड़ो यात्रा की थी। आधुनिक भारत के पहले शख्‍स थे जिन्‍होंने देश में भाईचारे के लिए, प्रेम के लिए, प्‍यार के लिए भगवान राम-कृष्‍ण और भारत वर्ष के जो मूल विचार हैं, इंसानियत की रक्षा के लिए, प्राणियों में सद्भावना हो इस विश्‍वास के लिए यात्रा निकाली थी। पूरे देश ने उसे आत्‍मसात किया था। अब न्‍याय यात्रा निकाली जा रही है।पटवारी बोले-वोट की ताकत को कम किया जा रहा पटवारी ने यह भी कहा कि राजनीतिक रूप से जो तानाशाही देश में चल रही है, लोकतंत्र की हत्‍या करने का जो दुष्‍चक्र चल रहा है। विधायकों और सांसदों को अपने अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। वोट की ताकत को कम किया जा रहा है। व्‍यापक रूप से दलबदल किया गया। इसके खिलाफ और सामाजिक जनजागरण के लिए न्‍याय यात्रा है।

राहुल गांधी करेंगे ‘भारत न्याय यात्रा’, मणिपुर से 14 जनवरी से होगी शुरुआत, 6200 KM का होगा पूरा सफर

Rahul Gandhi will undertake the ‘Bharat Nyay Yatra’ starting from January 14th, beginning from Manipur. The entire journey will cover a distance of 6200 kilometers. राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पहले ही पूरी कर चुके हैं. इस यात्रा में उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक का सफर तय किया था.नई दिल्ली ! कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘भारत न्याय यात्रा’ करने वाले हैं. पिछले साल सितंबर से लेकर इस साल 14 जनवरी तक भारत जोड़ो यात्रा करने के बाद अब राहुल इस नई यात्रा को करने जा रहे हैं. ‘भारत न्याय यात्रा’ लोगों को सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाने के लिए की जा रही है. भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत कन्याकुमारी से हुई थी, जो कश्मीर में जाकर खत्म हुई थी. राहुल ने इस यात्रा में दक्षिण से उत्तर का सफर किया था. वहीं, भारत न्याय यात्रा की शुरुआत पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर से होगी, जो पश्चिम में महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में जाकर खत्म होगी. इस तरह राहुल भारत न्याय यात्रा में पूर्व से पश्चिम की ओर सफर करने वाले हैं. पूरी यात्रा में 6200 किमी सफर तय किया जाएगा. ज्यादातर यात्रा बस के जरिए ही कवर की जाएगी, मगर कहीं-कहीं पैदल भी सफर किया जाएगा. भारत न्याय यात्रा को भारत जोड़ो यात्रा का दूसरा संस्कृरण बताया गया है, जिसकी शुरुआत 14 जनवरी से होगी. यात्रा में क्या होने वाला है खास? कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 14 जनवरी को मणिपुर में भारत न्याय यात्रा को झंडा दिखाएंगे. इस तरह यात्रा की आधिकारिक तौर पर शुरुआत हो जाएगी. ये यात्रा 20 मार्च को जाकर मुंबई में खत्म होगी. भारत न्याय यात्रा 14 राज्यों के 85 जिलों से होकर गुजरेगी. मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से भारत न्याय यात्रा गुजरने वाली है. कैसे आया भारत यात्रा का विचार? कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार (27 दिसंबर) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत न्याय यात्रा को लेकर जानकारी दी. उन्होंने कहा, ’21 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने सर्वसम्मति से अपना मत रखा कि राहुल गांधी को पूर्व से पश्चिम की ओर एक यात्रा करनी चाहिए. राहुल गांधी भी सीडब्ल्यूसी की इस इच्छा को पूरा करने के लिए तैयार हो गए.’ उन्होंने कहा, ‘ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी ने फैसला किया है कि 14 जनवरी से 20 मार्च तक मणिपुर से लेकर मुंबई तक भारत न्याय यात्रा की जाएगी. इस यात्रा में राहुल गांधी युवाओं, महिलाओं और हाशिए पर पड़े लोगों से मुलाकात करने वाले हैं. बस यात्रा के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जाएगा. यात्रा में कुछ छोटे हिस्से को रुक-रुक कर पैदल भी कवर किया जाएगा.’ भारत जोड़ो यात्रा क्या थी? राहुल गांधी ने सितंबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की थी, जो जनवरी 2023 में जाकर खत्म हुई. राहुल गांधी की यात्रा की शुरुआत 7 सितंबर को कन्याकुमारी से हुई. इस यात्रा के जरिए उन्होंने 4500 किलोमीटर से ज्यादा का सफर पैदल ही तय किया. इस यात्रा का मकसद भारत को एकजुट और देश को मजबूत करना था. कांग्रेस की इस यात्रा से उसका संगठन काफी मजबूत हुआ था. भारत जोड़ो यात्रा 30 जनवरी, 2023 को कश्मीर में जाकर खत्म हुई. भारत जोड़ो यात्रा के जरिए 12 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों के 75 जिलों को कवर किया गया था. ये यात्रा जिस-जिस राज्य से होकर गुजरी, उस-उस राज्य में कांग्रेस नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया. कई प्रमुख हस्तियों को भी भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होते हुए देखा गया था.

चेतन्य कश्यप, सरकार को वेतन वापिस करने के बजाय उस राशि को अभावग्रस्त लड़कियाँ की शिक्षा पर खर्च करें : उमा

Instead of returning the salary to the Government, the amount should be spent on the education of underprivileged girls, according to Uma Bharti. भोपाल। उमा भारती ने लिखा है कि हाल ही में मंत्री बने रतलाम के एक संपन्न जैन व्यवसायी चेतन्य काश्यप ने अपनी संपत्ति 296 करोड़ घोषित की हैं। अभी कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश के अखबारों में उनकी तारीफ़ लिखी गई थी कि वो अपना विधायक का वेतन नहीं लेते जोकि साल भर का क़रीब 12 लाख होता हैं । 296 करोड़ वाला व्यक्ति अगर सरकार के 12 लाख छोड़ देता है तो इसमें कौनसी बड़ी बात हैं । उन्होंने लिखा है कि चेतन्य काश्यप सरकार को वेतन वापिस करने के बजाय वह राशि अभावग्रस्त लड़कियों की शिक्षा पर खर्च करें ।उमा ने आगे लिखा है कि हमें यह याद रखना पड़ेगा कि सभी विधायक बड़े व्यवसायी नहीं होते और न वो राजनीति से अपना व्यवसाय बढ़ाते हैं।एक बार सांसद वरुण गांधी ने कहा था कि सांसदों को तनखा एवं पेंशन नहीं लेना चाहिए। वरुण गांधी ऐसा कर सकते है क्यूँकि वो हज़ारों-करोड़ों की पैतृक संपत्ति के मालिक है । अपना सर्वस्व त्यागकर राजनीति के माध्यम से जनसेवा करने वाले जनप्रतिनिधियों को हर तरह की सहूलियत सरकार से मिलनी चाहिए ।अगर विधायकों और सांसदों को ईमानदारी की राह पर चलना आसान बनाना है तो चेतन्य काश्यप जैसे पूंजीपति विधायकों को छोड़कर सभी विधायक की तनखा एवं अन्य भत्ते आज की सभी परिस्थितियों को देखकर मिलना चाहिए

खून और पसीने से मिट्टी को सींच कर खिलाड़ी अपने देश के लिए मेडल लाता है, राहुल गांधी

After irrigating the soil with blood and sweat, the player brings a medal for his country. Rahul Gandhi वर्षों की जीतोड़ मेहनत, धैर्य एवं अप्रतिम अनुशासन के साथ अपने खून और पसीने से मिट्टी को सींच कर एक खिलाड़ी अपने देश के लिए मेडल लाता है। आज झज्जर के छारा गांव में भाई विरेंद्र आर्य के अखाड़े पहुंच कर ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया समेत अन्य पहलवान भाइयों के साथ चर्चा की। सवाल सिर्फ एक है – अपने अखाड़े की लड़ाई छोड़ अगर इन खिलाड़ियों, भारत की बेटियों को अपने हक और न्याय की लड़ाई सड़कों पर लड़नी पड़े तो कौन अपने बच्चों को यह राह चुनने के लिये प्रोत्साहित करेगा? यह किसान परिवार के निश्छल, सीधे एवं सरल लोग हैं, इन्हें तिरंगे की सेवा करने दीजिए। इन्हें पूरे मान और सम्मान के साथ भारत का सर गौरव से ऊंचा करने दीजिए।

बदलाव की राह पर भाजपा ने लगाई मुहर

On the path of change, the BJP has stamped its approval. उदित नारायण भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में जिस तरह लगभग दो तिहाई नए चेहरों को पहली बार शामिल किया, वह भाजपा द्वारा बदलाव की राह लाने जैसा है। विजय शाह, विश्वास सारंग प्रदुम्न तोमर तुलसी सिलावट ,करण सिंह वर्मा को छोड़कर किसी ऐसे मंत्री को मौका नहीं दिया गया है, जो लंबे समय तक मंत्रिमंडल में रहा हो। भाजपा का यह बदलाव नए नेतृत्व को उभारने का प्रयोग है। जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों में देखने को मिलेगा। इस बदलाव से कुछ अनुभवी और वरिष्ठ मंत्री मौका पाने से चूक गए, तो डेढ़ दर्जन नए चेहरों को मौका मिला। परंपरागत राजनीति करने और देखने वालों को इससे हैरत हुई होगी, लेकिन यथास्थिति में बदलाव किसी भी राजनीतिक दल के जीवंत रहने के लिए आवश्यक होता है। भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान में जिस तरह नेतृत्व परिवर्तन और मंत्रिमंडल में जो बदलाव किया, वह नए तरह की राजनीति है। बदलाव तो हार के बाद किया जाता रहा है और बंपर जीत के बाद यथास्थितिऔर मजबूत होती आई है। भाजपा ने जीत के बाद बदलाव कर भविष्य में हार की आशंका को खारिज करने का प्रयास किया है। मध्यप्रदेश में भाजपा थोड़े अंतराल से दो दशक लगातार सत्ता में है और अगले पांच साल का सफर जारी है। मंत्रिमंडल में लगातार लंबे समय तक मंत्री रहने वालों को बदलकर नए चेहरों को मौका देने से एकतरफ जहां एकरसता टूटती है, वहीं पार्टी कैडर में यह विश्वास जागता है कि उन्हे भी आने वाले समय में मौका मिल सकेगा।

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