LATEST NEWS

BJP विधायक दल की बैठक में हुआ फैसला, ओडिशा के नए मुख्यमंत्री होंगे मोहन मांझी

ओडिशा मोहन मांझी ओडिशा के नए मुख्यमंत्री होंगे। बीजेपी विधायक दल की बैठक में मोहन मांझी को नेता चुना गया। इसके साथ ही केवी देव सिंह और प्रभाती परिदा दो डिप्टी सीएम भी बनाए गए हैं। ओडिशा में नई सरकार कल शपथ लेगी। सूत्रों के मुताबिक, शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजना सिंह शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं। शपथग्रहण समारोह में ओडिशा के निवर्तमान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी शामिल हो सकते हैं। बीजेपी के पांच नेताओं ने नवीन पटनायक को शपथग्रहण में शामिल होने का न्यौता दिया है। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव पर्यवेक्षक बनकर ओडिशा गए थे। भुवनेश्वर में बीजेपी विधायक दल की बैठक हुई। इस बैठक में राजनाथ सिंह और भूपेंद्र सिंह ने बतौर पर्यवेक्षक हिस्सा लिया। सूत्रों के मुताबिक, राजनाथ सिंह ने मोहन मांझी के नाम को आगे बढ़ाया और सभी विधायकों ने इस पर अपनी सहमति जता दी। इसके साथ ही दो उपमुख्यमंत्रियों के नाम का भी ऐलान हुआ। अश्विनी वैष्णव भी बैठक में मौजूद रहे। राजनाथ सिंह ने मोहन मांझी को गुलदस्ता देकर शुभकामनाएं दीं।   राजनाथ सिंह ने बताया कि केवी देव सिंह ने मोहन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही विधायकों ने तालियां बजाकर मोहन मांझी के नाम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री के रूप में केवी देव सिंह और प्रभाती परिदा को नामित किया है। मोहन मांझी के नाम का ऐलान होते ही बधाईयों का तांता लग गया है। सभी विधायक उन्हें बधाई दे रहे हैं। मोहन मांझी आदिवासी समाज से आते हैं। छत्तीसगढ़ के बाद बीजेपी ने दूसरा आदिवासी मुख्यमंत्री बनाया है। बता दें कि लोकसभा चुनाव के साथ हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 147 सीटों में से 78 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं नवीन पटनायक की अगुवाई वाली बीजू जनता दल (BJD) को 51 सीटें मिली हैं। कांग्रेस को 14 और चार सीटें अन्य को मिली हैं। बीजेपी ने इस विधानसभा चुनाव में बीजेडी के 25 साल के शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की है।

अमरवाड़ा उपचुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने शुरू की तैयारियां

भोपाल मध्य प्रदेश में एक बार फिर से चुनावी रणभेरी बज गई है. छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. उपचुनाव का ऐलान होते ही एक तरफ कांग्रेस ने जहां अमरवाड़ा में दो पर्यवेक्षकों की नियुक्तियां कर दी तो वहीं दूसरी तरफ मंगलवार को बीजेपी के संभावित प्रत्याशी पूर्व विधायक कमलेश शाह और नए सांसद विवेक बंटी साहू ने सीएम मोहन यादव से मुलाकात कर चुनावी तैयारियों की जानकारी दी. जिससे अमरवाड़ा में सियासी हलचल तेज हो गई है. सीएम मोहन से मिले कमलेश शाह बीजेपी ने भी अमरवाड़ा विधानसभा सीट के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है. कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल होने वाले पूर्व विधायक कमलेश शाह ने छिंदवाड़ा के नए सांसद विवेक बंटी साहू के साथ सीएम मोहन यादव से मुलाकात की है. कमलेश शाह विधायकी से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए थे, ऐसे में माना जा रहा है कि वह ही बीजेपी के संभावित प्रत्याशी होंगे. माना जा रहा  है कि कमलेश शाह के नाम का ऐलान होते ही बीजेपी अमरवाड़ा में प्रचार की शुरुआत करेगी, जबकि सीएम मोहन यादव भी जल्द ही अमरवाड़ा का दौरा कर सकते हैं. कांग्रेस ने बनाए दो पर्यवेक्षक कांग्रेस ने अमरवाड़ा विधानसभा के उपचुनाव के लिए दो पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी. बताया जा रहा है कि कमलनाथ और नकुलनाथ से चर्चा के बाद पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे और पूर्व विधायक सुनील जायसवाल को अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर प्रभारी बनाया है. क्योंकि माना जा रहा है कि अमरवाड़ा उपचुनाव कांग्रेस पार्टी कमलनाथ और नकुलनाथ के नेतृत्व में ही लड़ेगी. ऐसे में पार्टी ने उनके ही करीबियों को पर्यवेक्षक बनाया है. जहां दोनों नेता स्थानीय नेताओं के साथ रायशुमारी के बाद अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी का चयन करेंगे. अमरवाड़ा में धारा-144 लागू अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर धारा-144 लागू हो गई है. 10 जुलाई को अमरवाड़ा सीट पर वोटिंग होनी है, जबकि 13 जुलाई को यहां के नतीजें आएंगे. ऐसे में छिंदवाड़ा चुनाव का ऐलान होते ही पूरे क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है. ऐसे में जिला प्रशासन ने यहां पुलिस को अलर्ट कर दिया है. लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिली है जीत छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर बीजेपी को इस बार जीत मिली है. बीजेपी ने कांग्रेस का सालों पुराना गढ़ इस बार भेद दिया. बीजेपी के विवेक बंटी साहू ने कांग्रेस के नकुलनाथ को हराया है. उनकी जीत में कमलेश शाह का भी अहम योगदान माना जा रहा है कि क्योंकि अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर बीजेपी ने अच्छी लीड बनाई है. ऐसे में बीजेपी लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित नजर आ रही है. माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही उपचुनाव का प्रचार शुरू कर देगी. 

अरुणाचल प्रदेश के लिए रविशंकर, चुघ होंगे भाजपा के केन्द्रीय पर्यवेक्षक

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संसदीय बोर्ड ने अरुणाचल प्रदेश में पार्टी विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए सांसद रविशंकर प्रसाद और पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्ति किया है। हाल के अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला है। राज्य की साठ विधानसभा सीट में से भाजपा ने 46 पर जीत दर्ज की। जबकि नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने पांच सीट हासिल कीं। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने तीन, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल ने दो, कांग्रेस ने एक और निर्दलीयों ने तीन सीट पर जीत हासिल कीं। इससे पहले भाजपा अरुणाचल प्रदेश प्रमुख बियुराम वाहगे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू और बाकी के विधायक और भाजपा नेता केंद्र सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होन के लिए (नई दिल्ली) गए हुए हैं। हम उनके और हाईकमान की तरह से किसी पर्यवक्षेक का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही वह यहां आते हैं और नए विधायकों के साथ मिलकर विधायक दल के नेता का चुनाव कर लेते हैं, वैसे ही शपथ ग्रहण की तैयारियां शुरू की जाएंगी। फिलहाल कोई तारीख तय नहीं हुई है। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल कैवल्य परनायक ने 2 जून को विधानसभा भंग कर दी थी और मुख्यमंत्री पेमा खांडू को नई सरकार के पदभार ग्रहण करने तक मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा था। सिक्किम: लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने तमांग वहीं, पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम में प्रेम सिंह तमांग लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने सोमवार को गंगटोक के पल्जोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ ही आठ विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। सिक्किम की विधानसभा में कुल 32 सीट हैं। तमान की पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने 31 सीट पर जीत दर्ज की। मतदान 19 अप्रैल को एक चरण में हुआ था। नतीजे दो जून को सामने आए थे।    

DK शिवकुमार बोले- लोकसभा रिजल्ट के अनुसार कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी

बेंगलुरु लोकसभा चुनाव में कर्नाटक कांग्रेस को जितनी अपेक्षा थी उससे खराब प्रदर्शन रहा। पार्टी ने 20 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था लेकिन महज 9 सीटों से ही कांग्रेस को संतोष करना पड़ा। कर्नाटक विधानसभा में प्रचंड जीत का कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में कोई फायदा नहीं मिला। अब सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर पांच गारंटियों के पुनर्मूल्यांकन की मांग करने वाली आवाजें तेज हो गई हैं क्योंकि कांग्रेस इन कार्यक्रमों पर सालाना 52,000 करोड़ रुपये खर्च करने का वादा करने के बाद भी लोकसभा चुनावों में दूसरे स्थान पर रही। गारंटी के वादे के साथ पार्टी पिछले साल विधानसभा चुनावों में सत्ता में आई थी, जिसके तहत एक के बाद एक कार्यक्रम शुरू किए गए। योजनाओं में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, महीने में 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की आपूर्ति और परिवार की प्रत्येक महिला मुखिया को हर महीने 2000 रुपये देने का वादा शामिल है। पार्टी ने कर्नाटक में शुरू किए गए मॉडल को अन्य राज्य विधानसभा चुनावों के साथ-साथ हाल के लोकसभा चुनावों में भी दोहराया। लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस विधायक एचसी बालकृष्ण (मगदी) ने सबसे पहले ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ को लेकर विचार का सुझाव दिया था। हमारे नेताओं को अपने गांव में ही वोट नहीं मिले कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के नतीजों पर शिवकुमार ने कहा, “हमें 14-15 सीटें जीतने का भरोसा था, लेकिन हम इन आंकड़ों को हासिल करने में विफल रहे। हमें लोगों के फैसले को स्वीकार करना होगा। पार्टी के नेताओं को अपने ही गांव-कस्बों से वोट नहीं मिले, यह चिंता की बात है।” हार के लिए कौन जिम्मेदार हार के लिए विधायकों को जिम्मेदार ठहराने वाले कुछ मंत्रियों की टिप्पणियों पर शिवकुमार ने कहा, “किसी ने भी मुझसे इसकी शिकायत नहीं की है। आरोप-प्रत्यारोप का कोई मतलब नहीं है। जो नेता निर्वाचन क्षेत्रों के प्रभारी हैं, उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करनी चाहिए, कारणों की जांच करनी चाहिए।” उन्होंने विधायक बसवराज शिवगंगा के एक बयान का जिक्र करते हुए सलाह दी कि विधायकों को अनावश्यक रूप से सार्वजनिक रूप से बयान जारी नहीं करना चाहिए। उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर समस्या पर चर्चा करनी चाहिए। 20 का था लक्ष्य, मिलीं 9 सीटें एचसी बालकृष्ण ने कहा था कि अगर पार्टी चुनाव में खराब प्रदर्शन करती है तो पार्टी शासन को गारंटी योजनाओं को वापस लेने पर विचार करना चाहिए। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष डीके शिवकुमार को राज्य की 28 सीटों में से 15 से 20 सीटें जीतने का भरोसा था, लेकिन पार्टी को 9 सीटें ही मिलीं। एम लक्ष्मण ने भी की समीक्षा की मांग मुख्यमंत्री के गृह जिले मैसूर से कांग्रेस के टिकट एम लक्ष्मण चुनाव हार गए थे। उन्होंने भी योजनाओं की समीक्षा की मांग की है। उनका तर्क है कि लोकसभा चुनावों में लोगों के जनादेश से पता चलता है कि वे योजनाओं को जारी रखने के खिलाफ हैं। कांग्रेस के बागलकोट जिले के जेटी पाटिल (बिलगी) ने भी समीक्षा की मांग की है। कांग्रेस विधायकों के एक वर्ग का मानना है कि गारंटी योजनाएं अन्य विकास कार्यक्रमों की कीमत पर आई हैं और इनसे वोट भी नहीं मिले हैं।

1996 के लोकसभा चुनाव में भी नायडू बने थे किंगमेकर, 5 साल में बने थे 3 PM

नईदिल्ली लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) में मिले खंडित जनादेश ने दिल्ली को दूर तक देखने पर मजबूर कर दिया है. दो दशक में ये पहला मौका है, जब केंद्र की कुर्सी पर बैठने के लिए नेताओं को सुदूर क्षत्रपों की तरफ देखना पड़ रहा है. क्योंकि जनता ने ऐसा निर्णय दिया है, कि कोई भी पार्टी अकेले दम पर दिल्ली के सिंहासन पर नहीं बैठ सकती है. यही वजह है कि सबकी निगाह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्रा के नेता चंद्रबाबू नायडू पर जाकर टिक गई है. लेकिन ये कोई पहला मौका नहीं है जब चंद्रबाबू नायडू केंद्र के लिए किंगमेकर बनकर उभरे हैं. अभिनेता से राजनेता बने नायडू पहले भी कई बार सरकार के गठन में नायक की भूमिका निभा चुके हैं. इतना ही नहीं तेलुगु देशम पार्टी की नीव रखने वाले और चंद्रबाबू नायडू के श्वसुर एन.टी रामाराव, जिन्होंने 1980 के दशक में सेल्यूलॉइड की चमकीली स्क्रीन से राजनीति की खुरदरी जमीन पर कदम रखा था. उन्होंने भी दिल्ली की सत्ता के गठन में 1989 में अहम भूमिका निभाई थी. दो साल में तीन प्रधानमंत्री 1996 के लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने पी.वी नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली सरकार को नकार दिया था, लेकिन ऐसा भी नहीं था कि किसी और दल को पूरी तरह से स्वीकार किया हो. हां, भाजपा तब 161 सीटो के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी जरूर थी, किंतु बहुमत के आंकड़े से कोसों दूर थी. इसके बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा के निमंत्रण पर अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली थी, लेकिन 13 दिनों में ही उन्हें इस बात का इलहाम हो गया था कि वे बहुमत के आंकड़े को नहीं जुटा पायेंगे तब वाजपेयी ने अपने अंदाज में इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद वी.पी सिंह, हरीकिशन सिंह सुरजीत और चंद्रबाबू नायडू ने मिलकर संयुक्त मोर्चा का गठन किया, जिसमें पहले प्रधानमंत्री के लिए बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु का नाम आया. लेकिन कुछ आपसी असहमतियों की वजह से वो प्रधानमंत्री नहीं बन पाए. किंगमेकर नायडू उसी साल बतौर किंगमेकर, उदय हुआ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी के नेता चंद्रबाबू नायडू का, लोकसभा चुनाव में मात्र 16 सीटों पर जीत हासिल करने वाले नायडू ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच.डी देवगौड़ा का नाम प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित कर, भारतीय राजनीति में एक नई पटकथा को लिख दिया, क्योंकि उसके पहले दक्षिण का कोई भी नेता देश का प्रधानमंत्री नहीं बना था. इसके साथ ही नायडू ने लुटियंस की दिल्ली का द्वार दक्षिण के लिए भी खोल दिया था. खैर कांग्रेस के बाहरी समर्थन से देवगौड़ा देश के प्रधानमंत्री बन तो गए, लेकिन उनकी सरकार एक साल में ही गिर गई क्योंकि सीताराम केसरी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने अपना समर्थन वापस ले लिया था. उसके बाद मुलायम सिंह यादव, एस.आर बोम्मई समेत और कई नेताओं ने प्रधानमंत्री बनने की दावेदारी पेश की, लेकिन जब किसी नाम पर भी सहमती नहीं बनी तब लालू प्रसाद यादव ने इंद्र कुमार गुजराल का नाम आगे बढ़ा दिया. जिसके बाद चंद्रबाबू नायडू ने हरकिशन सिंह सुरजीत को एक फोन कॉल किया और उनसे कहा कि ‘गुजराल के नाम पर सब लोग सहमत हो गए हैं आप भी मान जाइए.’ सुरजीत, नायडू की बात मान गए और इस तरह से 21 अप्रैल 1997 को देश को आई.के गुजराल के रूप में एक नया प्रधानमंत्री मिल गया. ये एक संयोग ही है कि चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली टीडीपी ने इस बार भी लोकसभा चुनाव में 16 सीटो पर जीत हासिल किया है. लेकिन इतनी कम सीटों के बावजूद भी 18 वीं लोकसभा के गठन में चंद्रबाबू नायडू को बतौर किंगमेकर के रूप में देखा जा रहा है. तमाम राजनीतिक दल ये कयास लगा रहे थे कि नायडू क्या फैसला लेते हैं, इन तमाम कयासों पर शुक्रवार के दिन सेंट्रल हॉल में उन्होंने पूर्ण विराम लगा दिया. चंद्रबाबू नायडू ने संसदीय दल की बैठक में एनडीए के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम के प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए दावा किया कि पिछले 10 साल में भारत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है और Indian Economy दुनिया में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बनकर उभरी है. नायडू ने आगे कहा कि ‘देश की इकोनॉमी की ये तेज रफ्तार इसी तरह जारी रहेगी और पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत इस बार तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा.’ एनटी रमाराव “राजा नहीं फकीर है,भारत की तकदीर है” 1989 में जब यह नारा इलाहाबाद की गलियारों से होकर देश के कोने-कोने में गूंजने लगा तब गैर कांग्रेसी नेशनल फ्रंट के गठन में दक्षिण के लाल एनटीआर (NTR) यानि नंदमुरी तारक रामाराव ने अहम भूमिका निभाई थी. जो हाल ही में अभिनय की रंगीन दुनिया को त्याग राजनीति की सफेदी अपनाने की कोशिश कर रहे थे. उस वक्त बोफोर्स का हवाला बजा वी पी सिंह ने राजीव गांधी के खिलाफ मोर्चा खोला और दिल्ली का दिवान बनकर देश संभाला था. तब उस सरकार के गठन में एनटीआर ने अग्रसर होकर भाग लिया. हालांकि उस चुनाव में टीडीपी को मात्र 2 सीटें ही मिली थी फिर भी उनका राजनीतिक कद इतना बड़ा था कि जिसके बिना दिल्ली का दिवानी दरबार अधूरा था.  

राहुल और प्रियंका गांधी आज आएंगे Raebareli, मतदाताओं का आभार जताने

 रायबरेली लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस ने एक बार बेहतर प्रदर्शन किया है. कांग्रेस ने इस बार 99 सीटें जीती हैं. इसी कड़ी में राहुल गांधी ने इस बार दो सीटों से चुनाव लड़ा था. उन्हें दोनों सीटों पर जीत हासिल हुई है. राहुल गांधी में इस बार रायबरेली और वायनाड से चुनाव लड़ा था. उन्होंने दोनों सीटों पर 3 लाख से ज्यादा वोटों पर जीत हासिल की है. इसी कड़ी में लोगों को धन्यवाद देने के लिए वो आज  11 जून को रायबरेली जाएंगे. 11 जून को जाएंगे रायबरेली जानकारी के अनुसार, राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी आज 11 जून को रायबरेली जाएगी. इस दौरान वो वहां के लोगों को मिलेंगी और उन्हें धन्यवाद कहेंगी. इसके अलावा 12 जून को राहुल गांधी वायनाड भी जा सकते हैं. रायबरेली और वायनाड में हासिल की बड़ी जीत राहुल गांधी पहली बार रायबरेली सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे. उनसे पहले सोनिया गांधी यहां से सांसद थी. स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सोनिया गांधी ने इस बार लोकसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था. उन्होंने अपनी सीट को राहुल गांधी को दे दिया था. राहुल गांधी ने यहां से 3,90,030 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी. इस चुनाव में उन्हें  6,87,649 वोट मिले थे जबकि प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी के दिनेश प्रताप सिंह को 2,97,619 वोट मिले थे. वायनाड सीट पर भी राहुल गांधी ने एक बड़ी जीत हासिल की है. उन्होंने सीपीआई की प्रत्याशी एन्नी राजा को 3,64,422 मतों से हराया है. यहां पर उन्हें कुल 6,47,445 वोट मिले थे. छोड़नी पड़ेगी एक सीट नियमों के अनुसार, उम्मीदवार सिर्फ एक ही सीट से सांसद रह सकता हैं. इसी वजह से राहुल गांधी रायबरेली या वायनाड की सीट को छोड़ना पड़ सकता है. हालांकि उम्मीद की जा रही हैं कि वो  वायनाड की सीट को छोड़ सकते हैं.

शरद पवार ने कहा, ‘‘पिछले 25 साल में हमने पार्टी की विचारधारा को फैलाने की दिशा में काम किया

पुणे  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने पार्टी कार्यकर्ताओं से इस साल के अंत में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए तैयार रहने का  आह्वान किया और चुनावों के बाद राज्य की सत्ता पार्टी के हाथों में आने का भरोसा जताया। पवार ने पार्टी कार्यालय में आयोजित राकांपा के 25वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। राकांपा-एसपी ने 2024 के आम चुनावों में विपक्षी गठबंधन के रूप में महाराष्ट्र से लोकसभा की 10 सीट पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से आठ पर उसकी जीत हुई। पवार ने अपनी पुत्री एवं बारामती से राकांपा (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले और अन्य नेताओं व कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में अपनी पार्टी का झंडा फहराया। राकांपा संस्थापक ने कहा, ‘‘पिछले 25 साल में हमने पार्टी की विचारधारा को फैलाने की दिशा में काम किया है और आइए, इसे आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करें। अगले तीन महीनों में राज्य विधानसभा चुनाव होंगे और इसके लिए काम करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है क्योंकि चुनावों के बाद राज्य की सत्ता आपके हाथों में होगी।’’ पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का गठन किया था। पिछले साल जुलाई में अजित पवार और कुछ अन्य विधायकों के राज्य में शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल होने के बाद राकांपा में विभाजन हो गया था। निर्वाचन आयोग ने इस वर्ष फरवरी में अजित पवार गुट को असली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी घोषित किया था और इस गुट को राकांपा का चुनाव चिह्न ‘घड़ी’ आवंटित किया था। शरद पवार की पार्टी राकांपा (एसपी) को बाद में ‘‘तुरही बजाते व्यक्ति’’ का चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।  

मध्यप्रदेश में अमरवाड़ा और बुधनी में विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना तय

भोपाल पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शपथ लेने के बाद अब मध्यप्रदेश में अमरवाड़ा और बुधनी में विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना तय हो गया है। सांसद निर्वाचित होने के बाद केंद्रीय मंत्री बने शिवराज विधायक के पद से इस्तीफा देंगे। नियमानुसार शिवराज सिंह सांसद या विधायक में से एक पद पर ही रह सकते हैं। चूंकि वे 4 जून 2024 को विदिशा लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में रिजल्ट के 14 दिन के भीतर उन्हें विधायक पद से इस्तीफा देना होगा। उधर, अमरवाड़ा सीट पहले से रिक्त है। दो अन्य कांग्रेस विधायक बीजेपी जॉइन कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। छह महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव के बाद बुधनी से विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विदिशा लोकसभा सीट से सांसद बन गए हैं। शिवराज सिंह ने रविवार को हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में मंत्री पद की शपथ भी दिलाई गई है। इसके बाद अब उनका बुदनी विधानसभा सीट से इस्तीफा होना तय हो गया है। इन स्थिति में अब बुदनी विधानसभा सीट पर उप चुनाव होगा जिसके लिए नोटिफिकेशन करने के बाद विधानसभा सचिवालय सीट रिक्त होने की जानकारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के माध्यम से चुनाव आयोग को भेजेगा। ये भी जॉइन कर चुके बीजेपी छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक कमलेश प्रताप शाह पिछले महीने इस्तीफा दे चुके हैं। यह सीट रिक्त घोषित हो चुकी है। विधायक कमलेश ने 29 मार्च को इस्तीफा दिया है, जिसका नोटिफिकेशन 30 मार्च को हो गया है। इसके बाद 30 सितंबर के पहले यहां नया विधायक चुनना होगा। दूसरी ओर, विजयपुर से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत 30 अप्रैल को सार्वजनिक तौर पर बीजेपी जॉइन करने का ऐलान कर चुके हैं। इसी तरह, बीना विधायक निर्मला सप्रे में लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी सभा में बीजेपी जॉइन कर चुकी हैं। दोनों ही विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। बताया जाता है कि कांग्रेस दोनों ही विधायकों का इस्तीफा कराने के लिए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के माध्यम से विधानसभा के 1 जुलाई से शुरू होने वाले सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत करने की तैयारी कर रही है। इसके बाद इनकी सदस्यता को लेकर अंतिम स्थिति साफ होगी।

एमपी लोकसभा चरण चुनाव 4 : पांच बजे तक 68.01% मतदान, इंदौर कांग्रेस नेता के दफ्तर में तोड़फोड़

MP Lok Sabha phase election 4: 68.01% voting till 5 pm, vandalism in Indore Congress leader’s office लोकसभा चुनाव के चौथे चरण का आज मतदान है। प्रदेश की आठ सीटों पर वोटिंग हो रही है। कांग्रेस नेता के मकान पर पथरावइंदौर में कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष विनोद यादव के मकान पर कुछ लोगों ने पथराव कर दिया। वे भाजपा के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। विनोद का दिन में नंदा नगर बूथ पर विवाद हुआ था। शाम को उनके घर पर 15-20 लोग आए। उन्होंने पथराव कर दिया। बाहर खड़ी कार के शीशे फोड़ दिए। दरवाजे व खिड़की पर भी पथराव हुआ। यादव ने कहा कि भाजपा के गुंडों ने घर आकर मारपीट की। मध्य प्रदेश में पांच बजे तक 68.01 प्रतिशत मतदान हो चुका है। मंदसौर लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा मतदान हुआ है। वहीं इंदौर में सबसे कम मतदान हुआ है। कहां कितने फीसदी मतदान?देवास: 71.53धार: 67.55इंदौर: 56.53खंडवा: 68.21खरगोन: 70.80मंदसौर: 71.76रतलाम: 70.61उज्जैन: 70.64

प्रज्ज्वल रेवन्ना मामले में राहुल गांधी की CM को चिट्ठी, पढ़ें

Rahul Gandhi’s letter to CM regarding Prajjwal Revanna case, read सिद्धारमैया को लिखे पत्र में कांग्रेस नेता ने प्रज्जवल रेवन्ना की आलोचना की। साथ ही मोदी पर परोक्ष हमला करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधि को नहीं देखा, जिसने महिलाओं के खिलाफ कथित हिंसा के खिलाफ चुप्पी साध ली हो। कर्नाटक की राजनीति में हलचल मची हुई है। कई महिलाओं से यौन शोषण के आरोप झेल रहे पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते प्रज्ज्वल रेवन्ना की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को एक पत्र लिखा है। उन्होंने अनुरोध किया है कि पीड़ितों की हरसंभव सहायता की जाए। इस पत्र का सिद्धारमैया ने जवाब दिया है। सभी पक्षों को न्याय के कटघरे में लाया जाएराहुल गांधी ने कहा, ‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया आप सभी पीड़ितों की हरसंभव मदद करें। यह सुनिश्चित करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है कि इन जघन्य अपराधों के लिए जिम्मेदार सभी पक्षों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।’ कथित हिंसा के खिलाफ चुप्पी साधीसिद्धारमैया को लिखे पत्र में कांग्रेस नेता ने दक्षिणी राज्य से सांसद रेवन्ना की आलोचना की। इसके साथ ही उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्रछाया में रहने का आरोप लगाया। मोदी पर परोक्ष हमला करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधि को नहीं देखा, जिसने महिलाओं के खिलाफ कथित हिंसा के खिलाफ चुप्पी साध ली हो।उन्होंने कर्नाटक के सीएम से अनुरोध किया कि पीड़ितों की हर संभव मदद की जाए। गांधी ने कहा, ‘वे हमारी करुणा और एकजुटता की पात्र हैं क्योंकि वे न्याय के लिए अपनी लड़ाई लड़ रही हैं। यह सुनिश्चित करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है कि इन जघन्य अपराधों के लिए जिम्मेदार सभी पक्षों को न्याय के कठघरे में लाया जाए।’ कठोर से कठोर सजा देने की जरूरतगांधी ने आरोप लगाया कि रेवन्ना ने कई वर्षों तक सैकड़ों महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया और उनका वीडियो बनाया। उन्होंने कहा कि कई लोग जो उन्हें भाई और बेटे के रूप में देखते थे, उनके साथ सबसे हिंसक तरीके से क्रूरता की गई और उनकी गरिमा लूट ली गई। माताओं और बहनों के साथ दुष्कर्म किए जाने के लिए कठोर से कठोर सजा देने की जरूरत है। पूर्व कांग्रेस प्रमुख ने कहा, ‘मुझे यह जानकर गहरा सदमा लगा कि पिछले साल दिसंबर में हमारे गृह मंत्री अमित शाह को देवराजे गौड़ा ने प्रज्ज्वल रेवन्ना के घिनौने कारनामों के बारे में बताया था। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा इन वीभत्स आरोपों को सामने लाए जाने के बावजूद मोदी ने एक दुष्कर्मी के लिए प्रचार किया। गांधी ने आगे कहा, ‘इतना ही नहीं केंद्र सरकार ने जानबूझकर उसे भारत से भागने दिया। इन अपराधों की और प्रधानमंत्री व गृह मंत्री के आशीर्वाद से प्रज्ज्वल रेवन्ना को मिली छूट की कड़ी निंदा की जानी चाहिए।’ मौन समर्थन का खामियाजा भुगत रही महिलाएंउन्होंने आरोप लगा, ‘दो दशकों में मैंने कभी ऐसा वरिष्ठ जनप्रतिनिधि नहीं देखा, जिसने महिलाओं के खिलाफ कथित हिंसा के खिलाफ लगातार चुप्पी साध रखी हो। हरियाणा में हमारे पहलवानों से लेकर मणिपुर में हमारी बहनों तक भारतीय महिलाएं ऐसे अपराधियों के लिए प्रधानमंत्री के मौन समर्थन का खामियाजा भुगत रही हैं। गांधी ने कहा कि कांग्रेस का नैतिक कर्तव्य है कि वह हमारी माताओं और बहनों के लिए न्याय की लड़ाई लड़े। उन्होंने कहा, ‘मैं समझता हूं कि कर्नाटक सरकार ने गंभीर आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है और प्रधानमंत्री से प्रज्ज्वल रेवन्ना के राजनयिक पासपोर्ट को रद्द करने और उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस लाने का अनुरोध किया है।’ सीएम सिद्धारमैया का जवाबकर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने राहुल गांधी के पत्र का जवाब दिया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि प्रज्जवल रेवन्ना से जुड़े मामले ने देश को बुरी तरह झरझोर दिया है। हमारी कानूनी प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए पीड़ितों को न्याय को मिलना जरूरी है। राहुल गांधी ने पत्र लिखकर पीड़ितों के लिए समर्थन पर जोर दिया है। हम निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’ यह है मामलाबता दें कि 33 वर्ष के प्रज्ज्वल रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस सुप्रीमो एचडी देवगौड़ा के पोते और विधायक व पूर्व मंत्री एचडी रेवन्ना के बेटे हैं। उनके खिलाफ कई महिलाओं के साथ यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं और कई इससे जुड़े कई वीडियो वायरल हो गए हैं। राज्य सरकार ने इस मामले में एसआईटी का गठन किया है। प्रज्ज्वल कर्नाटक की हासन लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां 26 अप्रैल को मतदान हुआ है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जैसे ही सांसद से जुड़े वीडियो सामने आने लगे, वह वोटिंग खत्म होने के बाद वह देश छोड़कर भाग गए।

विधायक जी ने अपनी फॉर्च्यूनर से दुल्हा-दुल्हन को पहूंचाया घर,घर वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

The MLA took the bride and groom to their home in his Fortuner, the happiness of the family members knew no bounds. राघोगढ़ ! दूल्हा-दुल्हन को महंगे फॉर्च्यूनर वाहन में आता देखकर परिजन भी हैरान रह गए. कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने खुद ही गाड़ी का दरवाजा खोलकर नवदंपती को घर पर उतारा. जयवर्द्धन ने दुल्हन को अपनी बहन बताया. गुना जिले के राघोगढ़ में शादी सम्मेलन के बाद दूल्हा-दुल्हन बाइक पर सवार होकर घर जा रहे थे. इसी दौरान क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहे .कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने जब नवदंपती को देखा तो उन्होंने अपने वाहन को रोका और दूल्हा-दुल्हन को फॉर्च्यूनर कार में बैठाकर उनके घर तक पहुंचाया , अब इस पूरे वाकए का वीडियो अब वायरल हो रहा है. नवल धाकड़ नवविवाहिता पत्नी को साथ लेकर पूजा-पाठ करने गया था. भीषण गर्मी में बाइक सवार नवल धाकड़ और उसकी पत्नी को जब क्षेत्रीय विधायक ने देखा तो अपने फॉर्च्यूनर वाहन को रोककर  बैठने को कहा. जयवर्द्धन के साथ विधायक पंकज उपाध्याय भी मौजूद थे. दूल्हा-दुल्हन को महंगे फॉर्च्यूनर वाहन में आता देखकर नवल के परिजन भी हैरान रह गए.  जयवर्द्धन सिंह ने खुद ही गाड़ी का दरवाजा खोलकर नवदंपती को घर पर उतारा. जयवर्द्धन ने दुल्हन को अपनी बहन बताया. दूल्हा बने नवल धाकड़ ने बताया कि जयवर्द्धन सिंह शादी सम्मेलन में भी पहुंचे थे. नवल के परिजन साफा बांधकर सम्मान करने के लिए आगे बढ़े तो जयवर्द्धन ने कहा, “मैं तो आपके परिवार का हूं. पंकज उपाध्याय का सम्मान कीजिए.” जयवर्द्धन सिंह का ये वीडियो वायरल हो रहा है. महंगे वाहन में बैठकर घर तक पहुंचे नवदंपती की खुशी का ठिकाना नहीं है.

‘SC, ST और OBC का अधिकार छीन मुस्लिमों को देना चाहती है कांग्रेस’, भाजपा अध्यक्ष नड्डा का दावा

‘Congress wants to snatch away the rights of SC, ST and OBC and give them to Muslims’, claims BJP President Nadda. जेपी नड्डा ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन हमारे एससी, एसटी और ओबीसी लोगों का अधिकार छीन कर मुस्लिमों को देना चाहते हैं। यही इनका छिपा हुआ एजेंडा है। कांग्रेस के घोषणापत्र में भी तुष्टीकरण स्पष्ट दिखाई दे रहा है। लोकसभा चुनाव को लेकर देशभर में एक अलग माहौल बना हुआ है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मुसलमानों को लाभ पहुंचाने के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है। इतना ही नहीं, नड्डा ने दावा किया कि यह विपक्षी दल का छिपा हुआ एजेंडा है। जेपी नड्डा ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन हमारे एससी, एसटी और ओबीसी लोगों का अधिकार छीन कर मुस्लिमों को देना चाहते हैं। यही इनका छिपा हुआ एजेंडा है। कांग्रेस के घोषणापत्र में भी तुष्टीकरण स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मनमोहन सिंह के बयान का दिया हवालाभाजपा अध्यक्ष ने साल 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों को देश के संसाधनों पर पहला अधिकार है। इस पर कांग्रेस ने दावा किया कि सत्तारूढ़ पार्टी ने जनता के समर्थन की कमी को देखते हुए चुनाव के दौरान ध्रुवीकरण के लिए झूठ फैलाने और सांप्रदायिक बंटवारे का सहारा लिया है।

70 करोड़ लोगों के पास जितना धन, उतना हिंदुस्तान में 22 लोगों के पास संपत्ति : राहुल गांधी

22 people in India have as much wealth as 70 crore people: Rahul Gandhi बस्तर में जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, लाखों लोग कोरोना के कारण मरे। हर प्रदेश से गरीब लोग घर वापस लौटे। दिल्ली (केंद्र) की सरकार ने कोई मदद नहीं की, किसी की भी मदद नहीं की। नपं मुख्यालय के लालबहादुर शास्त्री स्टेडियम में दोपहर 12 बजे से कार्यक्रम 15 हजार की आबादी वाले बस्तर को 2008 में मिला नगर पंचायत का दर्जा कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी भी एक साल पहले 13 अप्रैल को बस्तर दौरे पर आई थीं छत्‍तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के पहले चरण में सिर्फ बस्‍तर लोकसभा सीट पर चुनाव हो रहा है। यहां कांग्रेस ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा को प्रत्‍याशी बनाता है। लखमा के समर्थन में ही शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दंतेवाड़ा जिले के गीदम में सभा का आयोजन हुआ। सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पीएम मोदी की सरकार पर जमकर आरोप लगाए। साथ ही कांग्रेस की सरकार बनने पर जनता के लिए कांग्रेस के वादों को याद दिलाया। उन्‍होंने अपने भाषण में कहा, लाखों लोग कोरोना के कारण मरे। हर प्रदेश से गरीब लोग घर वापस लौटे। दिल्ली (केंद्र) की सरकार ने कोई मदद नहीं की, किसी की भी मदद नहीं की। पूरा का पूरा फायदा 2-3 अरबपतियों को दे देते हैं। हिंदुस्तान में 22 लोग हैं जिनके पास उतना ही धन है जितना 70 करोड़ हिंदुस्तानी लोगों के पास है। पीएम मोदी 24 घंटा इन 22-25 लोगों की मदद करते रहते हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, हिंदुस्तान के सब बेरोज़गार युवाओं को सरकार ये अधिकार देगी कि एक साल के लिए निजी कंपनी में, PSUs में, सरकारी कार्यालयों में हिंदुस्तान के बेरोज़गार युवाओं को एक साल की नौकरी मिलेगी जिसमें उनका प्रशिक्षण होगा और 1 साल में उनके बैंक अकाउंट में 1 लाख रुपये दिए जाएंगे। अगर उन्होंने अच्छा काम किया तो उन्हीं संस्थाओं में उन्हें पक्की नौकरी मिलेगी। चुनावी सभा में राहुल गांधी ने बस्‍तर के विकास के लिए लोगों से कांग्रेस प्रत्‍याशी कवासी लखमा को वोट देने की अपील की। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा, बस्तर में कांग्रेस हमेशा से मज़बूत रही है। भाजपा नेता 10 साल में उन्होंने क्या किया उसपर चर्चा नहीं कर रहे। उनका चुनाव प्रचार भी मुद्दों से हटकर जज़्बाती मुद्दों पर, धर्म, मंदिर-मस्जिद पर केंद्रित है। हम छत्तीसगढ़ की सभी 11 सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे। सभा के एक दिन पहले शुक्रवार शाम को पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट, पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज, लोकसभा चुनाव संचालन समिति के संयोजक व बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल के साथ बस्तर पहुंचे और सभा स्थल में तैयारियों का अवलोकन किया। बस्तर को 2008 में मिला नगर पंचायत का दर्जाबस्तर जिले का मुख्यालय जगदलपुर है तो बस्तर से 18 किलोमीटर दूर है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बस्तर आजादी से पहले रियासतकालीन राजधानी रही थी। लगभग 15 हजार की आबादी वाले बस्तर को 2008 में नगर पंचायत का दर्जा मिला था। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों आठ अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुनावी जनसभा भी इसी बस्तर विकासखंड के ग्राम छोटे आमाबाल में हुई थी। बस्तर से लगभग 20 किलोमीटर दूर है। कांग्रेस ने भी राहुल गांधी की चुनावी जनसभा के लिए इसी विकासखंड को चुना है। निरीक्षण के दौरान धनेन्द्र साहू, मोहन मरकाम, राजमन बेंजाम, मलकीत सिंह, मिथलेश आदि भी उपस्थित थे। प्रियंका भी इसी दिन आई थींराहुल गांधी की बहन कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी भी एक साल पहले 13 अप्रैल को बस्तर दौरे पर आई थीं। वह जगदलपुर में आयोजित कांग्रेस के भरोसे के सम्मेलन में शामिल हुई थीं। प्रियंका गांधी के दौरे के ठीक साल भर बाद इसी तारीख को बस्तर दौरे पर आ रहे हैं।

लोकसभा चुनाव 2024: ग्राउंड रिपोर्ट ग्वालियर संसदीय क्षेत्र से, सहारा समाचार टीम

Lok Sabha Elections 2024: Ground report from Gwalior parliamentary constituency, Sahara News Team ग्वालियर। ग्वालियर की लोकसभा सीट शुरू से ही काफी अहम रही है, क्योंकि विजयाराजे सिंधिया सहित राजघराने का हर सदस्य राजनीति से जुड़ा रहा। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने भी अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत यहीं से की थी। कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार की घोषणा अभी हाल ही में की है, जबकि भाजपा पहले ही कर चुकी थी, लेकिन खास बात यह है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जो हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में हार चुके हैं। भाजपा ने भारत सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। उन्हें विवेक नारायण शेजवलकर के स्थान पर मैदान में उतारा गया है। भारत सिंह कुशवाहा अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में ग्वालियर ग्रामीण से चुनाव हारे थे। दूसरी तरफ कांग्रेस ने प्रवीण पाठक को उम्मीदवार बनाया है, जो विधानसभा चुनाव में ग्वालियर दक्षिण से पराजित हुए थे। दोनों उम्मीदवार पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा की कुशवाह समाज के साढ़े तीन लाख वोटरों पर नजर है। वहीं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी होने का भी लाभ भारत सिंह कुशवाहा को मिला है। जबकि कांग्रेस ने प्रवीण पाठक को उम्मीदवार बनाकर शहर के वोटरों को साधने की कोशिश की है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र से कांग्रेस को विश्वास है कि विधानसभा चुनाव जीत दिलाने वाले लोकसभा में भी सहयोग करेंगे। इसलिए भाजपा को है जीत की उम्मीदग्वालियर लोकसभा क्षेत्र में सिंधिया परिवार के अलावा ठाकुर क्षत्रिय वोटर की अहम भूमिका रही है और 19 लोकसभा चुनाव में से सिंधिया परिवार के सदस्यों ने 8 बार जीत दर्ज की है। जबकि इसमें भी ठाकुर क्षत्रिय वोटर ने सहयोग किया है। इस बार भी ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में हैं और नरेंद्र सिंह तोमर के समर्थक को ही उम्मीदवार बनाया गया हैं। यहां से माधवराव सिंधिया कांग्रेस और मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर पांच बार निर्वाचित हुए, जबकि भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर यशोधरा राजे सिंधिया दो बार यहां से निर्वाचित हुईं। इसके अलावा विजयाराजे सिंधिया भी एक बार यहां से चुनाव जीती हैं। कांग्रेस ने अंतिम बार 2004 में जीत दर्ज की थी। जब रामसेवक सिंह निर्वाचित हुए थे। यह बात अलग है कि सवाल पूछने के बदले पैसे लेने के आरोप में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था लोकसभा चुनाव में दोनों नए चहरेलोकसभा चुनाव की दृष्टि से देखा जाए तो इस बार कांग्रेस व भाजपा दोनों ने ही नए चेहरे मैदान में उतारे हैं। दोनों के समीकरण भी एक समान हैं। क्योंकि विधानसभा चुनाव हारने के तुरंत बाद ही दोनों अपने लिए लोकसभा के लिए वोट मांग रहे हैं। भारत सिंह कुशवाहा राममंदिर और हमारा परिवार मोदी परिवार को लेकर आगे चल रहे हैं। वहीं प्रवीण पाठक लोकतंत्र बचाओ के साथ ही राहुल गांधी की यात्राओं में उठाए गए मुद्दों का वोटर के सामने रख रहे हैं। जातीय समीकरणभाजपा ने ग्वालियर में अपनी जीत के लिए जातिगत समीकरण पर दांव खेला है। इस संसदीय क्षेत्र से पूर्व मंत्री भारत सिंह कुशवाह को अपना उम्मीद्वार बनाया है। तकरीबन साढ़े तीन लाख कुशवाह वोटर के सहारे भाजपा जनाधार मजबूत करेगी। जबकि कांग्रेस ब्राह्मण व क्षत्रिय के गणित लेकर चल रही है। प्रवीण पाठक का मानना है कि 19.59 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 5.5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के वोटर हैं, जिनका कांग्रेस पर पूरा भरोसा है। जबकि ब्राह्मण समाज के 18 प्रतिशत से ज्यादा वोटर पर भी उन्हें पूरा विश्वास है। वहीं 25 प्रतिशत से ज्यादा पिछड़ा वर्ग भी कांग्रेस का समर्थन देगा। क्योंकि इसका प्रभाव विधानसभा चुनावो में देखने को मिला है। इस जातीय समीकरण के कारण ही भाजपा के द्वारा पूरी ताकत लगाने के बाद भी आधी सीटें विधानसभा की तीने में सफलता मिली थी। ग्वालियर संसदीय सीट में 8 विधानसभाग्वालियर संसदीय क्षेत्र में आने वाली आठ विधानसभाओं में से कांग्रेस व भाजपा के पास चार-चार विधायक हैं। यदि विधानसभा चुनाव का ट्रेंड रहता है तो भाजपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला काफी कड़ा होगा और हार जीत का अंतर बड़ा नहीं होगा। इस क्षेत्र में विधानसभा चुनाव में भाजपा को 6 लाख 96 हजार 246 वोट मिले हैं, जबकि कांग्रेस को 6 लाख 82 हजार 233 वोट मिले हैं। इस हिसाब से मुकाबला कड़ा है। इसके अनुसार भाजपा को 14 हजार 13 वोट ही अधिक मिले हैं। ग्रामीण क्षेत्र की तीन सीटें कांग्रेस के पास हैं, जबकि भाजपा के पास दो सीट हैं। कांग्रेस ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा मजबूत है। वोट भी अधिक मिला है, लेकिन शहरी मतदाताओं के बीच भाजपा मजबूत है। शहर में तीन सीटे हैं, जिनमें कांग्रेस के पास एक सीट है। पोहरी विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी ने 49 हजार 481 वोट से भाजपा के मंत्री को हराया था। जबकि भाजपा भितरवार और ग्वालियर विधानसभा में मजबूत है। इन विधानसभा को भाजपा ने बड़े अंतर से जीता था। डबरा, ग्वालियर दक्षिण व करैरा में मुकाबले करीबी रहे हैं। ग्वालियर संसदीय चुनाव में मुद्देइस संसदीय सीट की खास बात यह रही है कि यहां विकास के कोई मुद्दे नहीं रहे हैं। चाहे माधव राव सिंधिया ने विकास के नाम पर वोट मांगे हों। उस समय व्यक्ति के चेहरे पर लोगों ने वोट दिया था। क्योंकि मुद्दे विधानसभा चुनावो में ही इतने उठ जाते हैं कि लोकसभा में लोग सिर्फ चेहरे देखते हैं। यहां ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के मुद्दे को लेकर ही वोटिंग होती रही है। इस बार प्रवीण पाठक शहर से और भारत सिंह कुशवाह ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं। भाजपा हमेशा शहरी क्षेत्र से उम्मीदवार बनाती रही है और लगातार जीतती रही है। इस बार ग्रामीण क्षेत्र से भाजपा ने और शहरी क्षेत्र से कांग्रेस ने टिकिट दिया। यही सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा, लेकिन यह मुद्दा कितना कारगर रहेगा यह तो चुनाव बाद ही मालुम होगा। क्योंकि माहौल इस समय भाजपा के पक्ष में है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet