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यूपी उपचुनाव से पहले सहयोगी दल को सीट ना देने के बाद राजनीति तापमान बढ़ा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में 9 सीट पर होने वाला उपचुनाव बेहद रोचक होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस उपचुनाव में भी जहां लोकसभा चुनाव की तरह इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन के बीच कांटे की फाइट होने की संभावना जताई जा रही थी। वहीं सीट बंटवारे को लेकर फंसे पेंच ने मामला और गरमा दिया है। दोनों गठबंधनों में तमाम बैठकों के बाद भी सीट बंटवारे का मामला सॉल्व नहीं हो पाया है। यहीं वजह है कि समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस और बीजेपी ने निषाद पार्टी को एक भी सीट ना देकर उपचुनाव से पहले करारा झटका दे दिया है। सपा और बीजेपी के इस कदम के बाद सूबे का राजनीति पारा बढ़ गया है। चर्चाओं का दौर जारी है। दरअसल गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी ने यूपी उपचुनाव की 9 में से 7 विधानसभा सीट पर कैंडिडेट घोषित कर दिए हैं। बीजेपी ने उन दो सीट पर भी उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिसको लेकर निषाद पार्टी के अध्यक्ष व यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में जमे हुए हैं। संजय निषाद के बीते दिनों दिए एक बयान से राजनीति गरमा गई थी। निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने साफ-साफ शब्दों में कहा था कि कार्यकर्ताओं की मंशा है कि निषाद पार्टी अपने सिंबल पर चुनाव लड़े। भले ही उम्मीदवार बीजेपी का हो। संजय ने कटेहरी और मझवां सीट पर दावा किया था। ऐसा कहकर संजय निषाद दिल्ली निकल गए थे। कटेहरी और मझवां समेत कुल 7 सीट पर प्रत्याशी घोषित संजय निषाद ने दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई नेताओं से मुलाकात भी की थी। इन सबके बावजूद बीजेपी ने कटेहरी और मझवां समेत कुल 7 सीट पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। बाकी बची दो सीट में से एक आरएलडी को दी है। जबकि एक सीट पर बीजेपी में मंथन चल रहा है। वहीं बीजेपी के टिकट घोषित होने के बाद से संजय निषाद की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि यूपी उपचुनाव से पहले सहयोगी दल को सीट ना देने के बाद राजनीति तापमान बढ़ गया है। फिलहाल सबकी निगाहें निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के अगले कदम पर टिकी हुई है। सपा ने एक भी सीट ना देकर तगड़ा झटका उधर इंडिया गठबंधन में भी सीट बंटवारे पर बात नहीं बन पाई है। समाजवादी पार्टी ने एक भी सीट ना देकर तगड़ा झटका दे दिया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सभी 9 सीट पर सपा सिंबल पर प्रत्याशी उतारने का एलान कर दिया है। इसके बाद इंडिया गठबंधन में भी उपचुनाव से पहले फूट पड़ती नजर आ रही है। हालांकि अखिलेश ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ अपनी एक फोटो पोस्ट कर मामला मैनेज करने की पूरी कोशिश की है। सपा कांग्रेस को दो सीट देना चाहती थी। लेकिन यूपी कांग्रेस के नेता 5 सीट पर दावा ठोक रहे थे। तमाम प्रयासों के बाद भी दोनों दलों के बीच सीट पर बात नहीं बन पा रही थी। इसी क्रम में अखिलेश यादव ने बुधवार रात को एक लंबा-चौड़ा पोस्ट कर सभी 9 सीट पर सपा के सिंबल पर कैंडिडेट उतारने का ऐलान कर दिया है। 10 में से 9 सीट पर 13 नवंबर को वोटिंग मैनपुरी की करहल, मिर्जापुर की मझवां, कानपुर की सीसीमऊ, प्रयागराज की फूलपुर, अयोध्‍या की मिल्‍कीपुर, अंबेडकरनगर की कटेहरी, गाजियाबाद सदर, अलीगढ़ की खैर, मुरादाबाद की कुंदरकी और मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट पर उपचुनाव होना है। इन 10 में से 9 सीट पर 13 नवंबर को वोटिंग होनी है। बीजेपी ने अभी सात सीटों पर उम्‍मीदवारों की घोषणा की है। कुंदरकी सीट से रामवीर सिंह ठाकुर, गाजियाबाद सीट से संजीव शर्मा और खैर (अजा) सीट से सुरेंद्र दिलेर को ट‍िकट द‍िया गया है। जबकि करहल सीट से अनुजेश यादव, फूलपुर सीट से दीपक पटेल, कटेहरी सीट से धर्मराज निषाद और मझवां सीट से सुचिस्मिता मौर्या को कैंडिडेट घोषित किया है।

भाजपा ने इस उपचुनाव को भाजपा ने भतीजे के सामने फूफा को खड़ा कर दिया, करहल सीट पर बड़ा दाव खेला

करहल यूपी में खाली 10 विधानसभा सीटों में 9 सीटों पर उपचुनाव होने वाला है। इस उपचुनाव में गठबंधन की ओर से सभी सीटों पर सपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा जा रहा है। वहीं, वृहस्पतिवार को भाजपा की तरफ से 7 उम्मीदवरों की लिस्ट जारी की गई है। इसमें भाजपा ने करहल सीट पर बड़ा दाव खेला है। दरअसल, इस उपचुनाव को भाजपा ने भतीजे के सामने फूफा को खड़ा कर दिया है। दरअसल भाजपा ने करहल विधानसभा सीट पर मुलायम सिंह यादव के दामाद अनुजेश यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं समाजवादी पार्टी ने इस सीट से तेज प्रताप यादव उम्मीदवार है। ऐसे में ये लड़ाई काफी दिलचस्प होने वाली हैं..क्योंकि अब करहल सीट पर फूफा और भतीजा आमने सामने होंगे। पिछले 2 दशकों से करहल पर सपा का कब्जा बता दें कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि रही करहल पर पिछले दो दशकों से सपा का कब्ज़ा रहा है, कहा जाता है कि दो दशकों के भीतर सपा प्रत्याशी को यहां पर किसी दूसरें दल से लड़ाई तो..बहुत दूर की बात है कभी मजबूत चुनौती तक भी नहीं मिली हैं, लेकिन लगता हैं इस बार बड़ी चुनौती मिल सकती है क्योंकि इस बार सपा को मात देने के लिए भाजपा ने बड़ा दाव खेला है। सपा के किले में सेंध लगाने की तैयारी  भाजपा का भतीजे तेज प्रताप यादव के सामने फूफा अनुजश यादव को उतारने का मकसद यही है कि करहल में सपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगी।  अनुजेश यादव मुलायम सिंह यादव के भाई अभयराम यादव की बेटी संध्या यादव के पति हैं। संध्या यादव, आजमगढ़ से सांसद धर्मेद्र यादव की सगी बहन हैं। संध्या यादव मुलायम परिवार की पहली बेटी हैं, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा था। इतना ही नहीं वो मैनपुरी की जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

आगामी राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा उप-चुनावों के लिए भाजपा ने आठ उम्मीदवारों की घोषणा की

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा उप-चुनावों के लिए अपने आठ उम्मीदवारों की गुरुवार को घोषणा की। पार्टी महासचिव अरुण सिंह ने यहां एक विज्ञप्ति में कहा कि भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति ने राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा के आगामी उप-चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की चौरासी (अजजा) सीट से श्री कारीलाल ननोमा को प्रत्याशी बनाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश में कुंदरकी से श्री रामवीर सिंह ठाकुर, गाजियाबाद से श्री संजीव शर्मा, खैर (अजा) से श्री सुरेंद्र दिलेर, करहल से श्री अनुजेश यादव, फूलपुर से श्री दीपक पटेल, कटेहरी से श्री धर्मराज निषाद तथा मझवां से श्रीमती सुचिस्मिता मौर्या को टिकट दिया गया है।  

अरविंद केजरीवाल करेंगे महाराष्ट्र-झारखंड में प्रचार, INDIA अलायंस और अपनी अन्य सहयोगी पार्टियों के लिए चुनाव प्रचार करेंगे

Arvind Kejriwal will campaign in Maharashtra-Jharkhand, will campaign for INDIA Alliance and his other allies. Arvind Kejriwal Election Campaining Plan: अरविंद केजरीवाल महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव प्रचार करेंगे। कई दलों ने उन्हें अपना स्टार कैंपेनर बनाने के लिए संपर्क किया है, लेकिन अभी तक यह फाइनल नहीं हुआ है कि वे किसके लिए प्रचार करने जाएंगे? Arvind Kejriwal Election Campaining Plan: AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव प्रचार करने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वे अपने सहयोगी INDIA अलायंस और अपनी अन्य सहयोगी पार्टियों के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। केजरीवाल महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी (MVA) के लिए प्रचार करेंगे। विशेष तौर पर शिवसेना UBT और NCP-शरद पवार के उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। इसके लिए दोनों दलों ने AAP से संपर्क किया है। इनके लिए चुनाव प्रचार कर सकते केजरीवालअरविंद केजरीवाल उन विधानसभा सीटों पर ही चुनाव प्रचार करेंगे, जहां पार्टी के वॉलंटियर्स हैं। अरविंद केजरीवाल के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता भी दोनों राज्यों में चुनाव प्रचार करते हुए रैलियां निकाल सकते हैं और जनसभाएं कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल झारखंड में भी चुनाव प्रचार करने जाएंगे। केजरीवाल झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवारों के लिए भी प्रचार कर सकते हैं। अरविंद केजरीवाल इंडिया बलॉक की शहरी सीटों पर प्रचार करेंगे। अरविंद केजरीवाल उन सीटों पर प्रचार करेंगे, जहां उनकी अपील इंडिया अलायंस के लिए वोटों में तब्दील होगी, खासकर शहरी सीटों पर। महाराष्ट्र में एक चरण में वोटिंगबता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 की तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग ने गत 15 अक्टूबर को किया था। महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटों पर 20 नवंबर को वोटिंग होगी। 23 नवंबर को मतगणना के बाद परिणाम आएगा। महाराष्ट्र में मुख्य मुकाबल MAV और सत्तारूढ़ महायुति के बीच है। मुख्य चुनावी मुकाबला 2 गठबंधनों के बीच होगा। सत्तारूढ़ महायुति में भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) शामिल हैं। दूसरा गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) है, जिसमें कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और NCP (शरद पवार) शामिल हैं। दोनों गठबंधनों में सीट शेयरिंग हो चुकी और दोनों उम्मीदवारों की घोषणा भी कर चुके हैं। चुनाव प्रचार भी शुरू हो गया है। झारखंड में 2 चरणों में होगी वोटिंगझारखंड विधानसभा चुनाव 2024 का ऐलान भी चुनाव आयोग ने 15 अक्टूबर को किया था। झारखंड में 13 नवंबर और 20 नवंबर को 2 चरणों में वोटिंग होगी। 23 नवंबर को मतगणना होगी। झारखंड में ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU), जनता दल (यूनाइटेड) (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) गठबंधन में चुनाव लड़ रही हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनावी रण में उतरी है।

बुधनी में नाराजगी नहीं: भाजपा प्रत्याशी के विरोध पर VD शर्मा का बयान

No resentment in Budhni: VD Sharma’s statement on opposition to BJP candidate भोपाल। बुधनी विधानसभा उपचुनाव से पहले भाजपा प्रत्याशी रमाकांत भार्गव का विरोध होने पर बवाल मच गया। कांग्रेस इसे लेकर अब सत्ता पक्ष पर तंज कस रही है। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इस नाराजगी को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि बुधनी में कोई नाराजगी नहीं हैं। बीजेपी में कभी ऐसा नहीं हुआ। शिवराज सिंह जी के नेतृत्व में बुधनी लगातार जीतते आए हैं। बुधनी के साथ विजयपुर भारी बहुमत से जीत रहे हैं। 24 को विजयपुर और 25 अक्टूबर को बुधनी का नामांकन है। बुधनी और विजयपुर के लिए हम तैयार हैं। विजय का इतिहास भारतीय जनता पार्टी बनाएगी। गरीब कल्याण की योजना और हमारे विकास का काम ये हमारी ताकत है। विधानसभा उपचुनाव को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने कहा कि BJP हर जगह षड्यंत्र करने की कोशिश कर रही है। चाहे वो कुछ भी कर लें, दोनों ही सीटों पर कांग्रेस जीत रही है। कांग्रेस ईमानदारी के साथ इन सीटों पर जीत कर आएगी। जनता सब कुछ जानती है और वो उन्हें जवाब भी देगी। बुधनी में BJP की खुद की पार्टी के लोग उनका विरोध कर रहे हैं। वहां खुद अंदरूनी तौर पर षड्यंत्र चल रहा है। अपनी पीड़ा को कहना नाराज़गी नहीं होती: मंत्री राकेश शुक्ला पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह के बयान पर मंत्री राकेश शुक्ला ने पलटवार किया है। उपचुनाव पर कांग्रेस के दावों पर उन्होंने कहा कि रामनिवास नामांकन भरेंगे और मुख्यमंत्री भी जा रहे हैं। हम भी जाएंगे। यहां पर लगातार प्रवास होते रहे हैं और वरिष्ठ नेता भी रहेंगे। भारतीय जनता पार्टी विजयपुर विधानसभा से रामनिवास रावत प्रचंड बहुमत से जीतकर आ रहे हैं। वहीं बुधनी में विरोध के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अपनी पीड़ा को कहना नाराज़गी नहीं होती। पीड़ा उन्होंने अपनी कही है। नेताओं के सामने पीड़ा कहने का अधिकार सबको है। हम सभी लोग मिलकर काम करेंगे और एक साथ मिलकर काम करेंगे तो जीतेंगे।जीतू पटवारी और कांग्रेस क्या कहती है, हमें इस पर नहीं जाना। संगठन और वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में हम जीत रहे हैं।

उमंग सिंघार का ABVP पर हमला: बीजेपी को दलित-आदिवासी विरोधी बताया

Umang Singhar’s attack on ABVP: Called BJP anti-Dalit-Tribal भोपाल। कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर हमला करते हुए उसे दलित और आदिवासी विरोधी बताया है। उन्होंने इंदौर में ABVP के छात्रों के द्वारा हॉस्टल में घुसकर आदिवासी और दलित छात्रों के साथ अभद्रता को लेकर बीजेपी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को आड़े हाथों लिया है। नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्वीट करते हुए लिखा कि भाजपा अपने पाले हुए सड़क छाप गुंडों के जरिए दलित और आदिवासी विरोधी एजेंडा की प्रतिपूर्ति करती है। ये ABVP छात्रों का नहीं कुकृत्य करने वालों का संगठन है, जिसे भाजपा अपनी अगली पीढ़ी के लिए तैयार कर रही है। उमंग सिंघार ने ABVP संगठन पर तंज कसते हुए कहा कि ये लोग आदिवासी और दलित छात्रों को अपना निशाना बनाते रहते हैं। दो दिन पहले भाजपा की नई पीढ़ी ABVP के “गुंडे” इंदौर में आदिवासी और दलित छात्रों को उनके होस्टल कैम्पस में जाकर गालियां दी और होस्टल पर पत्थर फेंके। कानून को मजाक समझने वालों पर मौन यादव कार्रवाई करेंगे या दलित और आदिवासी अत्याचारों पर भी “मौन” रहेंगे? सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव जी इस मामले पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने के आदेश दें।

अध्यक्ष नड्डा ने मप्र भाजपा के ‘I am BJP Future Force’ अभियान की तारीफ की और उन्होंने अन्य राज्यों को भी इसे अपनाने को कहा

भोपाल मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने के उद्देश्य से ‘आई एम बीजेपी फ्यूचर’ नामक अनूठे सदस्यता अभियान का आयोजन किया। इस अभियान की सफलता ने राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी का ध्यान आकर्षित किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस अभियान की प्रशंसा की और कहा कि मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। ‘आई एम बीजेपी फ्यूचर’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गैर-राजनीतिक युवाओं और प्रोफेशनल्स को पार्टी की विचारधारा से जोड़ना था। मध्य प्रदेश के भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, और इंदौर में आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए 5000 से ज्यादा प्रोफेशनल्स ने भाजपा की सदस्यता ली। इस अनूठी पहल के तहत मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नड्डा ने की तारीफ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश भाजपा का यह कदम एक मिसाल है। प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने में मध्यप्रदेश भाजपा अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सभी राज्यों को भी इस तरह के प्रोग्राम आयोजित करने चाहिए, ताकि युवा और प्रोफेशनल्स राजनीति में शामिल हो सकें और 2047 के विकसित भारत के सपने को साकार कर सकें। चार प्रमुख शहरों में सफलता का सफर भोपाल (5 अक्तूबर): सफल लांच भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित इस अभियान का लांच 5 अक्तूबर को हुआ, जहां 150 प्रोफेशनल्स ने भाजपा की सदस्यता ली। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया और पार्टी के मूल्यों व दृष्टिकोण को साझा किया। जबलपुर (11 अक्तूबर): जोश और उमंग जबलपुर में 11 अक्तूबर को 300 से अधिक प्रोफेशनल्स भाजपा से जुड़े। वीडी शर्मा ने इस अवसर पर कहा, “युवा प्रोफेशनल्स का जुड़ना पार्टी के लिए एक नई ऊर्जा का संचार है।” उज्जैन (13 अक्तूबर): मुख्यमंत्री का नेतृत्व उज्जैन में 13 अक्तूबर को 500 से अधिक प्रोफेशनल्स ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया और प्रोफेशनल्स को भाजपा की विचारधारा से अवगत कराया। इंदौर (15 अक्तूबर): ग्रैंड फिनाले इंदौर में आयोजित ग्रैंड फिनाले में 1500 से अधिक प्रोफेशनल्स भाजपा से जुड़े। वीडी शर्मा ने इस मौके पर कहा, “यह कार्यक्रम हमारे भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।

मदरसों को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने फंडिंग बंद करने और ट्रांसफर आदेश पर लगाई रोक

Relief to Madrassas: Supreme Court bans stop funding and transfer order नई दिल्ली ! सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की उन सिफारिशों पर रोक लगा दी, जिनमें शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 (RTE Act 2009) का पालन न करने वाले मदरसों की मान्यता रद्द करने, उनकी सरकारी फंडिंग रोकने और सभी मदरसों का निरीक्षण करने की बात कही गई थी। इसके साथ ही, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गैर-मान्यता प्राप्त और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले गैर-मुस्लिम विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित करने के आदेश पर भी रोक लगा दी है। NCPCR की सिफारिश क्या थी?NCPCR ने सिफारिश की थी कि जो मदरसे शिक्षा के अधिकार अधिनियम का पालन नहीं करते, उनकी सरकारी मदद बंद कर दी जानी चाहिए। आयोग ने सभी मदरसों का निरीक्षण करने की भी सिफारिश की थी, ताकि यह देखा जा सके कि वे शिक्षा के मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। सुप्रीम कोर्ट में इस सिफारिश के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने याचिका दायर की थी, जिस पर चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाने की अनुमति भी दी है, ताकि व्यापक रूप से सभी मदरसों की स्थिति पर विचार हो सके। पूरा मामला क्या है?एनसीपीसीआर ने उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा सरकार को पत्र लिखकर सभी मदरसों का निरीक्षण करने और उनकी जांच करने का निर्देश दिया था। यूपी के मुख्य सचिव ने इस पत्र के जवाब में सभी जिलाधिकारियों को मदरसों की विस्तृत जांच का आदेश दिया था। इसी तरह त्रिपुरा सरकार ने भी अगस्त में मदरसों की जांच के निर्देश दिए थे। उत्तर प्रदेश सरकार को दूसरा झटका:यह उत्तर प्रदेश सरकार को मदरसों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से मिला दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने मदरसा अधिनियम, 2004 को रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई थी। उस मामले की याचिका अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से स्पष्ट है कि मदरसों की फंडिंग फिलहाल जारी रहेगी और गैर-मुस्लिम विद्यार्थियों को जबरन सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई तक, मदरसे अपनी वर्तमान स्थिति में कार्यरत रहेंगे।

विंध्य के उद्योगपतियों को मिलेगी नई सुविधाएं: CM डॉ. मोहन यादव की पहल, रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में होंगे बड़े फैसले

Industrialists of Vindhya will get new facilities: Initiative of CM Dr. Mohan Yadav, big decisions will be taken in the Regional Industry Conclave भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विंध्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक नई दिशा तय की है। उनकी सरकार ने उद्योगपतियों को बेहतर सुविधाएं और समर्थन प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हाल ही में, उन्होंने विंध्य क्षेत्र के उद्योगपतियों के लिए कंटेनर सुविधा की घोषणा की, जिससे निर्यात और व्यापार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही, उद्योगों के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए कलेक्टर और कमिश्नर को निर्देश दिए गए हैं। 23 अक्टूबर को रीवा में होगा रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव मुख्यमंत्री ने कहा कि 23 अक्टूबर को रीवा में आयोजित होने वाला रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव विंध्य क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इस कॉन्क्लेव में 50 बड़े उद्योगपतियों समेत 3,000 से अधिक उद्योगपति पंजीकृत हैं। कॉन्क्लेव का उद्देश्य व्यापार और औद्योगिक वातावरण को सशक्त बनाना, व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा देना और राज्य के आर्थिक विकास को एक नई दिशा देना है। उद्योगपतियों के खाते में सीधे अनुदान राशि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि वर्ष 2022-23 के लिए उद्योगों के अनुदान की राशि जारी कर दी गई है, जिसे सीधे उद्योगपतियों के खाते में स्थानांतरित किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य है कि उद्योगपतियों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सके और उनके व्यापार को कोई बाधा न आए। यह पहल निवेशकों को राज्य में उद्योग स्थापित करने और उसे विस्तार देने में मदद करेगी। दोहरे कराधान से मिलेगी राहत विंध्य क्षेत्र के उद्योगपतियों के लिए एक और बड़ी राहत यह है कि औद्योगिक क्षेत्रों में दोहरा कराधान नहीं लगेगा। यह निर्णय उद्योगों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगा और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार व्यापारियों की समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। व्यापारिक सुगमता और नए अवसर इस कॉन्क्लेव में “ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस” को और भी सशक्त करने के लिए एमपी इंडस्ट्रियल डेव्लपमेंट कॉरपोरेशन प्रमुख भूमिका निभाएगा। एमएसएमई विभाग भी छोटे और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाओं और समर्थन कार्यक्रमों की जानकारी देगा, जिससे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। निर्यात और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को मिलेगी रफ्तार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए डायरेक्टोरेट ऑफ फॉरेन ट्रेड मार्गदर्शन प्रदान करेगा, और कस्टम विभाग आयात-निर्यात प्रक्रियाओं पर जानकारी देगा। इसके अलावा, ईसीजीसी क्रेडिट बीमा और वित्तीय सेवाओं की जानकारी देकर निर्यातकों को वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा। पर्यटन, हस्तशिल्प, और कृषि उद्योग को बढ़ावा कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा राज्य में पर्यटन स्थलों और निवेश के अवसरों की जानकारी दी जाएगी। हस्तशिल्प विकास निगम भी अपने उत्पादों को बाजार में लाने के नए तरीके साझा करेगा। इसके अलावा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए भी सुनहरे अवसर होंगे, जिसमें कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए विशेष जानकारी दी जाएगी। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं का समर्थन बिजनेस और उद्योगों के वित्तीय सहयोग के लिए यूनियन बैंक और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा वित्तीय सेवाओं की जानकारी दी जाएगी, जिससे निवेशकों को व्यवसाय स्थापित करने में सहयोग मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल से विंध्य क्षेत्र में उद्योगपतियों को नई सुविधाएं मिलेंगी, जो राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को गति देंगी। रीवा में होने वाला रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव व्यापार, उद्योग, कृषि, और पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर सृजित करेगा, जिससे न केवल विंध्य बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में विकास की लहर दौड़ेगी।

हरियाणा में राज्यसभा के लिए BJP के कई दावेदार, कृष्णलाल पंवार के इस्तीफे से खाली हुई एक सीट

चंडीगढ़ हाल ही में हरियाणा में हुए विधानसभा चुनाव में इसराना से चुनाव जीतने के बाद कृष्णलाल पंवार ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने पंवार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। ऐसे में राज्यसभा में हरियाणा के हिस्से की एक सीट खाली हो गई है। हालांकि खाली हुई इस एक सीट के लिए चुनाव कब होंगे, इसकी अभी अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चर्चा है कि हरियाणा में विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद कभी भी राज्यसभा की एक खाली हुई सीट के लिए चुनाव हो सकते हैं। राज्यसभा के सदस्य के रूप में कृष्णलाल पंवार का कार्यकाल एक अगस्त 2028 तक का था। उन्होंने 23 अगस्त 2022 को शपथ ग्रहण की थी। ऐसे में अब भारतीय जनता पार्टी की ओर से करीब चार साल के लिए अपने प्रत्याशी को राज्यसभा में भेजा जाएगा। इस्तीफा देकर मांगा था आशीर्वाद कृष्ण लाल पंवार ने हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा था, जिसके बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि इसराना के विधायक के रूप में जनसेवा के अपने नए कर्तव्य की ओर कदम बढ़ाए। नई पारी की शुरुआत के लिए सभी अपना आशीर्वाद प्रदान करें। उन्होंने आगे लिखा था कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में इसराना को एक बेहतर और विकसित क्षेत्र बनाने के लिए कृत संकल्पित हूं। बता दें कि पंवार हरियाणा बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। बीजेपी ने सहेजी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत बता दें कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड्डा की ओर से राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने किरण चौधरी को राज्यसभा में भेजा था। किरण चौधरी का राज्यसभा के सदस्य के रूप में 9 अप्रैल 2026 तक का कार्यकाल है। किरण चौधरी ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद अपनी बेटी और समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके एवज में भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत को सहेजते हुए किरण चौधरी को राज्यसभा में भेजने का काम किया। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने तोशाम से किरण चौधरी की बेटी श्रुति को अपना उम्मीदवार बनाया। तोशाम से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी ने उन्हें प्रदेश की नायब कैबिनेट में भी स्थान दिया। हरियाणा की राज्यसभा सीटों का गणित हरियाणा की अन्य राज्यसभा सीटों की बात करें तो इनमें बीजेपी के रामचंद्र जांगड़ा 10 अप्रैल 2020 को राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे, जिनका कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक का है। इसी प्रकार से बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला जो 3 अप्रैल 2024 को राज्यसभा के सदस्य मनोनित हुए थे, का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक है। इसी प्रकार से बीजेपी में शामिल होने के बाद राज्यसभा पहुंची किरण चौधरी का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक का है। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा का चुनाव लड़े कार्तिकेय शर्मा ने 2 अगस्त 2022 को राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ ली थी, इनका कार्यकाल 1 अगस्त 2028 तक का है। हालांकि कार्तिकेय को बीजेपी की ओर से समर्थन दिया गया था। इसी प्रकार से बीजेपी की ओर से राज्यसभा में गए कृष्णलाल पंवार ने 23 अगस्त 2022 को शपथ ग्रहण की थी, जिनका कार्यकाल एक अगस्त 2028 तक था, लेकिन अब उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा में हरियाणा के हिस्से की एक सीट खाली हो गई है। बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत हरियाणा विधानसभा के ताजा आंकड़ों को देखे तो इस बार भारतीय जनता पार्टी के पास खुद के 48 विधायक है। इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायकों का भी बीजेपी को समर्थन हैं, जबकि कांग्रेस के 37 और इनेलो के 2 विधायक है। ऐसे में यह साफ है कि कोई भी अन्य दल राज्यसभा के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के खिलाफ अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारेगा, जिससे बीजेपी उम्मीदवार का निर्विरोध राज्यसभा में जाना तय माना जा रहा है। राज्यसभा के लिए बीजेपी के दावेदार मौजूदा राजनीतिक हालात में कृष्णलाल पंवार के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा की एक सीट एक बार फिर से बीजेपी के पास जाती दिखाई दे रही है। ऐसे में इस एक सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी में कई दावेदारों के नामों की चर्चा हो रही है। इनमें भाजपा नेता प्रो. रामबिलास शर्मा, ओमप्रकाश धनखड़, ज्ञानचंद गुप्ता, संजय भाटिया और कुलदीप बिश्नोई के नाम चर्चा में हैं। हो सकता है कि अंदरखाते अन्य नेता भी लॉबिंग में जुटे हों मगर यह सीट किसके पास जाएगी, फिलहाल यह भविष्य के गर्भ में है। बहुमत नहीं होने के कारण विपक्ष की ओर से इस सीट के लिए किसी को प्रत्याशी बनाए जाने की संभावना बहुत कम है।  

शिवराज का रुतबा काम ना आया ,कार्तिकेय की लॉन्चिंग पर संगठन ने लगाया ब्रेक

Shivraj’s status did not work, organization put brakes on Karthikeya’s launch बुधनी उपचुनाव में बीजेपी ने रामाकांत भार्गव को टिकट दिया है। यह शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाते हैं। साथ ही लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिवराज के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी। इस सीट से शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम चल रहा था। भोपाल: बुधनी उपचुनाव के लिए बीजेपी ने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। इस रेस में कई नाम थे। रेस में सबसे आगे शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम चल रहा था। इसके बाद विदिशा के पूर्व सांसद रामाकांत भार्गव के नाम की चर्चा थी। दिल्ली ने रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगाई है। ऐसे में चर्चा है कि शिवराज के दबदबे वाली सीट पर रामाकांत भार्गव की लॉटरी कैसे लग गई है। कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम की थी चर्चा दरअसल, शिवराज सिंह चौहान के विदिशा सीट से सांसद बनने के बाद बुधनी विधानसभा सीट खाली हुई थी। बुधनी में उपचुनाव की तारीख घोषित हो गई है। इसके बाद से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि शिवराज सिंह चौहान का वारिस कौन होगा। इस रेस में सबसे आगे कार्तिकेय सिंह चौहान ही चल रहे थे। वह पिता की सीट पर लगातार मेहनत भी कर रहे थे। उनके समर्थकों की इच्छा भी थी कि बुधनी से कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम पर ही मुहर लगे। वही प्रदेश चुनाव समिति की तरफ से पैनल में जो नाम भेजा गया था, उसमें कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम था। दिल्ली में नहीं बनी सहमति टिकट की घोषणा से दो दिन पहले शिवराज सिंह चौहान अपने बेटों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शादी का न्यौता देने गए थे। इसके बाद एमपी में अटकलें शुरू हो गई थीं कि कार्तिकेय सिंह चौहान को पीएम मोदी का आशीर्वाद मिल सकता है। चुनाव समिति की बैठक के बाद नामों की सूची आई तो रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगी है। परिवारवाद से पार्टी ने बनाई दूरी कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में पार्टी परिवारवाद से दूर है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी नेता पुत्रों को पार्टी ने टिकट नहीं दिया। मध्य प्रदेश में कई बड़े नेताओं के पुत्र राजनीति में एंट्री के लिए ललायित हैं लेकिन पार्टी ने सभी की एंट्री पर ब्रेक लगा रखी है। अगर शिवराज सिंह चौहान के बेटे को टिकट देती तो गलत नैरेटिव गढ़ा जाता। शायद इससे बचने के लिए पार्टी ने यह फैसला लिया है। रामाकांत भार्गव हैं शिवराज सिंह चौहान के खास वहीं, रामाकांत भार्गव भी शिवराज सिंह चौहान के खास माने जाते हैं। शिवराज सिंह चौहान पहले विदिशा सीट से सांसद थे। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जब विदिशा से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया तो शिवराज की पसंद और करीबी रहे रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में रामाकांत भार्गव ने शिवराज सिंह चौहान के लिए सीट छोड़ दी। शिवराज सिंह चौहान विदिशा से सांसद बन गए हैं। वहीं, बुधनी में शिवराज की विरासत को अब रामाकांत भार्गव संभालेंगे। चुनाव प्रचार में जुट गए कार्तिकेय रामाकांत भार्गव के नाम पर मुहर लगने के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान पहली बार मीडिया के सामने आए तो उनके चेहरे पर शिकन भी देखने को मिला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रामाकांत भार्गव हमारे पितातुल्य हैं। मैं उनके लिए चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहा हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि मैंने चुनाव लड़ने की मंशा से कभी काम नहीं किया। यह मेरा सौभाग्य है कि कार्यकर्ताओं ने मेरा नाम पैनल तक पहुंचाया है। हम रामाकांत भार्गव के लिए दोगुनी ताकत के साथ चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे।

कथावाचक चिन्मयानंद बापू ,ने साधा निशाना, बोले- ‘ज्यादातर मूर्ख लोग ही राजनीति में आते हैं’

Storyteller Chinmayanand Bapu took aim, said – ‘Mostly fools come into politics’ MP News: मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां भागवत कथा करने पहुंचे प्रसिद्ध कथावाचक चिन्मयानंद बापू ने श्योपुर विधायक के भगवान शंकर पर दिए आपत्तिजनक बयान के वीडियो के बारे में बड़ी कही है। उन्होंने कहा कि मूर्ख लोग राजनीति में आ गए हैं। क्या बोले चिन्मयानंद बापूशिवपुरी में आयोजित कथा के दौरान प्रसिद्ध कथावाचक चिन्मयानंद बापू ने कहा कि ज्यादातर मूर्ख लोग राजनीति में आ गए है, जिन्हें धर्मशास्त्र एवं धर्म का कोई ज्ञान नहीं है। वह राजनीति में आकर कुछ भी बोल सकते है।यह वीडियो बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सलूजा ने एक्स पर पोस्ट किया है। बीजेपी इस मामले को भूनने की पूरी कोशिश कर रही है। वहीं कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। श्योपुर विधायक के विवादित बयान को लेकर हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने तुकोगंज थाने में मामला दर्ज कराया है। मंच के द्वारा एफआईआर करने का आवेदन दिया गया। जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।

सिंहस्थ के लिए 5900 करोड़ मंजूर, 568 प्रस्तावों पर सीएम ने दी मंजूरी

Rs 5900 crore approved for Simhastha, CM approves 568 proposals Ujjain Simhastha: सिंहस्थ 2028 के लिए 5,882 करोड़ रुपए का बजट मंजूर हुआ है। परियोजनाओं में घाटों का निर्माण, नदी डायवर्जन, बांध, बैराज, सबस्टेशन, सड़कें और पुल शामिल हैं। 18 विभागों से 560 से अधिक परियोजनाओं के प्रस्ताव मिले हैं। इंदौर-उज्जैन मेट्रो लाइन का सर्वेक्षण दिल्ली मेट्रो को सौंपा गया है। सरकार 15 करोड़ भक्तों के आने की उम्मीद कर रही है। उज्जैन: सिंहस्थ 2028 से जुड़ी 19 पहलों के लिए 5,882 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया है। यह मंजूरी इस महीने की शुरुआत में सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट कमेटी की बैठक में मिली। बैठक में जल संसाधन, नगरीय प्रशासन एवं विकास, ऊर्जा, लोक निर्माण, संस्कृति और पुरातत्व विभागों की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। सीएम ने कहा कि हर 12 साल में सिंहस्थ सभी को एक साथ लाता है। दुनिया भर से करीब 15 करोड़ आगंतुकों के आने की उम्मीद करते हुए उन्होंने कहा कि उज्जैन में कुशल यातायात व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। इन योजनाओं को मिली मंजूरीकैबिनेट समिति ने सिंहस्थ 2028 के लिए कई परियोजनाओं को मंजूरी दी। जिसमें 778.91 करोड़ रुपये की लागत से 29.21 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण होगा। 1,024.95 करोड़ रुपये की लागत से कान्ह नदी का 30.15 किलोमीटर का डायवर्जन शामिल है। क्षिप्रा पर होगा बांध का निर्माणक्षिप्रा नदी पर सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी बांध के निर्माण के लिए 614.53 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। जल विनियमन के लिए क्षिप्रा नदी पर 14 और कान्ह नदी पर 11 प्रस्तावित बैराजों को मंजूरी दी गई, जिनकी लागत क्रमशः 74.67 करोड़ रुपये और 43.51 करोड़ रुपये है। नए ईएचवी सबस्टेशन की सौगातअन्य स्वीकृत परियोजनाओं में 198 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ उज्जैन शहर सीवरेज परियोजना और 250 करोड़ रुपये की लागत से अल्ट्रा-हाई-प्रेशर कार्य के लिए एक नया ईएचवी सबस्टेशन शामिल है। स्वीकृत अतिरिक्त परियोजनाओं में शंकराचार्य चौराहे से दत्त अखाड़ा, भूखीमाता और उजड़खेड़ा हनुमान से उज्जैन-बड़नगर मार्ग का निर्माण शामिल है। इसके लिए 18 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यहां भी होंगे विकास कार्यसाथ ही खाक-चौक, वीर सावरकर चौराहा, गढ़कालिका और भरथरी गुफा से रणजीत हनुमान मार्ग का उन्नयन और क्षिप्रा नदी पर एक पुल भी शामिल है, जिसकी लागत भी 18 करोड़ रुपये है। सिद्धवरकूट से कैलाश खोह तक एक सस्पेंशन ब्रिज के साथ-साथ ओंकारेश्वर घाट से सिद्धवरकूट तक पहुंच मार्ग और कावेरी नदी पर एक फुटब्रिज जैसे सुरक्षात्मक कार्यों को भी मंजूरी दी गई। 18 विभागों से 568 परियोजनाओं के प्रस्तावनगरीय प्रशासन और आवास के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने कहा कि 18 विभागों में 568 परियोजनाओं के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनकी अनुमानित लागत 15,567 करोड़ रुपये है। एमपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने आगे घोषणा की कि इंदौर के लवकुश चौराहे को उज्जैन से जोड़ने वाली एक नई मेट्रो लाइन के सर्वेक्षण का काम दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को सौंपा गया है।

अहिल्या माता और शिवाजी पर सियासत: कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, नाम परिवर्तन पर टकराव

Politics on Ahilya Mata and Shivaji: Congress-BJP face to face, clash over name change इंदौर में हुई मेयर इन काउंसिल की बैठक में रेसीडेंसी कोठी का नाम बदलकर शिवाजी कोठी (शिवाजी वाटिका) करने का प्रस्ताव पास होने के बाद राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। कांग्रेस नेता राकेश सिंह यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि यह कदम महाराष्ट्र में आगामी चुनावों के मद्देनजर उठाया गया है, ताकि वहां के वोट बैंक को साधा जा सके। उनका कहना है कि यह देवी अहिल्या बाई होलकर की उपेक्षा है, जिन्होंने इंदौर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। कांग्रेस बोली अहिल्या रेसीडेंसी नाम करना थारेसीडेंसी कोठी, जो लगभग 204 वर्ष पुरानी है और अंग्रेजी शासन के दौरान मालवा-निमाड क्षेत्र में ब्रिटिश सत्ता का केंद्र थी, का नामकरण शिवाजी महाराज के नाम पर किए जाने से कांग्रेस असहमत है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव ने भी सोशल मीडिया पर इस फैसले की आलोचना की और सुझाव दिया कि इसे देवी अहिल्या रेसीडेंसी कोठी नाम दिया जाना चाहिए था। गफ्फूर खां की बजरिया पर नहीं हुआ निर्णयसाथ ही, अन्य नामकरणों की भी बैठक में स्वीकृति दी गई, जिसमें फूटी कोठी ब्रिज का नाम सेवालाल महाराज ब्रिज और भंवरकुआं चौराहे का नाम टंट्या भील चौराहा रखा गया है। इसके अलावा, बीजेपी नेता वरुण पाल ने गफ्फूर खां की बजरिया का नाम बदलकर वीरांगना तुलसाबाई होलकर के नाम पर करने की मांग भी की थी, हालांकि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। दोनों के अपने तर्कइस नामकरण विवाद से दोनों दलों के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस इसे ऐतिहासिक व्यक्तियों के सम्मान से जोड़कर देख रही है, जबकि बीजेपी इसे अपने राजनीतिक एजेंडे के तहत नामकरण के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

एमपी गजब : महाकाल मंदिर नियमों की धज्जियां उड़ाते नेता, गाज गिरी कर्मचारियों पर ,एक कर्मचारी को हटाया, तीन को नोटिस

MP Amazing: Leader flouting Mahakal Temple rules, got angry on employees, removed one employee, notice to three ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के गर्भगृह में राजनीतिक हस्तियों के प्रवेश पर एक बार फिर मंदिर प्रबंध समिति सवालों के घेरे में है। गुरुवार शाम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे व सांसद श्रीकांत शिंदे पत्नी और दो अन्य लोगों के साथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर गए और पांच मिनट से भी अधिक समय तक पूजन करते रहे। इस दौरान उन्हें नियमानुसार रोका जाना चाहिए था। उज्जैन(Mahakal Mandir Ujjain)। महाकाल मंदिर के गर्भगृह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के बेटे और परिजनों सहित 4 लोगों के प्रवेश करने के मामले में एक कर्मचारी को हटाया गया। साथ ही सुरक्षा एजेंसी सहित तीन कर्मचारियों को नोटिस थमाया गया। नोटिस का जवाब 24 घंटे में मांगा गया है। महाकाल मंदिर प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ ने मंदिर समिति के कर्मचारी विनोद चौकसे को हटाया। विनोद की ड्यूटी मंदिर के सभामंडप व जलद्वार पर प्रभारी के रूप में थी। साथ ही मंदिर के गर्भगृह और नंदीहॉल निरीक्षक, प्रोटोकॉल कर्मचारी और क्रिस्टल कंपनी को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। आम भक्तों में आक्रोशआम भक्त लंबे समय से महाकाल के गर्भगृह में प्रवेश देने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में जब प्रवेश की अनुमति ना होने के बाद भी वीआईपी अंदर जाते हैं, तो आम भक्त खुद को ढगा सा महसूस करते हैं। कई बार श्रद्धालु इसको लेकर आक्रोश भी जता चुके हैं। सुरक्षा की दृष्टि से उठाया गया कदमसहायक प्रशासनिक अधिकारी आरके तिवारी ने बताया महाकाल मंदिर में सुरक्षा व सुविधा की दृष्टि से मंदिर के आंतरिक क्षेत्र अर्थात गर्भगृह, नंदी मंडपम्, गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम, सभा मंडप, गर्भगृह का गलियारा तथा संपूर्ण परिसर में व्यावसायिक दृष्टिकोण से वीडियोग्राफी करने पर रोक लगा दी गई है। पूर्व में मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में इस पर निर्णय लिया गया था। पहले कम था शुल्कमहाकाल महालोक को प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है, यहां कोई भी व्यक्ति निर्धारित शुल्क चुकाकर वीडियोग्राफी कर सकता है। प्रबंध समिति की बैठक में वीडियोग्राफी के शुल्क में वृद्धि की गई है। पहले मंदिर में वीडियोग्राफी करने पर 5100 रुपये शुल्क चुकाना होता था। लेकिन अब महाकाल महालोक में वीडियोग्राफी के लिए 51000 रुपये शुल्क चुकाना होगा।

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