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छत्तीसगढ़ में कयासों का बाजार गर्म.

The market of speculations is hot in Chhattisgarh. Special Corrospondent. विधानसभा चुनाव नतीजों को लेकर छत्तीसगढ़ में कयासों का बाजार गर्म है। कोई कह रहा है राज्य में कांग्रेस सरकार बना लेगी, तो किसी का मत भाजपा के पक्ष में हैं। भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने स्तर पर चुनाव नतीजों की समीक्षा में लगे हैं। जमीनी हकीकत को लेकर प्रत्याशियों से फीड बैक भी ले रहे हैं और उनकी शिकवा-शिकायत भी सुन रहे हैं। शिकायतों के आधार पर कांग्रेस ने कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकाल भी दिया। सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल ताल ठोंक रहे हैं, पर संख्या बल को लेकर दोनों दल सशंकित बताए जाते हैं। बागियों और अधिकृत प्रत्याशियों के लिए काम न करने को लेकर दोनों दलों। खबर है कि कांग्रेस के कुछ दिग्गज नेता और मंत्री भी शिकवा-शिकायत के लिए प्रभारी महासचिव सैलजा के पास पहुंच गए। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि कांग्रेस के दिग्गजों की हालत भी पतली है, ऐसा न होता तो शिकवा-शिकायत की नौबत ही नहीं आती। पिक्चर तो तीन दिसंबर को ही साफ़ होगी।चुनावी दंगल में फंसे हैं पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे कहते हैं पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल के बेटे अमितेश शुक्ल और पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा इस बार चुनावी दंगल में फंस गए हैं। दोनों के ख़िलाफ भाजपा ने नए चेहरे मैदान में उतारे हैं। चर्चा है कि एंटी इंकम्बैंसी फैक्टर और भितरघातियों के फेर में दोनों उलझ गए हैं। 2018 में अमितेश शुक्ल राजिम से ही 58 हजार से अधिक वोटों से जीते थे। अरुण वोरा ने भी दुर्ग से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 21 हजार से अधिक मतों से हराया था। गौरतलब है कि दोनों के पिता संयुक्त मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री थे। छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी भी पाटन से चुनाव लड़ रहे हैं। दो धाकड़ लोगों की लड़ाई में अमित जोगी कितना वोट हासिल कर सकते हैं, इसी की चर्चा है। राजेंद्र कटारा को क्लीन चिट ? बीजापुर कलेक्टर राजेंद्र कटारा को लेकर भाजपा लगातार शिकायत कर रही है। भाजपा उन पर पक्षपात का आरोप लगा रही है। कहते हैं भाजपा की शिकायत पर चुनाव आयोग ने करीब पखवाड़ेभर पहले जांच रिपोर्ट बुलवाई थी। कहा जा रहा है जांच रिपोर्ट में राजेंद्र कटारा के खिलाफ शिकायत सही नहीं पाई गई। भाजपा की टीम शुक्रवार को फिर राजेंद्र कटारा की शिकायत लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी दफ्तर गई और उन्हें मतगणना कार्य से दूर रखने की मांग की। खबर है कि भाजपा की टीम को सीईओ ने बीजापुर कलेक्टर के खिलाफ शिकायत सही नहीं पाए जाने की जानकारी दे दी। बीजापुर में पूर्व मंत्री महेश गागड़ा भाजपा प्रत्याशी हैं, उनका मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी विक्रम मंडावी से है। विक्रम मंडावी अभी विधायक हैं। बीजापुर विधानसभा में सात नवंबर को मतदान हुआ था। कांग्रेस नेता की धर्मगुरु से डील की चर्चा कहते हैं एक कांग्रेस नेता को अपनी जीत के लिए एक धर्मगुरु से लंबी डील करनी पड़ी। कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेता को अपनी हार का अहसास होने के बाद धर्मगुरु की शरण में जाना पड़ा। कांग्रेस नेता कई बार से चुनाव जीत रहे हैं। कांग्रेस नेता जिस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, वहां एक विशेष धर्म के वोटर काफी संख्या में हैं और वही हार -जीत का फैसला करते हैं। खबर है कि धर्मगुरु से डील के बाद समाज में प्रभाव रखने वाले करीब 40-50 लोग कांग्रेस नेता के समर्थन में उतरे। बताते हैं प्रारंभिक चरण में कांग्रेस नेता के खिलाफ बदलाव की हवा चल पड़ी थी। धर्मगुरु की कृपा से माहौल बदला। हार-जीत का अंतर कम रहने के कयास इस बार के विधानसभा चुनाव में कयास लगाया जा रहा है कि हार-जीत का अंतर काफी कम रहने वाला है। विश्लेषक और राजनीतिज्ञ मानकर चल रहे हैं कि सभी सीटों में मुकाबला कांटे का रहा। इस कारण प्रत्याशियों की जीत -हार काफी कम वोटों से होगी। जानकारों को किसी भी सीट में एकतरफा मुकाबला नजर नहीं आ रहा है। 2018 में मोहम्मद अकबर कवर्धा से 59 हजार से अधिक मतों से जीते थे। माना जा रहा है कि इस बार किसी भी प्रत्याशी के जीत का अंतर इतना बड़ा नहीं होगा। “आप” चर्चा से गायब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (आप) बड़ी चर्चा में थी, लेकिन चुनाव के दौरान वह सुर्ख़ियों में नहीं रही। मतदान के बाद भी लोग ‘आप’ को याद नहीं कर रहे हैं। बसपा और जोगी कांग्रेस के कुछ सीटों पर जीत की बात हो रही है, लेकिन आप की जीत की बात कोई नहीं कर रहा है। नतीजों के बाद कांग्रेस और भाजपा को बहुमत नहीं मिलने पर बसपा और जोगी कांग्रेस की भूमिका की भी बात हो रही है।

राज्यसभा में MP की 5 सीटों का नंबर गेमः कौन किस पर भारी

The number of seats for Members of Parliament (MP) in the Rajya Sabha is 5. मौजूदा 4 सीटों को बचाने भाजपा को चाहिए 152 विधायक; अप्रैल में खत्म होगा कार्यकाल मध्यप्रदेश में 3 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। इन नतीजों से दो सवालों का जवाब मिलेगा। मध्यप्रदेश में किस पार्टी की सरकार बनेगी?अप्रैल 2024 में खाली हो रही राज्यसभा की 5 सीटों में से कितनी-किस पार्टी के खाते में जाएंगी। एमपी के 11 में से 5 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल को खत्म हो रहा है। इनमें से 4 सीटें भाजपा जबकि 1 कांग्रेस के पास है। भाजपा को यदि यह आंकड़ा बरकरार रखना है तो विधानसभा में उसे 152 सीटें जीतना होंगी क्योंकि एक प्रत्याशी को जीतने के लिए न्यूनतम 38 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। राज्यसभा सांसद का चुनाव तय फॉर्मूले के तहत होता है। इसके मुताबिक, जिस पार्टी के पास विधायकों की संख्या अधिक होती है, उस पार्टी के उम्मीदवार की जीत तय होती है। पहले जानिए, कैसे होता है राज्यसभा चुनाव राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया अन्य चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है। व्हिप के उल्लंघन से खत्म हो सकती है सदस्यता राज्यसभा चुनाव में लोकसभा और विधानसभा की तरह गुप्त मतदान नहीं होता है। राज्यसभा सांसद के नाम के आगे एक से चार तक का नंबर लिखा होता है। विधायकों को वरीयता के आधार पर वोट देना होता है। राज्यसभा सदस्य के चुनाव के लिए राजनीतिक दल रिक्त सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने के साथ अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी करते हैं। यदि किसी विधायक ने व्हिप का उल्लंघन कर पार्टी प्रत्याशी को वोट नहीं दिया तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। नियमानुसार पार्टी विधानसभा सचिवालय को ऐसे विधायक की लिखित शिकायत करती है तो जांच के बाद उसकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो सकती है। किस फॉर्मूले से तय होती है जीत? राज्यसभा चुनाव के लिए एक फॉर्मूले का उपयोग किया जाता है। इसमें कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है। इसके बाद राज्य में जितनी राज्यसभा की सीटें हैं, उसमें एक जोड़ कर भाग दिया जाता है। इसके बाद कुल संख्या में एक जोड़ा जाता है। फिर अंत में जो संख्या निकलती है, वह जीत का आंकड़ा होता है। 2020 में भाजपा ने ऐसे पलट दिया था नंबर गेम 19 जून 2020 को राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव हुआ था। भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी को प्रत्याशी बनाया था जबकि दिग्विजय सिंह और फूल सिंह बरैया ने कांग्रेस की तरफ से नामांकन भरा था। इस चुनाव से तीन महीने पहले सिंधिया समर्थक 22 विधायकों ने 10 मार्च 2020 को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में मौजूदा विधायकों की कुल संख्या 206 रह गई थी क्योंकि 2 विधानसभा सीटें मुरैना जिले की जौरा और आगर-मालवा की आगर सीट विधायकों के निधन के बाद खाली थी।इस हिसाब से राज्यसभा के एक प्रत्याशी को कम से कम 52 वोट चाहिए थे। विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा के दो उम्मीदवार- ज्योतिरादित्य सिंधिया (56 वोट) और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी (55 वोट) जीतने में कामयाब हुए थे। कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह (57 वोट) ही जीत दर्ज कर सके थे। दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया को केवल 38 वोट मिले थे। 5 विधायकों ने भी बदल लिया था पाला 2018 विधानसभा चुनाव के बाद बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से कमलनाथ सरकार ने बहुमत का आंकड़ा पार किया था। इस चुनाव में कांग्रेस को 114 और भाजपा को 109 सीटें मिली थीं लेकिन 19 जून 2020 को राज्यसभा की 3 सीटों पर हुए चुनाव से ठीक पहले बसपा के दो, सपा का एक और 2 निर्दलीय विधायकों ने पाला बदल लिया था। जिसका फायदा भाजपा को हुआ था। दिग्विजय को तीन वोट ज्यादा मिले थे 3 सीटों के चुनाव में भाजपा को दो वोटों का नुकसान हुआ था। गुना से भाजपा विधायक गोपीलाल जाटव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह क्रॉस वोटिंग की थी। सुमेर सिंह सोलंकी के पक्ष में दिया गया भाजपा विधायक जुगल किशोर बागरी का वोट निरस्त हो गया था। 3 सीटों पर चुनाव से ठीक एक दिन पहले 18 जून 2020 को कमलनाथ के निवास पर एक बैठक हुई थी। इसमें तय किया गया था कि दिग्विजय सिंह को 54 विधायक वोट देंगे लेकिन उन्हें 57 वोट मिले। यानी जिन तीन विधायकों को दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया को वोट देना था, उन्होंने दिग्विजय सिंह को वोट दे दिया था। से ओबीसी, दलित और महिला वर्ग को साधा था। दरअसल, राज्यसभा चुनाव से पहले एमपी की राजनीति में ओबीसी एक बड़ा मुद्दा बन गया था। ओबीसी आरक्षण की वजह से पंचायत और निकाय चुनाव टल गए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। कोर्ट के दखल के बाद निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ हुआ था। प्रदेश में ओबीसी वोटरों की आबादी 50 फीसदी से अधिक है। बीजेपी ने कविता पाटीदार के नाम की घोषणा कर एक बड़ा ओबीसी कार्ड खेला था। इसी तरह सुमित्रा वाल्मीकि को राज्यसभा में भेजकर दलित वर्ग को साधने की कोशिश की थी। जानकार कहते हैं कि यदि भाजपा फिर दलित, ओबीसी और महिला कार्ड खेलती है तो उसे मिशन 2024 में भी बड़ा फायदा होगा।

खाद की किल्लत की वजह, सरकार की फेल पालिसी- फेडरेशन और सोसायटी के बजाय व्यापारियों को कमीशन के लिए दिया ठेका : गोविंद सिंह

Reason for the fertilizer scarcity is the government’s failed policy, as instead of relying on federations and societies, contracts were given to businessmen for commissions: Govind Singh वीडी शर्मा पर आरोप- अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं, ऐसे नेताओं को ज्यादा लंबा राजनीतिक भविष्य नहीं होता. भोपाल। मध्य प्रदेश के कई इलाकों में खाद की कमी से किस जूझ रहे हैं। किसानों की समस्या को लेकर नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने सरकार पर सवाल खड़े किए। गोविंद सिंह ने कहा कि सरकार की नीतियों की वजह से ही किसान परेशान है। कांग्रेस के समय सोसाइटी में 80 फीसदी खाद दिया जाता था। अब सोसाइटियों के बजाय व्यापारियों को खाद वितरण के लिए जिम्मेदारी दे दी गई है। व्यापारी कालाबाजारी करते हैं और महंगे दाम पर किसानों को खाद लेना पड़ रहा है। पहले व्यवस्था थी कि फेडरेशन बनाकर सरकार 4 महीने के लिए उन्हें लोन देती थी। जिसे खाद की खरीदी हो जाए और 10 प्रतिशत अधिक डिमांड से ज्यादा जिलों में खाद भेजी जाती थी। अब यह व्यवस्था पूरी तरीके से सरकार ने खत्म कर दी है। जिस वजह से जनता परेशान हो रही है। वही गोविंद सिंह ने आशंका जताई कि मतदान के दिन भाजपा के एजेंट बने अधिकारी गड़बड़ी कर सकते हैं। इसलिए कमलनाथ ने मतगणना स्थल पर मौजूद रहने वाले एजेंट को प्रशिक्षण देने के लिए कहा है। साथ ही प्रत्याशी भी आएंगे। उनसे भी चर्चा की जाएगी। गोविंद सिंह ने कहा कि पूरे चुनाव के दौरान कुछ ईमानदार अधिकारियों ने अच्छा काम किया है। कई बेईमान अधिकारी जो भ्रष्ट थे पैसा कमाने में लगे हुए थे। उन्होंने भाजपा के एजेंट के तौर पर काम किए हैं। वहीं राजनगर की घटना में कांग्रेस प्रत्याशी पर मामला दर्ज किए जाने पर कहा की वीडी शर्मा अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं। ऐसे नेताओं को ज्यादा लंबा राजनीतिक भविष्य नहीं होता है।

कांग्रेस की सरकार बनेगी या नहीं, अब चर्चा डिप्टी सीएम बनाने की.

Whether the Congress will form the government or not is now under discussion, focusing on the appointment of the Deputy Chief Minister. कर्नाटक और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर एमपी में भी कांग्रेस कर सकती है प्रयोग उदित नारायणभोपाल – मध्य प्रदेश में सरकार आखिर किसकी बनेगी। यह फैसला 3 दिसंबर के बाद ही होगा। इस बीच कांग्रेस के अंदर डिप्टी सीएम बनाए जाने का जिन निकलकर सामने आ गया है। कांग्रेस के अंदर चर्चा है कि छत्तीसगढ़, कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश में भी डिप्टी सीएम बनाए जाने को लेकर कवायद चल रही है। कांग्रेस की शुरूआत से ही अपने कम फीस के तौर पर कमलनाथ को प्रेजेंट किया है। अब डिप्टी सीएम कौन बनेगा या फिर बनाया जाएगा। यह मामला केंद्रीय आलाकमान ही तय करेगा। कांग्रेस के सीनियर लीडर और पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह का कहना है कि मध्य प्रदेश में डिप्टी सीएम बनाए जाने को लेकर फैसला सेंट्रल लीडरशिप करेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का फैसला होगा। अगर डिप्टी सीएम बनाया जाता है तो कमलनाथ को भी भरोसे में लिया जाएगा। केंद्रीय लीडर से जो भी तय करेगी, वह मध्य प्रदेश में भी होगा। यानी कि केंद्रीय गला कमान की मंजूरी होती है तो कांग्रेस मध्य प्रदेश में भी डिप्टी सीएम बन सकती है। हालांकि अभी इसके लिए लंबा कांग्रेस का इंतजार करना पड़ेगा लेकिन कांग्रेस पूरे भरोसे में है कि सरकार बनने जा रही है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन ने सीहोर के मतगणना स्थल और स्ट्रांग रूम का किया निरीक्षण

मतगणना की तैयारियों का मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने लिया जायजा

मंत्री सुरेश राठखेड़ा की मुश्किलें बढ़ी, शिवपुरी की घटना पर मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

मंत्री सुरेश राठखेड़ा की मुश्किलें बढ़ी

पार्टियों ने काटा टिकट, तो विधानसभा सचिवालय ने कहा, बंगला खाली करो

Parties have issued tickets, so the Legislative Assembly Secretariat has said, Vacate the bungalow. छिनेगा यशोधरा राजे से बंगला, चुनाव नहीं लड़ने वाले विधायकों को नोटिस, विधानसभा सचिवालय ने 30 बेटिकट विधायकों को भेजा पत्र भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में दोनों बड़ी पािर्टयों भाजपा और कांग्रेस ने इनकमवेंशी के कारण लगभग ढाई दर्जन के क्या टिकट काट दिए कि अब उनका बंगला भी छिनने वाला है। यानि इधर पार्टियों ने टिकट काटा, तो उधर, जैसे लोकसभा में राहुल गांधी का बंगला िछनने की जल्दबाजी की गई, उसी तरह विधानसभा सचिवालय ने भी बेटिकट वाले माननीयों को बंगला खाली करने का नोटिस थमा दिया है। इससे इन माननीयों की भोपाल में रहने को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। नई विधानसभा के गठन तक आवास में रह सकते मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान पूरा हो चुका है। अब तीन दिसंबर को मतगणना होनी है। जिसमें 16वीं विधानसभा के सदस्यों के नाम सामने आ जाएंगे। नई विधानसभा सदस्यों को आवास उपलब्ध कराने के लिए विधानसभा सचिवालय ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए सचिवालय ने उन विधानसभा सदस्यों को नोटिस जारी कर दिया है, जो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। ऐसे भाजपा और कांग्रेस के 30 वर्तमान विधायकों को नोटिस देकर आवास खाली करने को कहा गया है। हालांकि वर्तमान विधायक नई विधानसभा के गठन तक आवास में रह सकते हैं। नए विधायकों को लेकर टेंशन में विधानसभा सचिवालय नए विधायकों के जीतने के बाद उन्हें भोपाल में सरकार द्वारा आवास मुहैया कराया जाता है। इसको लेकर विधानसभा सचिवालय ने राज्य सरकार को भी पत्र लिखा है। इसमें नए विधायकों के चुन कर आने पर उनके लिए गेस्ट हाउस और रेस्ट खाली रखने को कहा गया है। इस संबंध में राज्य सरकार की तरफ से भी विभिन्न विभागों को लिखा गया है।

कर्ज में डूबा मध्यप्रदेश, जो सत्ता में आएगा, करोड़ों का कर्ज मिलेगा विरासत में।

Madhya Pradesh will inherit debts in the millions when it comes to power. मनीष त्रिवेदीभोपाल, मध्यप्रदेश में इस बार तीन दिसंबर को जिसकी भी सरकार बनती है, उसे करोड़ों का कर्ज विरासत में मिलेगा। क्योंकि प्रदेश सरकार पर करोड़ों के कर्ज हैं। ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि जिसकी भी सरकार बनती है उसने जो जनता से वादे किए हैं वह कैसे पुरे होंगे? फिलहाल सरकार के ऊपर 3.85 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. प्रदेश के हर नागरिक पर 47 हजार रुपए का कर्ज है. सरकारी खजाने से साल का 20 हजार करोड़ रुपये तो सिर्फ ब्याज चुकाने में जा रहा है. मध्यप्रदेश शासन का वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट 3.14 लाख करोड़ रुपए का है. इसका तकरीबन 26.2% हिस्सा वेतन, भत्ते और ब्याज की अदायगी में ही चला जाता है. अकेले वेतन-भत्ते को देखें तो वित्तीय वर्ष खत्म होने तक 56 हजार 314 हजार करोड़ रुपये से अधिक इस पर खर्च होंगे. यह बजट का 18.64% होता है. वहीं, पेंशन पर बजट का 18 हजार 636 करोड़ रुपए यानी 6.17% और ब्याज पर 22 हजार 850 करोड़ रुपये यानी 7.56% खर्च होगा. मौजूदा फाइनेंसियल बजट के मुताबिक सरकार की आमदनी 2.25 लाख करोड़ है और खर्च इससे 54 हजार करोड़ है. अब नई सरकार को वर्तमान बजट से अधिक राशि की आवश्यकता होगी. मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव के परिणाम 3 दिसंबर को आने हैं. मतदान के बाद सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस की ओर से सरकार बनाने का दावा किया जा रहा हैं. हालांकि,वोटर का फैसला 3 दिसम्बर को आएगा लेकिन सूबे में सरकार किसी भी पार्टी की बने, उसे विरासत में खाली खजाना मिलेगा. फिलहाल सरकार के ऊपर 3.85 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. साफ है कि नई सरकार के लिए खस्ताहाल खजाने से अपनी लोक-लुभावन चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए बड़ी चुनौती सामने आने वाली है. जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार सालाना 20 हजार करोड़ रुपए ब्याज देती है. जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य के पास नए टैक्स लगाने की गुंजाइश बेहद सीमित रह गई है. ऐसे में सरकार किसी भी बने, उसके लिए अर्थव्यवस्था को गतिमान बनाए रखने के साथ वित्तीय प्रबंधन बड़ी चुनौती होगी. अभी मध्यप्रदेश सरकार पर जितना कर्ज है, उस लिहाज से देखा जाए तो हर नागरिक पर 47 हजार रुपए का कर्ज है. वित्तीय जानकार बताते है कि पिछले 23 सालों में प्रति व्यक्ति कर्ज 42000 बढ़ गया है. साल 2001-02 में प्रदेश पर 23 हजार करोड़ रुपए का कुल कर्ज था. जनसंख्या के हिसाब से प्रतिव्यक्ति बमुश्किल 3,500 हजार रुपए का कर्ज था. दरअसल, 31 मार्च 2023 को खत्म वित्तीय वर्ष में सरकार पर 3.31 लाख करोड़ का कर्ज था, जो 2023-24 के अंत तक 3.85 लाख करोड़ रुपए हो गया.

दलित और मुस्लिम बाहुल्य है सिरोंज विधानसभा की ये सीट! फिर भी रहा है शर्मा परिवार का दबदबा.

The seat of Sironj Vidhan Sabha is a stronghold of Dalits and Muslims! Still, the Sharma family maintains its dominance. 17 नवंबर को मतदान पूर्ण हुआ और दोनों ही पार्टियों के बागीयों पर चर्चा हुई तेज अलताफ खान सिरोंजसिरोंज विधानसभा में इस बार मुकाबला कांग्रेस बीजेपी में कांटे का देखने में आया है 17 नंबर को मतदान होने के बाद दोनों ही पार्टियों के कार्यकरता एवं पदाधिकारी अपने-अपने हिसाब से समीकरण लगाने में लगे हुए हैं और अपने पार्टी के प्रत्याशी को जीता हुआ घोषित कर रहे हैं सबसे महत्वपूर्ण इस बार सिरोंज विधानसभा क्षेत्र में यह देखने में आया है कि दोनों ही ओर से टिकट मांगने वाले उम्मीदवारों को पार्टी द्वारा टिकट नहीं दिया गया तो कहीं ना कहीं इन्होंने या तो पार्टी के लिए बिल्कुल काम नहीं किया या फिर खामोश बैठे रहे या फीर यह कहा जाए की अंदर से पार्टी के लिए दगाबाजी की या पार्टी के कई बड़े नेता सामने वाली पार्टी के उम्मीदवार से मिल गए यह सब तो 3 दिसंबर को मतगणना के बाद परिणाम आने के बाद मालूम चल ही जाएगा की किस पार्टी के नेता ने अपनी पोलिंग को अच्छे बहुमत से जिताया या दगाबाजी करके पोलिंग हरबादी अब एक बात यहां पार्टी के छोटे-छोटे कार्यकर्ताओं को सता रही है कि हमने पार्टी के लिए वफादारी से काम किया और इसका पूरा फायदा पार्टी के वरिष्ठ नेता जो चुनाव के समय विरोध जाता रहे थे वह ले जाएंगे या फिर पार्टी इन्हें दरकिनार करेगी इस बात की चर्चा भी क्षेत्र में आम है सिरोंज विधानसभा वैसे तो दलित मुस्लिम बहुमूल्य क्षेत्र है दलित मुस्लिम वोट ज्यादातर कांग्रेस पक्ष का माना जाता है लेकिन सिरोंज विधानसभा में 1990 के बाद से शर्मा परिवार का दबदबा रहा है और लगातार चार बार से भाजपा के पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा यहां से विजय होते हुए आए थे फिर उन्हें कांग्रेस के गोवर्धन उपाध्याय ने 2013 में चुनाव हरा दिया इसके बाद भाजपा के हाथ से यह सीट चली गई और चर्चा फिर आम बनी कि इस बार भी ब्राह्मण के हाथ में ही सिरोंज लटेरी की कमान आ गई क्योंकि गोवर्धन उपाध्याय भी ब्राह्मण समाज से आते हैं फिर 2018 में भाजपा से उम्मीदवार उमाकांत शर्मा थे जिसको सिरोंज लटेरी विधानसभा क्षेत्र की जनता ने अपना बहुमूल्य बोट देकर लगभग 35000 के अंतराल से कांग्रेस से उम्मीदवार रही मसर्रत शाईद को चुनाव हराया अब इस बार कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार गगनेंद्र रघुवंशी को बनाया है जिनके सामने भारतीय जनता पार्टी ने इस बार फिर दिग्गज नेता उमाकांत शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है सिरोंज लटेरी का चुनाव तो शांतिपूण रहा और मतदान भी शांतिपूर्वक हो ही गया लेकिन जीत की उम्मीद तो दोनों ही ओर से लगाई जा रही है मगर अभी इस सीट से कौन विजय होगा यह कहना आसान नहीं है इस बार कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार गगनेंद्र रघुवंशी को जनता ने वोट दिया है लेकिन उनके सामने भारतीय जनता पार्टी से उम्मीदवारी कर रहे उमाकांत शर्मा का प्रभाव क्षेत्र में जबरदस्त तरीके से है और चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बड़े लगन के साथ मेहनत की है तो दूसरी ओर गगनेंद्र रघुवंशी का चुनाव मानो जनता ने लड़ा हो ऐसी क्षेत्र में चर्चाएं आम है किसके सर पर बनेगा सेहरा और कौन रह जाएगा रुका यह तो मतगणना के बाद ही पता चलेगा.

नेता प्रतिपक्ष ने चुनाव आयोग में दर्ज कराई शिकायत

The opposition leader filed a complaint with the Election Commission. भिंड कलेक्टर के खिलाफ लगाए आरोप, मैं सात बार से लगातार कैसे जीत रहा हूं साजिश करते हुए जानबूझकर लहार विधानसभा में अधिकारी कर्मचारियों को वोटिंग से वंचित रखा. Udit Narayan – Sahara Samachaar भोपाल। मप्र के नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह ने मुख्य निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को हटाए जाने की मांग रखी। उन्होंने कहा वे मेरी जीत का कारण पूछते हैं। वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से पूछते हैं कि मैं सात बार से लगातार कैसे जीत रहा हूं। सिंह ने भिंड कलेक्टर पर और भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं।नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल गुरुवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय पहुंचा था। यहां उन्होंने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन से मुलाकात भिंड कलेक्टर को लेकर अपनी शिकायत दर्ज करवाई। गोविंद ने इस संबंध में चुनाव आयोग में ज्ञापन भी सौंपा। उनका कहना है कि संजीव श्रीवास्तव के रहते लहार विधानसभा में निष्पक्ष काउंटिंग नहीं हो पाएगी। वे भाजपा का एजेंट बनकर काम कर रहे हैं। इसीलिए कलेक्टर श्रीवास्तव को हटाया जाए। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि भिंड कलेक्टर ने साजिश करते हुए जानबूझकर लहार विधानसभा में अधिकारी कर्मचारियों को वोटिंग से वंचित रखा। उन्होंने कहा कि कलेक्टर ने डाक मत पत्रों को कोषालय में जमा भी नहीं कराया गया। इतना ही मतदान दिवस पर कलेक्टर के आदेश पर मतदाताओं को प्रताड़ित किया गया, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग वोट नहीं कर पाए। कांग्रेस एजेंट्स को कलेक्टर ने मतदान केंद्र के बाहर बैठाए रखा और फर्जी मतदान करवाया गया। उन्होंने कहा कि भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को सीनियर आईएएस का संरक्षण प्राप्त है और यह सब कुछ उनके ही इशारे पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले ही उन्होंने सीएस को हटाने के लिए मांग उठाई थी।

बागियों ने अपनों की बढ़ाई मुश्किलें, त्रिकोणीय से भाजपा-कांग्रेस में टेंशन.

Tensions arise between BJP and Congress in triangular. दो दर्जन सीटों पर फसा पेंच, कहीं बागी भाजपा का खेल बिगाड़ रहे हैं तो कहीं कांग्रेस का. उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश की सभी 230 सीटों पर 17 नवंबर को मतदान होने के बाद 3 दिसंबर के परिणाम पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। वैसे तो प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला बताया जा रहा है, लेकिन इस बार बसपा, सपा के साथ ही बागी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इससे कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यह बागी कहीं भाजपा का खेल बिगाड़ रहे हैं तो कहीं कांग्रेस का। ऐसी करीब दो दर्जन सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी की धड़कनें बढ़ी हुई हैं तो वहीं, दोनों ही राजनीतिक दलों की टेंशन भी बढ़ गई है। बीएसपी ने 181 और निर्दलीय 1166 प्रत्याशी मैदान मेंबहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने इस चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन किया है। बीएसपी ने 181 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने 37 प्रत्याशी उतारे हैं। इसके अलावा प्रदेश में समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, जन अधिकार पार्टी, जनता दल यूनाइटेड पार्टी चुनाव मैदान में है। 2018 के चुनाव में बीएसपी को 6.42 प्रतिशत वोट मिले थे और दो सीटों पर जीत हासिल की थी। पिछली बार भाजपा को 109 और कांग्रेस को 114 सीटों पर विजय मिली थी। बागियों के कारण इन सीटों पर फसा पेंच राजनगर :छतरपुर जिले की राजनगर विधानसभा में भाजपा के जिला अध्यक्ष रहे डॉ. घासीराम पटेल बागी होकर बसपा से चुनावी मैदान हैं। उनके मैदान में आने से इस विधानसभा का चुनाव पूरी तरह से त्रिकोणीय हो गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों की मुश्िकल में फंसे हुए हैं। यहां अभी कांग्रेस के नाती राजा विधायक हैं। टीकमगढ़ :टीकमगढ़ विधानसभा शहरी क्षेत्र में है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का हर चुनाव में यहां खासा असर दिखाई देता है। इस बार भाजपा के विधायक राकेश गिरी गोस्वामी को उन्हीं की पार्टी के पूर्व विधायक केके श्रीवास्तव बागी होकर कड़ी टक्कर दे रहे हैं। नर्मदापुरम :यहां पर भाजपा से बागी भगवती चौरे निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी सीताशरण शर्मा को इससे नुकसान हो सकता है। इस सीट पर कांग्रेस से सीताशरण शर्मा के भाई गिरजाशंकर शर्मा प्रत्याशी हैं। भगवती चौरे के निर्दलीय चुनाव लड़ने से इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय और दिलचस्प हो गया है। सतना :भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष और भाजयुमो के दो बार सतना जिला अध्यक्ष रहे चुके रत्नाकर चतुर्वेदी शिवा बसपा से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने बसपा की सदस्यता ले ली थी। यहां पर भाजपा ने चार बार के सांसद गणेश सिंह और कांग्रेस ने विधायक सिद्धार्थ कुशवाह मैदान में हैं। बुरहानपुर :भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. नंद कुमार सिंह चौहान के बेटे हर्षवर्धन सिंह चौहान निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा ने पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस की तरफ से विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा प्रत्याशी हैं। सीधी :भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर सीधी सीट पर विधायक केदारनाथ शुक्ला निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इससे भाजपा प्रत्याशी रीति पाठक को नुकसान हो सकता है। यहां पर कांग्रेस की तरफ से ज्ञान सिंह प्रत्याशी हैं। मुरैना :भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह के बेटे राकेश सिंह बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा से रघुराज कंसाना और कांग्रेस से दिनेश गुर्जर प्रत्याशी हैं। टीकमगढ़ :भाजपा से पूर्व विधायक केके श्रीवास्तव टीकमगढ़ में निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा ने वर्तमान विधायक राकेश सिंह और कांग्रेस ने यादवेंद्र सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। भिंड :बसपा से चुनाव जीत कर भाजपा में शामिल होने पर संजीव कुशवाह ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर कुशवाह बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा से नरेंद्र सिंह कुशवाह और कांग्रेस से चौधरी राकेश चतुर्वेदी मैदान में हैं। सुमावली :कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप सिंह सिकरवार बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा से एंदल सिंह कंसाना और कांग्रेस से अजब सिंह कुशवाह को टिकट दिया है। चाचौड़ा :भाजपा से पूर्व विधायक ममता मीणा आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ रही हैं। यहां पर कांग्रेस से विधायक लक्ष्मण सिंह प्रत्याशी हैं। वहीं, भाजपा ने प्रियंका मीणा को प्रत्याशी बनाया है। धार :पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष राजीव यादव पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ बागी होकर चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा ने विधायक नीना विक्रम वर्मा और कांग्रेस ने प्रभा गौतम को प्रत्याशी बनाया है। डॉ. अंबेडकर महू :कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर पूर्व विधायक अंतरसिंह दरबार महू से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर कांग्रेस ने राम किशोर शुक्ला को प्रत्याशी बनाया है। जबकि भाजपा की तरफ से वर्तमान विधायक उषा ठाकुर हैं। परसवाड़ा :बालाघाट की परसवाड़ा सीट पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रत्याशी पूर्व विधायक कंकर मुंजारे के चुनाव लड़ने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां पर भाजपा की तरफ से रामकिशोर कांवरे और कांग्रेस ने मधु भगत प्रत्याशी हैं। सिरमौर :सिरमौर विधानसभा सीट पर पूर्व डीएसपी वीडी पांडे ने मुकाबला त्रिकोणीय कर दिया है। यहां पर भाजपा से दिव्यराज सिंह और कांग्रेस से रामगरीब कोल प्रत्याशी हैं। रैगांव :बसपा प्रत्याशी देवराज अहिरवार ने रैगांव में मुकाबला रोचक कर दिया है। यहां पर कांग्रेस की तरफ से विधायक कल्पना वर्मा और भाजपा की तरफ से प्रतिमा बागरी प्रत्याशी है। नागौद :कांग्रेस से टिकट कटने पर यहां पर पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह बीएसपी से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर कांग्रेस ने डॉ. रश्मि सिंह पटेल और भाजपा ने नागेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया है। देवतालाब :यहां पर समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रही सीमा जयवीर सेंगर से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां पर भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम और कांग्रेस ने पद्ममेश गौतम को टिकट दिया है। सीमा जयवीर सेंगर 2018 में बसपा से चुनाव लड़ कर दूसरे नंबर पर थी।

शिवपुरी भाजपा जिलाध्यक्ष का दावा…लाड़ली बहनों का आशीर्वाद भरपूर मिला

Shivpuri BJP district president claim…received abundant blessings from dear sisters. (SAHARA SAMACHAR) शिवपुरी। शिवपुरी के बीजेपी जिलाध्यक्ष राजू बाथम ने दावा किया है कि जिले की पांचों विधानसभा सीटें भाजपा जीत रही है। जिलाध्यक्ष राजू बाथम ने दावा किया कि लाड़ली बहनों का आशीर्वाद बीजेपी को भरपूर मिला है। इसके कारण बीजेपी जीत रही है। जिलाध्यक्ष राजू बाथम ने कहा कि इस वोटिंग से लोकतंत्र मजबूत हुआ है। ऐतिहासिक मतदान हुआ है। लाड़ली बहना, मजदूर, गरीबों और किसानों का समर्थन बीजेपी को मिला है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की जनहितैषी व जन कल्याणकारी योजनाओं के कारण अच्छी वोटिंग हुई है, इसका लाभ बीजेपी को मिलेगा। कांग्रेसियों द्वारा शिवपुरी की कम से कम तीन सीटें जीतने के दावे को लेकर राजू बाथम से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा, मुझे कांग्रेसियों के द्वारा किए जा रहे दावे को लेकर कुछ जानकारी नहीं है। लेकिन मेरा दावा है कि बीजेपी शिवपुरी जिले की पांचों सीटें जीत रही है। गौरतलब है कि शिवपुरी जिले में पांच विधानसभा सीटें आती हैं। इन पांचों विधानसभा सीटों पर 17 नवंबर को 79 प्रतिशत मतदान हुआ है। साल 2018 के मुकाबले इस साल पांच प्रतिशत ज्यादा मतदान पांचों सीटों पर हुआ है। अब तीन दिसंबर को शिवपुरी में मतगणना होगा। शिवपुरी के पीजी कॉलेज में पांचों विधानसभा सीटों की मतगणना का काम किया जाएगा। तीन दिसंबर को आने वाले परिणामों पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं।

उज्जैन के किसान ने बोवनी करने के लिए प्रधानमंत्री से मांगा हेलीकॉप्टर

Farmer from Ujjain has requested a helicopter from the Prime Minister for aerial sowing. गांव गोंदिया निवासी किसान पुरुषोत्तम राठौर ने पीएमओ को लिखा पत्र (SAHARA SAMACHAR) उज्जैन। उज्जैन में चिंतामन थाना क्षेत्र के गांव गोंदिया निवासी किसान पुरुषोत्तम राठौर ने अपने खेत पर जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से हेलीकॉप्टर की मांग की है। किसान का कहना है कि उसका खेत सुना और खाली पड़ा है और उसके खेत में वह कोई फसल की बोवनी नहीं कर पाया है। दरअसल, किसान के खेत के आसपास गांव के ही स्थानीय दबंग व्यक्तियों ने कब्जा कर लिया है और वह किसान को खेत में नहीं जाने देते हैं। पीड़ित किसान का परिवार जब खेत पर पहुंचता है तो उनके साथ मारपीट की जाती है। डर के चलते किसान ने खेत पर कोई फसल भी नहीं बोई है। किसान का कहना है कि मैंने लिखित में आवेदन देकर शिकायत की है, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई है। अब किसान ने अपने खेत पर जाने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार और राज्य सरकार सहित जिला प्रशासन से हेलीकॉप्टर की मांग की है और कहा है कि खेत तक पहुंचने के सभी रास्ते बंद हैं। इसलिए अब वह हवाई मार्ग से सीधे खेत पर उतरेगा और खेत में बोवनी करेगा।

बुंदेलखंड को फतह करने वाला ही सत्ता के शिखर तक पहुंचेगा. बुंदेलखंड की 26 सीटों पर भाजपा-कांग्रेस का फिफ्टी-फिफ्टी का दावा.

One who conquers Bundelkhand will reach the pinnacle of power. There is a claim of a fifty-fifty contest between the BJP and Congress on the 26 seats of Bundelkhand. प्रदेश विधानसभा के हुए चुनाव की मतगणना में अभी 10 दिन का समय शेष, नतीजों को लेकर कयासों का दौर जारी, दोनों दल 17-17 सीट जीतने का दावा. तीन सीटों को छोड़कर हर सीट कड़े मुकाबले में फंसी. उदित नारायणभोपाल। मप्र विधानसभा चुनाव का आकलन अंचल बार देखें तो बुंदेलखंड भी एक अहम अंचल है। यहां गरीब और पलायन सबसे बड़ा मुद्दा रहा हो, लेकिन दोनों की दलों ने इन मुद्दों की अनदेखी कर प्रदेश स्तरीय मुद्दों पर वोट मांगे हैं। चुनाव की मतगणना में अभी 10 दिन का समय शेष है। इस बीच नतीजों को लेकर कयासों का दौर जारी है। कोई भाजपा की सरकार फिर आने का दावा कर रहा है तो कोई कांग्रेस की सत्ता में वापसी तय बता रहा है। अंचलवार भी भाजपा-कांग्रेस के साथ अन्य विश्लेषकों के आकलन सामने आ रहे हैं। बुंदेलखंड अंचल में विधानसभा की 26 सीटें हैं। भाजपा-कांग्रेस दोनों 17 से ज्यादा सीटों में जीत का दावा कर रहे हैं। अन्य विश्लेषकों में कोई भाजपा को आगे बता रहा है तो कोई कांग्रेस को। सागर को लेकर दोनों दलों का दावा भाजपा के नेताओं से बात करने पर पता चलता है कि वे 17 से ज्यादा सीटों में जीत को लेकर आश्वस्त हैं। सागर में भाजपा तीन सीटों पर मजबूतविश्लेषकों के अनुसार सागर की तीन सीटों रहली में गोपाल भार्गव, खुरई में भूपेंद्र सिंह और सुरखी में गोविंद सिंह राजपूत एकतरफा जीत रहे हैं। इनके अलावा नरयावली में प्रदीप लारिया और सागर में शैलेंद्र जैन की स्थिति भी मजबूत है। प्रदेश भाजपा को मिले फीडबैक के अनुसार देवरी, बीना और बंडा में कड़ा मुकाबला है। इसके विपरीत कांग्रेस सागर में फिफ्टी-फिफ्टी की स्थिति बता रही है। दमोह में मुश्िकल में फंसे मलैयापिछली बार की तरह इस बार भी पूर्व मंत्री जयंत मलैया कड़े मुकाबले में फंसे हैं। बावजूद इसके भाजपा का दावा है कि पार्टी दमोह, हटा और पथरिया सीट जीत रही है। इसके विपरीत कांग्रेस का दावा है कि हम हटा को छोड़ शेष तीनों सीटें जीत रहे हैं। तटस्थ विश्लेषकों का कहना है कि इस बार दमोह जिले की चारों सीटों में कड़ा मुकाबला है। पथरिया में विधायक रामबाई के कारण त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति है। दमोह में कुछ भी हो सकता है। छतरपुर में तीन-तीन सीट मिलने के हालातछतरपुर जिले की 6 विधानसभा सीटों में तटस्थ आकलन कर्ताओं की नजर में भाजपा- कांग्रेस को 3-3 सीटें मिलती दिख रही है। इनके अनुसार चंदला, मलेहरा और छतरपुर में कांग्रेस जीत सकती है जबकि महाराजपुर, बिजावर और राजनगर में भाजपा जीत सकती है। हालांकि इन तीनों सीटों में कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है। भाजपा-कांग्रेस इस जिले में ज्यादातर सीटों में जीत का दावा कर रहे हैं। भाज का दावा है कि वह छतरपुर, राजनगर, मलेहरा, बिजावर सीटें जीत रही है जबकि चंदला और महाराजपुर में कड़ा मुकाबला है। इसके विपरीत कांग्रेस का कहना है कि भाजपा को सिर्फ एक बिजावर सीट मिल सकती है। शेष सभी 5 सीटों में कांग्रेस की जीत तय है। टीकमगढ़ जिले को लेकर कांग्रेस आश्वस्तटीकमगढ़ और निवाड़ी जिले की पांचों विधानसभा सीटों में कड़े मुकाबले के आसार हैं लेकिन कांग्रेस मानकर चल रही है कि उसे कम से कम 4 सीटों में जीत मिलेगी। कांग्रेस को मिले फीडबैक के अनुसार टीकमगढ़ में यादवेंद्र सिंह, खरगापुर में चंदारानी सिंह, पृथ्वीपुर में नितेंद्र प्रताप सिंह और जतारा में किरण अहिरवार की जीत तय है जबकि निवाड़ी में सपा की मीरा यादव जीत सकती हैं। दूसरी तरफ भाजपा का दावा है कि 2018 की तरह यहां कांग्रेस का खाता नहीं खुलेगा और भाजपा सभी सीटें जीतेगी। पन्ना में भाजपा की एक सीट पक्कीपन्ना जिले की तीन सीटों में आकलनकर्ताओं की नजर में पन्ना को छोड़ अन्य दोनों सीटों में कड़ा मुकाबला है। पन्ना में खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह की स्थिति मजबूत बताई जा रही है तो पवई और गुनौर सीटें कड़े मुकाबले में फंसी हैं। फिर भी भाजपा सभी तीनों सीटों में जीत का दावा कर रही है जबकि कांग्रेस का मानना है कि वह दो सीटें जीत रही है। भाजपा- कांग्रेस के दावे पार्टी द्वारा बुलाए गए फीडबैक के आधार पर किए जा रहे है। कौन सही है कौन गलत, यह 3 को मतगणना के बाद पता चल सकेगा।

तराना विधानसभा के मतदान केंद्र १३६ पर मॉक पोल का रिकॉर्ड क्लीयर किए बिना हुआ मतदान.

Voting at Polling Center 136 in the Tarana Assembly constituency took place without clearing the record of the mock poll. Special Correspondent. उज्जैन, उज्जैन विधानसभा चुनाव में तराना विधानसभा के एक पोलिंग बूथ पर मतदानकर्मी ने मॉक पोल के बाद वोट डिलीट और रिकॉर्ड जीरो किए बिना मतदान शुरू करा दिया। तराना विधानसभा के ग्राम आबादखेड़ी मतदान केंद्र क्रमांक 136 पर अन्य केंद्रों की तरह सुबह 7 बजे मॉक पोलिंग हुई। इलेक्शन एजेंट्स की मौजूदगी में मशीन में 50 मत डाले गए। नियमानुसार वास्तविक मतदान शुरू होने से पूर्व मॉक पोल के वोट डिलीट कर मशीन का रिकॉर्ड क्लीयर करना था। संबंधित मतदानकर्मी ने रिकॉर्ड क्लीयर किए बिना वास्तविक मतदान शुरू करा दिया। जब मतदाताओं ने मशीन के बटन दबाकर अपना मत देना शुरू किया तब मॉक पोल रिकॉर्ड क्लीयर न होने की बात सामने आई। जानकारी के अनुसार मशीन में करीब 400 वोट डले हैं। तराना विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर राजेश बोरासी ने जिला निर्वाचन अधिकारी को प्रतिवेदन प्रस्तुत कर मार्गदर्शन मांगा है। मॉक पोल का रिकॉर्ड क्लीयर किए बिना मतदान की स्थिति में निर्वाचन आयोग के निर्देश स्पष्ट हैं। मतगणना में उक्त मशीन के मतों की गणना प्रारंभ में नहीं की जाएगी। यदि जीत-हार का अंतर कम होता है तो वीवीपेट की स्लिप के आधार पर गणना होगी।कुमार पुरुषोत्तम, कलेक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी

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