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भाजपा नेतृत्व अन्य राज्यों के अध्यक्षों के सामाजिक समीकरणों को देखकर मध्य प्रदेश में फैसला लेगा

नईदिल्ली भाजपा के संगठन चुनावों में राज्यों के चुनाव की प्रक्रिया के दौरान लगभग आधा दर्जन राज्यों में पार्टी को कुछ नेताओं को लेकर मुखर विरोध के साथ सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों को लेकर काफी पसीना बहाना पड़ रहा है। पार्टी संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी हो सकता है, जबकि पचास फीसदी यानी आधे राज्यों के चुनाव हो जाएं। भाजपा के संगठन के 38 प्रदेश हैं और अभी लगभग 10 राज्यों के चुनाव ही पूरे हुए हैं। भाजपा को संगठन चुनावों में कर्नाटक में मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र को बरकरार रखने के लिए राज्य के नेताओं के एक समूह के मुखर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। तमिलनाडु, केरल व पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को अब एक साल बचा है। ऐसे में वहां बदलाव किया जाए या नहीं और किया जाए तो किसे नेतृत्व दिया जाए, इस पर फैसला नहीं हो पा रहा। उत्तर प्रदेश में नए नेता की तलाश उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने पद छोड़ने की पेशकश कर दी थी। चूंकि, संगठन चुनाव होने थे, इसलिए बदलाव नहीं किया गया था। सूत्रों का कहना है कि होली के बाद ही नए अध्यक्ष का फैसला हो पाएगा। सामाजिक व क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से नया अध्यक्ष चुना जाएगा। मध्य प्रदेश में दलित व आदिवासी चेहरे पर विचार मध्य प्रदेश में मौजूदा अध्यक्ष वीडी शर्मा को पांच वर्ष हो गए हैं। वहां राजपूत, ब्राह्मण के साथ दलित व आदिवासी नेताओं के नाम पर भी विचार किया गया है। भाजपा नेतृत्व अन्य राज्यों के अध्यक्षों के सामाजिक समीकरणों को देखकर फैसला लेगा। तेलंगाना-गुजरात में अहम हैं सामाजिक समीकरण तेलंगाना और गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। दोनों राज्यों में अभी चुनाव नहीं हैं, ऐसे में वहां पर भविष्य की चुनौती व संभावनाओं को देखते हुए बदलाव किए जाने हैं। दोनों ही राज्यों में सामाजिक समीकरण काफी अहम हैं। हालांकि, पार्टी में कुछ नेता इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि एक व्यक्ति, एक पद को लेकर भाजपा अपने रुख में कुछ लचीलापन रखे और कुछ राज्यों को इसका अपवाद बनाकर रखा जाए। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व इसके पक्ष में नहीं दिख रहा।

किरण चौधरी ने कहा- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा शुरू से ही भगवा पार्टी के साथ हैं

भिवानी भाजपा की राज्यसभा सांसद किरण चौधरी ने एक बार फिर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के बारे में कहा है कि वह शुरू से ही भगवा पार्टी के साथ हैं। किरण चौधरी ने बुधवार को संवाददाताओं से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भाजपा में लाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि वह शुरू से ही भाजपा के साथ थे और भाजपा के लिए काम कर रहे थे। कटाक्ष करते हुए उन्होंने इसके लिए हुड्डा का आभार भी जताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली और पूर्व मंत्री जे.पी. दलाल द्वारा हुड्डा को भाजपा में शामिल होने का निमंत्रण देने के बारे में पूछे जाने पर किरण चौधरी ने कहा, “हुड्डा तो पहले से ही भाजपा के साथ हैं और उनका काम कर रहे हैं। इसके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करती हूं।” किरण चौधरी ने यह भी कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र सिंह को देखकर कांग्रेस के अन्य नेता अपनी स्थिति खराब कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “इन दोनों की उपस्थिति ही कांग्रेस को खत्म करने की रणनीति है।” किरण चौधरी ने भिवानी में सैकड़ों लोगों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही अधिकारियों को फोन करके समाधान के निर्देश दिए। इसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने अपनी अजरबैजान यात्रा के बारे में भी जानकारी दी। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा पर बात करते हुए किरण चौधरी ने कहा कि कांग्रेस अब खत्म होने की कगार पर है और यह कांग्रेस के नेताओं की गलत नीतियों की वजह से हो रहा है। उन्होंने दिल्ली चुनाव में कांग्रेस की हार का जिक्र करते हुए दावा किया कि भाजपा निकाय चुनावों में भारी बहुमत से जीतने वाली है। किरण चौधरी ने कहा, “कांग्रेस में अब कुछ नहीं बचा है और कांग्रेस के नेता समझौते करने के बाद पार्टी को आगे नहीं बढ़ा सकते। कांग्रेस केवल तेलंगाना और कर्नाटक में बची हुई है, लेकिन वहां भी अगली बार हार जाएगी।”

दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा – गलत बोलने वालों को गंगा जल पीना चाहिए

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के द्वारा कुंभ मेला और अन्य मुद्दों पर की गई हालिया टिप्पणियों पर तीखा जवाब दिया है। घोष ने ममता बनर्जी के बयान को लेकर कई सवाल उठाए हैं और राज्य में हो रही कुछ घटनाओं पर चिंता जताई है। दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि गलत बोलने वालों को गंगा जल पीना चाहिए। ममता बनर्जी की कुंभ पर टिप्पणी पर प्रतिक्रिया ममता बनर्जी ने महाकुंभ को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि 144 साल बाद महाकुंभ का आयोजन होना सही नहीं है। उनके इस बयान पर दिलीप घोष ने सवाल उठाए और कहा कि अगर ममता बनर्जी गंगा स्नान के बारे में कुछ कहना चाहती हैं तो उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके पार्टी के सदस्य ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हुए गंगा स्नान और त्रिवेणी स्नान करते हैं। दिलीप घोष ने यह भी कहा कि अगर ममता बनर्जी चाहें तो वे अब भी गंगा स्नान कर सकती हैं या गंगाजल लेकर उसे छिड़क सकती हैं। अमदंगा में बम बरामदगी पर बयान अमदंगा में बम मिलने के मामले पर दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है और असामाजिक तत्व खुलेआम काम कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग वामपंथियों के साथ मिलकर अपराध कर रहे हैं और अन्य राज्यों में भी असमाजिक गतिविधियों में शामिल हैं। मतदाताओं के बढ़ते प्रतिशत पर चिंता घोष ने बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में मतदाता प्रतिशत में वृद्धि पर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी की पार्टी को दिल्ली की तरह ही बंगाल में भी बढ़ा हुआ समर्थन दिखाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में मतदाता संख्या दोगुनी हो गई है, और ये मतदाता कहां से आते हैं, इस पर सवाल उठाए। चाय उद्योग की स्थिति पर टिप्पणी घोष ने बंगाल के चाय उद्योग की स्थिति पर भी दुख जताया और कहा कि राज्य में चाय उद्योग बहुत खराब स्थिति में है। उन्होंने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि असम में चाय उद्योग अच्छा चल रहा है, लेकिन बंगाल में स्थिति बहुत खराब है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा इस मामले में मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए काम कर रही है और आगे भी करती रहेगी। पूर्वोत्तर में विकास की सराहना घोष ने पूर्वोत्तर भारत में हुए विकास कार्यों की सराहना की और कहा कि पिछले दस वर्षों में वहां जितना विकास हुआ है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि वहां हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे, नए पुल और अन्य विकास कार्य हो रहे हैं और लोग अब महसूस कर रहे हैं कि वे भारत में हैं और केंद्र सरकार उन्हें सभी सुविधाएं प्रदान कर रही है। दिल्ली में सीएजी रिपोर्ट पर टिप्पणी दिल्ली में पेश की गई CAG रिपोर्ट पर भी दिलीप घोष ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अब तक सबसे भ्रष्ट सरकार थी, लेकिन अब वह बदल चुकी है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने हजारों करोड़ रुपए लूटे हैं और यह धीरे-धीरे सामने आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग जेल में हैं और जो नहीं हैं, वे सभी जेल जाएंगे। यह खबर पश्चिम बंगाल में बीजेपी और ममता बनर्जी के बीच के राजनीतिक संघर्ष को और तेज कर सकती है।  

रामदास आठवले ने कहा- उद्धव ठाकरे और राहुल गांधी को कुंभ में स्नान करने जाना चाहिए था, न जाकर हिंदुओं का क‍िया अपमान

मुंबई केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने महाकुंभ में उद्धव ठाकरे और राहुल गांधी के न पहुंचने को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे और राहुल गांधी को कुंभ में स्नान करने जाना चाहिए था। उन्‍होंने वहां न जाकर हिंदुओं का अपमान क‍िया है। आठवले ने कहा कि महाकुंभ में 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया। यह अवसर 144 साल बाद आया था। यह उनका व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है, लेकिन राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे को स्नान करने जाना चाहिए था। इन नेताओं को हिंदू वोटरों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए था, खासकर जब वे खुद हिंदू हैं। उनका मानना है कि उद्धव ठाकरे, जो हमेशा हिंदुत्व की बात करते रहे हैं, का इस अवसर पर नहीं जाना गलत है और यह हिंदुओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि हिंदू वोटरों को इन नेताओं का बहिष्कार करना चाहिए और चुनावों में इन्हें सबक सिखाना चाहिए। मुस्लिम वोटरों को लुभाने के कारण वे महाकुंभ में नहीं गए, लेकिन उन्होंने यह भी कहा क‍ि मुस्लिम वोट बीजेपी को भी मिलते हैं, इसलिए उन्हें यह कदम उठाने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा का नेतृत्व देश को आगे बढ़ा रहा है और ये दोनों नेता मोदी के खिलाफ जो नाराजगी दिखा रहे हैं, उसका उन्हें कोई फायदा नहीं होगा। दिल्ली में आम आदमी पार्टी द्वारा बीजेपी पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से डॉ. भीमराव आंबेडकर और भगत सिंह की तस्वीरें हटा दीं और उनकी जगह महात्मा गांधी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें लगाईं। इस पर रामदास आठवले ने कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर को सम्मान देने का काम नरेंद्र मोदी ने सबसे ज्यादा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी ने कभी आंबेडकर की तस्वीर नहीं हटाई, और शायद यह काम आम आदमी पार्टी की सरकार ने किया होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही आंबेडकर की तस्वीर फिर से लगाई जाएगी। तेलंगाना सरकार द्वारा तेलुगु को स्कूलों में अनिवार्य विषय बनाने के मुद्दे पर आठवले ने कहा कि हिंदी का विरोध करना ठीक नहीं है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर तेलंगाना में तेलुगु को महत्व दिया जा रहा है तो यह भी ठीक है, जैसे महाराष्ट्र में मराठी भाषा काे महत्व दिया जाता है। आठवले ने देवेंद्र फडणवीस की तारीफ करते हुए कहा कि वह अच्छे कार्य कर रहे हैं, लेकिन एकनाथ शिंदे को “फिक्सर” कहना गलत है। उन्होंने कहा कि शिंदे एक अच्छे कार्यकर्ता रहे हैं और बालासाहेब ठाकरे ने उन्हें बड़ा सम्मान दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उद्धव ठाकरे बीजेपी के साथ आते हैं, तो यह बहुत अच्छी बात होगी, लेकिन बीजेपी को उनकी जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके पास बहुमत है।

गुजरात में नगरपालिका चुनावों में कुल 210 निर्विरोध चुने गए मुस्लिम उम्मीदवारों में 10% बीजेपी के

अहमदाबाद  ना दूरी है ना खाई है, मोदी हमारा भाई है… पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने यह नारा दिया था। तब गुजरात में 29 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता बीजेपी के साथ आ गए थे। सर्वे एजेंसी सीएसडीएस-लोकनीति ने यह दावा किया था। अब गुजरात के निकाय चुनावों के परिणाम बता रहे हैं कि 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर सर्वे एजेंसी के अनुमान में काफी दम है। गुजरात में बीजेपी ने नगर निकाय के 82 मुस्लिम उम्मीदवारों को जिताकर इतिहास रच दिया है। ये जीत 66 नगरपालिका चुनावों में हुई है। इससे उत्साहित बीजेपी के अंदर इस बात पर गंभीरता से मंथन शुरू हो गया कि क्या विधानसभा चुनावों में भी मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए जाएं। ऐसा हुआ तो गुजरात में किसी अल्पसंख्यक उम्मीदवार को चुनाव मैदान में नहीं उतारने की बीजेपी की परंपरा टूट सकती है। पसमांदा मुसलानों से जुड़ने की पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 की भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पसमांदा मुसलमानों से संपर्क की जरूरत बताई थी। उसी वर्ष भोपाल की एक रैली में प्रधानमंत्री ने कहा कि कैसे अगड़े मुसलमान अपने ही समुदाय के पिछड़े मुसलमानों यानी पसमांदाओं का शोषण करते हैं और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखते हैं। सरकारी संस्था नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) के अनुसार मुस्लिमों में ओबीसी जनसंख्या 40.7 प्रतिशत है। देश के कुल पिछड़े समुदाय की जनसंख्या में पसमांदा मुसलमानों की हिस्सेदारी 15.7 प्रतिशत है। कहां-कहां मुस्लिम मतदाताओं का दबदबा? विभिन्न सर्वे और रिपोर्ट बताते हैं कि लोकसभा की 65 सीटों पर 30 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं और प्रत्याशियों की किस्मत तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। आंकड़े बताते हैं कि 92 सीटों पर 20 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। इनमें 41 सीटों पर 21 से 30 प्रतिशत, 11 सीटों पर 41 से 50 प्रतिशत, 24 सीटों पर 31 से 40 प्रतिशत और 16 सीटों पर 50 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, कर्नाटक, असम जैसे राज्यों में मुस्लिम मतदाता काफी असरदार माने जाते हैं। ये नतीजे दिखाते हैं कि अल्पसंख्यक आबादी अब बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ी है। विपक्ष ने समान नागरिक संहिता, तीन तलाक और वक्फ जैसे मुद्दों पर हंगामा खड़ा करने की कोशिश की, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। मुसलमानों से संपर्क की चौतरफा पहल प्रधानमंत्री की अपील पर भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में मुसलमान मतदाताओं से संपर्क साधने की बहुस्तरीय योजना बनाई। पार्टी ने हजारों ‘स्नेह संवाद’ कार्यक्रम किए जिनमें बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा ने देशभर में करीब 1.5 हजार विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया। इन कार्यकर्मों के जरिए 50 लाख से ज्यादा मुसलमानों से बातचीत की गई। दूसरी तरफ, सभी 543 लोकसभा क्षेत्रों के मुसलमानों को ‘मोदी मित्र’ बनाने की पहल हुई। इस पहल के तहत हर सीट पर 2,000 से ज्यादा मुस्लिम मोदी मित्र बनाए गए। फिर बूथ मैनेजमेंट में मुसलमानों की भागीदारी बढ़ाई गई। ‘ना दूरी है ना खाई है, मोदी हमारा भाई है’ के नारे से मुसलमानों को बीजेपी के करीब लाने का प्रयास किया गया। मुसलमानों से बीजेपी की बातचीत बीजेपी ने इन सभी कार्यक्रमों में मुसलमानों को बताया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा सरकार ने मुस्लिम समुदाय का चौतरफा कल्याण किया है। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से आजादी दिलाने के लिए कानून बनाना हो या गरीब कल्याण की योजनाओं में बिना भेदभाव के मुस्लिम आबादी से ज्यादा हिस्सेदारी देना, मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय के उत्थान की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। मुसलमानों को यह भी बताया गया कि कांग्रेस शासन के लंबे वक्त में मुसलमानों की कैसी दुर्दशा हुई, इसका प्रमाण कांग्रेस सरकार में बनी सच्चर कमिटी की रिपोर्ट में ही मिला है। मुसलमान और बीजेपी: क्या कहते हैं आंकड़े? ऐसा नहीं है कि मुसलमान बीजेपी को वोट करते ही नहीं हैं। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटी (सीएसडीएस) के मुताबिक 2014 के चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर करीब 8.5 प्रतिशत मुस्लिम वोट भाजपा के पक्ष में गया था। भाजपा को इससे पहले मुसलमानों का इतना ज्यादा समर्थन कभी नहीं मिला था। 2014 से पहले भाजपा को सबसे ज्यादा सात प्रतिशत मुस्लिमों का समर्थन 2004 में मिला था। रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 में बीजेपी को तीन प्रतिशत मुस्लिमों ने वोट किया था। 1998 को लोकसभा चुनावों में 5 प्रतिशत जबकि 1999 में 6 प्रतिशत मुसलमानों ने बीजेपी का पक्ष लिया था। मुस्लिम वोट बैंक का आकर्षण भारतीय राजनीति में मुसलमान हमेशा के आकर्षक वोट बैंक बने रहे हैं। वर्ष 1980 तक यह वोट बैंक कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ा रहा था। फिर यह कांग्रेस से छिटका तो राज्य स्तर पर क्षेत्रीय दलों का दामन थामता चला गया। मंडल-कमंडल की राजनीति के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का उभार हुआ तो मुस्लिम मतदाता उनके साथ जुड़ गए। इसी तरह, बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद), बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, कर्नाटक में कभी कांग्रेस तो कभी जनता दल (सेकुलर) का दामन थाम लिया। मुसलमानों में बीजेपी को हराने की जिद फिर चुनाव दर चुनाव यह धारणा पुष्ट होती चली गई कि मुसलमान किसी का सगा नहीं है, बस उसके जेहन में एक ही बात कौंधती रहती है कि बीजेपी को कौन परास्त कर सकता है। जिस पार्टी और उम्मीदवार में बीजेपी को हराने की ताकत दिखी, मुसलमानों ने उसका पक्ष लिया। लेकिन पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं के दबदबे वाली कुंदरकी सीट पर बीजेपी प्रत्याशी के विजय ने बड़ा संकेत दिया। यह इसलिए लोकसभा चुनावों में बीजेपी को उत्तर प्रदेश के सिर्फ 2 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा का समर्थन किया था। अब गुजरात निकाय चुनावों में बीजेपी के मुस्लिम उम्मीदवारों की बड़ी सफलता ने कुंदरकी विधानसभा सीट से मिले संदेश को संभवतः और स्पष्ट कर दिया है। इस प्रदर्शन को देखते हुए, भविष्य में बीजेपी में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए चीजें बदल सकती हैं। हां, पार्टी उन सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को उतार सकती है जहां मुस्लिम मतदाताओं का दबदबा है। कुछ सीटें ऐसी हैं जहां भविष्य में मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और शरद पवार की दिल्ली वाली तस्वीर की चर्चाएं महाराष्ट्र की सियासत में खूब …..

मुंबई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NCP (SP) प्रमुख शरद पवार की दिल्ली वाली तस्वीर की चर्चाएं महाराष्ट्र की सियासत में खूब हो रही हैं. इस बीच, राज्य की पॉलिटिक्स में दो बड़े अपडेट देखने को मिले हैं. पहला, शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत के सुर बदले नजर आए हैं. उन्होंने सरकार के फैसलों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की खुलकर तारीफ की है. दूसरा, शरद पवार की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले से मुलाकात की है. इस मीटिंग के बाद पाटिल के राजनीतिक रुख पर अटकलें तेज हो गई हैं. दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 21 फरवरी को 98वां अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में बतौर अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे. शरद पवार कार्यक्रम के आयोजक मंडल में शामिल थे. पीएम मोदी जब दीप प्रज्ज्वलन करने पहुंचे तो उन्होंने शरद पवार से आगे आने का अनुरोध किया. उसके बाद जब पवार अपना संबोधन खत्म करके सीट की तरफ लौट रहे थे तो PM मोदी ने सीट पर बैठने में मदद की और उनको पानी का गिलास भरकर दिया. सोशल मीडिया पर इस वीडियो की खूब तारीफ की गई. ‘बैठक में राजनीति पर चर्चा नहीं हुई’ इस बीच, अब खबर है कि महाराष्ट्र NCP (SP) अध्यक्ष जयंत पाटिल और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले के बीच बैठक हुई है. हालांकि, पाटिल ने सफाई में कहा कि मुंबई में बैठक के दौरान राजनीति पर चर्चा नहीं हुई. पाटिल ने कहा, हमने सांगली जिले में अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित कार्यों को लेकर सोमवार शाम बावनकुले से मुलाकात की. पूर्व मंत्री पाटिल को NCP (SP) प्रमुख शरद पवार का बेहद करीबी माना जाता है. पाटिल ने कहा, हां, मैं बावनकुले से मिला. मैंने अपने क्षेत्र से संबंधित काम के लिए उनसे मुलाकात की. मेरे साथ एक प्रतिनिधिमंडल भी था और 25 मिनट की बैठक के दौरान कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई. हमने सिर्फ स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की. ‘एक दर्जन मांगें सामने रखीं’ पाटिल ने बैठक में सांगली जिले के मुद्दों से संबंधित कम से कम एक दर्जन मांगें रखीं और भूमि रिकॉर्ड की ऑनलाइन प्रोसेसिंग के संबंध में बात की. पाटिल ने कहा, यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसे मैंने बावनकुले के ध्यान में लाया. उन्होंने कहा, भूमि अधिग्रहण से संबंधित कई मामलों को हल करने की जरूरत है. गडकरी के साथ भी मंच साझा कर चुके पाटिल बावनकुले ने कहा कि राज्य मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल भी बैठक में उपस्थित रहे. उन्होंने कहा, करीब 400 से 500 लोग भी मौजूद थे. बैठक में कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई. पाटिल ने हाल ही में एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद नितिन गडकरी के साथ मंच साझा किया था. पाटिल इस्लामपुर से विधायक हैं. राउत ने फडणवीस की तारीफ में क्या कहा? इधर, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने ‘फिक्सर’ को मंत्रियों का ओएसडी या पीएस नहीं बनने देने के लिए सीएम फडणवीस की तारीफ की है. राउत ने कहा, जिन लोगों को पदों के लिए नजरअंदाज किया गया, उनमें से अधिकांश शिवसेना (शिंदे) के मंत्री थे. उन्होंने दावा किया कि कैबिनेट मंत्रियों के 16 निजी सचिवों (पीएस) या विशेष कर्तव्य अधिकारियों (ओएसडी) की नियुक्ति को फडणवीस ने मंजूरी नहीं दी, उनमें से 13 शिवसेना के मंत्री थे. ‘सख्त फैसले ले रहे हैं फडणवीस’ पत्रकारों से बातचीत में राउत ने ‘फिक्सरों’ की नियुक्ति को रोकने के लिए गृह विभाग रखने वाले फडणवीस की सराहना की. राउत ने कहा, मेरे पास 16 पीएस के नाम हैं, जिनमें से 13 शिंदे के हैं और बाकी अजित पवार खेमे के हैं. वो (फडणवीस) सख्त फैसले ले रहे हैं. हमारे बीच राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हम राज्य के हित में लिए गए फैसलों का समर्थन करते हैं. ‘फडणवीस ने लूट रोक दी’ उन्होंने कहा कि फडणवीस ने महाराष्ट्र के खजाने की लूट रोक दी है. राउत का कहना था कि जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे (जून 2022-नवंबर 2024) और जिन परियोजनाओं की लागत बढ़ा दी गई थी, उन स्वीकृत प्रोजेक्ट पर काम सस्पेंड करके फडणवीस ने राज्य की लूट को रोक दिया है. ‘फिक्सर’ के नामों को मंजूरी नहीं फडणवीस ने सोमवार को कहा, हमने पीएस या ओएसडी के रूप में नियुक्ति के लिए कैबिनेट मंत्रियों द्वारा भेजे गए 125 नामों में से 109 को मंजूरी दे दी, लेकिन अन्य को मंजूरी नहीं दी क्योंकि वे या तो पूछताछ का सामना कर रहे हैं या फिक्सर के रूप में जाने जाते हैं. फडणवीस ने कहा, शेष (16) के नामों को मंजूरी नहीं देने के पीछे या तो उन अधिकारियों के खिलाफ कोई जांच चल रही है या उन्हें प्रशासनिक हलकों में फिक्सर के रूप में जाना जाता है.  

सोनिया गांधी की तो हिंदू धर्म या सनातन धर्म में कोई आस्था : जनार्दन मिश्रा

रीवा  अपने बयानों से सबका ध्यान खींचने वाले बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार उन्होंने महाकुंभ में स्नान न करने को लेकर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित अन्य दिग्गज नेताओं पर तीखा प्रहार किया है. सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा, ” इन्हें तो सनातन धर्म से कोई लेना देना ही नहीं है. ये केवल चुनाव के समय ही कुर्ते के ऊपर से जनेऊ डालकर घूमते हैं.” चुनाव के समय बन जाते हैं सनातनी रीवा संसदीय क्षेत्र से सांसद जनार्दन मिश्रा ने राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी पर जमकर हमला बोलते हुए आगे कहा, ” राहुल गांधी को सनातन धर्म से कोई लेना देना नहीं है. ये तो केवल चुनाव के समय ही कुर्ते के ऊपर जनेऊ पहन कर घूमते हैं. रही बात सोनिया गांधी की तो उनकी हिंदू धर्म या सनातन धर्म में कोई आस्था है कि नहीं ये तो मुझे नहीं पता और प्रियंका गांधी का भी सनातन धर्म से कोई लेना देना नहीं है. ये लोग चुनाव के समय सनातनी बनने का ढोंग करते हैं.” ‘वोट बैंक से डरे राहुल और कांग्रेसी’ सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा आगे कहा, ” दुर्भाग्य की बात है कि ये लोग तो अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में भी नहीं गए थे. जहां एक तरफ पूरी दुनिया से लोग आकर महाकुंभ में स्नान कर रहे हैं. वहीं, इन्होंने महाकुंभ में शामिल होने का भी नहीं सोचा. लगता है कि वोट बैंक के डर से ये महाकुंभ स्नान करने नहीं गए.” ‘अखिलेश कर रहे गोल मोल बातें’ महाकुंभ में स्नान को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा दिए गए बयान पर भी जनार्दन मिश्रा ने पलटवार किया. उन्होंने कहा, ” गंगा मैया तो सब का पाप धोने वाली मां है. मां से पवित्र कोई और नहीं होता. गंगा मैया के बारे में उनका यह विचार हास्यपद और घृणित है. अगर इसकी चर्चा ना की जाए तो ज्यादा अच्छा होगा. उनके पास शब्दों की कमी है इस लिए वह बेचारे गोल मोल बाते कर रहे हैं.” ‘दुर्भागय है कि उन्हें कुंभ स्नान नहीं हुआ प्राप्त’ सांसद जनार्दन मिश्रा ने आगे कहा, ” बड़े दुर्भाग्य की बात है जो इस नेक कार्य में हिस्सा नहीं ले पाए. ये तो ब्रह्मा ने उनके मस्तिष्क में लिख दिया है कि उन्हें कुंभ स्नान का संयोग प्राप्त नहीं होगा, तो नहीं प्राप्त हुआ. रही बात राहुल गांधी की तो अगर वह सनातनी हैं और वह अपने आपको सनातनी मानते हैं, तो निश्चित रूप से उन्हें कुंभ में स्नान के लिए जाना चाहिए. राजीव गांधी अगर सनातनी थे और सनातन धर्म में उन्हें विश्वास था और ऐसा उनका दावा था तो राहुल गांधी को कुंभ स्नान के लिए जाना चाहिए था.”

विजयवर्गीय जी आप कहां जा रहे हैं? अमित शाह के फोन मिलाते ही दौड़े आए मंत्री; MP में सियासी पारा बढ़ा

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दो दिनों तक चले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के समापन समारोह में शामिल होने पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कार्यक्रम खत्म होने के बाद इंदौर के लिए रवाना हुए। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान उन्होंने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बारे में पूछा, तब उन्हें बताया गया कैलाश विजयवर्गीय इंदौर निकल चुके हैं। इसके बाद अमित शाह का कॉल कैलाश विजयवर्गीय के पास पहुंचा तब तक कैलाश भोपाल से काफी दूर निकल चुके थे। लेकिन अमित शाह का कॉल आने के तत्काल बाद वह वापस स्टेट हैंगर लौटे। इस दौरान उनकी अमित शाह से शॉर्ट मीटिंग भी हुई। बताया जा रहा है अमित शाह ने केंद्रीय राजनीति में उनसे मुलाकात कर नाराजगी की तमाम अटकलें को भी खारिज किया है और संदेश देने की कोशिश भी की है। कैलाश विजयवर्गीय को बुलाया अमित शाह मंगलवार शाम करीब 6 बजे स्टेट हैंगर पहुंचे। BJP के कार्यकर्ता उन्हें विदा करने के लिए इंतज़ार कर रहे थे। लेकिन गृह मंत्री अमित शाह जाने की बजाय VIP लाउंज में चले गए। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को ढूंढा। विजयवर्गीय, जो पहले BJP के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं, शाह के संगठनात्मक टीम का हिस्सा थे। जब शाह BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। अगस्त 2015 में शाह ने ही विजयवर्गीय को पश्चिम बंगाल का प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया था। उज्जैन के रास्ते में थे कैलाश विजयवर्गीय वहीं, जब अमित शाह का संदेश कैलाश विजयवर्गीय तक पहुंचा तो वह उज्जैन के रास्ते में थे। उन्हें एक पार्टी कार्यकर्ता की शादी में शामिल होना था। और फिर महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि का उत्सव मनाना था। वह भोपाल के बाहरी इलाके में पहुंच चुके थे। लेकिन शाह के फोन के बाद, उन्होंने अपने ड्राइवर को स्टेट हैंगर जाने का निर्देश दिया। इस बीच, शाह VIP लाउंज में विजयवर्गीय का इंतजार कर रहे थे। विजयवर्गीय के पहुंचते ही दोनों नेताओं ने लगभग 20 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत की। कैलाश विजयवर्गीय की होगी संगठन में वापसी इस मुलाकात के बाद, राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि विजयवर्गीय को प्रदेश BJP अध्यक्ष पद के लिए दावेदार माना जा रहा है। एक वरिष्ठ BJP पदाधिकारी ने बताया कि एमपी के दो नेता अमित शाह के करीबी माने जाते हैं कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा। मिश्रा 2023 के विधानसभा चुनाव हारने के बाद से सक्रिय नहीं हैं। और विजयवर्गीय, जिन्होंने बंगाल में BJP को एक विकल्प के रूप में स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई, राज्य में वापस आकर केवल कैबिनेट मंत्री बनने से असंतुष्ट हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अटकलें कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अगले महीने BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है। क्या विजयवर्गीय प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं या राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की? या फिर वह सिर्फ राजनीतिक फीडबैक ले रहे थे? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। और विजयवर्गीय भी इस बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं। जल्द होने वाले हैं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव GIS के बाद, राज्य का अगला बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम प्रदेश BJP अध्यक्ष का चुनाव है। वर्तमान अध्यक्ष वीडी शर्मा का कार्यकाल इस महीने की शुरुआत में पूरा हो गया है। एक पार्टी पदाधिकारी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जिन्हें प्रदेश अध्यक्ष चुनाव का प्रभार दिया गया है, 1 मार्च को भोपाल आ सकते हैं। वे 413 पार्टी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। ये प्रतिनिधि ही अगले प्रदेश BJP अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति मार्च के पहले हफ्ते के अंत तक होने की उम्मीद है। कई सवाल खड़े हो रहे अचानक हुई मुलाकात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई विजयवर्गीय को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है? क्या यह मुलाकात मध्यप्रदेश की राजनीति की दिशा बदल देगी? आने वाला समय ही इन सवालों का जवाब देगा। सरकार में शामिल होने से खुश नहीं? कथित तौर पर यह चर्चा होती है कि कैलाश विजयवर्गीय सरकार में खुद को असहज महसूस करते हैं। साथ ही कुछ चीजों को लेकर उनकी असहमति भी रहती है। यह जानकारी आलाकमान तक पहुंची थी। शायद यही वजह रही कि अमित शाह ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया है। ऐसे में अनुमान यह भी है कि उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि कैलाश विजयवर्गीय ने इस मुलाकात पर चुप्पी साध रखी है। मुलाकात के बाद बुधवार की सुबह उन्होंने महाकाल मंदिर जाकर अपने परिवार के साथ पूजा की है। 20 मिनट तक बंद कमरे में हुई बैठक बताया जा रहा है कि जब अमित शाह ने फोन किया तो उस समय विजयवर्गीय पार्टी कार्यकर्ताओं की शादी में शामिल होने और महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि उत्सव में भाग लेने के लिए उज्जैन की तरफ जा रहे थे। वह भोपाल के आउटर इलाके में पहुंच चुके थे लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री का फोन आने पर उन्‍होंने अपने ड्राइवर को वापस स्टेट हैंगर की ओर जाने का आदेश दिया। सूत्रों के मुताबिक, यहां पहुंचने के बाद दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बंद कमरे में बैठक हुई। अमित शाह के फोन से राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा बता दें कि अमित शाह की एक कॉल और अचानक से हुई इस मुलाकात ने राज्‍य के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। सूत्र बता रहे हैं कि शाह ने खुद विजयवर्गीय को स्‍पेशली फोन कॉल किया, जिसके बाद उन्‍होंने अपनी कार वापसी दिशा में दौड़ा दी और यह मीटिंग हुई। इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि जीआईएस खत्म होने के बाद मध्य प्रदेश में क्‍या कोई अगला बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होने वाला है।

राज्यसभा सदस्य बन सकते हैं अरविंद केजरीवाल, संजीव अरोड़ा छोड़ सकते हैं अपनी सीट

नई दिल्ली दिल्ली चुनाव में आप की शिकस्त के बाद अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक भविष्य को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे थे. अब सूत्रों से ये खबर आ रही है कि दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के लिए संजीव अरोड़ा राज्‍यसभा की सीट छोड़ सकते हैं. कहा जा रहा है कि दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल राज्यसभा में संजीव अरोड़ा की जगह ले सकते हैं. इस तरह केजरीवाल का पंजाब से राज्य सभा जाना तय माना जा रहा है. वहीं संजीव अरोड़ा लुधियाना वेस्ट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार होंगे. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव नहीं जीत पाए. केजरीवाल की हार के साथ दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की भी करारी हार हुई.  मीडिया के गलियारों में केजरीवाल के सियासी सफर पर अटकलें जारी हैं. इस बीच पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने दावा करते हुए कहा था कि केजरीवाल पंजाब के रास्ते राज्यसभा जा सकते हैं. केजरीवाल को लेकर कई तरह के दावे फिलहाल, इस पर भी अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. खबरें ये भी हैं कि आप अरोड़ा की जगह केजरीवाल को ऊपरी सदन भेजने की योजना पर विचार कर रही है. पहले केजरीवाल के लुधियाना विधानसभा सीट से चुनाव लडने की अटकलें थी. हालांकि आप सांसद मलविदर सिंह कंग ने इन अटकलों को खारिज कर दिया था. दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी और तमाम राजनीतिक दलों की तरफ से दावा किया जा रहा है कि केजरीवाल पंजाब के सीएम की कुर्सी भी अपने हाथों में ले सकते हैं. मतलब ये कि वो खुद सीएम बन सकते हैं. इन दावों और बयानों पर CM भगवंत मान ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है. ये संभव ही नही है. विपक्ष ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मुद्दे उठा रहा-आप आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को पंजाब से राज्यसभा भेजे जाने की चर्चाओं पर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि पार्टी के स्तर पर अभी तक इस प्रकार की कोई बात नहीं हुई है. विपक्ष ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मुद्दे उठा रहा है. विपक्ष के नेता विधानसभा के अंदर कोई मुद्दा उठा नहीं सकते ना ही कुछ बोल सकते हैं इसलिए इस प्रकार के मुद्दे गुमराह करने के लिए उठा रहे हैं. पंजाब सरकार टिकने वाली नहीं- बाजवा दिल्ली में आप की हार के बाद से ही सबकी निगाहें पंजाब सरकार पर टिकी हुई है. भगवंत मान की सरकार को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि यह सरकार टिकने वाली नहीं है, अगले चार से पांच महीनों में इस सरकार के साथ एकनाथ शिंदे प्रकरण होगा, जब महाराष्ट्र का विमान चंडीगढ़ में उतरेगा. आम आदमी पार्टी (AAP) के 32 विधायक संपर्क में हैं. बाजवा कह रहे हैं बीजेपी नेतृत्व रवनीत बिट्टू के जरिए सीएम मान के संपर्क में है और कई गुप्त बैठकें हो चुकी है. चुनाव लड़ेंगे संजीव अरोड़ा लुधियाना वेस्ट विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को अपना उम्मीदवार बनाया है. ये सीट आप विधायक गुरप्रीत गोगी के निधन के बाद खाली हुई है. संजीव अरोड़ा को विधानसभा चुनाव में उतारे जाने के बाद पंजाब में एक राज्यसभा सीट खाली हो जाएगी. संजीव अरोड़ा की जगह खाली होने वाली राज्यसभा सीट से अरविंद केजरीवाल राज्य सभा जा सकते हैं. कौन हैं संजीव अरोड़ा संजीव अरोड़ा पंजाब के बड़े बिजनेसमेन हैं. संजीव अरोड़ा का एक्सपोर्ट इंडस्ट्री में प्राइमरी बिजनेस है. उनके ऑफिस दूसरे देशों में भी है. संजीव अरोड़ा ने चंडीगढ़ रोड पर हैम्पटन बिजनेस पार्क और हैम्पटन होम्स को भी विकसित किया है. साल 2018 में उन्होंने फेमेला फैशन लिमिटेड कंपनी लॉन्च की और महिलाओं के कपड़ों के ब्रांड फेमेला की स्टेबलिश किया. इसके बाद साल 2019 में उन्होंने मेटल बिजनेस में भी कदम रखा. संजीव अरोड़ा कई सोशल और कल्चर संस्थाओं से भी जुड़े हैं. वह दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के गवर्निंग बोर्ड में हैं.

आतिशी ने बताया- पुरानी एक्साइज पॉलिसी में शराब के ठेकेदारों द्वारा गलत तरीके से मुनाफा कमाया जा रहा था, की जाये जांच

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को सीएजी (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट को लेकर चर्चा हुई, जिसमें दिल्ली सरकार की पुरानी एक्साइज पॉलिसी पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2021 तक की पुरानी एक्साइज पॉलिसी में भ्रष्टाचार और ब्लैक मार्केटिंग के कई मामले सामने आए हैं। आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने इस रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली सरकार की नई एक्साइज पॉलिसी की सफलता का दावा करते हुए भाजपा और अन्य संबंधित एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए। आतिशी ने बताया कि पुरानी एक्साइज पॉलिसी में शराब के ठेकेदारों द्वारा गलत तरीके से मुनाफा कमाया जा रहा था। रिपोर्ट के चैप्टर 5 में यह साफ तौर पर कहा गया कि शराब के ठेकेदार 28 प्रतिशत से ज्यादा भ्रष्टाचार कर रहे थे और शराब की वास्तविक मात्रा को कम दिखाकर ज्यादा मुनाफा कमा रहे थे। आतिशी ने आगे कहा कि इसके अलावा, पेज 59 में यह भी उजागर हुआ कि पुरानी पॉलिसी के तहत शराब की स्मगलिंग हो रही थी और दिल्ली सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा था। आतिशी ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार ने बार-बार इस मुद्दे को उठाया था और पुरानी पॉलिसी में भ्रष्टाचार को उजागर किया था। उन्होंने बताया कि शराब की कीमतों को प्रभावित किया जाता था और विभिन्न राज्य सरकारों के बीच शराब का अवैध कारोबार हो रहा था, जिससे दिल्ली सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा था। इसके बाद, आतिशी ने दिल्ली सरकार की नई एक्साइज पॉलिसी की सराहना करते हुए कहा कि यह अधिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार की रोकथाम के उपायों के साथ आई थी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पंजाब में इस पॉलिसी के लागू होने के बाद राज्य के राजस्व में 65 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, दिल्ली में इस पॉलिसी का सही तरीके से कार्यान्वयन नहीं हो पाया, जिसके कारण दिल्ली सरकार को लगभग 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। आतिशी ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में नई पॉलिसी का ठीक से कार्यान्वयन रोकने के पीछे भाजपा और उसके समर्थित अधिकारियों का हाथ है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल, सीबीआई और ईडी ने जानबूझकर इस पॉलिसी को लागू होने से रोका, जिससे 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। आतिशी ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि यह पॉलिसी अगर ठीक से लागू होती तो दिल्ली सरकार के खजाने में 8,900 करोड़ रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती थी। अब, सीएजी रिपोर्ट के आधार पर इस मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

कांग्रेस के सूत्र गांधी परिवार के महाकुंभ में जाने पर चुप! सोनिया गांधी को गंगा में स्नान करते हुए देखा गया था

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के द्वारा महाकुंभ को लेकर दिए गए बयान पर विवाद गहरा गया था। इसके बावजूद उनकी पार्टी के कई नेताओं ने पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद लोगों की नजर गांधी परिवार के अगले कदम पर जा टिकी है। आपको बता दें कि एक रैली के दौरान खरगे ने यह सवाल उठाया था कि क्या गंगा में पवित्र स्नान करने से देश में गरीबी समाप्त हो सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था। उनका दावा था कि उन्होंने भाजपा नेताओं की आलोचना के लिए ऐसे बयान दिए थे। उनके बयान के बीच INDIA गठबंधन के सहयोगी अखिलेश यादव और उनकी पत्नी ने सबसे पहले कुंभ में स्नान किया। हाल ही में कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह, उनके बेटे, राजस्थान कांग्रेस के कद्दावर नेता सचिन पायलट सहित कई कांग्रेसी स्नान करने के लिए प्रयागराज की यात्रा कर चुके हैं। दिग्विजय सिंह और उनके बेटे, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और सचिन पायलट ने कुंभ में जाकर स्नान किया। इन सभी नेताओं को यह समझ है कि ‘हिंदू आस्था’ एक ऐसा विषय है जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान जो गलती हुई थी, उसे दोहराया नहीं जा सकता। आपको बता दें कि कांग्रेस ने इसे सरकारी आयोजन कहकर छोड़ दिया था। हालांकि पार्टी ने बाद में मंदिर जाने का दावा किया था, लेकिन अब तक कोई प्रमुख नेता अयोध्या में नहीं दिखाई दिए हैं। कांग्रेस के सूत्र गांधी परिवार के महाकुंभ में जाने पर चुप हैं। 2001 में सोनिया गांधी को गंगा में पवित्र स्नान करते हुए देखा गया था। उस समय भाजपा उनके धर्म और उनकी जाति को लेकर सवाल उठाती थी। आपको बता दें कि इंदिरा गांधी हिंदू थीं और हमेशा ‘रुद्राक्ष’ पहनती थीं।

केजरीवाल को झटके पर झटका, तीन मौजूदा पार्षद बीजेपी में शामिल हुए, अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने पार्टी की सदस्यता दिलवाई

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की जीत के बाद, पार्टी ने राजधानी में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इस प्रयास के तहत, आम आदमी पार्टी (AAP) के तीन मौजूदा पार्षदों ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इन पार्षदों का पार्टी में स्वागत किया। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इन तीनों पार्षदों को औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। यह घटनाक्रम दिल्ली की राजनीति में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है, जिससे एमसीडी (नगर निगम) में भी बीजेपी के प्रभाव को मजबूती मिल सकती है। बीजेपी में शामिल हुए आम आदमी पार्टी के जो पार्षद में एंड्रयूज गंज से पार्षद अनीता बसोया, आरके पुरम से पार्षद धर्मवीर और चपराना वार्ड 152 से पार्षद निखिल शामिल हैं। दिल्ली विधानसभा में जीत के बाद अब बीजेपी की नजर एमसीडी चुनाव पर भी हैं। बता दें कि इसी साल अप्रैल में दिल्ली नगर निगम के मेयर का चुनाव होना है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अब एमसीडी में भी बीजेपी का पलड़ा भारी होगा. विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 48 सीटें हासिल की हैं तो वहीं AAP के खाते में 22 सीटें आई हैं। अब एमसीडी पर बीजेपी की नजरें आम आदमी पार्टी के जो पार्षद बीजेपी में शामिल हुए हैं उनमें एंड्रयूज गंज से पार्षद अनीता बसोया, आरके पुरम से पार्षद धर्मवीर और चपराना वार्ड 152 से पार्षद निखिल शामिल हैं. दिल्ली विधानसभा में प्रचंड जीत के बाद अब बीजेपी की नजरें एमसीडी पर भी हैं. इसी साल अप्रैल में दिल्ली नगर निगम के मेयर का चुनाव होना है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अब एमसीडी में भी बीजेपी का पलड़ा भारी होगा. विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 48 सीटें हासिल की हैं तो वहीं AAP के खाते में 22 सीटें आई हैं. नवंबर 2024 में हुआ था मेयर का पिछला चुनाव मेयर का पिछला चुनाव नवंबर 2024 में हुआ था लेकिन कार्यकाल केवल पांच महीने का है. तब AAP के महेश खिंची बीजेपी के किशन लाल से केवल तीन वोटों से ही जीत पाए थे. मेयर चुनाव में कुल 263 वोट डाले गए थे जिनमें महेश खिंची को 133 और किशन लाल को 130 वोट मिले थे जबकि दो वोट अवैध हो गए थे. चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए 8 AAP विधायक दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले 8 विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे. इन विधायकों ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दिया था और अगले ही दिन सभी ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और प्रदेश प्रभारी बैजयंत पांडा की मौजूदगी में 8 विधायकों ने पार्टी जॉइन की थी.

बाड़मेर के इस नेता को मिला MP का प्रभार, कांग्रेस ने संगठन में किया बड़ा बदलाव

भोपाल मध्य प्रदेश कांग्रेस में बदलाव का दौर जारी है. अब प्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़ा बदलाव हुआ है. भंवर जितेंद्र सिंह को प्रभारी पद से हटाया गया है. उनकी जगह हरीश चौधरी मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी बनाए गए हैं. भंवर जितेंद्र सिंह के पास दो राज्यों की जिम्मेदारी थी. जितेंद्र सिंह मध्य प्रदेश के अलावा असम के प्रभारी थे. कांग्रेस ने 13 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में नए प्रभारी नियुक्ति किए हैं. हरीश चौधरी राजस्थान में गहलोत सरकार में मंत्री रह चुके हैं. वर्तमान में बाड़मेर जिले की बायतु विधानसभा क्षेत्र से राजस्थान विधान सभा के MLA हैं. हरीश चौधरी को गांधी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है. हरीश चौधरी मध्य प्रदेश में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के साथ मिलकर कांग्रेस संगठन का काम देखेंगे.   पटवारी ने भाजपा पर निशाना साधा इधर, भोपाल में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भाजपा पर निशाना साधा. MP करप्शन के मामले में टॉप 3 में है. अधिकारियों के 300 से अधिक प्रकरण लंबित है. 21 साल पुराने मामले पर उनके और उनके परिवार पर FIR कर दी है. हेमंत कटारे हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे. मेरा सवाल मोहन यादव से है. क्या एक ही ऐसा केस है पूरे MP में ऐसा? ऐसे कितने ही एमपी में कैसे हैं और यह कैस तो सिविल का है. कांग्रेस के नेताओं पर दबाव बनाने के लिए FIR दर्ज कराई जा रही है. सौरभ शर्मा केस कैसे रफा दफा हो जाए सरकार उसमें जुटी है. कांग्रेस ने गिनाए घोटाले पटवारी ने कहा कि BJP के नेता की बैलेंस शीट बढ़ी है. चोरी कलंकित, करप्शन आप करो FIR कांग्रेस के नेता पर कर रहे हो. परिवहन घोटालों पर ध्यान दो और लोकायुक्त में जांच चल रही उसे पूरा करो. जांच की जाए तो मंत्रालय में बैठे सभी मंत्री जेल में चले जाएंगे. पटवारी ने नल जल योजना को लेकर कहा कि मैं पत्रकारों को चुनौती देता हूं जहां भी 100 प्रतिशत योजना पहुंची हो तो मैं उस पत्रकार ओर व्यक्ति का स्वागत करूंगा. मुख्यमंत्री के विधानसभा में, मंत्री संपत्तियां उईके के विधानसभा हो या किसी विधायक के विधानसभा का एक भी गांव ऐसा बता दो जहां नल-जल योजना से पानी मिल रहा हो. नल जल योजना में 65 प्रतिशत का घोटाला है. 

अमेरिका से आई फ्लाइट में हथकड़ी पहने भारतीयों को देख भड़कीं उमा भारती

भोपाल अमेरिका से अवैध भारतीय अप्रवासियों को बेड़ियों में जकड़कर भारत भेजा गया था. वरिष्ठ भाजपा नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस तरीके को शर्मनाक और क्रूर बताते हुए शनिवार को अमेरिकी सरकार पर निशाना साधा. दरअसल 104 अवैध भारतीय अप्रवासियों को लेकर एक अमेरिकी सैन्य विमान 5 फरवरी को अमृतसर पहुंचा, यह अवैध अप्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के तहत डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा निर्वासित भारतीयों का पहला ऐसा जत्था था. बेड़ियों में जकड़कर लाए गए भारतीय दावा किया कि पूरी यात्रा के दौरान उनके हाथ और पैर बेड़ियों में जकड़े रहे और अमृतसर में उतरने के बाद ही उनकी बेड़ियां खोली गईं. इस पर उमा भारती भड़क गईं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लगातार तीन पोस्ट किए. जिसमें उन्होंने लिखा कि, ”जिस तरह से अवैध भारतीय अप्रवासियों को हथकड़ी और बेड़ियों में जकड़कर अमेरिका से वापस भेजा गया, वह बेहद शर्मनाक और मानवता पर कलंक है. यह निर्दयता एवं हिंसक मनोवृति रेड इंडियंस के एवं अमेरिका में बसे हुए अफ्रीकी मूल के लोगों के मामले में अमेरिका की सरकारों ने कई बार दिखाई है.” ‘ऐसी क्रूरता इस भूमंडल पर महापाप’ उन्होंने लिखा, ”जब उनको हवाई जहाज से ही भेज रहे थे, हथकड़ी बेड़ी में उनको जकड़ कर रखना, अमेरिकी शासन की क्रूरता एवं अमानवीयता को दर्शाता है. अवैध तरीके से किसी देश में घुसना अपराध है, उसकी सजा के प्रत्येक देश में अपने कानून के अनुसार प्रावधान हैं. किंतु ऐसी क्रूरता इस भूमंडल पर महापाप है.” उमा भारती ने यह ट्वीट पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी टैग किए हैं. आज अप्रवासियों को लेकर अमृतसर आ सकती है एक और फ्लाइट बता दें कि 119 अवैध अप्रवासियों को लेकर एक और अमेरिकी विमान के शनिवार को अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरने की संभावना है. यह ट्रंप सरकार द्वारा निर्वासित भारतीयों का दूसरा ऐसा जत्था है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विमान के रात करीब 10 बजे हवाई अड्डे पर उतरने की उम्मीद है. PM मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बीच हुई ये कार्रवाई बता दें यह प्रक्रिया ऐसे समय में की जा रही है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका की यात्रा के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर आव्रजन सहित कई अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की. पीएम मोदी ने एक संयुक्त मीडिया सम्मेलन के दौरान सत्यापित भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी में सहयोग की भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की, लेकिन साथ ही प्रवासियों का शोषण करने वाले मानव तस्करी नेटवर्क से निपटने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

मैंने रेल यात्रियों से जुड़ी समस्याएं, और कई मुद्दे उठाए थे, उन पर वित्त मंत्री मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को एक वीडियो जारी कर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा राज्यसभा में उन पर किए गए कटाक्ष पर अपना पक्ष रखा है। मैंने अपने भाषण में रेल यात्रियों से जुड़ी समस्याएं, मध्यम वर्ग की वित्तीय चुनौतियां, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए जा रहे शुल्क और टैरिफ, और गिरता हुआ रुपया जैसे कई मुद्दे उठाए थे। उन पर जवाब न देते हुए, उन्होंने टैक्स वाले मुद्दे पर मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया। राघव चड्ढा ने वीडियो में कहा, “गुरुवार को राज्यसभा में बजट पर बात करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मेरे बयान पर काफी कटाक्ष किया और यह भी कहा कि मैंने सदन को गुमराह करने की कोशिश की। जब मैंने उनके सवालों का जवाब देने की अनुमति मांगी तो मुझे अनुमति नहीं दी गई, इसलिए मैंने सोचा कि इस वीडियो के माध्यम से सीधे वित्त मंत्री से बात करूं और सच्चाई स्पष्ट करने की कोशिश करूं। केंद्रीय बजट 2025 पर चर्चा के दौरान मैंने कई मुद्दे उठाए, जैसे कि रेल यात्रियों से जुड़ी समस्याएं, मध्यम वर्ग की वित्तीय चुनौतियां, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए जा रहे शुल्क और टैरिफ और गिरता हुआ रुपया। वित्त मंत्री ने इन मुद्दों पर कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन हां, उन्होंने मेरे द्वारा बताए गए आयकर छूट के उदाहरण पर कई बयान दिए। सबसे पहले, मैं यह कहना चाहूंगा कि मैंने जो कुछ भी कहा था, मैं आज भी उस पर पूरी तरह से कायम हूं।” उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही यह 12 लाख रुपये की कर छूट कर कटौती नहीं है। यह सिर्फ और सिर्फ कर छूट है, जिसका मतलब है कि अगर आप एक वित्तीय वर्ष में 12 लाख रुपये से ज्यादा कमाते हैं, तो आपको अपनी पूरी आय पर आयकर देना होगा। वित्त मंत्री ने इस अवधारणा को समझाने के लिए मेरे द्वारा दिए गए उदाहरण को तकनीकी रूप से जटिल बनाने की कोशिश की और इसमें सीमांत कर छूट की अवधारणा को जोड़कर यह साबित करने की कोशिश की कि मेरा उदाहरण गलत था। मैं आपसे सीधे पूछना चाहता हूं वित्त मंत्री जी, क्या यह सच नहीं है कि अगर कोई व्यक्ति 12 लाख रुपये से ज्यादा कमाता है, तो उसे अपनी पूरी आय पर कर देना होगा?” उन्होंने कहा, “आप 12 लाख 75 हजार रुपये तक सीमांत कर छूट दे रही हैं। आप मुझे बताएं कि अगर कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में 13 लाख रुपये कमाता है, तो क्या उसे अपने स्लैब के अनुसार 13 लाख रुपये की पूरी आय पर आयकर देना होगा या नहीं? या उसे 13 लाख रुपये में से 12 लाख रुपये घटाकर कर देना होगा? सही उत्तर यह है कि उसे पूरे 13 लाख रुपये पर आयकर देना होगा। मान लीजिए कोई व्यक्ति सालाना 12 लाख 76 हजार रुपये कमाता है, तो उसे पूरे 12 लाख 76 हजार रुपये पर आयकर देना होगा, न कि सिर्फ 12 लाख रुपये से ऊपर कमाए गए 76 हजार रुपये पर। इस टैक्स छूट की अवधारणा को समझाने के लिए मैंने एक उदाहरण दिया था और मैं आज भी उस पर कायम हूं कि अगर आप 12 लाख रुपये में से एक रुपया भी अतिरिक्त कमाते हैं, तो आपको अपनी पूरी आय पर आयकर देना होगा।” आप सांसद ने कहा, “वित्त मंत्री ने मेरे उस बयान को लेकर मुझ पर काफी व्यक्तिगत हमले भी किए। मेरे बारे में व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति मेरे मन में बहुत आदर और सत्कार है। वह अनुभव, पद और उम्र में मुझसे काफी बड़ी हैं। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि मुझे उम्मीद है कि भविष्य में वित्त मंत्री इस तरह के व्यक्तिगत बयान देने से बचेंगी और सरल टैक्स अवधारणाओं को सामने लाने के लिए दिए गए उदाहरणों को तकनीकी रूप से तोड़-मरोड़ कर जनता के सामने पेश करने की कोशिश नहीं करेंगी।”

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