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एमपी की सोम डिस्टलरीज की याचिका पर हाईकोर्ट में नया मोड़, बड़ा अपडेट सामने आया

भोपाल   मध्यप्रदेश की शराब कंपनी सोम डिस्टलरीज की हाईकोर्ट में याचिका पर बड़ा अपडेट सामने आया है। केस में  जबलपुर हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। इस पर मामला आगे बढ़ा दिया गया है। सोम डिस्टलरीज Som Distilleries के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में ही सुनवाई से दो जजों ने खुद को अलग कर लिया था। ऐसे में कानूनी उलझन उत्पन्न हुई पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह केस जबलपुर हाईकोर्ट में ही चल रहा है। रायसेन जिले में स्थित सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज और सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड प्रदेश की सबसे प्रमुख शराब निर्माता कंपनी है। इनका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया था। 4 फरवरी को आबकारी आयुक्त ने इस संबंध में आदेश जारी किया था। तत्कालीन आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा था कि सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज और सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के संचालक, प्रतिनिधि, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता व कर्मियों पर देपालपुर (इंदौर) कोर्ट में एक प्रकरण में पारित निर्णय के आधार पर कार्रवाई की गई। इसमें कहा गया कि इंदौर हाईकोर्ट से संबंधित आपराधिक अपीलों में सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाई, पर दोषसिद्धि प्रभावी है। शराब निर्माता कंपनी सोम डिस्टलरीज Som Distilleries ने इसे चुनौती देते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई से जबलपुर हाईकोर्ट के दो जज जस्टिस विशाल मिश्रा और संदीप एन भट्ट ने खुद को अलग कर लिया जिससे कानूनी उलझन हुई। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में ही याचिका पर सुनवाई शुरु हुई।  हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने केस की सुनवाई की  हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने केस की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सुनवाई में याचिकाकर्ता सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज और सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें पेश कीं। इधर सरकार की ओर से भी शासकीय अधिवक्ता ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों को सुना पर समयाभाव के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। इसपर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च की तारीख तय की।

बार-बार पिंपल्स को न करें नजरअंदाज! ये अंदरूनी दिक्कतों का बड़ा इशारा हो सकते हैं

अक्सर लोग एक्ने को सिर्फ त्वचा से जुड़ी समस्या मानते हैं और गंदगी से जोड़कर देखते हैं। इसलिए इस समस्या को दूर करने के लिए फेस वॉश और क्रीम की मदद लेते हैं, लेकिन अगर सही स्किन केयर के बावजूद एक्ने बार-बार लौट रहा है, तो समस्या शरीर के अंदर छिपी हो सकती है। अगर शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी हो या हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाए, तो भी इसका असर हमारी त्वचा पर एक्ने के रूप में नजर आ सकता है। आइए जानें बार-बार एक्ने होने के पीछे कौन-से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। किन वजहों से हो बार-बार लौट आते हैं एक्ने?     हार्मोनल इंबैलेंस- हार्मोनल इंबैलेंस एक्ने होने का सबसे बड़ा कारण है। शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ने से ऑयल ग्लैंड ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं, जिसके कारण पोर्स बंद हो जाते हैं। इसके कारण एक्ने होने की समस्या बढ़ जाती हैष     पीसीओएस- महिलाओं  में पीसीओएस या पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव अक्सर ठुड्डी और जॉलाइन पर एक्ने का कारण बनते हैं।     डाइट- खाने में ज्यादा मीठे और डेयरी प्रोडक्ट्स भी एक्ने की वजह बन सकते हैं। इन फूड आइटम्स से इंसुलिन स्पाइक होता है, जो एक्ने को बढ़ावा देता है।     तनाव और मानसिक सेहत- जब हम तनाव में होते हैं, तो शरीर कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करता है। इस हार्मोन के कारण त्वचा ज्यादा ऑयल प्रोड्यूस करता है। साथ ही, तनाव के कारण नींद पूरी नहीं होती, जिससे त्वचा को रिपेयर होने का समय नहीं मिलता और एक्ने की समस्या गंभीर हो जाती है। बचाव के लिए क्या करें? एक्ने से छुटकारा पाने के लिए सिर्फ स्किन केयर पर ध्यान देना काफी नहीं है। आपको अपनी लाइफस्टाइल और डाइट में भी कुछ सुधार करने होंगे।     डाइट- अपने खाने में से चीनी, मैदा और ऑयली चीजों की मात्रा कम करें। अगर आपको डेयरी प्रोडक्ट्स से भी एक्ने होता है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात करें। साथ ही, डाइट में ताजे फल और हरी सब्जियों को ज्यादा मात्रा में शामिल करें।     हाइड्रेशन- हर दिन कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं ताकि टॉक्सिन्स बाहर निकलें। स्किन को हाइड्रेटेड रखने के लिए भी भरपूर मात्रा में पानी पीना जरूरी है।       नींद- रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें ताकि हार्मोन बैलेंस बना रहे और तनाव भी कम हो।     सफाई- दिन में दो बार माइल्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें और तकिए का कवर नियमित बदलें।     डॉक्टर से सलाह- अगर आपको बहुत ज्यादा एक्ने की समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लें। वे पीसीओएस या हार्मोनल इंबैलेंस की जांच कर सकते हैं और एक्ने के लिए आपको मेडिकेटेड क्रीम भी दे सकते हैं।  

क्या वजह है कि आज की युवा पीढ़ी रहती है लो फील? नई स्टडी का बड़ा खुलासा

ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि अवसाद के शिकार युवाओं के मस्तिष्क और रक्त कोशिकाएं एक असामान्य पैटर्न में काम करती हैं। शोधकर्ता रोजर वरेला के अनुसार, जब ये युवा आराम की स्थिति में होते हैं, तब उनकी कोशिकाएं बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा पैदा करती हैं। लेकिन, जब तनाव के समय या जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त ऊर्जा की मांग होती है, तो ये कोशिकाएं ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने में बुरी तरह संघर्ष करती हैं। इसी असंतुलन की वजह से अवसाद से ग्रसित युवाओं में लगातार थकान और प्रेरणा की कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कैसे हुआ यह बड़ा शोध? यह दिलचस्प शोध ‘जर्नल ट्रांसलेशनल सायकिएट्री’ में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने 18 से 25 वर्ष की आयु के 18 ऐसे युवाओं के मस्तिष्क स्कैन और रक्त के नमूनों का गहराई से अध्ययन किया जो अवसाद से पीड़ित थे। इसके बाद, उनके डेटा की तुलना उन स्वस्थ व्यक्तियों से की गई जिन्हें अवसाद नहीं था। शोध की मुख्य लेखिका और एसोसिएट प्रोफेसर सुसान्ना टाय ने बताया कि यह इतिहास में पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने अवसादग्रस्त युवाओं के मस्तिष्क और रक्तधारा में सीधे तौर पर थकान से जुड़े अणुओं के पैटर्न को ट्रैक किया है। लंबे समय की समस्याओं का मिलता है संकेत इस शोध से यह भी पता चलता है कि अवसाद की बीमारी के शुरुआती चरण में कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा काम कर रही होती हैं। यही अत्यधिक दबाव आगे लंबे समय तक चलने वाली समस्याओं का मुख्य कारण बन सकता है। लेखिका ने स्पष्ट किया कि ‘थकान’ प्रमुख अवसाद विकार का एक ऐसा आम लक्षण है जिसका इलाज करना सबसे ज्यादा मुश्किल होता है। भविष्य के लिए एक नई उम्मीद इस अध्ययन ने चिकित्सा जगत में एक नई उम्मीद जगाई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन नए निष्कर्षों की मदद से प्रमुख अवसाद विकार का पहले ही पता लगाया जा सकेगा। इसके अलावा, इससे संभावित रूप से अधिक लक्षित और हर मरीज की जरूरत के हिसाब से व्यक्तिगत उपचार तैयार करने के रास्ते खुलेंगे, जिससे लोगों को इस बीमारी से बाहर निकलने में सही मदद मिल सकेगी।  

दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण 2026 का ऐतिहासिक आगाज दिलीप जायसवाल

बिजुरी  से संजय केसरवानी की रिपोर्ट भारतीय जनता पार्टी मंडल बिजुरी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण 2026 का ऐतिहासिक आगाज हुआ।  जिसमें प्रमुख रूप से मध्य प्रदेश शासन के राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल की गरिमा में उपस्थिति में आयोजित प्रशिक्षण में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया  .इसमें मुख्य रूप से नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सहबीन पनिका ,नगर पालिका उपाध्यक्ष श्रीमती प्रीति सतीश शर्मा, मंडल अध्यक्ष बिजुली रविंद्र रिंकू शर्मा, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष सतीश शर्मा तथा प्रशिक्षण लेने आए हुए नगर पालिका के बूथ अध्यक्ष महामंत्री अन्य लोग उपस्थित रहे राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल जी ने 0 से लेकर शिखर तक का सफर मध्य प्रदेश राज्य के इन 13 वर्षों की उपलब्धियां तथा विभिन्न प्रकार की योजनाओं के बारे में सभी को बताया तथा दिलीप जायसवाल ने क्षेत्र में किए कामों की उपलब्धता को बताया तथा जन-जन के विकास के आधार तथा जन-जन को सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया आगे भी इसी तरह जन-जन की सुविधाओं को मुहैया कराने के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे जन सेवा ही उनका लक्ष्य हमेशा रहा है!

इंदौर में पंजाबी सिंगर करण औजला के शो से पहले नगर निगम ने जब्त किया सामान, टैक्स न भरने पर की कार्रवाई

इंदौर  इंदौर में पंजाबी सिंगर करण औजला के शो से पहले नगर निगम की टीम ने कार्यक्रम की जगह पर पहुंचकर सामान जब्त कर लिया। जानकारी के मुताबिक शो से पहले निगम को मनोरंजन कर जमा नहीं करवाया गया है। इस पर यह कार्रवाई की गई। पंजाबी सिंगर का आज शाम ही शो होना है। शो के लिए 3 हजार से 6 लाख रुपये तक के टिकट की बेचे जाने की बात सामने आ रही है। मंच से सामान जब्त, आयोजकों की मिन्नतें नाकाम जब कॉन्सर्ट की अंतिम तैयारियां चल रही थीं, तभी नगर निगम के कर्मचारियों ने एक-एक करके स्टेज पर रखा कीमती साउंड सिस्टम और अन्य साजो-सामान गाड़ियों में भरना शुरू कर दिया। वहां मौजूद कर्मचारियों ने टीम को रोकने की कोशिश की, लेकिन निगम के अधिकारी मनोरंजन कर जमा न होने की बात पर अड़े रहे। यह कार्रवाई इतनी अचानक थी कि आयोजकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। करोड़ों का कारोबार, पर टैक्स नहीं भरा खबर है कि इस शो के लिए टिकिटों की बिक्री धड़ल्ले से हुई है। 6 लाख रुपये तक के वीआईपी टेबल बुक होने की चर्चा है, लेकिन इस बड़े कारोबार के बीच सरकारी खजाने में जमा होने वाला मनोरंजन कर नहीं पहुंचा। इसी को आधार बनाकर निगम ने अपनी कार्रवाई को अंजाम दिया। आयोजकों ने नहीं सीखा सबक यह पहली बार नहीं है जब इंदौर में किसी बड़े सितारे के शो पर ग्रहण लगा हो। इससे पहले हनी सिंह के शो में भी एक करोड़ का सामान जब्त हुआ था। दिलजीत दोसांझ के मामले के बाद निगम ने स्पष्ट कर दिया था कि अब कार्यक्रम से पहले टैक्स चुकाना अनिवार्य होगा। बावजूद इसके, आयोजकों की इस लापरवाही ने अब हजारों प्रशंसकों के उत्साह को अनिश्चितता में डाल दिया है। कॉन्सर्ट की तैयारी में लगे कर्मचारी उस समय चौक गए जब नगर निगम की टीम वहां पहुंची और एक-एक करके स्टेज पर रखा साउंड सिस्टम और अन्य सामान उठाकर गाड़ी में रखने लगी। इस दौरान कुछ लोगों ने उन्हें ऐसा न करने के लिए कहा, लेकिन नगर निगम के कर्मचारियों ने कार्रवाई जारी रखी।

लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन ट्रेडिंग 6 साल बाद फिर से शुरू, गलवान झड़प के कारण हुआ था बंद

पिथौरागढ़  उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत और चीन के बीच बॉर्डर ट्रेड छह साल बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। यह ट्रेड सेशन आमतौर पर जून से सितंबर तक चलता है। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट आशीष भटगाई ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी होने के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ी है। लिपुलेख दर्रे के जरिए तिब्बत के साथ बॉर्डर ट्रेड लंबे अंतराल के बाद 1992 में फिर शुरू हुआ था। हालांकि 2019 में COVID-19 महामारी और गलवान झड़प के कारण इसे बंद कर दिया गया था। पिछले साल 18-19 अगस्त को चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के दौरान भारत-चीन ने रुपए और युआन में ट्रेड करने का फैसला किया था। अब तक यह ‘वस्तु विनिमय’ आधारित यानी सामान के बदले सामान का लेन-देने होता था। लिपुलेख दर्रा औपचारिक व्यापारिक मार्ग ब्रिटिश काल में भी लिपुलेख दर्रा व्यापार और तीर्थयात्रा का प्रमुख केंद्र था। तिब्बत से व्यापारी नमक, बोराक्स, पशु उत्पाद, जड़ी-बूटियां और स्थानीय सामान बेचने आते हैं, जबकि भारतीय व्यापारी बकरी, भेड़, अनाज, मसाले, गुड़, मिश्री, गेहूं वहां ले जाते हैं। भारत-चीन के बीच साल 2005 में 12 करोड़ रुपए का आयात और 39 लाख रुपए का निर्यात हुआ था। साल 2018 में 5.59 करोड़ रुपए का आयात और 96.5 लाख रुपए का निर्यात हुआ था। नेपाल ने समझौते पर आपत्ति जताई थी लिपुलेख के साथ शिपकी ला और नाथु ला दर्रों से भी कारोबार बहाल करने का फैसला लिया गया था। हिमालय के तीन दर्रों से शुरू होने जा रहा भारत-चीन व्यापार पहली बार पूरी तरह सड़क के जरिए होगा। यहां मनी एक्सचेंज भी खुलेगा। हालांकि नेपाल ने इस समझौते पर आपत्ति जताई थी। उसका कहना है कि लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं। उसने भारत और चीन से इस इलाके में कोई एक्टिविटी न करने की अपील की है। केंद्र ने राज्य सरकार से व्यवस्था करने को कहा विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को लेटर लिखकर हिमालयी दर्रे के जरिए व्यापार बहाल करने का अनुरोध किया है। लेटर में बताया गया है कि गृह मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से भी मंजूरी मिल चुकी है। प्रशासन ने ट्रेड पास जारी करने, करेंसी एक्सचेंज के लिए बैंकों की व्यवस्था, कस्टम विभाग की तैनाती और धारचूला प्रशासन को विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें व्यापारियों के लिए ट्रांजिट कैंप, संचार, बैंकिंग, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाएं शामिल होंगी। व्यापारियों ने फैसले का स्वागत किया उत्तराखंड के पिथौरागढ़ सीमांत व्यापार संगठन के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकाली ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे व्यापारियों को 2019 से तकलाकोट (तिब्बत) के वेयरहाउस में रखे सामान को वापस लाने का अवसर मिलेगा।

उमा भारती का बड़ा बयान, राजनीति से कभी नहीं हटूंगी, लंबा जीने की है इच्छा

टीकमगढ़  मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम और  BJP का फायर ब्रांड नेता उमा भारती  Uma Bharti Statement  के एक नए बयान से प्रदेश की राजनीति में हलचल है। टीमकमढ़ में उमा भारती ने ये बड़ा बयान दिया है। उमा भारती ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि वो अभी राजनीति से संन्यास नहीं लेनी वाली है, जब तक वह जिंदा रहेंगी, तब तक राजनीति के मैदान में डटी रहेंगी। इस दौरान उन्होंने लोगों से साथ देने की भी अपील की।दरअसल  टीकमगढ़ में वीरांगना अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने ये बड़ी अपील करते हुए हुंकार भरी है। सेहत का जिक्र करते हुए उमा भारती काफी भावुक नजर आई Uma Bharti  उमा भारती ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक वह जिंदा रहेंगी, तब तक राजनीति के मैदान में रहेंगी, लोगों से भावुक अपील करते हुए भारती न अपने लंबे जीवन और संघर्ष के लिए आशीर्वाद मांगा. इस मौके पर अपनी सेहत का जिक्र करते हुए उमा भारती काफी भावुक नजर आईं हैं। उन्होंने कहा कि उनका बहुत लंबा जीने का मन है और इसके लिए उन्हें समाज और  लोगो के समर्थन की जरूरत है। जब मैं चल न पाऊं तो लोग उठाकर कुर्सी पर बैठा दिया करें-उमा उमा भारती ने कहा कि कभी ऐसा समय आए और उम्र के साथ ऐसी स्थिति आ जाए कि वह खुद चल न पाएं, तो लोग उन्हें उठाकर कुर्सी पर बैठा दिया करें, लेकिन वह काम करना बंद नहीं करेंगी। उमा भारती ने वाणी, आंख और कान की सलामती पर जोर दिया।  उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें दिखाई देगा, कानों से सुनाई देगा और बोलने योग्य रहेंगी तब तक वह जनता के हितों के लिए संघर्ष करती रहेंगी उमा बोलीं- जीवनभर राजनीति करना चाहती हैं भारती ने वीरांगना अवंती बाई लोधी के प्रति गहरी आस्था व्यक्त की. उन्होंने कहा कि वह वीरांगना के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए ही जीवनभर राजनीति करना चाहती हैं। पूर्व सीएम ने कहा कि उनकी सेहत ठीक नहीं रहती लेकिन जनता का प्यार और आशीर्वाद ही उन्हें लड़ने की ताकत देता है।

वृषभ, कर्क, कन्या राशि वालों की चमकेगी किस्मत—जल्द मिल सकता है जीवनसाथी!

जब भी कोई जन्म लेता है तो कहा जाता है कि वह ईश्वर के यहां से जन्म, विवाह और मृत्यु लिखवाकर लाता है, जिसे कोई टाल नहीं सकता है. हालांकि लोगों को यह नहीं पता होता है कि उनके जीवन में कब किस तरह की घटनाएं घटित होने वाली हैं, लेकिन वैदिक ज्योतिष ग्रह-नक्षत्रों की चालों से जरूर इशारा करता है कि किस समय क्या योग बन रहे हैं. इस बीच ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों की कुछ ऐसी चालें और बदलाव हो रहे हैं जो कुछ राशियों के लिए एक सकारात्मक वर्ष का संकेत दे रहे हैं. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि इनमें से कुछ लोग 2026 में शादी के बंधन में बंध सकते हैं या उनकी सगाई हो सकती है. ऐसा माना जा रहा है कि बृहस्पति के शुभ भावों में गोचर और शुक्र के कृपापूर्ण प्रभाव से कुछ राशियों के लोगों को उनका लाइफ पार्टनर मिल सकता है और वे शादी के बंधन में बंध सकते हैं. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि ग्रहों के ये बदलाव ‘साझेदारी के 7वें भाव’ के अनुकूल हो जाएंगे, जिससे बेहतर रिश्ते, विवाह के प्रस्ताव, सगाई और शादियों के योग बनेंगे. आइए जानते हैं कि इस साल कि राशि के लोगों के शादी में बंधने की संभावना ज्यादा है. वृषभ राशि वैदिक ज्योतिष के अनुसार, 2026 में भविष्यवाणी की गई है कि यह साल इस राशि में जन्मे लोगों के लिए अच्छा रहने वाला है. ऐसा माना जाता है कि वृषभ राशि के जातकों को जून तक शुक्र का प्रबल सहयोग और बृहस्पति की सातवें भाव पर दृष्टि का लाभ मिलेगा, जिससे परिवार की सहमति से विवाह के प्रस्ताव आने की संभावना बढ़ रही है. इस वर्ष विवाह या सगाई होने की संभावना 26-27 अप्रैल के आसपास शुभ मुहूर्तों के दौरान अपने चरम पर रहने वाली है. यह वर्ष भावनात्मक स्थिरता लेकर आएगा, जो रिश्तों की दीर्घकालिकता सुनिश्चित करती है. कर्क राशि ज्योतिष के मुताबिक, माना जाता है कि यह साल कर्क राशि वालों के लिए सकारात्मकता और बदलाव का साल होगा क्योंकि इस राशि में जन्मे लोगों पर ब्रह्मांड से कृपा बरसने वाली है. साल की शुरुआत से बृहस्पति के प्रभाव से कर्क राशि वाले अपने रिश्तों में ज्यादा तालमेल महसूस कर रहे हैं. यह समय भावनात्मक जुड़ाव और लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते बनाने के लिए बहुत अच्छा रहने वाला है. इस राशि के लिए शुभ समय 3 फरवरी से शुरू हुआ है और 19 जून के आस-पास तक रहने वाला है. इस समय परिवार के बड़े-बुजुर्ग बेहतर रिश्ते तय करवाने में अहम भूमिका निभाने वाले हैं. इन लोगों के लिए सगाई के बाद प्रेम-संबंधों में सफलता मिलने की संभावना है. कन्या राशि इस साल शुक्र के गोचर के कारण कन्या राशि वालों को अपने रिश्तों में आखिरकार स्पष्टता का अनुभव होने वाला है. माना जा रहा है कि 2 जून तक विवाह के लिए एक प्रबल योग बन रहा है. भविष्यवा की जा रही है कि इस राशि के लोगों की मुलाकात 26 जून या 3 दिसंबर जैसी तारीखों के आसपास अपने जीवनसाथी से हो सकती है, जिससे राहु के कारण होने वाली देरी से बचते हुए उनके विवाह का मार्ग प्रशस्त हो सकता है. हालांकि, आपसी तालमेल से उनके दीर्घकालिक रिश्ते और भी गहरे होंगे.

तमन्ना की पोल्का डॉट साड़ी में कमाल, ब्लाउज ने 70 के दशक के ग्लैमर को दिया नया अंदाज

मुंबई  रेट्रो ग्लैमर का अपना ही अलग अंदाज़ है और सबसे अच्छी बात? यह कभी फैशन से बाहर नहीं होता, बस वापसी के लिए सही समय का इंतज़ार करता है। और इस समय, तमन्ना भाटिया इस मौके का पूरा फायदा उठा रही हैं। तोरानी की डिज़ाइन की हुई शानदार साड़ी में, वह विंटेज ग्लैमर को पूरी तरह से अपना रही हैं, लेकिन एक नए और चंचल अंदाज़ के साथ। सबसे पहले, बोल्ड पोल्का डॉट्स आपका ध्यान खींचते हैं। साड़ी में सरसों पीला और गहरा गुलाबी जैसे विपरीत रंगों का मेल है। इस पर बड़े-बड़े काले डॉट्स की लेयरिंग की गई है जो बॉलीवुड प्रिंट्स और 70 के दशक के फैशन की याद दिलाती है। यह बोल्ड और बेबाक है – तमन्नाह के स्टाइल से पूरी तरह मेल खाती है। यह साड़ी पूरे लुक में सही मात्रा में नाटकीयता जोड़ रही है। इसे साफ-सुथरा और पारंपरिक रखने के बजाय, साड़ी स्वतंत्र रूप से लहरा रही है, और पल्लू को इस तरह स्टाइल किया गया है जो किसी फिल्म की याद दिलाता है।  अगर साड़ी पूरे लुक की शुरुआत कर रही है, तो ब्लाउज सबका ध्यान खींच लेता है। यह स्लीवलेस, बैकलेस ब्लाउज है जो पीछे की तरफ एक सुंदर बो में बंधा हुआ है। यह ब्लाउज नारीत्व से भरपूर, थोड़ा चंचल और रेट्रो स्टाइल के साथ पूरी तरह मेल खाता है। ब्लाउज में पोल्का डॉट पैटर्न भी खूबसूरती से झलकता है, जो पूरे लुक को एक साथ बांधता है। यही मेल इस आउटफिट को खास बनाता है। यह आउटफिट इतना आकर्षक है कि तमन्ना ने स्टाइलिंग को न्यूनतम रखा। उन्होंने आउटफिट को भारी गहनों से नहीं सजाया। इसके बजाय, उन्होंने नाजुक चूड़ियाँ, आकर्षक अंगूठियाँ और हल्के झुमके चुने। उनके बाल मुलायम, घनी लहरों में स्टाइल किए गए हैं, जो एक तरफ से पार्ट किए गए हैं – जिससे एक पुराने जमाने का आकर्षण झलक रहा है। इससे पहले, अभिनेत्री को एक बेहद स्टाइलिश लुक में देखा गया था जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया था। जी हां, यह सच है कि रेड कार्पेट आमतौर पर फ्लोर-लेंथ गाउन और सीक्वेंस से जुड़े होते हैं, लेकिन तमन्ना ने नाइकी x जैक्वेमस ला जुप लाउंज सेट पहनकर जलवा बिखेरा, जो बेहद ही शानदार लग रहा था। अभिनेत्री ने लाउंज सेट के साथ एक ट्रांसपेरेंट जैकेट पहनी, जिससे उनका ट्रेंड और भी बढ़ गया। उन्होंने एक स्टाइलिश सेलीन बैग भी चुना, जिससे उनके स्पोर्टी लुक में लग्जरी का सही स्पर्श जुड़ गया। स्टेटमेंट डायमंड नेकलेस, कई डायमंड रिंग्स, एक स्टाइलिश घड़ी और खूबसूरत ईयररिंग्स के साथ, तमन्नाह बेहद आकर्षक लग रही थीं। उनका लुक मॉडर्न, बोल्ड और बेहद फ्रेश था।

जीवन की मुश्किलों में राह दिखाएंगी चाणक्य नीति: ऋण, शत्रु और रोग पर 10 जरूरी सूत्र

लाइफ में सक्सेज के साथ जीना बहुत ही मुश्किल होता है। कई बार हमें असफलता, निराशा और लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता है। कुछ मौके ऐसे आते हैं जब लोग बिना अपने विवेक का इस्तेमाल किए बड़ी मुसीबत में फंस जाते हैं। उन सारी समस्याओं से निकलने के लिए बड़ों की बातों पर अमल करना जरूरी है। जैसे चाणक्य नीति में कही गई ये 10 बातें, जो आपको लाइफ में केवल सक्सेज नहीं देंगी बल्कि दुश्मनों से बचने और सही-गलत के पहचान का फर्क भी सिखाएगी। ऋण, शत्रु और रोग को समाप्त कर देना चाहिए चाणक्य नीति की ये बात बहुत ही काम की है। अगर जीवन में सफलता और सुकून चाहिए तो कर्ज नहीं रखना चाहिए। शरीर के रोग को जड़ से खत्म करने का प्रयास करना चाहिए। नहीं तो ये बड़े दुख देते हैं। वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है इसका मतलब है कि अगर आप गलत और नीच प्रवृत्ति का इंसान किसी का भी बुरा कर सकता है। जैसे जंगल की आग चंदन की लकड़ी को भी नहीं छोड़ती। आपातकाल में स्नेह करने वाला ही मित्र होता है मुसीबत के समय जो आपके साथ बना रहे वहीं सच्चा दोस्त होता है। ऐसे इंसान की परख जरूर करनी चाहिए। जो धैर्यवान नहीं है, उसका न वर्तमान है न भविष्य इंसान को धैर्य रखना जरूर आना चाहिए। तभी आप लाइफ में सक्सेजफुल बनेंगे। एक बिगड़ैल गाय सौ कुत्तों से ज्यादा श्रेष्ठ है कहने का मतलब है कि सौ चापलूसी करने वाले लोगों से भला एक विपरीत स्वभाव का हितैषी है। कल के मोर से आज का कबूतर भला चाणक्य की नीति उन लोगों के लिए है जो कल के बेहतर में अपने आज को गंवा देते हैं। मतलब संतोष सबसे बड़ा धन है। आज जो भी है उसमे संतोष करना सीखें। कल क्या होगा इसके चक्कर में आज के पल को खराब ना करें। आग सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है। चाणक्य की ये नीति सिखाती है कि आप दुष्ट इंसान को कितना भी सम्मान देंगे वो आपका अहित ही करेगा। जैसे आग को सिर पर रखने पर भी वो जलाने का काम ही करेगी। भूख के समान कोई दूसरा शत्रु नहीं है चाणक्य नीति की इस लाइन का मतलब है कि भूख से बेबस होकर इंसान बड़े से बड़ा पाप कर सकता है। भूखा इंसान खुद का और दूसरों का सबसे बड़ा दुश्मन हो सकता है। विद्या ही निर्धन का धन है अगर आप गरीब हैं और पैसे कमाना चाहते हैं तो आपकी जानकारी और ज्ञान ही इस काम में सबसे ज्यादा मदद करेगी। इसलिए खुद को काबिल बनाने के लिए पढ़ना जरूरी है। संकट में बुद्धि ही काम आती है चाणक्य नीति में लिखी ये बात सिखाती है कि मुसीबत के समय सबसे पहले अपनी बुद्धि और विवेक पर भरोसा करें। बुद्धि की मदद से ही आप मुसीबत से बाहर निकल सकते हैं।  

अब ई-चालान भरना होगा और सरल, 1 अप्रैल से OTC सुविधा लागू, बैंक से सीधे जुड़ेगा सिस्टम

राजनांदगांव. जिला कोषालय अधिकारी से प्राप्त जानकारी अनुसार भौतिक चालानों की व्यवस्था समाप्त कर अब ई-चालान को बढ़ावा देने के लिए ओटीसी सुविधा 1 अप्रैल 2026 से लागू की जाएगी. नई व्यवस्था के तहत सभी चालान अब केवल ऑनलाईन माध्यम से जमा के किए जाएंगे. इस संबंध में जिले सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को चालान जमाकर्ताओं को ई-चालान प्रक्रिया से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं. ओटीसी सुविधा अंतर्गत ई-चालान पोर्टल पर चालान भरते समय उसका डेटा सीधे बैंक को ऑनलाईन ट्रांसफर हो जाएगा, जिससे बैंक स्तर पर दोबारा डेटा प्रविष्टि की आवश्यकता नहीं रहेगी. बैंक काउंटर पर केवल ऑनलाईन जनरेटेड चालान, जिसमें ट्रेजरी रेफरेंस नंबर दर्ज होगा. इसके माध्यम से राशि जमा की जाएगी. एमआईएस के माध्यम से कोषालय में इसके बाद बैंक द्वारा यह जानकारी ऑनलाईन प्रस्तुत की जाएगी. इस नई व्यवस्था से डेटा प्रविष्टि में होने वाली त्रुटियों में कमी जाएगी और लेखांकन प्रक्रिया अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनेगी. ई-चालान पोर्टल के सर्च प्लान विकल्प के माध्यम से जमाकर्ता आसानी से चालान का प्रिंट निकाल सकेंगे. यह पहले भौतिक चालान में संभव नहीं था .

प्रदेश के 42 जिलों में ओलावृष्टि और बारिश से फसलें बर्बाद, 14 जिलों में आज भी खतरे का अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने अचानक ऐसा करवट ली है कि हालात चिंताजनक बन गए हैं। India Meteorological Department (IMD) के अनुसार पिछले 72 घंटों से सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के कारण पूरे प्रदेश में बेमौसम बारिश, तेज़ आंधी और ओलावृष्टि का दौर जारी है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर समेत 42 जिलों में इसका असर साफ देखने को मिला है। शुक्रवार को कई शहरों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में पारा अचानक 23.9°C तक पहुंच गया, जो एक ही दिन में 10.6 डिग्री की गिरावट दर्शाता है। मौसम में इस बदलाव ने गर्मी से राहत तो दी, लेकिन नुकसान कहीं ज्यादा हुआ। सबसे ज्यादा मार किसानों पर पड़ी है। ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने गेहूं, केला, पपीता और संतरे जैसी तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में खेत पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। तेज आंधी ने बढ़ाई तबाही बारिश के साथ चली तेज आंधी ने हालात और खराब कर दिए। आगर-मालवा में 74 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं, जबकि सीहोर में 54 किमी और नरसिंहपुर में 46 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार दर्ज की गई। तेज हवाओं के कारण फसलें टूटकर गिर गईं और खेतों में पानी भर गया। धार और खरगोन में सबसे ज्यादा नुकसान धार जिले के मनावर क्षेत्र में तेज आंधी-बारिश से केले और पपीते की फसल पूरी तरह तबाह हो गई। एक किसान के करीब 2 हजार केले के पेड़ गिर गए, जिससे लाखों रुपए का नुकसान हुआ। वहीं खरगोन में तेज हवा से मक्का की फसल चौपट हो गई। किसानों का कहना है कि फसल तैयार थी, लेकिन मौसम ने पूरी मेहनत बर्बाद कर दी।  रायसेन में हाईवे पर बर्फ जैसी चादर रायसेन जिले में ओलावृष्टि इतनी तेज हुई कि नेशनल हाईवे पर बर्फ जैसी सफेद परत जम गई। सड़क पर जमी ओलों की चादर ने लोगों को हैरान कर दिया। हालांकि यह नजारा देखने लायक था, लेकिन किसानों के लिए यह भारी नुकसान का संकेत बन गया। तापमान में गिरावट, ठंड का अहसास बारिश और ठंडी हवाओं के चलते प्रदेश के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। पचमढ़ी 12.6 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा रहा। वहीं इंदौर में 15 डिग्री और भोपाल में 16.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। कई जिलों में न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री तक की कमी आई है।  किसानों पर संकट, मुआवजे की मांग तेज बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। खड़ी और कटी दोनों फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ गया है। कई किसान कर्ज में डूबने की आशंका जता रहे हैं और सरकार से जल्द मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।  आगे भी ऐसा ही रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों तक प्रदेश में आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रह सकता है। इससे जहां लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं किसानों की चिंता अभी कम होती नजर नहीं आ रही है। IMD ने शनिवार को 14 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसमें टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर जैसे जिले शामिल हैं, जहां तेज़ आंधी और बारिश का खतरा बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह सिस्टम अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और 22 मार्च (रविवार) से प्रदेश में मौसम साफ होने की संभावना है। तब तक लोगों को सतर्क रहने और किसानों को अपनी बची फसल को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के 40 से ज्यादा जिलों में करीब 70 स्थानों पर बारिश दर्ज की गई है, जबकि 11 जिलों में ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। अचानक बदले इस मौसम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रकृति के आगे सभी तैयारियां छोटी पड़ जाती हैं।

9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने इंफ्रास्ट्रक्चर में किया ऐतिहासिक विकास, एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी तक

नव निर्माण के 9 वर्ष: इंफ्रास्ट्रक्चर 9 साल में बदला उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर का चेहरा, एक्सप्रेसवे से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी तक ऐतिहासिक छलांग 2017 में सीमित संसाधनों से आज देश का लॉजिस्टिक्स हब बनने की ओर अग्रसर यूपी एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, जलमार्ग और औद्योगिक कॉरिडोर से विकास को नई रफ्तार निवेश, निर्यात और रोजगार के नए अवसरों के साथ भविष्य की मजबूत आधारशिला लखनऊ  वर्ष 2017 से पहले सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी चुनौतियों से जूझता उत्तर प्रदेश, बीते 9 वर्षों में तेजी से बदलकर आज देश के उभरते लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, जलमार्ग और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के व्यापक विस्तार ने न केवल विकास की रफ्तार को नई दिशा दी है, बल्कि निवेश, निर्यात और रोजगार के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व संभावनाओं के द्वार खोले हैं। आने वाले वर्षों में यही बुनियादी ढांचा प्रदेश को देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख इंजन बनाने की आधारशिला साबित होगा। 2017 से पहले की स्थिति वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास सीमित दायरे में था। प्रदेश में केवल 2 एक्सप्रेसवे संचालित थे और कनेक्टिविटी का दायरा अपेक्षाकृत कमजोर था। औद्योगिक विकास के लिए बड़े स्तर पर योजनाबद्ध भूमि चिह्नांकन और कॉरिडोर आधारित विकास की गति धीमी थी। लॉजिस्टिक्स लागत अधिक होने और परिवहन में समय लगने के कारण उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी प्रभावित होती थी। एविएशन सेक्टर में भी सीमित विस्तार था और प्रदेश का उपयोग बड़े निवेश गंतव्य के रूप में अपेक्षाकृत कम होता था। जलमार्ग और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी की दिशा में भी कोई बड़ा प्रभावी ढांचा विकसित नहीं हुआ था। 9 वर्षों में बदली तस्वीर पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। जहां 2017 में केवल 2 एक्सप्रेसवे थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 22 तक पहुंच गई है। इनमें 7 संचालित, 5 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित एक्सप्रेसवे शामिल हैं। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अब उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। इन एक्सप्रेसवे के किनारे 26 जनपदों के 27 स्थानों पर लगभग 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित की गई है। साथ ही बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) का गठन कर 47 वर्षों बाद एक नए औद्योगिक शहर की नींव रखी गई है, जिससे 56,662 एकड़ क्षेत्र में बहुआयामी विकास को गति मिली है। निर्यात के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार किया है। ‘एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 2024’ में उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि 2022 में यह सातवें स्थान पर था। लैंडलॉक्ड राज्यों में प्रदेश का प्रथम स्थान इसकी नीतिगत मजबूती को दर्शाता है। लॉजिस्टिक्स सेक्टर में सुधार के चलते परिवहन समय में कमी आई है और लागत घटी है, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है और निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। जल, थल और नभ तीनों क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया गया है। वाराणसी में देश का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल स्थापित किया गया है, जबकि रामनगर, चंदौली, मीरजापुर और गाजीपुर में टर्मिनल और फ्रेट विलेज विकसित किए जा रहे हैं। सड़क निर्माण में तेजी लाते हुए औसतन 19 किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से सड़कों का निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। एविएशन सेक्टर में भी बड़ा विस्तार हुआ है। वर्तमान में 16 हवाई अड्डे संचालित हैं, जिनमें 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं, जबकि 8 हवाई अड्डे प्रक्रियाधीन हैं। भविष्य का विजन आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद प्रदेश देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे होंगे, जिससे वैश्विक कनेक्टिविटी और निवेश को नई दिशा मिलेगी। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के विस्तार, एक्सप्रेसवे नेटवर्क के और सुदृढ़ीकरण तथा औद्योगिक कॉरिडोर के विकास से प्रदेश में लॉजिस्टिक्स लागत और कम होगी तथा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। निर्यात उन्मुख नीतियों, निवेश अनुकूल वातावरण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल देश का प्रमुख निवेश केंद्र बनेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी गति देगा।

गोवा बोर्ड HSSC रिजल्ट आज gbshse.in पर लाइव, यहां देखें और डाउनलोड करें मार्कशीट

गोवा माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GBSHSE) आज यानी 21 मार्च 2026 को कक्षा 12वीं (HSSC) का रिजल्ट जारी करने जा रहा है। परीक्षा में शामिल हुए हजारों छात्रों का लंबा इंतजार अब खत्म होने वाला है। बोर्ड के अध्यक्ष आज शाम 5 बजे पोरवोरिम स्थित बोर्ड मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नतीजों की आधिकारिक घोषणा करेंगे। गोवा HSSC रिजल्ट जारी होने के तुरंत बाद छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट gbshse.in और results.gbshsegoa.net पर जाकर अपना डिजिटल स्कोरकार्ड देख और डाउनलोड कर सकेंगे। गोवा बोर्ड कक्षा 12वीं रिजल्ट 2026 की जांच के लिए स्टूडेंट को सीट नंबर, स्कूल इंडेक्स और रजिस्टर्ड आईडी का इस्तेमाल करना होगा। परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां इस साल गोवा बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं 10 फरवरी से 27 फरवरी 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। जनरल स्ट्रीम (आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस) की परीक्षाएं 10 फरवरी से 27 फरवरी तक आयोजित की गई थीं। वोकेशनल स्ट्रीम की परीक्षाएं 11 फरवरी से 23 फरवरी तक आयोजित की गई थीं। प्रैक्टिकल परीक्षाएं जनवरी 2026 में संपन्न हुई थीं। इस वर्ष कुल 17,283 छात्र परीक्षा में बैठे थे, जिनमें 9,080 लड़कियां और 8,203 लड़के शामिल हैं। गोवा बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2026 कैसे चेक करें? (स्टेप-बाय-स्टेप) जैसे ही शाम 5 बजे लिंक एक्टिव होगा, छात्र इन स्टेप्स को फॉलो कर अपना बोर्ड रिजल्ट देख सकते हैं:     गोवा बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट gbshse.in पर जाएं। 2. होमपेज पर ‘Goa Board HSSC Result 2026’ के लिंक पर क्लिक करें। 3. अब अपना सीट नंबर, स्कूल इंडेक्स नंबर और जन्म तिथि दर्ज करें। 4. डिटेल्स भरने के बाद ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें। 5. आपका स्कोरकार्ड स्क्रीन पर आ जाएगा। इसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंटआउट ले लें। मार्कशीट और अन्य विकल्प छात्रों को ध्यान देना चाहिए कि ऑनलाइन उपलब्ध स्कोरकार्ड प्रोविजनल होगा। ओरिजनल मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट स्कूलों के माध्यम से बाद में वितरित किए जाएंगे। बोर्ड के अनुसार, स्कूलों को 25 मार्च 2026 से अपने लॉगिन पोर्टल के माध्यम से ‘कंसोलिडेटेड रिजल्ट शीट’ मिलनी शुरू हो जाएगी। वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक होने की स्थिति में छात्र SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं। अपने मोबाइल पर GOA12<स्पेस>SEAT NUMBER टाइप करें और इसे 56263 पर भेज दें। पासिंग क्राइटेरिया और ग्रेडिंग सिस्टम गोवा बोर्ड में सफल होने के लिए छात्रों को प्रत्येक विषय में कम से कम 33% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। बोर्ड ने इस बार भी 7-पॉइंट ग्रेडिंग सिस्टम अपनाया है, जिसमें 90% से अधिक अंक पाने वालों को ‘A’ ग्रेड दिया जाएगा। पिछले साल यानी 2025 में कुल पास प्रतिशत 90.64% रहा था, जिसमें लड़कियों ने बाजी मारी थी।

किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम

योगी सरकार की ‘नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना’ से डेयरी सेक्टर में आ रही नई क्रांति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से बैंक ऋण व अनुदान वितरण में आई तेजी किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम लखनऊ योगी सरकार की ‘नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना’ उत्तर प्रदेश में डेयरी सेक्टर के सशक्तीकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल बनकर उभर रही है। किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से चलाई जा रही इस योजना के तहत राज्य सरकार ने तीन वर्षों में 204 डेयरी इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य तय किया है। योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए बैंक ऋण स्वीकृति और अनुदान वितरण की प्रक्रिया की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे डेयरी नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। इस दौरान पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में 10 मंडल मुख्यालय जनपदों में 50 इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें बैंक ऋण स्वीकृति के केवल 2 मामले (मेरठ व लखनऊ) विचाराधीन हैं। वहीं, प्रथम किश्त के 12 मामलों (लखनऊ, कानपुर नगर, गोरखपुर, प्रयागराज, अयोध्या व बरेली) और द्वितीय किश्त के 35 मामलों (आगरा, लखनऊ, कानपुर नगर, झांसी, गोरखपुर, अयोध्या, वाराणसी, मेरठ व बरेली) में अनुदान वितरण प्रक्रियाधीन है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना के तहत 8 मंडल मुख्यालय जनपदों में 40 इकाइयों का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 18 बैंक ऋण स्वीकृति के मामले मिर्जापुर, बस्ती, आजमगढ़, गोंडा, बांदा, सहारनपुर और अलीगढ़ जैसे जनपदों में तेजी से प्रक्रिया में हैं। साथ ही 32 लाभार्थियों को प्रथम किश्त का अनुदान तय प्रक्रिया के तहत जल्द अवमुक्त किया जाएगा, जिनमें अलीगढ़, बांदा, आजमगढ़, गोंडा, बस्ती, सहारनपुर और मुरादाबाद प्रमुख हैं।   वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना का दायरा और बढ़ाते हुए 57 जनपदों में 114 इकाइयों (प्रति जनपद 2 इकाई) का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें जौनपुर, ललितपुर, जालौन, सम्भल, देवरिया और रामपुर जैसे जनपदों में ऋण स्वीकृति शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुकी है। इसके अलावा सभी 57 जनपदों में 114 लाभार्थियों को प्रथम किश्त का अनुदान अवमुक्त करने की प्रक्रिया तेजी से जारी है।    राज्य सरकार ने सभी प्रक्रियागत मामलों के शीघ्र निस्तारण और अनुदान वितरण में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, ताकि योजना का लाभ समयबद्ध तरीके से किसानों तक पहुंचे। ‘नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना’ के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल डेयरी सेक्टर को नई दिशा दे रहा है, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम भी उठा रहा है।

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