LATEST NEWS

कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा अपने बयान से एक बार फिर चर्चा में.

Former minister P.C. Sharma, who served in the Congress government, is once again in discussion due to his statement. बोले- प्रचार के दौरान कमल पटेल के क्षेत्र की जनता कहती थी भाजपा से सब कुछ मिला, लेकिन वोट कांग्रेस को देंगेदावा – कांग्रेस 114 नहीं 174 सीट जीत रही, भाजपा वाले बहुमत से सरकार बनाने की बात नहीं कर रहे. Udit Narayanभोपाल। कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा अपने बयान से एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने कहा कि वो मंत्री कमल पटेल के क्षेत्र में गए थे, वहां उन्होंने जब जनता से पूछा बीजेपी में कुछ मिला था क्या, तो जनता बोली मिला सब कुछ, लेकिन वोट कांग्रेस को ही करेंगे। बता दें, शर्मा अपने बयानों से हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। इसके पहले भी उन्होंने हाल ही बयान दिया था कि भारतीय टीम ईडी के छापे के डर से क्रिकेट वर्ल्ड कप में हार गई थी। शर्मा ने ये दावा किया कि कांग्रेस 114 नहीं 174 सीट जीत रही है। कांग्रेस की लहर चल रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी बहुमत से सरकार बनाने की बात कहती थी पर अब नहीं कह रही है। शर्मा ने कहा कि बीजेपी के सर्वे भी बता रहे हैं कि कांग्रेस की सरकार बन रही है। बीजेपी जान गई है कि अब कांग्रेस की सरकार बन रही है। कांग्रेस के प्रशिक्षण में कमलनाथ के वर्चुअली संबोधन पर पीसी शर्मा ने कहा कि ये वक्त बदलाव का है। ईवीएम में गड़बड़ी के सवाल पर पीसी शर्मा ने कहा कि जब तक बीजेपी की सरकार है। ये गड़बड़ी करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। भाजपा के कई मंत्री हारेंगे – पीसी- विधानसभा चुनाव के परिणाम पर पीसी शर्मा ने कहा कि भाजपा कई मंत्री इस बार हारेंगे। वहीं बुधनी विधानसभा को लेकर उन्होंने कहा कि हनुमान जी की लीला है और हनुमान जी कुछ भी कर सकते हैं। शर्मा खुद भोपाल की दक्षिण पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने उनके सामने भगवानदास सबनानी को उतारा है। पिछले चुनाव में शर्मा ने इसी सीट से भाजपा के पूर्व मंत्री उमा शंकर गुप्ता को पटकनी दी थी।

अपने दिग्गजों की राजनैतिक विरासत संभालने निकले ‘वंशज’ डेंजर जोन में फंसे.

The ‘descendants’ set out to uphold the political legacy of their stalwarts find themselves trapped in the danger zone. मैदान में अर्जुन, दिग्विजय, कैलाश, पटवा और सकलेचा के बेटे, बड़ा कारण – कांग्रेस-भाजपा ही नहीं अन्य राजनीतिक दलों व निर्दलीय लड़ा चुनाव, राजनीतिक भविष्य ईवीएम में बंद, 3 को खुलेगा तो ही चमकेगी विधायकी की तरदीर उदित नारायणभोपाल। इस बार मप्र के चुनाव में सबसे ज्यादा दिग्गज नेताओं के वारिस चुनावी मैदान में उतरे हैं। इनमें से ज्यादातर का राजनैतिक भविष्य दाव पर लगा है, हालांकि कुछ के लिए राह आसान भी दिखाई दे रही है। जब 3 दिसंबर को ईवीएम परिणाम उगलेगी तो जीत और हार के दावे की हकीकत सबके सामने आ जाएगी। विधानसभा चुनाव में कई राजनेताओं के वंशज व परिवार के सदस्य मैदान में उतरे हैं जिनका राजनीतिक भविष्य ईवीएम में बंद है। इनमें कांग्रेस सरकारों के पूर्व मुख्यमंत्रियों अर्जुनसिंह व दिग्विजय सिंह, गैर कांग्रेस सरकारों के पूर्व मुख्यमंत्रियों कैलाश जोशी, सुंदरलाल पटवा, वीरेंद्र सकलेचा, बाबूलाल गौर, उमा भारती और गोविंदनारायण सिंह के वंशज प्रमुख हैं। इनके अलावा प्रदेश सरकारों के पूर्व मंत्री, सक्रिय राजनेताओं के वंशज भी चुनाव मैदान में उतरे हैं जिन्होंने कांग्रेस-भाजपा ही नहीं अन्य राजनीतिक दलों व निर्दलीय चुनाव लड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्रियों में अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह चुरहट और साले राजेंद्र सिंह अमरपाटन से हैं जिनकी स्थिति पिछले चुनाव से बहुत अच्छी बताई जा रही है। दिग्विजय सिंह के पुत्र मंत्री जयवर्द्धन सिंह और भाई विधायक लक्ष्मण सिंह की स्थिति पिछली बार से कमजोर है लेकिन दोनों के किसी तरह संकट से बाहर निकल जाने की परिस्थितियां दिखाई दे रही हैं। कैलाश जोशी के पुत्र दीपक के चुनाव के ठीक पहले भाजपा से मोहभंग होने तथा कांग्रेस में पहुंचने से कुछ नुकसान है तो फायदा भी मिलेगा। सुंदरलाल पटवा के भतीजे विधायक सुरेंद्र, वीरेंद्र सकलेचा के पुत्र मंत्री ओमप्रकाश और बाबूलाल गौर की बहू विधायक कृष्णा गौर की स्थिति बेहतर है लेकिन भारती के भतीजे मंत्री राहूल लोधी की सीट पर चुनौतीपूर्ण मुकाबला है। अन्य वंशजों में कुछ बेहतर तो कुछ मुकाबले में फंसेराजनेताओं के अन्य वंशजों में मुकाबले में फंसे प्रत्याशियों में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के भांजे कांग्रेस प्रत्याशी राहुल भदौरिया, सिंधिया परिवार की निकटतम रिश्तेदार भाजपा प्रत्याशी माया सिंह, विधानसभा अध्?क्ष गिरीश गौतम के भतीजे कांग्रेस प्रत्याशी पद्मेश, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के पोते भाजपा प्रत्याशी सिद्धार्थ, इंदौर की सांवेर सीट पर पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू की बेटी कांग्रेस की रीना बौरासी के भविष्य का रास्ता 3 दिसंबर को खुलेगा। पूर्व मंत्री चिटनिस, डिप्टी सीएम रहे यादव के सामने चुनौती देपालपुर में निर्भयसिंह पटेल के पुत्र भाजपा प्रत्याशी मनोज पटेल, रतलाम की जावरा सीट पर पूर्व सांसद लक्ष्मीनाराण पांडेय के पुत्र भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र पांडेय, बुरहानपुर की नेपानगर सीट पर पूर्व विधायक राजेंद्र दादू की बेटी भाजपा प्रत्याशी मंजू दादू, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बृजमोहन मिश्र की पुत्री पूर्व मंत्री व भाजपा प्रत्याशी अर्चना चिटनीस, पूर्व विधायक चिड़ाभाई डाबर के बेटे विधायक कांग्रेस प्रत्याशी केदार डाबर, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुभाष यादव के पुत्र पूर्व मंत्री सचिन यादव, पूर्व विधायक सीताराम साधौ की पुत्री व पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ हैं। केंद्रीय मंत्री भूरिया बेटे के लिए परेशानपूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के पुत्र डॉ. विक्रांत भूरिया, पूर्व विधायक प्रेम सिंह दत्तीगांव के पुत्र मंत्री भाजपा प्रत्याशी राजवर्धन सिंह, पूर्व मंत्री इंद्रजीत कुमार के पुत्र पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी कमलेश्वर पटेल, पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर के पुत्र कांग्रेस प्रत्याशी नितेंद्र सिंह, पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुवेर्दी के भाई कांग्रेस प्रत्याशी विधायक आलोक चतुवेर्दी, पूर्व विधायक चौधरी दिलीप सिंह के पुत्र पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी चौधरी राकेश सिंह चतुवेर्दी, पूर्व मंत्री सत्येंद्र पाठक के पुत्र भाजपा प्रत्याशी संजय पाठक, पूर्व विधायक प्रभात पांडेय के पुत्र भाजपा प्रत्याशी प्रणय पूर्व सांसद कंकर मुंजारे की पत्नी कांग्रेस प्रत्याशी अनुभा मुंजारे, पूर्व मंत्री लिखीराम कांवरे की पुत्री पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष कांग्रेस प्रत्याशी हिना कांवरे भी शामिल है। अकील की बेटे के लिए ज्यादा चिंंतापूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी की पुत्री भाजपा प्रत्याशी मोनिका, पूर्व मंत्री आरिफ अकील के बेटे कांग्रेस प्रत्याशी आतिफ अकील, पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश नारायण सारंग के पुत्र मंत्री विश्वास सारंग, पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई विधायक भाजपा प्रत्याशी उमाकांत, पूर्व विधायक केदार सिंह चौहान के पुत्र भाजपा प्रत्याशी महेंद्र सिंह चौहान, पूर्व विधायक गोविंद शर्मा के पुत्र विधायक भाजपा प्रत्याशी आशीष शर्मा, पूर्व मंत्री हजारीलाल रघुवंशी के पुत्र ओमप्रकाश रघुवंशी के नाम प्रमुख हैं। इन नेताओं की सीट में अच्छे संकेतवहीं जिन नेताओं के वंशजों के लिए चुनाव में मुकाबला आसान दिखाई दे रहा है उनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी के भतीजे व पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी उमंग सिंगार, पूर्व मंत्री सुलोचना रावत के पुत्र भाजपा प्रत्याशी विशाल रावत, पूर्व मंत्री तुकोजीराव पवार की पत्नी विधायक गायत्रीराजे, पूर्व सांसद सुखराम कुशवाह के पुत्र विधायक सिद्धार्थ कुशवाह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के पुत्र कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत कटारे, नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की समधन पूर्व विधायक चंदा गौर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के पुत्र अशोक, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के भतीजे कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह शामिल हैं।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर प्रबंधन का जीपीएस बघीरा एप्प बना खिलौना.

The GPS Bagheera app has become a tool for management within the Bandhavgarh Tiger Reserve. भारत सरकार के कई लाखो की राशियों से खरीदा गया घटिया मोबाईल जीपीएस, प्रतिबंधित संरक्षित क्षेत्र में नियम विरुद्ध तरीके से प्रवेश वाहनों पर वाहन चालकों पर व गाइडो पर जीपीएस बघीरा एप्प लोकेशन अनुशार प्रबंधन कार्यवाही करने में हों रहा है नाकाम.बांधवगढ़ जंगल सफ़ारी में निर्धारित गति के नियमों की उड़ रही धज्जिया पर्यटको हेतु प्रतिबंधित संरक्षित क्षेत्र में भी प्रवेश कर रही है खुले आम पर्यटक वाहन फुल डे सफारी वाहन चालक व गाइड पर्यटक मिलकर वन्य जीव के रहवासी स्थल में पैदा करते हैं खलल. विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपनी छवि का मोहताज नही है किंतु कुछ वाहन चालक गाइड वह पर्यटक अपने निजीगत लाभ प्राप्त करने के लिए विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बांधवगढ़ की छवि धूमिल करने में पीछे नहीं है उपरोक्त मामला जब प्रकाश में आया की स्थानीय कुछ वाहन चालक व गाइडों का कहना है की प्रबंधन द्वारा दिए जा रहे गाइड च्वाइस सुविधा जिसका आदेश किसी भी राज्य पत्र व कोई ऐसी टाइगर रिजर्व की पॉलिसी में नहीं है उपरोक्त मामला पूर्व के क्षेत्र संचालक व प्रबंधन की जानकारी में लाई गई थी जिस पर क्षेत्र संचालक द्वारा मनपसंद गाइड को ले जाने पर रोक भी लगाया गया था किंतु कुछ ऐसे फोटो ग्राफर्स है जो नार्मल सफारी के वापस पार्क से आने के बाद करप्शन के रूप में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों के पास काफी नजदीक लेकर ले जाकर फोटोग्राफी करना चाहते हैं व साथ में रोड में अथवा रोड के पास में सोए हुए बाघों को जगाने का प्रयास कर फोटो ग्राफी करते हैं उपरोक्त कार्य में हर गाइड सम्मिलित होने से मना कर देता है तो फीर पर्यटक ऐशे कार्य वाले गाइड वाहन चालक को तलाशता है और उपरोक् कार्यो को अंजाम देने के लिए ऊपर के रसूख दारो से पर्यटक द्वारा दवाब वनवाया गया जिसके कारण बड़े ऐसे फोटोग्राफरों के व् रसूखदार के दबाव में आकर प्रबंधन ने यह कहते हुए की उपरोक्त मामला राजपत्र या एल ए सी में पारित करवाया जाएगा तब तक के लिए वैकल्पिक गाइड व्यवस्था चालू किया जाए किन्तु आज दिनाक तक कोई ऐशा क़ानून पारित नही किया गया जिसका खुलेआम दुरुपयोग देखने को मिल रहा है औए यह भी देखा गया की कुछ वाहन चालक व गाइड चंद पैसों के लिए सभी नियम कानून को रौंदते हुए वन्य जीव व बाघ के राहवास में खलल पैदा करते है जिस पर वन्य प्राणियों के जीवन यापन पर असर पड़ रहा है जिस पर राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण विभाग ने भारत सरकार राजपत्र में नियम पारित करते हुए 20 की स्पीड नियंत्रण व् वाहन से से वाहन की दूरी 50 मी किसी भी जानवर के पास 15 से 20 मिनट से अधिक न रुकने का और किसी भी वन्य प्राणी से वाहन की दूरी 20 मी पर वाहन रोकने का निर्देश जारी किया है और बाघ के मेटिंग पीरियड के दौरान व शिकार पर खाने के दौरान पूर्णतः प्रतिबंध हुआ है लेकिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में देखा गया कि सबसे अधिक वाहन तेज गति में उपरोक्त स्थान पर ही पहुंचाते हैं और उपरोक्त स्थान पर ही काफी देरी तक काफी नजदीक पर खड़े रहते हैं और यह सब नजारा प्रबंधन की आंखों के सामने ही होता होता है निर्धारित गति के नियमों की उड़ रही धज्जियाजहा बाघों के गढ़ की सफारी में लगे वाहन जंगलों के अंदर तय गति सीमा की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन प्रबन्धन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं मध्य प्रदेश। बाघों के गढ़ की सफारी में लगे वाहन जंगलों के अंदर तय गति सीमा की धज्जियां उड़ा रहे हैं जिस पर की राज्य सरकार व भारत सरकार द्वारा पार्क में चल रहे पर्यटक वाहनों में स्पीड गति नियंत्रण हेतु जीपीएस बगीरा एप्प हेतु अभी हाल में ही कई लाख रु का बजट संचालन हेतु दिया है किंतु प्रबंधन द्वारा उपरोक्त राशि का वारा न्यारा कर दिया गया ,और प्रबन्धन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। बाघ क्षेत्रों में सफारी ने न सिर्फ तय नियम और कायदों की धज्जियां उड़ाने में जुटे है, बल्कि सरकार के राजपत्र की अवमानना भी कर रहे हैं, लेकिन बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के सरोकारता का दम भरने वाला बांधवगढ़ प्रबन्धन चिर निंद्रा में लीन है। बाघ सफारी के लिए सफारी हेतु जिन जिप्सियों का उपयोग किया जाता है, उन जिप्सियों की गति सीमा एनटीसी निर्धारित की गई है, जिसमें अचानक वन्यप्राणियों या बाघ के आने पर वाहन नियंत्रित हो सके, तो वहीं बाघों के फ़ोटोग्राफी और विडियोग्राफी के लिए भी दूरियां तय की गई हैं फिर भी पार प्रबंधक के आंखों के सामने सभी नियम कानूनों को जिप्सी संचालको व गाइडों द्वारा रौंदते हुए फोटोग्राफी बाघों के पास वाहन लगा कर शोरगुल कराते हुए वन्य जीव के विचरण क्षेत्र में खलल पैदा किया जा रहा है। पहले हो चुकी है घटनाबावजूद इसके नियम बीटीआर में दम तोड़ रहे हैं, खबर है कि इन सबकी जानकारी बीटीआर फील्ड डायरेक्टर व प्रबंधन के अमला को भलीभांति है, लेकिन उनके द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। विदित हो कि पूर्व में फोटोग्राफी व मोबाइल फोन के फेर में एक पर्यटक वाहन तेज गति में अपना नियंत्रण खो दिया था, जिसमें कई पर्यटक घायल हो गए थे। बावजूद इसके पार्क प्रबन्धन नियमों का पालन कराने और न ही सफारी वाहन संचालकों द्वारा नियमों का पालन कराने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, बल्कि उदासीन रवैया घटना की पुनरावृत्ति के ताक में बैठा है। फोटोग्राफी पर लगा प्रतिबंधपार्क क्षेत्र में हुई दुर्घटनाओं को देखते हुए 29 मई 2018 के राजपत्र में पर्यटक भ्रमण के दौरान वाहन चालकों के फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लगा दिया गया, किंतु कुछ वाहन चालक सरेआम राजपत्र की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम फोटोग्राफी कर रहे हैं और तो और वन्यप्राणियों के अधिकतम पास वाहनों को सटाकर फोटोग्राफी करते और कराते हैं, जो भारत राजपत्र व एनटीसीए के नियमों के विपरीत है। पार्क प्रबंधन ने बंद की आंखेंबांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफ़ारी के दौरान पर्यटक वाहनों के शोरगुल के दबाव में आकर संरक्षित क्षेत्र के बाघ अपना क्षेत्र छोड़ बफर क्षेत्रों में पलायन कर जाते हैं, जिसके बाद उनकी … Read more

किसानों के लिए महत्वपूर्ण खबर, अब इस महीने में आएगी PM Kisan की 16वीं किस्त! खाते में आएंगे फिर 2-2 हजार, जानें EKYC पर ताजा अपडेट.

Important news for farmers: The 16th installment of PM Kisan will be credited this month! Another 2,000 rupees will be deposited in the accounts. Get the latest update on EKYC. उदित नारायणप्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केन्द्र सरकार की किसानों के लिए चलाई जा रही कई योजनाओं में से एक बड़ी योजना है। इस योजना के तहत किसानों को सालाना 6,000 रुपये दिए जाते है। यह राशि हर 4 माह में 3 किस्तों में 2,000-2000 रुपये करके DBT के माध्यम से दी जाती है।अबतक योजना की 15वीं किस्त जारी हो चुकी है और अब 16वीं किस्त जारी की जानी है। कब आएगी पीएम किसान योजना की 16वीं किस्तपीएम किसान योजना के नियमानुसार, पहली किस्त अप्रैल-जुलाई के बीच , दूसरी किस्त अगस्त से नवंबर के बीच और तीसरी किस्त दिसंबर से मार्च के बीच जारी की जाती है, ऐसे में संभावना है कि फरवरी से मार्च के बीच कभी भी 16वीं किस्त जारी की जा सकती है। हालांकि अगली किस्त जारी करने की कोई निश्चित तिथि अभी सामने नहीं आई है।ध्यान रहे अगली किस्त का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने eKYC, भू सत्यापन और आधार लिंक की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है और जिन्होंने ये तीनों काम नहीं किए है, उन्हें लाभ से वंचित किया जा सकता है।

पानी की समस्या से जूझते ग्रामीण जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान.

Rural areas are not paying adequate attention to the issue of water scarcity. Special Correspondent. कटनी /उमरियापान। जिम्मेदारों एवं लोक स्वास्थ्य यात्रीकी विभाग की उदासीनता के चलते ग्रामीण पीड़ा झेल रहे हैं ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के घुघरा ग्राम पंचायत के टोपी गांव में हैंडपंपों के बंद होने से ग्रामीण परेशान हैं। दर्जनों बाद लिखित, मौखिक शिकायत करने के बाद भी हैंडपंप नहीं सुधरे है। बीते कई वर्षों से टोपी गांव में रहने वाले लोग पीने के पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।दरअसल, यहां तीन -चार हैंडपंप है वह भी बंद हैं। इससे दिक्कत यह हो रही है लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। यहां रहने वाले अरविंद पटेल, अभिषेक पटेल, सुरेंद्र यादव,सुमित पटेल समेत अन्य ने बताया कि एक हैंडपंप स्कूल के पास लगा है। जिसमें तनिक पानी निकलता है। दूसरा हैंडपंप वर्षों से बंद है जबकि तीसरे हैंडपंप से तो सामाग्री ही गायब हो गई है। हैंडपंप पोल के सहारे खड़ा है। समर्सियल भी नहीं पड़ा। सभी हैंडपंप शोपीस बनकर रह गए हैं।गांव के लोग खेतों में लगे बोरबोल से पानी लाते हैं।पानी को लेकर सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं को होती है। गांव की महिलाओं ने बताया कि शिकायत तो अनेकों बार किया लेकिन फायदा नहीं मिला। यूं तो गांव में तीन से चार हैंडपंप हैं, लेकिन इनमें से तीन हैंडपंप खराब हैं। उन्होंने बताया कि एक हैंड पंप तो पिछले लंबे समय से खुला ही पड़ा है, लेकिन अभी तक ठीक नही हो सका है। जिसके चलते ग्रामीणों को दूर पानी लाकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों सहित जनप्रतिनिधियों पर लापरवाही आरोप लगा रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के लोग चंदा इकट्ठा करके पानी का पाइप खरीदकर लाये हैं। खेतों में बने बोरबोल से गांव तक पाइप बिछाया है। पाइप से गांव तक पानी पहुँचता है जिससे लोग पानी भरते हैं। अब देखना यह होगा की समस्या का निदान कब तक किया जाता है

सियासत किस करवट लेगी, इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म.

Political discussions are heating up over which direction politics will take. गगनचुंबी दावों के बीच किसके सिर सजेगा सत्ता का ताज, तीन दिसंबर को स्थिति होगी साफ, लगभग 150 घंटे का इंतजार बांकी. उदित नारायण उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश चुनाव 2023 के परिणाम को भले ही लगभग 150 घंटे शेष हों, लेकिन सियासत में कांग्रेस और भाजपा के परिणाम इस बार किस करवट बैठेंगे, इसको लेकर भारी चर्चा हो रही है। मध्यप्रदेश में बिना किसी लहर के नजर आए मतदाताओं के उत्साह और भारी मतदान के बाद राजनीतिक दल और राजनेता आंकड़ों के खेल में उलझ कर इस बात का अंदाजा लगा रहे हैं कि आखिर सता का ताज किसके सिर सजेगा। भाजपा को भरोसा है कि सत्ता का ताज उसके सर पर ही सजा रहेगा। वहीं कांग्रेस को भरोसा है कि कांग्रेस की ही सरकार बन रही है और कमल नाथ मुख्यमंत्री बनेंगे। लाडली बहना बनाम एंटी इनकमबेंसी को लेकर ही अनुमान लगाए जा रहे हैं। शिवराज सरकार की लाडली बहना योजना को भाजपा अपने पक्ष में मानकर चल रही है तो कांग्रेस एंटी इनकमबेंसी और महंगाई के कारण महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में मानकर अपनी जीतका गगनचुंबी दावा कर रही हैं। भाजपा नेता मध्यप्रदेश में 230 सीटों में से 150 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस नेता 125 से लेकर 150 सीट तक जीतने का दावा कर रहे हैं। अपने अंदरूनी सर्वे में दोनों ही दल यह मानकर चल रहे हैं कि लगभग 100 -100 सीटें तो जीत ही रहे हैं और बची हुई 30 सीटों में से जो भी आधे से अधिक जीत लेगा उसे ही मध्य प्रदेश में सत्ता साकेत में नौकायन का मौका मिल जाएगा। लाख टके के सवाल का जवाब 3 दिसंबर को मतगणना से ही मिलेगा 116 का जादुई आंकड़ा कौन पर करता है। वास्तव में भारी मतदान किसके पक्ष में हुआ है इसको लेकर राजनीतिक विश्लेषक भी अपने-अपने ढंग से इसका अर्थ निकाल रहे हैं लेकिन कोई भी निश्चित तौर पर यह नहीं कह रहा है कि चुनाव कौन जीत रहा है। मध्यप्रदेश के चुनाव नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि शिवराज की लाडली बहना ने कोई गुल खिलाया है या फिर एंटी इनकंबेंसी मतदाताओं के मानस पटल पर पूरी तरह छाई रही। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बात का पक्का भरोसा है कि लाडली बहनों ने अपने भाई का साथ दिया है और भाजपा की ही सरकार बनने वाली है। वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का दावा है कि मतदाता मध्यप्रदेश का निर्माण करेगा और उनका एक-एक वोट प्रदेश में फैले कुशासन को समाप्त कर जनहित की सरकार की स्थापना करेगा। सूत्रों के अनुसार भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण में उसे 124 सीटें जीतने का पक्का भरोसा है जबकि उसका अनुमान है कि कांग्रेस को लगभग 100 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस 130 से अधिक सीटों के साथ अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही है तो वहीं पर दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी 124 सीटों पर अपनी जीत पक्की मान वह लगभग 4 सीटों पर कड़े संघर्ष की स्थिति देख रही है। भाजपा के आंतरिक सर्वे में जहां तक विंध्याचल का सवाल है वहां पर पार्टी है यह मान रही है कि उसे यहां की 30 में 19 सीटें मिल ही जाएंगी तो वहीं दूसरी ओर 11 सीटें कांग्रेस को भी मिल सकती है। यहां की 25 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही सीधा मुकाबला बताया जा रहा है जबकि 5 सीटों में मुकाबला त्रिकोणात्मक माना जा रहा है। महाकौशल आंचल की कुल 38 सीटों में से भाजपा को 19 सीटों पर जीत का भरोसा है और इतनी सीटें वह कांग्रेस के लिए पक्की मानकर चल रही है। इस प्रकार भाजपा के आंतरिक सर्वे में भी इस अंचल में दोनों के बीच बराबरी का मुकाबला माना जा रहा है जबकि कांग्रेस इस अंचल में अपनी स्थिति काफी मजबूत मानकर चल रही है। यह तो मतगणना से ही पता चलेगा कि आखिर यहां के मतदाताओं ने किस पर अधिक और किस पर कम भरोसा जताया। भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार भोपाल- नर्मदापुरम संभाग की 36 सीटों में से भाजपा 20 पर अपनी जीत पक्की मानकर चल रही है और कांग्रेस को वह 15 सीटें दे रही है। राजधानी भोपाल की एक सीट भोपाल मध्य में वह कांग्रेस के साथ क कड़े संघर्ष की स्थिति देख रही है। इस संभाग में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुख्य चुनावी मुकाबला हो रहा है। ग्वालियर चंबल संभाग में 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को धीरे से जोर का झटका लगा था लेकिन यहां वह दल बदल के बाद भाजपा को अपनी स्थिति तुलनात्मक रूप से मजबूत नजर आ रही है क्योंकि इस बार उसे भरोसा है कि उसकी झोली में 15 सीटें तोआ ही रहीं हैं जबकि एक मुरैना सीट पर कड़े मुकाबले में बसपा को जीतते हुए देख रही है। इस सर्वे में माना जा रहा है कि इस अंचल में सबसे अधिक 17 सीटें कांग्रेस जीत सकती है। दतिया सीट पर भाजपा कांग्रेस के साथ कड़े मुकाबले की स्थिति देख रही है ।यहां पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर हो रही है। बुंदेलखंड अंचल की 26 सीटों में से भाजपा यह मानकर चल रही है कि कांग्रेस को 13 सीटों पर बढ़त है तो वहीं 12 सीटों को अपने लिए पक्की मान रही है जबकि एक सीट निवाड़ी में समाजवादी पार्टी को जीते हुए देख रही है। निमाड़ और मालवांचल की 66 सीटों में से वह अपने लिए 39 सीटें पक्की मान रही है जबकि क्षेत्र 25 सीटें कांग्रेस पार्टी को दे रही है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है उसे 130 से 140 सीटें जीतने का भरोसा है। कांग्रेस पार्टी का आंतरिक सर्वे भाजपा को मात्र 80 से 85 ही सीटें दे रहा है। वही आम आदमी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी आदि को लगभग दस तक सीटें मिल जाएगी ऐसा मानकर कांग्रेस चल रही है।कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी जीत का दावा पूरी शिद्दत के साथ कर रहे हैं।दोनों के अपने अपने तर्क हैं और अपने अपने विश्वास । सभी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने-अपने … Read more

महाकौशल के तीन दिग्गज नेताओं दाव पर लगी साख.

Mahakaushal three stalwart leaders of expertise face a challenge. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद और फग्गन सिंह कुलस्ते मैदान में, तीनों के परिणामों पर पूरे प्रदेश की नजर, भाजपा और कांग्रेस बेचैन, परिणामों को लेकर सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा 2023 के परिणामों को लेकर प्रदेश की सियासत में चर्चाओं का बाजार गर्म है। ग्वालियर-चंबल, निमाड़-मालवा, बुंदेलखंड, बिंध्य क्षेत्र और महाकौशल में यूं तो लोग अपने-अपने नेताओं की जीत को लेकर आश्वस्त हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के महाकौशल क्षेत्र की है। क्योंकि यह क्षेत्र उनका गढ़ कहा जाता है। इस क्षेत्र में इस बार कांग्रेस भारी रहेगी या भाजपा, इसको लेकर प्रदेश भर की नजर लगी हैं। कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में जहां पर जबरदस्त बढ़त ली थी। कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की सभी 7 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इस बार भाजपा ने अपने दो केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और फगन सिंह को भी इस क्षेत्र से विधानसभा के चुनाव मैदान में उतारा है। इस क्षेत्र में आने वाले आठ जिलों की 38 सीटों पर किसे कितनी सीटें मिलेंगी इस पर पूरे प्रदेश की नजर है। दरअसल, मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के लिए इस क्षेत्र को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। कमलनाथ के परिणामों पर सबकी नजरमध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ छिंदवाड़ा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। साल 2018 में वह चुनाव नहीं लड़े थे, लेकिन उनका प्रभाव साफ तौर पर इस जिले में दिखाई दिया था। जिले की सभी सिम कांग्रेस ने जीत ली थी बाद में कमलनाथ के उपचुनाव छिंदवाड़ा सीट से लड़ा और चुनाव जीत गए। इस बार कमलनाथ कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री का चेहरा इसलिए ना सिर्फ उनकी सीट छिंदवाड़ा पर लोगों की नजर है, बल्कि उनके जिले की हर सीट पर प्रदेश भर की नजर गड़ी हुई है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते के चौकाने वाले होंगे परिणामकेंद्रीय मंत्री पहलाद सिंह पटेल नरसिंहपुर से चुनाव लड़ रहे हैं उनके भाई जालम सिंह पटेल इसी क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश के दिग्गज नेताओं में शुमार प्रहलाद सिंह पटेल के चुनाव परिणामों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के साथ प्रदेश भर के सभी राजनेताओं की नजर उन पर है। केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते का भाजपा के दलित आदिवासियों नेताओं में बड़ा नाम है। इस बार उन्होंने निवास विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा है। साल 2018 में यह सीट कांग्रेस ने जीती थी। भाजपा ने आदिवासियों के सबसे बड़े नेता माने जाने वाले कुलस्ते को इस सीट से उतर कर मुकाबला रोचक बना दिया है। पूरे प्रदेश पर की नजर इस सीट पर है। महाकौशल में आने वाली आदिवासी बाहुल्य सीटों पर कुलस्ते के चुनावी मैदान में उतरने से कितना असर पड़ेगा। इस पर भी दोनों ही राजनीतिक दलों के लोगों की नज़रें टिकी हुई है।

हेरिटेज मदिरा बनाने में अब पर्यावरण एनओसी नहीं लगेगी.

Heritage liquor production will no longer require Environmental NOC. एयरपोर्ट, पर्यटन निगम की होटलों और वाइन शॉप में उपलब्ध उदित नारायणभोपाल। राज्य सरकार ने महुआ से निर्मित हेरिटेज मदिरा के उत्पादन के लिये बने नियमों में बदलाव कर दिया है। अब इसके निर्माण के लिये प्रदूषण नियंत्रण मंडल की एनओसी जमा नहीं कराना होगी। हालांकि आबकारी विभाग ने अपने नियमों में इसका प्रावधान हटा दिया है परन्तु यदि प्रदूषण नियंत्रण मंडल अपने विनियमों में इसका प्रावधान करेगा तो फिर यह एनओसी लेना जरुरी होगा। फिलहाल प्रदेश में अलीराजपुर जिले के ब्लाक कट्ठीवाड़ा के ग्राम कोछा में आदिवासी वर्ग के हनुमान आजीविका स्वसहायता समूह द्वारा महुआ से हेरिटेज मदिरा का निर्माण किया जा रहा है तथा इससे हेरीटेज को प्रदेश के चुनिंदा एयरपोर्ट, पर्यटन निगम की कतिपय होटलों एवं एमबी वाईन के आउटलेट पर विक्रय के लिये उपलब्ध कराई गई है। डिण्डौरी जिले के ब्लाक अमरपुर के ग्राम भाखानाल में स्थित मां नर्मदा आजीविका स्वसहायता समूह द्वारा अभी हेरीटेज मदिरा का निर्माण शुरु नहीं किया गया है। नये बदलावों के अंतर्गत, अब हेरीटेज मदिरा के विनिर्माता मूल्य, अधिकतम फुटकर मूल्य एवं न्यूनतम विक्रय मूल्य का निर्धारण आबकारी आयुक्त के अनुमोदन से होगा। स्वसहायता समूह में कम से कम 25 सदस्य दसवीं कक्षा अथवा उसके समकक्ष अर्हता रखने वाला प्रावधान अब खत्म कर दिया गया है। हेरीटेज मदिरा निर्माण इकाई में योग्यता प्राप्त विशेषज्ञ केवल अनुसूचित जनजाति समुदाय का ही हो सकेगा तथा इकाई में केवल अजजा समूदाय के व्यक्यिों से ही समस्त प्रकार की गतिविधियों का संचालन करवाया जायेगा। इसी प्रकार, अब हेरीटेज मदिरा के परिवहन हेतु एक ही अनुज्ञा-पत्र होगा जो भले की विनिर्माण इकाई से गोदाम तक एवं गोदाम से रिटेल दुकान तक किया जाये। पहले अलग-अलग परिवहन अनुज्ञा-पत्रों का प्रावधान था। हेरीटेज मदिरा के परिवहन में 0.25 प्रतिशत की छीजन यानि वेस्टेज (टूट-फूट) दी जायेगी। हेरीटेज मदिरा की फुटकर दुकान चलाने का एचएल-2 लायसेंस 5 हजार रुपये प्रति वर्ष के स्थान पर एक हजार रुपये प्रति वर्ष लगेगा।

सरकार किसी की भी बने, इस बार डिप्टी सीएम का फार्मूला भी.

Regardless of which government is formed, this time the formula for the Deputy Chief Minister is also there. Manish Trivediभोपाल, मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों में मतगणना के बाद सरकार किसी भी दल की बने चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस, लेकिन इतना तय है कि अब मध्यप्रदेश में डिप्टी सीएम के फार्मूले भी चलेंगे। इस बार दोनों ही दलों में सीएम बनने की चाहत वाले नेताओं को संतुष्ट करने के लिये यूपी , महाराष्ट्र व छत्तीसगढ की तर्ज पर डिप्टी सीएम बनाया जायेगा। ताकि सत्तारूढ पार्टी के बडे नेताओं में समन्वय रहे। यदि भाजपा की सरकार बनती है तो सीएम के अलावा दो डिप्टी सीएम बनेंगे, इसमें एक दलित वर्ग से भी पार्टी के एक बडे नेता को संतुष्ट किया जायेगा। वहीं कांग्रेस की सरकार बनती है तो ग्वालियर-चंबल या विंध्य, अंचल के एक बडे नेता को अब डिप्टी सीएम बनाना तय है। यह नेता कमलनाथ की पिछली सरकार में भी पावरफुल मंत्री रहे थे।कुल मिलाकर दोनों ही पार्टियां अब अंदर ही अंदर नाराजगी रोकने के लिये डिप्टी सीएम के फार्मूले पर काम कर रही है।

वोटिंग के बाद भाजपा के बडे नेता व मंत्री पूजा पाठ में तल्लीन.

After voting, senior leaders and ministers of the BJP were immersed in prayer. उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों की वोटिंग के बाद प्रदेश के एक दर्जन मंत्री और भाजपा के बडे नेता पूजा पाठ में लगे हैं । इन्हें विश्वास है कि उनकी पूजा पाठ से नैया पार लग जायेगी। यह मंत्री और बडे नेता धार्मिक स्थानों पर निकल गये हैं, तो कुछ अज्ञात वास पर हैं। जहां नियमित तौर पर अपने धार्मिक सलाहकारों की सलाह से पूजा पाठ में लगे हैं।कुल मिलाकर भाजपा की सरकार के मंत्री व बडे नेता मध्यप्रदेश में हुई बम्पर वोटिंग से मन ही मन घबरा रहे हैं, और अपने सलाहकारों की सलाह पर परिणाम अपने पक्ष में आने की संभावना पर धार्मिक स्थलों के दर्शन भी कर रहे हैं। स्वयं मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पांचवी बार सरकार के रिपीट की संभावना पर पूजा पाठ कर रहे हैं। उन्होंने भी कई धार्मिक स्थलों पर दर्शन किये हैं। कुल मिलाकर अब राज्य की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री , मंत्री व भाजपा के बडे नेता चुनावी घमासान में वोटर रूपी भगवान की मान मनोब्बल करने के बाद अब देव मंदिरों व देव आराधना की शरण में हैं। विशेष बात यह है कि इन सभी ने अपनी दिनचर्या भी पंडितों व ज्योत्षियों के बताई सलाह पर कर ली है। राज्य के एक बडे मंत्री तो एक वास्तु विशेषज्ञ की सलाह भी ले रहे है। वैसे यह सभी कवायद चुनाव जीतने के लिये ही है। वहीं एक भाजपा कार्यकर्ता का तो यह कहना है कि यदि कार्यकर्ताओं की पूछ परख की होती तो इतनी चकल्लस ही क्यों करनी पडती।कांग्रेसी भी पूजा पाठ के सहारे राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा को कडी टक्कर देने वाली कांग्रेस के नेता व प्रत्याशी भी अपनी जीत के लिये विभिन्न मंदिरों में मत्था टेक रहे हैं। किसी ने अपने घर अखंड रामायण तो किसी ने सुंदरकांड तक के आयोजन कराये हैं। स्वयं कमलनाथ भी अपने एक ज्योतिष व धार्मिक सलाहकार की सलाह से चल रहे हैं।

रेत माफिया ने पटवारी को फिर ट्रैक्टर से कुचला.

The sand mafia then ran over the revenue officer with a tractor. Special Correspondent शहडोल/ब्यौहारी, शहडोल जिला मुख्यालय से करीब 90 किमी दूर ब्यौहारी के ग्राम गोपालपुर बुढ़वा में रेत माफिया ने पटवारी की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी। घटना को बीते शुक्रवार की रात को उस समय अंजाम दिया गया जब पटवारी अवैध रेत परिवहन होने की सूचना पाकर दल के साथ उसे रोकने गए थे। तभी ट्रैक्टर ड्राइवर से पटवारी प्रसन्ना सिंह की कहासुनी हुई। पटवारी ने रेत के अवैध परिवहन का विरोध किया जिससे गुस्साए ड्राइवर ने उन्हें कुचलकर मार डाला और फरार हो गया। बता दें बुढ़वा से लगे गोपालपुर, सथनी आदि ग्रामों में रेत का सालों से अवैध परिवहन हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार उसे रोकने का अनुरोध किया लेकिन कुछ नहीं हुआ। थाना देवलोंद की पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। बताते हैं कि घटना स्थल पर अन्य लोग भी थे जो भाग गए।

राज्यसभा में MP की 5 सीटों का नंबर गेमः कौन किस पर भारी

The number of seats for Members of Parliament (MP) in the Rajya Sabha is 5. मौजूदा 4 सीटों को बचाने भाजपा को चाहिए 152 विधायक; अप्रैल में खत्म होगा कार्यकाल मध्यप्रदेश में 3 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। इन नतीजों से दो सवालों का जवाब मिलेगा। मध्यप्रदेश में किस पार्टी की सरकार बनेगी?अप्रैल 2024 में खाली हो रही राज्यसभा की 5 सीटों में से कितनी-किस पार्टी के खाते में जाएंगी। एमपी के 11 में से 5 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल को खत्म हो रहा है। इनमें से 4 सीटें भाजपा जबकि 1 कांग्रेस के पास है। भाजपा को यदि यह आंकड़ा बरकरार रखना है तो विधानसभा में उसे 152 सीटें जीतना होंगी क्योंकि एक प्रत्याशी को जीतने के लिए न्यूनतम 38 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। राज्यसभा सांसद का चुनाव तय फॉर्मूले के तहत होता है। इसके मुताबिक, जिस पार्टी के पास विधायकों की संख्या अधिक होती है, उस पार्टी के उम्मीदवार की जीत तय होती है। पहले जानिए, कैसे होता है राज्यसभा चुनाव राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया अन्य चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है। व्हिप के उल्लंघन से खत्म हो सकती है सदस्यता राज्यसभा चुनाव में लोकसभा और विधानसभा की तरह गुप्त मतदान नहीं होता है। राज्यसभा सांसद के नाम के आगे एक से चार तक का नंबर लिखा होता है। विधायकों को वरीयता के आधार पर वोट देना होता है। राज्यसभा सदस्य के चुनाव के लिए राजनीतिक दल रिक्त सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने के साथ अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी करते हैं। यदि किसी विधायक ने व्हिप का उल्लंघन कर पार्टी प्रत्याशी को वोट नहीं दिया तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। नियमानुसार पार्टी विधानसभा सचिवालय को ऐसे विधायक की लिखित शिकायत करती है तो जांच के बाद उसकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो सकती है। किस फॉर्मूले से तय होती है जीत? राज्यसभा चुनाव के लिए एक फॉर्मूले का उपयोग किया जाता है। इसमें कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है। इसके बाद राज्य में जितनी राज्यसभा की सीटें हैं, उसमें एक जोड़ कर भाग दिया जाता है। इसके बाद कुल संख्या में एक जोड़ा जाता है। फिर अंत में जो संख्या निकलती है, वह जीत का आंकड़ा होता है। 2020 में भाजपा ने ऐसे पलट दिया था नंबर गेम 19 जून 2020 को राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव हुआ था। भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी को प्रत्याशी बनाया था जबकि दिग्विजय सिंह और फूल सिंह बरैया ने कांग्रेस की तरफ से नामांकन भरा था। इस चुनाव से तीन महीने पहले सिंधिया समर्थक 22 विधायकों ने 10 मार्च 2020 को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में मौजूदा विधायकों की कुल संख्या 206 रह गई थी क्योंकि 2 विधानसभा सीटें मुरैना जिले की जौरा और आगर-मालवा की आगर सीट विधायकों के निधन के बाद खाली थी।इस हिसाब से राज्यसभा के एक प्रत्याशी को कम से कम 52 वोट चाहिए थे। विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा के दो उम्मीदवार- ज्योतिरादित्य सिंधिया (56 वोट) और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी (55 वोट) जीतने में कामयाब हुए थे। कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह (57 वोट) ही जीत दर्ज कर सके थे। दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया को केवल 38 वोट मिले थे। 5 विधायकों ने भी बदल लिया था पाला 2018 विधानसभा चुनाव के बाद बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से कमलनाथ सरकार ने बहुमत का आंकड़ा पार किया था। इस चुनाव में कांग्रेस को 114 और भाजपा को 109 सीटें मिली थीं लेकिन 19 जून 2020 को राज्यसभा की 3 सीटों पर हुए चुनाव से ठीक पहले बसपा के दो, सपा का एक और 2 निर्दलीय विधायकों ने पाला बदल लिया था। जिसका फायदा भाजपा को हुआ था। दिग्विजय को तीन वोट ज्यादा मिले थे 3 सीटों के चुनाव में भाजपा को दो वोटों का नुकसान हुआ था। गुना से भाजपा विधायक गोपीलाल जाटव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह क्रॉस वोटिंग की थी। सुमेर सिंह सोलंकी के पक्ष में दिया गया भाजपा विधायक जुगल किशोर बागरी का वोट निरस्त हो गया था। 3 सीटों पर चुनाव से ठीक एक दिन पहले 18 जून 2020 को कमलनाथ के निवास पर एक बैठक हुई थी। इसमें तय किया गया था कि दिग्विजय सिंह को 54 विधायक वोट देंगे लेकिन उन्हें 57 वोट मिले। यानी जिन तीन विधायकों को दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया को वोट देना था, उन्होंने दिग्विजय सिंह को वोट दे दिया था। से ओबीसी, दलित और महिला वर्ग को साधा था। दरअसल, राज्यसभा चुनाव से पहले एमपी की राजनीति में ओबीसी एक बड़ा मुद्दा बन गया था। ओबीसी आरक्षण की वजह से पंचायत और निकाय चुनाव टल गए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। कोर्ट के दखल के बाद निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ हुआ था। प्रदेश में ओबीसी वोटरों की आबादी 50 फीसदी से अधिक है। बीजेपी ने कविता पाटीदार के नाम की घोषणा कर एक बड़ा ओबीसी कार्ड खेला था। इसी तरह सुमित्रा वाल्मीकि को राज्यसभा में भेजकर दलित वर्ग को साधने की कोशिश की थी। जानकार कहते हैं कि यदि भाजपा फिर दलित, ओबीसी और महिला कार्ड खेलती है तो उसे मिशन 2024 में भी बड़ा फायदा होगा।

खाद की किल्लत की वजह, सरकार की फेल पालिसी- फेडरेशन और सोसायटी के बजाय व्यापारियों को कमीशन के लिए दिया ठेका : गोविंद सिंह

Reason for the fertilizer scarcity is the government’s failed policy, as instead of relying on federations and societies, contracts were given to businessmen for commissions: Govind Singh वीडी शर्मा पर आरोप- अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं, ऐसे नेताओं को ज्यादा लंबा राजनीतिक भविष्य नहीं होता. भोपाल। मध्य प्रदेश के कई इलाकों में खाद की कमी से किस जूझ रहे हैं। किसानों की समस्या को लेकर नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने सरकार पर सवाल खड़े किए। गोविंद सिंह ने कहा कि सरकार की नीतियों की वजह से ही किसान परेशान है। कांग्रेस के समय सोसाइटी में 80 फीसदी खाद दिया जाता था। अब सोसाइटियों के बजाय व्यापारियों को खाद वितरण के लिए जिम्मेदारी दे दी गई है। व्यापारी कालाबाजारी करते हैं और महंगे दाम पर किसानों को खाद लेना पड़ रहा है। पहले व्यवस्था थी कि फेडरेशन बनाकर सरकार 4 महीने के लिए उन्हें लोन देती थी। जिसे खाद की खरीदी हो जाए और 10 प्रतिशत अधिक डिमांड से ज्यादा जिलों में खाद भेजी जाती थी। अब यह व्यवस्था पूरी तरीके से सरकार ने खत्म कर दी है। जिस वजह से जनता परेशान हो रही है। वही गोविंद सिंह ने आशंका जताई कि मतदान के दिन भाजपा के एजेंट बने अधिकारी गड़बड़ी कर सकते हैं। इसलिए कमलनाथ ने मतगणना स्थल पर मौजूद रहने वाले एजेंट को प्रशिक्षण देने के लिए कहा है। साथ ही प्रत्याशी भी आएंगे। उनसे भी चर्चा की जाएगी। गोविंद सिंह ने कहा कि पूरे चुनाव के दौरान कुछ ईमानदार अधिकारियों ने अच्छा काम किया है। कई बेईमान अधिकारी जो भ्रष्ट थे पैसा कमाने में लगे हुए थे। उन्होंने भाजपा के एजेंट के तौर पर काम किए हैं। वहीं राजनगर की घटना में कांग्रेस प्रत्याशी पर मामला दर्ज किए जाने पर कहा की वीडी शर्मा अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं। ऐसे नेताओं को ज्यादा लंबा राजनीतिक भविष्य नहीं होता है।

कांग्रेस की सरकार बनेगी या नहीं, अब चर्चा डिप्टी सीएम बनाने की.

Whether the Congress will form the government or not is now under discussion, focusing on the appointment of the Deputy Chief Minister. कर्नाटक और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर एमपी में भी कांग्रेस कर सकती है प्रयोग उदित नारायणभोपाल – मध्य प्रदेश में सरकार आखिर किसकी बनेगी। यह फैसला 3 दिसंबर के बाद ही होगा। इस बीच कांग्रेस के अंदर डिप्टी सीएम बनाए जाने का जिन निकलकर सामने आ गया है। कांग्रेस के अंदर चर्चा है कि छत्तीसगढ़, कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश में भी डिप्टी सीएम बनाए जाने को लेकर कवायद चल रही है। कांग्रेस की शुरूआत से ही अपने कम फीस के तौर पर कमलनाथ को प्रेजेंट किया है। अब डिप्टी सीएम कौन बनेगा या फिर बनाया जाएगा। यह मामला केंद्रीय आलाकमान ही तय करेगा। कांग्रेस के सीनियर लीडर और पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह का कहना है कि मध्य प्रदेश में डिप्टी सीएम बनाए जाने को लेकर फैसला सेंट्रल लीडरशिप करेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का फैसला होगा। अगर डिप्टी सीएम बनाया जाता है तो कमलनाथ को भी भरोसे में लिया जाएगा। केंद्रीय लीडर से जो भी तय करेगी, वह मध्य प्रदेश में भी होगा। यानी कि केंद्रीय गला कमान की मंजूरी होती है तो कांग्रेस मध्य प्रदेश में भी डिप्टी सीएम बन सकती है। हालांकि अभी इसके लिए लंबा कांग्रेस का इंतजार करना पड़ेगा लेकिन कांग्रेस पूरे भरोसे में है कि सरकार बनने जा रही है।

नए साल में पाटिल होंगे वन विभाग के नए मुखिया, दिसंबर में हो रही है गुप्ता की विदाई.

In the new year, Patil will be the new chief of the Forest Department, and Gupta’s farewell is scheduled for December. डॉ श्रीवास्तव लघु वनोपज संघ और यादव होंगे वन विकास निगम नए एमडी उदित नारायणभोपाल. नए साल में वन विभाग में कई नए बदलाव होने जा रहें है। ये सभी बदलाव नई सरकार के गठन के बाद होने की संभावना है। मौजूदा वन बल प्रमुख आरके गुप्ता और लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह दिसम्बर में सेवानिवृत होने जा रहें है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान वन विभाग के हॉफ गुप्ता के सेवानिवृत्ति के बाद वन विकास निगम के एमडी एके पाटिल वन बल प्रमुख होंगे। हालांकि उनका कार्यकाल एक महीने का ही होगा। इसी प्रकार लघु वन वनोपज संघ एमडी पुष्कर सिंह के रिटायरमेंट के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव नए एमडी होंगे। वर्तमान में डॉक्टर श्रीवास्तव वर्किंग प्लान शाखा के प्रमुख हैं। गौरतलब यह है कि अभी तक विभाग में हुई पदस्थापना के दौरान डॉक्टर श्रीवास्तव की वरिष्ठता अनदेखी की गई। इसी कारण संभावना जताई जा रही है की नई सरकार में उनकी पदस्थापना वरिष्ठता के आधार पर होगी। निगम के मौजूदा एमडी पाटिल के वन बल प्रमुख बनने पर पीसीसीएफ प्रशासन -एक के आरके यादव को निगम में एमडी के पद पर पदस्थ किए जाने की संभावना है। कैडर में पीसीसीएफ का पद प्रशासन-एक का नहीं है। कैडर में यह पद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी के लिए निर्धारित है। डॉ श्रीवास्तव के संघ में चले जाने पर वर्किंग प्लान शाखा का प्रभार पीसीसीएफ जेएफएम पीके सिंह को दिया जा सकता है। फरवरी में अम्बाडे होंगे पीसीसीएफ वन्य प्राणीपाटिल के जनवरी में रिटायर होने पर पीसीसीएफ वन्य प्राणी असीम श्रीवास्तव वन बल प्रमुख बनेंगे और उनकी जगह पर 88 बैच के आईएफएस विजय एन अम्बाडे पीसीसीएफ वन्य प्राणी होंगे. विभाग में अम्बाडे की छवि वन्य प्राणी विशेष के रूप में बनी हुई है। अनूपपुर डीएफओ पर गिर सकती है गाजअनूपपुर डीएफओ सुशील प्रजापत पर गाज गिरने की संभावना प्रबल हो गई है। महिला कर्मचारियों के साथ बदसलूकी और खरीदी में गड़बड़ी संबंधित जांच रिपोर्ट प्रशासन-एक को मिल गई है। पीसीसीएफ प्रशासन एक शाखा ने आरोप पत्र तैयार कर लिए है। शीघ्र ही उन्हें जारी किया जा रहा है। डीएफओ प्रजापत के खिलाफ जांच वन संरक्षक शैलेंद्र गुप्ता ने की थी। सूत्रों ने बताया कि जांच प्रतिवेदन में उन्हें दोषी करार दिया गया है। इस बीच डीएफओ द्वारा वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ बदसलूकी का सिलसिला जारी है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet