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एमपी में खाद की कमी पर कांग्रेस का हल्ला, कृषि मंत्री ने यूक्रेन-रूस युद्ध को ठहराया जिम्मेदार

Congress protests over fertilizer shortage in MP, Agriculture Minister blames Ukraine-Russia war भोपाल ! किसानों को खाद उपलब्ध कराने का दावा खोखला साबित हो रहा है. घंटों कतार में लगने के बावजूद पर्याप्त खाद नहीं मिल रही है. बुआई के मौसम में खाद की किल्लत जी का जंजाल बन गयी है. सीहोर जिला मुख्यालय स्थित कृषि उपज मंडी में खाद के लिए किसानों की भीड़ देखी गई. आधार कार्ड की फोटोकॉपी लिये किसान कतारबद्ध नजर आए. किसानों का दर्द है कि सुबह से लाइन में लगने के बावजूद खाद नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि खाद के लिए जद्दोजहद करने का अंदेशा था. इसलिए घर से रोटी बांधकर साथ लाए थे. भूख लगने पर पेड़ के नीचे बैठकर खाया है. नाराज किसानों ने सरकार के दावे पर सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि सरकार हर साल ऐलान करती है कि प्रदेश में खाद की समस्या नहीं होने दी जायेगी. लगता है कि अधिकारियों को मुख्यमंत्री के आदेश की परवाह नहीं है. धूप में भूखे प्यास खड़े रहने के बावजूद खाद नहीं मिल रही है. खाद बांटने वाले कर्मचारी-अधिकारियों की डांट भी खाने को किसान मजबूर हैं. खाद की किल्लत पर कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने सफाई दी है. उन्होंने माना कि यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण खाद आने में देरी हो रही है. कृषि मंत्री ने खाद की कमी के पीछे यूक्रेन-रूस युद्ध को कारण बताया. खाद की किल्लत पर कांग्रेस हमलावर प्रदेश में खाद संकट पर विपक्ष लगातार हमलावर है. राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खाद संकट का जिम्मेदार केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री मोहन यादव को ठहराया है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि 1993 से लेकर 2003 तक कांग्रेस की सरकार थी. उस दौरान खाद के लिए किसानों को परेशान नहीं होना पड़ा. खाद की कालाबजारी नहीं होने का भी उन्होंने दावा किया. आज खाद की ब्लैकमार्केटिंग और नकली खाद मामले में बीजेपी से जुड़े नेताओं का नाम सामने आ रहा है.

बीजेपी महाराष्ट्र में ओबीसी, एससी और एसटी पर ही पूरा जोर लगाएगी

 मुंबई लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान कांग्रेस, सपा, आरजेडी और शरद पवार की एनसीपी जैसी पार्टियों ने प्रचार किया था कि एनडीए इसलिए 400 सीटें मांग रहा है ताकि संविधान बदल सके। इसके अलावा आरक्षण को खत्म किया जा सके। इस प्रचार ने असर भी दिखाया और माना जाता है कि इसी के चलते भाजपा 240 सीटों पर ही ठहर गई और एनडीए दलों के समर्थन से ही सरकार बन सकी। अब महाराष्ट्र में इसी दांव को भाजपा पलटने की तैयारी में है।  भाजपा और एनडीए सरकारों के मुख्यमंत्रियों की मीटिंग हो रही है। इसमें पीएम नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। इस मीटिंग का एजेंडा ही है कि कैसे आपातकाल के 50 साल पूरे होने को संविधान हत्या के प्रयास के तौर पर याद दिलाया जाए। यही नहीं महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी भाजपा, एकनाथ शिंदे और अजित पवार की एनसीपी इस मसले को उठाने वाले हैं। इसके तहत घर घर संविधान अभियान चलाया जाएगा। इसके माध्यम से संविधान लागू होने के 75 वर्ष का स्मरण किया जाएगा। दरअसल ‘घर-घर संविधान’ अभियान के माध्यम से भाजपा चाहती है कि विपक्ष के संविधान बदलने वाले नैरेटिव की काट की जा सके। विपक्ष के इस नैरेटिव का सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र और यूपी जैसे बड़े राज्यों में ही हुआ था। इस अभियान के माध्यम से एनडीए के दल चाहते हैं कि महाराष्ट्र के 25 फीसदी वोटों को साधा जा सके। राज्य में 16 फीसदी दलित आबादी है, जबकि 9 फीसदी संख्या आदिवासियों की है। सूबे में 29 विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति और 25 सीटें जनजाति के लिए आरक्षित हैं। भाजपा को लगता है कि ये सीटें पूरा गेम पलटने का दम रखती हैं। भाजपा सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के सुझाव पर ही ‘घर-घर संविधान’ अभियान शुरू किया जाएगा। वह चाहते हैं कि इस अभियान के जरिए यह संदेश दिया जाए कि भाजपा कैसे संविधान को लेकर तत्पर है। ओबीसी, एससी और एसटी पर ही पूरा जोर भाजपा नेताओं का कहना है कि यह अभियान दलितों, ओबीसी और जनजाति समुदाय के बीच अच्छा संदेश देगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस एवं उसके सहयोगी दलों ने इन्हीं समुदायों के बीच 2024 में भ्रम पैदा कर दिया था। महाराष्ट्र में भाजपा के दलित नेता धर्मपाल मेश्राम ने कहा कि इस बार लोकसभा चुनाव जैसी स्थिति नहीं होगी। हमारे अभियान का लाभ होगा और दलित मतदाता इस बार भाजपा के साथ फिर से आएंगे। क्या है 54 सीटों वाला प्लान, जिससे गेम पलटने की उम्मीद इस तरह भाजपा 54 आरक्षित सीटों पर फोकस कर रही है, जहां से गेम पलट सकता है। इसके अलावा ओबीसी वर्ग पर भी फोकस है क्योंकि मराठा आरक्षण आंदोलन के चलते उनके जरिए ही नुकसान की भरपाई की उम्मीद है। हरियाणा में भी भाजपा ने सामाजिक समीकरण का माइक्रो मैनेजमेंट करके जीत हासिल की थी। माना जा सकता है कि कुछ ऐसा ही प्रयास वह महाराष्ट्र में भी करना चाहती है।

कांग्रेस ने खाद संकट पर घेरा, दिग्विजय सिंह-जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से मांगे जवाब

Congress surrounded on fertilizer crisis, Digvijay Singh-Jitu Patwari sought answers from CM Mohan Yadav मध्य प्रदेश में में चल रहे खाद संकट को लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने मौजूदा सरकार पर बड़ा हमला बोला है. दोनों नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनसे कुछ सवाल भी किए हैं. मध्य प्रदेश में खाद संकट को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार (17 अक्तूबर) को भोपाल में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य में चल रहे खाद संकट को लेकर कांग्रेसी नेताओं ने मौजूदा सरकार पर बड़ा हमला बोला और उनसे कुछ सवाल भी किए. उन्होंने कहा, देश में डीएपी (खाद) की किल्लत सरकार की नीतियों के कारण है. वर्तमान में देश में 100 लाख टन डीएपी (खाद) की आवश्यकता है, जिसमें से देश में 4 लाख टन प्रति माह का उत्पादन होता है. इसके लिए कच्चा माल भी आयात करना पड़ता है. आयात में समस्या से 20 फीसदी करीब कम उत्पादन हुआ है, बाकी लगभग 5 लाख टन डीएपी का आयात होता, तब जाकर हमारी आवश्यकता पूरी हो रही है. इस साल देश में अप्रैल से अगस्त तक 16 लाख टन करीब डीएपी आया था, जबकि पिछले साल 32.5 लाख टन का आयात हुआ था, जो 16.5 लाख टन यानी 50 फीसदी कम है. मध्य प्रदेश में डीएपी की 9 लाख टन से ज्यादा की जरूरत है, जिसके एवज में अभी तक मध्य प्रदेश में लगभग 4.5 लाख टन डीएपी आया है, बाकी 5 से 6 लाख टन की कमी है. कांग्रेस नेताओं ने क्या कहा?उन्होंने कहा, अगले 15 दिन मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. बड़े रकबे में बुवाई एक साथ शुरू होगी. सरकार डीएपी की जगह एनपीके (खाद) डालने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. डीएपी में 18 फीसदी नाइट्रोजन और 46 फीसदी फास्फोरस होता है. यदि डीएपी की जगह एनपीके देते हैं तो 6 लाख टन डीएपी की कमी को पूरा करने के लिए 9 लाख टन एनपीके की जरुरत रहेगी. जबकि अभी तक कुल 3 लाख टन डीएपी आया है, जो पिछले साल से 1 लाख टन कम है. मतलब 350 रैक सिर्फ एनपीके चाहिए. यह इस बात का प्रमाण है कि मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री के जिले मुरैना में 24,500 मीट्रिक टन डीएपी की डिमांड है. इसके मुकाबले किसानों के लिए महज 8,247 मीट्रिक टन डीएपी ही उपलब्ध है. मतलब कृषि मंत्री के क्षेत्र में 33 फीसदी खाद आपूर्ति हुई है. 25 सितम्बर को प्रकाशित खबर के अनुसार जब कृषि मंत्री के क्षेत्र के ये हाल हैं तो बाकी जगह कितनी उपलब्धता हुई होगी इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है. पहले बात तो आयात 50 फीसदी कम हुआ, दूसरा मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी डिमांड वास्तविक जरूरत से कम भेजी, तीसरा अग्रिम भंडारण पिछले साल की तुलना में इस साल 3.51 लाख मीट्रिक टन डीएपी का कम हुआ. सरकार की एपीसी की संभाग स्तर की पिछली बैठकों, कलेक्टरों के स्टेटमेंट देखिये वो सब कह रहे हैं कि डीएपी की जगह दूसरे उर्वरक डाले तो सरकार बताये कि किसान कौन से उर्वरक डाले और उनकी गुणवत्ता की गारंटी कौन लेगा? किसानों तो डीएपी की ही मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, पूर्व में खाद की उपलब्धता सहकारी समितियों के माध्यम से कराई जाती थी, जिससे किसानों को उनके गांव में गुणवत्ता युक्त शासकीय दाम पर बिना किसी परेशानी के खाद उपलब्ध होता था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अपने लोगों को उपकृत करने के लिए खाद की लगभग आधी मात्रा में खुले बाजार में बिक्री की छूट दे रखी है, जिससे किसानों को शहर आकर महंगे दाम में खाद खरीदना पड़ता है. वहीं खुले बाजार में बिक्री से खाद के साथ अन्य सामग्री जैसे अन्य उर्वरक, कीटनाशक दवाई, टॉनिक, बीज, सल्फर, जिंक के अलावा ऐसे उत्पाद जो किसानों की आवश्यकता नहीं है उन्हें भी मजबूरन टैग करके खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है. सरकार खोखले दावे करती है कि किसानो को जीरो ब्याज पर लोन उपलब्ध कराएंगे, लेकिन जब किसानों को साख समितियों से खाद नहीं मिलेगा, नगद ऋण नहीं मिलेगा तो फिर कैसे जीरो ब्याज का फायदा किसानों को मिलेगा. अभी तो उल्टा किसान की जेब से अतिरिक्त पैसा जा रहा है. मध्य प्रदेश में रवि की फसल के लिए 22 लाख टन यूरिया की जरुरत है, जबकि अभी 10.12 लाख मीट्रिक टन यूरिया की उपलब्धता है. जैसे कि अक्टूबर माह में 4.5 लाख टन यूरिया की मांग है, लेकिन 2 लाख 90 हजार टन ही उपलब्ध हो पाया. आगामी माह में भी इस कमी की पूर्ति होना असंभव है, जिसके कारण अगला माह भी किसानों के लिए परेशानी का सबब बनेगा. सरकार द्वारा नेनो यूरिया और नेनो डीएपी का बड़े स्तर पर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार दानेदार यूरिया और दानेदार डीएपी के विकल्प के रूप में किया जा रहा है, जबकि नेनो यूरिया और नेनो डीएपी को पिछले साल फसलों पर डालने पर वो प्रभाव नहीं देखा गया जो दानेदार यूरिया और डीएपी का होता है. कांग्रेस ने सरकार से पूछे ये सवाल डीएपी की उपलब्धता के सम्बन्ध में सरकार की क्या योजना है.क्या सरकार अन्य उर्वरकों से डएपी के तत्वों की पूर्ती करना चाहती है. इसके सम्बन्ध में सरकार की क्या कार्य योजना है.क्या अन्य उर्वरकों से पूर्ती हेतु सरकार द्वारा किसानों के बीच में जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया है.सरकार द्वारा अग्रिम भंडारण योजना के अंतर्गत यूरिया डीएपी का अग्रिम भंडारण क्यों नहीं कराया गया. यदि आनन-फानन में सरकार द्वारा उर्वरकों की उपलब्धता की जाती है तो गुणवत्ता की सुनिश्चितत्ता कैसे होगी. अगले 15 दिनों में गेंहू, चना, सरसों, आलू एवं प्याज की लगभग बुवाई हेतु किसान अपनी तैयारियों में लगा हुआ है जिसमे लगभग 90 प्रतिशत यानी लगभग 9 लाख मीट्रिक टन डीएपी की आवश्यकता है. जिसकी समय पर पूर्ती नहीं होने पर फसलों का उत्पादन घटना तय है इसकी जवाबदेही किसकी होगी. मध्य प्रदेश के सभी जिलों में लम्बे समय से एक ही जगह पर जमे हुए जिम्मेदार अधिकारियों के कारण गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया प्रभावित हो चुकी है और नकली और अमानक आदान खाद, बीज, दवाई की बिक्री को बढ़ावा देकर किसानों … Read more

महाकाल मंदिर में सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे की पूजा: नियमों की अनदेखी पर सवाल

Worship of CM Eknath Shinde’s son in Mahakal temple: Question on ignoring rules उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आम और खास सभी के लिए एक ही नियम का दावा किया जाता रहा है, लेकिन वीआईपी कल्चर और प्रभावशाली लोगों के नियम तोड़ने के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं. अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने परिवार सहित गर्भगृह में पूजा अर्चना कर मंदिर के नियम को तोड़ा है. हालांकि, अधिकारियों ने इस मामले में बिना अनुमति दर्शन के लिए गर्भगृह में जाने का दावा किया है. गुरुवार (17 अक्तूबर) की शाम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और मुंबई से सांसद श्रीकांत शिंदे परिवार के साथ महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने वीआईपी पॉइंट के जरिए दर्शन के लिए अधिकारियों से आग्रह किया. इसके बाद महाकालेश्वर मंदिर समिति के बड़े अधिकारी के पीए के साथ श्रीकांत शिंदे का परिवार गर्भगृह तक पहुंच गया. इस दौरान उनके साथ उज्जैन जिले के एक बीजेपी विधायक भी मौजूद रहे. यहां सभी ने उस समय गर्भगृह में जाकर पूजा अर्चना की, जब भगवान महाकाल का भांग से श्रृंगार चल रहा था. इस घटना के बाद हंगामा मच गया है. कांग्रेस के विधायक महेश परमार ने मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा, “भगवान के दरबार में भी बीजेपी सरकार आम और खास के बीच मतभेद कर रही है. यह न्यायोचित नहीं है.” महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष ने क्या कहा?महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष और उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर में नियम सबके लिए बराबर है. उन्होंने कहा, किसी को भी अनुमति नहीं दी गई है कि वह गर्भगृह में जाकर पूजा अर्चना करे. प्रोटोकॉल के तहत जिन्हें अनुमति है, केवल वही प्रवेश कर सकते हैं. इनमें महामंडलेश्वर, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित वीआईपी शामिल हैं. महाकालेश्वर मंदिर समिति के प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ का भी कहना है कि उन्होंने भी किसी को गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं दी थी. महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश बंद हुए कई महीने हो गए हैं. महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं. ऐसे में सभी को गर्भगृह से दर्शन कराया जाना मुश्किल है. यदि महाकालेश्वर मंदिर समिति गर्भगृह दर्शन शुरू करवा देती है, तब भी 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को अंदर से दर्शन कराया जाना मुश्किल है. जबकि गर्भगृह में जब दर्शन शुरू होते हैं तो बाहर से श्रद्धालुओं के दर्शन में परेशानी होती है. इस वजह से मंदिर समिति ने गर्भगृह दर्शन को पूरी तरह बंद कर रखा है. पहले 750 रुपये की रसीद कटवा कर श्रद्धालुओं को अंदर प्रवेश दिया जाता था. ऐसा नहीं है कि महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में जाकर पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने नियम तोड़ा है. पहले भी कई बार इस तरह की तस्वीरें आ चुकी हैं. मंदिर समिति द्वारा आम लोगों के गर्भगृह में प्रवेश की कोशिश करने पर भी एफआईआर दर्ज कर दी जाती है, लेकिन रसूखदार लोगों पर अभी तक महाकालेश्वर मंदिर समिति का नियम पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहा है. यही वजह है कि शिव भक्तों में भी मंदिर समिति की दोहरी नीति को लेकर आक्रोश है. महाकालेश्वर मंदिर के भक्त राजेश प्रजापति का कहना है कि मंदिर में सभी के लिए नियम बराबर होना चाहिए.

भाजपा पार्टी अब महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के साथ अपनी जीत का लक्ष्य रख रही है, महाराष्ट्र में क्या है रणनीति

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के तारीखों के ऐलान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी सियासी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में मिली सफलता ने भाजपा के अंदर अतिरिक्त उत्साह भर दिया है और पार्टी अब महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के साथ अपनी जीत की कहानी को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रख रही है। भाजपा के लिए यह चुनाव न केवल राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल है, बल्कि राज्य में उसकी स्थायी पकड़ को बनाए रखने का भी अवसर है।   भाजपा कैसे साधेगी गठबंधन की बिसात भाजपा इस बार महाराष्ट्र में शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतर रही है। महायुति गठबंधन के रूप में ये तीनों दल एकजुट होकर 288 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का लक्ष्य साधेंगे। हालांकि, भाजपा की रणनीति गठबंधन के बावजूद राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनने की है और इस दिशा में वह 155 से 158 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करने की योजना बना रही है। सीटों के बंटवारे और सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाए रखना भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी लेकिन इसके लिए पार्टी ने गहन रणनीतिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। उपेक्षित जातियों पर फोकस और माइक्रो मैनेजमेंट महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा के लिए कई मुद्दे निर्णायक साबित हो सकते हैं। मौजूदा वक्त में मराठा आरक्षण राज्य में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा है, महायुति गठबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। चूंकि भाजपा इस गठबंधन का हिस्सा है इसलिए मराठा आरक्षण का समाधान निकालने में उसकी भूमिका अहम होगी। इसके अलावा, महंगाई, किसान संकट, जल संकट, और रोजगार के अवसरों की कमी जैसे मुद्दे भी चुनावी समीकरण को प्रभावित करेंगे। भाजपा इन समस्याओं का समाधान पेश कर मतदाताओं का समर्थन हासिल करना चाहेगी। क्या मिलेगा संगठनात्मक ताकत और संघ का सहयोग भाजपा के चुनावी अभियान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हरियाणा चुनाव में संघ की बढ़ी हुई भूमिका ने भाजपा को सफलता दिलाई, और अब महाराष्ट्र में भी पार्टी संघ की जमीनी संगठनात्मक ताकत का भरपूर उपयोग करने जा रही है। संघ की राज्य में मजबूत पकड़ होने के कारण भाजपा को विश्वास है कि इसे विधानसभा चुनाव में लाभ मिलेगा। इसके अलावा चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव को कार्यकर्ताओं के साथ संवाद स्थापित करने और उन्हें चुनावी तैयारी के लिए प्रेरित करने का जिम्मा सौंपा गया है। केंद्र की योजनाओं से भाजपा को उम्मीद भाजपा को केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई कई योजनाओं से भी उम्मीदें हैं। पार्टी ने राज्य में अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को सुलझाने के लिए योजनाएं शुरू की हैं जिनमें किसानों के लिए सब्सिडी, जल प्रबंधन, और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है। भाजपा की कोशिश होगी कि इन योजनाओं को लेकर वह जनता के बीच विश्वास बनाए रखे और मतदाताओं का समर्थन हासिल करे। कैसा रहा भाजपा का अबतक का चुनावी प्रदर्शन महाराष्ट्र में भाजपा का पिछले एक दशक का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा है। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शिवसेना से अलग होकर 122 सीटें जीतीं और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी। इसके बाद शिवसेना और भाजपा ने मिलकर सरकार बनाई। हालांकि, 2019 के चुनाव के बाद शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद की अदला-बदली को लेकर भाजपा से अलग होकर महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के साथ गठबंधन किया। इसके बाद 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत ने एमवीए सरकार को गिरा दिया और शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर नई सरकार बनाई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है। हरियाणा में मिली जीत से प्रेरित होकर पार्टी महाराष्ट्र में भी अपना प्रदर्शन बेहतर करने की तैयारी में है। मराठा आरक्षण, महंगाई, किसान संकट जैसे मुद्दे चुनावी अभियान में प्रमुख होंगे और भाजपा का लक्ष्य होगा कि वह इन मुद्दों पर जनता का भरोसा जीत सके। इसके अलावा केंद्र की योजनाओं का लाभ उठाते हुए भाजपा इस चुनाव को अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश कर रही है। अब देखना यह होगा कि पार्टी अपनी रणनीति में कितना सही साबित हो पाती है।

सक्रिय सदस्यता अभियान में भी रिकॉर्ड बनाएंगे मध्यप्रदेश भाजपा के कार्यकर्ता-विष्णुदत्त शर्मा

– कार्यकर्ताओं की मेहनत, लगन और प्लानिंग से रचा सदस्यता का नया इतिहास – दूसरे चरण में पार्टी कार्यकर्ताओं ने पार किया डेढ़ करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य – सक्रिय सदस्यता अभियान में भी रिकॉर्ड बनाएंगे मध्यप्रदेश भाजपा के कार्यकर्ता – सदस्यता में लक्ष्य प्राप्त करने वाला चौथा राज्य बना मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने दी बधाई – कांग्रेस को समझना होगा कि सिर्फ झूठ परोसना ही राजनीति नहीं होती – विष्णुदत्त शर्मा   भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने संगठन पर्व को लेकर भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता को किया संबोधित भोपाल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने संगठन पर्व को लेकर बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सदस्यता अभियान की पहली कार्यशाला में हमने यह कहा था कि मध्यप्रदेश में हम सभी कार्यकर्ता मिलकर इतिहास बनाएंगे। संगठन पर्व के पहले चरण में हमने 1 करोड़ का आंकड़ा पार किया था और अब मुझे यह बताते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि सदस्यता अभियान के दूसरे चरण के अंतिम दिन हमने सदस्यता का लक्ष्य पार कर लिया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी मेहनत, लगन और माइक्रोप्लानिंग के बल पर डेढ़ करोड़ का लक्ष्य पार करते हुए 1 करोड़ 50 लाख, 28 हजार 107 सदस्य बनाकर नया इतिहास रच दिया है। इसके लिए मैं पार्टी कार्यकर्ताओं और केंद्रीय नेतृत्व के प्रति आभार जताता हूं, धन्यवाद देता हूं। अब सक्रिय सदस्यता का अभियान शुरू हो गया है, मध्यप्रदेश भाजपा सक्रिय सदस्यता में भी रिकॉर्ड बनाएगी। झूठ, छल-कपट की राजनीति करने वाले कांग्रेस नेताओं को यह समझना होगा कि सिर्फ झूठ परोसना ही राजनीति नहीं होती। भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए डेढ़ करोड़ से अधिक सदस्य बनाए हैं। डेढ करोड का लक्ष्य प्राप्त करने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा का पार्टी पदाधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। ऑफलाइन का डाटा आने पर और बढ़ेगा सदस्यता का आंकडा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि संगठन पर्व, सदस्यता अभियान के दूसरे चरण की समाप्ति तक प्रदेश के सभी 64871 बूथों पर जो 1 करोड़ 50 लाख, 28 हजार 107 सदस्य बनाए गए हैं, उनमें से 1 करोड़ 22 लाख, 74 हजार 300 सदस्य ऐसे हैं, जिन्होंने ऑनलाइन डिजिटल फार्म भरा है। डिजिटल फॉर्म भरने के मामले में मध्यप्रदेश देश के अन्य राज्यों में अग्रणी रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश के कई अंचल ऐसे भी हैं, जहां सही तरीके से मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क नहीं मिल पाता। कई घरों में मोबाइल फोन ही नहीं है। कुछ घरों में एक मोबाइल है और सदस्यता ग्रहण करने वाले चार-पांच सदस्य हैं। ऐसे अंचलों व घरों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर ऑफलाइन सदस्य बनाए हैं। अभी ऑफलाइन सदस्यता का आंकड़ा तैयार हो रहा है, इसका परीक्षण किया जा रहा है। जब यह आंकड़ा आएगा, तो एक और इतिहास रचा जाएगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि सदस्यता अभियान के पहले दिन देश भर में 40 हजार ऑफलाइन फॉर्म भरे गए थे और हमारे लिए गर्व का विषय है कि इनमें से 23 हजार फॉर्म मध्यप्रदेश के थे। उन्होंने कहा कि आज से सक्रिय सदस्यता का अभियान शुरू हो चुका है और सक्रिय सदस्य बनने के लिए 100 प्राथमिक सदस्य बनाना आवश्यक है। इसलिए सक्रिय सदस्यता के मामले में भी पार्टी कार्यकर्ता एक और इतिहास रचने में जुट गए हैं। भाजपा संविधान में सक्रिय सदस्यता के लिए 50 प्राथमिक सदस्य बनाना ही निर्धारित है, लेकिन मध्यप्रदेश में सक्रिय सदस्य बनने के लिए 100 प्राथमिक सदस्य बनाना निर्धारित किया गया है। लेकिन ऐसा नहीं है कि 50 प्राथमिक सदस्य बनाने वालों को सक्रिय सदस्य बनने का अधिकार नहीं है। सिर्फ झूठ ही नहीं होता राजनीति का आधार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि जो लोग लगातार झूठ बोलते हैं और झूठ की ही राजनीति करते हैं, उन्हें मैं यह बता देना चाहता हूं कि सिर्फ झूठ ही राजनीति का आधार नहीं होता। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने जमीन पर उतरकर माइक्रोप्लानिंग करके सदस्यता अभियान में दिए गए लक्ष्य को प्राप्त करके दिखाया है। मध्यप्रदेश में वैसे तो हमारे 41 लाख कार्यकर्ता हैं, लेकिन इनमें से 3 लाख कार्यकर्ता पूरी तरह से सदस्यता अभियान में जुटे हुए हैं। इनमें बूथ के कार्यकर्ता से लेकर पन्ना समिति के लोग और पन्ना प्रमुख तक शामिल हैं। हमारा सदस्यता अभियान 2 सितंबर से शुरू हुआ था और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती 25 सितंबर को हमने 12 लाख से ऊपर सदस्यता करके रिकॉर्ड बनाया था। अभियान का दूसरा चरण 1 अक्टूबर से शुरू हुआ था और इस चरण के अंतिम दिन यानी 15 अक्टूबर को भी हमने 11 लाख से अधिक सदस्य बनाए हैं। शर्मा ने कहा कि इस अभियान के दौरान केंद्रीय नेतृत्व से लेकर प्रदेश की टोली और जिलों से लेकर शक्तिकेंद्र तथा बूथ स्तर तक के कार्यकर्ता लगातार जुटे रहे। हर दिन शाम 7.00 बजे से जिलों की बैठक होती थी और सदस्यता अभियान में जुटे कार्यकर्ता इस बैठक में रिपोर्ट देते थे। इसके बाद शाम 8.00 बजे से संभाग की बैठक होती थी संभाग प्रभारी के साथ सभी जिलाध्यक्ष तथा सदस्यता अभियान में लगे कार्यकर्ता इसमें शामिल होते थे। रात्रि 9.00 बजे से प्रदेश स्तर की बैठक होती थी और हमारे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, सह प्रभारी सतीश उपाध्याय, संगठन महामंत्री हितानंद जी तथा सदस्यता अभियान की टोली के सभी सदस्य बैठक करते थे और यह चर्चा होती थी कि किस विधानसभा में सदस्यता की क्या स्थिति रही। शर्मा ने कहा कि जो लोग झूठ की राजनीति करते हैं, उन्हें मैं यह बता देना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता परिश्रम और ईमानदारी से अपने संगठन तंत्र की मजबूती के लिए काम करते हैं और यही भाजपा की ताकत भी है। युवाओं, महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि संगठन पर्व के पहले चरण में एक करोड़ से अधिक सदस्य बनाए गए थे, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक युवाओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। मध्यप्रदेश में युवाओं के साथ महिलाएं, … Read more

छतरपुर और खजुराहो में नाबालिगों पर अत्याचार, विपक्ष ने साधा निशाना

Atrocities on minors in Chhatarpur and Khajuraho, opposition targeted भोपाल। मध्य प्रदेश में नाबालिगों पर हो रहे अत्याचार को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधा हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस तरह की हैवानियत पर कब अंकुश लगेगा। आखिर कब आप प्रदेश की चिंता करोगे ? एमपी में ऐसी घटनाएं होने की वजह से लोगों को कानून का जरा भी डर नहीं है। दरअसल, छतरपुर और खजुराहो में नाबालिगों पर अत्याचार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। एक वीडियो में नाबालिग के साथ बेल्ट से मारपीट तो वहीं दूसरे वीडियो में नाबालिग से अपने जूते चटवाए और जमकर पीटा। इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (X) पर पोस्ट कर लिखा- MP में इस तरह की हैवानियत पर कब अंकुश लगेगा !!! छतरपुर और खजुराहो में नाबालिगों पर अत्याचार के वीडियो सामने आए हैं। एक आदिवासी नाबालिग के साथ गुंडों ने बेल्ट से मारपीट की! दूसरे नाबालिग से अपने जूते चटवाए और पीटा गया! MP में ऐसी घटनाएं लगातार होने का कारण है कि लोगों को कानून_व्यवस्था का भय नहीं रहा!… ये दो घटनाएं तो इसलिए सामने आई कि इनके वीडियो वायरल हुए। आखिर कब आप प्रदेश की चिंता करोगे? प्रदेश में इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। एक बार फिर इन घटनाओं ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। स्थिति सुधरने की बजाय और बिगड़ती जा रही है। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक नाबालिग हैवानियत का शिकार होते रहेंगे। प्रशासन की नींद कब खुलेगी, हालात कब सुधरेंगे।

कांग्रेस की कृषि यात्रा: जीतू पटवारी का बयान, दिग्विजय की चेतावनी

Congress’s Krishi Yatra: Jitu Patwari’s statement, Digvijay’s warning भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी, दिग्विजय सिंह और सज्जन वर्मा ने आज प्रेस कॉन्फ्रेस में संयुक्त रुप से सरकार पर हमला बोला है। जीतू पटवारी ने कहा कि बार-बार यह बात स्थापित होती जा रही है कि बीजेपी की सरकार शिवराज और मोहन यादव किसान विरोधी है। ऋण माफी योजना बंद की. कांग्रेस पार्टी जो योजना लेकर आई थी उन्हें बंद किया. जो वादा इन्होंने किया था समर्थन मूल्य का वह अब तक पूरा नहीं किया और किसानों को धोखा दिया है. गेहूं और धान का वादा के अनुरूप एमएसपी नहीं दिया। यात्रा में सभी बड़े नेता शामिल होंगे यह राजनीतिक नहीं बल्कि किसानों का विषय है। सबसे बड़े किसान विरोधी शिवराज सिंह चौहान देश में मध्यप्रदेश की दुहाई देकर झूठ बोल रहे हैं. पूरे प्रदेश से किसने की समस्याओं और दुर्गति की खबरें हैडलाइन बन रहीं. मैं हर मंगलवार को शिवराज से समय मानता हूं. अगला मंगलवार पांचवा होगा जब तक वह समय नहीं देंगे हम लगातार उनसे समय मांगेंगे. किसानों की समस्या को लेकर से मांग रहा हूं. कांग्रेस गांव, खेत यात्रा निकालेगी। आग्रह करेंगे सरकार से जो आपने बातें की है वह पूरी करो व्यवस्थाओं को दुरुस्त करो. जल्द तारीख का ऐलान करेंगे. यात्रा में सभी बड़े नेता शामिल होंगे.

पूर्व CM शिवराज के घर बजेगी शहनाई, बड़े बेटे कार्तिकेय की हुई सगाई

Shehnai will be played at the house of former CM Shivraj, elder son Karthikeya got engaged मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के घर जल्द ही शादी की शहनाई बजने वाली है और उनके घर बड़ी बहू आने वाली है। दरअसल 17 अक्टूबर को दिल्ली में उनके उनके बड़े बेटे कार्तिकेय चौहान की सगाई हुई है, जिसकी तस्वीरें सामने आई है। कार्तिकेय की दुल्हन अमानत बंसल उदयपुर की रहने वाली हैं और लिबर्टी कंपनी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुपम बंसल की बेटी हैं।कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने दोनों बेटों कार्तिकेय और कुणाल की शादी का निमंत्रण देने भारत के प्रधानमंत्री मोदी से भी मिले हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान की सगाई 17 अक्टूबर को दिल्ली के एक होटल में हुई। इस अवसर पर दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार और दोस्त मौजूद थे। जानिए कौन है कार्तिकेय की दुल्हन कार्तिकेय की होने वाली मंगेतर अमानत बंसल राजस्थान के उदयपुर की रहने वाली हैं। अमानत के पिता अनुपम बंसल प्रसिद्ध जूता कंपनी लिबर्टी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं और उनकी मां रुचिता बंसल महिला उद्यमियों के संगठन, कन्फेडरेशन ऑफ विमन एंटरप्रेन्योर्स ऑफ इंडिया’ के हरियाणा चैप्टर की संस्थापक हैं। शिवराज ने दी थी जानकारी इस मुलाकात की तस्वीरें शेयर करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने X पर लिखा, ‘आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी से अपनी धर्मपत्नी साधना और दोनों बेटों कार्तिकेय-कुणाल के साथ मुलाकात की है। हमने प्रधानमंत्री जी को दोनों बेटों की शादी में आने का निमंत्रण दिया और उनसे आशीर्वाद लिया। स्नेह, प्रेम, आत्मीयता और अपनेपन से भरे आदरणीय प्रधानमंत्री जी अभिभावक और बड़े भाई हैं। प्रधानमंत्री को शादी का कार्ड दरअसल, शिवराज सिंह चौहान के छोटे बेटे कुणाल चौहान की सगाई पहले ही हो चुकी है और उनकी होने वाली पत्नी भोपाल की रहने वाली हैं। इससे पहले, शिवराज सिंह चौहान अपने दोनों बेटों के विवाह का निमंत्रण देने पत्नी साधना सिंह चौहान और दोनों बेटों के साथ पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे थे।

निर्मला सप्रे का स्पष्टीकरण: विधानसभा अध्यक्ष को लिखित जवाब, कहा- ‘न मैंने कांग्रेस छोड़ी, न बीजेपी जॉइन की

भोपाल। मध्य प्रदेश की विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। निर्मला सप्रे ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखित में जवाब दिया है। निर्मला ने कहा कि न मैंने कांग्रेस छोड़ी है और न बीजेपी ज्वाइन की है। उनके इस बयान से प्रदेश की सियासत में हलचल मच गई है। दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान निर्मला सप्रे ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति में बीजेपी में शामिल हुई थी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। इसे लेकर उमंग सिंघार ने विधानसभा में आवेदन दिया था। विधानसभा सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष की याचिका पर निर्मला सप्रे को नोटिस जारी किया था। निर्मला सप्रे ने विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस का दो बार जवाब नहीं दिया था। नोटिस का जवाब नहीं देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने एक सप्ताह का समय दिया था। निर्मला ने 10 अक्टूबर को बंद लिफाफे में उत्तर भेजा। नेता प्रतिपक्ष की याचिका पर निर्मला सप्रे ने जवाब देते हुए कहा था कि मैंने दलबदल नहीं किया है। इस मामले की सुनवाई अब विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर 21 अक्टूबर को कर सकते हैं। स्पीकर कांग्रेस से दलबदल के सबूत पेश करने को कह सकते हैं।

विजयपुर और बुधनी में आचार संहिता लागू, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने की प्रेस कांफ्रेंस

Code of conduct implemented in Vijaypur and Budhni, Chief Electoral Officer held press conference भोपाल। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 02- विजयपुर विधानसभा और सीहोर जिले के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक- 156 बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। आज बुधवार को राजधानी भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित मध्य प्रदेश निर्वाचन सदन में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुखवीर सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर चुनाव प्रक्रिया से संबंधित जानकारी दी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया है कि भारत निर्वाचन आयोग ने श्योपुर जिले की 02-विजयपुर विधानसभा और सीहोर जिले की 156- बुदनी विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उप चुनाव के लिए 15 अक्टूबर 2024 को तारीख की घोषणा की गई। उप चुनाव के तारीखों की घोषणा के साथ ही श्योपुर और सीहोर जिले में आदर्श आचार संहिता प्रभावशील हो गई है। आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाएगा। उप चुनाव की समय सारणी 18 अक्टूबर को गजट नोटिफिकेशन।25 अक्टूबर – नाम निर्देशन भरने की अंतिम तारीख।28 अक्टूबर – नाम निर्देशन की समीक्षा।30 अक्टूबर – नाम वापसी की अंतिम तारीख।13 नवम्बर – मतदान दिवस।23 नवम्बर – मतगणना दिवस।

मध्य प्रदेश उपचुनाव: 13 नवंबर को 2 विधानसभा सीटों पर मतदान, EC ने किया शेड्यूल जारी

Madhya Pradesh by-election: Voting on 2 assembly seats on November 13, EC released schedule MP Bypoll 2024 Schedule: मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान हो गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने मंगलवार (15 अक्टूबर) को प्रेस कांफ्रेंस कर चुनाव के शेड्यूल की जानकारी विस्तार से दी है. मध्य प्रदेश की बुधनी और विजयपुर विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होंगे और 23 नवंबर को मतगणना के बाद नतीजे सामने आ जाएंगे. मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव 2024 का शेड्यूलचुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए शेड्यूल के मुताबिक, नोटिफिकेशन जारी करने की तारीख 10 अक्टूबर 2024 होगीनामांकन भरने की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर 2024 होगीनामांकन पत्रों की जांच 28 अक्टूबर 2024 को होगीनाम वापस लेने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर तक होगीमतदान की तारीख 13 नवंबर 2024 होगीमतगणना 23 नवंबर 2024 को होगी इन वजहों से खाली हुईं बुधनी और विजयपुर सीटेंसीहोर जिले की बुधनी विधानसभा सीट और श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं. बुधनी सीट पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लंबे समय तक विधायक रहे. इस बार के लोकसभा चुनाव में विदिशा से सांसद चुने जाने के बाद शिवराज सिंह को केंद्रीय मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली और इसी के साथ बुधनी सीट खाली हो गई. वहीं, विजयपुर विधानसभा सीट रामनिवास रावत के कांग्रेस छोड़ने के बाद से खाली है. रामनिवास रावत अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं. ऐसे में बीजेपी उन्हें ही इस सीट से फिर चुनाव में उतार सकती है. https://www.facebook.com/share/uhUckjZ3M64hNZUq बीजेपी और कांग्रेस की ओर से अभी बुधनी और विजयपुर सीट पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान नहीं किया गया है. हालांकि, बीजेपी नेताओं की मांग है कि बुधनी से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह को टिकट दिया जाए. वहीं, विजयपुर सीट से रामनिवास रावत का टिकट लगभग फाइनल माना जा रहा है. वहीं, कांग्रेस में अभी नामों पर विचार मंथन चल रहा है. माना जा रहा है कि एक-दो दिन में दोनों ही पार्टियां प्रत्याशियों की घोषणा कर देंगी. . राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन स्थित प्लेनरी हॉल में दोपहर को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस (पीसी) के दौरान उन्होंने यह भी बताया, “महाराष्ट्र में एक चरण में ही चुनाव होगा. 20 नवंबर को मतदान होगा, जबकि 23 नवंबर, 2024 को मतगणना की जाएगी. झारखंड में दो चरण में मतदान होगा. पहले चरण के तहत 13 नवंबर को तो दूसरे फेज में 20 नवंबर, 2024 को वोट डाले जाएंगे और वोटों की गिनती 23 नवंबर को की जाएगी.” उप-चुनावों का कार्यक्रम कुछ इस तरह रहेगा सीईसी राजीव कुमार ने आगे उप-चुनावों के बारे में भी जानकारी दी और कहा, “उत्तर प्रदेश (यूपी) की 10 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को मतदान होगा. केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर 13 नवंबर को वोट डाले जाएंगे और उत्तराखंड में 20 नवंबर को बाई-इलेक्शन होगा.”

भाजपा नेतृत्व ने झारखंड और महाराष्ट्र में बदली रणनीति, हारी हुई सीटों पर बदलेगी रणनीति

नई दिल्ली भाजपा नेतृत्व ने झारखंड और महाराष्ट्र में पिछली बार हारी सीटों को लेकर खास रणनीति बनाई है। इन सीटों पर विरोधी दलों के विधायकों के खिलाफ माहौल है, जिसे वह भुनाने की कोशिश करेगी। हालांकि महाराष्ट्र में शिवसेना और राकांपा में टूट के बाद कई सीटों की स्थिति बदली है। वहां पर वह अपने हिस्से में आने वाली पिछली बार की हारी लगभग 65 सीटों पर नए समीकरण बना रही है। भाजपा झारखंड में विरोधी सत्तारूढ़ गठबंधन की लगभग 50 सीटों में से आधी जीतने को कोशिश कर रही है। इसके लिए भाजपा की अपनी टीम के साथ संघ के कुछ संगठन भी अपने स्तर पर मदद कर रहे हैं। झारखंड में भाजपा ने विधानसभा की 81 सीटों में से 25 जीती थी, जबकि जेवीएम को तीन व आजसू को दो सीटें मिली थीं। राज्य में भाजपा ने लगभग 50 हारी हुई सीटों के सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों को अपने पक्ष में करने के लिए आदिवासी व गैर आदिवासी दोनों वर्गों में अपने दूसरे राज्यों के नेताओं को भी सक्रिय किया हुआ है। इनमें बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ के नेता शामिल हैं। दूसरे राज्यों के नेता अपने सामाजिक समूहों के बीच जाने के साथ दूर दराज तक की रिश्तेदारियों के जरिये गांव-गांव संपर्क कर रहे हैं। संघ से जुड़ा वनवासी कल्याण आश्रम भी परोक्ष रूप से भाजपा की सहायता कर रहा है। लोकसभा चुनाव के समय से तैयारी महाराष्ट्र में पिछली बार भाजपा व शिवसेना के गठबंधन ने 288 में से 161 सीटें जीती थीं। इनमें भाजपा की 105 सीटें शामिल थीं। बाद में गठबंधन टूट गया और अब गठबंधन सरकार में भाजपा के साथ शिवसेना का एक बड़ा धड़ा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में और राकांपा का बड़ा धड़ा उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व में उसके साथ है। सूत्रों के अनुसार भाजपा महाराष्ट्र में लगभग 170 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उसके पास लगभग 65 सीटें ऐसी होंगी जो हारी हुई हैं। उन पर जीत के लिए पार्टी ने अपनी तैयारी लोकसभा चुनाव के समय से ही कर रखी है। चूंकि भाजपा खुद सत्ता में है, ऐसे में वह काफी संभल कर चल रही है। विरोधी विधायकों को लेकर तो वह आक्रामक है, लेकिन सरकार का बचाव कर रही है।

मध्यप्रदेश उद्योग तथा निवेश के क्षेत्र में बना रहा है नई पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने निनोरा में 355 करोड़ रुपए निवेश की प्रतिभा सिंटेक्स औद्योगिक इकाई का शुभारंभ कियामहिला सशक्तिकरण नीति के अंतर्गत प्रतिभा सिंटेक्स में 70% से अधिक महिला कर्मचारी Madhya Pradesh is creating a new identity in the field of industry and investment: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश उद्योग तथा निवेश के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर रहा है। इस दिशा में लगातार भ्रमण तथा उद्योगपतियों से संवाद के प्रतिफल में एक समृद्ध औद्योगिक परिवेश प्रदेश में नजर आ रहा है। निनोरा में स्थापित नवीन औद्योगिक इकाई उक्त प्रयासों की ही एक कड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को उज्जैन के समीप ग्राम निनोरा में 355 करोड़ रुपए निवेश वाली प्रतिभा सिंटेक्स औद्योगिक इकाई का शुभारंभ किया। इस औद्योगिक इकाई में वृहद स्तर पर गारमेंट निर्माण किया जाएगा, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। विशेष रूप से राज्य शासन की महिला सशक्तिकरण नीति के तहत इस औद्योगिक इकाई में 70% से अधिक कर्मचारी महिलाएं हैं। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेशनाथ जी महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, बहादुर सिंह बोरमुंडला, प्रबंध निदेशक औद्योगिक विकास निगम चंद्रमौली शुक्ला, प्रतिभा स्वराज प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन शिवकुमार चौधरी, प्रबंध निदेशक श्रेष्ठ चौधरी आदि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निनोरा में प्रतिभा स्वराज द्वारा स्थापित नवीन औद्योगिक इकाई से जहां हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं आसपास की खेती समृद्ध होगी। किसानो की आय में भी वृद्धि होगी। निनोरा में स्थापित औद्योगिक इकाई के प्रथम चरण में लगभग 100 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है, जिसमें आगे चलकर 355 करोड़ रुपए का निवेश होगा। डॉ. यादव ने उद्योग समूह द्वारा लगभग डेढ़ लाख एकड़ में की जाने वाली जैविक खेती की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की नवीन सकारात्मक औद्योगिक नीति का जिक्र करते हुए कहा कि प्रत्येक संभाग में शासन द्वारा इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेती तथा पशुपालन में उत्पादन और आय को दोगुना करने का सशक्त प्रयास किया जा रहा है। अभी प्रदेश में देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 9% हिस्सा है, जिसे बढ़ाकर 20% तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शासन द्वारा लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अग्नि वीर एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसके माध्यम से दूरदृष्टि के साथ प्रधानमंत्री द्वारा देश की सैन्य क्षमता में वृद्धि की गई है। प्रधानमंत्री द्वारा संतुलन की दृष्टि से अग्नि वीर योजना लागू की गई है। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष दशहरे पर रावण दहन के साथ शस्त्र-पूजन पर कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर से प्रेरणा लेते हुए इस वर्ष उत्साह एवं उमंग के साथ प्रदेश में शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने उज्जयिनी का महत्व जताते हुए कहा कि प्रत्येक काल में उज्जयिनी अवंतिका नगरी का अस्तित्व रहता आया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फीता काटकर औद्योगिक इकाई का शुभारंभ कर मशीनों का पूजन भी किया। साथ ही यहाँ कार्यरत महिला कर्मचारियों से चर्चा कर उनके जॉब, सैलरी, कार्यस्थल पर वातावरण तथा अन्य बिंदुओं पर जानकारी प्राप्त की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने औद्योगिक इकाई में वस्त्र निर्माण की प्रक्रिया का अवलोकन किया, जिसमें मुख्यमंत्री के चित्र को भी मुद्रित किया गया है। प्रारम्भ में प्रतिभा स्वराज प्रा.लि. के प्रबंध निदेशक श्री श्रेष्ठ चौधरी ने स्वागत उद्बोधन दिया।

कैबिनेट मंत्री के बेटे का पुलिस पर हमला, वीडियो वायरल होने से सियासी तूफान

Video of cabinet minister’s son clashing with police goes viral, politics started over this मध्य प्रदेश के जबलपुर में कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल के बेटे प्रबल पटेल का पुलिस से विवाद का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक मंत्री के बेटे की कार से बुजुर्ग दंपती को टक्कर लगी थी। इसके बाद सड़क पर हंगामा हो गया और पुलिस भी पहुंच गई। वहां मौजूद किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जबलपुर। जबलपुर में कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल के बेटे प्रबल पटेल का पुलिस के साथ धक्का-मुक्की करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस समझाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन वह आक्रामक रूप से धौंस दिखाता रहा। जानकारी के मुताबिक प्रबल की कार से बुजुर्ग दंपती को टक्कर लगी थी, जिसके बाद दोनों में विवाद हो गया। इस दौरान पुलिस भी वहां पहुंची थी। घटना के बाद मामले की पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली है। जबलपुर पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हम वीडियो देखकर जांच करवाएंगे। टक्कर के बाद जमा हो गई भीड़ दरअसल यह पूरा मामला बीते बुधवार का बताया जा रहा है। घटना यादव कॉलोनी लेबर चौक की है, जहां प्रबल पटेल कार से जा रहा था, उसकी कार से बुजुर्ग दंतपी को टक्कर लगती है। लोगों की भीड़ जमा होती है, आसपास मौजूद पुलिस भी पहुंच जाती है। मौके पर पहुंच गए थे प्रबल के साथी दंपती के साथ प्रबल की कहासुनी होती है। पुलिस युवक को समझाती है और भीड़ भी युवक पर दवाब बनाने लगती है। जिसके बाद प्रबल के कुछ साथी मौके पर आते हैं। प्रबल पुलिस को धौंस देते नजर आता है। उसने खुद को मंत्री पुत्र बताते हुए पुलिस कर्मियों पर दवाब बनाया। बुजुर्ग दंपती ने नहीं की कोई शिकायतइस मामले में बुजुर्ग दंपती की तरफ से भी कोई शिकायत नहीं की गई है। सड़क पर हुए इस हंगामे का किसी ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने कहा कि उन्हें इस मामले में अभी कोई जानकारी नहीं है लेकिन वे इसकी जांच करवाएंगे। वीडियो पर गर्माई सियासतमध्य प्रदेश कांग्रेस ने वीडियो को सोशल मीडिया एक्स पर शेयर कर सरकार पर सवाल उठाए हैं। पोस्ट में लिखा है- ‘प्रदेश सरकार के मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के बेटे प्रबल ने जबलपुर में बुजुर्ग दंपती को टक्कर मारने के बाद पुलिस वालों को इस अंदाज में धमकाया।’

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