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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे कड़ी मेहनत से अधिकारी बने हैं

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत 2023 बैच के आईएएस अधिकारियों के समूह से राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में मुलाकात की। राष्ट्रपति ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे असाधारण दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से अधिकारी बने हैं। इससे उनके निजी जीवन में भी बड़ा बदलाव आया है। उन्हें अब अधिक दृढ़ संकल्प और समर्पण के साथ अनगिनत लोगों के जीवन में परिवर्तनकारी बदलाव लाने का अवसर मिला है। उनके सेवा और अधिकार का क्षेत्र इतना व्यापक है कि वे अपनी पहली पोस्टिंग में ही कई नागरिकों के जीवन को बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने आईएएस अधिकारियों को वंचितों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी सलाह दी कि अधिकारी अपने करियर के दौरान कुछ समय बाद पोस्टिंग वाले स्थानों पर जाएं और अपने काम के दूरगामी परिणाम देखें। अधिकारियों को लोक सेवकों के अधिकारों और कर्तव्यों को ध्यान में रखना चाहिए। एक लोक सेवक के कर्तव्य उसकी जिम्मेदारियां हैं और उसके अधिकार उन कर्तव्यों को पूरा करने का साधन हैं। राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि उनके करियर की असली कहानी उनके काम से बनेगी, न कि सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने से। उनकी असली सामाजिक संपत्ति उनके अच्छे काम से तय होगी। प्रत्येक लोक सेवक को ईमानदारी और उद्देश्य के साथ काम करना चाहिए। पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का हम सभी सामना कर रहे हैं। नैतिकता और मूल्यों का क्षरण भी बहुत गंभीर चुनौतियां हैं। निष्ठावान और ईमानदार होने के बारे में और कुछ कहने की जरूरत नहीं है। ईमानदारी, सच्चाई और सादगी के जीवन मूल्यों का पालन करने वाले लोग अधिक सुखी रहते हैं। लोक सेवा में ईमानदारी सबसे वांछनीय नीति है। लोक सेवक से यह अपेक्षा की जाती है कि वे जीवन के हर क्षेत्र में निष्ठा और संवेदनशीलता का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में लोगों की आकांक्षाएं बढ़ रही हैं। वे प्रशासकों की जवाबदेही के प्रति जागरूक हो रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को आमजनों के साथ निकटता बढ़ाने और स्थानीय प्रयासों में उनकी भागीदारी बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के जनहित के मुद्दों को हल करने की भी सलाह दी। राष्ट्रपति ने कहा कि स्थानीय और राज्य स्तर पर उनके विकास और जन कल्याण के कार्य राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेंगे।

19 अप्रैल को पीएम मोदी करेंगे रेल लिंक परियोजना का उद्घाटन, दुनिया के सबसे ऊंचे पुल चिनाब ब्रिज से गुजरेगी ट्रेन

जम्मू जम्मू-कश्मीर में 19 अप्रैल को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना का उद्घाटन करने जा रहे हैं। इस दौरान ट्रेन का ट्रायल भी हो चुका है। इस रेल लिंक परियोजना में चिनाब नदी पर बने आर्च ब्रिज भी शामिल है। इस 272 किलोमीटर लंबे रेल रूट में 119 किलमोटीर की 36 सुरंगें बनाई गई हैं जो न केवल भौगोलिक बाधाओं को पार करती है बल्कि भविष्य की तेज रफ्तार की भी राह खोलती है। यू.एस.बी.आर.एल. परियोजना की ये सुरंगें सिर्फ रास्ते नहीं है ये भारत के दृढ़ संकल्प, नवाचार और तकनीकी उतकृष्टता की कहानियां हैं। मिली जानकारी के अनुसार उद्घाटन के दिन ही कश्मीर से कटरा तक 2 वंदे भारत ट्रेनें शुरु हो जाएंगी। एक ट्रेन कश्मीर से कटरा तक चलेगी तो दूसरी कटरा से कश्मीर जाएगी। इसके अलावा ट्रेन 2 ब्रिजों चिनाब पुल पर बना आर्च ब्रिज और अंजी खड्ड ब्रिज से गुजरेगी। चिनाब ब्रिज की खासियत आपको बता दें कि चिनाब ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा ब्रिज है। चिनाब पुल का निर्माण एक ऐसी भूकंपीय सक्रिय क्षेत्र में किया गया है, जो टेक्टोनिकली एक्टिव रीजन और जियोलॉजिकली जटिल है। इस क्षेत्र में बार-बार भूकंप आते रहे हैं, और इसकी वजह से यह पुल विशेष रूप से भूकंपीय और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए डिज़ाइन किया गया था। IIT दिल्ली, IIT रुड़की और IISC बैंगलोर जैसी प्रमुख संस्थाओं ने इस क्षेत्र के भूकंपीय खतरे का विस्तार से अध्ययन किया। उनके द्वारा किए गए अध्ययन के आधार पर, चिनाब रेल ब्रिज का निर्माण इस तरह से किया गया कि यह रिक्टर पैमाने पर 8 तक के भूकंप, तेज़ विस्फोटों और 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं का सामना कर सके। इस पुल को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह न केवल भूकंपीय गतिविधियों को सहन कर सकता है, बल्कि यह प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद अपनी स्थिरता बनाए रख सकता है। यह इस पुल की महत्वता को कई गुना बढ़ाता है, क्योंकि यह किसी भी प्राकृतिक आपदा के दौरान भी पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों से कहा- वे बच्चा तस्करी रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं, जारी की गाइडलाइंस

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्ड ट्रैफिकिंग के मामलों पर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि जिस अस्पताल से बच्चा चुराया जाता है उसका लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस फैसले का सख्ती से पालन किया जाए। बता दें कि वाराणसी और आसपास के अस्पतालों से बच्चों की चोरी के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2024 में आरोपियों को जमानत दे दी थी, अब सुप्रीम कोर्ट ने इस जमानत को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक देशव्यापी गिरोह था और इनके चुराए हुए बच्चे पश्चिम बंगाल, झारखंड और राजस्थान तक से मिले हैं। कोर्ट ने आरोपियों को समाज के लिए खतरा बताया है। इसी के साथ कोर्ट ने  उत्तर प्रदेश सरकार को भी इस मामले में देरी करने के लिए फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों से कहा है कि वे बच्चा तस्करी रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी अस्पताल से बच्चा चोरी होता है, तो सरकार को तुरंत उस अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए। माता-पिता रहें सावधान- सुप्रीम कोर्ट ने सभी माता-पिता को सलाह दी है कि वे अस्पताल में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें। बच्चा खरीदना भी अपराध- कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर कोई निसंतान दंपत्ति चोरी किए हुए बच्चे को खरीदते हैं, तो यह भी अपराध है। कोर्ट ने ऐसे लोगों की भी जमानत रद्द कर दी है।

अब बोइंग कंपनी से नए विमान न लें और न ही अमेरिका से विमान संबंधी उपकरण या कलपुर्जे खरीदें, चीन ने दिए निर्देश

बीजिंग अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच चीन ने अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग से विमानों की डिलीवरी लेने पर रोक लगा दी है। चीन ने अपनी एयरलाइनों को निर्देश दिया है कि वे अब बोइंग कंपनी से नए विमान न लें और न ही अमेरिका से विमान संबंधी उपकरण या कलपुर्जे खरीदें। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन से आयात होने वाले सामानों पर 145 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के फैसले के बाद उठाया गया है। कलपुर्जों की लागत दोगुनी से भी अधिक इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी उत्पादों पर 125 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की थी। नए शुल्कों के चलते अमेरिका से आयात होने वाले विमान और उनके कलपुर्जों की लागत दोगुनी से भी अधिक हो गई है, जिससे चीनी एयरलाइनों के लिए बोइंग विमान लेना मुश्किल हो गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अब उन एयरलाइनों की मदद के उपाय खोज रहा है जिन्होंने बोइंग विमान लीज पर लिए हैं और जो अब इन पर अधिक खर्च का सामना कर रही हैं। चीन वैश्विक विमान बाजार का एक बड़ा हिस्सा यह स्थिति बोइंग के लिए गंभीर चुनौती बन गई है, खासकर उस समय जब चीन वैश्विक विमान बाजार का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। अनुमान है कि आने वाले 20 वर्षों में चीन वैश्विक विमान मांग का 20 प्रतिशत हिस्सा रखेगा। वर्ष 2018 में बोइंग द्वारा बेचे गए कुल विमानों में से करीब 25 प्रतिशत चीन को भेजे गए थे। हालांकि, हाल के वर्षों में अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक तनाव और बोइंग के आंतरिक गुणवत्ता संबंधी मुद्दों के चलते चीन ने बोइंग से कोई बड़ा नया ऑर्डर नहीं दिया है। 2019 में जब दो घातक हादसों के बाद 737 मैक्स विमानों को ग्राउंड किया गया था, तब चीन पहला देश था जिसने यह फैसला लिया था। एयरबस एसई की ओर चीन का झुकाव ट्रंप और बाइडेन, दोनों प्रशासन के दौरान व्यापारिक मतभेदों ने चीन को यूरोपीय विमान निर्माता कंपनी एयरबस एसई की ओर झुकाव बढ़ाने को मजबूर किया। इसके अलावा, 2024 की शुरुआत में बोइंग को एक और झटका लगा जब जनवरी में उड़ान के दौरान एक विमान का ‘डोर प्लग’ (दरवाजे का हिस्सा) उड़ गया, जिससे कंपनी की गुणवत्ता पर फिर सवाल खड़े हो गए। इस पूरे घटनाक्रम से यह भी साफ होता है कि भले ही चीन ने विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने की कोशिश की हो, लेकिन अपनी बढ़ती विमानन जरूरतों को पूरा करने के लिए वह अब भी अमेरिका और यूरोप जैसे देशों की कंपनियों पर निर्भर है। स्थिति फिलहाल अस्थिर बनी हुई है और इसमें बदलाव संभव है, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी कुछ मामलों में शुल्क वापस ले चुके हैं — जैसे कि चीन से आने वाले एप्पल के आईफोन पर लगाया गया शुल्क। यह व्यापार युद्ध न केवल वैश्विक विमानन उद्योग को प्रभावित कर रहा है, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में भी बड़ी दरार डाल रहा है।

कहीं गर्मी की तपिश से लोगों का जीना मुहाल कर रही है, कहीं बारिश का दौर जारी है, कई राज्यों में आंधी-पानी का डबल अटैक

नई दिल्ली देश के विभिन्न राज्यों में मौसम का मिजाज काफी अलग है। कहीं गर्मी की तपिश  लोगों का जीना मुहाल कर रही है, कहीं बारिश का दौर जारी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ताजा प्रेस रिलीज के मुताबिक, पश्चिमी राजस्थान से लेकर हिमालयी क्षेत्रों तक और दक्षिण भारत से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक अलग-अलग मौसमीय गतिविधियों का असर दिखाई देने लगा है। राजस्थान-गुजरात में गर्मी का कहर जारी पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान में 15 से 18 अप्रैल के बीच लू की स्थिति बनी रहेगी। कुछ इलाकों में यह लू बेहद गंभीर रूप ले सकती है। गुजरात राज्य में भी 17 अप्रैल तक गर्म हवाओं का असर जारी रहने की संभावना है। बाढ़मेर में तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो इस समय देश में सबसे अधिक है। इन राज्यों वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर 16 से 20 अप्रैल के बीच एक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को प्रभावित करेगा। 18 और 19 अप्रैल को इन इलाकों में भारी बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का अनुमान है। साथ ही मैदानी इलाकों जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 18 से 20 अप्रैल के बीच आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। पूर्वोत्तर राज्यों में खूब गर्जेंगे बादल असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले 5 दिनों तक गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश जारी रहेगी। 17 अप्रैल को बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी तेज बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है। दक्षिण भारत में बारिश की संभावना केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। 15 से 17 अप्रैल तक केरल और माहे में कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका है। दिल्ली-एनसीआर में गर्म हवाओं की दस्तक दिल्ली-एनसीआर में 15 से 18 अप्रैल तक मौसम शुष्क रहेगा, परंतु तापमान 41 डिग्री तक पहुंच सकता है। 18 अप्रैल को आंधी के साथ तेज हवाएं (30-40 किमी/घंटा) चलने की संभावना है।

नाटो ने रूस या उसके करीबी सहयोगी बेलारूस पर कोई भी आक्रामक कार्रवाई की, तो सबसे पहले खाक होंगे बाल्टिक देश

मॉस्को रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध के बीच व्लादिमीर पुतिन के खास सिपहसलार और रूस की विदेशी खुफिया एजेंसी के प्रमुख सर्गेई नारिश्किन ने पश्चिमी देशों को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि नाटो ने रूस या उसके करीबी सहयोगी बेलारूस पर कोई भी आक्रामक कार्रवाई की, तो सबसे पहले पोलैंड और बाल्टिक देश तबाह होंगे। यह बयान रशियन न्यूज़ एजेंसी RIA ने उनके हवाले से जारी किया है। इस बयान से क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ने की आशंका है। नारिश्किन ने क्या कहा? उन्होंने कहा, “अगर NATO ने रूस या बेलारूस के खिलाफ कोई भी सैन्य कार्रवाई की, तो इसका खामियाजा पूरे NATO को भुगतना पड़ेगा। लेकिन सबसे पहले तबाही पोलैंड और बाल्टिक देशों पर टूटेगी।” नारिश्किन पुतिन के बेहद करीबी और रूसी खुफिया विभाग के सबसे ताकतवर चेहरों में से एक माने जाते हैं। उनके बयान साफ संकेत है कि रूस पश्चिमी गठबंधन के किसी भी संभावित हस्तक्षेप के लिए तैयार है और प्रतिरोध की नीति अपनाएगा। पोलैंड और बाल्टिक देश निशाने पर क्यों? पोलैंड और एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया जैसे बाल्टिक देश NATO के सदस्य हैं और रूस की पश्चिमी सीमा से सटे हुए हैं। हाल के वर्षों में इन देशों ने रूस के खिलाफ मुखर रुख अपनाया है और यूक्रेन को समर्थन देने में भी आगे रहे हैं। रूस इन्हें “NATO की अग्रिम चौकियां” मानता है। यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी हस्तक्षेप रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते रूस और NATO देशों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और यूरोपीय देश यूक्रेन को आर्थिक, सैन्य और खुफिया मदद दे रहे हैं, जबकि रूस इसे सीधा NATO का हस्तक्षेप मानता है।

38 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, सुरक्षा के भी व्यापक इंतेजाम किए गए

जम्मू 38 दिनों तक चलने वाली श्री अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण पूरे देश में उत्साह के साथ शुरू हो गया है। जम्मू में स्थित पंजाब नेशनल बैंक की रिहाड़ी चुंगी शाखा समेत कई नामित बैंक शाखाओं में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। यह तीर्थ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगी। हर बार की तरह इस साल भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के भी व्यापक इंतेजाम किए गए हैं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 5 मार्च को राजभवन में हुई श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड की 48वीं बैठक के दौरान इस बार की तिथियों का ऐलान किया था। इस बार भी यात्रा अनंतनाग जिले के पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के बालटाल मार्ग से एक साथ शुरू होगी। यात्रियों की संभावित भीड़ को देखते हुए बोर्ड ने इस वर्ष व्यवस्थाएं और सुविधाएं और बेहतर बनाने के प्रस्ताव दिए हैं। यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं ई-केवाईसी, आरएफआईडी कार्ड जारी करने और स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा अब जम्मू, श्रीनगर, नौगाम और कटरा रेलवे स्टेशनों सहित कई स्थानों पर उपलब्ध होगी। बालटाल, पहलगाम, नुनवान और पंथाचौक श्रीनगर में भी लोगों के लिए सुविधा केंद्र बढ़ाए जाएंगे। श्रद्धालुओं में उत्साह रिहाड़ी चुंगी शाखा पर पंजीकरण कराने पहुंचीं सुनंदा शर्मा (37) ने बताया, “यह मेरी दूसरी यात्रा होगी और मैं बाबा अमरनाथ के दर्शन को लेकर बेहद उत्साहित हूं।” वहीं राजेश कुमार (41) ने कहा, “मैं पिछले सात वर्षों से लगातार बाबा के दर्शन कर रहा हूं और जब तक शरीर साथ देगा, तब तक जाता रहूंगा।” इन्हें यात्रा की परमिशन नहीं 13 से 70 वर्ष की आयु वाले श्रद्धालु यात्रा के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। गर्भवती महिलाएं, जिनकी गर्भावस्था 6 सप्ताह या उससे अधिक की है, उन्हें यात्रा की अनुमति नहीं है। यात्रियों के उत्साह और सरकार की तैयारियों को देखते हुए, इस बार की अमरनाथ यात्रा और भी भव्य और सुरक्षित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

तमिलनाडु में चौंकाने वाला मामला, दिखा वक्फ संसोधन बिल का असर, 150 परिवारों को दरगाह ने दिया बेदखली का नोटिस

वेल्लोर तमिलनाडु के वेल्लोर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कट्टुकोल्लई गांव में लगभग 150 परिवारों पर आरोप लगाया गया है कि वे वक्फ संपत्ति पर अवैध कब्जा करके रह रहे हैं। इसके लिए एक दरगाह ने उन्हें बेदखली का नोटिस भी जारी किया है जिसके बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई है। इन नोटिसों के जवाब में कांग्रेस विधायक हसन मौलाना ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि किसी को भी गांव से बेदखल नहीं किया जाएगा। हालांकि, मौलाना ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर वक्फ बोर्ड के पास जमीन से जुड़े कानूनी दस्तावेज हैं और उनकी वैधता सिद्ध होती है, तो ग्रामीणों को थोड़ा किराया देना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ होता है।” क्या है पूरा मामला? मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद की शुरुआत तब हुई जब कट्टुकोल्लई गांव के लगभग 150 परिवारों को एफ. सैयद सथाम नामक व्यक्ति की ओर से नोटिस भेजे गए। सथाम का दावा है कि यह जमीन एक स्थानीय दरगाह की वक्फ संपत्ति है, जो 1954 से वक्फ बोर्ड के अधीन है। नोटिस के अनुसार, एक ग्रामीण बालाजी पर आरोप है कि उसने वक्फ भूमि (सर्वे नंबर 362) पर मकान और दुकान बना ली है। नोटिस में कहा गया है कि सभी निवासियों को वक्फ नियमों का पालन करना होगा, अनुमति लेनी होगी और ग्राउंड रेंट देना होगा – अन्यथा उन्हें कानूनी रूप से बेदखल किया जा सकता है। वक्फ बोर्ड का पक्ष सैयद सथाम 2021 में अपने पिता की मृत्यु के बाद दरगाह और मस्जिद के संरक्षक बने थे। उनका कहना है कि उनके पास जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता अशिक्षित थे और उन्हें औपचारिकताओं की जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने ग्रामीणों से कभी किराया नहीं वसूला। अब वे इस “गलती” को सुधारना चाहते हैं। सथाम ने कहा कि अभी दो और नोटिस भेजे जाएंगे, और यदि फिर भी प्रतिक्रिया नहीं मिली तो वे मामला हाई कोर्ट में ले जाएंगे। ग्रामीणों का विरोध वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि वे चार पीढ़ियों से इस जमीन पर रह रहे हैं और इसे अपनी पुश्तैनी संपत्ति मानते हैं। उन्होंने पक्के सरकारी दस्तावेज, पेंचायत टैक्स भुगतान और घर निर्माण की अनुमति जैसे प्रमाण भी दिखाए हैं। ग्रामीणों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि जब सथाम के पिता ने कभी किराया नहीं मांगा, तो अब अचानक यह मांग क्यों उठ रही है। विवाद ने तब तूल पकड़ा जब डरे-सहमे ग्रामीण बड़ी संख्या में वेल्लोर के जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। हिंदू मुनानी के डिवीजनल सेक्रेटरी प्रवीण कुमार ने प्रशासन से अनुरोध किया कि ग्रामीणों को पट्टा (भूमि का वैध स्वामित्व प्रमाण पत्र) दिया जाए ताकि वे अपने घर और आजीविका को लेकर आश्वस्त हो सकें। जिला प्रशासन की भूमिका स्थानीय निवासियों के अनुसार, वेल्लोर जिला कलेक्टर ने अनौपचारिक रूप से उन्हें सलाह दी है कि वे फिलहाल कोई किराया न दें। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह विवाद न केवल कानूनी पहलू से जुड़ा है, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक स्तर पर भी ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि वक्फ बोर्ड के दावे कितने वैध साबित होते हैं और प्रशासन इसका समाधान किस प्रकार निकालता है।

थोक महंगाई में राहत, खाने-पीने की चीजें सस्ती हुईं, मार्च में महंगाई 2.38% से घटकर 2.05% पर आई, यह चार महीने में सबसे कम

नई दिल्ली महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। खाने-पीने के सामान सस्ते होने से थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति मार्च में घटकर 2.05 प्रतिशत रह गई, जो फरवरी में 2.38 प्रतिशत थी। मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। हालांकि, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में वार्षिक आधार पर वृद्धि हुई है। मार्च 2024 में यह 0.26 प्रतिशत थी। उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, मार्च 2025 में मुद्रास्फीति सालाना आधार पर खाद्य उत्पादों, अन्य विनिर्माण, खाद्य वस्तुओं, बिजली व कपड़ा विनिर्माण आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण बढ़ी। सरकार के अनुसार, मार्च 2025 में महंगाई दर बढ़ने का मुख्य कारण खाने-पीने की चीजों, अन्य उत्पादों, बिजली और कपड़ों की कीमतों में बढ़ोतरी है। थोक खाद्य महंगाई दर पिछले महीने घटकर 4.66% हो गई। फरवरी में यह 5.94% थी। इसका मतलब है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतें अब कम तेजी से बढ़ रही हैं। सब्जियों की कीमतों में भारी गिरावट थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य मुद्रास्फीति फरवरी के 3.38 प्रतिशत से घटकर मार्च में 1.57 प्रतिशत रह गई। सब्जियों की कीमतों में भारी गिरावट इसकी मुख्य वजह रही। हालांकि, विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 3.07 प्रतिशत हो गई, जबकि फरवरी में यह 2.86 प्रतिशत थी। ईंधन तथा बिजली में भी वृद्धि देखी गई और मार्च में यह 0.20 प्रतिशत रही। WPI फूड इंडेक्स WPI  फूड इंडेक्स, जिसमें खाद्य पदार्थ और विनिर्मित खाद्य उत्पाद शामिल हैं, फरवरी में 189.0 से मार्च में 188.8 पर थोड़ा कम हुआ। WPI आधारित खाद्य मुद्रास्फीति दर मार्च में 5.94 प्रतिशत से घटकर 4.66 प्रतिशत हो गई। WPI ईंधन मार्च में 0.20 प्रतिशत था, जबकि फरवरी में यह -0.71 प्रतिशत था। ईंधन और बिजली समूह सूचकांक में मार्च में 0.91 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण बिजली की कीमतों में 2.31 प्रतिशत की गिरावट और खनिज तेल की कीमतों में 0.70 प्रतिशत की गिरावट थी। कोयले की कीमतें अपरिवर्तित रहीं। यहां भी आई कमी प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर मार्च में घटकर 0.76% हो गई। फरवरी में यह 2.81% थी। प्राथमिक वस्तुएं वे होती हैं जो सीधे खेतों या खदानों से मिलती हैं, जैसे अनाज, फल, सब्जियां आदि। ईंधन और बिजली की थोक कीमतें मार्च में 0.20% रहीं। फरवरी में यह नेगेटिव 0.71% थी। इसका मतलब है कि ईंधन और बिजली की कीमतें अब बढ़ रही हैं, जबकि फरवरी में यह कम हुई थीं। विनिर्मित उत्पादों की कीमतें 3.07% बढ़ीं। फरवरी में यह 2.86% बढ़ी थीं। विनिर्मित उत्पाद वे होते हैं, जो फैक्ट्रियों में बनते हैं। थोक मूल्य सूचकांक में इनका हिस्सा लगभग 64% होता है। लेकिन बढ़ सकती है महंगाई इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने देश भर में लू चलने की चेतावनी दी है। इससे महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ गई है। BofA ग्लोबल रिसर्च के राहुल बजोरिया का कहना है कि जैसे-जैसे मौसम खराब होगा और गर्मी बढ़ेगी, वैसे-वैसे सब्जियों और फलों की कीमतें बढ़नी शुरू हो जाएंगी। खुदरा महंगाई दर की क्या स्थिति? भारत की खुदरा महंगाई दर फरवरी में घटकर 3.61% हो गई। यह पिछले सात महीनों में सबसे कम है। जनवरी में यह 4.31% थी। खुदरा महंगाई दर का मतलब है, जो सामान हम दुकानों से खरीदते हैं, उसकी कीमतों में बदलाव। सरकार मंगलवार शाम मार्च के खुदरा महंगाई दर के आंकड़े जारी करेगी। सब्जियों का उत्पादन बढ़ने से थोक बाजारों में खाने-पीने की चीजों की कीमतें कम हुई हैं। सब्जियों की कीमतें 15.88% घटी हैं। पिछले महीने यह 5.80% घटी थीं। प्याज की महंगाई दर मार्च में घटकर 26.65% हो गई। फरवरी में यह 48.05% थी। आलू की महंगाई दर -6.77% रही। फरवरी में यह 27.54% थी। इसका मतलब है कि आलू की कीमतें अब कम हो रही हैं। दालों की महंगाई दर पिछले महीने -2.98% रही। फरवरी में यह -1.04% थी। इसका मतलब है कि दालों की कीमतें भी कम हो रही हैं। अनाज की कीमतें बढ़ीं थोक बाजारों में अनाज की कीमतें मार्च में 5.49% बढ़ीं। पिछले महीने यह 6.77% बढ़ी थीं। इसका मतलब है कि अनाज की कीमतें अभी भी बढ़ रही हैं, लेकिन पहले की तुलना में कम तेजी से। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि महंगाई कम हुई है। खाने-पीने की चीजों के अच्छे उत्पादन की वजह से ऐसा हुआ है। MPC का मानना है कि वित्त वर्ष 2025-26 में महंगाई और कम होगी। इससे लोगों को राहत मिलेगी।

तुर्किए से आया पैसा, मुर्शिदाबाद में भड़की आग, 3 महीने से चल रही थी साजिश, 500-500 में बिके हमलावर !

मुर्शिदाबाद वक्फ कानून के विरोध पश्चिम बंगाल में भारी हिंसा देखने को मिली, मुर्शिदाबाद में हिंसा में 3 लोगों की मौत, सैकड़ों लोग घायल हुए तो वहीं कई लोगों को अपना घर छोड़कर दूसरी जगह ठिकाना लेना पड़ा है. हिंसा को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बल को तैनात किया गया है. इसके साथ ही हिंसा वाले इलाके में कड़ा पहरा है. इस बीच मुर्शिदाबाद दंगा मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. भारतीय जांच एजेंसियों के सूत्रों की मानें तो इस हिंसा की प्लानिंग लंबे समय से की जा रही थी. पिछले 3 महीनों से इलाके के लोग इस घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे थे. इसके लिए विदेशों से फंडिंग की गई थी. जांच एजेंसियों को क्या पता चला? पूरे मामले की जांच के दौरान एजेंसी ने पाया कि यह आतंकवाद फैलाने का नया तरीका है, दो महीने पहले एटीबी के दो जाने-माने सदस्य मुर्शिदाबाद आए और कहा कि एक बड़ी दावत होगी. वे ट्रिगर पॉइंट का इंतजार कर रहे थे. शुरू में रामनवमी की तारीख तय थी, लेकिन सुरक्षा के कारण चीजें बदल गईं, लेकिन वक्फ बिल ने ट्रिगर पॉइंट दे दिया. ट्रेनों को बाधित करना, सरकारी संपत्ति को खत्म करना, हिंदुओं की हत्या करना, घरों को लूटना उनका पहला टारगेट था. हमलावरों से कहा गया था कि जितनी ज्यादा चीजों को खराब करेंगे उन्हें उतना ही ज्यादा पैसा दिया जाएगा. शुरू में एक सूची बनाई गई थी कि यदि वे अपने किए का ब्यौरा देंगे तो उन्हें कितना धन दिया जाएगा. विदेशों से हो रही थी फंडिंग मुर्शिदाबाद हिंसा की प्लानिंग और पूरे खर्च का दारोमदार तुर्की के भरोसे चल रहा था, यहीं से हिंसा को लेकर पूरा फंड दिया जा रहा है. जांच एजेंसियों की मानें तो इस योजना में शामिल हर हमलावर और पत्थरबाजों को लूटपाट के लिए 500 रुपये दिए गए थे. इनकी पिछले 3 महीनों से लगातार ट्रेनिंग चल रही थी. साजिशकर्ताओं ने बंगाल को भी बांग्लादेश बनाने की योजना बनाई थी, जैसे दंगे बांग्लादेश हिंसा में देखने को मिले थे. ठीक वैसे ही यहां भी प्लान था. सीएम ममता की जनता से अपील मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद लोगों से शांति की अपील की है. उन्होंने कहा कि मैं सभी से कहूंगी कि सभी को अनुमति लेकर शांतिपूर्वक विरोध करने का अधिकार है लेकिन कानून अपने हाथ में न लें. चाहे कोई भी हो. कानून तोड़ने वालों की कोई जरूरत नहीं है. जो शांत दिमाग रखता है, वही जीतता है. कब शुरू हुई थी मुर्शिदाबाद में हिंसा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के विरोध में 10 अप्रैल से हिंसा जारी है. मुर्शिदाबाद में पहले से ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के करीब 300 जवान तैनात हैं और केंद्र ने व्यवस्था बहाल करने में मदद के लिए केंद्रीय बलों की पांच अतिरिक्त कंपनियां तैनात की हैं. बता दें कि केंद्र सरकार के वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर भड़की हिंसा में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों को आग लगा दी, सड़कें जाम कर दीं और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है. बंगाल में चुनावों के लिए अभी 1 साल से ज्यादा का समय बाकी है. ऐसे में ये दंगों की खबरों से लोग खासे परेशान हैं. वक्फ बिल बना ‘ट्रिगर पॉइंट’ एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, साजिशकर्ताओं को दंगे के लिए सही मौके की तलाश थी। शुरुआत में रामनवमी को लेकर योजना बनाई गई थी, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के कारण वो सफल नहीं हो पाई। इसी दौरान वक्फ बिल पर आक्रोश को ‘ट्रिगर पॉइंट’ बनाया गया और दंगे को अंजाम दे दिया गया। मुर्शिदाबाद को बांग्लादेश जैसा बनाने की कोशिश सूत्रों का कहना है कि साजिशकर्ताओं का मकसद मुर्शिदाबाद को अस्थिर करके बंगाल में बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करना था। इसे ‘नए तरह का आतंकवाद’ बताया जा रहा है, जिसमें भीड़ को भड़काकर हिंसा फैलाई जाती है। इलाके में सख्त सुरक्षा स्थिति पर काबू पाने के लिए केंद्र से सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल लगाया गया है। फिलहाल, पूरे इलाके में कर्फ्यू जैसे हालात हैं।वक्फ बिल बना ‘ट्रिगर पॉइंट’ एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, साजिशकर्ताओं को दंगे के लिए सही मौके की तलाश थी। शुरुआत में रामनवमी को लेकर योजना बनाई गई थी, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के कारण वो सफल नहीं हो पाई। इसी दौरान वक्फ बिल पर आक्रोश को ‘ट्रिगर पॉइंट’ बनाया गया और दंगे को अंजाम दे दिया गया। मुर्शिदाबाद को बांग्लादेश जैसा बनाने की कोशिश सूत्रों का कहना है कि साजिशकर्ताओं का मकसद मुर्शिदाबाद को अस्थिर करके बंगाल में बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करना था। इसे ‘नए तरह का आतंकवाद’ बताया जा रहा है, जिसमें भीड़ को भड़काकर हिंसा फैलाई जाती है। इलाके में सख्त सुरक्षा स्थिति पर काबू पाने के लिए केंद्र से सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल लगाया गया है। फिलहाल, पूरे इलाके में कर्फ्यू जैसे हालात हैं।

कर्नाटक में लिंगायत समुदायों के विधायकों और नेताओं ने रिपोर्ट के आंकड़ों पर कड़ा विरोध जताया, जाति जनगणना पर बवाल

बेंगलुरु कर्नाटक सरकार जातिगत जनगणना रिपोर्ट के लीक होने के बाद बढ़ते आंतरिक दबाव का सामना कर रही है। खासतौर पर वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों के विधायकों और नेताओं ने रिपोर्ट के आंकड़ों पर कड़ा विरोध जताया है। गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक से पहले डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने वोक्कालिगा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस विधायकों की एक विशेष बैठक मंगलवार शाम 6 बजे बुलाई है। शिवकुमार ने सोमवार को कहा, “मैंने पूरी रिपोर्ट अभी नहीं देखी है, उसका अध्ययन किया जा रहा है। मंगलवार को हमारी पार्टी के समुदाय विशेष के विधायकों के साथ बैठक होगी। हम इस विषय पर चर्चा करेंगे और ऐसा सुझाव देंगे जिससे किसी की भावनाएं आहत न हों और सभी का सम्मान बना रहे।” मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लिंगायत समुदाय से आने वाले वन मंत्री ईश्वर खंडरे ने कहा कि वह विभिन्न समुदायों के नेताओं की राय एकत्र कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं भी रिपोर्ट का अध्ययन कर रहा हूं और कैबिनेट बैठक की तैयारी कर रहा हूं। समुदायों के नेताओं और व्यक्तियों की राय को समाहित कर कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा।” मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है और सिर्फ इतना कहा है कि इस पर विशेष कैबिनेट बैठक होगी। बता दें कि जातिगत जनगणना रिपोर्ट 10 अप्रैल को कैबिनेट को सौंपी गई थी, लेकिन इसे आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया है। लीक हुई रिपोर्ट के मुताबिक, वोक्कालिगा समुदाय की आबादी 61.6 लाख (राज्य की कुल जनसंख्या का 10.3%) है और उनके लिए 7% आरक्षण की सिफारिश की गई है। लिंगायत समुदाय की आबादी 66.3 लाख (11%) बताई गई है और 8% आरक्षण प्रस्तावित है। हालांकि, लिंगायतों के भीतर उप-समुदायों जैसे वीरशैव (10.4 लाख), पंचमसाली (10.7 लाख) आदि के बीच विभाजन के कारण प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट में मुस्लिम आबादी 75.2 लाख (12.6%) बताई गई है और उनके लिए आरक्षण को 4% से बढ़ाकर 8% करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह संख्या वोक्कालिगा समुदाय से अधिक है, जिन्हें अब तक राज्य में दूसरा सबसे बड़ा समूह माना जाता रहा है। वोक्कालिगा समुदाय के संतों और नेताओं ने खुलकर रिपोर्ट का विरोध किया है। वहीं, ऑल इंडिया वीरशैव लिंगायत महासभा ने सोमवार को रिपोर्ट को खारिज कर दिया और एक नई जनगणना कराने की मांग की। महासभा के अध्यक्ष और पूर्व डीजीपी शंकर बिदारी ने दावा किया कि लिंगायत समुदाय की जनसंख्या करीब 35% है, क्योंकि राज्य के 31 में से लगभग 15 जिलों में लिंगायतों की संख्या 10 लाख से अधिक है। सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना, जो अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से हैं, ने धार्मिक संगठनों की आलोचना पर सवाल उठाते हुए कहा, “ये स्वामीजी और संगठन आंकड़े कहां से लाते हैं?” गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में सिर्फ जातिगत जनगणना रिपोर्ट पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा, “मंत्रियों से कहा गया है कि केवल इस विषय पर ही चर्चा करें। अभी तो यह शुरुआत है, उसके बाद ही स्वीकृति व अन्य मुद्दे सामने आएंगे।” आलोचना पर उन्होंने कहा, “मैं इस पर टिप्पणी नहीं करूंगा। अलग-अलग राय आएंगी, चलिए इस पर बातचीत करते हैं। ये टिप्पणियां समुदायों और नेताओं की ओर से आ रही हैं।” भाजपा से निष्कासित विधायक और विजयपुरा से विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मुस्लिम समुदाय सबसे बड़ा है, तो उन्हें अल्पसंख्यक दर्जा क्यों दिया जाए? उन्होंने कहा, “अगर इस रिपोर्ट को स्वीकार किया जाता है, तो ब्राह्मणों को भी, जो कि केवल 2% हैं, अल्पसंख्यक समुदाय का दर्जा मिलना चाहिए।” यतनाल ने आरोप लगाया कि लिंगायतों की संख्या को जानबूझकर उप-समुदायों में बांटकर कम कर दिखाया गया है। अब सभी की नजरें गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां इस रिपोर्ट को लेकर सरकार का अगला कदम तय होगा।

भारत की एजेंसियों के आग्रह पर ही उसे बेल्जियम में किया गया गिरफ्तार, अंग्रेजों के जमाने में हुई थी बेल्जियम के साथ संधि

बेल्जियम बेल्जियम में गिरफ्तार किए गए भारत के भगोड़े कारोबारी और 13 हजार करोड़ के बैंक फ्रॉड के आरोपी मेहुल चौकसी को प्रत्यर्पित करवा भारत लाने के लिए एजेंसियों ने कमर कर ली है। भारत की एजेंसियों के आग्रह पर ही उसे बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया है। वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक ईडी और सीबीआई अपने तीन-तीन अधिकारियों को बेल्जियम भेजने वाली हैं ताकि मेहुल चौकसी को भारत लाने का रास्ता निकाला जा सके। बेल्जियम में मेहुल चौकसी के प्रत्यर्पण की उम्मीदें इसलिए ज्यादा प्रगाढ़ हैं क्योंकि दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि है। क्या है बेल्जियम के साथ 125 साल पुराना समझौता भारत की एजेंसियों ने 125 साल पुरानी प्रत्यर्पण संधि का सहारा लिया और सारी जानकारी बेल्जियम को दे दी। हालांकि इसकी भनक मेहुल चौकसी को भी लग गई थी। तभी वह स्विट्जरलैंड भागने की तैयारी करने लगा। बेल्जियम और ब्रिटेन के बीच 29 अक्टूबर 1901 को एक संधि हुई थी। उस समय भारत में भी ब्रिटेन का ही राज था। बाद में इस संधि में कम से कम तीन बार संशोधन किया गया। 1907, 1911 और 1958 में इस संधि में संशोधन हुआ। भारत को आजादी मिलने के बाद भी दोनों देशों ने इस संधि को जारी रखने का फैसला किया। इस संधि के तहत दोनों देशों में से कोई भी अगर गंभीर अपराध करता है तो एक दूसरे के देश में उसका प्रत्यर्पण किया जा सकता है। इन अपराधों में हत्या, धोखाधड़ी, रेप, उगाही और ड्रग्स स्मग्लिंग जैसे क्राइम शामिल हैं। दोनों देशों में से किसी में भी अपराध करने वाला शख्स दोनों ही देशों में दंड के काबिल माना जाएगा। अगर किसी के खिलाफ पुख्ता सबूत होते हैं तो उसके प्रत्यर्पण के लिए आग्रह किया जा सकता है। हालांकि कोई भी देश अपने ही देश के किसी नागरिक को प्रत्यर्पित नहीं करेगा। अगर यह पता चलता है कि राजनीति के लिए किसी के प्रत्यर्पण के लिए जोर दिया जा रहा है तो इस आग्रह को दरकिनार भी किया जा सकता है। वहीं प्रत्यर्पण के बाद उसपर किसी तरह के नए अपराध का मुकदमा नहीं चल सकता। इसके अलावा बिना पहले देश की अनुमति के उसे तीसरे देश नहीं भेजा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने बाल तस्करी रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किये, यदि कोई नवजात शिशु चोरी होता है तो अस्पतालों का लाइसेंस रद्द

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी नवजात बच्चे को हॉस्पिटल से चुराया जाता है तो सबसे पहले उस अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड होना चाहिए. कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली- एनसीआर में नवजात बच्चों की तस्करी के गैंग के पर्दाफाश से जुड़ी खबर पर संज्ञान लेते हुए की. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के बच्चों की तस्करी के मामले में आदेश सुनाया और दिल्ली में इस गैंग के पकड़े जाने की घटना का जिक्र किया है. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली गैंग के पर्दाफाश की घटना अपने आप मे हतप्रभ कर देने वाली है और कोर्ट के दखल की जरूरत है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से इस बारे में स्थिति जांच रिपोर्ट भी तलब की है. कोर्ट ने पुलिस से पूछा है कि दिल्ली के अंदर और बाहर से सक्रिय इस तरह के बच्चा चोर गिरोहों से निपटने के लिए उनकी ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं? कोर्ट ने स्वतः संज्ञान के मामले पर अगली सुनवाई 21 अप्रैल को तय कर दी है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच अस्पतालों से बच्चा चोरी करने वाले गिरोह से जुड़े एक मामले में जमानत को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सभी आरोपियों को निचली अदालत में सरेंडर करने को कहा. साथ ही सीजेएम वाराणसी और एसीजेएम वाराणसी को निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर सत्र न्यायालय में मामले दर्ज किया जाए और एक सप्ताह के भीतर चार्ज फ्रेम किया जाए. इसके अलावा इस मामले से जुड़े कुछ आरोपी फरार हैं तो उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट गैर जमानती वारंट जारी किया जाए. साथ ही कोर्ट ने तस्करी किए गए बच्चों को RTE के तहत स्कूल में भर्ती कराया जाता है और उन्हें शिक्षा प्रदान करना जारी रखता है. ट्रायल कोर्ट बीएनएसएस और यूपी राज्य कानून के तहत मुआवजे के संबंध में आदेश पारित करने के लिए भी निर्देश दिया. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट को बाल तस्करी के मामलों में लंबित मुकदमे की स्थिति की जानकारी लेने का निर्देश देते हुए कहा कि लंबित मुकदमों को छह महीने में परीक्षण पूरा करने और मामलों के प्रतिदिन सुनवाई के आधार पर किए जाएंगे. कोर्ट ने यह भी कहा कि हमारे द्वारा जारी निर्देशों को लागू करने में बरती गई किसी भी ढिलाई को गंभीरता से लिया जाएगा और उसे अवमानना के रूप में माना जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बाल तस्करी के मामलों से निपटने के तरीके को लेकर यूपी के प्रशासन की आलोचना की और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए राज्यों को सख्त दिशा-निर्देश दिए. बेंच ने निचली अदालतों को ऐसे मामलों की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने का आदेश दिया. साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि किसी नवजात की तस्करी होती है तो अस्पतालों के लाइसेंस निलंबित कर दिए जाएं. शीर्ष अदालत ने कहा, देश भर के हाई कोर्ट को बाल तस्करी के मामलों में लंबित मुकदमों की स्थिति के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया जाता है. इसके बाद 6 महीने में मुकदमे को पूरा करने और दिन-प्रतिदिन सुनवाई करने के निर्देश जारी किए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें तस्करी करके लाए गए एक बच्चे को उत्तर प्रदेश के एक दंपत्ति को सौंप दिया गया था जो बेटा चाहते थे. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी थी. आरोपियों की जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले से निपटने के तरीके को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों को फटकार लगाई. बेंच ने कहा, आरोपी को बेटे की चाहत थी और उसने 4 लाख रुपये में बेटा खरीद लिया. अगर आप बेटे की चाहत रखते हैं तो आप तस्करी किए गए बच्चे को नहीं खरीद सकते. वो जानता था कि बच्चा चोरी हुआ है. शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने जमानत आवेदनों पर ऐसी कार्रवाई की, जिसके कारण कई आरोपी फरार हो गए. अदालत ने कहा, ये आरोपी समाज के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं. जमानत देते समय हाई कोर्ट से कम से कम यह अपेक्षित था कि वो हर सप्ताह पुलिस थाने में उपस्थिति दर्ज कराने की शर्त लगाता. पुलिस सभी आरोपियों का पता लगाने में विफल रही. सरकार की खिंचाई करते हुए जजों ने कहा, हम पूरी तरह से निराश हैं… कोई अपील क्यों नहीं की गई? कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई. ‘अस्पतालों का लाइसेंस रद्द होगा’ बाल तस्करी के मामलों को रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई नवजात शिशु चोरी होता है तो अस्पतालों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाना चाहिए. अदालत ने आदेश दिया, यदि किसी अस्पताल से नवजात शिशु की तस्करी की जाती है तो पहला कदम ऐसे अस्पतालों का लाइसेंस निलंबित करना होना चाहिए. यदि कोई महिला अस्पताल में बच्चे को जन्म देने आती है और बच्चा चोरी हो जाता है, तो पहला कदम लाइसेंस निलंबित करना होना चाहिए. बेंच ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा. इसे न्यायालय की अवमानना ​​माना जाएगा.  

रॉबर्ट वाड्रा जमीन सौदे मामले में ईडी के सामने हुए पेश

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति और जानेमाने कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा को जमीन सौदा मामले में दूसरी बार तलब किया है। समन के तहत वे मंगलवार सुबह ईडी दफ्तर पहुंचे। इससे पहले उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि यह कार्रवाई जनता की आवाज दबाने की कोशिश है। इससे पहले ईडी ने उन्हें समन कर 8 अप्रैल को पेश होने को कहा था। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत वाड्रा का बयान दर्ज करेगी। इससे पहले संघीय जांच एजेंसी ने एक अन्य धन शोधन मामले में वाड्रा से पूछताछ की थी। क्या है मामला? दरअसल, ईडी ने मंगलवार को हरियाणा के शिकोहपुर भूमि सौदे से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में रॉबर्ट वाड्रा को समन भेजा है। वाड्रा पहले समन पर उपस्थित नहीं हुए थे, जो 8 अप्रैल को जारी किया गया था। उन्हें पूछताछ के लिए ईडी के सामने उपस्थित होने के लिए कहा गया, क्योंकि केंद्रीय जांच एजेंसी उनकी फर्म स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है। ईडी के मुताबिक, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने फरवरी 2008 में ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से गुड़गांव के शिकोहपुर में 3.5 एकड़ का प्लॉट 7.5 करोड़ रुपये में खरीदा था। उनकी कंपनी ने इसके बाद जमीन को रियल एस्टेट दिग्गज डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया। मुझे कुछ भी छिपाने की जरूरत नहीं: वाड्रा इससे ईडी दफ्तर जाते वक्त रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि सरकार बदले के तहत कारवाई कर रही है। मुझे नहीं पता कि आखिर गलती क्या है। मुझे किसी से भी कुछ भी छिपाने की जरूरत नहीं है। मैं कुछ भी गलत नहीं किया है। मेरे खिलाफ जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सब कुछ मुझे परेशान करने और फंसाने के लिए किया जा रहा है। इस मामले में कुछ भी नहीं है। पिछले 20 सालों में मुझे 15 बार बुलाया गया और हर बार 10 घंटे से ज्यादा पूछताछ की गई। मैंने 23000 दस्तावेज जमा किए हैं। मुझसे जो भी पूछा जाएगा, उन्हें सब बताएंगे। राजनीति में शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी इससे पहले बीते दिन ही रॉबर्ट वाड्रा ने राजनीति में शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि अगर कांग्रेस पार्टी को लगता है कि उन्हें यह कदम उठाना चाहिए, तो वह अपने परिवार के आशीर्वाद से यह कदम उठाएंगे। एएनआई से खास बातचीत में वाड्रा ने कहा था कि राजनीति से उनका जुड़ाव काफी हद तक गांधी परिवार से उनके जुड़ाव के कारण है। पिछले कुछ सालों में कई राजनीतिक दलों ने उन्हें राजनीतिक चर्चाओं में खींचने की कोशिश की है और अक्सर चुनाव या अन्य मुद्दों के दौरान उनके नाम का इस्तेमाल ध्यान भटकाने के लिए किया जाता है।

भारत के टॉप पांच भगोड़े व्यवसायी जो बैंकों को करोड़ों का चूना लगाकर विदेश में ऐश

मुंबई देश के बैंकों का पैसा लेकर भागे कर्जदारों की लिस्ट लंबी है. वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) की ओर से टॉप-50 विलफुल डिफॉल्टर्स का डाटा पेश किया है, जिनपर तमाम बैंकों के 87,295 करोड़ रुपये बकाया हैं. इसमें सबसे ऊपर मेहुल चोकसी (Mehul Choksi) और ऋषि अग्रवाल (Rishi Agarwal) जैसे नाम शामिल हैं. वित्त राज्य मंत्री डॉक्टर भागवत सिंह कराड़ (Dr Bhagwat Karad) ने ये आंकड़ा राज्यसभा में शेयर किया है. एससीबी का 40,825 करोड़ बकाया राज्यसभा में जानकारी देते हुए वित्त राज्य मंत्री भागवत कराड़ (Bhagwat Karad) ने बताया कि मेहुल चोकसी की गीतांजलि जेम्स (Gitanjali Gems) सहित टॉप 50 विलफुल डिफॉल्टरों पर बैंकों का 87,295 करोड़ रुपये का बकाया है. राज्य मंत्री ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित उत्तर में कहा कि इन जान-बूझकर कर्ज न चुकाने वालों में से टॉप-10 पर अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCB) का 40,825 करोड़ रुपये बकाया है. मेहुल चोकसी सबसे बड़ा डिफॉल्टर बीते पांच सालों का आकंड़ा पेश करते हुए वित्त राज्य मंत्री भागवत सिंह कराड़ ने कहा कि एससीबी ने इस अवधि में 10,57,326 करोड़ रुपये की कुल राशि माफ भी की है. इसके बावजूद इसका इतना बकाया है. इसके साथ ही इन जान-बूझकर कर्ज न चुकाने वालों में भगोड़े मेहुल चोकसी की गीतांजलि जेम्स (Mehul Choksi’s Gitanjali Gems Limited) सबसे बड़ी विलफुल डिफॉल्टर है, जिस पर बैंकों का 8,738 करोड़ रुपये बकाया है. चोकसी के बाद ये बड़े नाम लिस्ट में शामिल अन्य डिफॉल्टर्स की बात करें तो मेहुल चोकसी के बाद ऋषि अग्रवाल की एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड (ABG Shipyard Limited), आरईआई एग्रो लिमिटेड (REI Agro Limited) और एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड (Era Infra Engineering Limited) का नाम आता है. वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनंतिम आंकड़ों का हवाला देते हुए वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि एससीबी ने पिछले पांच वर्षों के दौरान 10,57,326 करोड़ रुपये की कुल राशि को बट्टे खाते में डाल दिया है. पीटीआई के मुताबिक, आरबीआई ने सूचित किया है कि एससीबी में शीर्ष 50 विलफुल डिफॉल्टरों पर 31 मार्च, 2023 तक 87,295 करोड़ रुपये का बकाया था. मेहुल चौकसी 2018 में पीएनबी धोखाधड़ी केस सामने आने के बाद मेहुल चौकसी एंटीगुआ भाग गया था। वहीं सीबीआई और ईडी उसे गिरफ्तार करने की कोशिश में लगी रहीं। एजेंसियों के आग्रह के बाद उसे बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया। उसपर 13 हजार करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। प्रत्यर्पण की कोशिश मेहुल चौकसी नामचीन हीरा कारोबारी थे। बीते सात सालों में चौकसी तीन देशों में रहे। वहीं रिपोर्ट्स में बताया गया कि अब वह स्विट्जरलैंड भागने की फिराक में था। इससे पहले ही बेल्जियम में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। नीरव मोदी मेहुल चौकसी के साथ ही उनके भांजे नीरव मोदी भी पीएनबी धोखाधड़ी मामले में आरोपी हैं। 19 मार्च में उन्हें लंदन में गिरफ्तार किया गया था। नीरव मोदी ने 2018 में ही भारत छोड़ दिया था। लंदन के वेस्टमिन्स्टर कोर्ट में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का मामला चल रहा था। विजय माल्या किंगफिशर के मालिक विजय माल्या ने भारतीय बैंकों को 9 हजार करोड़ रुपये का चूना लगाया। कर्ज लेने के बाद बिना चुकाए ही वह विदेश चले गए। वहीं किंगफिशर एयरलाइन भी बंद हो गई। 2016 से वह लंदन में रह रहे हैं। भारतीय एजेंसियां उन्हें भारत लाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। लग्जरी लाइफ बताया जाता है कि विजय माल्या विदेश में भी ऐश की जिंदगी जी रहे हैं। भारत में भी वह अपनी लग्जरी लाइफ स्टाइल के लिए जाने जाते थे। नितिन संदेसरा नितिन संदेसरा गुजरात के कारोबारी हैं। उनपर 5700 करोड़ के बैंक फ्रॉड का आरोप है। उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। जानकारी के मुताबिक 2017 में उनके खिलाफ जांच शुरू होने के बाद वह नाइजीरिया भाग गए। उनके पास नाइजीरिया और अलाबनिया की नागरिकता है। ललित मोदी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की शुरुआत करने वाले ललित मोदी 2010 से ही भारत से फरार हैं। उनपर आईपीएल नीलामी में बड़ी धोखाधड़ी के आरोप हैं। भारत कई बार उनके प्रत्यर्पण का प्रयास कर चुका है। BCCI ने लगा दिया था बैन ललित मोदी ने 2008 में आईपीएल की शुरुआत करवाई थी। उनपर आरोप था कि बिना अनुमति के ही अवैध तरीके से उन्होंने प्रसारण के अधिकार की नीलामी की। इसके बाद 2013 में बीसीसीआई ने उनपर बैन लगा दिया। टॉप-10 विलफुल डिफॉल्टर्स की लिस्ट कंपनी का नाम                                       बकाया गीतांजलि जेम्स लिमिटेड                           8,738 करोड़ रुपये एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड                  5,750 करोड़ रुपये         आरईआई एग्रो लिमिटेड                           5,148 करोड़ रुपये एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड                         4,774 करोड़ रुपये कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड           3,911 करोड़ रुपये रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड              2,894 करोड़ रुपये विनसम डायमंड्स एंड ज्वैलरी लिमिटेड     2,846 करोड़ रुपये फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड                     2,518 करोड़ रुपये श्री लक्ष्मी कॉटसिन लिमिटेड                     2,180 करोड़ रुपये जूम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड                 2,066 करोड़ रुपये आरबीआई ने दी है IBA को सलाह डॉक्टर भागवत कराड़ ने आगे कहा कि आरबीआई ने भारतीय बैंक संघ (IBA) को सलाह भी जारी की है कि बैंकों को इनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर प्रतिकूल असर डाले बिना जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों या बैंकों के साथ धोखाधड़ी वाले कर्जदारों के साथ समझौता करने पर विचार करना चाहिए. उन्होंने RBI के 8 जून, 2023 के फ्रेमवर्क फॉर कॉम्प्रोमाइज सेटलमेंट्स एंड टेक्निकल राइट-ऑफ्स शीर्षक वाले परिपत्र का जिक्र किया. इसमें कहा गया है कि विनियमित संस्थाएं (RI) धोखाधड़ी या जानबूझकर डिफॉल्टर के रूप में वर्गीकृत खातों के संबंध में समझौता निपटान या तकनीकी राइट-ऑफ कर सकती हैं.  

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