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उज्जैन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का पानी की किल्लत के खिलाफ प्रदर्शन, महापौर बंगले का घेराव

Congress workers protest against water shortage in Ujjain, siege of Mayor’s bungalow उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में भरपूर बारिश और डैम के फूल होने के बाद भी शहर में पानी की किल्लत को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को खाली बाल्टी लेकर प्रदर्शन किया। साथ ही महापौर के बंगले का घेराव किया। इस दौरान कांग्रेसियों ने शहर की जनता को परेशान करने का आरोप लगाया। साथ ही जल्द से जल्द पानी की समस्या को दूर करने की मांग की। प्रदर्शन को देखते हुए महापौर बंगले के सामने भारी पुलिस बल तैनात रहा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मेयर बंगले के सामने जमकर नारेबाजी की। इसके बाद जब महापौर मुकेश टटवाल पहुंचे, तो उनके हाथ में खाली बाल्टी थमा कर पानी मांगा। कांग्रेस नेता राजेंद्र वशिष्ठ ने बताया कि, महाकाल की नगरी उज्जैन में डैम में भरपूर पानी उपलब्ध होने के बावजूद भी शहर की जनता पीने के पानी के त्राहिमाम कर रही है। प्रथम नागरिक महापौर को जनता की परेशानी से कोई लेना देना नहीं है। महापौर और नगर निगम के भाजपा बोर्ड को गहरी नींद से जगाने के लिए और जनता की पीड़ा बताने के लिए कांग्रेस के सभी वरिष्ठजन, सेवादल, पार्षदगण, महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, आईटी सेल, ब्लॉक अध्यक्ष, ब्लॉक प्रभारी, समस्त प्रकोष्ठ, मंडलम अध्यक्ष सेक्टर अध्यक्ष, सहित सभी कार्यकर्ता महापौर ने बंगले पर धरना प्रदर्शन किया।

धर्म परिवर्तन के खिलाफ नया कानून लाएगी सरकार, राजस्थान उपचुनाव में BJP-विधि मंत्री का दांव

जयपुर. धर्म परिवर्तन के खिलाफ राजस्थान सरकार विधानसभा में बिल लाएगी। राजस्थान सरकार में विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने अगले विधानसभा सत्र में बिल लाने के संकेत दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि विधि विभाग धर्म परिवर्तन के खिलाफ बिल के ड्राफ्ट को फाइनल करने में जुटा हुआ है। मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश के धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनों की स्टडी की जा रही है। इस बिल को अगले विधानसभा सत्र में पारित किया जा सकता है। धर्म परिवर्तन के विरोध में लाए जा रहे इस बिल में कई कड़े प्रावधान किए जा सकते हैं। जैसे धर्म बदलवाने और उसमें सहयोग करने वालों पर जेल और भारी जुर्माना होगा। इसमें शामिल संस्थाओं के रजिस्ट्रेशन खारिज करने के साथ कड़ी कार्रवाई होगी। जबरन धर्म परिवर्तन पर पांच साल तक सजा और जुर्माने की सिफारिश है। गौरतलब है कि इससे पहले साल 2006 और 2008 में भी राजस्थान विधानसभा में तत्कालीन वसुंधरा सरकार के समय धर्म स्वातंत्र्य बिल दो बार पास हुआ था। लेकिन तब केंद्र की यूपीए सरकार से इसे मंजूरी नहीं मिल पाई थी। उस धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2008 के कई प्रावधानों को भी शामिल किया जाएगा। साल 2008 के धर्म स्वातंत्र्य बिल में कलेक्टर की मंजूरी के बिना धर्म बदलने पर रोक थी।

सीएम मोहन यादव: कांग्रेस के लोग झूठ बोलकर सरकार बनाते हैं

CM Mohan Yadav: Congress people form government by telling lies मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस के सभी नेताओं को माफी मांगना चाहिए, आमजनता से जिनसे झूठ बोलकर उन्होंने हिमाचल की सरकार बनवाई, कर्नाटक की सरकार बनवाई। झूठ के पहाड़ से आज नहीं तो कल उनका सामना होता ही है, जनता परेशान होती है। मैं उम्मीद करूंगा कि जिस प्रकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है, उससे इस बदलते दौर में महाराष्ट और झारखंड दोनों ही राज्यों में भी भाजपा की सरकारें बनेंगी। तोमर बोले- वन नेशन वन इलेक्शन आदर्श स्थिति मीडिया से चर्चा में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन इससे ज्यादा आदर्श स्थिति लोकतंत्र के लिए और कोई नहीं हो सकती है। नरेंद्र मोदी देश के ऐसे नेता हैं, जिन्होंने तमाम सारे अवरोधों के बाद भी हिंदुस्तान, श्रेष्ठ हिंदुस्तान बने इसके लिए प्रयासरत हैं। जहां तक प्रतिपक्ष का सवाल है, प्रतिपक्ष पूरी तरह दिवालिया हो चुका है, बिना आधार के इस प्रकार की बातें करके सिर्फ विरोध करता है। गोरस आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से संक्षिप्त चर्चा में कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस के लोग झूठ बोलकर सरकार बनाते हैं, मल्लिकार्जुन खरगे ने खुद ने स्वीकार किया है। ऐसे झूठ बोल-बोल के सरकार बनाना उनके लिए भी शर्म की बात है। ये वही बात थी, जो चुनाव के पहले भाजपा कहती रही है कि चुनाव के पहले कांग्रेस जितने गलत काम कर सकती है वह सब करती है।

बुधनी विधानसभा में कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का दो दिवसीय जनसंपर्क अभियान, कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल के समर्थन में मतदाताओं से संवाद

Public relations campaign of Congress President Jitu Patwari in Budhni Assembly: Two-day visit in support of Rajkumar Patel मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी आज, 27 अक्टूबर, से बुधनी विधानसभा क्षेत्र में दो दिवसीय दौरे पर हैं। इस दौरान वे कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार पटेल के समर्थन में व्यापक जनसंपर्क करेंगे और मतदाताओं के साथ संवाद स्थापित करेंगे। पटवारी का यह दौरा 28 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें वे क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में जाकर कांग्रेस की नीतियों और आगामी चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति से लोगों को अवगत कराएंगे। दौरे का मुख्य उद्देश्यबुधनी विधानसभा क्षेत्र, जो प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, में कांग्रेस इस बार मजबूत दावेदारी पेश कर रही है। जीतू पटवारी के इस दौरे का उद्देश्य स्थानीय मतदाताओं के बीच कांग्रेस के प्रत्याशी राजकुमार पटेल के प्रति समर्थन को बढ़ाना और जनता को कांग्रेस की योजनाओं से अवगत कराना है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पटवारी इस दौरे में किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए पार्टी के एजेंडे पर विशेष रूप से जोर देंगे और क्षेत्र के विकास के लिए कांग्रेस की प्राथमिकताओं को सामने रखेंगे। मतदाताओं से संवाददौरे के दौरान जीतू पटवारी विभिन्न गांवों और कस्बों में जाकर जनसभाएं करेंगे, जहां वे सीधे तौर पर मतदाताओं से संवाद करेंगे। कांग्रेस का उद्देश्य जनता की समस्याओं को सुनना और उन्हें कांग्रेस की ओर से समाधान का भरोसा देना है। इस अवसर पर पटवारी स्थानीय मुद्दों जैसे कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर भी चर्चा करेंगे। कांग्रेस की रणनीतिबुधनी विधानसभा पर कांग्रेस की नजर लंबे समय से है, और जीतू पटवारी का यह दौरा इस ओर एक अहम कदम है। पार्टी ने इस बार राजकुमार पटेल को प्रत्याशी बनाया है, जिन्हें स्थानीय स्तर पर अच्छा जनसमर्थन हासिल है। जीतू पटवारी का समर्थन भी उन्हें मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य क्षेत्र के लोगों के सामने कांग्रेस के विकल्प को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करना है। कांग्रेस समर्थकों में उत्साहदौरे की घोषणा के बाद से ही कांग्रेस समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ता जीतू पटवारी के नेतृत्व में बुधनी में नई ऊर्जा के साथ जुटे हुए हैं। कांग्रेस का मानना है कि इस तरह के जनसंपर्क अभियानों से मतदाताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित होगा, जो चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कुल मिलाकर, जीतू पटवारी का यह दौरा कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि इससे कांग्रेस को स्थानीय स्तर पर समर्थन बढ़ाने का अवसर मिलेगा। पटवारी के संवाद कार्यक्रम को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस बुधनी में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्तिकेय कि मतदाताओं को वार्निंग : कांग्रेस का विधायक आ गया तो गांव में एक भी ईंट नहीं लगने वाली है. समझ लेना आप सब

If a Congress MLA comes, not a single brick is going to be laid in the village. please understand all of you शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने एक कार्यक्रम में कहा कि उपचुनाव में 19-20 होता है तो आप समझिए, किसका नुकसान होगा? अपने पैरों पर हम क्यों कुल्हाड़ी मारें? MP Bypoll 2024: मध्य प्रदेश के बुधनी विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव को लेकर अब राजनीति चरम पर पहुंच गया है. इस सीट पर बीजेपी के बीच मुख्य मुकाबला है. इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान ने एक चुनावी कार्यक्रम में कुछ ऐसा कह दिया कि उनके बयान को लेकर कांग्रेस ने उन्हें नसीहत देने लगे हैं. एमपी कांग्रेस के बड़े नेता ने उन पर पलटवार करते हुए कार्तिकेय सिंह को नसीहत दी है. दरअसल, कार्तिकेय सिंह चौहान ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि उपचुनाव में 19-20 होता है तो आप समझिए, किसका नुकसान होगा? अपने पैरों हम क्यों कुल्हाड़ी मारें? ये है कार्तिकेय का बयान एमपी के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने कहा, “अपनी पोलिंग में गड़बड़ी कर हम क्यों अपनी इज्जत खराब करें? क्या हम को नहीं जाना काम कराने के लिए मुख्यमंत्री के पास, क्या हमें नहीं जाना काम कराने के लिए कृषि मंत्री के पास. आप ही लोग बताईए, सरपंच जी कैसे कराएंगे आप काम. जबाव दीजिए.” उन्होंने आगे कहा कि यदि उन्नीसा-बीस हुआ तो हम किस मुंह से अपने नेताओं के पास काम कराने जाएंगे. अगर गलती से भी कांग्रेस का विधायक आ जाता है तो एक ईंट गांव में नहीं लगने वाली है. समझ लेना आप सब. दिग्विजय सिंह ने क्या दी नसीहत? एमपी के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान के इस बयान पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर उन्हें नसीहत दी है. उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, “कार्तिकेय अभी से इस प्रकार का भाषण ना दो. अपने पिता शिवराज सिंह चौहान जी से सीखो. लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों मिलकर भारत निर्माण में सहयोग करते हैं.” उन्होंने कहा कि 10 साल तक मैं मुख्यमंत्री रहा, लेकिन मैंने इस प्रकार की भाषा का कभी उपयोग नहीं किया. आपके पिता गवाह हैं. पंचायत राज कानून में निर्माण काम करने के जिम्मेदार सरपंच की होती है, ना कि विधायक की. आप तो अभी ना सरपंच हैं ना विधायक. आप मेरे पुत्र नहीं पौत्र समान हैं. यह मेरी राय है. आप मानें ना मानें, आप जानें. जय सियाराम.

यूपी उपचुनाव से पहले सहयोगी दल को सीट ना देने के बाद राजनीति तापमान बढ़ा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में 9 सीट पर होने वाला उपचुनाव बेहद रोचक होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस उपचुनाव में भी जहां लोकसभा चुनाव की तरह इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन के बीच कांटे की फाइट होने की संभावना जताई जा रही थी। वहीं सीट बंटवारे को लेकर फंसे पेंच ने मामला और गरमा दिया है। दोनों गठबंधनों में तमाम बैठकों के बाद भी सीट बंटवारे का मामला सॉल्व नहीं हो पाया है। यहीं वजह है कि समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस और बीजेपी ने निषाद पार्टी को एक भी सीट ना देकर उपचुनाव से पहले करारा झटका दे दिया है। सपा और बीजेपी के इस कदम के बाद सूबे का राजनीति पारा बढ़ गया है। चर्चाओं का दौर जारी है। दरअसल गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी ने यूपी उपचुनाव की 9 में से 7 विधानसभा सीट पर कैंडिडेट घोषित कर दिए हैं। बीजेपी ने उन दो सीट पर भी उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिसको लेकर निषाद पार्टी के अध्यक्ष व यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में जमे हुए हैं। संजय निषाद के बीते दिनों दिए एक बयान से राजनीति गरमा गई थी। निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने साफ-साफ शब्दों में कहा था कि कार्यकर्ताओं की मंशा है कि निषाद पार्टी अपने सिंबल पर चुनाव लड़े। भले ही उम्मीदवार बीजेपी का हो। संजय ने कटेहरी और मझवां सीट पर दावा किया था। ऐसा कहकर संजय निषाद दिल्ली निकल गए थे। कटेहरी और मझवां समेत कुल 7 सीट पर प्रत्याशी घोषित संजय निषाद ने दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई नेताओं से मुलाकात भी की थी। इन सबके बावजूद बीजेपी ने कटेहरी और मझवां समेत कुल 7 सीट पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। बाकी बची दो सीट में से एक आरएलडी को दी है। जबकि एक सीट पर बीजेपी में मंथन चल रहा है। वहीं बीजेपी के टिकट घोषित होने के बाद से संजय निषाद की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि यूपी उपचुनाव से पहले सहयोगी दल को सीट ना देने के बाद राजनीति तापमान बढ़ गया है। फिलहाल सबकी निगाहें निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के अगले कदम पर टिकी हुई है। सपा ने एक भी सीट ना देकर तगड़ा झटका उधर इंडिया गठबंधन में भी सीट बंटवारे पर बात नहीं बन पाई है। समाजवादी पार्टी ने एक भी सीट ना देकर तगड़ा झटका दे दिया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सभी 9 सीट पर सपा सिंबल पर प्रत्याशी उतारने का एलान कर दिया है। इसके बाद इंडिया गठबंधन में भी उपचुनाव से पहले फूट पड़ती नजर आ रही है। हालांकि अखिलेश ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ अपनी एक फोटो पोस्ट कर मामला मैनेज करने की पूरी कोशिश की है। सपा कांग्रेस को दो सीट देना चाहती थी। लेकिन यूपी कांग्रेस के नेता 5 सीट पर दावा ठोक रहे थे। तमाम प्रयासों के बाद भी दोनों दलों के बीच सीट पर बात नहीं बन पा रही थी। इसी क्रम में अखिलेश यादव ने बुधवार रात को एक लंबा-चौड़ा पोस्ट कर सभी 9 सीट पर सपा के सिंबल पर कैंडिडेट उतारने का ऐलान कर दिया है। 10 में से 9 सीट पर 13 नवंबर को वोटिंग मैनपुरी की करहल, मिर्जापुर की मझवां, कानपुर की सीसीमऊ, प्रयागराज की फूलपुर, अयोध्‍या की मिल्‍कीपुर, अंबेडकरनगर की कटेहरी, गाजियाबाद सदर, अलीगढ़ की खैर, मुरादाबाद की कुंदरकी और मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट पर उपचुनाव होना है। इन 10 में से 9 सीट पर 13 नवंबर को वोटिंग होनी है। बीजेपी ने अभी सात सीटों पर उम्‍मीदवारों की घोषणा की है। कुंदरकी सीट से रामवीर सिंह ठाकुर, गाजियाबाद सीट से संजीव शर्मा और खैर (अजा) सीट से सुरेंद्र दिलेर को ट‍िकट द‍िया गया है। जबकि करहल सीट से अनुजेश यादव, फूलपुर सीट से दीपक पटेल, कटेहरी सीट से धर्मराज निषाद और मझवां सीट से सुचिस्मिता मौर्या को कैंडिडेट घोषित किया है।

भाजपा ने इस उपचुनाव को भाजपा ने भतीजे के सामने फूफा को खड़ा कर दिया, करहल सीट पर बड़ा दाव खेला

करहल यूपी में खाली 10 विधानसभा सीटों में 9 सीटों पर उपचुनाव होने वाला है। इस उपचुनाव में गठबंधन की ओर से सभी सीटों पर सपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा जा रहा है। वहीं, वृहस्पतिवार को भाजपा की तरफ से 7 उम्मीदवरों की लिस्ट जारी की गई है। इसमें भाजपा ने करहल सीट पर बड़ा दाव खेला है। दरअसल, इस उपचुनाव को भाजपा ने भतीजे के सामने फूफा को खड़ा कर दिया है। दरअसल भाजपा ने करहल विधानसभा सीट पर मुलायम सिंह यादव के दामाद अनुजेश यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं समाजवादी पार्टी ने इस सीट से तेज प्रताप यादव उम्मीदवार है। ऐसे में ये लड़ाई काफी दिलचस्प होने वाली हैं..क्योंकि अब करहल सीट पर फूफा और भतीजा आमने सामने होंगे। पिछले 2 दशकों से करहल पर सपा का कब्जा बता दें कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि रही करहल पर पिछले दो दशकों से सपा का कब्ज़ा रहा है, कहा जाता है कि दो दशकों के भीतर सपा प्रत्याशी को यहां पर किसी दूसरें दल से लड़ाई तो..बहुत दूर की बात है कभी मजबूत चुनौती तक भी नहीं मिली हैं, लेकिन लगता हैं इस बार बड़ी चुनौती मिल सकती है क्योंकि इस बार सपा को मात देने के लिए भाजपा ने बड़ा दाव खेला है। सपा के किले में सेंध लगाने की तैयारी  भाजपा का भतीजे तेज प्रताप यादव के सामने फूफा अनुजश यादव को उतारने का मकसद यही है कि करहल में सपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगी।  अनुजेश यादव मुलायम सिंह यादव के भाई अभयराम यादव की बेटी संध्या यादव के पति हैं। संध्या यादव, आजमगढ़ से सांसद धर्मेद्र यादव की सगी बहन हैं। संध्या यादव मुलायम परिवार की पहली बेटी हैं, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा था। इतना ही नहीं वो मैनपुरी की जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

आगामी राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा उप-चुनावों के लिए भाजपा ने आठ उम्मीदवारों की घोषणा की

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा उप-चुनावों के लिए अपने आठ उम्मीदवारों की गुरुवार को घोषणा की। पार्टी महासचिव अरुण सिंह ने यहां एक विज्ञप्ति में कहा कि भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति ने राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा के आगामी उप-चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की चौरासी (अजजा) सीट से श्री कारीलाल ननोमा को प्रत्याशी बनाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश में कुंदरकी से श्री रामवीर सिंह ठाकुर, गाजियाबाद से श्री संजीव शर्मा, खैर (अजा) से श्री सुरेंद्र दिलेर, करहल से श्री अनुजेश यादव, फूलपुर से श्री दीपक पटेल, कटेहरी से श्री धर्मराज निषाद तथा मझवां से श्रीमती सुचिस्मिता मौर्या को टिकट दिया गया है।  

अरविंद केजरीवाल करेंगे महाराष्ट्र-झारखंड में प्रचार, INDIA अलायंस और अपनी अन्य सहयोगी पार्टियों के लिए चुनाव प्रचार करेंगे

Arvind Kejriwal will campaign in Maharashtra-Jharkhand, will campaign for INDIA Alliance and his other allies. Arvind Kejriwal Election Campaining Plan: अरविंद केजरीवाल महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव प्रचार करेंगे। कई दलों ने उन्हें अपना स्टार कैंपेनर बनाने के लिए संपर्क किया है, लेकिन अभी तक यह फाइनल नहीं हुआ है कि वे किसके लिए प्रचार करने जाएंगे? Arvind Kejriwal Election Campaining Plan: AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव प्रचार करने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वे अपने सहयोगी INDIA अलायंस और अपनी अन्य सहयोगी पार्टियों के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। केजरीवाल महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी (MVA) के लिए प्रचार करेंगे। विशेष तौर पर शिवसेना UBT और NCP-शरद पवार के उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। इसके लिए दोनों दलों ने AAP से संपर्क किया है। इनके लिए चुनाव प्रचार कर सकते केजरीवालअरविंद केजरीवाल उन विधानसभा सीटों पर ही चुनाव प्रचार करेंगे, जहां पार्टी के वॉलंटियर्स हैं। अरविंद केजरीवाल के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता भी दोनों राज्यों में चुनाव प्रचार करते हुए रैलियां निकाल सकते हैं और जनसभाएं कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल झारखंड में भी चुनाव प्रचार करने जाएंगे। केजरीवाल झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवारों के लिए भी प्रचार कर सकते हैं। अरविंद केजरीवाल इंडिया बलॉक की शहरी सीटों पर प्रचार करेंगे। अरविंद केजरीवाल उन सीटों पर प्रचार करेंगे, जहां उनकी अपील इंडिया अलायंस के लिए वोटों में तब्दील होगी, खासकर शहरी सीटों पर। महाराष्ट्र में एक चरण में वोटिंगबता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 की तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग ने गत 15 अक्टूबर को किया था। महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटों पर 20 नवंबर को वोटिंग होगी। 23 नवंबर को मतगणना के बाद परिणाम आएगा। महाराष्ट्र में मुख्य मुकाबल MAV और सत्तारूढ़ महायुति के बीच है। मुख्य चुनावी मुकाबला 2 गठबंधनों के बीच होगा। सत्तारूढ़ महायुति में भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) शामिल हैं। दूसरा गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) है, जिसमें कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और NCP (शरद पवार) शामिल हैं। दोनों गठबंधनों में सीट शेयरिंग हो चुकी और दोनों उम्मीदवारों की घोषणा भी कर चुके हैं। चुनाव प्रचार भी शुरू हो गया है। झारखंड में 2 चरणों में होगी वोटिंगझारखंड विधानसभा चुनाव 2024 का ऐलान भी चुनाव आयोग ने 15 अक्टूबर को किया था। झारखंड में 13 नवंबर और 20 नवंबर को 2 चरणों में वोटिंग होगी। 23 नवंबर को मतगणना होगी। झारखंड में ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU), जनता दल (यूनाइटेड) (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) गठबंधन में चुनाव लड़ रही हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनावी रण में उतरी है।

बुधनी में नाराजगी नहीं: भाजपा प्रत्याशी के विरोध पर VD शर्मा का बयान

No resentment in Budhni: VD Sharma’s statement on opposition to BJP candidate भोपाल। बुधनी विधानसभा उपचुनाव से पहले भाजपा प्रत्याशी रमाकांत भार्गव का विरोध होने पर बवाल मच गया। कांग्रेस इसे लेकर अब सत्ता पक्ष पर तंज कस रही है। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इस नाराजगी को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि बुधनी में कोई नाराजगी नहीं हैं। बीजेपी में कभी ऐसा नहीं हुआ। शिवराज सिंह जी के नेतृत्व में बुधनी लगातार जीतते आए हैं। बुधनी के साथ विजयपुर भारी बहुमत से जीत रहे हैं। 24 को विजयपुर और 25 अक्टूबर को बुधनी का नामांकन है। बुधनी और विजयपुर के लिए हम तैयार हैं। विजय का इतिहास भारतीय जनता पार्टी बनाएगी। गरीब कल्याण की योजना और हमारे विकास का काम ये हमारी ताकत है। विधानसभा उपचुनाव को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने कहा कि BJP हर जगह षड्यंत्र करने की कोशिश कर रही है। चाहे वो कुछ भी कर लें, दोनों ही सीटों पर कांग्रेस जीत रही है। कांग्रेस ईमानदारी के साथ इन सीटों पर जीत कर आएगी। जनता सब कुछ जानती है और वो उन्हें जवाब भी देगी। बुधनी में BJP की खुद की पार्टी के लोग उनका विरोध कर रहे हैं। वहां खुद अंदरूनी तौर पर षड्यंत्र चल रहा है। अपनी पीड़ा को कहना नाराज़गी नहीं होती: मंत्री राकेश शुक्ला पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह के बयान पर मंत्री राकेश शुक्ला ने पलटवार किया है। उपचुनाव पर कांग्रेस के दावों पर उन्होंने कहा कि रामनिवास नामांकन भरेंगे और मुख्यमंत्री भी जा रहे हैं। हम भी जाएंगे। यहां पर लगातार प्रवास होते रहे हैं और वरिष्ठ नेता भी रहेंगे। भारतीय जनता पार्टी विजयपुर विधानसभा से रामनिवास रावत प्रचंड बहुमत से जीतकर आ रहे हैं। वहीं बुधनी में विरोध के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अपनी पीड़ा को कहना नाराज़गी नहीं होती। पीड़ा उन्होंने अपनी कही है। नेताओं के सामने पीड़ा कहने का अधिकार सबको है। हम सभी लोग मिलकर काम करेंगे और एक साथ मिलकर काम करेंगे तो जीतेंगे।जीतू पटवारी और कांग्रेस क्या कहती है, हमें इस पर नहीं जाना। संगठन और वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में हम जीत रहे हैं।

उमंग सिंघार का ABVP पर हमला: बीजेपी को दलित-आदिवासी विरोधी बताया

Umang Singhar’s attack on ABVP: Called BJP anti-Dalit-Tribal भोपाल। कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर हमला करते हुए उसे दलित और आदिवासी विरोधी बताया है। उन्होंने इंदौर में ABVP के छात्रों के द्वारा हॉस्टल में घुसकर आदिवासी और दलित छात्रों के साथ अभद्रता को लेकर बीजेपी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को आड़े हाथों लिया है। नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्वीट करते हुए लिखा कि भाजपा अपने पाले हुए सड़क छाप गुंडों के जरिए दलित और आदिवासी विरोधी एजेंडा की प्रतिपूर्ति करती है। ये ABVP छात्रों का नहीं कुकृत्य करने वालों का संगठन है, जिसे भाजपा अपनी अगली पीढ़ी के लिए तैयार कर रही है। उमंग सिंघार ने ABVP संगठन पर तंज कसते हुए कहा कि ये लोग आदिवासी और दलित छात्रों को अपना निशाना बनाते रहते हैं। दो दिन पहले भाजपा की नई पीढ़ी ABVP के “गुंडे” इंदौर में आदिवासी और दलित छात्रों को उनके होस्टल कैम्पस में जाकर गालियां दी और होस्टल पर पत्थर फेंके। कानून को मजाक समझने वालों पर मौन यादव कार्रवाई करेंगे या दलित और आदिवासी अत्याचारों पर भी “मौन” रहेंगे? सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव जी इस मामले पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने के आदेश दें।

अध्यक्ष नड्डा ने मप्र भाजपा के ‘I am BJP Future Force’ अभियान की तारीफ की और उन्होंने अन्य राज्यों को भी इसे अपनाने को कहा

भोपाल मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने के उद्देश्य से ‘आई एम बीजेपी फ्यूचर’ नामक अनूठे सदस्यता अभियान का आयोजन किया। इस अभियान की सफलता ने राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी का ध्यान आकर्षित किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस अभियान की प्रशंसा की और कहा कि मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। ‘आई एम बीजेपी फ्यूचर’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गैर-राजनीतिक युवाओं और प्रोफेशनल्स को पार्टी की विचारधारा से जोड़ना था। मध्य प्रदेश के भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, और इंदौर में आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए 5000 से ज्यादा प्रोफेशनल्स ने भाजपा की सदस्यता ली। इस अनूठी पहल के तहत मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नड्डा ने की तारीफ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश भाजपा का यह कदम एक मिसाल है। प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने में मध्यप्रदेश भाजपा अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सभी राज्यों को भी इस तरह के प्रोग्राम आयोजित करने चाहिए, ताकि युवा और प्रोफेशनल्स राजनीति में शामिल हो सकें और 2047 के विकसित भारत के सपने को साकार कर सकें। चार प्रमुख शहरों में सफलता का सफर भोपाल (5 अक्तूबर): सफल लांच भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित इस अभियान का लांच 5 अक्तूबर को हुआ, जहां 150 प्रोफेशनल्स ने भाजपा की सदस्यता ली। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया और पार्टी के मूल्यों व दृष्टिकोण को साझा किया। जबलपुर (11 अक्तूबर): जोश और उमंग जबलपुर में 11 अक्तूबर को 300 से अधिक प्रोफेशनल्स भाजपा से जुड़े। वीडी शर्मा ने इस अवसर पर कहा, “युवा प्रोफेशनल्स का जुड़ना पार्टी के लिए एक नई ऊर्जा का संचार है।” उज्जैन (13 अक्तूबर): मुख्यमंत्री का नेतृत्व उज्जैन में 13 अक्तूबर को 500 से अधिक प्रोफेशनल्स ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया और प्रोफेशनल्स को भाजपा की विचारधारा से अवगत कराया। इंदौर (15 अक्तूबर): ग्रैंड फिनाले इंदौर में आयोजित ग्रैंड फिनाले में 1500 से अधिक प्रोफेशनल्स भाजपा से जुड़े। वीडी शर्मा ने इस मौके पर कहा, “यह कार्यक्रम हमारे भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।

मदरसों को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने फंडिंग बंद करने और ट्रांसफर आदेश पर लगाई रोक

Relief to Madrassas: Supreme Court bans stop funding and transfer order नई दिल्ली ! सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की उन सिफारिशों पर रोक लगा दी, जिनमें शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 (RTE Act 2009) का पालन न करने वाले मदरसों की मान्यता रद्द करने, उनकी सरकारी फंडिंग रोकने और सभी मदरसों का निरीक्षण करने की बात कही गई थी। इसके साथ ही, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गैर-मान्यता प्राप्त और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले गैर-मुस्लिम विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित करने के आदेश पर भी रोक लगा दी है। NCPCR की सिफारिश क्या थी?NCPCR ने सिफारिश की थी कि जो मदरसे शिक्षा के अधिकार अधिनियम का पालन नहीं करते, उनकी सरकारी मदद बंद कर दी जानी चाहिए। आयोग ने सभी मदरसों का निरीक्षण करने की भी सिफारिश की थी, ताकि यह देखा जा सके कि वे शिक्षा के मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। सुप्रीम कोर्ट में इस सिफारिश के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने याचिका दायर की थी, जिस पर चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाने की अनुमति भी दी है, ताकि व्यापक रूप से सभी मदरसों की स्थिति पर विचार हो सके। पूरा मामला क्या है?एनसीपीसीआर ने उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा सरकार को पत्र लिखकर सभी मदरसों का निरीक्षण करने और उनकी जांच करने का निर्देश दिया था। यूपी के मुख्य सचिव ने इस पत्र के जवाब में सभी जिलाधिकारियों को मदरसों की विस्तृत जांच का आदेश दिया था। इसी तरह त्रिपुरा सरकार ने भी अगस्त में मदरसों की जांच के निर्देश दिए थे। उत्तर प्रदेश सरकार को दूसरा झटका:यह उत्तर प्रदेश सरकार को मदरसों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से मिला दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने मदरसा अधिनियम, 2004 को रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई थी। उस मामले की याचिका अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से स्पष्ट है कि मदरसों की फंडिंग फिलहाल जारी रहेगी और गैर-मुस्लिम विद्यार्थियों को जबरन सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई तक, मदरसे अपनी वर्तमान स्थिति में कार्यरत रहेंगे।

विंध्य के उद्योगपतियों को मिलेगी नई सुविधाएं: CM डॉ. मोहन यादव की पहल, रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में होंगे बड़े फैसले

Industrialists of Vindhya will get new facilities: Initiative of CM Dr. Mohan Yadav, big decisions will be taken in the Regional Industry Conclave भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विंध्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक नई दिशा तय की है। उनकी सरकार ने उद्योगपतियों को बेहतर सुविधाएं और समर्थन प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हाल ही में, उन्होंने विंध्य क्षेत्र के उद्योगपतियों के लिए कंटेनर सुविधा की घोषणा की, जिससे निर्यात और व्यापार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही, उद्योगों के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए कलेक्टर और कमिश्नर को निर्देश दिए गए हैं। 23 अक्टूबर को रीवा में होगा रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव मुख्यमंत्री ने कहा कि 23 अक्टूबर को रीवा में आयोजित होने वाला रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव विंध्य क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इस कॉन्क्लेव में 50 बड़े उद्योगपतियों समेत 3,000 से अधिक उद्योगपति पंजीकृत हैं। कॉन्क्लेव का उद्देश्य व्यापार और औद्योगिक वातावरण को सशक्त बनाना, व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा देना और राज्य के आर्थिक विकास को एक नई दिशा देना है। उद्योगपतियों के खाते में सीधे अनुदान राशि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि वर्ष 2022-23 के लिए उद्योगों के अनुदान की राशि जारी कर दी गई है, जिसे सीधे उद्योगपतियों के खाते में स्थानांतरित किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य है कि उद्योगपतियों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सके और उनके व्यापार को कोई बाधा न आए। यह पहल निवेशकों को राज्य में उद्योग स्थापित करने और उसे विस्तार देने में मदद करेगी। दोहरे कराधान से मिलेगी राहत विंध्य क्षेत्र के उद्योगपतियों के लिए एक और बड़ी राहत यह है कि औद्योगिक क्षेत्रों में दोहरा कराधान नहीं लगेगा। यह निर्णय उद्योगों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगा और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार व्यापारियों की समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। व्यापारिक सुगमता और नए अवसर इस कॉन्क्लेव में “ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस” को और भी सशक्त करने के लिए एमपी इंडस्ट्रियल डेव्लपमेंट कॉरपोरेशन प्रमुख भूमिका निभाएगा। एमएसएमई विभाग भी छोटे और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाओं और समर्थन कार्यक्रमों की जानकारी देगा, जिससे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। निर्यात और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को मिलेगी रफ्तार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए डायरेक्टोरेट ऑफ फॉरेन ट्रेड मार्गदर्शन प्रदान करेगा, और कस्टम विभाग आयात-निर्यात प्रक्रियाओं पर जानकारी देगा। इसके अलावा, ईसीजीसी क्रेडिट बीमा और वित्तीय सेवाओं की जानकारी देकर निर्यातकों को वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा। पर्यटन, हस्तशिल्प, और कृषि उद्योग को बढ़ावा कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा राज्य में पर्यटन स्थलों और निवेश के अवसरों की जानकारी दी जाएगी। हस्तशिल्प विकास निगम भी अपने उत्पादों को बाजार में लाने के नए तरीके साझा करेगा। इसके अलावा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए भी सुनहरे अवसर होंगे, जिसमें कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए विशेष जानकारी दी जाएगी। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं का समर्थन बिजनेस और उद्योगों के वित्तीय सहयोग के लिए यूनियन बैंक और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा वित्तीय सेवाओं की जानकारी दी जाएगी, जिससे निवेशकों को व्यवसाय स्थापित करने में सहयोग मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल से विंध्य क्षेत्र में उद्योगपतियों को नई सुविधाएं मिलेंगी, जो राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति देंगी। रीवा में होने वाला रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव व्यापार, उद्योग, कृषि, और पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर सृजित करेगा, जिससे न केवल विंध्य बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में विकास की लहर दौड़ेगी।

हरियाणा में राज्यसभा के लिए BJP के कई दावेदार, कृष्णलाल पंवार के इस्तीफे से खाली हुई एक सीट

चंडीगढ़ हाल ही में हरियाणा में हुए विधानसभा चुनाव में इसराना से चुनाव जीतने के बाद कृष्णलाल पंवार ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने पंवार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। ऐसे में राज्यसभा में हरियाणा के हिस्से की एक सीट खाली हो गई है। हालांकि खाली हुई इस एक सीट के लिए चुनाव कब होंगे, इसकी अभी अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चर्चा है कि हरियाणा में विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद कभी भी राज्यसभा की एक खाली हुई सीट के लिए चुनाव हो सकते हैं। राज्यसभा के सदस्य के रूप में कृष्णलाल पंवार का कार्यकाल एक अगस्त 2028 तक का था। उन्होंने 23 अगस्त 2022 को शपथ ग्रहण की थी। ऐसे में अब भारतीय जनता पार्टी की ओर से करीब चार साल के लिए अपने प्रत्याशी को राज्यसभा में भेजा जाएगा। इस्तीफा देकर मांगा था आशीर्वाद कृष्ण लाल पंवार ने हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा था, जिसके बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि इसराना के विधायक के रूप में जनसेवा के अपने नए कर्तव्य की ओर कदम बढ़ाए। नई पारी की शुरुआत के लिए सभी अपना आशीर्वाद प्रदान करें। उन्होंने आगे लिखा था कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में इसराना को एक बेहतर और विकसित क्षेत्र बनाने के लिए कृत संकल्पित हूं। बता दें कि पंवार हरियाणा बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। बीजेपी ने सहेजी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत बता दें कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड्डा की ओर से राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने किरण चौधरी को राज्यसभा में भेजा था। किरण चौधरी का राज्यसभा के सदस्य के रूप में 9 अप्रैल 2026 तक का कार्यकाल है। किरण चौधरी ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद अपनी बेटी और समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके एवज में भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत को सहेजते हुए किरण चौधरी को राज्यसभा में भेजने का काम किया। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने तोशाम से किरण चौधरी की बेटी श्रुति को अपना उम्मीदवार बनाया। तोशाम से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी ने उन्हें प्रदेश की नायब कैबिनेट में भी स्थान दिया। हरियाणा की राज्यसभा सीटों का गणित हरियाणा की अन्य राज्यसभा सीटों की बात करें तो इनमें बीजेपी के रामचंद्र जांगड़ा 10 अप्रैल 2020 को राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे, जिनका कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक का है। इसी प्रकार से बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला जो 3 अप्रैल 2024 को राज्यसभा के सदस्य मनोनित हुए थे, का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक है। इसी प्रकार से बीजेपी में शामिल होने के बाद राज्यसभा पहुंची किरण चौधरी का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक का है। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा का चुनाव लड़े कार्तिकेय शर्मा ने 2 अगस्त 2022 को राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ ली थी, इनका कार्यकाल 1 अगस्त 2028 तक का है। हालांकि कार्तिकेय को बीजेपी की ओर से समर्थन दिया गया था। इसी प्रकार से बीजेपी की ओर से राज्यसभा में गए कृष्णलाल पंवार ने 23 अगस्त 2022 को शपथ ग्रहण की थी, जिनका कार्यकाल एक अगस्त 2028 तक था, लेकिन अब उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा में हरियाणा के हिस्से की एक सीट खाली हो गई है। बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत हरियाणा विधानसभा के ताजा आंकड़ों को देखे तो इस बार भारतीय जनता पार्टी के पास खुद के 48 विधायक है। इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायकों का भी बीजेपी को समर्थन हैं, जबकि कांग्रेस के 37 और इनेलो के 2 विधायक है। ऐसे में यह साफ है कि कोई भी अन्य दल राज्यसभा के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के खिलाफ अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारेगा, जिससे बीजेपी उम्मीदवार का निर्विरोध राज्यसभा में जाना तय माना जा रहा है। राज्यसभा के लिए बीजेपी के दावेदार मौजूदा राजनीतिक हालात में कृष्णलाल पंवार के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा की एक सीट एक बार फिर से बीजेपी के पास जाती दिखाई दे रही है। ऐसे में इस एक सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी में कई दावेदारों के नामों की चर्चा हो रही है। इनमें भाजपा नेता प्रो. रामबिलास शर्मा, ओमप्रकाश धनखड़, ज्ञानचंद गुप्ता, संजय भाटिया और कुलदीप बिश्नोई के नाम चर्चा में हैं। हो सकता है कि अंदरखाते अन्य नेता भी लॉबिंग में जुटे हों मगर यह सीट किसके पास जाएगी, फिलहाल यह भविष्य के गर्भ में है। बहुमत नहीं होने के कारण विपक्ष की ओर से इस सीट के लिए किसी को प्रत्याशी बनाए जाने की संभावना बहुत कम है।  

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